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		<title>Milkipur By Election Results 2025 : अयोध्या की हार क्यों BJP के लिए बन गई थी सिरदर्द&#8230;</title>
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		<pubDate>Sat, 08 Feb 2025 23:36:15 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="529" height="450" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/Chandrabhanu-Paswan-Awadhesh-Prasad-Neha-Singh-Rathore.jpg" alt="" class="wp-image-481992" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/Chandrabhanu-Paswan-Awadhesh-Prasad-Neha-Singh-Rathore.jpg 529w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/Chandrabhanu-Paswan-Awadhesh-Prasad-Neha-Singh-Rathore-300x255.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/Chandrabhanu-Paswan-Awadhesh-Prasad-Neha-Singh-Rathore-150x128.jpg 150w" sizes="(max-width: 529px) 100vw, 529px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://bhaskardigital.com/wp-content/uploads/2025/02/Chandrabhanu-Paswan-Awadhesh-Prasad-Neha-Singh-Rathore.jpg" alt="" class="wp-image-484413"/></figure>


<p>मिल्कीपुर का उपचुनाव BJP जीत गई है। भाजपा ने दलित पासी समाज से आने वाले चन्द्रभानु पासवान को उम्मीदवार बनाया था, वहीं समाजवादी पार्टी ने सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को हार का मुँह देखना पड़ा है। 30 राउंड की वोटिंग के बाद जहाँ चन्द्रभानु पासवान को 1,46,397 वोट पड़े, वहीं सपा के अजीत को 84,687/ वोटों से संतोष करना पड़ा। इसके साथ ही ‘अयोध्या के राजा’ वाला नैरेटिव भी बुरी तरह ध्वस्त हो गया है।</p>
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<p>अवधेश प्रसाद 9 बार के विधायक रहे हैं – 7 बार सोहावल से और 2 बार इसी मिल्कीपुर से। BJP के लिए मिल्कीपुर विधानसभा के उपचुनाव <a href="https://results.eci.gov.in/AcResultByeFeb2025/candidateswise-S24273.htm" target="_blank" rel="noopener nofollow">की जीत</a> दिल्ली विधानसभा में 27 साल बाद सत्ता प्राप्ति से कम ख़ुशी देने वाली नहीं है। मिल्कीपुर ने, अयोध्या ने – एक नैरेटिव को ध्वस्त किया, एक नैरेटिव को पुनर्जीवित किया है। मिल्कीपुर ने BJP को संजीवनी दी है।</p>
<p>अपने देखी होगी ‘यूपी में का बा’ गाकर उत्तर प्रदेश को बदनाम करने वाली नेहा सिंह राठौड़ की वो तस्वीर, जिसमें वो खिलखिला कर हँसती हुई नज़र आ रही थीं। दिक्कत उनके हँसने से नहीं थी। समस्या थी उस कैप्शन में जो उन्होंने उस तस्वीर के साथ पोस्ट किया था – “अचानक से याद आया कि वो अयोध्या हार गए।” यहाँ ‘वो’ का आशय भाजपा से था। अयोध्या का आशय फैज़ाबाद लोकसभा सीट से था। 54,567 वोटों से भाजपा के 2 बार के सांसद लल्लू सिंह हार क्या गए, इसे भाजपा के खिलाफ प्रपंच फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।</p>
<p><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">अचानक याद आया कि वो अयोध्या हार गए..! <a href="https://t.co/F3c7YGyQGz">pic.twitter.com/F3c7YGyQGz</a></p>&mdash; Neha Singh Rathore (@nehafolksinger) <a href="https://twitter.com/nehafolksinger/status/1815431611925909865?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 22, 2024</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h3>अयोध्या की हार क्यों BJP के लिए बन गई थी सिरदर्द</h3>
<p>कारण – भाजपा अस्सी के दशक से ही राम मंदिर को लेकर मुखर रही है। भाजपा नेताओं ने इसके लिए गिरफ्तारियाँ दी, हिन्दुओं ने गोलियाँ खाईं। वो भाजपा ही है जिसके शासनकाल में राम मंदिर का निर्माण सुनिश्चित हुआ। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का हिस्सा बने, ऐसे में फैज़ाबाद की हार को भाजपा के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा। सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने तो अवधेश प्रसाद को ‘अयोध्या का राजा’ कह कर भी संबोधित किया। भगवान श्रीराम को अपमानित करने के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जिन्हें अयोध्या नरेश के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>जैसे काशी के राजा भगवान विश्वनाथ हैं, मेवाड़ के राजा भगवान एकलिंग हैं, मुंबई के राजा गणपति हैं, और उज्जयिनी के राजा महाकाल हैं – वैसे ही अयोध्या के राजा केवल श्रीराम ही हैं। अयोध्या में किसी और को राजा बताना, ख़ासकर श्रीराम को अपमानित करने की मंशा से – शायद इस कलंक का प्रायश्चित वहाँ की जनता भी बार-बार करना चाहेगी। हमने देखा कि कैसे संसद में अवधेश प्रसाद को अखिलेश यादव अपनी बगल में बिठाते थे, तो कभी वो राहुल गाँधी के बगल में बैठे हुए दिखते थे। उन्हें एक ट्रॉफी की तरह लहराया जाने लगा था।</p>
<p>इससे भी बड़ी बात है कि मिल्कीपुर से भाजपा के जो चन्द्रभानु पासवान जीते हैं, वो भी अवधेश प्रसाद की तरह ही दलित पासी समाज से ही आते हैं। ये बताता है कि दलितों ने भी परिवारवाद को नकार दिया है। चन्द्रभानु पासवान आस्थावान हिन्दू हैं, मतगणना वाले दिन भी वो अपनी पत्नी सहित मंदिर पहुँचे और पूजा-अर्चना की। इसके अलावा मिल्कीपुर का परिणाम ये भी बताता है कि यादव, जिन्हें सपा का परंपरागत वोटर बेस माना जाता है – वो भी भाजपा को वोट दे रहे हैं। BJP ओबीसी-दलित वर्ग में मजबूत ही हो रही है।</p>
<p>अर्थात, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान जिस तरह आरक्षण और संविधान खत्म करने का जो झूठ फैलाया गया था उसका पटाक्षेप हो चुका है। भाजपा उससे आगे निकल चुकी है, काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती। जन-कल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दलितों, ख़ासकर दलित महिलाओं के मन में जो स्नेह है वो वापस पटरी पर आ गया है। यहाँ रामचंद्र यादव का जिक्र करना ज़रूरी है, जो मिल्कीपुर के ही हैं और पड़ोस के रुदौली से विधायक हैं। उनके नेटवर्क का BJP को फ़ायदा मिला। पंचायत चुनावों में उनकी धाक रही है, यादव नेताओं ने भाजपा का साथ दिया।</p>
<h3>अयोध्या फिर से फतह करेगी BJP</h3>
<p>2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पास फैज़ाबाद लोकसभा सीट फिर से जीतने का मौका रहेगा। अवधेश प्रसाद 84 वर्ष के हो चुके होंगे तब तक, इतने सक्रिय भी नहीं रहेंगे। पिछली बार भाजपा की हार के कारण लल्लू सिंह का अति-आत्मविश्वास और उनके खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी को बताया गया था। इस बार भाजपा सभी खामियों पर काम करेगी। जहाँ तक अयोध्या की बात है, राम मंदिर में रोज लाखों लोग उमड़ रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सारे करू लगातार जारी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहाँ आते-जाते रहते हैं, वो मिल्कीपुर में रैली करने भी आए थे। यहाँ भाजपा ने गाँव-गाँव जनसंपर्क चलाया।</p>
<p>जिस तरह से महाकुंभ का आयोजन देश-दुनिया में यूपी के लिए गर्व का विषय बना है, वो भी दुनिया देख रही है। एक दुःखद घटना ज़रूर हुई, लेकिन 40 करोड़ लोगों को सँभालने और प्रयागराज में जिस तरह की साफ़-सफाई की व्यवस्था है वो अपने-आप में अध्ययन का विषय है। सीएम योगी की लगातार लोकप्रिय होती जा रही छवि का भी भाजपा को फ़ायदा मिला। खैर, मिल्कीपुर की जीत ने अयोध्या की हार वाले नैरेटिव को बदल दिया है, अवधेश प्रसाद शायद ही बेटे के हार के गम और इस फजीहत से उबर पाएँ।</p>
<h3>मिल्कीपुर का वो रेपकांड, जिसने सपा को पहुँचाया नुकसान</h3>
<p>ये भी याद कीजिए कि कैसे निषाद समाज की एक बच्ची के साथ बलात्कार के मामले को भाजपा ने उठाया था। अगस्त 2024 में हुई इस घटना में सपा नेता मोईद खान और उसके सहयोगी राजू खान का नाम सामने आया था। मुस्लिम आरोपितों को बचाने के लिए अखिलेश यादव ने पीड़िता के DNA टेस्ट की जाँच की माँग भी कर दी थी। मंत्री संजय निषाद परिजनों से मिलने के दौरान रो पड़े थे। इस घटना से भी समाजवादी पार्टी का नुकसान हुआ। अवधेश प्रसाद का ‘ड्रामा’ भी इसे ढँक न सका। कभी वो रोते नज़र आए तो कभी पूजा-पाठ करते हुए। राम विरोधियों का अंत में राम की शरण में जाने का दिखावा जनता को पसंद नहीं आया।</p>
<p>चन्द्रभानु पासवान की जीत ने भाजपा को राज्य में एक पासी चेहरा भी दे दिया है, जो जाटवों के बाद दूसरी सबसे बड़ी दलित आबादी है। जाटवों को मुख्यतः बसपा का वोटर माना जाता है। अवधेश प्रसाद की जीत के बाद भाजपा में भी पासी चेहरों को आगे बढ़ाने पर मंथन हुआ था, क्योंकि ये समाज अगर भाजपा के साथ जुड़ता है तो 2027 में पार्टी को इसका फ़ायदा मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>उपचुनाव: यूपी की इस सीट पर जाति की राजनीति तेज, क्षत्रिय वोट पर सपा-भाजपा की निगाहें</title>
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		<pubDate>Thu, 17 Oct 2019 14:06:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[घोसी विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में 21 तारीख को मतदान होना है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ जा रही है, वैसे-वैसे चुनावी प्रचार में नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गयी है। पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. चन्द्रशेखर के बेटे और भाजपा से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया पर आरोप ... <a title="उपचुनाव: यूपी की इस सीट पर जाति की राजनीति तेज, क्षत्रिय वोट पर सपा-भाजपा की निगाहें" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/by-election-sp-politics-in-up-sp-bjp-eyes-on-kshatriya-vote-news/" aria-label="Read more about उपचुनाव: यूपी की इस सीट पर जाति की राजनीति तेज, क्षत्रिय वोट पर सपा-भाजपा की निगाहें">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="" src="https://s3.india.com/wp-content/uploads/2017/03/Akhilesh-Yogi.jpg" alt="Image result for योगी अखिलेश" width="923" height="547" /></p>
<p>घोसी विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में 21 तारीख को मतदान होना है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ जा रही है, वैसे-वैसे चुनावी प्रचार में नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गयी है। पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. चन्द्रशेखर के बेटे और भाजपा से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया पर आरोप लगाये कि सपा में क्षत्रियों का सम्मान नहीं होता है। इसका ताजा उदाहरण यह है कि घोसी विधानसभा सीट पर सपा ने सुधाकर सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया लेकिन उनके सिम्बल वाले पार्टी पत्र पर दस्तखत नहीं किये गए जिससे उनका नामांकन पत्न खारिज हो गया। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजीव राय ने नीरज शेखर के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि चन्द्रशेखर जी समाजवादी थे और नीरज शेखर अवसरवादी है। नीरज शेखर एक बंगले के लिए बीजेपी के कदमों में जा गिरे हैं।</p>
<p><strong>नेताओं की जुबानी जंग तेज</strong></p>
<p>घोसी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में नेताओं की जुबानी जंग तेज हो चुकी है जिससे उपचुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। भाजपा से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि समाजवादी पार्टी में क्षत्रियों का सम्मान नहीं होता है जिसका ताजा उदाहरण यहां से निर्दल चुनाव लड़ रहे सुधाकर सिंह हैं। कुछ इसी तरह से लोकसभा चुनाव के दौरान उनके साथ भी हुआ था। अगर समाजवादी पार्टी में क्षत्रियों का सम्मान होता तो केवल सुधाकर सिंह के पार्टी सिम्बल वाले पेपर पर दस्तखत क्यों नहीं किये गए?</p>
<p><strong>सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा</strong></p>
<p>राज्यसभा सांसद नीरज शेखर के बयान पर पलटवार करते हुए सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा कि नीरज शेखर को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह किसके बेटे हैं। चन्द्रशेखर जी जैसे लोग सदियों में एक पैदा होते हैं। चन्द्रशेखर जी समाजवादी थे और नीरज शेखर अवसरवादी है। नीरज शेखर मात्र एक बंगले के लिए भाजपा के कदमों में जाकर गिर गये। चन्द्रशेखर जी ने मात्र छोटी से बात के लिए पीएम तक कुर्सी छोड़ दी थी। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा कि इनके पिता ने तो इनको ग्राम प्रधान लायक भी नहीं समझा था। जब उनका स्वर्गवास हुआ तो ये सड़क पर आ गये थे लेकिन अखिलेश यादव ने उनको सड़क से उठाकर संसद तक पहुंचा दिया। अभी तो नीरज शेखर का कार्यकाल बाकी था लेकिन उनको सिर्फ एक बंगले की चिन्ता थी, इसलिए वह भाजपा के कदमों में जा गिरे तो ऐसे अवसरवादी लोगों के बारे में क्या कहा जाए।</p>
<p><strong>इस सीट पर जातिगत आंकड़ा देखा जाये</strong></p>
<p>तो मुस्लिम वोटर 60 हजार, यादव 40 हजार, अनुसूचित जाति 20 हजार, राजभर 45 हजार, चौहान 35 हजार, कुर्मी 4 हजार, सवर्ण 40 हजार, निषाद 15 हजार, मौर्य़ा 12 हजार, भूमिहार 15 हजार और पिछड़े मतदाताओं की संख्या 20 हजार है। इसलिए सभी उम्मीदवार जातियों के वोट बैंक के आधार पर मतदाताओं को लुभाने में लगे हैं।</p>
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