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	<title>प्रेम कहानी &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>ये बाते कर देंगी आपको हैरान, जानिए क्यों श्रीकृष्ण ने राधा से नहीं की थी शादी ?</title>
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		<pubDate>Fri, 16 Nov 2018 04:32:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राधा-कृष्ण के प्रेम कथा  किसी से छुपी नहीं है. उनके अमर प्रेम गाथा का उदाहरण आज भी लोग देते हैं. श्री कृष्ण की राधा के साथ लीलाएं और राधा की कृष्ण के लिए दीवानगी किसी से छुपी नहीं है. शायद राधा के कृष्ण के लिए प्रेम की वजह से ही राधा का नाम कृष्ण से ... <a title="ये बाते कर देंगी आपको हैरान, जानिए क्यों श्रीकृष्ण ने राधा से नहीं की थी शादी ?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mystery-related-to-radha-krishna-eternal-love-story-news/" aria-label="Read more about ये बाते कर देंगी आपको हैरान, जानिए क्यों श्रीकृष्ण ने राधा से नहीं की थी शादी ?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://assets-news-bcdn.dailyhunt.in/cmd/resize/400x400_60/fetchdata13/images/91/aa/72/91aa7289abc3504de319a9b41d13f330.jpg" alt="Image result for à¤¯à¥ à¤¬à¤¾à¤¤à¥ à¤¸à¤ à¤®à¥à¤ à¤à¤° à¤¦à¥à¤à¤à¥ à¤à¤ªà¤à¥ à¤¹à¥à¤°à¤¾à¤¨, à¤à¤¾à¤¨à¤¿à¤ à¤à¥à¤¯à¥à¤Â à¤¶à¥à¤°à¥à¤à¥à¤·à¥à¤£ à¤¨à¥ à¤°à¤¾à¤§à¤¾ à¤¸à¥ à¤¨à¤¹à¥à¤ à¤à¥ à¤¥à¥ à¤¶à¤¾à¤¦à¥" /></p>
<p>राधा-कृष्ण के प्रेम कथा  किसी से छुपी नहीं है. उनके अमर प्रेम गाथा का उदाहरण आज भी लोग देते हैं. श्री कृष्ण की राधा के साथ लीलाएं और राधा की कृष्ण के लिए दीवानगी किसी से छुपी नहीं है.</p>
<p>शायद राधा के कृष्ण के लिए प्रेम की वजह से ही राधा का नाम कृष्ण से पहले लिया जाता है. लेकिन इसके बावजूद श्रीकृष्ण ने राधा से शादी नहीं की. लेकिन क्या आप इसकी वजह जानते हैं?</p>
<p>पुुराणों में इसकी वजह बताई गई है. लेकिन इसके कई कारण बताए गए हैं, आज हम आपको बता रहें हैं कि आखिर राधा-कृष्ण ने शादी क्यों नहीं की?</p>
<p>आप सभी यह तो जानते ही होंगे कि भगवान विष्णु जी इस पृथ्वी पर बार-बार अवतार लेते रहते थे। इस कारण उनकी पत्नी देवी लक्ष्मी जी की भी यह इच्छा हुई कि वें भी भगवान विष्णु जी के साथ पृथ्वी पर अवतार ले और भगवान विष्णु जी के साथ उनके धर्म के कार्य में उनकी सहयोगी बने। इसीलिए त्रेता युग में भगवान विष्णु ने जब श्री राम का अवतार लिया तो देवी लक्ष्मी जी ने देवी सीता के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया था। इसके बाद देवी लक्ष्मी जी द्वापर युग में फिर से देवी रुक्मणी के रूप में भगवान श्री कृष्ण जी के साथ पृथ्वी पर अवतरित हुई थी।</p>
<p>द्वापर युग में देवी लक्ष्मी जी ने रुक्मणी जी के रूप में विदर्भ देश के राजा “भीष्मक” के यहां उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था। रुकमणी के जन्म से राजा भीष्मक बहुत खुश हो गए थे, परंतु रुकमणी के जन्म के कुछ महीनों बाद ही एक पूतना नाम की राक्षसी रुक्मणी को मारने के लिए राजा भीष्मक के महल में आ गई थी। यह पूतना वही राक्षसी थी जिसने कंस के कहने पर भगवान श्री कृष्ण को बचपन में अपना जहरीला दूध पिलाकर मारने की कोशिश की थी, परंतु वह राक्षसी भगवान श्री कृष्ण के द्वारा मृत्यु को प्राप्त हो गई थी।</p>
<p>राक्षसी पूतना ने अपने जहरीले दूध को रुकमणी जी को भी पिलाने की कोशिश की थी। बहुत कोशिशों के बाद भी पूतना अपने इस कार्य में सफल ना हो सकी। पूतना जब देवी रुक्मणी को अपना जहरीला दूध पिलाने का असफल प्रयास कर रही थी तभी कुछ लोग महल के अंदर आ गए थे। अचानक लोगों के इस तरह आ जाने के कारण राक्षसी पूतना देवी रुक्मणी को लेकर आसमान में उड़ गई थी। यह देखकर लोगों ने राक्षसी पूतना का बहुत दूर तक पीछा किया परंतु राक्षसी पूतना देवी रुक्मणी को लेकर आसमान में बहुत ऊपर उड़ गई।</p>
<p>यह देखकर सभी लोगो ने देवी रुक्मणी के जीवित रहने की आस छोड़ दी थी। इधर जब पूतना आकाश में बहुत ऊपर उड़ रही थी तब देवी रुक्मणी ने अपने आपको उस पूतना राक्षसी से आजाद कराने के लिए अपना वजन बढ़ाना शुरू कर दिया था। देवी रुक्मणी ने अपना वजन इतना बड़ा लिया था कि पूतना राक्षसी को उनका भार उठा पाने में मुश्किल हो रही थी। इसलिए उसने देवी रुक्मणी को अपने हाथ से छोड़ दिया था। इस कारण पूतना के हाथ से छूटकर देवी रुक्मणी आसमान से पृथ्वी पर एक सरोवर में कमल के फूल पर विराजमान हो गई थी।</p>
<p>राक्षसी पूतना के कारण विदर्भ राज्य की राजकुमारी देवी रुक्मणी मथुरा राज्य के एक गांव बरसाना के पास एक सरोवर में आकर गिरी थी। उसी समय बरसाना के एक निवासी वृषभानु अपनी पत्नी कृति देवी के साथ उस सरोवर के किनारे से गुजर रहे थे। तभी उन दोनों की नजर सरोवर के एक कमल के फूल पर विराजमान उस बच्ची रुक्मणी पर पड़ जाती है। इसके बाद वृषभानु और उनकी पत्नी देवी रुक्मणी को उठाकर अपने साथ ले जाते हैं और वें उन्हें अपनी बेटी बनाकर उनका पालन पोषण करने लगते हैं। वें इस बच्ची का नाम “राधा” रख देते हैं।</p>
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