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	<title>पूजा पाठ &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>पूजा पाठ &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>जानिए यज्ञ में आहुती के दौरान क्यों कहा जाता है &#8220;स्वाहा &#8220;?&#8230;.</title>
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		<pubDate>Tue, 16 Apr 2019 03:57:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज हम आपको एक खास जानकारी देने जा रहे शायद आप इनसे अंजन हो. बताते चले आखिर पूजा पाठ में  यज्ञ में आहुति के दौरान क्यों कहा जाता है स्वाहा ??   आपको स्वाहा का महत्व हममें से ज्यादातर नहीं जानते हैं। ऋग्वैदिक आर्यों ने यज्ञीय परंपरा के दौरान देवताओं तक आह्वान पहुंचाने के लिए अग्नि का ... <a title="जानिए यज्ञ में आहुती के दौरान क्यों कहा जाता है &#8220;स्वाहा &#8220;?&#8230;." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/know-why-is-called-swaha-during-sacrifice-news/" aria-label="Read more about जानिए यज्ञ में आहुती के दौरान क्यों कहा जाता है &#8220;स्वाहा &#8220;?&#8230;.">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आज हम आपको एक खास जानकारी देने जा रहे शायद आप इनसे अंजन हो. बताते चले आखिर पूजा पाठ में  यज्ञ में आहुति के दौरान क्यों कहा जाता है स्वाहा ??   आपको स्वाहा का महत्व हममें से ज्यादातर नहीं जानते हैं।</strong> ऋग्वैदिक आर्यों ने यज्ञीय परंपरा के दौरान देवताओं तक आह्वान पहुंचाने के लिए अग्नि का प्रयोग आरंभ किया। किंतु यज्ञ वेदी में <strong>हवि </strong>डालने के दौरान “स्वाहा” का उच्चारण किया जाता था।स्वाहा का अर्थ ही अपने आप में बहुत रोचक है। हवि यानि फल, शहद, घी, काष्ठ आदि जिसकी हम आहुति देते हैं|</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://encrypted-tbn0.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcTpcT2KCvzCOdYHYUgzHTpc8hB-TGf3NOC7w510kbjHUjDypzDr" alt="Related image" width="731" height="343" /></p>
<p>देव आह्वान के निमित्त मंत्र पाठ करते हुए स्वाहा का उच्चारण कर निर्धारित हवन सामग्री का भोग अग्नि के माध्यम से देवताओं को पहुंचाते हैं। इस स्वाहा का निर्धारित नैरुक्तिक अर्थ है – सही रीति से पहुंचाना परंतु क्या और किसको? यानि आवश्यक भौगिक पदार्थ को उसके प्रिय तक। हवन अनुष्ठान की ये आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है। कोई भी यज्ञ तब तक सफल नहीं माना जा सकता है जब तक कि हविष्य का ग्रहण देवता न कर लें। किंतु देवता ऐसा ग्रहण तभी कर सकते हैं जबकि अग्नि के द्वारा “स्वाहा” के माध्यम से अर्पण किया जाए।</p>
<p><img decoding="async" src="https://www.therisingnews.com/images/slideshow/110318110825swaha.jpg" alt="Related image" /></p>
<p>निश्चित रूप से मंत्र विधानों की संरचना के आरंभ से ही इस तथ्य पर विचार प्रारंभ हो चुका था कि आखिर कैसे हविष्य को उनके निमित्त देव तक पहुंचाया जाए? विविध उपायों द्वारा कई कोशिशें याज्ञिक विधान को संचालित करते वक्त की गईं। आखिरकार अग्नि को माध्यम के रूप में सर्वश्रेष्ठ पाया गया तथा उपयुक्ततम शब्द के रूप में “स्वाहा” का गठन हुआ।</p>
<p>अग्नि और स्वाहा से रिलेटेड पौराणिक आख्यान भी बेहद रोचक हैं। श्रीमद्भागवत तथा शिव पुराण में स्वाहा से संबंधित वर्णन आए हैं। इसके अलावा ऋग्वेद, यजुर्वेद आदि वैदिक ग्रंथों में अग्नि की महत्ता पर अनेक सूक्तों की रचनाएं हुई हैं।</p>
<p>पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वाहा दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं जिनका विवाह अग्निदेव के साथ किया गया था। अग्निदेव को हविष्यवाहक भी कहा जाता है। ये भी एक रोचक तथ्य है कि अग्निदेव अपनी पत्नी स्वाहा के माध्यम से ही हविष्य ग्रहण करते हैं तथा उनके माध्यम यही हविष्य आह्वान किए गए देवता को प्राप्त होता है। एक और पौराणिक मान्यता के अनुसार अग्निदेव की पत्नी स्वाहा के पावक, पवमान और शुचि नामक तीन पुत्र हुए।</p>
<p>इसके अलावा भी एक अन्य रोचक कहानी भी स्वाहा की उत्पत्ति से जुड़ी हुई है। इस मान्यता के अनुसार, स्वाहा प्रकृति की ही एक कला थी, जिसका विवाह अग्नि के साथ देवताओं के आग्रह पर सम्पन्न हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं स्वाहा को ये वरदान दिया था कि केवल उसी के माध्यम से देवता हविष्य को ग्रहण कर पाएंगे।</p>
<p>यज्ञीय प्रयोजन तभी पूरा होता है जबकि आह्वान किए गए देवता को उनका पसंदीदा भोग पहुंचा दिया जाए। हविष्य के याज्ञिक सामग्रियों में मीठे पदार्थ का भी शामिल होना आवश्यक है तभी देवता संतुष्ट होते हैं। और सभी वैदिक व पौराणिक विधान अग्नि को समर्पित मंत्रोच्चार एवं स्वाहा के द्वारा हविष्य सामग्री को देवताओं तक पहुंचने की पुष्टि करते हैं.</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>वास्तु टिप्स : ऐसे करे पूजा-पाठ घर में कभी नहीं आयेगी धन की कमी&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/vastu-tips-such-a-ritual-will-never-come-in-the-house-the-lack-of-funds-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Jan 2019 03:37:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिष शास्त्र]]></category>
		<category><![CDATA[पूजा पाठ]]></category>
		<category><![CDATA[वास्तु शास्त्र"]]></category>
		<category><![CDATA[सामुद्रिक शास्त्र]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्योतिष शास्त्र, वास्तु शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, ऐसी ही कुछ विधाएं हैं जिनके प्रयोग से हम जीवन में आ रहे संकटों के रुख मोड़ सकते हैं। तकलीफ होने पर लोग इन शास्त्रीय उपायों का प्रयोग करते हैं, लेकिन पहले भी यदि ये उपाय किए जाएं तो परेशानी का मुख नहीं देखना पड़ेगा। खैर यहां हम आपको  ... <a title="वास्तु टिप्स : ऐसे करे पूजा-पाठ घर में कभी नहीं आयेगी धन की कमी&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/vastu-tips-such-a-ritual-will-never-come-in-the-house-the-lack-of-funds-news/" aria-label="Read more about वास्तु टिप्स : ऐसे करे पूजा-पाठ घर में कभी नहीं आयेगी धन की कमी&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ज्योतिष शास्त्र, वास्तु शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, ऐसी ही कुछ विधाएं हैं जिनके प्रयोग से हम जीवन में आ रहे संकटों के रुख मोड़ सकते हैं। तकलीफ होने पर लोग इन शास्त्रीय उपायों का प्रयोग करते हैं, लेकिन पहले भी यदि ये उपाय किए जाएं तो परेशानी का मुख नहीं देखना पड़ेगा। खैर यहां हम आपको  कुछ शास्त्रीय उपायों की चर्चा करने जा रहे हैं। आशा है कि आपको ये उपाय पसंद आएंगे और आप इनका प्रयोग कर अपने जीवन और भी बेहतर बना सकेंगे।</p>
<div>हिन्दू धर्म में पूजा पाठ को विशेष महत्व दिया गया है और लोग सुबह शाम पूजा-पाठ करने को उचित मानते हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि पूजा पाठ के बाद मन को शांति मिलती है साथ ही घर में सुख का होता है। आपको बता दें कि पूजा के भी अपने नियम-कानून होते हैं जिन्हे अपनाकर पूजा करने से लाभ मिलता है। पूजा करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।</div>
<div></div>
<div><b>इन बातों का रखें ख़ास ध्यान:</b></div>
<div></div>
<div># अगर आप सूर्य डूब जाने के बाद या रात होने के समय पर पूजा कर रहे हैं तो आपको शंख और घंटियां नहीं बजानी चाहिए। शास्त्रों में लिखा है कि सूर्यास्त के बाद देवी-देवता सोने चले जाते हैं।</div>
<div></div>
<div># संध्या के बाद पूजा करते समय पूजा के लिए फूल तोड़ कर नहीं लाना चाहिए, क्योंकि सूर्य डूब जाने के बाद फूलों को छेड़ना अच्छा नहीं माना जाता है।</div>
<div></div>
<div># सूर्य भगवान दिन के देवता कहा जाता है इसलिए दिन में अगर कोई विशेष पूजा कर रहे हैं तो साथ में सूर्यदेव की पूजा भी जरुरी है लेकिन वहीं सूर्य डूब जाने के बाद सूर्य देव की पूजा नहीं करनी चाहिए।</div>
<p># पूजा के स्थान पर भगवान की बहुत बड़ी मूर्तियां ना रखकर छह इंच की मूर्ति रखना चाहिए। शाम होने के बाद तुलसी का पत्ता गलती से भी नहीं तोडना चाहिए क्योंकि इससे लक्ष्मी नाराज हो जाती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>वास्तु टिप्स: जिन लोगो के अंदर होती है ये बुरी आदतें, उसके घर कभी नहीं होती माँ लक्ष्मी की कृपा </title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/vastu-tips-those-people-who-are-inside-these-bad-habits-never-have-their-house-the-grace-of-mother-lakshmi-news/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Sep 2018 02:41:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[टोटका]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म आस्था]]></category>
		<category><![CDATA[पूजा पाठ]]></category>
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					<description><![CDATA[इंसान एक तरफ पैसा कमाने के लिए कठिन मेहनत करता तो दूसरी ओर पूजा-पाठ कर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। माता लक्ष्मी की विधि विधान से उपासना करने पर उनका आशीर्वाद तो मिलता ही है लेकिन हम रोज कुछ दैनिक अनैतिक कार्यों करने लगते है तो माता लक्ष्मी हम पर अपना आशीर्वाद नहीं देती ... <a title="वास्तु टिप्स: जिन लोगो के अंदर होती है ये बुरी आदतें, उसके घर कभी नहीं होती माँ लक्ष्मी की कृपा " class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/vastu-tips-those-people-who-are-inside-these-bad-habits-never-have-their-house-the-grace-of-mother-lakshmi-news/" aria-label="Read more about वास्तु टिप्स: जिन लोगो के अंदर होती है ये बुरी आदतें, उसके घर कभी नहीं होती माँ लक्ष्मी की कृपा ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इंसान एक तरफ पैसा कमाने के लिए कठिन मेहनत करता तो दूसरी ओर पूजा-पाठ कर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। माता लक्ष्मी की विधि विधान से उपासना करने पर उनका आशीर्वाद तो मिलता ही है लेकिन हम रोज कुछ दैनिक अनैतिक कार्यों करने लगते है तो माता लक्ष्मी हम पर अपना आशीर्वाद नहीं देती है।</p>
<p><strong>जरूरत से ज्यादा सोना</strong><br />
जो व्यक्ति हमेशा सूर्योदय होने के बाद उठता है और सूर्यास्त के समय सोता है उससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होती है। इस आदत से घर पर हमेशा परेशानियां और पैसे की कमी बनी रहती है।</p>
<p><strong>दीपक ना जलाना</strong><br />
जो व्यक्ति सुबह- शाम के वक्त घर पर दीपक नहीं जलाता है उसके घर पर माता लक्ष्मी ज्यादा देर तक नहीं ठहरती हैं।</p>
<figure><img decoding="async" src="http://assets-news-bcdn.dailyhunt.in/cmd/resize/400x400_60/fetchdata13/images/ad/b0/6a/adb06a4bf11b86f82c4c73c86f87f80c.jpg" alt=" " width="100%" /></figure>
<p><strong>गुस्सा और अपशब्द बोलना</strong><br />
बात बात में गुस्सा करना और दूसरे लोगों को अपशब्द बोलने से भी माता लक्ष्मी नाराज हो जाती है। इन आदतों से व्यक्ति को हमेशा धन का अभाव रहता है।</p>
<p><strong>संतों, गरीबों और शास्त्रों का अनादर करना</strong><br />
जिस घर में संतों, गरीब व्यक्ति और शास्त्रों का हमेशा अनादर होता है रहता है वहां पर लक्ष्मी का निवास होता है। ऐसे व्यक्ति से माता लक्ष्मी दूर चली जाती है।</p>
<p><strong>गंदा रहन सहन</strong><br />
माता लक्ष्मी उसी घर को अपना निवास स्थान बनाती है जिस घर में स्वच्छता रहती है। जो व्यक्ति हमेशा गंदे और फटे कपड़े पहनता है और घर की साफ सफाई नहीं करता है उस व्यक्ति को घर को माता लक्ष्मी नहीं चुनती।</p>
<p><strong>ब्रह्म महूर्त और संध्या समय में भोग-विलास करना</strong><br />
जो व्यक्ति सुबह और शाम के समय भोग विलास में लिप्त रहता है उसे नरक की प्राप्ति होती है और लक्ष्मी जी उसका साथ छोड़कर चली जाती।</p>
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