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	<title>मेघालय &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>सबसे बड़ा रेस्क्यू: खदान के अंदर नहीं घुस पा रही नौसेना, परिवार वाले बोले अब तो लाश ही ला दो</title>
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		<pubDate>Sun, 30 Dec 2018 07:53:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मेघालयः मेघालय के कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने के लिए सारे प्रयास विफल होते नजर आ रहे हैं. नौसेना के गोताखोर भी खदान के अंदर घुस नहीं पा रहें है, ये 15 मजदूर यहां पर 13 दिसंबर से फंसे है.  17 दिन बाद भी अभी तक कोई भी युक्ति अंदर जाने के लिए नहीं लग ... <a title="सबसे बड़ा रेस्क्यू: खदान के अंदर नहीं घुस पा रही नौसेना, परिवार वाले बोले अब तो लाश ही ला दो" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/largest-rescue-navy-divers-unable-to-enter-meghalaya-rat-hole-mine-families-say-at-least-retrieve-bodies-for-last-rites/" aria-label="Read more about सबसे बड़ा रेस्क्यू: खदान के अंदर नहीं घुस पा रही नौसेना, परिवार वाले बोले अब तो लाश ही ला दो">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मेघालयः</strong> मेघालय के कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने के लिए सारे प्रयास विफल होते नजर आ रहे हैं. नौसेना के गोताखोर भी खदान के अंदर घुस नहीं पा रहें है, ये 15 मजदूर यहां पर 13 दिसंबर से फंसे है.  17 दिन बाद भी अभी तक कोई भी युक्ति अंदर जाने के लिए नहीं लग सकी है. अब प्रसाशन के साथ साथ-साथ मजदूरों के परिवार वाले भी उनके जीने की आस छोड़ चुके है. ऐसे में उन्होंने कहा की उनके अंतिम संस्कार के लिए लाश ही निकल दीजिये।</p>
<p><img decoding="async" src="https://static.punjabkesari.in/multimedia/10_04_276172610hjh-ll.jpg" alt="Image result for à¤®à¥à¤à¤¾à¤²à¤¯à¤ à¤à¤¦à¤¾à¤¨" /></p>
<p>जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिल्वेस्टर नॉन्गटिंगर ने कहा कि खदान से पानी निकासी के लिए हाई पावर पंप और अन्य उपकरण लगाए गए हैं, लेकिन उसमें अभी कुछ समय लगेगा. भारतीय नौसेना और एनडीआरएफ की टीम शनिवार को खदान के अंदर उतरी और वहां पर एकत्र हुए पानी के स्तर का पता लगाया गया.</p>
<p><img decoding="async" src="https://hindi.news24online.com/media/media/2018/12/29/3a809fb5-8848-498f-a11f-ec58baaba738.jpg" alt="Image result for à¤®à¥à¤à¤¾à¤²à¤¯à¤ à¤à¤¦à¤¾à¤¨" /></p>
<p>जिला प्रशासन ने बताया कि मैन पावर और मशीनों से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते ऑपरेशन को शुरू नहीं किया जा सका. गोताखोरी के खास यंत्रों और उपकरणों से लैस नौसेना की 15 सदस्यों की टीम शनिवार को लुमथारी गांव में आपदा स्थल पर पहुंची. प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा अग्निशमन एवं इमरजेंसी सर्विसेज़ खदान से पानी निकालने के लिए रविवार को अपने 10 बेहद शक्तिशाली पंप देगी.</p>
<p><img decoding="async" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/stories/122018/rat_mining_1546081341_618x347.jpeg" alt="Image result for à¤®à¥à¤à¤¾à¤²à¤¯à¤ à¤à¤¦à¤¾à¤¨" /></p>
<p>उन्होंने बताया कि धनबाद के इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स से विशेषज्ञों की एक टीम भी शनिवार को यहां पहुंची. उनके साथ एक खदान दुर्घटना में कई लोगों की जान बचाने वाले पंजाब से विशेषज्ञ जसवंत सिंह गिल भी यहां पहुंचे हैं जो इस ऑपरेशन में मदद करेंगे. प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 370 फुट गहरे खदान से पानी बाहर निकालने का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है क्योंकि पंप का संचालन देख रहे तकनीकी विशेषज्ञ इसकी तैयारी में जुटे हैं.</p>
<p><img decoding="async" src="https://static.punjabkesari.in/multimedia/2018_12image_10_02_3943126100222-ll.jpg" alt="Image result for à¤®à¥à¤à¤¾à¤²à¤¯à¤ à¤à¤¦à¤¾à¤¨" /></p>
<p>एनडीआरएफ के कर्मी हादसे के एक दिन बाद 14 दिसंबर से खदान में बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं. बता दें कि पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस खदान में 13 दिसंबर को पानी भर गया था, जब पास की लितेन नदी का पानी इसमें घुस गया था. इसकी वजह से 15 खनिक अंदर ही फंसे रह गए. इस हादसे में जीवित बचे एक आदमी ने शनिवार को कहा कि फंसे हुए मजदूरों के जिंदा बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं है. फंसे हुए सात मजदूरों का परिवार पहले ही उनके जिंदा बाहर निकलने की उम्मीद छोड़ चुका है और अंतिम संस्कार के लिए सरकार से उनके शव को बाहर निकालने का आग्रह किया है.</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://static.punjabkesari.in/multimedia/10_04_034528610ghh-ll.jpg" alt="Image result for à¤®à¥à¤à¤¾à¤²à¤¯à¤ à¤à¤¦à¤¾à¤¨" width="791" height="501" /></p>
<p>वेस्ट गारो हिल्स जिले के मगुरमारी गांव के शोहर अली के बेटे, भाई और दामाद खदान में फंसे हुए हैं. शोहर अली ने कहा, &#8216;वे चाहते हैं कि खदान में फंसे उनके परिवार का शव मिल जाए ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके. उन्होंने कहा कि तीनों को 2000 रुपये की रोजाना मजदूरों का लालच दिया गया था. इस हादसे में जिंदा बचे असम के चिरांग जिले के साहिब अली ने कहा कि फंसे खनिकों को जीवित बाहर निकालना संभव नहीं है.</p>
<p><img decoding="async" src="https://d3pc1xvrcw35tl.cloudfront.net/sm/images/686x514/coal-mine_20181267173.jpg" alt="Image result for à¤®à¥à¤à¤¾à¤²à¤¯à¤ à¤à¤¦à¤¾à¤¨" /></p>
<p>13 दिसंबर की रात को याद करते हुए अली ने कहा, &#8216;सभी लोगों ने सुबह करीब 5 बजे काम शुरू किया. सुबह करीब 7 बजे तक खदान पानी से भर गई. मैं 5-6 फीट अंदर था और कोयले से भरा रेड़ा बाहर ला रहा था. मैंने खदान के अंदर एक अजीब सी हवा महसूस की जो असामान्य थी. इसके साथ ही तेजी से पानी के बहने की आवाज आने लगी. साहिब अली ने कहा, &#8216;खदान में पूरा पानी भरा हुआ है. वहां फंसे किसी भी आदमी के जिंदा बचने की उम्मीद नहीं है. क्योंकि कोई आदमी कितने समय तक पानी में सांस ले सकता है.&#8217;</p>
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		<title>&#8230;तो क्या 15 दिन बाद भी खदान में जिंदा होंगे फंसे 15 मजदूर, प्रशासन ने नहीं छोड़ी उम्मीद</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/meghalaya-15-workers-killed-in-coal-mines/</link>
		
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		<pubDate>Fri, 28 Dec 2018 10:17:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली। 15 दिन से फंसे इन मजदूरों को अब तक बाहर नहीं निकला जा चुका है. बता दें इस कोयला खदान में 70 फीट पानी भरा होने के कारण  क्या अब तक सभी मजदूर जिन्दा होंगे।  अब तो तमाम लोगों ने उनके जीवित रहने की उम्मीदें भी छोड़ दी हैं. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने चार साल पहले ही ऐसी ... <a title="&#8230;तो क्या 15 दिन बाद भी खदान में जिंदा होंगे फंसे 15 मजदूर, प्रशासन ने नहीं छोड़ी उम्मीद" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/meghalaya-15-workers-killed-in-coal-mines/" aria-label="Read more about &#8230;तो क्या 15 दिन बाद भी खदान में जिंदा होंगे फंसे 15 मजदूर, प्रशासन ने नहीं छोड़ी उम्मीद">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली।</strong> 15 दिन से फंसे इन मजदूरों को अब तक बाहर नहीं निकला जा चुका है. बता दें इस कोयला खदान में 70 फीट पानी भरा होने के कारण  क्या अब तक सभी मजदूर जिन्दा होंगे।  अब तो तमाम लोगों ने उनके जीवित रहने की उम्मीदें भी छोड़ दी हैं. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने चार साल पहले ही ऐसी अवैध खदानों पर पाबंदी लगा दी थी. बावजूद इसके काले सोना माने जाने वाले कोयले के इस कारोबार में मोटा मुनाफा होने की वजह से कोयला माफिया पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है. इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और राज्य सरकार ने मजदूरों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए की अंतरिम सहायता भी दी है. मेघालय में छह साल पहले भी ऐसे ही एक हादसे में 15 मजदूरों की मौत हो गई थी.</p>
<p><img decoding="async" class="" src="https://www.dw.com/image/46866676_303.jpg" alt="Indien | illegaler Kohleabbau in Meghalaya (DW/P. Mani)" width="794" height="447" /></p>
<p><strong>&#8216;रैट होल&#8217; में कैसे फंसे</strong></p>
<p>बीते 13 दिसंबर को मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले की एक अवैध खदान में नजदीक से बहने वाली लीटन नदी का पानी भर जाने के कारण भीतर गए 15 मजदूर फंस गए थे. मजदूरों का कोई रिकार्ड नहीं होने की वजह से उनकी सही तादाद का पता लगाना मुश्किल है. उसके बाद से ही राज्य सरकार और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों समेत बचाव दल के सौ से ज्यादा लोग उन मजदूरों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. कई पंपों से लगातार पानी बाहर निकालने के बावजूद खदान का जलस्तर कम नहीं हो रहा है. इस वजह से फिलहाल बचाव अभियान रोक दिया गया है. मेघालय के मुख्यमंत्री कोनरा संगमा कहते हैं, &#8220;तमाम कोशिशों के बावजूद उन मजदूरों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है. परिस्थिति काफी जटिल है.” खदानों से इस तरह कोयला निकालने की प्रक्रिया को &#8216;रैट होल माइनिंग&#8217; यानी चूहे के बिल के जरिए की जाने वाली खुदाई कहा जाता है. इसके लिए पांच से सौ वर्गमीटर वाला एक इलाका चुना जाता है. उसके बाद वहां सुरंग खोदी जाती है. वह इतनी संकरी होती है कि एक बार में एक आदमी ही भीतर जा सकता है. उसी से भीतर जाकर मजदूर कोयला निकालते हैं.</p>
<p><img decoding="async" class="" src="https://www.dw.com/image/46866793_401.jpg" alt="Indien | Illegaler Kohleabbau in Bengalien (DW/P. Mani)" width="894" height="503" /></p>
<p><strong>कैसा चल रहा है बचाव अभियान</strong></p>
<p>हादसे का पता चलते ही मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू से बात कर उनसे अधिक पेशेवर टीमों और बेहतर उपकरणों को भेजने का अनुरोध किया था. संगमा ने कोल इंडिया को एक पत्र लिख कर उच्च क्षमता वाले पंप भेजने को कहा है ताकि खदान में भरे पानी को निकाला जा सके. एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट एसके सिंह बताते हैं, &#8220;खदान के भीतर अब भी लगभग 70 फीट पानी भरा है. इसके 30 फीट तक उतरने पर ही गोताखोर भीतर जा सकते हैं.” इस हादसे का स्वत: संज्ञान लेते हुए मेघालय मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://www.dw.com/image/46866578_401.jpg" alt="Indien | Illegaler Kohleabbau in Meghalaya (DW/P. Mani)" width="755" height="425" /></p>
<p><strong>पाबंदी भी बेअसर</strong></p>
<p>राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने चार साल पहले ही मेघालय में असुरक्षित तरीके से होने वाले कोयला खनन पर अंतरिम रोक लगा दी थी. इसके बावजूद मोटा मुनाफा होने की वजह से यह कारोबार गैर-कानूनी तरीके से जारी है. राज्य का ताकतवर कोयला माफिया इन खदानों के खिलाफ अभियान चलाने वाले गैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं पर कई बार जानलेवा हमले कर चुका है. यही वजह है कि विपक्षी कांग्रेस ने राज्य की संगमा सरकार पर अवैध कोयला खनन के कारोबार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://www.dw.com/image/46866755_401.jpg" alt="Indien | Illegaler Kohleabbau in Bengalien (DW/P. Mani)" width="837" height="471" /></p>
<p>खदानों से इस तरह कोयला निकालने की प्रक्रिया को &#8216;रैट होल माइनिंग&#8217; यानी चूहे के बिल के जरिए की जाने वाली खुदाई कहा जाता है. इसके लिए पांच से सौ वर्गमीटर वाला एक इलाका चुना जाता है. उसके बाद वहां सुरंग खोदी जाती है. वह इतनी संकरी होती है कि एक बार में एक आदमी ही भीतर जा सकता है. उसी से भीतर जाकर मजदूर कोयला निकालते हैं.</p>
<p><img decoding="async" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/stories/122018/rat_1545842975_618x347.jpeg" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°à¥à¤ à¤à¥ à¤«à¤à¤¸à¥" /></p>
<p><strong>बंगाल में भी जारी है धंधा</strong></p>
<p>दानों की भरमार है. इस इलाके में भी जमीन में बिखरे काले सोने को निकालने की कीमत मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है. वह अपना पेट पालने के लिए रोजाना इन अवैध खदानों से कोयला निकालने के लिए जमीन के भीतर जाते हैं और उनमें से कुछ लोग अकसर उसी में दब जाते हैं. कोई बड़ा हादसा होने की स्थिति में ही दूसरों को इन मौतों के बारे में जानकारी मिलती है.</p>
<p><img decoding="async" src="https://static.hindi.firstpost.com/static-hindi-firstpost/uploads/886x498/jpg/2018/12/carbone-india-miniere-coal-mine.jpg" alt="Related image" /></p>
<p>राज्य के रानीगंज और आसनसोल इलाके में ऐसी सैकड़ों खदानें हैं जिन पर माफिया का राज है. वह कोयला यहां से ट्रकों के जरिए बनारस व कानपुर तक भेजा जाता है. अवैध खुदाई वहीं होती है जिन खदानों से ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) कोयला निकालना बंद कर चुका है.</p>
<p><img decoding="async" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/stories/122018/trapped_755_1545032576_618x347.jpeg" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°à¥à¤ à¤à¥ à¤«à¤à¤¸à¥" /></p>
<p><strong>मजदूरों के साथ ही दबती उनकी मौत की खबरें</strong></p>
<p>रानीगंज के वरिष्ठ पत्रकार विमल देव गुप्ता बताते हैं कि इलाके में लगभग पांच सौ अवैध खदानें हैं और वहां कोई 20 हजार मजदूर काम करते हैं. वह बताते हैं, &#8220;इन खदानों में अक्सर मिट्टी से दब कर या पानी में डूब कर दो-एक लोग मरते रहते हैं. लेकिन यह खबर भी उनके साथ ही वहीं दब जाती है.”</p>
<p><img decoding="async" src="http://khabardekho.com/wp-content/uploads/2016/11/50645-coal-500.jpg" alt="Related image" /></p>
<p>ऐसी एक खदान में काम करने वाले सुखिया मुंडा कहते हैं कि &#8220;हमें पेट की आग बुझाने के लिए मौत के मुंह में जाकर काम करना होता है. लेकिन इसके सिवा कोई विकल्प नहीं है. दुर्घटनाएं अकसर होती रहती हैं. लेकिन जान के डर से तो भूखा नहीं रहा जा सकता.&#8221; वह आगे बताते हैं, &#8220;यह खदानें हमारी रोजी-रोटी का जरिया हैं और यही हमारी मौत की वजह भी बन जाती हैं.”</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="http://sth.india.com/hindi/sites/default/files/2018/12/28/331834-meghalaya-11.jpg" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°à¥à¤ à¤à¥ à¤«à¤à¤¸à¥" width="897" height="504" /></p>
<p>कोयला उद्योग से जुड़े लोग बताते हैं कि इलाके में अवैध खनन एक समानांतर उद्योग है. इसका सालाना टर्नओवर करोड़ों में है. यही वजह है कि इस अवैध कारोबार पर अब तक अंकुश नहीं लग सका है. रोजाना इनसे हजारों टन कोयला निकलता है. कम समय में ज्यादा कोयला निकालने की होड़ ही हादसों को न्योता देती है. इन मजदूरों को न तो किसी तरह का प्रशिक्षण हासिल होता है और न ही वे किसी वैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल करते हैं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://c.ndtvimg.com/2018-12/klct56r8_meghalaya-mining_625x300_22_December_18.jfif" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°à¥à¤ à¤à¥ à¤«à¤à¤¸à¥" width="977" height="601" /></p>
<p>मजदूर संगठन &#8216;भारतीय कोयलरी मजदूर सभा&#8217; के सोमाल राय कहते हैं, &#8220;ईसीएल व राज्य सरकार को अवैध खदानों पर अंकुश लगाने के लिए जल्दी ही कोई साझा योजना बनानी होगी. ऐसा नहीं होने तक इलाके की इन अवैध खदानों में मजदूरों की बलि की सिलसिला जारी रहेगा.”</p>
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		<title>खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने के लिए AIR FORCE ने संभाला मोर्चा, NDRF ने दिए ये संकेत</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/meghalaya-rescue-operation-airforce-to-help-with-20-powerful-pumps-these-signals-given-by-ndrf/</link>
		
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		<pubDate>Fri, 28 Dec 2018 09:47:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: मेघालय के जयंती हिल्स जिले में एक कोयले की खदान में पिछले करीब 15 दिनों से फंसे 15 मजदूर अभी तक निकल नहीं पाए हैं.  कोयला खदान में फंसे लोगों को बचाने के लिए अब एयरफोर्स भी आगे आ गया है. इतना ही नहीं, भारतीय वायु सेना और कोल इंडिया के बचावकर्मी के साथ इस बचाव कार्य ... <a title="खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने के लिए AIR FORCE ने संभाला मोर्चा, NDRF ने दिए ये संकेत" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/meghalaya-rescue-operation-airforce-to-help-with-20-powerful-pumps-these-signals-given-by-ndrf/" aria-label="Read more about खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने के लिए AIR FORCE ने संभाला मोर्चा, NDRF ने दिए ये संकेत">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><b>नई दिल्ली: </b>मेघालय के जयंती हिल्स जिले में एक कोयले की खदान में पिछले करीब 15 दिनों से फंसे 15 मजदूर अभी तक निकल नहीं पाए हैं.  कोयला खदान में फंसे लोगों को बचाने के लिए अब एयरफोर्स भी आगे आ गया है. इतना ही नहीं, भारतीय वायु सेना और कोल इंडिया के बचावकर्मी के साथ इस बचाव कार्य में मदद करने के लिए निजी पंप निर्माता कंपनी मौके पर पहुंच गए हैं. कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) अधिकारी सुदूर ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के कसन इलाके में पहुंच गए हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/stories/122018/meghalaya_1545969450_618x347.jpeg" alt="Meghalaya Rescue operation" width="782" height="439" /></p>
<p>किर्लोस्कर बद्र्स लिमिटेड का दो सदस्यीय दल पहले ही मौके पर पहुंच चुका है।  वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर रत्नाकर सिंह ने कहा कि सी-130जे सुपर हरकुलस शुक्रवार को एनडीआरएफ बचावकर्ताओं को भुवनेश्वर से गुवाहाटी लाने के लिए कार्य में लगाया गया है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://c.ndtvimg.com/2018-12/m9arnbb8_meghalaya-air-force-airlift_625x300_28_December_18.jpg" alt="Meghalaya Rescue Operation: à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ à¤«à¤à¤¸à¥ à¤¹à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°, à¤à¤¯à¤°à¤«à¥à¤°à¥à¤¸ à¤à¥ à¤®à¤¦à¤¦ à¤¸à¥ à¤¬à¤à¤¾à¤µ à¤à¤¾à¤°à¥à¤¯ à¤¤à¥à¤, 10 à¤¬à¤¾à¤¤à¥à¤" /></p>
<p>किर्लोस्कर बद्र्स लिमिटेड के एन.महापात्रा ने  कहा, &#8220;हम गुरुवार को खनन स्थल पर गए और एनडीआरएफ टीम के साथ प्रारंभिक आकलन किया है। हमने एनडीआरएफ व राज्य प्रशासन के साथ खान से पानी निकालने की योजनाओं व रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, &#8220;हमें पानी निकालने के लिए अच्छी संख्या में शक्तिशाली पंपों की जरूरत है और इसकी सूचना हमारे वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है।&#8221;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/stories/122018/rat_1545842975_618x347.jpeg" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ à¤«à¤à¤¸à¥ à¤¹à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°," width="937" height="526" /></p>
<p><strong>पंपों की क्षमता पर्याप्त ना होने पर रोका गया था काम</strong><br />
350 फीट गहरी इस खदान में करीब 70 फीट पानी भरा हुआ है। पानी निकालने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन, पंपों की क्षमता पर्याप्त ना होने की वजह से यह काम रोक दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा क्षमता वाले पंपों को आने में अभी 4 दिन का वक्त और लगेगा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="http://ni24news.com/wp-content/uploads/2018/12/15-miners-stucked-in-rat-mining-in-jaintia-hills-meghalaya-ndrf-15-days-ni24news.jpg" alt="Related image" width="870" height="553" /></p>
<p><strong>एनडीआरएफ को नहीं मिले अच्छे संकेत</strong><br />
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ने संतोष सिंह ने गुरुवार को कहा था- खदान में पानी का स्तर जांचने के लिए एक गोताखोर क्रेन के सहारे उतरा था। 15 मिनट बाद जब उसने सीटी बजाई तो उसे वापस ऊपर खींचा गया। पहली बार बचावकर्मी ने खदान से बदबू आने की बात कही। यह अच्छा संकेत नहीं है। हालांकि, चमत्कार होते हैं और हम अपनी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन, व्यवहारिक तौर पर कहूं तो इस तरह के मामलों में मौके काफी कम होते हैं। थाईलैंड में गुफा में फंसे बच्चों के मुकाबले, यहां की स्थितियां ज्यादा मुश्किल हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2018/12/27/ndrf-indicates-meghalaya-.jpg" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ à¤«à¤à¤¸à¥ à¤¹à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°," /></p>
<p><strong>100 हॉर्स पावर के पंप मांगे, कोई जवाब नहीं मिला</strong><br />
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनडीआरएफ ने जिला प्रशासन से 100 हॉर्स पावर के पंप मांगे थे। लेकिन, अभी तक इस मांग पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://img.timesnownews.com/story/1545972109-Meghalaya.jpg?d=600x450" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ à¤«à¤à¤¸à¥ à¤¹à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°," width="820" height="615" /></p>
<p><strong>नदी का पानी भरने से फंसे थे मजदूर</strong><br />
ये मजदूर पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में स्थित खदान में फंस गए थे। मजदूर खुदाई कर रहे थे, इसी दौरान खदान के पास बहने वाली लैटीन नदी का पानी इसमें भर गया था। इसी पानी को निकालने के लिए पंप मंगाए गए थे, लेकिन इनकी क्षमता नाकाफी साबित हो रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" src="http://hindi.newstrack.com/wp-content/uploads/2018/12/Rat-Mining.jpg" alt="Image result for à¤à¤¦à¤¾à¤¨ à¤®à¥à¤ à¤«à¤à¤¸à¥ à¤¹à¥à¤ 15 à¤®à¤à¤¦à¥à¤°," /></p>
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