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	<title>वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>रिपोर्ट : क्या सच में ज़ेलेंस्की ने अपनी इमेज बनाने के लिए यूक्रेन के भविष्य की कुर्बानी दे दी?</title>
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		<pubDate>Thu, 06 Mar 2025 00:36:39 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-485036" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/zelensky-and-trump-1-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में जो झड़प जैसी स्थिति बनी, उसके बाद से भारत के सदा संदिग्ध (यूजुअल सस्पेक्ट्स) जमात में बड़ी हलचल है। कई मासूम ज़ेलेंस्की को ‘छप्पन इंची’ घोषित करने पर आमादा हैं। यूके में ज़ेलेंस्की की प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात और यूके के जेलेंस्की को समर्थन की बातों के बाद से गिरोहों में उछल-कूद और भी बढ़ी है। लेकिन प्रश्न ये है कि क्या अपनी छवि के चक्कर में ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की जनता के भविष्य की कुर्बानी दे डाली है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके लिए हमें रूस-यूक्रेन और पश्चिमी देशों के संबंधों को थोड़ा सा पीछे जाकर देखना पड़ता है। शीत युद्ध के बाद के समय में जब सोवियत संघ बिखर गया था, उस समय यूक्रेन अलग हुआ और तभी से वाशिंगटन ने इस क्षेत्र में नाटो की पैठ बनाने की कोशिशें तेज कर दी थी। कहने के लिए तो गोर्बाचोव को अमेरिका ने कहा कि वो पूर्व की ओर नहीं बढ़ेंगे लेकिन असल में नाटो पोलैंड और बाल्टिक सागर के इलाकों में अपनी जड़ें जमा रहा था। सीआईए ने जैसे कई देशों में लोकतंत्र की हत्या करने के लिए आंदोलनों की मदद की है, वैसे ही 2004 में वो रूस का समर्थन करने वाले उम्मीदवार को हराने के लिए ‘<a href="https://www.britannica.com/place/Ukraine/The-Orange-Revolution-and-the-Yushchenko-presidency" target="_blank" rel="noreferrer noopener">ऑरेंज रेवोलुशन</a>‘ नाम के एक आन्दोलन को शह देने में जुटी थी। युशचेंको के बदले विक्टर यानुकोविच सत्ता में आये।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">विक्टर यानुकोविच भी 2014 आते-आते पश्चिमी देशों की आँखों में खटकने लगे क्योंकि उन्होंने यूरोपियन यूनियन के व्यापार समझौतों से इन्कार कर दिया था। अपने देश की कुर्बानी देकर विदेशियों को आगे बढ़ने न देने की कोशिशों के कारण सीआईए ने 2014 में तख्तापलट को अंजाम दिया। जैसा भारत में कभी राडिया टेप काण्ड में सुनाई दिया था, वैसे ही इस काण्ड में यानुकोविच के हटने से पहले ही विक्टोरिया नुलैंड जैसे अधिकारी अगली सरकार किसकी हो ये तय कर रहे थे। इस समय तक नव-नाजी समूह (Azov Battalion) इतने शक्तिशाली हो चुके थे कि वो राजधानी कीव तक नाजियों के जश्न मनाते थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जो नयी सरकार आई उसने रूसी भाषा पर प्रतिबन्ध लगाया और इस पर डोनबॉस और क्रीमिया के लोग भड़क गए। पूर्वी यूक्रेन में रूसी बोलने वालों पर अत्याचार होने शुरू हुए। जनमत संग्रह में क्रीमिया में जब 90 प्रतिशत लोग रूस में शामिल होने के पक्ष में दिखे तो तथाकथित लिबरल कहलाने वाले लोगों ने असली दमन शुरू किया। आठ वर्षों तक यूक्रेन की सरकार अपने ही लोगों पर गोलीबारी करती रही और आज जो यूके, ज़ेलेंस्की का समर्थन करके अपनी पीठ खुद थपथपा रहा है, वो भी नरसंहारों पर चुप रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसा नहीं था कि ये घटनाएं बिना स्थानीय संगठनों के ही चल रही थी। अमेरिकी फण्ड, विशेषकर यूएसऐड के जरिये जाने वाले फण्ड के जरिये ‘फ्रीडम हाउस’ जैसे संगठन&nbsp;<a href="https://www.aei.org/articles/our-man-at-ukraines-orange-revolution/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">बनाये गए</a>&nbsp;थे। इनके ही माध्यम से ‘ऑरेंज रेवोलुशन’ जैसे आन्दोलन छेड़े गए। जो पुरानी फाल्ट लाइन्स (विभाजक रेखाएं) थीं, चाहे वो रुसी और यूक्रेनियाई भाषा के झगड़े हों, दोनों देशों के चर्च की प्रतिस्पर्धा हो, इन सबको उकसाते रहा गया। कम्युनिस्टों का एक पुराना कारनामा होलोडोमोर भी था। स्टालिन ने जबरन ‘कलेक्टिवेशन’ यानी सामूहिक खेती के लिए यूक्रेन के लोगों को मजबूर किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कम्युनिस्टों ने किसानों की जमीनें हड़प ली थीं, और विरोध करने वाले लोगों को गोली मार दी या साइबेरिया भेज दिया। इसकी वजह से अकाल आया और होलोडोमोर (भूखमरी) से 1932-33 में तीस लाख से एक करोड़ यूक्रेनियाई लोग मरे थे। इस घटना को जीवित रखा गया। बार-बार याद दिलाया गया। रह-रह कर कोई यूरोपियन संघ का सदस्य देश होलोडोमोर को नरसंहार के रूप में मान्यता देता और उसपर छिड़ी बहसों से होलोडोमोर की यादें यूक्रेन के लोगों के लिए फिर से ताजा हो जाती। कुछ ही समय पहले फ्रांस ने होलोडोमोर को&nbsp;<a href="https://www.rferl.org/a/ukraine-france-holodomor-genocide/32339799.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नरसंहार</a>&nbsp;के रूप में मान्यता दी। इसके लिए जेलेंस्की ने फ्रांस का आभार&nbsp;<a href="https://x.com/ZelenskyyUa/status/1640779409073250317" target="_blank" rel="noreferrer noopener">जताया</a>&nbsp;और रूस ने इस बात का विरोध भी किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वापस मौजूदा दौर पर चलें तो ज़ेलेंस्की के पास कोई राजनैतिक दल नहीं था, न ही वो किसी तरह से राजनीति से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति था। वो एक टीवी शृंखला में कॉमेडी एक्टर (मसखरा) था। मार्च 2018 में अचानक निर्देशन की कंपनी (Kvartal 95) ने उसी नाम से एक राजनैतिक दल का निबंधन करवाया, जो टीवी शृंखला में जेलेंस्की की पार्टी का नाम था– ‘<a href="https://www.bbc.com/news/world-europe-59667938" target="_blank" rel="noreferrer noopener">सर्वेंट ऑफ द पीपल</a>‘। दिसम्बर 2018 में जेलेंस्की ने राष्ट्रपति चुनावों में उतरने की घोषणा कर दी और बिलकुल वैसा ही मुद्दा चुना जैसा आप भारत में भी देख चुके हैं। जी हाँ, मुद्दा भ्रष्टाचार था और ये आप दिल्ली में देख चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रपति बनने के बाद ज़ेलेंस्की एमआई6 (ब्रिटिश गुप्तचर संगठन) के रिचर्ड मूर से 2020 में मिल रहे थे। ओर्थोडॉक्स चर्च की प्रमुखता वाले इलाकों से होने पर भी कैथोलिक वेटिकन जाकर ब्रिटिश मूल के बिशप से मिल रहे थे। चुनाव का ज़ेलेंस्की का खर्च इहोर कोलोमोइस्की ने उठाया था जो तेल और बैंकों के व्यापार से जुड़ा एक बड़ा उद्योगपति है। सत्ता में आने के बाद ज़ेलेंस्की कोई शांति-व्यवस्था नहीं लाये बल्कि डोनबास के पास यूक्रेन की सेनाएं विपक्षियों को कुचलने के लिए तैनात हो चुकी थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रूस के पास 2022 में कोई विकल्प ही नहीं बचे थे। सीआईए और नाटो की कठपुतली ज़ेलेंस्की को मनमानी करने दिया जा सकता था। नाटो के यूक्रेन में बेस बनाने और पकड़ कायम करने छोड़ा जा सकता था, डोनबास में रुसी बोलने वालों को रूस मरने छोड़ सकता था, या फिर सैन्य अभियान के जरिये वो इसे रोकता। रूस ने सैन्य अभियान का रास्ता चुना। जवाब में अमेरिकी कंपनियों ने रूस में अपनी सेवाएँ बंद कर दी। बैंकिंग व्यवस्था में वीसा जैसे माध्यम जो ऑनलाइन लेन-देन में काम आते हैं, वो बंद कर दिए गए। इसी से मोदी सरकार ने भारत में सीख लेते हुए, ‘रुपे’ नाम का विकल्प खड़ा कर लिया। तेल भण्डार रूस के ही पास थे इसलिए अभी भी यूरोपीय संघ के देश तेल रूस से ही खरीद रहे हैं, भले प्रतिबन्ध जितने भी लगा रखे हों।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुल मिलाकर रूस के हमलों के बाद यूक्रेन की जो स्थिति है, उसे सुधारने की क्षमता या राजनैतिक सूझ-बूझ कहीं से ज़ेलेंस्की के पास नहीं दिखती है। जैसे भ्रष्टाचारी उसके साथ सत्ता का सुख लूटते रहे हैं, उस स्थिति में वो मदद के नाम पर मिले पैसों का घपला रोक पायेगा, ऐसा भी नहीं लगता। चुनाव रुकवाकर तानाशाही रवैया भी वो दिखा चुका है और NGOs के जरिये बनी ऐसी पार्टियों के कामकाज से भी भारतीय परिचित हैं। किसी भी देश में मौजूद विभाजक रेखाओं (फाल्ट लाइन्स) पर लोकतंत्र बचाने या संविधान बचाने के नाम पर ऐसे ही आन्दोलन चलाये जाते हैं और उनका परिणाम किसी तानाशाह को स्थापित करना ही होता है। विदेशों में कई उदाहरणों में ये दिखेगा, उम्मीद है यूक्रेन के ताजा उदाहरण में भारत में वही भाषा, क्षेत्रवाद, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे कैसे ‘लोकतंत्र/संविधान बचाओ’ कहने वाले प्रयोग कर रहे हैं, वो भी दिख ही गया होगा।</p>
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		<title>ट्रंप और ज़ेलेंस्की की तीखी बहस पर जानिए क्या बोला रूस?</title>
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		<pubDate>Sun, 02 Mar 2025 06:36:30 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-484383" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/trump-and-zelensky-and-putin-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के बीच ओवल ऑफ़िस में हुई&nbsp;तीखी बहस&nbsp;पर रूस ने भी प्रतिक्रिया दी है। ज़ेलेंस्की शुक्रवार (28 फरवरी) को रूस और यूक्रेन के बीच 3 वर्षों से जारी युद्ध को खत्म कर शांति बहाल करने के मुद्दे को लेकर ट्रंप से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान यूक्रेन के रवैये को लेकर ट्रंप और वेंस की उनसे तीखी बहस हो गई। ट्रंप ने ज़ेलेंस्की पर अमेरिका और अमेरिका के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया है। वहीं, ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप का सम्मान करते हैं। अब इस मामले पर रूस के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रूस ने क्या कहा?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने इस मामले को लेकर टेलीग्राम पर पोस्ट किया&nbsp;<a href="https://www.aljazeera.com/news/2025/2/28/world-reacts-after-donald-trump-jd-vance-berate-ukaines-zelenskyy" target="_blank" rel="noreferrer noopener">है</a>। जखारोवा ने ज़ेलेंस्की को झूठा बताते हुए लिखा, “मुझे लगता है कि ज़ेलेंस्की का सबसे बड़ा झूठ व्हाइट हाउस में उनका यह दावा था कि 2022 में कीव शासन बिना किसी समर्थन के अकेला था।” जखारोवा ने अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ की और ज़ेलेंस्की की तुलना बदमाश से की है। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा, “ट्रंप और वेंस ने उस बदमाश पर हमला करने से कैसे खुद को रोका, यह संयम का चमत्कार है।” जखारोवा ने दावा किया कि ज़ेलेंस्की ‘उस हाथ को ही काट रहे हैं जो उन्हें खिला रहा है’। साथ ही, उन्होंने ज़ेलेंस्की पर ‘सभी के साथ अप्रिय होने’ का आरोप लगाया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ओवल ऑफिस में हुई इस बहस पर रूस के पूर्व राष्ट्रपति और रूस की सुरक्षा परिषद के उप-प्रमुख दिमित्री मेदवेदेव की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। मेदवेदेव ने ज़ेलेस्की की तुलना ‘ढीठ सूअर’ से की है। मेदवेदेव ने ‘X’ पर&nbsp;<a href="https://x.com/MedvedevRussiaE/status/1895549112440979908" target="_blank" rel="noreferrer noopener">लिखा</a>, “ढीठ सुअर को आखिरकार ओवल ऑफिस में करारा तमाचा मिला है।” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप ने सही ही कहा है कि यूक्रेन का शासन तीसरे विश्व युद्ध के साथ जुआ खेल रहा है। साथ ही, मेदवेदेव ने ज़ेलेस्की को ‘नशे में धुत्त जोकर’ (कोकन क्लाउन) बताया है। मेदवेदेव ने&nbsp;<a href="https://www.deccanherald.com/world/miracle-how-trump-restrained-from-hitting-zelenskyy-says-russia-on-their-verbal-spat-3427522" target="_blank" rel="noreferrer noopener">कहा</a>, “यह अच्छी बात है, लेकिन पर्याप्त नहीं है। हमें नाजी मशीन को सैन्य सहायता बंद करनी होगी।“</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप और ज़ेलेंस्की की बहस पर दुनिया भर के नेताओं से प्रतिक्रिया आ रही हैं। यूरोप के देश जहां यूक्रेन के समर्थन में खड़े हैं तो दूसरी और कई लोगों ने ज़ेलेंस्की की आलोचना भी की है। कई लोग इसे कूटनीतिक रूप से यूक्रेन के लिए खराब स्थिति बता रहे हैं। जब रूस-यूक्रेन के बीच शांति को लेकर बातचीत की जानी हैं तो ऐसे में ज़ेलेंस्की का यह व्यवहार यूक्रेन के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है।</p>
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		<title>ट्रंप के दबाव में झुके ज़ेलेंस्की, इस्तीफा देने को हुए तैयार, जानें पुतिन क्यों नहीं कर रहे यूक्रेन से बात?</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Feb 2025 00:35:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए सोमवार (24 फरवरी) को 3 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 24 फरवरी 2022 को रूस-यूक्रेन के बीच बड़े पैमाने पर हमले शुरू हो गए थे जिसके बाद से अभी तक यह युद्ध लगातार चल रहा है। रूस ने यूक्रेन पर शनिवार रात एक साथ 267 ड्रोन से हमला किया है ... <a title="ट्रंप के दबाव में झुके ज़ेलेंस्की, इस्तीफा देने को हुए तैयार, जानें पुतिन क्यों नहीं कर रहे यूक्रेन से बात?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9d%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%87/" aria-label="Read more about ट्रंप के दबाव में झुके ज़ेलेंस्की, इस्तीफा देने को हुए तैयार, जानें पुतिन क्यों नहीं कर रहे यूक्रेन से बात?">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-484050" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/putin-trump-ukraine-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए सोमवार (24 फरवरी) को 3 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 24 फरवरी 2022 को रूस-यूक्रेन के बीच बड़े पैमाने पर हमले शुरू हो गए थे जिसके बाद से अभी तक यह युद्ध लगातार चल रहा है। रूस ने यूक्रेन पर शनिवार रात एक साथ 267 ड्रोन से हमला किया है और 3 बैलिस्टिक मिसाइलें भी दागी हैं। यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि यह हमला कम से कम 13 शहरों में किया गया है। रूस के इस आक्रामक रुख और अमेरिका के यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की पर बनाए गए दबाव के बाद लग रहा है कि यह युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है। पिछले कई दिनों से ट्रंप लगातार ज़ेलेंस्की पर हमलावर थे और अब ज़ेलेंस्की ने राष्ट्रपति पद छोड़ने को लेकर एक बड़ा एलान कर दिया है।&nbsp;&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">इस्तीफा देंगे ज़ेलेंस्की!</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के दबाव और दुनिया में अलग-थलग पड़ते यूरोप के चलते यूक्रेन के पास अब युद्ध में मदद के लिए कोई बड़ा भागीदार नहीं बचा है। अब लगता है कि इसके चलते ही ज़ेलेंस्की ने कुछ शर्तों के साथ राष्ट्रपति पद छोड़ने का मन बना लिया&nbsp;<a href="https://navbharattimes.indiatimes.com/world/rest-of-europe/volodymyr-zelensky-willing-to-give-up-presidency-in-exchange-for-nato-membership-know-why/articleshow/118520246.cms" target="_blank" rel="noreferrer noopener">है</a>। ज़ेलेंस्की ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वह खुशी से राष्ट्रपति पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “अगर यूक्रेन की शांति या NATO की सदस्यता के लिए पद छोड़ना पड़े तो मैं तैयार हूं।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ज़ेलेंस्की ने कहा, “अगर लोग चाहते हैं कि मैं पद छोड़ दूं, तो मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि हमें शांति मिले और नेटो की सदस्यता के रूप में सुरक्षा की गारंटी दी जाए। यदि हमारी ये मांगें पूरी होती हैं, तो मैं तुरंत पद छोड़ने के लिए तैयार हूं।” उन्होंने आगे कहा, “मेरा ध्यान सिर्फ मौजूदा समय में यूक्रेन की सुरक्षा पर नहीं है और न ही केवल अगले बीस वर्षों के लिए। मैं दशकों तक सत्ता में नहीं रहूंगा। मेरा प्रमुख उद्देश्य देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और यही मेरा सपना भी है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिकी सैन्य मदद पर क्या बोले ज़ेलेंस्की?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से सैन्य मदद ना मिलने और केवल यूरोपीय संघ से मिल रही मदद के काफी होने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी है। ज़ेलेंस्की ने इसे लेकर कहा कि अमेरिका की मदद केवल आर्थिक रूप से भी ज़रूरी नहीं है बल्कि उसके द्वारा लगाए जाने वाली विभिन्न तरह की पाबंदियां भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि कुछ ऐसे हथियार हैं जो यूरोप के पास हैं लेकिन उनका लाइसेंस अमेरिका के पास ही है, यूरोप हथियार दे सकता है लेकिन लाइसेंस के लिए अमेरिका का ही रुख करना होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पुतिन क्यों नहीं कर रहे बातचीत?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">20 मई 2019 को ज़ेलेंस्की ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उन्हें इस पद पर 5 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। युद्ध के हालातों में यूक्रेन में चुनाव होना संभव नहीं है तो ज़ेलेंस्की ही लगातार इस पद पर बने हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लगातार कहा है कि वे यूक्रेन की तरफ से ऐसे प्रतिनिधि से बात करना चाहते हैं जो इसके लिए अधिकृत हो। पुतिन का कहना है, “राष्ट्रपति के तौर पर ज़ेलेंस्की का कार्यकाल पूरा हो चुका है और उनकी जगह एक नया निर्वाचित नेता होना चाहिए जो इस बातचीत में हिस्सा ले सके।” डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से यह रुख दोहराया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ज़ेलेंस्की के ऊपर ना केवल कार्यकाल पूरा होने का दबाव है बल्कि ट्रंप खुद लगातार उनके खिलाफ बयान दे&nbsp;रहे हैं। ट्रंप ने तो अब यहां तक दावा कर दिया है कि अगर ज़ेलेंस्की ने ठीक कदम नहीं उठाए तो उनका देश यानी यूक्रेन बचेगा नहीं। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 12 फरवरी को फोन पर लंबी बातचीत हुई और इसके बाद से ही ट्रंप रूस के पक्ष में नज़र आ रहे हैं।</p>
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