<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>रूस &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
	<atom:link href="https://dainikbhaskarup.com/tag/%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b8/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dainikbhaskarup.com</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Thu, 15 Jan 2026 06:26:21 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0</generator>

<image>
	<url>https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/dainik-bhaskar-icon.png</url>
	<title>रूस &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
	<link>https://dainikbhaskarup.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप की जिद : क्या है इस विवाद के पीछे की असली वजह?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/donald-trumps-insistence-on-greenland-what-is-the-real-reason-behind-this-controversy/</link>
					<comments>https://dainikbhaskarup.com/donald-trumps-insistence-on-greenland-what-is-the-real-reason-behind-this-controversy/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 06:26:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
		<category><![CDATA[China]]></category>
		<category><![CDATA[Denmark]]></category>
		<category><![CDATA[DonaldTrump]]></category>
		<category><![CDATA[Europe]]></category>
		<category><![CDATA[France]]></category>
		<category><![CDATA[Geopolitics]]></category>
		<category><![CDATA[GlobalTension]]></category>
		<category><![CDATA[Greenland]]></category>
		<category><![CDATA[InternationalNews]]></category>
		<category><![CDATA[lithium]]></category>
		<category><![CDATA[NationalSecurity]]></category>
		<category><![CDATA[NATO]]></category>
		<category><![CDATA[RareEarth]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[StrategicBuffer]]></category>
		<category><![CDATA[tariff]]></category>
		<category><![CDATA[TradeWar]]></category>
		<category><![CDATA[Uranium]]></category>
		<category><![CDATA[USPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[WorldNews]]></category>
		<category><![CDATA[WorldPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रीनलैंड]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रंप]]></category>
		<category><![CDATA[डेनमार्क]]></category>
		<category><![CDATA[दुर्लभ_खनिज]]></category>
		<category><![CDATA[नाटो]]></category>
		<category><![CDATA[फ्रांस]]></category>
		<category><![CDATA[यूरोप]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय_सुरक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dainikbhaskarup.com/?p=509183</guid>

					<description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां वे ईरान को खुली धमकियां दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रीनलैंड को हासिल करने को लेकर उनके हालिया बयान ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराते हुए कहा ... <a title="ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप की जिद : क्या है इस विवाद के पीछे की असली वजह?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/donald-trumps-insistence-on-greenland-what-is-the-real-reason-behind-this-controversy/" aria-label="Read more about ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप की जिद : क्या है इस विवाद के पीछे की असली वजह?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="585" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/डोनाल्ड-ट्रंप-ग्रीनलैंड-विवाद-2-1024x585-1.webp" alt="" class="wp-image-509185" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/डोनाल्ड-ट्रंप-ग्रीनलैंड-विवाद-2-1024x585-1.webp 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/डोनाल्ड-ट्रंप-ग्रीनलैंड-विवाद-2-1024x585-1-300x171.webp 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/डोनाल्ड-ट्रंप-ग्रीनलैंड-विवाद-2-1024x585-1-768x439.webp 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां वे ईरान को खुली धमकियां दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रीनलैंड को हासिल करने को लेकर उनके हालिया बयान ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराते हुए कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं”। ट्रंप के इस बयान के बाद यूरोपीय देशों में नाराजगी साफ दिखाई देने लगी है। डेनमार्क के बाद अब फ्रांस भी खुलकर विरोध में उतर आया है और ग्रीनलैंड की संप्रभुता को लेकर कड़ी चेतावनी दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ग्रीनलैंड से कम कुछ मंजूर नहीं: ट्रंप</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाल ही में ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने से जुड़ा एक विधेयक अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया गया था। इसके अगले ही दिन ट्रंप ने बयान देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए बेहद अहम है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप का दावा है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस या चीन इस रणनीतिक द्वीप पर कब्जा कर सकते हैं। उन्होंने नाटो से भी इस दिशा में पहल करने की अपील की और कहा कि ग्रीनलैंड के शामिल होने से नाटो और अधिक मजबूत होगा। ट्रंप इससे पहले यह भी संकेत दे चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर ताकत के इस्तेमाल से भी पीछे नहीं हटेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फ्रांस की चेतावनी: संप्रभुता से खिलवाड़ खतरनाक</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप के बयानों के बाद यूरोप के कई देश मुखर हो गए हैं, जिनमें फ्रांस सबसे आगे है। कैबिनेट बैठक के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी यूरोपीय और सहयोगी देश की संप्रभुता से खिलवाड़ के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मैक्रों ने ग्रीनलैंड के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए कहा कि यूरोप इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रेड डील पर भी संकट के बादल</p>



<p class="wp-block-paragraph">ग्रीनलैंड मुद्दे को लेकर ट्रंप की आक्रामक नीति से यूरोपीय संघ और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। यूरोपीय संसद के कुछ सदस्य अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर अपना रुख नहीं बदलता, तो अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने से जुड़े कानून को रोकने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इसके जवाब में ट्रंप यूरोपीय उत्पादों पर और ज्यादा टैरिफ लगाने की चेतावनी दे सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आखिर ग्रीनलैंड के पीछे क्यों पड़ा है अमेरिका?</p>



<p class="wp-block-paragraph">डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी है। उनका दावा है कि इस क्षेत्र में रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका का मानना है कि ग्रीनलैंड रूस और चीन से संभावित खतरों के खिलाफ एक स्ट्रैटेजिक बफर (रणनीतिक सुरक्षा कवच) की तरह काम कर सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दुर्लभ खनिजों का खजाना है ग्रीनलैंड</p>



<p class="wp-block-paragraph">ग्रीनलैंड प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यहां **यूरेनियम, लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसे कई दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये खनिज रक्षा तकनीक, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) जैसी भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों के लिए बेहद जरूरी हैं। इसी वजह से अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अहम मान रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://dainikbhaskarup.com/donald-trumps-insistence-on-greenland-what-is-the-real-reason-behind-this-controversy/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रिपोर्ट : क्या सच में ज़ेलेंस्की ने अपनी इमेज बनाने के लिए यूक्रेन के भविष्य की कुर्बानी दे दी?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/did-zelensky-sacrifice-ukraines-future-to-build-his-own-image/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Mar 2025 00:36:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
		<category><![CDATA[Donald Trump]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[Ukraine]]></category>
		<category><![CDATA[Volodymyr Zelenskyy]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[डोनाल्‍ड ट्रंप]]></category>
		<category><![CDATA[यूक्रेन]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<category><![CDATA[वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dainikbhaskarup.com/?p=485035</guid>

					<description><![CDATA[यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में जो झड़प जैसी स्थिति बनी, उसके बाद से भारत के सदा संदिग्ध (यूजुअल सस्पेक्ट्स) जमात में बड़ी हलचल है। कई मासूम ज़ेलेंस्की को ‘छप्पन इंची’ घोषित करने पर आमादा हैं। यूके में ज़ेलेंस्की की प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात और यूके के ... <a title="रिपोर्ट : क्या सच में ज़ेलेंस्की ने अपनी इमेज बनाने के लिए यूक्रेन के भविष्य की कुर्बानी दे दी?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/did-zelensky-sacrifice-ukraines-future-to-build-his-own-image/" aria-label="Read more about रिपोर्ट : क्या सच में ज़ेलेंस्की ने अपनी इमेज बनाने के लिए यूक्रेन के भविष्य की कुर्बानी दे दी?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-485036" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में जो झड़प जैसी स्थिति बनी, उसके बाद से भारत के सदा संदिग्ध (यूजुअल सस्पेक्ट्स) जमात में बड़ी हलचल है। कई मासूम ज़ेलेंस्की को ‘छप्पन इंची’ घोषित करने पर आमादा हैं। यूके में ज़ेलेंस्की की प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात और यूके के जेलेंस्की को समर्थन की बातों के बाद से गिरोहों में उछल-कूद और भी बढ़ी है। लेकिन प्रश्न ये है कि क्या अपनी छवि के चक्कर में ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की जनता के भविष्य की कुर्बानी दे डाली है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके लिए हमें रूस-यूक्रेन और पश्चिमी देशों के संबंधों को थोड़ा सा पीछे जाकर देखना पड़ता है। शीत युद्ध के बाद के समय में जब सोवियत संघ बिखर गया था, उस समय यूक्रेन अलग हुआ और तभी से वाशिंगटन ने इस क्षेत्र में नाटो की पैठ बनाने की कोशिशें तेज कर दी थी। कहने के लिए तो गोर्बाचोव को अमेरिका ने कहा कि वो पूर्व की ओर नहीं बढ़ेंगे लेकिन असल में नाटो पोलैंड और बाल्टिक सागर के इलाकों में अपनी जड़ें जमा रहा था। सीआईए ने जैसे कई देशों में लोकतंत्र की हत्या करने के लिए आंदोलनों की मदद की है, वैसे ही 2004 में वो रूस का समर्थन करने वाले उम्मीदवार को हराने के लिए ‘<a href="https://www.britannica.com/place/Ukraine/The-Orange-Revolution-and-the-Yushchenko-presidency" target="_blank" rel="noreferrer noopener">ऑरेंज रेवोलुशन</a>‘ नाम के एक आन्दोलन को शह देने में जुटी थी। युशचेंको के बदले विक्टर यानुकोविच सत्ता में आये।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">विक्टर यानुकोविच भी 2014 आते-आते पश्चिमी देशों की आँखों में खटकने लगे क्योंकि उन्होंने यूरोपियन यूनियन के व्यापार समझौतों से इन्कार कर दिया था। अपने देश की कुर्बानी देकर विदेशियों को आगे बढ़ने न देने की कोशिशों के कारण सीआईए ने 2014 में तख्तापलट को अंजाम दिया। जैसा भारत में कभी राडिया टेप काण्ड में सुनाई दिया था, वैसे ही इस काण्ड में यानुकोविच के हटने से पहले ही विक्टोरिया नुलैंड जैसे अधिकारी अगली सरकार किसकी हो ये तय कर रहे थे। इस समय तक नव-नाजी समूह (Azov Battalion) इतने शक्तिशाली हो चुके थे कि वो राजधानी कीव तक नाजियों के जश्न मनाते थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जो नयी सरकार आई उसने रूसी भाषा पर प्रतिबन्ध लगाया और इस पर डोनबॉस और क्रीमिया के लोग भड़क गए। पूर्वी यूक्रेन में रूसी बोलने वालों पर अत्याचार होने शुरू हुए। जनमत संग्रह में क्रीमिया में जब 90 प्रतिशत लोग रूस में शामिल होने के पक्ष में दिखे तो तथाकथित लिबरल कहलाने वाले लोगों ने असली दमन शुरू किया। आठ वर्षों तक यूक्रेन की सरकार अपने ही लोगों पर गोलीबारी करती रही और आज जो यूके, ज़ेलेंस्की का समर्थन करके अपनी पीठ खुद थपथपा रहा है, वो भी नरसंहारों पर चुप रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसा नहीं था कि ये घटनाएं बिना स्थानीय संगठनों के ही चल रही थी। अमेरिकी फण्ड, विशेषकर यूएसऐड के जरिये जाने वाले फण्ड के जरिये ‘फ्रीडम हाउस’ जैसे संगठन&nbsp;<a href="https://www.aei.org/articles/our-man-at-ukraines-orange-revolution/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">बनाये गए</a>&nbsp;थे। इनके ही माध्यम से ‘ऑरेंज रेवोलुशन’ जैसे आन्दोलन छेड़े गए। जो पुरानी फाल्ट लाइन्स (विभाजक रेखाएं) थीं, चाहे वो रुसी और यूक्रेनियाई भाषा के झगड़े हों, दोनों देशों के चर्च की प्रतिस्पर्धा हो, इन सबको उकसाते रहा गया। कम्युनिस्टों का एक पुराना कारनामा होलोडोमोर भी था। स्टालिन ने जबरन ‘कलेक्टिवेशन’ यानी सामूहिक खेती के लिए यूक्रेन के लोगों को मजबूर किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कम्युनिस्टों ने किसानों की जमीनें हड़प ली थीं, और विरोध करने वाले लोगों को गोली मार दी या साइबेरिया भेज दिया। इसकी वजह से अकाल आया और होलोडोमोर (भूखमरी) से 1932-33 में तीस लाख से एक करोड़ यूक्रेनियाई लोग मरे थे। इस घटना को जीवित रखा गया। बार-बार याद दिलाया गया। रह-रह कर कोई यूरोपियन संघ का सदस्य देश होलोडोमोर को नरसंहार के रूप में मान्यता देता और उसपर छिड़ी बहसों से होलोडोमोर की यादें यूक्रेन के लोगों के लिए फिर से ताजा हो जाती। कुछ ही समय पहले फ्रांस ने होलोडोमोर को&nbsp;<a href="https://www.rferl.org/a/ukraine-france-holodomor-genocide/32339799.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नरसंहार</a>&nbsp;के रूप में मान्यता दी। इसके लिए जेलेंस्की ने फ्रांस का आभार&nbsp;<a href="https://x.com/ZelenskyyUa/status/1640779409073250317" target="_blank" rel="noreferrer noopener">जताया</a>&nbsp;और रूस ने इस बात का विरोध भी किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वापस मौजूदा दौर पर चलें तो ज़ेलेंस्की के पास कोई राजनैतिक दल नहीं था, न ही वो किसी तरह से राजनीति से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति था। वो एक टीवी शृंखला में कॉमेडी एक्टर (मसखरा) था। मार्च 2018 में अचानक निर्देशन की कंपनी (Kvartal 95) ने उसी नाम से एक राजनैतिक दल का निबंधन करवाया, जो टीवी शृंखला में जेलेंस्की की पार्टी का नाम था– ‘<a href="https://www.bbc.com/news/world-europe-59667938" target="_blank" rel="noreferrer noopener">सर्वेंट ऑफ द पीपल</a>‘। दिसम्बर 2018 में जेलेंस्की ने राष्ट्रपति चुनावों में उतरने की घोषणा कर दी और बिलकुल वैसा ही मुद्दा चुना जैसा आप भारत में भी देख चुके हैं। जी हाँ, मुद्दा भ्रष्टाचार था और ये आप दिल्ली में देख चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रपति बनने के बाद ज़ेलेंस्की एमआई6 (ब्रिटिश गुप्तचर संगठन) के रिचर्ड मूर से 2020 में मिल रहे थे। ओर्थोडॉक्स चर्च की प्रमुखता वाले इलाकों से होने पर भी कैथोलिक वेटिकन जाकर ब्रिटिश मूल के बिशप से मिल रहे थे। चुनाव का ज़ेलेंस्की का खर्च इहोर कोलोमोइस्की ने उठाया था जो तेल और बैंकों के व्यापार से जुड़ा एक बड़ा उद्योगपति है। सत्ता में आने के बाद ज़ेलेंस्की कोई शांति-व्यवस्था नहीं लाये बल्कि डोनबास के पास यूक्रेन की सेनाएं विपक्षियों को कुचलने के लिए तैनात हो चुकी थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रूस के पास 2022 में कोई विकल्प ही नहीं बचे थे। सीआईए और नाटो की कठपुतली ज़ेलेंस्की को मनमानी करने दिया जा सकता था। नाटो के यूक्रेन में बेस बनाने और पकड़ कायम करने छोड़ा जा सकता था, डोनबास में रुसी बोलने वालों को रूस मरने छोड़ सकता था, या फिर सैन्य अभियान के जरिये वो इसे रोकता। रूस ने सैन्य अभियान का रास्ता चुना। जवाब में अमेरिकी कंपनियों ने रूस में अपनी सेवाएँ बंद कर दी। बैंकिंग व्यवस्था में वीसा जैसे माध्यम जो ऑनलाइन लेन-देन में काम आते हैं, वो बंद कर दिए गए। इसी से मोदी सरकार ने भारत में सीख लेते हुए, ‘रुपे’ नाम का विकल्प खड़ा कर लिया। तेल भण्डार रूस के ही पास थे इसलिए अभी भी यूरोपीय संघ के देश तेल रूस से ही खरीद रहे हैं, भले प्रतिबन्ध जितने भी लगा रखे हों।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुल मिलाकर रूस के हमलों के बाद यूक्रेन की जो स्थिति है, उसे सुधारने की क्षमता या राजनैतिक सूझ-बूझ कहीं से ज़ेलेंस्की के पास नहीं दिखती है। जैसे भ्रष्टाचारी उसके साथ सत्ता का सुख लूटते रहे हैं, उस स्थिति में वो मदद के नाम पर मिले पैसों का घपला रोक पायेगा, ऐसा भी नहीं लगता। चुनाव रुकवाकर तानाशाही रवैया भी वो दिखा चुका है और NGOs के जरिये बनी ऐसी पार्टियों के कामकाज से भी भारतीय परिचित हैं। किसी भी देश में मौजूद विभाजक रेखाओं (फाल्ट लाइन्स) पर लोकतंत्र बचाने या संविधान बचाने के नाम पर ऐसे ही आन्दोलन चलाये जाते हैं और उनका परिणाम किसी तानाशाह को स्थापित करना ही होता है। विदेशों में कई उदाहरणों में ये दिखेगा, उम्मीद है यूक्रेन के ताजा उदाहरण में भारत में वही भाषा, क्षेत्रवाद, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे कैसे ‘लोकतंत्र/संविधान बचाओ’ कहने वाले प्रयोग कर रहे हैं, वो भी दिख ही गया होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ट्रंप और ज़ेलेंस्की की तीखी बहस पर जानिए क्या बोला रूस?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%80/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Mar 2025 06:36:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[Donald Trump]]></category>
		<category><![CDATA[JD Vance]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[Ukraine]]></category>
		<category><![CDATA[US]]></category>
		<category><![CDATA[Vladimir putin]]></category>
		<category><![CDATA[Volodymyr Zelensky]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[जेडी वेंस]]></category>
		<category><![CDATA[डोनाल्‍ड ट्रंप]]></category>
		<category><![CDATA[दिमित्री मेदवेदेव]]></category>
		<category><![CDATA[यूक्रेन]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<category><![CDATA[वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की]]></category>
		<category><![CDATA[व्लादिमीर पुतिन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dainikbhaskarup.com/?p=484382</guid>

					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के बीच ओवल ऑफ़िस में हुई&#160;तीखी बहस&#160;पर रूस ने भी प्रतिक्रिया दी है। ज़ेलेंस्की शुक्रवार (28 फरवरी) को रूस और यूक्रेन के बीच 3 वर्षों से जारी युद्ध को खत्म कर शांति बहाल करने के मुद्दे को लेकर ट्रंप से मिलने ... <a title="ट्रंप और ज़ेलेंस्की की तीखी बहस पर जानिए क्या बोला रूस?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%80/" aria-label="Read more about ट्रंप और ज़ेलेंस्की की तीखी बहस पर जानिए क्या बोला रूस?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-484383" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के बीच ओवल ऑफ़िस में हुई&nbsp;तीखी बहस&nbsp;पर रूस ने भी प्रतिक्रिया दी है। ज़ेलेंस्की शुक्रवार (28 फरवरी) को रूस और यूक्रेन के बीच 3 वर्षों से जारी युद्ध को खत्म कर शांति बहाल करने के मुद्दे को लेकर ट्रंप से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान यूक्रेन के रवैये को लेकर ट्रंप और वेंस की उनसे तीखी बहस हो गई। ट्रंप ने ज़ेलेंस्की पर अमेरिका और अमेरिका के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया है। वहीं, ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप का सम्मान करते हैं। अब इस मामले पर रूस के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रूस ने क्या कहा?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने इस मामले को लेकर टेलीग्राम पर पोस्ट किया&nbsp;<a href="https://www.aljazeera.com/news/2025/2/28/world-reacts-after-donald-trump-jd-vance-berate-ukaines-zelenskyy" target="_blank" rel="noreferrer noopener">है</a>। जखारोवा ने ज़ेलेंस्की को झूठा बताते हुए लिखा, “मुझे लगता है कि ज़ेलेंस्की का सबसे बड़ा झूठ व्हाइट हाउस में उनका यह दावा था कि 2022 में कीव शासन बिना किसी समर्थन के अकेला था।” जखारोवा ने अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ की और ज़ेलेंस्की की तुलना बदमाश से की है। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा, “ट्रंप और वेंस ने उस बदमाश पर हमला करने से कैसे खुद को रोका, यह संयम का चमत्कार है।” जखारोवा ने दावा किया कि ज़ेलेंस्की ‘उस हाथ को ही काट रहे हैं जो उन्हें खिला रहा है’। साथ ही, उन्होंने ज़ेलेंस्की पर ‘सभी के साथ अप्रिय होने’ का आरोप लगाया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ओवल ऑफिस में हुई इस बहस पर रूस के पूर्व राष्ट्रपति और रूस की सुरक्षा परिषद के उप-प्रमुख दिमित्री मेदवेदेव की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। मेदवेदेव ने ज़ेलेस्की की तुलना ‘ढीठ सूअर’ से की है। मेदवेदेव ने ‘X’ पर&nbsp;<a href="https://x.com/MedvedevRussiaE/status/1895549112440979908" target="_blank" rel="noreferrer noopener">लिखा</a>, “ढीठ सुअर को आखिरकार ओवल ऑफिस में करारा तमाचा मिला है।” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप ने सही ही कहा है कि यूक्रेन का शासन तीसरे विश्व युद्ध के साथ जुआ खेल रहा है। साथ ही, मेदवेदेव ने ज़ेलेस्की को ‘नशे में धुत्त जोकर’ (कोकन क्लाउन) बताया है। मेदवेदेव ने&nbsp;<a href="https://www.deccanherald.com/world/miracle-how-trump-restrained-from-hitting-zelenskyy-says-russia-on-their-verbal-spat-3427522" target="_blank" rel="noreferrer noopener">कहा</a>, “यह अच्छी बात है, लेकिन पर्याप्त नहीं है। हमें नाजी मशीन को सैन्य सहायता बंद करनी होगी।“</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप और ज़ेलेंस्की की बहस पर दुनिया भर के नेताओं से प्रतिक्रिया आ रही हैं। यूरोप के देश जहां यूक्रेन के समर्थन में खड़े हैं तो दूसरी और कई लोगों ने ज़ेलेंस्की की आलोचना भी की है। कई लोग इसे कूटनीतिक रूप से यूक्रेन के लिए खराब स्थिति बता रहे हैं। जब रूस-यूक्रेन के बीच शांति को लेकर बातचीत की जानी हैं तो ऐसे में ज़ेलेंस्की का यह व्यवहार यूक्रेन के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ट्रंप के दबाव में झुके ज़ेलेंस्की, इस्तीफा देने को हुए तैयार, जानें पुतिन क्यों नहीं कर रहे यूक्रेन से बात?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9d%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%87/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Feb 2025 00:35:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[Donald Trump]]></category>
		<category><![CDATA[NATO]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[Ukraine]]></category>
		<category><![CDATA[US]]></category>
		<category><![CDATA[Volodymyr Zelensky]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[डोनाल्‍ड ट्रंप]]></category>
		<category><![CDATA[यूक्रेन]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<category><![CDATA[वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की]]></category>
		<category><![CDATA[व्लादिमीर पुतिन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dainikbhaskarup.com/?p=484049</guid>

					<description><![CDATA[रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए सोमवार (24 फरवरी) को 3 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 24 फरवरी 2022 को रूस-यूक्रेन के बीच बड़े पैमाने पर हमले शुरू हो गए थे जिसके बाद से अभी तक यह युद्ध लगातार चल रहा है। रूस ने यूक्रेन पर शनिवार रात एक साथ 267 ड्रोन से हमला किया है ... <a title="ट्रंप के दबाव में झुके ज़ेलेंस्की, इस्तीफा देने को हुए तैयार, जानें पुतिन क्यों नहीं कर रहे यूक्रेन से बात?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9d%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%87/" aria-label="Read more about ट्रंप के दबाव में झुके ज़ेलेंस्की, इस्तीफा देने को हुए तैयार, जानें पुतिन क्यों नहीं कर रहे यूक्रेन से बात?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-484050" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए सोमवार (24 फरवरी) को 3 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 24 फरवरी 2022 को रूस-यूक्रेन के बीच बड़े पैमाने पर हमले शुरू हो गए थे जिसके बाद से अभी तक यह युद्ध लगातार चल रहा है। रूस ने यूक्रेन पर शनिवार रात एक साथ 267 ड्रोन से हमला किया है और 3 बैलिस्टिक मिसाइलें भी दागी हैं। यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि यह हमला कम से कम 13 शहरों में किया गया है। रूस के इस आक्रामक रुख और अमेरिका के यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की पर बनाए गए दबाव के बाद लग रहा है कि यह युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है। पिछले कई दिनों से ट्रंप लगातार ज़ेलेंस्की पर हमलावर थे और अब ज़ेलेंस्की ने राष्ट्रपति पद छोड़ने को लेकर एक बड़ा एलान कर दिया है।&nbsp;&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">इस्तीफा देंगे ज़ेलेंस्की!</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के दबाव और दुनिया में अलग-थलग पड़ते यूरोप के चलते यूक्रेन के पास अब युद्ध में मदद के लिए कोई बड़ा भागीदार नहीं बचा है। अब लगता है कि इसके चलते ही ज़ेलेंस्की ने कुछ शर्तों के साथ राष्ट्रपति पद छोड़ने का मन बना लिया&nbsp;<a href="https://navbharattimes.indiatimes.com/world/rest-of-europe/volodymyr-zelensky-willing-to-give-up-presidency-in-exchange-for-nato-membership-know-why/articleshow/118520246.cms" target="_blank" rel="noreferrer noopener">है</a>। ज़ेलेंस्की ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वह खुशी से राष्ट्रपति पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “अगर यूक्रेन की शांति या NATO की सदस्यता के लिए पद छोड़ना पड़े तो मैं तैयार हूं।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ज़ेलेंस्की ने कहा, “अगर लोग चाहते हैं कि मैं पद छोड़ दूं, तो मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि हमें शांति मिले और नेटो की सदस्यता के रूप में सुरक्षा की गारंटी दी जाए। यदि हमारी ये मांगें पूरी होती हैं, तो मैं तुरंत पद छोड़ने के लिए तैयार हूं।” उन्होंने आगे कहा, “मेरा ध्यान सिर्फ मौजूदा समय में यूक्रेन की सुरक्षा पर नहीं है और न ही केवल अगले बीस वर्षों के लिए। मैं दशकों तक सत्ता में नहीं रहूंगा। मेरा प्रमुख उद्देश्य देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और यही मेरा सपना भी है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिकी सैन्य मदद पर क्या बोले ज़ेलेंस्की?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से सैन्य मदद ना मिलने और केवल यूरोपीय संघ से मिल रही मदद के काफी होने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी है। ज़ेलेंस्की ने इसे लेकर कहा कि अमेरिका की मदद केवल आर्थिक रूप से भी ज़रूरी नहीं है बल्कि उसके द्वारा लगाए जाने वाली विभिन्न तरह की पाबंदियां भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि कुछ ऐसे हथियार हैं जो यूरोप के पास हैं लेकिन उनका लाइसेंस अमेरिका के पास ही है, यूरोप हथियार दे सकता है लेकिन लाइसेंस के लिए अमेरिका का ही रुख करना होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पुतिन क्यों नहीं कर रहे बातचीत?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">20 मई 2019 को ज़ेलेंस्की ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उन्हें इस पद पर 5 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। युद्ध के हालातों में यूक्रेन में चुनाव होना संभव नहीं है तो ज़ेलेंस्की ही लगातार इस पद पर बने हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लगातार कहा है कि वे यूक्रेन की तरफ से ऐसे प्रतिनिधि से बात करना चाहते हैं जो इसके लिए अधिकृत हो। पुतिन का कहना है, “राष्ट्रपति के तौर पर ज़ेलेंस्की का कार्यकाल पूरा हो चुका है और उनकी जगह एक नया निर्वाचित नेता होना चाहिए जो इस बातचीत में हिस्सा ले सके।” डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से यह रुख दोहराया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ज़ेलेंस्की के ऊपर ना केवल कार्यकाल पूरा होने का दबाव है बल्कि ट्रंप खुद लगातार उनके खिलाफ बयान दे&nbsp;रहे हैं। ट्रंप ने तो अब यहां तक दावा कर दिया है कि अगर ज़ेलेंस्की ने ठीक कदम नहीं उठाए तो उनका देश यानी यूक्रेन बचेगा नहीं। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 12 फरवरी को फोन पर लंबी बातचीत हुई और इसके बाद से ही ट्रंप रूस के पक्ष में नज़र आ रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रूस ने ली अमेरिका की फिरकी: कहा- सुखोई-27 लड़ाकू विमान ने अमेरिका के विमान को खदेड़ा</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/russia-leans-back-to-america-said-sukhoi-27-fighter-aircraft-pounded-the-us-aircraft/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Mar 2019 07:36:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA["US]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
		<category><![CDATA[INF Arm Deal]]></category>
		<category><![CDATA[INF Deal]]></category>
		<category><![CDATA[international news]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[Russia russia world hindi news]]></category>
		<category><![CDATA[World]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[आईएनएफ हथियार समझौता]]></category>
		<category><![CDATA[डोनाल्‍ड ट्रंप]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<category><![CDATA[व्लादिमीर पुतिन]]></category>
		<category><![CDATA[सुखोई-27]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.dainikbhaskarup.com/?p=25486</guid>

					<description><![CDATA[मॉस्क।  रूस के लड़ाकू विमान सुखोई -27 ने बाल्टिक सागर में उसके हवाई क्षेत्र में आए एक अमेरिकी वायु सेना के विमान का पीछा किया और उसे अपने क्षेत्र में लौटने पर मजबूर किया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी।  रक्षा मंत्रालय ने कहा, “हवाई रक्षा ड्यूटी पर तैनात सुखोई -27 ... <a title="रूस ने ली अमेरिका की फिरकी: कहा- सुखोई-27 लड़ाकू विमान ने अमेरिका के विमान को खदेड़ा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/russia-leans-back-to-america-said-sukhoi-27-fighter-aircraft-pounded-the-us-aircraft/" aria-label="Read more about रूस ने ली अमेरिका की फिरकी: कहा- सुखोई-27 लड़ाकू विमान ने अमेरिका के विमान को खदेड़ा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मॉस्क। </strong> रूस के लड़ाकू विमान सुखोई -27 ने बाल्टिक सागर में उसके हवाई क्षेत्र में आए एक अमेरिकी वायु सेना के विमान का पीछा किया और उसे अपने क्षेत्र में लौटने पर मजबूर किया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी।  रक्षा मंत्रालय ने कहा, “हवाई रक्षा ड्यूटी पर तैनात सुखोई -27 लड़ाकू विमान ने हमारे हवाई क्षेत्र में आए अमेरिका के आरसी-135 विमान का पीछा किया और सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को हासिल किया।”<br />
रक्षा मंत्रालय ने कहा, “रूस का लड़ाकू विमान विदेशी विमान को अपनी सीमा से बाहर खदेड़ने के बाद सुरक्षित वापस लौट आया।</p>
<p><strong>रूस ने अमेरिका के साथ हुआ आइएनएफ हथियार समझौता किया निलंबित</strong></p>
<p><strong> </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को शीत युद्धकाल में अमेरिका के साथ हुए हथियार समझौते से पैर पीछे खींच लिए। उन्होंने आइएनएफ समझौते में रूसी भागीदारी को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया। अमेरिका पहले ही रूस पर समझौते के विरुद्ध कार्य करने का आरोप लगाकर साझेदारी से बाहर निकल चुका है। इस प्रकार से दुनिया को शीत युद्धकाल से बाहर लाने वाला दो महाशक्तियों के बीच का आइएनएफ हथियार समझौता अब बेमानी हो गया है। राष्ट्रपति पुतिन के क्रेमलिन कार्यालय के अनुसार समझौते को निलंबित करने के प्रपत्र पर दस्तखत हो गए हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/04_03_2019-putin-and-trump_19013702_223732978.jpg" alt="à¤°à¥à¤¸ à¤¨à¥ à¤à¤®à¥à¤°à¤¿à¤à¤¾ à¤à¥ à¤¸à¤¾à¤¥ à¤¹à¥à¤ à¤à¤à¤à¤¨à¤à¤« à¤¹à¤¥à¤¿à¤¯à¤¾à¤° à¤¸à¤®à¤à¥à¤¤à¤¾ à¤à¤¿à¤¯à¤¾ à¤¨à¤¿à¤²à¤à¤¬à¤¿à¤¤" /></p>
<p>कहा गया है कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारी को नहीं माना, इसलिए इस समझौते का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। इससे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर ऐसा ही आरोप लगाया था। 1987 में हुए इस समझौते के तहत मध्यम दूरी की परमाणु मिसाइलों की संख्या को सीमित करने पर अमेरिका और सोवियत संघ में सहमति बनी थी। ये मिसाइल 5,500 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली थीं। जिस समय यह समझौता हुआ था, उस समय चीन सैन्य ताकत नहीं बना था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। चीन लंबी दूरी की और भारत मध्यम दूरी की परमाणु हथियार युक्त बैलेस्टिक मिसाइल बनाने और दागने में सक्षम है। ऐसे में माना जा रहा था कि आइएनएफ समझौता अब बेमानी हो गया है। समझौता खत्म होने के बाद दुनिया में अब हथियारों की प्रतिद्वंद्विता फिर से तेज होने की आशंका है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अमेरिका पर रूस के आरोप से मचा हड़कंप, कहा-अगर ऐसे चलता रहा तो खतरे में पड़ जायेगा विश्व</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/promoting-americas-arms-campaign-is-dangerous-for-the-world/</link>
					<comments>https://dainikbhaskarup.com/promoting-americas-arms-campaign-is-dangerous-for-the-world/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2018 09:18:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[Promoting America's Arms Campaign is Dangerous for the World]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[आईएनएफ संधि]]></category>
		<category><![CDATA[डोनाल्‍ड ट्रंप]]></category>
		<category><![CDATA[फिलहाल]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार संक्षेप]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.dainikbhaskarup.com/?p=13659</guid>

					<description><![CDATA[मास्को।  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्स (आईएनएफ) संधि को छो़डकर अमेरिका हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे रहा है। रूस की समाचार एजेंसी ‘तास’ के मुताबिक, श्री पेस्कोव ने बुधवार को कहा,“यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है। वास्तव में, यह अमेरिका का हथियारों की होड़ ... <a title="अमेरिका पर रूस के आरोप से मचा हड़कंप, कहा-अगर ऐसे चलता रहा तो खतरे में पड़ जायेगा विश्व" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/promoting-americas-arms-campaign-is-dangerous-for-the-world/" aria-label="Read more about अमेरिका पर रूस के आरोप से मचा हड़कंप, कहा-अगर ऐसे चलता रहा तो खतरे में पड़ जायेगा विश्व">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मास्को।  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्स (आईएनएफ) संधि को छो़डकर अमेरिका हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे रहा है। रूस की समाचार एजेंसी ‘तास’ के मुताबिक, श्री पेस्कोव ने बुधवार को कहा,“यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है। वास्तव में, यह अमेरिका का हथियारों की होड़ शुरू करने और सैन्य संभावनाओं को बढ़ाने का इरादा है। यह विश्व को असुरक्षित जगह बना देगा।”<br />
श्री पेस्कोव ने बताया कि श्री पुतिन ने भी कहा है कि इस संदर्भ में हम निश्चित रूप से अपने राष्ट्रीय हितों और रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे पहले एवं महत्वपूर्ण मानेंगे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="http://www.newsnavsamvaad.com/wp-content/uploads/2017/07/putin_trump2.jpg" alt="Image result for à¤°à¥à¤¸ à¤à¤®à¥à¤°à¤¿à¤à¤¾" width="759" height="404" /><br />
व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जॉन बोल्टन और श्री पुतिन के बीच मंगलवार को हुई बातचीत के बारे में श्री पेस्कोव ने बताया कि अमेरिकी पक्ष ने आईएनएफ संधि छोड़ने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने का फैसला कर लिया है। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए, इस पर ध्यान दिया जाएगा।  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 अक्टूबर को कहा था कि रूस ने कथित तौर पर आईएनएफ संधि का उल्लंघन किया है जिसकी वजह से अमेरिका इस संधि से पीछे हटेगा।</p>
<p><img decoding="async" src="https://resize.khabarindiatv.com/resize/newbucket/715_-/2016/04/indiatv-amercian-army-1461598695.jpg" alt="Image result for à¤à¤®à¥à¤°à¤¿à¤à¤¾ à¤¸à¥à¤¨à¤¿à¤ à¤¶à¤à¥à¤¤à¤¿" /></p>
<p>आईएनएफ संधि ने परिचालन और गैर-परिचालन मध्यम दूरी (1,000-5,500 किलोमीटर) और कम दूरी (500-1,000 किलोमीटर) तक जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों को हटा दिया था। इस संधि के तहत सोवियत संघ ने 1,846 मिसाइलों जबकि अमेरिका ने 846 मिसाइलों को हटा दिया था। गौरतलब है कि आईएनएफ संधि पर वाशिंगटन में आठ दिसंबर 1987 को हस्ताक्षर किए गए थे और यह एक जून 1988 से लागू हुयी थी। वर्ष 1992 में सोवियत संघ के विघटन के बाद बेलारूस, कजाखिस्तान और यूक्रेन भी इस संधि से जुड़ गए थे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://dainikbhaskarup.com/promoting-americas-arms-campaign-is-dangerous-for-the-world/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दुश्मन नहीं यहाँ दोस्त बने &#8220;भारत-पाक&#8221; के सैनिक</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/first-time-india-and-pakistan-soldiers-together-participate-in-military-exercise-news/</link>
					<comments>https://dainikbhaskarup.com/first-time-india-and-pakistan-soldiers-together-participate-in-military-exercise-news/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Aug 2018 09:16:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[China]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Air Force]]></category>
		<category><![CDATA[indian Army]]></category>
		<category><![CDATA[indian navy]]></category>
		<category><![CDATA[military exercise]]></category>
		<category><![CDATA[pakistan army]]></category>
		<category><![CDATA[peace mission 2018]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[russia and india]]></category>
		<category><![CDATA[sco]]></category>
		<category><![CDATA[sco summit]]></category>
		<category><![CDATA[sco summit 2018]]></category>
		<category><![CDATA[shanghai cooperation organization]]></category>
		<category><![CDATA[चीन]]></category>
		<category><![CDATA[पाकिस्तान]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय एयरफोर्स]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय सेना]]></category>
		<category><![CDATA[युद्धभ्यास]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<category><![CDATA[शंघाई सहयोग संगठन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.dainikbhaskarup.com/?p=8039</guid>

					<description><![CDATA[नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के सैनिक अब तक एक दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे हैं, लेकिन यह पहला मैका है जब दोनों देश के जवान एक साथ युद्धाभ्यास करेंगे। रूस में शंघाई सहयोग संगठन के देशों का मल्टी नेशन कॉउंटर टेरर वॉरगेम प्रोग्राम चल रहा है। दोनों देश इसी क्रार्यक्रम के तहत युद्धाभ्यास करेंगे। कार्यक्रम ... <a title="दुश्मन नहीं यहाँ दोस्त बने &#8220;भारत-पाक&#8221; के सैनिक" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/first-time-india-and-pakistan-soldiers-together-participate-in-military-exercise-news/" aria-label="Read more about दुश्मन नहीं यहाँ दोस्त बने &#8220;भारत-पाक&#8221; के सैनिक">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="rtejustify"><strong>नई दिल्ली: </strong>भारत और पाकिस्तान के सैनिक अब तक एक दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे हैं, लेकिन यह पहला मैका है जब दोनों देश के जवान एक साथ युद्धाभ्यास करेंगे। रूस में शंघाई सहयोग संगठन के देशों का मल्टी नेशन कॉउंटर टेरर वॉरगेम प्रोग्राम चल रहा है। दोनों देश इसी क्रार्यक्रम के तहत युद्धाभ्यास करेंगे। कार्यक्रम &#8216;पीस मिशन 2018&#8217; के तहत चीन, रूस और शंघाई सहयोग संगठन में शामिल अन्य देश संयुक्त युद्धाभ्याम में हिस्सा ले रहे हैं।</p>
<p class="rtejustify">रूस के चेबरकुल में इस कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार यानी 24 अगस्त को हो चुकी है। आर्मी के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा कि ये युद्धाभ्यास एससीओ देशों को आतंकवाद से लड़ने में मदद प्रदान करेगा। इस कार्यक्रम में सभी देशों के सौनिकों के बीच प्रोफेशनल बातचीत, युद्ध की आपसी समझ और प्रोसीजर, ज्वाइंट कमांड और कंट्रोल का ढांचा स्थापित होगा। जिसके आतंक के खिलाफ लड़ने में मदद मिलेगी।</p>
<p class="rtejustify">गौरतलब है कि इस युद्धाभ्यास में एससीओ में शामिल सभी आठ देशों की सेनाएं भाग ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास का मूल उद्देश्य एससीओ देशों की सेनाओं को बहुराष्ट्रीय और संयुक्त माहौल के शहरी इलाकों में आतंकवाद से निपटने का प्रशिक्षण प्रदान करना है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://bcdn.newshunt.com/cmd/resize/400x400_60/fetchdata13/images/c8/ac/0d/c8ac0d8425ded610df87c0709db01f7d.jpg" /></p>
<div class="media_embed"><iframe loading="lazy" id="1535187664904_TBOtherPlayer_10" src="https://www.youtube.com/embed/buiSUTj8tuQ?enablejsapi=1" width="560px" height="315px" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen" data-mce-fragment="1"></iframe></div>
<p>&nbsp;</p>
<p class="rtejustify">इस अभ्यास में रूस, पाकिस्तान, चीन, भारत, किर्गिजिस्तान, उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान और कजाकस्तान के तीन हजार से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। इस युद्धभ्यास में रूस से सबसे अधिक 1700, चीन के 700 और भारत के 200 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। भारत से राजपूत रेजिमेंट और भारतीय वायुसेना के जवान इस अभ्यास में शामिल होंगे।</p>
<p class="rtejustify">एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने इससे पहले कभी किसी मल्टी लैटरल एक्सरसाइज में हिस्सा नहीं लिया है जिसमें पाकिस्तान भी साथ होगा। हालांकि दोनों देशों की सेना ने यूएन के मिशन और ऑपरेशन में साथ काम जरूर किया है।</p>
<p><strong>तीन हजार से अधिक सैनिक ले रहे हैं भाग</strong><br />
आपको बता दे की इस अभ्यास को पीस मिशन-2018 नाम दिया गया है भारत-पाकिस्तान के अलावा इसमें चीन, किर्गिजिस्तान, तजाकिस्तान, कजाकस्तान, रूस के लगभग तीन हजार से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। दोनों देशों के बीच अविश्वास की बड़ी खाई है ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर भारत और पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में कैसे एक दूसरे का सहयोग करेंगे।</p>
<p><strong>इस संयुक्त अभ्यास का मकसद शांति की स्थापना करना</strong><br />
भारत की ओर से इस अभ्यास में भारतीय थलसेना की 5-राजपूत रेजिमेंट के सैनिकों को भेजा गया है। भारतीय सैन्य टुकड़ी में थलसेना के तकरीबन 167 जवान और वायुसेना के 33 जवान भाग ले रहे है। इस संयुक्त अभ्यास का मकसद शांति की स्थापना करना और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए संगठन के 8 देशों के बीच एक-दूसरे का पूर्ण्तः सहयोग करना है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://dainikbhaskarup.com/first-time-india-and-pakistan-soldiers-together-participate-in-military-exercise-news/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोदी-जिनपिंग ने जताई निकट भागीदारी को बढ़ावा देने पर सहमति, भारत आने पर चीनी राष्ट्रपति ने दिया ये जवाब</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/modi-jinping-agreed-to-promote-closer-partnership-the-chinese-president-gave-the-answer/</link>
					<comments>https://dainikbhaskarup.com/modi-jinping-agreed-to-promote-closer-partnership-the-chinese-president-gave-the-answer/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Jul 2018 10:27:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[bilateral meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Brazil]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS]]></category>
		<category><![CDATA[China]]></category>
		<category><![CDATA[Chinese President Xi Jinping]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[Johannesburg]]></category>
		<category><![CDATA[Prime Minister Narendra Modi]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[South Africa]]></category>
		<category><![CDATA[Summit]]></category>
		<category><![CDATA[चीन]]></category>
		<category><![CDATA[चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग]]></category>
		<category><![CDATA[जोहानसबर्ग]]></category>
		<category><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका]]></category>
		<category><![CDATA[द्विपक्षीय बैठक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[ब्राजील]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रिक्स]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<category><![CDATA[शिखर सम्मेलन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.dainikbhaskarup.com/?p=5533</guid>

					<description><![CDATA[जोहानसबर्ग । ब्रिक्स (भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन में शामिल होने दक्षिण अफ्रीका गए प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने हाल के दिनों में शुरू हुई बातचीत की गति को बरकरार रखने और सीमा पर शांति बनाए ... <a title="मोदी-जिनपिंग ने जताई निकट भागीदारी को बढ़ावा देने पर सहमति, भारत आने पर चीनी राष्ट्रपति ने दिया ये जवाब" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/modi-jinping-agreed-to-promote-closer-partnership-the-chinese-president-gave-the-answer/" aria-label="Read more about मोदी-जिनपिंग ने जताई निकट भागीदारी को बढ़ावा देने पर सहमति, भारत आने पर चीनी राष्ट्रपति ने दिया ये जवाब">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जोहानसबर्ग ।</strong> ब्रिक्स (भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन में शामिल होने दक्षिण अफ्रीका गए प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने हाल के दिनों में शुरू हुई बातचीत की गति को बरकरार रखने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए संबंधित हितधारकों को उचित निर्देश देने पर सहमति व्यक्त की। मोदी तथा जिनपिंग ने इस दौरान दोनों देशों के बीच करीबी विकास साझेदारी को समेकित तथा विकसित करने पर सहमति जताई।</p>
<h3>अजित डोभाल को इस वर्ष चीन भेजने की इच्छा जतायी</h3>
<p>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से हटकर दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान मोदी ने जिनपिंग से कहा, “इस गति को बनाए रखना महत्वपूर्ण है और इसके लिए हमें नियमित रूप से अपने स्तर पर हमारे रिश्तों की समीक्षा करनी चाहिए और जब भी आवश्यक हो उचित निर्देश देना चाहिए। विदेश सचिव विजय गोखले ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिनपिंग के साथ मुलाकात के दौरान विशेष प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को इस वर्ष चीन भेजने की इच्छा जतायी।</p>
<h3>मोदी की तीन महीनों में तीसरी मुलाकात</h3>
<p>उन्होंने कहा, “दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान अप्रैल में वुहान में हुई अनौपचारिक बैठक के साथ-साथ जून में क़िंगदाओ में हुई अपनी मुलाकात को याद किया। दोनों नेता द्विपक्षीय जुड़ाव को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों से विशेष रूप से संतुष्ट थे।” उन्होंने कहा यह एक ‘बहुत ही लाभकारी’ बैठक रही।  उल्लेखनीय है कि 10 वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने यहां आए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगभग तीन महीनों में यह तीसरी मुलाकात है। दोनों नेताओं के बीच अप्रैल महीने में चीन के वुहान में दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर सम्मेलन हुआ था। फिर जून में दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान क़िंगदाओ में मिले थे।</p>
<h3>द्विपक्षीय सहयोग के लिए नए अवसर भी प्रदान किये</h3>
<p>गोखले ने बताया कि मोदी ने जिनपिंग के साथ हुई हालिया मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि इसने भारत तथा चीन के रिश्तों को एक नयी ताकत और द्विपक्षीय सहयोग के लिए नए अवसर भी प्रदान किये हैं। उन्होंने कहा कि नवीनतम द्विपक्षीय बैठक ने अपनी निकट विकास साझेदारी को मजबूत करने के लिए उन्हें एक और अवसर प्रदान किया है।  गोखलने ने कहा कि दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान वुहान में बनी कुछ सहमतियों और निर्णयों को लागू करने पर भी सहमति व्यक्त की। गोखले ने कहा, “ दोनों नेताओं ने कहा कि गत कुछ महीनों में दोनों देशों के पारस्परिक विश्वास में बढ़ोतरी हुई है।</p>
<h3>भारत आने के उनके निमंत्रण को स्वीकार कर वह बहुत खुश</h3>
<p>जिनपिंग ने मोदी से कहा कि वर्ष 2019 में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने के उनके निमंत्रण को स्वीकार कर वह बहुत खुश हैं। यह दूसरा मौका होगा जब मैं भारत के अनौपचारिक दौरे पर जाउंगा। उन्होंने कहा, “ क़िंगदाओ में दोनों देश इस बात पर सहमत हुए थे कि चीन के रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री इस वर्ष भारत के दौरे पर जाएंगे। आज की बैठक में तय हुए है कि अगस्त और अक्टूबर महीने में क्रमश: दो दौरे होंगे। गोखले ने कहा कि यह भी निर्णय लिया गया है कि एक भारतीय व्यपार प्रतिनिधिमंडल अगस्त महीने में चीन के दौरे पर जाएगा और इस दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है उनमें सोया, चीनी और गैर-बासमती चावल का निर्यात के विषय शामिल हैं।</p>
<h3>दोनों देशों ने मानव सभ्यता की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी</h3>
<p>उन्होंने बताया कि भारत के दवा व्यापारियों का एक प्रतिनिधि मंडल भी 21 और 22 अगस्त को दो दिवसीय चीन दौरे पर शंघाई जाएगा।  उन्होंने बताया कि मोदी और जिनपिंग इस वर्ष के आखिर में अर्जेंटीना के मार्जिन में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में दोबारा मिलेंगे। उन्होंने बताया कि चीन के राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक संचार को मजबूत करने, आपसी विश्वास बढ़ाने तथा व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ सांस्कृतिक और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की अपील की। जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत प्राचीन सभ्यताओं के देश हैं और दोनों देशों ने मानव सभ्यता की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://dainikbhaskarup.com/modi-jinping-agreed-to-promote-closer-partnership-the-chinese-president-gave-the-answer/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बर्गर किंग का शर्मनाक ऑफर &#8211; खिलाड़ियों से प्रेग्नेंट होकर जिंदगीभर खाएं&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/burger-king-offer-russia-get-pregnent-take-money-news/</link>
					<comments>https://dainikbhaskarup.com/burger-king-offer-russia-get-pregnent-take-money-news/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Jun 2018 06:08:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[burger king]]></category>
		<category><![CDATA[FIFA]]></category>
		<category><![CDATA[FIFA World Cup 2018]]></category>
		<category><![CDATA[football]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[फीफा]]></category>
		<category><![CDATA[फीफा वर्ल्ड कप 2018]]></category>
		<category><![CDATA[फुटबॉल]]></category>
		<category><![CDATA[बर्गर किंग]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.dainikbhaskarup.com/?p=1387</guid>

					<description><![CDATA[विश्व की जानी मानी बर्गर फूड चेन ने अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए मानवता और खेल भावना दोनों को शर्मसार करने का काम किया है। दरअसल रूस में बर्गर किंग ने ऑफर निकाला कि अगर कोई लड़की वर्ल्ड कप में खेल रहे किसी फुटबॉल प्लेयर से प्रेग्नेंट होती है तो उन्हें जिंदगीभर के लिए बर्गर किंग ... <a title="बर्गर किंग का शर्मनाक ऑफर &#8211; खिलाड़ियों से प्रेग्नेंट होकर जिंदगीभर खाएं&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/burger-king-offer-russia-get-pregnent-take-money-news/" aria-label="Read more about बर्गर किंग का शर्मनाक ऑफर &#8211; खिलाड़ियों से प्रेग्नेंट होकर जिंदगीभर खाएं&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विश्व की जानी मानी बर्गर फूड चेन ने अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए मानवता और खेल भावना दोनों को शर्मसार करने का काम किया है। दरअसल रूस में बर्गर किंग ने ऑफर निकाला कि अगर कोई लड़की वर्ल्ड कप में खेल रहे किसी फुटबॉल प्लेयर से प्रेग्नेंट होती है तो उन्हें जिंदगीभर के लिए बर्गर किंग में फ्री खाना मिलेगा।</strong></p>
<p>नई दिल्ली। रूस में खेले जा रहे फीफा विश्वकप का रोमांच अपने चरम पर है। पूरी दुनिया के प्रशंसक इस फुटबॉल के महाकुंभ को देखने के लिए रूस पहुंचे हैं। ऐसे में दुनिया की सभी बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की सेल के लिए वर्ल्ड कप का ही सहारा ले रही हैं, लेकिन इसी बीच विश्व की जानी मानी बर्गर फूड चेन ने अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए मानवता और खेल भावना दोनों को शर्मसार करने का काम किया है। दरअसल रूस में बर्गर किंग ने ऑफर निकाला कि अगर कोई लड़की वर्ल्ड कप में खेल रहे किसी फुटबॉल प्लेयर से प्रेग्नेंट होती है तो उसे तीन मिलियन रुबल (रूसी मुद्रा) मतलब लगभग 32 लाख रुपए दिए जाएंगे। वहीं उसे जिंदगीभर के लिए बर्गर किंग में फ्री खाना मिलेगा।</p>
<p>https://twitter.com/EnglishRussia1/status/1009069886105153536</p>
<p>गौरतलब हो कि यह विज्ञापन रूस की सोशल मीडिया साइट वीके पर डाला गया था। इस पर लोगों ने जब आलोचना करना शुरू किया तो इस विज्ञापन को हटा लिया गया। इसके साथ ही बर्गर किंग ने इसके लिए माफी भी मांगी है। बर्गर किंग ने बयान जारी कर कहा कि इस ऐड को संज्ञान में आते ही हटा लिया है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://smedia2.intoday.in/lallantop/wp-content/uploads/2018/06/Feature_Burger-King_210618-111423.jpg" alt="Derogatory advertisement of Burger King in Russia is taken off after opposition from people" /></p>
<p><strong>यह हमारे ब्रांड के स्तर को नहीं दर्शाता है. </strong></p>
<p>भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब बर्गर किंग ने कोई विवादित ऐड बनाया हो। 2017 में बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की के ऊपर भी बर्गर किंग ने विवादित ऐड बनाया था। तब भी आलोचना होने पर ऐड हटा लिया था। वहीं 2009 में अपने एक बर्गर के ऐड में भी अश्लीलता की थी। बता दें कि बर्गर किंग की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी McDonalds इस वर्ल्ड कप के अधिकारिक स्पॉनसर्स में से एक हैं। ऐसे में करोड़ों प्रशंसकों को लुभाने के लिए ये कंपनियां इस तरह के घटिया विज्ञापन दिखाकर लोगों को लुभाती है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://dainikbhaskarup.com/burger-king-offer-russia-get-pregnent-take-money-news/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 
Lazy Loading (feed)

Served from: dainikbhaskarup.com @ 2026-05-23 11:23:30 by W3 Total Cache
-->