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	<title>शनि देव का यह मंदिर है अनोखा होता है यहाँ चमत्कार &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>शनि देव का यह मंदिर है अनोखा होता है यहाँ चमत्कार, जानकर हो जायेंगे हैरान</title>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदू धर्म में शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा का दिन बताया गया है। कहते हैं कि जो लोग अपनी कुंडली से शनि की दशा को सुधारना चाहते हैं वे शनिवार के दिन शनि मंदिर जरूर जाएं। वैसे तो हमारे भारत देश में ऐसे बहुत से मंदिर स्थापित हैं, जिनकी मान्यताएं दूर-दूर तक फैली हुई हैं। इसके साथ आज हम आपको शनिदेव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां साल में एक बार चमत्कार होता है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में विस्तार से-बताया जाता है कि यह मंदिर समुद्री तल से लगभग 7000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। वही पौराणिक कथाओं के अनुसार न्याय के देवता शनिदेव को हिंदू देवी यमुना का भाई है। देवभूमि उत्तराखंड के खरसाली में शनिदेव का धाम स्थित है।<a href="http://www.shreeayodhyajisss.com/wp-content/uploads/2020/01/zytdgysafdf.jpg" target="_blank" rel="noopener"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-12924" src="http://www.shreeayodhyajisss.com/wp-content/uploads/2020/01/zytdgysafdf.jpg" alt="" width="553" height="363" /></a></p>
<p>ऐसा बताया जाता है कि यहां लोग अपने कष्टों को दूर करने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में आते हैं और शनिदेव का दर्शन करते हैं। जानकारी के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था। यह मंदिर पांच मंजिला है, परन्तु बाहर से देखने से पता नहीं चल पाता कि यह मंदिर पांच मंजिला है। ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में पत्थर और लकड़ी का उपयोग किया गया है। इस मंदिर में शनिदेव की कांस्य की मूर्ति विराजमान है और साथ ही यहां एक अखंड ज्योति मौजूद है। ऐसी मान्यता है कि इस अखंड ज्योति के दर्शन मात्र से ही जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं और शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है। कहते हैं कि इस मंदिर में साल में एक बार चमत्कार होता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक , हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिर के ऊपर रखे घड़े खुद बदल जाते हैं। ऐसा बताया जाता है कि इस दिन जो भक्त शनि मंदिर में आता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।</p>
<p>बहन यमुना से मिलने जाते हैं शनिदेव<br />
यहां प्रचलित किंवदंतियों के मुताबिक प्रतिवर्ष अक्षय तृतीय पर शनि देव यमुनोत्री धाम में अपनी बहन यमुना से मिलकर खरसाली लौटते हैं। भाईदूज या यम द्वितिया के त्यौहार यमुना को खरसाली ले जा सकते हैं, ये पर्व दिवाली के दो बाद आता है। भगवान् शनिदेव और देवी यमुना को पूजा-पाठ कर के एक धार्मिक यात्रा के साथ लाया ले जाया जाता है। वही मंदिर में शनि देव 12 महीने तक विराजमान रहते हैं और सावन की संक्रांति में खरसाली में तीन दिवसीय शनि देव मेला भी आयोजित किया जाता है।</p>
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