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	<title>विष्णु भगवान &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>विष्णु भगवान &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>देवउठनी एकादशी पर जग जाएंगे भगवान श्रीविष्णु, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि</title>
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		<pubDate>Wed, 06 Nov 2019 04:04:43 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone  wp-image-39411" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/dev-uthani-ekadashi-2019-4.11.19-1.jpg" alt="" width="928" height="488" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/dev-uthani-ekadashi-2019-4.11.19-1.jpg 700w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/dev-uthani-ekadashi-2019-4.11.19-1-300x158.jpg 300w" sizes="(max-width: 928px) 100vw, 928px" /></p>
<p>कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को लोग देवउठनी एकादशी के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि क्षीर सागर में चार महीने की योगनिद्रा के बाद भगवान विष्णु इस दिन उठते हैं। इस बार देवउठनी एकादशी 08 नवंबर को पड़ रही है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी या देवोत्थान एकादशी पर श्रीविष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है।</p>
<p>धर्मग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु ने दैत्य शंखासुर को मारा था। भगवान विष्णु और दैत्य शंखासुर के बीच युद्ध लम्बे समय तक चलता रहा। युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु बहुत अधिक थक गए। तब वे क्षीरसागर में आकर सो गए और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागे। तब सभी देवी-देवताओं द्वारा भगवान विष्णु का पूजन किया गया। इसी वजह से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल देवउठनी एकादशी 8 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन तुलसी विवाह की भी परंपरा है। भगवान शालिग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह होता है।</p>
<p>इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसमें जालंधर को हराने के लिए भगवान विष्णु ने वृंदा नामक विष्णु भक्त के साथ छल किया था। इसके बाद वृंदा ने विष्णु जी को श्राप देकर पत्थर का बना दिया था, लेकिन लक्ष्मी माता की विनती के बाद उन्हें वापस सही करके सती हो गई थीं। उनकी राख से ही तुलसी के पौधे का जन्म हुआ और उनके साथ शालिग्राम के विवाह का चलन शुरू हुआ। देवश्यनी एकादशी के बाद से सभी शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। जो की देवउठनी एकादशी पर ही आकर फिर से शुरू होते हैं। इन चार महीनों के दौरान ही दिवाली मनाई जाती है, जिसमें भगवान विष्णु के बिना ही मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।</p>
<p>लेकिन देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु जी के जागने के बाद देवी-देवता भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की एक साथ पूजा करके देव दिवाली मनाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से परिवार पर भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है। इसके साथ ही मां लक्ष्मी घर पर सदैव धन, संपदा और वैभव की वर्षा करती हैं। तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त 8 नवंबर को शाम 7:55 से रात 10 बजे तक रहेगा।</p>
<p>इस बार इस अवसर पर सुंदर संयोग बन रहा है, जो भी वर-वधू का जोड़ा परिणय सूत्र में बंधता है उसका गृहस्थ जीवन सुखमय रहेगा। इसलिए 8 नवंबर को विवाह करना अत्यधिक शुभ है। इस दिन से अन्य शुभ काम भी प्रारंभ हो जाएंगे। कार्तिक मास में अन्य शुभ वैवाहिक मुहूर्त भी है। जिसमें विवाह करना मंगलमय और शुभ रहेगा। 19, 20, 21, 22, 23, 28 व 30 नवंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं।</p>
<p><strong>मंत्रोच्चारण-</strong><br />
भगवान को जगाने के लिए इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए-<br />
उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥<br />
उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव। गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥<br />
शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।</p>
<div><b><u><span style="font-size: x-large;">देवउठनी एकादशी के दिन जरूर करें ये उपाय </span></u></b></div>
<div></div>
<div>* देवउठनी एकादशी के दिन आप सूर्य उदय होने से पहले जल्दी उठकर स्नान करले और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें और इसके आलावा रात में भगवान विष्णु का जागरण और कीर्तन कीजिये |</div>
<div></div>
<div>* इस दिन भगवान विष्णु नींद से जागते है इसलिए घर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु जी का स्वागत कीजिये |</div>
<div></div>
<div>* इस दिन मंदिर में तुलसी का विवाह शालिग्राम से करने से भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है |</div>
<div></div>
<div>* यदि आप इस दिन व्रत कर रहे है तो आप निर्जल व्रत करें यदि आप ये व्रत नहीं कर सकते है तो आप साधारण व्रत भी कर सकते  है | व्रत के दौरान आप नमक का सेवन बिलकुल भी न करें |</div>
<div></div>
<div>* इस दिन आप पूजा के दौरान भगवान विष्णुजी के मंत्रो का अधिक से अधिक उच्चारण करें | ऐसा करने से आपको भगवान विष्णुजी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा |</div>
<div></div>
<div>* देवउठनी एकादशी के दिन आप भगवान विष्णु जी को जगाने के लिए घंटा जरूर बजाये | गाय को भोजन कराएं और ब्राह्मण को दान दक्षिणा जरूर दें |</div>
<div></div>
<div>भगवान विष्णुजी की को जगत का पालनहार कहा जाता है | जिन लोगो के ऊपर भगवान विष्णु जी की कृपा होती है उन लोगो के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते है | यदि आप भी भगवान विष्णुजी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते है तो ऊपर बताएं गए उपाय जरूर करें उन उपायों को करने से भगवान विष्णु आपसे अति प्रसन्न होंगे |</div>
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		<title>माघ पूर्णिमा आज :  जानिए पूजा विधि और शुभ मुहर्त&#8230;</title>
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		<pubDate>Mon, 18 Feb 2019 21:01:06 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://www.newstracklive.com/uploads/other-news/astrology/Feb/18/big_thumb/maagh-purnima_5c6a77892773b.JPG" alt="Image result for à¤®à¤¾à¤ à¤ªà¥à¤°à¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾ à¤à¤ :Â  à¤®à¤¾à¤ à¤à¤à¤à¤¾ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤¸à¥ à¤®à¤¿à¤²à¥à¤à¤à¥ à¤¸à¤­à¥ à¤¤à¤°à¤¹ à¤à¥ à¤²à¤¾à¤­" /></p>
<p><strong>हिन्दू धर्म</strong> में माघी पूर्णिमा का बहुत महत्व है। जो कि इस वर्ष 19 फरवरी 2019 मंगलवार को है। हिंदू कैलेंडर के माघ महीने की पूर्णिमा तिथि को माघी पूर्णिमा कहते हैं। पंचांग हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष का अभिन्न अंग है और हिंदू धर्म के सभी धार्मिक कार्य पंचांग के अनुसार ही होते हैं। इस साल माघ पूर्णिमा 19 फरवरी को है। धार्मिक आस्था के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दान करने पर पापों से मुक्ति मिलती है।  ऐसी मान्यता है माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु स्वयं गंगा नदी में स्नान करने आते हैं। इसलिए जो भी माघ पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान करता है उसको सभी तरह के पुण्य लाभ मिलते हैं। माघ पूर्णिमा में शुभ मुहूर्त में पूजन विधि अनुसार करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है।</p>
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<div id="div-ads-3">पुराण के अनुसार बाकी के महीनों में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं। माघ मास स्नान के आलावा दान का विशेष महत्व है। दान में तिल, गुड़ और कंबल का विशेष पुण्य है। इस बार माघ पूर्णिमा पर अर्ध्य कुम्भ का संयोग भी बना है। मघा नक्षत्र में माघ पूर्णिमा आई है।</div>
</div>
<p>इस दौरान गंगा स्नान करने से इसी जन्म में मुक्ति की प्राप्ति होती है। यही नहीं स्नान के जल में गंगा जल डालकर स्नान करना भी फलदायी होता है। माना जाता है कि माघ पूर्णिमा पर स्नान करने वाले लोगों पर श्री कृष्ण की विशेष कृपा होती है। साथ ही भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर व्यक्ति को धन-धान्य, सुख-समृद्धि और संतान के साथ मुक्ति का आर्शिवाद प्रदान करते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे करें पूजा</strong><br />
1- गंगा स्नान के बाद भगवान शिव और विष्णु की पूजा करें।<br />
2- हवन या जाप करें।<br />
3- अनाज, वस्त्र, फल, बर्तन, घी, गुड़, जल से भरा घड़ा दान करें। ऐसा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलेगी।<br />
4- पितरों का श्राद्ध करें। इससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>कुम्भ में गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त- </strong></p>
<p><strong>पूर्णिमा आरंभ:</strong> 18 फरवरी 2019, सोमवार रात 01:12 बजे।<br />
<strong>पूर्णिमा समाप्त:</strong> 19 फरवरी 2019, मंगलवार 09:24 बजे।</p>
<p>सुबह 4 बजकर 21 मिनट से स्नान शुरू होगा, लेकिन स्नान पूरे दिन चलेगा।<br />
कुम्भ स्नान करने से सारे कष्टों से मुक्ति मिलेगी।<br />
माघ पूर्णिमा स्नान से धन लाभ होगा।<br />
स्नान के बाद दान ध्यान और पूजा करें।</p>
<p><strong>भगवान् का कल्पवास खत्म होगा-</strong><br />
प्रयागराज में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर कल्पवास की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। तीर्थराज प्रयाग में संगम के निकट हिन्दू माघ महीने में कल्पवास करते हैं। पौष पूर्णिमा से कल्पवास आरंभ होता है और माघी पूर्णिमा के साथ संपन्न होता है। इस कल्पवास का भी माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के साथ अंत हो जाता है। इस मास में देवी-देवताओं का संगम तट पर निवास करते हैं। इससे कल्पवास का महत्त्व बढ़ जाता है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में नदी स्नान करने से शारीरिक समस्याएं दूर हो जाती हैं। इस दिन तिल और कंबल का दान करने से नरक लोक से मुक्ति मिलती है।</p>
<p><strong>गंगा जल से स्नान के बाद क्या करें- </strong></p>
<p>1- स्नान के बाद सूर्यदेव को प्रणाम करें।<br />
2- ॐ घृणि सूर्याय नमः मन्त्र का जाप करें।<br />
3- सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद माघ पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।<br />
4- भगवान विष्णु की पूजा करें।<br />
5- पूजा के बाद दान दक्षिणा करें और दान में विशेष रूप से काले तिल प्रयोग करें।<br />
6- काले तिल से ही हवन और पितरों का तर्पण करें।<br />
7- इस दिन झूठ बोलने से बचें।</p>
<p><strong>इस तरह मिलते हैं पुण्य</strong><br />
धार्मिक आस्था है कि माघ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले गंगा में स्नान करने के बाद पूजन करना चाहिए और सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। यदि गंगा स्नान के लिए जाना संभव न हो तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर भी कर सकते हैं। इसके बाद पूजा-पाठ कर साधु-संतों और जरूरमंतों को दान देना चाहिए। ऐसा करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। इससे हमारे भाग्य के द्वार खुलते हैं।</p>
<p><strong>क्यों करते हैं गंगा स्नान?</strong><br />
पौराणिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के अवसर स्वयं श्रीहरि भगवान विष्णु पृथ्वी पर आकर गंगा के निर्मल जल से स्नान करते हैं। हमारे देश में किसी भी दिन और तिथि में गंगा स्नान अति उत्तम और सुखदाई माना जाता है। लेकिन माघ पूर्णिमा पर जब स्वयं श्रीहरि इस पावन जल में स्नान करते हैं तो इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।</p>
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