<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>धर्म समाचार &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
	<atom:link href="https://dainikbhaskarup.com/tag/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dainikbhaskarup.com</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Tue, 14 Jan 2025 06:18:16 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0</generator>

<image>
	<url>https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/dainik-bhaskar-icon.png</url>
	<title>धर्म समाचार &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
	<link>https://dainikbhaskarup.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मकर संक्रांति पर क्यों होते हैें सूर्य उत्तरायण?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/why-does-surya-uttarayan-occur-on-makar-sankranti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jan 2025 06:18:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[DAINIK BHASKAR]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[uttar pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[uttar pradesh news]]></category>
		<category><![CDATA[खरमास कब से खत्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मकर संक्रांति]]></category>
		<category><![CDATA[सूर्य उत्तरायण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dainikbhaskarup.com/?p=480011</guid>

					<description><![CDATA[मकर संक्रांति फसल के मौसम की शुरुआत और सूर्य के मकर राशि में गोचर का प्रतीक है। इस दिन से सूर्य उत्‍तरायण हो जाते हैं और सर्दी घटना आरंभ हो जाती है। मकर संक्रांति के बाद दिन बड़े होने लगते हैं और उत्तरायण की यह अवधि लगभग छह महीने तक रहती है। यह संक्रांति साल ... <a title="मकर संक्रांति पर क्यों होते हैें सूर्य उत्तरायण?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/why-does-surya-uttarayan-occur-on-makar-sankranti/" aria-label="Read more about मकर संक्रांति पर क्यों होते हैें सूर्य उत्तरायण?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1200" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-14-at-11.40.22-AM.jpeg" alt="" class="wp-image-480012" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-14-at-11.40.22-AM.jpeg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-14-at-11.40.22-AM-300x225.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-14-at-11.40.22-AM-768x576.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-14-at-11.40.22-AM-150x113.jpeg 150w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मकर संक्रांति फसल के मौसम की शुरुआत और सूर्य के मकर राशि में गोचर का प्रतीक है। इस दिन से सूर्य उत्&#x200d;तरायण हो जाते हैं और सर्दी घटना आरंभ हो जाती है। मकर संक्रांति के बाद दिन बड़े होने लगते हैं और उत्तरायण की यह अवधि लगभग छह महीने तक रहती है। यह संक्रांति साल में पड़ने वाली सभी 12 संक्रांतियों में से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। मकर संक्रांति को हिंदू धर्म में दान पुण्&#x200d;य के कार्य के लिए सबसे महत्&#x200d;वपूर्ण तिथि माना जाता है। इस दिन दान करने का महत्&#x200d;व धर्म शास्&#x200d;त्रों में सबसे खास माना गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही है। इस दिन खरमास समाप्&#x200d;त हो जाता है और सभी शुभ कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। इस दिन सूर्य राशि परिवर्तन करके पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह दिन स्&#x200d;नान और दान पुण्&#x200d;य के कार्य के लिए सबसे शुभ माना जाता है। आइए जानते मकर संक्रांति पर स्&#x200d;नान और दान का मूहूर्त कब से कब तक है। साथ ही जानते हैं इस दिन दान पुण्&#x200d;य करने का क्&#x200d;या महत्&#x200d;व है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शुभ मुर्हूत में स्नान दानसूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय सुबह 8 बजकर 55 मिनट है। इस समय को मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस समय स्नान और दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पुण्यकाल सुबह 8 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, जिसमें स्नान-दान कर सकते हैं। महापुण्य काल सुबह 8 बजकर 55 मिनट से 9 बजकर 29 मिनट तक का है। इस दौरान अमृत काल भी है, जो इसे और भी शुभ बनाता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। यह समय भी पूजा-पाठ और ध्यान के लिए उत्तम माना जाता है। अमृत काल सुबह 7 बजकर 55 मिनट से 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दान का बड़ी महत्तामकर संक्रांति पर स्&#x200d;नान और दान का महत्&#x200d;व मकर संक्रांति पर दान का बड़ा महत्व है। इस दिन कंबल, गर्म कपड़े, दरी, जूते, टोपी, तिल, गुड़, खिचड़ी और घी जैसी चीज़ें दान करने से पुण्य मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दान से आपके वर्तमान और भविष्य दोनों अच्छे होते हैं। यह दान 10 अश्वमेघ यज्ञ और 1000 गायों के दान के बराबर फल देता है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में सफलता और सुख-शांति मिलती है। साथ ही, कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों का शुभ प्रभाव भी बढ़ता है। यह दान कितना महत्वपूर्ण है। इससे न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि जीवन में सफलता और खुशहाली भी आती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गीता महोत्सव: महात्मा गांधी से लेकर बाल गंगाधर तिलक पर &#8216;श्रीमद्भगवद् गीता&#8217; का था विशेष प्रभाव</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/geeta-mahotsav-shrimad-bhagavad-geeta-special-influence-on-mahatma-gandhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Dec 2024 10:24:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[11 दिसंबर गीता मोहत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[DAINIK BHASKAR]]></category>
		<category><![CDATA[Geeta Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[Shrimad Bhagavad Geeta]]></category>
		<category><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[गीता महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म समाचार]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dainikbhaskarup.com/?p=474896</guid>

					<description><![CDATA[आज 11 दिसंबर को हर साल वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाता है। भारत के महात्माओं से लेकर विदेशियों तक श्रीमद्भगवद् गीता का विशेष प्रभाव रहा है। अवनीश सोमकुवर ने बताया कि श्रीमद्भगवद गीता अनूठा आध्यात्मिक मार्गदर्शी ग्रंथ है। भगवद् गीता का प्रभाव पूरी दुनिया में फैल चुका है। भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य ... <a title="गीता महोत्सव: महात्मा गांधी से लेकर बाल गंगाधर तिलक पर &#8216;श्रीमद्भगवद् गीता&#8217; का था विशेष प्रभाव" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/geeta-mahotsav-shrimad-bhagavad-geeta-special-influence-on-mahatma-gandhi/" aria-label="Read more about गीता महोत्सव: महात्मा गांधी से लेकर बाल गंगाधर तिलक पर &#8216;श्रीमद्भगवद् गीता&#8217; का था विशेष प्रभाव">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="720" height="524" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-10-at-3.51.17-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-474897" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-10-at-3.51.17-PM.jpeg 720w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-10-at-3.51.17-PM-300x218.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-10-at-3.51.17-PM-150x109.jpeg 150w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">आज 11 दिसंबर को हर साल वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाता है। भारत के महात्माओं से लेकर विदेशियों तक श्रीमद्भगवद् गीता का विशेष प्रभाव रहा है। अवनीश सोमकुवर ने बताया कि श्रीमद्भगवद गीता अनूठा आध्यात्मिक मार्गदर्शी ग्रंथ है। भगवद् गीता का प्रभाव पूरी दुनिया में फैल चुका है। भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य वचनों में सम्पूर्ण जीवन की व्याख्या है। संसार की समस्याओं और मनुष्य की व्यथाओं का समाधान है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">“गीता” की महिमा का शाब्दिक वर्णन करना कठिन काम है। पाठकों के सुलभ संदर्भ के लिए श्रीमद्भगवद् गीता पर विश्व के महापुरुषों, महान वैज्ञानिकों, विद्वतजनों और दार्शनिकों के विचारों का संकलन प्रस्तुत किया गया है। महामना पं. मदनमोहन मालवीय  ने कहा, “भगवान श्रीकृष्ण की कही हुई श्रीमद् भगवद् गीता के समान छोटे वपु (काया, शरीर) में इतना विपुल ज्ञानपूर्ण कोई दूसरा ग्रंथ नहीं है।’’</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<h3 class="wp-block-heading">महात्मा गांधी ने भी गीता पर कहा था, “जब कभी संदेह मुझे घेरते हैं और मेरे चेहरे पर निराशा छाने लगती है; मैं क्षितिज पर गीता रूपी एक ही उम्मीद की किरण देखता हूं। इसमें मुझे अवश्य ही एक छन्द मिल जाता है, जो मुझे सांत्वना देता है। तब मैं कष्टों के बीच मुस्कुराने लगता हूँ।’’</h3>
</blockquote>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<h3 class="wp-block-heading">लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने कहा था, “गीता हमारे ग्रंथों में अत्यन्त तेजस्वी और निर्मल हीरा है।’’</h3>
</blockquote>



<p class="wp-block-paragraph">मशहूर जर्मन कवि, उपन्यासकार और पेंटर हरमन हेस के जीवन पर भी गीता का विशेष प्रभाव था। उनकी कालजयी रचना &#8216;सिद्धार्थ&#8217; में यह स्पष्ट होता है। उनका कहना था &#8216;गीता की सबसे अच्छी विशेषता यह है कि यह जीवन के सही मायनों को पूरी वास्तविकता के साथ सामने रखती है।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्नीसवीं सदी के मशहूर दर्शनशास्त्री और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अल्बर्ट श्विट्ज़र मानते थे &#8211; &#8216;श्रीमद भगवद् गीता मनुष्य के जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है। यह कर्मों के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति का संदेश देती है।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्विस मनोवैज्ञानिक कार्ल जुंग को विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान के लिए जाना जाता है। वे न सिर्फ मनोविज्ञान बल्कि दर्शन, साहित्य और धार्मिक अध्ययन में भी विशेषज्ञता रखते थे। उनका मानना था कि “मनुष्य को उल्टे वृक्ष के रूप में प्रदर्शन की अवधारणा बहुत पहले से ही मौजूद थी, जिसे बाद में सामने लाया गया। अपने वक्तव्यों में कही गई प्लेटो की वह बात कि “मनुष्य सांसारिक नहीं बल्कि स्वर्गीय पौधा है, जो ब्रह्माण्ड से सिंचित होता है। यह वैदिक अवधारणा है और गीता के 15वें अध्याय में इसे स्पष्ट तौर पर कहा गया है।“</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्नीसवीं सदी के ही मशहूर अंग्रेजी साहित्यकार आल्डस हक्सले ने कहा था – “मनुष्य में मानव मूल्यों की समझ पैदा करने के लिए गीता सर्वाधिक व्यवस्थित ग्रंथ है। शाश्वत दर्शन के विषय में यह अब तक की सबसे स्पष्ट और व्यापक प्रस्तुति है। यह सिर्फ भारत के लिए नहीं है बल्कि इसका जुड़ाव पूरी मानवता से है।’’</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्नीसवीं सदी के विख्यात अमेरिकी निबंधकार और साहित्यिक हस्ती इमर्सन के जीवन पर गीता का बड़ा प्रभाव था। उनका मानना था, “श्रीमद भगवद् गीता के साथ मेरा दिन शानदार बीता। यह अपने तरह की पहली पुस्तक है। यह किसी और समय और परिस्थितियों में लिखी गई, लेकिन यह हमारे आज के सवालों और समस्याओं के भी जवाब पूरी स्पष्टता के साथ देती है।“</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऑस्ट्रियाई दार्शनिक और साहित्यकार रुडॉल्फ स्टीनर के जीवन को गीता ने व्यापक रूप से प्रभावित किया था। उनका मानना था कि भगवद् गीता जैसी अप्रतिम रचना को समझने के लिए बस हमें स्वयं को उसके साथ लय बिठाने की जरूरत है।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">मशहूर अमेरिकी दार्शनिक और साहित्यकार हेनरी डेविड थोरो पर गीता का प्रभाव उनके साहित्य और सामाजिक कार्यों में परिलक्षित होता है। वे कहते थे कि &#8220;प्राचीन भारत की सभी स्मरणीय वस्तुओं में गीता से श्रेष्ठ कोई भी दूसरी वस्तु नहीं है। गीता में वर्णित ज्ञान ऐसा उत्तम व सर्वकालिक है, जिसकी उपयोगिता कभी भी कम नहीं हो सकती।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय मनीषियों के अलावा कई विदेशी विद्वानों ने भी गीता के महत्व को समझा और अपने जीवन में इसके सिद्धांतों को लागू किया। यह महान पवित्र ग्रंथ गीता का ही असर था कि ईसाई मत मानने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री मिस्टर पियर ट्रूडो गीता पढ़कर भारत आये। उन्होंने कहा था कि जीवन की शाम हो जाए और देह को दफनाया जाए, उससे पहले अज्ञानता को दफनाना जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ओपेनहाइमर : भगवद् गीता से कैसे प्रभावित हुए?</p>



<p class="wp-block-paragraph">रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने परमाणु बम विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध की दिशा बदल दी। ओपेनहाइमर ने संस्कृत भाषा सीखी और श्रीमद् भगवद गीता को अपनी पसंदीदा पुस्तकों में से एक माना। जब द क्रिश्चियन सेंचुरी के संपादकों ने उनसे पूछा कि वे कौन-सी किताबें हैं, जिन्होंने उनके दार्शनिक दृष्टिकोण को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, तो चार्ल्स बौडेलेयर की पुस्तक &#8220;लेस फ्लेर्स डू माल&#8221; को पहला और “श्री भगवद गीता’’ को दूसरा स्थान मिला।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ओपेनहाइमर को बर्कले में संस्कृत के प्रोफेसर आर्थर डब्ल्यू राइडर ने संस्कृत से परिचित कराया था। उसके बाद उन्हें गीता से परिचित कराया गया था। जुलाई 1945 में न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में पहले परमाणु बम के विस्फोट से दो दिन पहले रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने गीता का एक श्लोक सुनाया। इतिहास बदलने वाली घटना से कुछ घंटे पहले, &#8220;परमाणु बम के जनक&#8221; ने संस्कृत से अनुवादित एक श्लोक को पढ़कर अपना तनाव दूर किया, जिसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है &#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;युद्ध में, जंगल में, पहाड़ों की चोटी पर</p>



<p class="wp-block-paragraph">अन्धकारमय महान सागर पर, भालों और बाणों के बीच,</p>



<p class="wp-block-paragraph">नींद में, उलझन में, शर्म की गहराई में,</p>



<p class="wp-block-paragraph">मनुष्य द्वारा पहले किये गए अच्छे कर्म ही उसकी रक्षा करते हैं।“</p>



<p class="wp-block-paragraph">श्रीमद् भगवद् गीता ने पश्चिम की दुनिया को गहरा प्रभावित किया है। गीता दर्शन को जानने के बाद पश्चिम के विद्वानों ने गीता के जीवन दर्शन को अपनाने के लिए अपनी बौद्धिक ऊर्जा लगा दी। दरअसल वे किसी वैज्ञानिक उपलब्धि की खोज में नहीं थे। वे इससे भी आगे विकारों से रहित मानव मन और आत्मिक शांति की खोज में थे। इसका समाधान उन्होंने श्रीमद् भगवद् गीता में पाया। इन विद्वानों में दार्शनिक इमैन्युअल (1724-1804), हर्डर (1744-1805) फिटश (1762-1814), हीगल (1770-1831), श्लेगल (1772-1829) शिलर (1759-1805) और गोएथे (1749-1832) प्रमुख हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फ्रेडरिक वान श्लेगल ने गीता का अनुवाद किया। जर्मन के अग्रणी विद्वान बेरन विल्हेल्म ने 1821 में संस्कृत का अध्ययन शुरू किया। गीता पढ़ने के बाद उन्होंने भगवान का आभार माना कि उन्हें लंबा जीवन दिया, ताकि वे सर्वाधिक प्रेरणादायी पुस्तक को आत्मसात कर पाए। उन्होंने 1825 में अकादमी ऑफ सिएंस के समक्ष गीता पर अपना प्रसिद्ध व्याख्यान दिया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्ष 1820 में ओ फ्रेंक विद्वान ने गीता का पहला लैटिन अनुवाद प्रकाशित किया। इसके बाद 1822 में ए.डब्ल्यू. वान श्लेगल ने पहली बार लैटिन में सम्पूर्ण अनुवाद प्रकाशित किया। सर विलियम जोन्स (1756-1794) भारत में 10 साल रहे। वे पहले अंग्रेज अधिकारी थे, जिन्हें संस्कृत का सम्पूर्ण ज्ञान था। उन्होंने गीता, रामायण, महाभारत और संस्कृत के अन्य क्लासिकल साहित्य जैसे कालिदास का अभिज्ञान शाकुंतलम, ऋतुसंहार और जयदेव के “गीत गोविंदम्” से इंग्लैंड के लोगों को परिचित कराया। वे एशियाटिक सोसाइटी के पहले अध्यक्ष बने और चार्ल्स विलकिंस को संस्कृत पढ़ने बनारस भेजा। उन्होंने चार्ल्स विलकिंस द्वारा अनुवादित गीता – “भगवद गीता &#8211; डायलॉग ऑफ श्रीकृष्णा एंड अर्जुन” का प्रकाशन कराया। इसकी भूमिका उन्होंने खुद लिखी थी। यह 1783 का वर्ष था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सर एडविन अर्नाल्ड ने 1885 में गीता का अनुवाद किया, जिसका शीर्षक था “द सॉन्ग सेलेशल”। इसी को पढ़कर महात्मा गांधी ने गीता के महत्व को समझा। पश्चिम के कई महान कवि लेखक भगवद् गीता से प्रेरित हुए हैं। इनमें एस टी कोलरिज, पी.बी. शैली, थॉमस कार्लाइल, अमेरिकन कवि एमर्सन, रॉबर्ट ब्राउनिंग, अलफ्रेड टेनिसन, विलियम ब्लैक, टी एस इलियट और डब्ल्यू.बी. यीटस और भी बहुत कवि दार्शनिक हैं, जिनकी एक लंबी सूची है। डॉ. एस. राधाकृष्णन ने गीता की व्याख्या कर स्टालिन का मन बदल दिया था। विनोबा भावे ने कहा था &#8220;गीता प्रवचन मेरी जीवन की गाथा है और वही मेरा संदेश है।(लेखक, मध्य प्रदेश शासन जनसम्पर्क विभाग में उप संचालक हैं।)</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अक्टूबर माह में पड़ने वाले व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट, जानें कब है नवरात्र, दशहरा और शरद पूर्णिमा</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Oct 2020 07:05:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Bangla panchang]]></category>
		<category><![CDATA[dashhara]]></category>
		<category><![CDATA[Different opinions about mata Durga arrival and Departure on navratra]]></category>
		<category><![CDATA[Different opinions about mata Durga arrival and movement on navratra]]></category>
		<category><![CDATA[Durga]]></category>
		<category><![CDATA[durga pooja]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Puja 2020]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Puja 2020 Navratri calendar Shardiya Navratri importance]]></category>
		<category><![CDATA[durga puja kolkata]]></category>
		<category><![CDATA[kashi panchang]]></category>
		<category><![CDATA[mata Durga arrival and Departure on Shardiya navratra 2020]]></category>
		<category><![CDATA[national news]]></category>
		<category><![CDATA[Navratra]]></category>
		<category><![CDATA[navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri calendar]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri devi pooja]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratra]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri 2020]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri 2020 : Durga arrival and Departure on navratra]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri 2020 : Good and bad effects of Durga arrival and Departure]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri 2020 : Positive and negative Affects of Durga arrival and Departure on navratra]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri date]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri importance]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri significance]]></category>
		<category><![CDATA[Shardiya Navratri timings]]></category>
		<category><![CDATA[state]]></category>
		<category><![CDATA[काशी पंचांग]]></category>
		<category><![CDATA[दशहरा]]></category>
		<category><![CDATA[दुर्गा पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[दुर्गोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[बांग्ला पंचांग]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dainikbhaskarup.com/?p=99945</guid>

					<description><![CDATA[शास्त्रों के अनुसार अक्टूबर महीने में कई तरह के व्रत त्योहार पड़ रहे हैं। आज इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जानने की कोशिश करेंगे की नवरात्रि, दशहरा और शरद पूर्णिमा किस तारीख को हैं। साथ ही साथ ये भी जानने की कोशिश करेंगे की इस महीने में कौन-कौन से त्यौहार पड़ रहे हैं, ... <a title="अक्टूबर माह में पड़ने वाले व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट, जानें कब है नवरात्र, दशहरा और शरद पूर्णिमा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2/" aria-label="Read more about अक्टूबर माह में पड़ने वाले व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट, जानें कब है नवरात्र, दशहरा और शरद पूर्णिमा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="905" height="524" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/10/ocotber-vrat-1601621899.jpg" alt="" class="wp-image-99946" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/10/ocotber-vrat-1601621899.jpg 905w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/10/ocotber-vrat-1601621899-300x174.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/10/ocotber-vrat-1601621899-768x445.jpg 768w" sizes="(max-width: 905px) 100vw, 905px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">शास्त्रों के अनुसार अक्टूबर महीने में कई तरह के व्रत त्योहार पड़ रहे हैं। आज इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जानने की कोशिश करेंगे की नवरात्रि, दशहरा और शरद पूर्णिमा किस तारीख को हैं। साथ ही साथ ये भी जानने की कोशिश करेंगे की इस महीने में कौन-कौन से त्यौहार पड़ रहे हैं, तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अक्टूबर माह में पड़ने वाले व्रत त्योहार</strong></h2>



<ul class="wp-block-list"><li>1 अक्टूबर, गुरुवार-&nbsp; पूर्णिमा पड़ी थी जोकि आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा थी।&nbsp;</li><li>5 अक्टूबर, सोमवार&nbsp; – संकष्टी चतुर्थी- अश्विन महीने में दूसरी बार संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाएगा.</li><li>13 अक्टूबर, मंगलवार – एकादशी अधिक मास में पड़ने वाली इस एकादशी को परमा एकादशी के नाम से जाना जाता है।&nbsp;</li><li>14 अक्टूबर, बुधवार – एकादशी के दूसरे दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इसलिए भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करना शुभ माना जाता है।&nbsp;</li><li>15 अक्टूबर, गुरुवार-&nbsp; &nbsp;हर माह भगवान शिव को समर्पित मासिक शिवरात्रि पड़ती है।.</li></ul>



<ul class="wp-block-list"><li>16 अक्टूबर, शुक्रवार&nbsp; &nbsp;– आश्विन अधिक अमावस्या। इस दिन से पुरुषोत्तम मास समाप्त हो जाएगा।</li><li>17 अक्टूबर, शनिवार – शरद नवरात्रि प्रारम्भ, तुला संक्रांति, घटस्थापना</li><li>20 अक्टूबर, मंगलवार, गणेश चतुर्थी व्रत के साथ उपांग ललिता व्रत पड़ रहा है।&nbsp;&nbsp;</li></ul>



<ul class="wp-block-list"><li>23 अक्टूबर , शुक्रवार-&nbsp; श्रीदुर्गाष्टमी, महागौरी की पूजा</li><li>24 अक्टूबर, &#8211; श्रीदुर्गा नवमी, शारदीय नवरात्र का समापन,&nbsp; मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन&nbsp;</li><li>25 अक्टूबर, रविवार-&nbsp; &nbsp; दशहरा, शरद नवरात्रि पारण</li><li>26 अक्टूबर, सोमवार – दुर्गा विसर्जन</li><li>27 अक्टूबर, मंगलवार – पापांकुशा एकादशी</li><li>31 अक्टूबर, शनिवार – अश्विन पूर्णिमा व्रत, शरद पूर्णिमा, कोजागरी व्रत&nbsp;</li></ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 
Lazy Loading (feed)

Served from: dainikbhaskarup.com @ 2026-06-22 08:34:23 by W3 Total Cache
-->