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	<title>टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>शेल्टर होम स्कैंडलः ‘घिनौना काम’ से बचने के लिए हाथ-पैर काट लेती थीं लड़कियां</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Aug 2018 12:03:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित शेल्टर होम स्कैंडल मामले में जैसे-जैसे पीड़ित लड़कियों के बयान आ रहे हैं, इस मामले की संवेदनशीलता बढ़ती ही जा रही है. शेल्टर होम में रहने वाली 7 से 18 साल की पीड़ित लड़कियों ने पुलिस को जो आपबीती बताई है, उसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. पीड़ित लड़कियों ... <a title="शेल्टर होम स्कैंडलः ‘घिनौना काम’ से बचने के लिए हाथ-पैर काट लेती थीं लड़कियां" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/shelter-home-scandal-the-girls-used-to-cut-hands-and-feet-to-avoid-shocking-work-news/" aria-label="Read more about शेल्टर होम स्कैंडलः ‘घिनौना काम’ से बचने के लिए हाथ-पैर काट लेती थीं लड़कियां">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुजफ्फरपुर।</strong> बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित शेल्टर होम स्कैंडल मामले में जैसे-जैसे पीड़ित लड़कियों के बयान आ रहे हैं, इस मामले की संवेदनशीलता बढ़ती ही जा रही है. शेल्टर होम में रहने वाली 7 से 18 साल की पीड़ित लड़कियों ने पुलिस को जो आपबीती बताई है, उसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. पीड़ित लड़कियों ने बताया कि शेल्टर होम में ‘गंदा काम’ कराने के लिए उन्हें खाने में मिलाकर नशीली दवाएं दी जाती थीं. मारा-पीटा जाता था. शेल्टर होम के संचालकों की वहशियाना करतूतों की कहानी यहीं नहीं थमती है. पीड़ितों ने बताया कि शेल्टर होम की ‘आंटी’ के कहने पर उन्हें ब्रजेश ठाकुर के कमरे में जबर्दस्ती भेजा जाता था.</p>
<p><strong>लड़कियां कांच के टूटे टुकड़ों से काट लेती थीं. अपने हाथ-पैर</strong></p>
<p>न जाने पर मार-पीट की जाती थी. लड़कियों ने पुलिस को दिए गए बयान में कहा है कि ‘गंदा काम’ न करना पड़े, इसके लिए कई लड़कियां कांच के टूटे टुकड़ों से अपने हाथ-पैर काट लेती थीं. बता दें कि मुजफ्फरपुर के सरकारी बालिका गृह में बच्चियों से उत्पीड़न मामले की जांच का जिम्मा रविवार को सीबीआई को सौंप दिया गया. जांच एजेंसी ने शेल्टर होम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. वहीं, आरोपी ब्रजेश ठाकुर को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है.</p>
<p><strong>कीड़े की दवाई कहकर खिलाते थे नशीला पदार्थ</strong><br />
मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) द्वारा इसी साल अप्रैल में कराए गए सोशल ऑडिट के बाद मुजफ्फरपुर में सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा संचालित बालिका गृह के इस मामले का खुलासा हुआ था. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार,</p>
<p>शेल्टर होम में रहने वाली ज्यादातर लड़कियां अनाथ हैं. इन्हें कीड़े की दवा के नाम पर नशीला पदार्थ खिलाकर इनके साथ दुष्कर्म किया जाता था. पीड़ित लड़कियों में से एक 10 वर्षीय बच्ची ने पुलिस को बताया, ‘आंटी अक्सर रात में सोने से पहले कीड़े की दवाई खिलाती थी. दवा खाने के बाद मुझे नींद आने लगती थी. सुबह जब मैं सोकर उठती थी तो मेरे बदन में दर्द रहता था. पेट पर लात मारकर हम लोगों को जगाया जाता था.’</p>
<p><strong>दवा न खाने पर यौन हिंसा की शिकार होती थीं लड़कियां</strong><br />
शेल्टर होम की पीड़ित लड़कियों के किस्से, सभ्य समाज के नाम पर धब्बा हैं. मुजफ्फपुर की एसपी हरप्रीत कौर ने बताया कि अब तक 34 लड़कियों के साथ दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि हुई है. एक अख़बार में छपी खबर के अनुसार, घरेलू काम-काज करने वाली पीड़ित लड़की ने कोर्ट में दिए गए अपने बयान में कहा कि आरोपी ब्रजेश ठाकुर के ऑफिस में एक बड़े पेट वाला आदमी उसे नशीली दवा खिलाता था.</p>
<p>दवा खाने से इनकार करने पर पीड़िता के साथ मार-पीट की जाती थी. पीड़ित लड़की ने बताया, ‘वह बहुत बुरे तरीके से नोचता-खसोटता था. उसके नोचने से मेरे शरीर पर निशान पड़ जाते थे.’ पीड़ित लड़कियों ने ‘गंदा काम’ करने से इनकार की बात पर उन पर गर्म पानी फेंकने या गर्म तेल से जलाने जैसी घटनाओं के बारे में भी बताया. पीड़िताओं ने कहा कि ‘गंदा काम’ से बचने के लिए कई लड़कियां अपने शरीर को कांच के टुकड़ों से काट लेती थीं.</p>
<p><strong>ब्रजेश के डर से पड़ोसियों ने भी नहीं उठाई आवाज</strong><br />
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों के साथ मार-पीट खुलेआम की जाती थी. इन लड़कियों को किसी भी समय मारा-पीटा जाता था. दर्द से चीखती-कराहती लड़कियों की आवाज बगल के पड़ोसियों को भी सुनाई देती थी, लेकिन किसी ने भी इस अत्याचार के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई. शेल्टर होम के पास रहने वाली एक महिला ने एक अख़बार को बताया, ‘</p>
<p>शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियां कभी भी छत पर या इसके आसपास नहीं दिखती थीं. ये लड़कियां जिन कमरों में रहती थीं, उनमें खिड़कियां नहीं हैं. हम लोग अक्सर उनके रोने, चिल्लाने और कराहने की आवाज सुनते थे, लेकिन ब्रजेश ठाकुर जैसे दबंग को देखते हुए कभी उसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर सके.’ एक अन्य स्थानीय महिला ने कहा कि लड़कियों के रोने या कराहने की आवाज काफी भयानक होती थी.</p>
<p><strong>शेल्टर होम स्कैंडल से गरमाई बिहार की राजनीति</strong><br />
गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर में बालिका गृह चलाने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेवा संकल्प एवं विकास समिति को कालीसूची में डाल दिया गया है. वहीं, यहां रहने वाली लड़कियों को पटना एवं मधुबनी के बालिका गृहों में भेज दिया गया है. पुलिस ने मामले में बालिका गृह की महिला कर्मचारियों और एनजीओ चलाने वाले ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है. मामले को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमाई हुई है.</p>
<p>सत्तारूढ़ जदयू और भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्षी दल राजद के नेता तेजस्वी यादव लगातार इस मामले को लेकर सोशल नेटवर्किंग साइट टि्वटर पर हमले कर रहे हैं. कल यानी रविवार को भी तेजस्वी यादव ने एक ट्वीट के जरिए शेल्टर होम मामले के आरोपी ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ को मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत एक और अल्पावास का टेंडर देने पर सवाल उठाया. वहीं, एक अन्य ट्वीट में उन्होंने राजद समर्थकों से दिल्ली स्थित बिहार भवन में मामले को लेकर प्रदर्शन करने की अपील की.</p>
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