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	<title>राजनीति समाचार&#8221; &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>परिसीमन क्या है? निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से जुड़ी 5 बड़ी बातें, जानें क्यों दक्षिण भारतीय राज्यों में है इसे लेकर खौफ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 08:11:58 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<div id="model-response-message-contentr_236bd5b642d89cad" class="markdown markdown-main-panel enable-updated-hr-color" dir="ltr" aria-live="polite" aria-busy="false">
<h2 data-path-to-node="0"><b> <img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-513005" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/04/Delimitation_Commission.jpg" alt="" width="599" height="342" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/04/Delimitation_Commission.jpg 599w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/04/Delimitation_Commission-300x171.jpg 300w" sizes="(max-width: 599px) 100vw, 599px" /></b></h2>
<p data-path-to-node="1"><b data-path-to-node="1" data-index-in-node="0">नई दिल्ली :</b> देश की राजनीति में इन दिनों &#8216;परिसीमन&#8217; (Delimitation) शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में है। महिला आरक्षण कानून के लागू होने के बाद अब सबकी निगाहें इसी प्रक्रिया पर टिकी हैं। सरल शब्दों में कहें तो परिसीमन का अर्थ है— जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करना। यह प्रक्रिया भारतीय लोकतंत्र के &#8216;एक वोट, एक मूल्य&#8217; के सिद्धांत को मजबूत करने के लिए अपनाई जाती है, ताकि हर जनप्रतिनिधि लगभग समान आबादी का प्रतिनिधित्व कर सके।</p>
<h3 data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन से गठित होता है शक्तिशाली आयोग</b></h3>
<p data-path-to-node="3">परिसीमन का कार्य एक स्वतंत्र &#8216;परिसीमन आयोग&#8217; द्वारा किया जाता है, जिसका गठन राष्ट्रपति की अधिसूचना के जरिए होता है। यह आयोग कितना शक्तिशाली है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके द्वारा लिए गए निर्णयों को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। इसका उद्देश्य राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर निष्पक्ष रूप से चुनावी सीमाओं का निर्धारण करना है।</p>
<h3 data-path-to-node="4"><b data-path-to-node="4" data-index-in-node="0">सांसदों की संख्या 543 से बढ़कर हो सकती है 850</b></h3>
<p data-path-to-node="5">वर्तमान में देश में लोकसभा सीटों का बंटवारा 1971 की जनगणना के आधार पर चल रहा है। पिछले 55 वर्षों में देश की जनसंख्या में लगभग 2.25 गुना की वृद्धि हुई है। इतनी बड़ी आबादी के प्रबंधन और बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए सांसदों की संख्या को 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने की तैयारी है। नई संसद भवन को भी इसी भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि बढ़ी हुई संख्या के अनुरूप सांसदों के बैठने की व्यवस्था हो सके।</p>
<h3 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत: क्यों बढ़ रहा है विवाद?</b></h3>
<p data-path-to-node="7">चूंकि परिसीमन का मुख्य आधार आबादी है, इसलिए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इससे संसद में इन राज्यों का दबदबा और अधिक बढ़ जाएगा। दूसरी ओर, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतरीन कार्य किया है। अब उन्हें डर है कि आबादी कम होने के कारण उनकी सीटों में कम बढ़ोतरी होगी, जिसे वे अपने अच्छे कार्यों की &#8216;सजा&#8217; के तौर पर देख रहे हैं।</p>
<h3 data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">विपक्ष की आशंका और राज्यों का संतुलन</b></h3>
<p data-path-to-node="9">कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि सीटों के इस नए गणित से राज्यों के बीच का राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। विपक्ष का तर्क है कि इससे उन राज्यों को सीधा चुनावी फायदा मिल सकता है जहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मजबूत स्थिति में है। इसी कारण दक्षिण भारतीय राज्य इसे अपनी आवाज को केंद्र में कमजोर करने की साजिश के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p data-path-to-node="11">
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		<title>कांग्रेस भी है बबुआ के साथ, मायावती ने कहा CBI जाँच से घबराने की जरूरत नहीं</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jan 2019 11:27:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ बहुजन समाज पार्टी(बसपा) अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सरकार पर खनन के एक पुराने मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरों(सीबीआई) का दुरूपयोग करने का आरोप लगाते कहा कि इससे घबराने की नहीं है बल्कि इस षडयंत्र को विफल करने की जरूरत है। सुश्री मायावती ने सोमवार को यहां जारी बयान में कहा कि खनन ... <a title="कांग्रेस भी है बबुआ के साथ, मायावती ने कहा CBI जाँच से घबराने की जरूरत नहीं" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bsp-supremo-mayawati-phone-calls-to-sp-chief-akhilesh-yadav-on-cbi-enquiry-of-mining-scam-of-uttarpradesh-upas-news/" aria-label="Read more about कांग्रेस भी है बबुआ के साथ, मायावती ने कहा CBI जाँच से घबराने की जरूरत नहीं">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p title="मायावती ने कहा- अखिलेश को सीबीआई से घबराने की जरूरत नहीं, कांग्रेस भी आई साथ">लखनऊ बहुजन समाज पार्टी(बसपा) अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सरकार पर खनन के एक पुराने मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरों(सीबीआई) का दुरूपयोग करने का आरोप लगाते कहा कि इससे घबराने की नहीं है बल्कि इस षडयंत्र को विफल करने की जरूरत है। सुश्री मायावती ने सोमवार को यहां जारी बयान में कहा कि खनन के पुराने मामले में सी.बी.आई. द्वारा छापेमारी की जा रही है।</p>
<p title="मायावती ने कहा- अखिलेश को सीबीआई से घबराने की जरूरत नहीं, कांग्रेस भी आई साथ">उसकी आड़ में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव से पूछताछ करने की धमकी दी जा रही है। उन्होने कहा कि यह पूरी तरह से राजनीतिक विद्वेष की भावना से चुनावी स्वार्थ के लिये किया जा रहा है। इससे घबराने की नहीं है बल्कि इस षडयंत्र को विफल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा की इस प्रकार की घिनौनी राजनीति एवं चुनावी षड़यंत्र कोई नई बात नहीं है। यह उनका पुराना हथकण्डा है जिसे देश की जनता अच्छी तरह से समझती है। जिसका ख़ामियाज़ा आने वाले लोकसभा आमचुनाव में भुगतने के लिये भाजपा तैयार रहना होगा। सुश्री मायावती ने कहा कि गठबंधन की खबर से भाजपा परेशान है।</p>
<p title="मायावती ने कहा- अखिलेश को सीबीआई से घबराने की जरूरत नहीं, कांग्रेस भी आई साथ">भाजपा की सरकार के इसारे पर लम्बित पड़े खनन मामले में सीबीआई ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। इसके साथ ही श्री यादव से भी पूछताछ करने सम्बंधी खबर जानबूझकर फैलाई। यह राजनीतिक विद्वेष तथा चुनावी षड़यंत्र के तहत सपा-बसपा गठबंधन को बदनाम और प्रताड़ित करने की कार्रवाई नहीं है तो और क्या है। बसपा अध्यक्ष ने रविवार को श्री अखिलेश यादव को फोन कर कहा कि इससे घबराने की बात नहीं है बल्कि इसका डटकर मुकाबला करके, इनके इस षडयंत्र को विफल करने की जरूरत है।</p>
<p title="मायावती ने कहा- अखिलेश को सीबीआई से घबराने की जरूरत नहीं, कांग्रेस भी आई साथ">देश व दुनिया इस हकीकत को जानती है कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करके अपने विरोधियों प्रताड़ित किया है। सत्ता का दुरूपयोग करते हुये भाजपा के तमाम नेताओं को हर प्रकार के आपराधिक मामलों में बरी करा दिया। सुश्री मायावती ने कहा कि कांग्रेस की तरह भाजपा भी सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करके अपने विरोधियों को फर्जी मामले में फंसाने में माहिर है। बसपा मूवमेन्ट भी इसका भुक्तभोगी रहा है। उन्होने आरोप लगाया कि बसपा ने प्रदेश की लोकसभा की 80 में से 60 सीटे भाजपा को देना स्वीकार नहीं किया तो तब उन्हें ताज मामले में फर्जी तौर पर फंसा दिया था।</p>
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		<title>रूठे बबुआ को मनाने का सिलसिला जारी, कांग्रेस ने बढाया दोस्ती था हाथ&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/continuing-to-celebrate-rowda-babbua-the-congress-had-increased-friendship-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Dec 2018 08:29:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ :  सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में सपा विधायक को मंत्री न बनाए जाने से कांग्रेस से नाराज है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमने एमपी में कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दिया है, फिर भी कांग्रेस ने हमारे विधायक को मंत्री नहीं बनाया।  यूपी में एसपी-बीएसपी ... <a title="रूठे बबुआ को मनाने का सिलसिला जारी, कांग्रेस ने बढाया दोस्ती था हाथ&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/continuing-to-celebrate-rowda-babbua-the-congress-had-increased-friendship-news/" aria-label="Read more about रूठे बबुआ को मनाने का सिलसिला जारी, कांग्रेस ने बढाया दोस्ती था हाथ&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="" src="https://www.jagranimages.com/inext/01_02_2017-1_2_17_rahul.jpg" alt="Image result for à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤² à¤à¤à¤¿à¤²à¥à¤¶" width="720" height="474" /></p>
<p><strong>लखनऊ</strong> :  सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में सपा विधायक को मंत्री न बनाए जाने से कांग्रेस से नाराज है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमने एमपी में कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दिया है, फिर भी कांग्रेस ने हमारे विधायक को मंत्री नहीं बनाया।  यूपी में एसपी-बीएसपी और आरएलडी के संभावित महागठबंधन में कांग्रेस को दरकिनार करने के संकेत के बाद यूपी की राजनीति अब नई करवट लेनी लगी है। मध्य प्रदेश के नए मंत्रिमंडल में एसपी-बीएसपी को दरकिनार करने वाली कांग्रेस बैकफुट पर नजर आने लगी है। अब यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने अखिलेश की तरफ नई दोस्ती बढ़ाने का संकेत भी दे दिया है। उनका कहना है कि पार्टियों के नेतृत्व आपस में बात करके मामले को सुलझा लेंगे।</p>
<p>राज बब्बर ने कहा, &#8216;समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेता (अखिलेश यादव) के वक्तव्य में उनकी नाराजगी नजर आ रही है। नाराजगी कभी बेगानों से नहीं होती है। कांग्रेस और एसपी का नेतृत्व आपस में बात करके इन चीजों को सुलझा लेंगे। जनता चाह रही है कि हम सब लोग मिलकर चुनाव लड़ें।&#8217; बता दें कि इससे पहले बुधवार को अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के नए मंत्रिमंडल में एसपी विधायक को जगह न दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की और कांग्रेस पर तंज कसते हुए संभावित तीसरे मोर्चे का रुख करने का इशारा दिया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">Raj Babbar, Congress: Samajwadi Party ke rashtriye neta ke vktavya mein unki narazgi nazar aa rahi hai. Narazgi kabhi begano se nahi hoti hai. Congress aur SP ka netritv aapas mein baat kar ke in cheezon ko suljha lenge. Janta chah rahi hai ki hum sab log milkar chunav ladein. <a href="https://t.co/6lBgI8HhaL">pic.twitter.com/6lBgI8HhaL</a></p>
<p>&mdash; ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) <a href="https://twitter.com/ANINewsUP/status/1078177744125607936?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">December 27, 2018</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तेलंगाना के मुख्&#x200d;यमंत्री के चंद्रशेखर राव के क्षेत्रीय दलों को एक साथ लाकर संघीय मोर्चा बनाने का समर्थन किया। उन्&#x200d;होंने कहा था कि वह खुद ही चंद्रशेखर राव से मिलने के लिए हैदराबाद जाएंगे। वहीं मध्&#x200d;य प्रदेश में अपने विधायक को मंत्री नहीं बनाने पर अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि उन्&#x200d;होंने समाजवादियों का रास्&#x200d;ता साफ कर दिया है। उन्&#x200d;होंने कहा कि बीजेपी को भी धन्&#x200d;यवाद जिसने समाजवादियों को बैकवर्ड समझा।</p>
<p>अखिलेश ने कहा था, &#8216;हम कांग्रेसियों को भी धन्&#x200d;यवाद देते हैं जिन्&#x200d;होंने मध्&#x200d;य प्रदेश में हमारे विधायक को मंत्री नहीं बनाया। हम उनका और भारतीय जनता पार्टी का धन्&#x200d;यवाद देते हैं। कम से कम उन्&#x200d;होंने समाजवादियों का रास्&#x200d;ता साफ कर दिया।&#8217; अखिलेश यादव के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि वह कांग्रेस और बीजेपी से इतर एक तीसरे मोर्चे के साथ लोकसभा चुनाव में जा सकते हैं जिसके लिए चंद्रशेखर राव प्रयासरत हैं।<br />
<strong><br />
कमलनाथ सरकार ने मंत्रिमंडल में नहीं दी जगह</strong><br />
बता दें कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस जब बहुमत का आंकड़ा छूने से दो कदम दूर थी तब बीएसपी और एसपी ने उन्हें अपना समर्थन देने की घोषणा की थी। इसके अलावा 4 निर्दलीयों ने भी कांग्रेस को समर्थन दिया। हालांकि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने अपने मंत्रिमंडल में न ही बीएसपी और न ही एसपी विधायक को जगह दी है।</p>
<p>उधर, माना जा रहा है कि यूपी की 80 लोकसभा सीटों के बंटवारे का फॉर्म्युला इस तरह से तय हुआ है कि एसपी और बीएसपी लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। वहीं कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की स्थिति में उन्हें सिर्फ उनकी परंपरागत दो सीटें- अमेठी और रायबरेली दी जाएंगी। इसके अलावा इस गठबंधन में अजित सिंह की राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को वेस्ट यूपी में तीन सीटें मिल सकती हैं।<br />
<strong><br />
15 जनवरी को मायावती कर सकती हैं ऐलान</strong><br />
रिपोर्ट्स की मानें तो चुनाव पूर्व बीएसपी और एसपी का गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ यह भी कयास लग रहे हैं कि आगामी 15 जनवरी को बीएसपी चीफ मायावती के जन्मदिन पर इसका ऐलान भी हो सकता है। इस गठबंधन में फिलहाल आरएलडी के भी शामिल होने के संकेत हैं। हालांकि कांग्रेस से अभी दोनों पार्टियों ने दूरी बनाई हुई है। ऐसे में कांग्रेस की एसपी को मनाने की जुगत कितना काम करेगी, यह देखना होगा।</p>
<div><b>अब कानून-व्यवस्था पर राज्यपाल रामनाईक नहीं उठाते सवाल</b></div>
<div>अखिलेश ने कहा कि पहले राज्यपाल रामनाईक प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते थे, पर अब चुप रहते हैं। जबकि प्रदेश की कानून-व्यवस्था बदहाल है। अब राजभवन में लोगों को बुलाकर खाना खिलाया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले तो लोगों को सपना दिखाया और अब तक वादों को पूरा नहीं कर सके हैं। जब हम विकास कर रहे थे तो हमें जाति व धर्म से तौला गया था। लोकभवन में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा लगवाने की बात पर अखिलेश ने भाजपा को बधाई दी और कहा कि आने वाले समय में सपा भी वहां चुने हुए नेताओं की प्रतिमा लगवाएगी। वहीं, कुंभ को लेकर की जा रही तैयारियों पर अखिलेश ने कहा कि यह अच्छी बात है कि एक बार नेता जी (मुलायम सिंह यादव) ने कुंभ करवाया था और एक बार मैंने। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में सपा विधायक को मंत्री न बनाए जाने से कांग्रेस से नाराज है।</div>
<div></div>
<div>उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमने एमपी में कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दिया है, फिर भी कांग्रेस ने हमारे विधायक को मंत्री नहीं बनाया। अखिलेश ने आगे कहा कि ऐसी हरकत कर कांग्रेस ने यूपी में हमारा रास्ता साफ कर दिया है। अखिलेश के रुख से साफ हो गया है कि सपा-बसपा गठबंधन से कांग्रेस बाहर रहेगी। पहले भी यही कयास लगाए जा रहे थे कि सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस शामिल नहीं होगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी ऐसे ही संकेत दिए थे। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 214, बसपा को दो व सपा को एक सीट मिली थी। जिसके बाद बहुमत के लिए जरूरी सीटों को जुटाने के लिए सपा-बसपा ने कांग्रेस का बिना शर्त समर्थन दिया था। समर्थन का एलान करते हुए मायावती ने कहा था कि हम एमपी में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस को अहंकार से भरा हुआ करार दिया था। ऐसे में पहले मायावती व अब अखिलेश यादव के रुख से यह लगभग साफ लग रहा है कि यूपी में कांग्रेस सपा-बसपा गठबंधन से बाहर रहेगी।</div>
<div></div>
<div><b> </b></div>
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		<title>टूट रही विपक्षी एकता, अखिलेश-माया के गठबंधन से कांग्रेस की NOEntry!</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Dec 2018 06:47:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ :  आगामी 2019 में लोकसभा की चुनावी बिसात पर असर छोड़ना शुरू कर दिया है. कांग्रेस की 3 राज्यों में जीत के  परिणाम आने के चंद घंटों के अंदर ही उत्तर प्रदेश की सियासत में घटनाक्रम तेजी से बदलता दिख रहा है. भाजपा के लिए ये चुनाव बेहद जीतना जरुरी है. इस बीच एक बड़ी ... <a title="टूट रही विपक्षी एकता, अखिलेश-माया के गठबंधन से कांग्रेस की NOEntry!" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/opposition-unity-questioned-as-sp-and-bsp-skips-briefing-no-meet-over-house-strategy-with-congress-news/" aria-label="Read more about टूट रही विपक्षी एकता, अखिलेश-माया के गठबंधन से कांग्रेस की NOEntry!">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ</strong> :  आगामी 2019 में लोकसभा की चुनावी बिसात पर असर छोड़ना शुरू कर दिया है. कांग्रेस की 3 राज्यों में जीत के  परिणाम आने के चंद घंटों के अंदर ही उत्तर प्रदेश की सियासत में घटनाक्रम तेजी से बदलता दिख रहा है. भाजपा के लिए ये चुनाव बेहद जीतना जरुरी है. इस बीच एक बड़ी खबर आ रही है.  क्या उत्तर प्रदेश में बहुचर्चित विपक्षी एकता पटरी से उतर रही है?</p>
<p>मंगलवार को विधानसभा सत्र के पहले दिन बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और समाजवादी पार्टी (एसपी) ने सेंट्रल हॉल में पारंपरिक मीडिया ब्रीफिंग से कन्नी काट ली। हालांकि शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने जरूर उन मुद्दों के बारे में मीडिया को बताया जिन्हें वह उठाना चाहती है। इससे पहले तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार के शपथग्रहण से अखिलेश यादव और मायावती ने दूरी बनाई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यूपी में महागठबंधन अभी दूर की कौड़ी है।</p>
<p>बसपा सूत्रों की मुताबिक यूपी में सपा-बसपा के साथ गठबंधन और सीटों के फॉर्मूला तय हो गया है. इस फॉर्मूले के तहत कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली छोड़ सकते हैं. इसके अलावा चौधरी अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी को  2 से 3 सीटें मिल सकती है. आरएलडी के खाते में बागपत, मुजफ्फरनगर और कैराना संसदीय सीटें दी जाएगी.</p>
<p>सूत्रों की मानें तो दोनों पार्टियों ने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में अपने लिए सीटें तय कर ली है. एक फॉर्मूले के मुताबिक बीएसपी 38 और सपा 37 सीटों पर चुनावी लड़ेगी. जबकि दूसरे फॉर्मूले के तहत बसपा 39 और सपा को 37 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेंगी. ऐसी स्थिति में आरएलडी को 2 सीटें मिल सकती है. कहा जा रहा है कि इस फॉर्मूले पर दोनों ही दलों के शीर्ष नेताओं के बीच सहमति भी बन चुकी है.</p>
<p>राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकारों के शपथग्रहण समारोह में दोनों पार्टियां शामिल नहीं हुई थीं। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि एसपी-बीएसपी ने इन राज्यों में कांग्रेस सरकार को अपना समर्थन दे रखा है। मध्य प्रदेश में तो कांग्रेस अल्पमत में थी लेकिन एसपी ने अपने एक और बीएसपी ने दो विधायकों के समर्थन का ऐलान करके सरकार गठन का रास्ता साफ किया था। इस बीच शपथग्रहण में शामिल ना होने को लेकर दोनों पार्टियों ने चुप्पी साध रखी है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://www.hindustantimes.com/rf/image_size_960x540/HT/p2/2018/07/17/Pictures/karnataka-swearing-in-ceremony_cdebe046-899c-11e8-b2f4-2ee9fa0c7dec.jpg" alt="Related image" /></p>
<p><strong><br />
2019 में यूपी में बनेगा महागठबंधन?</strong><br />
इस घटनाक्रम ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी-एसपी के गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यहां तक कि इस साल हर सत्र की शुरुआत से पहले विपक्षी दलों की होने वाली औपचारिक बैठक और चर्चा तक नहीं हुई। इस बीच एक वरिष्ठ बीजेपी नेता का कहना है कि सत्र के पहले दिन पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और मंत्री राजकुमार वर्मा को श्रद्धांजलि दी गई लिहाजा कहने को कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, &#8216;मंगलवार को कुछ भी नहीं हुआ लिहाजा हमने मीडिया से बात नहीं की। कांग्रेस को भी ऐसे दिन कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।&#8217;</p>
<p>एसपी के एक विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) का कहना है कि चूंकि विधान भवन के बाहर सुबह एक विरोध प्रदर्शन था और इस दौरान मीडिया को संबोधित किया गया, ऐसे में दोबारा मीडिया से बात करने की जरूरत नहीं थी। हालांकि एसपी-बीएसपी की ओर से औपचारिक ब्रीफिंग से दूर रहने पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि यह सत्र अनूठा है क्योंकि विपक्षी पार्टियों ने एक साझा रणनीति के लिए अब तक कोई बैठक नहीं की है।  <strong><br />
</strong><br />
एक वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य ने कहा, &#8216;आम तौर पर हर सत्र के पहले विधानसभा और विधान परिषद में विपक्षी पार्टियां एक-दूसरे से मिलती हैं और अनौपचारिक रूप से आगे की रणनीति पर चर्चा करती हैं। प्रमुख विपक्षी पार्टी के रूप में एसपी ज्यादातर पहल करती रही है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है।&#8217;</p>
<p><strong>शपथ समारोह से दूरी, मिले ये संकेत</strong><br />
मायावती, अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की शपथ ग्रहण समारोह से दूरी के बाद कांग्रेस की गठबंधन में मौजूदगी को लेकर वेस्ट यूपी में काफी चर्चा है। दरअसल, जिस तरह से एसपी, बीएसपी और आरएलडी की तरफ से कांग्रेस से अलग रहने का संदेश देने की कोशिश की जा रही है, उससे माना जा रहा है कि 2019 में वेस्ट यूपी में सियासी तस्वीर अलग हो सकती है।</p>
<p>वेस्ट यूपी में दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग (जाट) के वोटों के सम्मिलित आंकड़े बीजेपी को 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में मिले मतों से काफी भारी है। दलितों पर बीएसपी, पिछड़ों (जाटों) पर आरएलडी और बीजेपी, मुस्लिमों पर एसपी-बीएसपी, आरएलडी और कांग्रेस का दावा है। कांग्रेस के अलग रहकर चुनाव लड़ने से सहारनपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, मेरठ आदि जिलों में गठबंधन को मिलने वाले वोटों में खासकर मुस्लिमों में बंटवारे का सबसे बड़ा खतरा संभावित है। ऐसे में बीजेपी को फायदा हो सकता है।</p>
<p><strong>35 सीटों पर निर्णायक स्थिति में हैं मुस्लिम मतदाता</strong><br />
जानकारों की मानें तो वेस्ट यूपी की करीब 35 प्रतिशत सीटों पर मुस्लिम मत निर्णायक है। जनसंख्या में मुस्लिमों की आबादी करीब 19 फीसद है। शहरी इलाकों में करीब 32 और ग्रामीण इलाकों में 16 फीसद है। यूपी में 13 लोकसभा सीटों पर मुस्लिमों की आबादी 30 फीसद या उससे ज्यादा है। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर में 40 फीसद से ज्यादा मुसलमान हैं। रामपुर में 50 फीसद से ऊपर मुस्लिमों की तादाद है। कैराना में 35 फीसद से ज्यादा, मेरठ में 30 से ज्यादा, बागपत, गाजियाबाद में 25 फीसद से ज्यादा मुस्लिम हैं। नगीना और बरेली ऐसे जिले हैं, जहां एक तिहाई मुस्लिम हैं। सिर्फ गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर में 20 फीसदी से कम मुस्लिम हैं। बीजेपी के वेस्ट यूपी अध्यक्ष अश्विनी त्यागी का कहना है कि संभावित गठबंधन स्वार्थ की कवायद है, इसे ना तीन राज्यों के चुनाव में होना था और ना आगे 2019 के चुनाव में होगा।</p>
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		<title>बहराइच : सांसद सावित्री बाई फुले ने भाजपा से दिया इस्तीफा, लगाये दलित विरोधी होने का आरोप </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Dec 2018 14:57:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ। बहराइच से सांसद  और दलित नेता सावित्री बाई फ ुले ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए उन्हो΄ने कहा उनका आज से बीजेपी से कोई लेना देना नही΄ है। जब तक उनका कार्यकाल रहेगा वो सा΄सद बनी΄ रहे΄गी, लेकिन बीजेपी से कोई नाता नही΄ रखे΄गी। लखनऊ ... <a title="बहराइच : सांसद सावित्री बाई फुले ने भाजपा से दिया इस्तीफा, लगाये दलित विरोधी होने का आरोप " class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bahraich-mp-savitri-bai-phule-resigns-from-bjp-accused-of-being-anti-dalit-news/" aria-label="Read more about बहराइच : सांसद सावित्री बाई फुले ने भाजपा से दिया इस्तीफा, लगाये दलित विरोधी होने का आरोप ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img decoding="async" src="https://d3pc1xvrcw35tl.cloudfront.net/sm/images/686x514/bai-fulle_20180317622.jpg" alt="Related image" /></div>
<div></div>
<div>लखनऊ। बहराइच से सांसद  और दलित नेता सावित्री बाई फ ुले ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए उन्हो΄ने कहा उनका आज से बीजेपी से कोई लेना देना नही΄ है। जब तक उनका कार्यकाल रहेगा वो सा΄सद बनी΄ रहे΄गी, लेकिन बीजेपी से कोई नाता नही΄ रखे΄गी। लखनऊ मे΄ बाबा साहब भीम राव अ΄बेडकर के परिनिर्वाण दिवस के मौके पर सावित्री बाई फु ले ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्हो΄ने आरोप लगाया कि बीजेपी दलित, पिछड़ा और मुस्लिम विरोधी है। उन्हो΄ने कहा बीजेपी देश को मनुस्मृति से चलाना चाहती है और आरक्षण खत्म करने का साजिश रच रही है। उन्होने कहा जब तक वह जि΄दा है΄, दोबारा बीजेपी मे΄ वापस नही΄ लौटे΄गी।</div>
<div></div>
<div>उन्हो΄ने कहा भाजपा के म΄त्री स΄विधान बदलने की बात करते है΄, बड़े नेता आरक्षण खत्म करने की बात करते है΄, अल्पस΄ख्यक लोगो΄ को प्रताडि़त किया जा रहा है, के΄द्र सरकार ने दावा किया था 15 लाख आए΄गे, बहुजन समाज के इतिहास को मिटाया जा रहा है। देश का विकास न करके मन्दिर और मूर्तिया΄ बनाई जा रही है। भारतीय स΄विधान की धज्जिया΄ उड़ाई जा रही है। उधर यूपी   के मुख्यम΄त्री कहते΄ है कि हनुमान जी दलित थे, हनुमान दलित थे लेकिन मनुवादियो΄ के खिलाफ  थे, हनुमान जी दलित थे तभी राम ने उन्हे΄ ब΄दर बना दिया, दलितो΄ को म΄दिर नही स΄विधान चाहिए। फुले ने आरोप लगाया कि दलित सा΄सद होने की वजह से उनकी कभी बात नही΄ सुनी गई और हमेशा उपेक्षा की गई। इससे पहले भी भाजपा विधायक अपनी पार्टी का विरोध कई बार कर चुकी है। उनके बयानो΄ से भाजपा पहले कई बार मुश्किलो΄ मे΄ घिर चुकी है। पिछले दिनो΄ राम म΄दिर के मुददे को लेकर भी फु ले ने बीजेपी पर निशाना साधा था। इस दौरान सा΄सद ने राम म΄दिर को म΄दिर न बता देश के 3 फीसदी ब्राह्मणो΄ की कमाई का ध΄धा करार दिया था। इससे पहले उन्हो΄ने भगवान राम को शितहीन बताते हुए कहा था कि अगर उनमे΄ शित होती तो अयोध्या मे΄ राम म΄दिर कब का बन जाता।</div>
<div></div>
<div><strong>राम मंदिर के मुद्दे पर बीजेपी को घेरा था</strong><br />
बता दें कि पिछले ही दिनों राम मंदिर के मुद्दे पर फुले ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था। इस दौरान सांसद ने राम मंदिर को मंदिर न बता देश के तीन प्रतिशत ब्राह्मणों की कमाई का धंधा करार दिया था। इससे पहले उन्होंने भगवान राम को शक्तिहीन बताते हुए कहा था कि अगर उनमें शक्ति होती तो अयोध्या में राम मंदिर बन जाता। एक अन्य बयान में सांसद ने कहा था कि भगवान हनुमान मनुवादी लोगों के गुलाम थे। फुले ने भगवान राम को मनुवादी बताया और कहा कि अगर हनुमान दलित नहीं थे तो उन्हें इंसान क्यों नहीं बनाया गया? उन्हें बंदर क्यों बनाया गया? उनका मुंह क्यों काला किया गया&#8230;?<strong>&#8216;सीट सुरक्षित नहीं होती तो मैं सांसद नहीं होती&#8217;</strong><br />
इससे पहले आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी को घेरते हुए फुले ने कहा था कि वह बीजेपी की नहीं बल्कि दलित की बेटी हैं। उन्होंने कहा था कि आरक्षण खत्म होने की साजिश चल रही है। इस दौरान उन्होंने कहा था, &#8216;मैं सांसद नहीं बनती अगर बहराइच की सीट सुरक्षित नहीं होती। बीजेपी की मजबूरी थी कि उन्हें जिताऊ उम्मीदवार चाहिए था तो मुझे टिकट दिया गया। मैं उनकी गुलाम नहीं हूं। अगर सांसद होकर भी अपने लोगों की बात न कर सकूं तो क्या फायदा?&#8217;</p>
</div>
<div></div>
<h3>सावित्री के इस्तीफे से भाजपा का दलित चेहरा उजागर: कांग्रेस</h3>
<div>बहराइच से सा΄सद एव΄ दलित नेता सावित्री बाई फुले ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर यह ऐलान कर दिया कि भाजपा मे΄ दलित नेताओ΄ का कोई स्थान नही΄ है वह चाहे सा΄सद हो या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हो΄। प्रदेश का΄ग्रेस प्रवता मुकेश सि΄ह ने कहा भाजपा सा΄सद सावित्री बाई फु ले के इस्तीफे से यह स्थापित होता है कि भाजपा का दलितो΄ से प्रेम महज एक दिखावा है। सच्चाई तो यह है कि दलितो΄ के उत्पीडऩ के खिलाफ  आवाज उठाने वाली दलित नेता को भी पार्टी छोडऩे के लिए विवश कर दिया गया। का΄ग्रेस पार्टी भाजपा पर यह लगातार आरोप लगाती रही है कि मोदी सरकार मे΄ दलितो΄ का सर्वाधिक उत्पीडऩ हुआ है लगातार उनके खिलाफ  मॉब लिन्चि΄ग की घटनाए΄ बढ़ती चली जा रही है΄।</div>
<div></div>
<div>पूरे देश मे΄ चाहे वह रोहित वेमुला हत्याकाण्ड हो या ऊना हो अथवा इलाहाबाद एव΄ सहारनपुर की घटना होए दलितो΄ पर जिस कदर भाजपा सरकार मे΄ अत्याचार बढ़े है΄ उसका नतीजा है कि आज भारतीय जनता पार्टी से सा΄सद सावित्री बाई ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा का दलित विरोधी चेहरा जनता के सामने उजागर कर दिया है। प्रवता ने कहा सावित्री बाई फ ुले का पार्टी के अन्दर दलित चेहरा होने के नाते उत्पीडऩ अकेली घटना नही΄ है इसके पूर्व मे΄ भी भाजपा के राबटर््सग΄ज से सा΄सद छोटेलाल खरवार ने प्रधानम΄त्री को बकायदा पत्र लिखकर प्रदेश के मुख्यम΄त्री आदित्यनाथ योगी जी द्वारा उन्हे΄ अपने कार्यालय से अपमानित कर भगाने का आरोप लगा चुके है΄। श्री चौहान ने कहा भाजपा का यह दलित, व΄चित, शोषित, अल्पस΄ख्यक, पिछड़ा विरोधी चेहरा खुलकर देश एव΄ प्रदेश की जनता के सामने आ गया हैए जिसका खामियाजा आने वाले चुनाव मे΄ भाजपा को भुगतना पड़ेगा।</div>
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		<title>वाराणसी : CM ने कमल संदेश यात्रा को दिखाई हरी झंडी, मिशन 2019 का किया शंखनाद</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Nov 2018 10:51:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वाराणसी. । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार दोपहर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से कमल संदेश बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री के हरी झंडी दिखाते ही कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम वन्देमातरम का गगनभेदी नारा लगाया और रैली में शामिल हुए। प्रदेश के सभी 80 लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा की ओर ... <a title="वाराणसी : CM ने कमल संदेश यात्रा को दिखाई हरी झंडी, मिशन 2019 का किया शंखनाद" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/cm-yogi-adityanath-flagged-off-to-bike-rally-in-varanasi-news/" aria-label="Read more about वाराणसी : CM ने कमल संदेश यात्रा को दिखाई हरी झंडी, मिशन 2019 का किया शंखनाद">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://visuals.dbnewshub.com/bhaskar/cms-assets/richtext-editor/images/yogi.jpg" alt="Image result for à¤µà¤¾à¤°à¤¾à¤£à¤¸à¥ : CM à¤¨à¥ à¤à¤®à¤² à¤¸à¤à¤¦à¥à¤¶ à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¾ à¤à¥ à¤¦à¤¿à¤à¤¾à¤ à¤¹à¤°à¥ à¤à¤à¤¡à¥" /></p>
<p><span class="storydetails">वाराणसी. । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार दोपहर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से कमल संदेश बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री के हरी झंडी दिखाते ही कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम वन्देमातरम का गगनभेदी नारा लगाया और रैली में शामिल हुए।<br />
प्रदेश के सभी 80 लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा की ओर से आयोजित एक साथ एक समय पर आयोजित कमल संदेश बाइक रैली के क्रम में यहां कमल संदेश रैली जगतगंज,लहुराबीर, मलदहिया, सिगरा, भारत माता मंदिर,चंदुआ सट्टी, इंग्लिशिया लाइन, तेलियाबाग, अंधरापुल, नदेसर, वरुणा पुल, कचहरी होते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंच कर समाप्त हुई।<br />
इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय खेल मैदान में रैली में शामिल होने आये हजारों कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किया। मुख्यमंत्री ने मिशन 2019 का बिगुल फूंक कहा कि 2019 भारत ही नहीं पूरे दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। केन्द्र सरकार ने अपने विकास कार्यों से देश और दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है अपने को स्थापित किया है। यह संदेश यात्रा 2019 के लोकसभा चुनाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।<br />
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ के बाद कहा कि सौभाग्य है कि भारत की छवि देश और दुनिया के सामने सकारात्मक रूप से पहुंचाने में महापुरुष के माध्यम से मदद मिली है। देश की संसद में उत्तर प्रदेश और काशी के प्रतितिधि के रूप में प्रधानमंत्री से हम सबको गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ से उत्साहित मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के पांच राज्यों में चुनाव होने वाला है। वाराणसी की कमल संदेश रैली का संदेश उन राज्यों में जाना चाहिए। </span></p>
<p><span class="storydetails"><img decoding="async" class="" src="https://static.langimg.com/img/66665901/Master.jpg" alt="Related image" width="794" height="366" /><br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">मुख्यमंत्री ने कायकर्ताओं से रैली में हेलमेट पहन शालीनता से शामिल होने की अपील की और उन्हें पार्टी के अनुशासन और मूल्य बोध का पाठ भी पढ़ाया। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के जन कल्याण कारी योजनाओं को विस्तार से बता कर कहा कि कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुंचा देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करे।<br />
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में साढ़े तीन करोड़ परिवारों तक राशन कार्ड पहुंचाया गया है। दिव्यांगों महिलाओं के लिए तमाम जन कल्याण कारी योजनाएं चल रही हैं। केन्द्र और प्रदेश की सरकार ने विकास कार्यो में मिल का पत्थर स्थापित किया है। कार्यक्रम स्थल पर आने के पूर्व मुख्यमंत्री हेलिकाप्टर से पुलिस लाइन मैदान में उतरे। यहां प्रशासनिक अफसरों के साथ भाजपा नेताओं विधायकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद सशस़्त्र पुलिस की टुकड़ी ने मुख्यमंत्री को गार्ड आॅफ आॅनर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री कड़ी सुरक्षा के बीच वाहनों के काफिले में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय मैदान में पहुंचे।</span></p>
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		<title>योगी सरकार के मंत्री का टूटा भजपा से दिल, कहा- हर हाल में दूंगा इस्तीफा&#8230;</title>
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		<pubDate>Sat, 27 Oct 2018 10:42:05 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[ओम प्रकाश राजभर]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ :  उत्तर प्रदेश कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बीजेपी का साथ छोड़ने का साफ-साफ संकेत दे दिया है। उत्तर प्रदेश में एक सभा के दौरान राजभर ने कहा, &#8216;मैं सत्ता का स्वाद चखने के लिए नहीं आया हूं, गरीबों की लड़ाई लड़ने के लिए आया हूं। ये ... <a title="योगी सरकार के मंत्री का टूटा भजपा से दिल, कहा- हर हाल में दूंगा इस्तीफा&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/om-prakash-rajbhar-up-minister-and-suheldev-bharatiya-samaj-party-chief-on-support-to-bjp-news/" aria-label="Read more about योगी सरकार के मंत्री का टूटा भजपा से दिल, कहा- हर हाल में दूंगा इस्तीफा&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://img.timesnownews.com/story/1540634247-op_rajbhar.png?d=600x450" alt="op rajbhar" /></p>
<p><strong>लखनऊ</strong> :  उत्तर प्रदेश कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बीजेपी का साथ छोड़ने का साफ-साफ संकेत दे दिया है। उत्तर प्रदेश में एक सभा के दौरान राजभर ने कहा, &#8216;मैं सत्ता का स्वाद चखने के लिए नहीं आया हूं, गरीबों की लड़ाई लड़ने के लिए आया हूं। ये लड़ाई लड़ू या भाजपा का गुलाम बन के रहूं। एक कार्यालय आज तक नहीं दिया। मैंने तो मन बनाया कि आज इस मंच से ही मैं घोषणा करूंगा, आज इस्तीफा देकर रहूंगा।&#8217;</p>
<p>लखनऊ के रमाबाई मैदान में आयोजित रैली में पहुंचे हजारों कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राजभर ने बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। राजभर ने कहा, &#8216;मेरा मन टूट गया है। ये (बीजेपी) हिस्सा देना नहीं चाहते। जब भी गरीब के सवाल पर हिस्से की बात करता हूं, ये मंदिर-मस्जिद की बात करते हैं। हिंदू-मुसलमान की बात करते हैं।&#8217;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">Mai satta ka swad chakne ke liye nahin aaya hu, garibon ke liye ladai karne ke liye aaya hu. Ye ladai ladu ya Bhajpa ka ghulam banke rahu? Ek karyala aaj tak nahi diya. Maine to man banaya ki aaj is manch se main ghoshna karunga,aaj istifa dekar ke main rahunga: UP Min OP Rajbhar <a href="https://t.co/JGVWgCdMH9">pic.twitter.com/JGVWgCdMH9</a></p>
<p>&mdash; ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) <a href="https://twitter.com/ANINewsUP/status/1056115743660695552?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">October 27, 2018</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>इस्तीफे की चेतावनी देते हुए राजभर ने कहा, &#8216;मैं सत्ता का स्वाद चखने के लिए नहीं आया हूं, गरीबों के लिए लड़ाई लड़ने आया हूं। ये लड़ाई लड़ूं या बीजेपी का गुलाम बनकर रहूं? एक कार्यालय आजतक नहीं दिया। मैंने तो मन बनाया कि आज इस मंच से मैं घोषणा करूंगा, आज मैं इस्तीफा देकर रहूंगा।&#8217;</p>
<div>
<div class="image">
<p><img decoding="async" src="https://static.langimg.com/img/66390539/Master.jpg" alt="" /></p>
<div class="imagecaption"></div>
</div>
</div>
<p>बता दें कि ओम प्रकाश राजभर पहले भी बीजेपी पर निशाना साधते रहे हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर वह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना कर चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने यह बयान देकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार तय है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>राम मंदिर निर्माण पर उद्धव ठाकरे ने बोला PM पर हमला, कहा-&#8220;राम मंदिर आप बनाएंगे या हम, इस बात का फ़ैसला हो जाए&#8221;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/shiv-sena-chief-uddhav-thackeray-aimed-at-pm-modi-news/</link>
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		<pubDate>Fri, 19 Oct 2018 04:02:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली । राम मंदिर निर्माण पर सियासत गरमा गयी है वाही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की दशहरा रैली के दौरान महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार पर करारा हमला किया है। उद्धव ठाकरे ने मुंबई के शिवाजी पार्क में कहा कि रावण तो हर साल आता है लेकिन राम मंदिर नहीं आता है। इसके अलावा उन्होंने ... <a title="राम मंदिर निर्माण पर उद्धव ठाकरे ने बोला PM पर हमला, कहा-&#8220;राम मंदिर आप बनाएंगे या हम, इस बात का फ़ैसला हो जाए&#8221;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/shiv-sena-chief-uddhav-thackeray-aimed-at-pm-modi-news/" aria-label="Read more about राम मंदिर निर्माण पर उद्धव ठाकरे ने बोला PM पर हमला, कहा-&#8220;राम मंदिर आप बनाएंगे या हम, इस बात का फ़ैसला हो जाए&#8221;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली । राम मंदिर निर्माण पर सियासत गरमा गयी है वाही </strong>शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की दशहरा रैली के दौरान महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार पर करारा हमला किया है। उद्धव ठाकरे ने मुंबई के शिवाजी पार्क में कहा कि रावण तो हर साल आता है लेकिन राम मंदिर नहीं आता है। इसके अलावा उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जमकर तारीफ की।</p>
<p>अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिये अपनी आवाज बुलंद करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 25 नवंबर को उत्तर प्रदेश के उस शहर में जाएंगे। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल किया। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि धनुष और बाण उठाने के लिए कुछ इंच की छाती नहीं, हिम्मत चाहिए ।</p>
<p>2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले मुंबई में पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि देश में 2014 जैसी लहर नहीं है। भाजपा ने 2014 में अपनी चुनावी जीत का श्रेय मोदी लहर को दिया था। इसके अलावा कहा प्रधानमंत्री जी आप जनता की भावनाओं के साथ मत खेलिए। अगर उन्होंने उम्मीद खो दी तो आपका सिंहासन मिट्टी में मिल जाएगा। पीएम कई देशों में जाते हैं लेकिन अयोध्या एक बार भी नहीं गए।</p>
<p>ठाकरे ने शिवसेना कार्यकर्ताओं से चुनावों के लिये तैयार रहने को कहा। इसी साल हुए पार्टी के सम्मेलन में शिवसेना ने घोषणा की थी वह भविष्य में होने वाले चुनाव अकेले लड़ेगी। शिवसेना केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में साझीदार है और राजग का सबसे पुराना घटक है। ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में कहा, मैं 25 नवंबर को अयोध्या जाउंगा।</p>
<p>मैं प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करूंगा। हम प्रधानमंत्री के दुश्मन नहीं है, लेकिन हम लोगों की भावनाओं के साथ नहीं खेलना चाहते। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि प्रधानमंत्री बनने के साढ़े चार साल बाद भी मोदी क्यों अयोध्या नहीं गए। ठाकरे ने भाजपा से कहा कि वह राम मंदिर निर्माण के अपने वादे को अगर पूरा नहीं करती है तो इसे जुमला घोषित कर दे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="et" dir="ltr">ShivSena <a href="https://t.co/bO6zI4IZoC">https://t.co/bO6zI4IZoC</a></p>
<p>&mdash; ShivSena &#8211; शिवसेना Uddhav Balasaheb Thackeray (@ShivSenaUBT_) <a href="https://twitter.com/ShivSenaUBT_/status/1052900403577147394?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">October 18, 2018</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>मोदी पर निशाना, &#8216;देश में 2014 की लहर नहीं</strong>&#8216;<br />
2019 के लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले सेंट्रल मुंबई में दशहरा रैली में ठाकरे ने कहा, &#8216;अब देश में 2014 की तरह लहर नहीं है।&#8217; आपको बता दें कि बीजेपी ने 2014 में अपनी चुनावी सफलता का श्रेय मोदी लहर को दिया था। ठाकरे ने शिवसेना के वर्करों को चुनावों के लिए तैयार रहने को भी कहा है। केंद्र और महाराष्ट्र में बीजेपी की अगुआई वाली सरकारों में शामिल NDA के सबसे पुराने घटक दल ने इस साल की शुरुआत में भविष्य में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। रैली में उन्होंने कहा, &#8216;मैं मंदिर निर्माण में कथित देरी पर पीएम से सवाल पूछना चाहूंगा&#8230; हम प्रधानमंत्री के दुश्मन नहीं हैं लेकिन हमें लोगों की भावनाओं के साथ नहीं खेलना चाहिए।&#8217;</p>
<p><strong>&#8216;अभी हम जिंदा हैं, जा रहा हूं अयोध्या&#8217;</strong><br />
मुंबई में उद्धव ने कहा कि जिन्हें लगता है कि हिंदुत्व मर गया है, वे जान लें कि हम अभी भी जिंदा हैं। शिवसेना कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश में लगे उद्धव ने कहा, &#8216;हम उन लोगों को चेतावनी दे रहे हैं, जिन्हें लगता है कि हिंदुत्व मर गया है। हम अभी भी जिंदा हैं। हमें दुख है कि अभी तक राम मंदिर नहीं बनाया गया है। मैं 25 नवंबर को अयोध्या जा रहा हूं।&#8217;</p>
<p><strong>पाक, आर्टिकल 370 पर भी बीजेपी पर हमला</strong><br />
शिवसेना चीफ ने आर्टिकल 370, बढ़ती कीमतों, पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख जैसे कई मसलों पर बीजेपी सरकार पर हमला बोला। ठाकरे ने महाराष्ट्र बीजेपी के एक नेता के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी भगवान विष्णु के 11वें अवतार हैं। ठाकरे ने कहा, &#8216;अगर ऐसा है तो मोदी सरकार बढ़ती कीमतों पर अंकुश क्यों नहीं लगा पा रही है?&#8217;</p>
<p><strong>अयोध्या मिशन से पहले आदित्य ठाकरे ने बनाई खास योजना</strong><br />
मुंबई में शिवाजी पार्क और शिवसेना भवन के आसपास शिवसेना द्वारा लगाए गए &#8216;चलो अयोध्या&#8217; के बड़े-बड़े पोस्टर आगामी चुनावों में भगवा राजनीति के ध्रुवीकरण का शंखनाद कर रहे हैं। शिवाजी पार्क मैदान में हर साल होने वाली शिवसेना की परंपरागत दशहरा रैली से दो दिन पहले लगाए गए इन पोस्टरों से यह साफ हो गया है कि शिवसेना इस बार हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी को पटखनी देने की कोशिश कर रही है। बताया जा रहा है कि इस योजना के पीछे आदित्य ठाकरे का दिमाग है।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों में शिवसेना ने न सिर्फ राम मंदिर बल्कि धारा 370 और कॉमन सिविल कोड के मुद्दे पर भी बीजेपी को बार-बार घेरने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि शिवसेना इन चुनावों से पहले राज्य में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में करने की भरसक कोशिश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मत है कि शिवसेना हिंदुत्व के मुद्दे पर महाराष्ट्र के बाहर भी अपना विस्तार करने की तैयारी कर रही है।</p>
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		<title>सियासी दांव : कही सपा के लिए विभीषण न बन जाये शिवपाल, आखिर क्यों है योगी इतने मेहरबान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Oct 2018 11:09:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ :  चुनावी महाभारत के आगाज़ के बाद हर दिन कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है. सपा परिवार में चाचा भतीजे की कलह अभी तक शांत नहीं हुई  और बढ़ता ही जा रही है  इस बीच एक खबर से सपा परिवार में एक बार भी भूचाल आ गया है. उत्तर प्रदेश में बंगले को लेकर कई दिनों ... <a title="सियासी दांव : कही सपा के लिए विभीषण न बन जाये शिवपाल, आखिर क्यों है योगी इतने मेहरबान" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/uttar-pradesh-state-property-department-allotted-bungalow-to-shivpal-singh-yadav-news/" aria-label="Read more about सियासी दांव : कही सपा के लिए विभीषण न बन जाये शिवपाल, आखिर क्यों है योगी इतने मेहरबान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://ichef.bbci.co.uk/news/660/cpsprodpb/A187/production/_103215314_14089149_1817171711846956_5364801555509353504_n.png" alt="Image result for à¤¶à¤¿à¤µà¤ªà¤¾à¤²" /></p>
<p><strong>लखनऊ</strong> :  चुनावी महाभारत के आगाज़ के बाद हर दिन कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है. सपा परिवार में चाचा भतीजे की कलह अभी तक शांत नहीं हुई  और बढ़ता ही जा रही है  इस बीच एक खबर से सपा परिवार में एक बार भी भूचाल आ गया है. उत्तर प्रदेश में बंगले को लेकर कई दिनों तक चले विवाद ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं और अब इसमें नया सियासी ट्विस्ट आ गया है। राज्य संपत्ति विभाग ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को जो नया बंगला आवंटित किया है, उसमें कभी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की चीफ मायावती का दफ्तर था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मायावती इसी बंगले के पास दूसरे बंगले में शिफ्ट हो गई थीं। ऐसे में शिवपाल और मायावती अब पड़ोसी भी हो गए हैं।</p>
<p>हालांकि, राज्य संपत्ति विभाग के इस फैसले को कुछ लोग सियासी समीकरण से भी जोड़कर देख रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में मायावती और अखिलेश बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाने जा रहे हैं। ऐसे में शिवपाल पर प्रशासन की इस मेहरबानी से कई कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि अखिलेश के खिलाफ शिवपाल को आगे बढ़ाकर बीजेपी कुछ और मौके ढूंढ रही है।</p>
<p><strong>इसी बंगले में होगा शिवपाल की पार्टी का दफ्तर?</strong><br />
राज्य संपत्ति विभाग ने शिवपाल सिंह यादव को 6 एलबीएस (लाल बहादुर शास्त्री) बंगला आवंटित किया है। यह बंगला उन्हें बतौर विधायक आवंटित किया गया है। बंगले का आवंटन होने के बाद शिवपाल तत्काल बंगले में गए और वहां का निरीक्षण किया। इस बंगले में इससे पहले मायावती का कार्यालय हुआ करता था। बताया जा रहा है कि अब इस बंगले में शिवपाल अपनी पार्टी का दफ्तर बनाएंगे।</p>
<div>
<div class="image">
<p><img decoding="async" src="https://static.langimg.com/img/66176053/Master.jpg" alt="" /></p>
<div></div>
<div class="imagecaption"><strong>मायावती के इस बंगले पर हुआ था विवाद</strong></div>
</div>
</div>
<p>मायावती को 2011 में आवंटित हुए इस एलबीएस-6 सरकारी बंगले को लेकर विवाद हुआ था। यह बात सामने आई थी कि इस बंगले का आवंटन कथित फर्जी आदेश के जरिए किया गया था। बीएसपी अध्यक्ष को एक साथ दो बंगले आवंटित होने पर भी सवाल उठे थे।</p>
<p><strong>गायब हो गए थे बंगले के रिकॉर्ड</strong><br />
सरकार के राज्य सम्पत्ति विभाग से बंगलों के आवंटन और निरस्तीकरण के पुराने रिकॉर्ड गायब हो गए थे। जब पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती को आवंटित इस बंगले के दस्तावेज की तलाश की गई तो पता चला कि विभाग के पास उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खाली हुए थे सरकारी बंगले</strong><br />
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में आदेश जारी किया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित किए गए बंगले निरस्त किए जाएं। अदालत ने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री एक आम नागरिक होता है इसलिए उसे सरकारी बंगले आवंटित करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। कोर्ट ने यूपी मिनिस्टर सैलरी अलाउंट ऐंड मिसलेनियस प्रॉविजन ऐक्ट के उन प्रावधानों को रद्द कर दिया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले में रहने का आधिकार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ऐक्ट का सेक्शन 4 (3) असंवैधानिक है।</p>
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