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	<title>यूएनएससी अस्थायी सदस्यता &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>UNSC में भारत की बड़ी हुंकार! एस जयशंकर ने चला &#8216;SHANTI&#8217; दांव, जानिए  चुनाव का पूरा गणित और दो-तिहाई का नियम?</title>
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										<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="0"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-520241" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/UN_SecurityCouncil_BG2028129.jpg" alt="" width="2000" height="1333" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/UN_SecurityCouncil_BG2028129.jpg 2000w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/UN_SecurityCouncil_BG2028129-300x200.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/UN_SecurityCouncil_BG2028129-1024x682.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/UN_SecurityCouncil_BG2028129-768x512.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/UN_SecurityCouncil_BG2028129-1536x1024.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2000px) 100vw, 2000px" /></p>
<p data-path-to-node="1"><b data-path-to-node="1" data-index-in-node="0">नई दिल्ली:</b> वैश्विक कूटनीति के मंच से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत ने एक बार फिर दुनिया के सबसे ताकतवर मंच यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी धमक बढ़ाने के लिए शंखनाद कर दिया है। साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अस्थायी सदस्यता का अपना आधिकारिक अभियान शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बार &#8216;SHANTI&#8217; विजन के साथ भारत की मजबूत दावेदारी दुनिया के सामने पेश की है। हालांकि, इस बार भारत की राह में सिर्फ वोट जुटाने की चुनौती नहीं है, बल्कि एक पड़ोसी मुल्क के मददगार देश से सीधी टक्कर भी है। आइए जानते हैं कि इस चुनाव का पूरा गणित क्या है और कैसे भारत महाशक्ति बनने की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है।</p>
<figure id="attachment_520242" aria-describedby="caption-attachment-520242" style="width: 2550px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" class="size-full wp-image-520242" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/licensed-image-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1708" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/licensed-image-scaled.jpg 2560w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/licensed-image-300x200.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/licensed-image-1024x683.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/licensed-image-768x512.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/licensed-image-1536x1025.jpg 1536w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/licensed-image-2048x1366.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /><figcaption id="caption-attachment-520242" class="wp-caption-text"> </figcaption></figure>
<h2 data-path-to-node="2">यूक्रेन-गाजा संकट के बीच ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बना भारत</h2>
<p data-path-to-node="3">पूरी दुनिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठी है। एक तरफ यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा, तो दूसरी तरफ गाजा संघर्ष और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया को डरा रहा है। ऐसे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) के बीच भारत ने अपनी उम्मीदवारी पेश करके साफ कर दिया है कि वह दुनिया में केवल तमाशा देखने वाला देश नहीं, बल्कि शांतिदूत की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। भारत का पूरा जोर इस बार &#8216;ग्लोबल साउथ&#8217; यानी विकासशील और गरीब देशों की आवाज बनने पर है। अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, फिजी और श्रीलंका जैसे ताकतवर और रणनीतिक साझेदार देशों ने खुले तौर पर भारत की इस दावेदारी का समर्थन कर दिया है।</p>
<h2 data-path-to-node="4">ताजिकिस्तान से सीधी टक्कर: भारत के सामने खड़ी हुई कूटनीतिक चुनौती</h2>
<p data-path-to-node="5">इस बार का चुनाव भारत के लिए वॉकओवर नहीं होने वाला है। साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए होने वाला यह चुनाव अगले साल यानी जून 2027 में आयोजित किया जाएगा। इस बार एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group) के कोटे से केवल एक ही सीट खाली है, जिस पर भारत और ताजिकिस्तान के बीच सीधी और दिलचस्प भिड़ंत होने जा रही है। ताजिकिस्तान की एंट्री ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है क्योंकि उसे 57 मुस्लिम देशों के संगठन OIC (Organisation of Islamic Cooperation) का समर्थन मिलने की पूरी संभावना है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान के इशारे पर कूटनीतिक चक्रव्यूह रचने की कोशिश की जा सकती है, जिससे निपटने के लिए भारत को एक बहुत बड़ी और आक्रामक कूटनीतिक लामबंदी करनी होगी।</p>
<h2 data-path-to-node="6">3 लाख से ज्यादा सैनिक और 50 से अधिक मिशन: भारत का बेदाग रिकॉर्ड</h2>
<p data-path-to-node="7">भारत सुरक्षा परिषद के लिए कोई नया नाम नहीं है। देश अब तक 8 बार इसका अस्थायी सदस्य रह चुका है और हर बार भारत ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UN Peacekeeping) में भारत का योगदान ऐतिहासिक रहा है। भारत ने अब तक 50 से अधिक वैश्विक शांति मिशनों में अपने 3 लाख से ज्यादा जांबाज सैनिक भेजे हैं, जिन्होंने दुनिया के सबसे अशांत इलाकों में शांति स्थापित की है। इसके अलावा आतंकवाद के खात्मे, समुद्री सुरक्षा, रंगभेद और उपनिवेशवाद के खिलाफ भारत हमेशा अग्रणी भूमिका में रहा है। साल 2021-22 के कार्यकाल के दौरान, जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी, तब भारत ने अपनी &#8216;वैक्सीन कूटनीति&#8217; के जरिए दुनिया के गरीब देशों की मदद करके असली वैश्विक नेतृत्व का परिचय दिया था।</p>
<h2 data-path-to-node="8">सिर्फ दो साल का मेहमान नहीं, अब स्थायी सीट पर है भारत की नजर</h2>
<p data-path-to-node="9">भारत अब सिर्फ दो साल की अस्थायी सदस्यता से संतुष्ट होने वाला नहीं है। नई दिल्ली का अंतिम लक्ष्य सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट (Permanent Seat) हासिल करना है। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (P5) का कार्यकाल कभी खत्म नहीं होता और उनके पास सबसे बड़ी ताकत &#8216;वीटो पावर&#8217; होती है, जबकि अस्थायी सदस्य केवल 2 साल के लिए चुने जाते हैं और उनके पास वीटो की शक्ति नहीं होती। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व शांति में सबसे बड़ा योगदान देने वाले देश के रूप में भारत का यह हक बनता है। पी5 (P5) देशों में से अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन मौखिक रूप से भारत का समर्थन करते हैं, लेकिन चीन हमेशा इसमें अपना अड़ंगा लगा देता है। यही वजह है कि भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील (G4 देश) मिलकर संयुक्त राष्ट्र के 1945 के पुराने ढांचे को बदलने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।</p>
<h2 data-path-to-node="10">वीटो पावर का खेल और दुनिया के बड़े फैसलों का केंद्र</h2>
<p data-path-to-node="11">संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मुख्य काम दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी (अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन) और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। सुरक्षा परिषद की सबसे बड़ी ताकत वीटो पावर है। अगर परिषद के 14 देश किसी प्रस्ताव के पक्ष में हों, लेकिन इन 5 स्थायी देशों में से कोई एक भी विरोध में वोट कर दे (वीटो कर दे), तो वह प्रस्ताव तुरंत रद्दी के ढेर में चला जाता है। दुनिया के किसी भी देश पर प्रतिबंध लगाना हो, शांति सेना भेजनी हो या अंतरराष्ट्रीय सैन्य कार्रवाई की मंजूरी देनी हो, ये सभी बड़े फैसले UNSC के प्रस्ताव से ही पास होते हैं। किसी भी सामान्य प्रस्ताव को पास कराने के लिए कम से कम 9 वोटों की जरूरत होती है, बशर्ते किसी स्थायी देश ने वीटो न किया हो।</p>
<h2 data-path-to-node="12">आतंकवाद के खिलाफ और पाकिस्तान को घेरने का सबसे बड़ा हथियार</h2>
<p data-path-to-node="13">भारत के लिए सुरक्षा परिषद की यह सीट घरेलू सुरक्षा और विदेश नीति के लिहाज से बेहद अहम है। लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार संगठनों के आतंकियों को &#8216;ग्लोबल टेररिस्ट&#8217; घोषित करवाने और कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के झूठे प्रोपेगैंडा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने के लिए यह सीट भारत को एक बेहद मजबूत मंच देती है। इसके अलावा, युद्ध के कारण जब गरीब देशों में तेल, अनाज और फर्टिलाइजर का संकट आता है, तो भारत उनकी ढाल बनकर खड़ा होता है। यूक्रेन और गाजा संकट के समय भी भारत ने किसी गुट का हिस्सा बनने के बजाय हमेशा बातचीत और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy) का रास्ता सुझाया है, जिससे दुनिया में भारत की साख और मजबूत हुई है।</p>
<h2 data-path-to-node="14">क्या है UNSC चुनाव का पूरा गणित और दो-तिहाई का नियम?</h2>
<p data-path-to-node="15">सुरक्षा परिषद के चुनाव की प्रक्रिया बेहद सख्त और कूटनीतिक जोड़-तोड़ से भरी होती है। यह चुनाव पूरी तरह से क्षेत्रीय कोटे में बंटा होता है। कुल 10 अस्थायी सीटों में से 5 सीटें अफ्रीकी और एशियाई देशों के लिए, 1 पूर्वी यूरोप, 2 लैटिन अमेरिका और 2 पश्चिमी यूरोप या अन्य देशों के लिए आरक्षित होती हैं। हर साल 5 सीटों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए वोटिंग होती है। चुनाव जीतने के लिए संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देशों में से उपस्थित और मतदान करने वाले देशों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत पाना अनिवार्य होता है। यानी भारत को इस चुनाव को जीतने के लिए कम से कम 128-129 वोटों की आवश्यकता होगी।</p>
<p data-path-to-node="16">भारत का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। साल 2021 के चुनाव में भारत ने 192 वोटों में से रिकॉर्ड 184 वोट हासिल किए थे। हालांकि इस बार ताजिकिस्तान की चुनौती के कारण मुकाबला दिलचस्प जरूर हो गया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और वैश्विक साख को देखते हुए दुनिया के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत एक बार फिर इस मंच पर अपनी जीत का परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p data-path-to-node="19">
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