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	<title>शाही स्नान &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>शाही स्नान &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>छावनी प्रवेश और अमृत स्नान: महाकुंभ की नई पहचान को आगे भी बनाए रखने की अखाड़ों ने की मांग</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Feb 2025 08:35:09 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-484156" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">तीर्थराज प्रयागराज में हुआ महाकुंभ तो समाप्त हो गया लेकिन इसकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है। आस्था के इस सबसे बड़े समागम में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल यह महाकुंभ एक और वजह से भी चर्चा में रहा है। इस महाकुंभ में पेशवाई और शाही स्नान के नाम को बदलकर क्रमश: छावनी प्रवेश और अमृत स्नान कर दिया गया था। इन आयोजनों के नए नाम हिंदू संस्कृति से जुड़े होने पर साधु-संतों ने खुशी जाहिर की और आगे भी वे इन्हीं नामों को रखना चाहते हैं। सदियों से पेशवाई और शाही स्नान नाम चले आ रहे थे लेकिन इस महा आयोजन से पहले&nbsp;अखाड़ों की मांग पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पेशवाई और शाही स्नान का नाम बदलने का ऐतिहासिक काम किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भी पेशवाई और शाही स्नान का नाम बदलने के लिए योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है। अब कुंभ के अखाड़ों के साधु-संतों की ओर से मांग की जा रही है कि आने वाले कुंभ और अर्द्धकुंभ में भी ‘छावनी प्रवेश’ और ‘अमृत स्नान’ नामों का ही प्रयोग किया जाए। आने वाले वर्षों में देखें तो 2027 में नासिक (महाराष्ट्र) में कुंभ, 2027 में हरिद्वार (उत्तराखंड) में अर्द्धकुंभ और 2028 में उज्जैन (मध्य प्रदेश) का सिंहस्थ कुंभ होने जा रहा है। इन आयोजनों से पहले अखाड़ा परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलकर आगे भी इन्हीं नए नामों के इस्तेमाल की मांग करेगा। आने वाले कुंभ के अभिलेखों में नए नामों का इस्तेमाल किया जाए इसके लिए अखाड़ा परिषद की तरफ से कोशिश की जा रही&nbsp;<a href="https://www.jagran.com/uttar-pradesh/prayagraj-peshwai-became-cantonment-entry-in-mahakumbh-now-akharas-will-make-new-demands-in-three-states-23889456.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">है</a>।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जगद्गुरु वैदेही वल्लभ देवाचार्य ने मीडिया से बातचीत में सीएम योगी के फैसले को लेकर कहा कि सीएम योगी ने जो नाम दिए हैं वे सनातन की परंपरा से आते हैं और संस्कृत से युक्त शब्द हैं। उन्होंने कहा, “यही नाम आगे भी रहने चाहिए इसे लेकर विभिन्न धर्मगुरुओं ने अपनी सहमति जताई है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या होते हैं अखाड़े?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कुंभ के दौरान जो शब्द सबसे अधिक सुनने में आता है वो अखाड़ा ही है। सीधे शब्दों में कहें तो अखाड़ा साधु-संतों का समूह है। अखाड़ों की शुरुआत प्राचीन काल में सनातन धर्म और संत परंपरा की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में अखाड़ों की स्थापना की थी, ताकि सनातन धर्म की रक्षा की जा सके और संतों को एक संगठित व्यवस्था में लाया जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इनका गठन विशेष रूप से संतों और साधुओं को एकजुट करने, उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने और धर्म प्रचार के लिए किया गया था। इन अखाड़ों में धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ शस्त्र की भी शिक्षा दी जाती है। शुरुआत में 4 प्रमुख अखाड़े हुआ करते थे लेकिन समय के साथ इनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई। इनमें से 7 अखाड़े शैव परंपरा के आराधक हैं, 3 अखाड़े वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हुए हैं और 3 अखाड़े गुरु नानक देव की परंपरा से हैं जिन्हें उदासीन संप्रदाय कहा जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या होती है पेशवाई?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कुंभ में अखाड़ों की पारंपरिक और भव्य शोभायात्रा को पेशवाई कहा जाता है, इस यात्रा के दौरान संत-महंत अपने अनुयायियों और अखाड़ों के साधुओं के साथ सजे-धजे हाथियों, घोड़ों, ऊंटों और बैंड-बाजों के साथ मेले में प्रवेश करते हैं। पेशवाई को कुंभ मेले की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह अखाड़ों की परंपरा और भव्यता को दिखाती है। पेशवा एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘अगुआ या सरदार’। मराठा साम्राज्य में मराठों के प्रधानमंत्रियों की उपाधि भी ‘पेशवा’ होती थी। इस शब्द के फारसी मूल का होने के चलते ही इसे बदलने की मांग शुरू हुई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ के दौरान इसे बदलकर ‘छावनी प्रवेश’ कर दिया गया है। यहां यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि अखाड़ों के प्रवेश को छावनी प्रवेश कहा जाना दिखाता है कि किस तरह अखाड़ों में शस्त्र की परंपरा रही है। मौजूदा परिदृश्य में छावनी का इस्तेमाल सेना के क्षेत्र के लिए किया जाता है। सनातन की रक्षा के लिए अखाड़ों में भी उच्च स्तरीय शस्त्र ज्ञान देने की परंपरा रही है। वहीं, अखाड़े के कुछ प्रमुख साधु जिन्हें महामंडलेश्वर भी कहा जाता है वो सामान्यत: ‘छावनी प्रवेश’ के दौरान रथ पर सवार होते हैं जबकि अन्य साधु-संत नाचते-गाते रथ के साथ पैदल यात्रा करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैदेही वल्लभ देवाचार्य कहते हैं कि छावनी की परंपरा रामायण काल से चली आ रही है और अब इस नाम की पुनरावृत्ति कर उसी संस्कृति को वापस लाने की कोशिश की जा रही है। वल्लभ देवाचार्य ने इस पहल को सकारात्मक बताया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या होता है शाही स्नान?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ में शाही स्नान एक महत्वपूर्ण और भव्य अनुष्ठान होता है। इसमें अखाड़ों के साधु-संत पारंपरिक रूप से गंगा, यमुना और विलुप्त सरस्वती नदी के संगम में स्नान करते हैं। शाही स्नान हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है और यह मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। शाही स्नान का नेतृत्व विभिन्न अखाड़ों के प्रमुख साधु, नागा साधु और महामंडलेश्वर करते हैं। यह आयोजन कुंभ मेले की सबसे खास और आकर्षक परंपराओं में से एक होता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शाही स्नान को लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में जब राजा-महाराजा कुंभ में स्नान करते थे, तो उनके साथ संत-महात्मा और राजगुरु भी स्नान करते थे। इस परंपरा को तब से शाही स्नान कहा जाता रहा है। लेकिन अब इसका नाम भी बदलकर अमृत स्नान किया गया है। यह भी हिंदू संस्कृति को पुन: जागृत करने की कोशिश है। कुंभ के आयोजनों के स्थलों का इतिहास भी अमृत कलश से गिरी बूंदों से ही जुड़ा हुआ है, ऐसे में शाही स्नान को अमृत स्नान किया जाना पूरी तरह तर्कसंगत भी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ&nbsp;में इन आयोजनों के नामों को बदलने की यह पहल न केवल सनातन परंपराओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि हिंदू संस्कृति की गहरी जड़ों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। ‘छावनी प्रवेश’ और ‘अमृत स्नान’ जैसे नए नामों को अपनाने से कुंभ की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान और अधिक मजबूत होगी। साधु-संतों और श्रद्धालुओं की सहमति से किए गए ये बदलाव और इन्हें आगे भी जारी रखने से सनातन धर्म की समृद्ध परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।</p>
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		<title>बसंत पंचमी: तीसरे शाही स्नान में दोपहर तक दो करोड़ लोगों ने लगाई डुबकी, देंखे PHOTOS</title>
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		<pubDate>Sun, 10 Feb 2019 08:29:34 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुम्भ नगर. </strong> भाषा, संस्कृति, आध्यात्म के साथ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम कुंभ मेले में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर तीसरा और अंतिम शाही स्नान आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों के चाकचौबंद इंतजामों के बीच तड़के पारम्परिक तरीके में शुरू हो गया।  तड़के से ही संगम की विस्तीर्ण रेती पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778641.jpeg" alt="Naga Sadhu" /></p>
<p>‘हर हर गंगे और गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाये’ के कर्ण प्रिय स्वर लहरियां मन को आस्था से सराबोर कर रही थीं। श्रद्धालु कई-कई किलाेमीटर की पैदल यात्रा कर तीर्थराज त्रिवेणी गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती के तट पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने शनिवार की रात से आस्था की डुबकी लगानी शरू कर दी। दोपहर तक लगभग दो करोड़ लोगो ने स्नान किया।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/_1549768326.jpg" alt="à¤à¥à¤¨à¤¾ à¤à¤à¤¾à¥à¤¾ à¤à¥ à¤¨à¤¾à¤à¤¾ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¥ à¤ªà¤¹à¥à¤à¤à¥" /><br />
ज्योतिषियों के अनुसार बसंत पंचमी स्नान का मुहूर्त शनिवार सुबह 8.55 बजे से रविवार सुबह 10 बजे तक है। ग्रह-नक्षत्रों की खास स्थिति बनने से नहान और दान करने वाले श्रद्धालुओं को बसंत पंचमी का स्नान मनोवांछित फल प्रदान करने वाला होगा। रेवती नक्षत्र, साध्य योग का विशेष संयोग बसंत पंचमी की पुण्य बेला में संगम में स्नान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778286.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
शनिवार की सुबह से श्रद्धालुओं का स्नान करने का क्रम बना रहा जिसकी कड़ी देर शाम जाकर टूटी। उसके बाद मध्य रात्रि से पुन: श्रद्धालुओं का रेला त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने लगा। शनिवार को दिन में सर्द तेज हवा मानो श्रद्धालुओं की आस्था की परीक्षा ले रहा हो।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778511.jpeg" alt="Naga Sadhu" /></p>
<p>रात जैसे-जैसे गहराती गई सर्द हवा अपना दामन फैलाती गयी। संगम की विस्तीर्ण रेती पर खुले अम्बर के नीचे चादर ओढ़े कंप कंपी लगाते श्रद्धालु भोर की प्रतीक्षा कर रहे थे। श्रद्धालुओं के आस्था के सामने सर्द हवा के झोंके को उस समय हार माननी पड़ी जब उन्होंने घाट पर त्रिवेणी में उतरने से पहले मां गंगा का आचमन किया और “ हर हर गंगे, ऊं नम: शिवाय” जपते हुए आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549766366.jpg" alt="shahi snan" /></p>
<p>करीब 3200 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैले मेला क्षेत्र में जिधर नजर घुमाओ, वहां श्रद्धालु ही नजर आ रहा है। इस दौरान चप्पे चप्पे पर तैनात सुरक्षाकर्मी मुस्तैदी के साथ भीड़ को नियंत्रित करने में जुटे दिखायी दे रहे हैं। पुलिस के जवानो की मदद के लिये आरपीएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, और आईटीबी समेत अर्ध सैनिक बलों की टुकड़ियां मुस्तैदी के साथ अपने काम को अंजाम देने में जुटी हुयी है। इसके अलावा 500 रेकरूट 10 इंसपेक्टर समेत सुरक्षा बल (बीएसएफ) की दो और कंपनियां मेला क्षेत्र में तैनात की गयी हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549765418.jpg" alt="shahi snan" /><br />
कुम्भ के तीसरे शाही स्नान पर्व की शुरूआत परम्परा के मुताबिक श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा ने की। इसके साथ श्री पंचायती अटल अखाड़ा ने भी संगम में डुबकी लगायी। दोनों अखाड़े सेक्टर 16 स्थित शिविर से तड़के 5.15 बजे शाही जुलूस के साथ निकले। भोर 5 :35 बजे पहला शाही स्नान महानिर्वाणी अखाड़ा ने किया। उसके साथ अटल अखाड़ा भी था।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549765080.jpg" alt="shahi snan" /><br />
बाद में सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा और तपोनिधि श्री पंचायती आनन्द अखाड़ा ने शाही स्नान किया। आठ बजे श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा और श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा ने एक साथ शाही स्नान किया। इसके बाद बैरागी अखाड़ों के शाही स्नान का क्रम शुरु होगा। इसमें सबसे पहले अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा 10.40 बजे शाही स्नान करेगा। उसके बाद अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा 11.20 बजे और अखिल भारतीय पंच निर्मोही अनी अखाड़ा 12.20 बजे शाही स्नान करेगा।<br />
<img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549777965.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
उदासीन अखाड़े सबसे अंत में स्नान करने आयेंगे। इसमें सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन 1.15 बजे, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन 2.20 बजे और श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला 3.40 बजे शाही स्नान करेगा जबकि प्रशासन से हुई बातचीत के बाद अखाड़ों ने शाही स्नान के जुलूस में बड़े वाहन न ले जाने पर सहमति भी दे दी है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778080.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
इस बीच संगम में आठ किलोमीटर के दायरे में स्नान के लिए बनाए गए 40 विभिन्न घाटों पर भोर आठ बजे तक 43 लाख श्रद्धालुओ ने आस्था की डुबकी लगा चुके थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिये सुरक्षा बलों के साथ स्वयं सेवक भी लगाये गये है। बाहर के जिलों से आने वाले वाहनो का प्रवेश शहर में प्रतिबंधित कर दिया गया है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549766559.jpg" alt="shahi snan" /><br />
सरकारी बसों और अन्य निजी वाहनो के लिये शहर के बाहरी छोरों पर अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गयी है जबकि वहां से सिविल लाइंस तक के लिये कुंभ शटल में मुफ्त यात्रा का इंतजाम किया गया है। सिविल लाइंस से संगम तक जाने के लिये केवल पैदल लोगों को इजाजत दी जा रही है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778560.jpeg" alt="Naga Sadhu" /></p>
<p>सुरक्षा की दृष्टि से मेला परिसर में करीब 400 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं जबकि 96 फायर वाच टावर में तैनात जवान भीड़ को नियंत्रित करने के साथ साथ अवांछनीय तत्वों पर पैनी नजर बनाये हुये हैं। मेला क्षेत्र को 10 जोन में बांट कर सुरक्षा बलों की 37 कंपनियां तैनात की गयी है। अप्रिय स्थिति से निपटने के लिये इसके अलावा 10 कंपनी एनडीआरएफ की तैनाती की गयी है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778006.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
बड़ी संख्या में लोगों को रात खुले आसमान के नीचे सोकर गुजारनी पड़ रही है। बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों से आस्थावानों के आने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। ग्रामीण इलाके से आने वाले लोगों की संख्या अधिक है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/basant-panchami_1549778046.jpeg" alt="basant panchami" /><br />
कुंभ के आकर्षण ने हजारों की संख्या में अमेरिका, आस्ट्रेलिया, रूस, फ्रांस और कनाडा समेत अन्य देशों के सैलानियों को भी डेरा डालने पर मजबूर कर दिया है। भारी भीड़ को देखते हुए बाहर से आने वाले वाहनों को शहरी सीमा के बाहर फाफामऊ, नैनी, झूंसी और सुलेमसराय आदि इलाकों में बनी पार्किंग में ही रोक दिया जा रहा है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778206.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
कुंभ मेला के बसंत पंचमी स्नान पर्व के अवसर पर तीसरे और अंतिम शाही स्नान के बाद धीरे-धीरे मेला की चमक फीकी पड़ने लगेगी। इसके बाद 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा और मेला का अंतिम स्नान चार मार्च महाशिवरात्रि पर होगा। सुरक्षा व्यवस्था अखिरी स्नान तक बनी रहेगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">प्रयागराज कुंभ में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर तृतीय शाही स्नान के पुण्य अवसर पर पधारे समस्त संत महात्माओं, धर्माचार्यों एवं श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं।</p>
<p>&mdash; Yogi Adityanath (@myogiadityanath) <a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/1094431715743825920?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">February 10, 2019</a></p></blockquote>
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