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	<title>सुप्रीम कोर्ट &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>सुप्रीम कोर्ट &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>दिल्ली में अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को लगाई फटकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 09:47:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#160; दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि जिम्मेदार अधिकारी खुद कार्रवाई करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब अदालत ऐसे आदेश देगी जिनका असर कई लोगों पर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ... <a title="दिल्ली में अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को लगाई फटकार" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-takes-a-tough-stance-norms-in-delhi-reprimands-officials/" aria-label="Read more about दिल्ली में अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को लगाई फटकार">Read more</a>]]></description>
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<p class="isSelectedEnd"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-519038" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/image-2026-07-09T151457.839.jpg" alt="" width="1200" height="675" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/image-2026-07-09T151457.839.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/image-2026-07-09T151457.839-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/image-2026-07-09T151457.839-1024x576.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/image-2026-07-09T151457.839-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" />दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि जिम्मेदार अधिकारी खुद कार्रवाई करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब अदालत ऐसे आदेश देगी जिनका असर कई लोगों पर पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अब लापरवाही करने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। अदालत ने कहा कि अब सबकुछ आदेश में साफ-साफ लिखा जाएगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मालवीय नगर अग्निकांड, लखनऊ में लगी आग और साकेत में इमारत गिरने जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुप्रीम कोर्ट ने साकेत, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर इलाके का निरीक्षण कराने का आदेश दिया है। इसके लिए आईआईटी दिल्ली के दो वरिष्ठ प्रोफेसरों, दो ड्राफ्ट्समैन और एमसीडी के अधिकारियों की एक टीम बनाई जाएगी। यह टीम इन इलाकों में इमारतों की स्थिति और नियमों के पालन की जांच करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सर्वोच्च अदालत ने गुरुग्राम की एक मीडिया रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया है कि गुरुग्राम की 93 प्रतिशत इमारतों में फायर सेफ्टी के जरूरी इंतजाम नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन को अगली सुनवाई में कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। इसके अलावा लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को भी अदालत ने तलब किया है।</p>
<p>साउथ दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी क्षेत्र में 3 जून 2026 को सुबह लगभग 8:30 बजे होटल फ्लोरिश स्टे में भीषण अग्निकांड हुआ था। इस आग हादसे में एक होटल और रेस्टोरेंट की इमारत में आग लग गई थी और इसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में 35 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी भी हो गए थे। इस अग्निकांड के दौरान होटल का गेट लॉक हो गया था और कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूदना पड़ गया था।</p>
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		<title>खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों को दिया जा सकता है मौत का इंजेक्शन&#8230;सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा- लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 May 2026 08:19:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[आदेश न मानने वाले अधिकारियों पर चले अवमानना का केस नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा और खतरनाक कुत्तों से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि रेबीज संक्रमित या अत्यधिक खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आम लोगों ... <a title="खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों को दिया जा सकता है मौत का इंजेक्शन&#8230;सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा- लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4/" aria-label="Read more about खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों को दिया जा सकता है मौत का इंजेक्शन&#8230;सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा- लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-515668" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/05/9sATpmgfZPcAJgG_100104_news.jpg" alt="" width="709" height="455" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/05/9sATpmgfZPcAJgG_100104_news.jpg 709w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/05/9sATpmgfZPcAJgG_100104_news-300x193.jpg 300w" sizes="(max-width: 709px) 100vw, 709px" /></p>
<p>आदेश न मानने वाले अधिकारियों पर चले अवमानना का केस</p>
<p>नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा और खतरनाक कुत्तों से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि रेबीज संक्रमित या अत्यधिक खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आम लोगों की जान की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p>जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले में दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इनमें वे आवेदन भी शामिल थे, जिनमें डॉग लवर्स और कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के पहले जारी निर्देशों को रद्द करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देशभर में बढ़ रही डॉग बाइट घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि अकेले राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं। कई छोटे बच्चों के चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटें आईं।</p>
<p>कोर्ट ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां साल 2026 के पहले चार महीनों में ही करीब दो लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है।</p>
<p><strong>पहले भी जारी किए थे निर्देश</strong><br />
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि कुत्तों को शेल्टर होम्स में रखा जाए और उन्हें दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी।</p>
<p>इसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट निर्देश दिए कि राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। हर जिले में कम से कम एक पूर्ण रूप से कार्यरत एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाए। अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार एबीसी सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।</p>
<p>सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। एंटी-रेबीज वैक्सीन और दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए एनएचएआई प्रभावी कदम उठाए। रेबीज संक्रमित या अत्यधिक खतरनाक कुत्तों के मामलों में जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया (दया मृत्यु) की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट के आदेश लागू करने वाले अधिकारियों को कानूनी संरक्षण दिया जाए ताकि उनके खिलाफ अनावश्यक एफआईआर या कार्रवाई न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशु संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है, लेकिन किसी भी स्थिति में लोगों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।</p>
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		<title>&#8216;सिर्फ कोटा में ही इतने सुसाइड क्यों?&#8217; सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को लगाई फटकार</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/suicides-cases-in-kota-supreme-court-reprimanded-rajasthan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 May 2025 10:27:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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		<category><![CDATA[suicide cases in kota]]></category>
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		<category><![CDATA[कोटा में सुसाइड क्यों]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कोटा में आत्महत्याओं के मामले को लेकर राजस्थान सरकार को जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने सवाल किया कि सिर्फ कोटा में ही आत्महत्याएं क्यों हो रही हैं और इस गंभीर स्थिति का समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा है। न्यायमूर्ति जेपी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी ... <a title="&#8216;सिर्फ कोटा में ही इतने सुसाइड क्यों?&#8217; सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को लगाई फटकार" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/suicides-cases-in-kota-supreme-court-reprimanded-rajasthan/" aria-label="Read more about &#8216;सिर्फ कोटा में ही इतने सुसाइड क्यों?&#8217; सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को लगाई फटकार">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="948" height="533" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-23T154840.426.jpg" alt="" class="wp-image-493126" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-23T154840.426.jpg 948w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-23T154840.426-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-23T154840.426-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-23T154840.426-150x84.jpg 150w" sizes="(max-width: 948px) 100vw, 948px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने कोटा में आत्महत्याओं के मामले को लेकर राजस्थान सरकार को जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने सवाल किया कि सिर्फ कोटा में ही आत्महत्याएं क्यों हो रही हैं और इस गंभीर स्थिति का समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा है। न्यायमूर्ति जेपी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी की, जबकि राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील ने जवाब दिया कि आत्महत्याओं की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोटा से आए दिन स्टूडेंट्स द्वारा आत्महत्या की खबरें सामने आती रहती हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस साल अब तक शहर से 14 आत्महत्याओं के मामले दर्ज हो चुके हैं, जो बेहद गंभीर हैं। अदालत ने पूछा कि एक राज्य के रूप में आप क्या कर रहे हैं? न्यायमूर्ति पारदीवाला ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है और सरकार को अपनी कार्यवाही तेज करनी चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि वे इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। सरकार ने जवाब दिया कि एसआईटी गठित की गई है, लेकिन प्रभावी परिणाम अभी तक स्पष्ट नहीं हैं। इससे पता चलता है कि कार्यान्वयन में कमी या निरंतर निगरानी का अभाव हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले में राजस्थान सरकार की ओर से कहा गया कि जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि वे आत्महत्या के मामलों पर निगरानी रखें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। आगे की सुनवाई आगामी दिनों में होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह भी पढ़े : <a href="https://bhaskardigital.com/corona-virus-opd-ambedkar-hospital-today-2-patients-died-mumbai/" target="_blank" rel="noopener"><strong>अंबेडकर अस्पताल में आज से शुरू होगी Corona OPD, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम रहेगी तैनात</strong></a><br></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>एलन मस्क का मामला जिला अदालत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जानिए वजह</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-angry-with-district-court-elon-musk-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 May 2025 06:28:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[DAINIK BHASKAR]]></category>
		<category><![CDATA[Elon Musk]]></category>
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		<category><![CDATA[एलन मस्क]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका की एक जिला अदालत के सामाजिक सुरक्षा प्रशासन (एसएसए) के आम नागरिकों से संबंधित संवेदनशील डेटा तक एलन मस्क के सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) के सदस्यों की पहुंच पर रोक लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया ... <a title="एलन मस्क का मामला जिला अदालत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जानिए वजह" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-angry-with-district-court-elon-musk-case/" aria-label="Read more about एलन मस्क का मामला जिला अदालत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जानिए वजह">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="662" height="441" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-03T115304.744.jpg" alt="" class="wp-image-491350" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-03T115304.744.jpg 662w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-03T115304.744-300x200.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-03T115304.744-150x100.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 662px) 100vw, 662px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका की एक जिला अदालत के सामाजिक सुरक्षा प्रशासन (एसएसए) के आम नागरिकों से संबंधित संवेदनशील डेटा तक एलन मस्क के सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) के सदस्यों की पहुंच पर रोक लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि डीओजीई के सदस्यों को एसएसए के डेटा (रिकॉर्ड) तक पहुंच प्रदान की जाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">द न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इस पर तत्काल दखल की जरूरत है। एक जिला न्यायालय ने इस मसले पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध संघीय प्राथमिकताओं को अपूरणीय क्षति पहुंचाते वाला और कार्यकारी शाखा के कार्यों को बाधित करना है। बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल के हफ्तों में इस तरह के कई आवेदन दायर किए हैं। इनमें गुरुवार को एक आव्रजन मामले में दाखिल किया गया आवेदन भी शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूएस टु़डे अखबार की खबर के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के सुप्रीम कोर्ट जाने की खास वजह यह है कि मैरीलैंड में एक संघीय न्यायाधीश ने एलन मस्क के सरकारी दक्षता विभाग को यूएस सामाजिक सुरक्षा प्रशासन के पास सुरक्षित लाखों अमेरिकियों के डेटा तक पहुंच प्रदान करने पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया है। संघीय न्यायाधीश का मानना है कि एलन मस्क के विभाग ने इस डेटा पर पहुंच बनाकर संघीय गोपनीयता कानून का उल्लंघन किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि संघीय न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा लांघी है। उन्होंने डीओजीई को होटल के कमरों में घुसने वाले घुसपैठियों के बराबर माना है, न कि उन कर्मचारियों के रूप में जो एजेंसी की तकनीक को आधुनिक बनाने और कचरे को जड़ से खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सॉलिसिटर जनरल सॉयर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जिला न्यायालयों को राष्ट्रपति और एजेंसी प्रमुखों की सरकार की &#8216;आवश्यकताओं&#8217; के बारे में अपने स्वयं के दृष्टिकोण को प्रतिस्थापित करने के लिए गोपनीयता अधिनियम का उपयोग करने में सक्षम नहीं होना चाहिए।&#8221; डीओजीई ने अपने मिशन के तहत कई एजेंसियों तक पहुंच की मांग की है, ताकि बेकार के खर्चों पर रोक लगाई जा सके। कहा जा रहा है कि मस्क ने दावा किया है कि लाखों मृत अमेरिकी अभी भी सामाजिक सुरक्षा के चेक प्राप्त कर रहे हैं। इस पर दो श्रमिक संघों और एक वकालत समूह ने एसएसए के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।</p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को फटकारा, कहा- ‘सावरकर ने हमें आजादी दिलाई, आप अपमान कर रहें’</title>
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		<pubDate>Fri, 25 Apr 2025 07:37:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर पर टिप्पणी करने को ‘गैरजिम्मेदाराना’ बताते हुए फटकारा। कोर्ट ने कहा, “उन्होंने हमें आजादी दिलाई और आप अपमानजनक टिप्पणी करते हैं। कल को कोई महात्मा गांधी को अंग्रेजों का नौकर कहेगा।” सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को चेतावनी दी, ” आपव आगे ... <a title="सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को फटकारा, कहा- ‘सावरकर ने हमें आजादी दिलाई, आप अपमान कर रहें’" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-rahul-gandhi-savarkar-gave-us-freedom/" aria-label="Read more about सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को फटकारा, कहा- ‘सावरकर ने हमें आजादी दिलाई, आप अपमान कर रहें’">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-25T130104.639.jpg" alt="" class="wp-image-490585" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-25T130104.639.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-25T130104.639-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-25T130104.639-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-25T130104.639-150x84.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर पर टिप्पणी करने को ‘गैरजिम्मेदाराना’ बताते हुए फटकारा। कोर्ट ने कहा, “उन्होंने हमें आजादी दिलाई और आप अपमानजनक टिप्पणी करते हैं। कल को कोई महात्मा गांधी को अंग्रेजों का नौकर कहेगा।” सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को चेतावनी दी, ” आपव आगे से सावरकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी न करें।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">उन्होंने आजादी दिलाई, उनके लिए ऐसा व्यवहार न करें : सुप्रीम कोर्ट</h2>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि शुक्रवार को सावरकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के आरोपों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जारी समन को रद करने से इनकार करने वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि सावरकर ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा, “उन्होंने हमें आजादी दिलाई और आप उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं।” साथ ही, पीठ ने राहुल गांधी को चेताया कि उनकी टिप्पणियों का गंभीर परिणाम हो सकता है। कोर्ट ने कहा, “इस बार सावरकर हैं, अगली बार कोई कहेगा कि महात्मा गांधी अंग्रेजों के नौकर थे।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">2022 से चल रहा है मामला</h2>



<p class="wp-block-paragraph">यह मामला 2022 में राहुल गांधी द्वारा भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र में की गई टिप्पणियों से जुड़ा है। राहुल गांधी ने सावरकर को ‘अंग्रेजों का नौकर’ बताते हुए यह कहा था कि सावरकर अंग्रेजों से पेंशन लेते थे। इस बयान के खिलाफ वकील नृपेंद्र पांडे ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। निचली अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153(A) और 505 के तहत केस मानते हुए समन जारी किया था। 4 अप्रैल को हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए समन आदेश को बरकरार रखा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट ने कहा- &#8216;हम पर पहले ही आरोप लगे हैं, राष्ट्रपति को कैसे दें आदेश&#8217;</title>
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		<pubDate>Mon, 21 Apr 2025 09:15:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अगले मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि न्यायालय की कार्यप्रणाली में कार्यपालिका का हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें पश्चिम बंगाल में हो रही ... <a title="सुप्रीम कोर्ट ने कहा- &#8216;हम पर पहले ही आरोप लगे हैं, राष्ट्रपति को कैसे दें आदेश&#8217;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-how-can-we-give-orders-to-the-president/" aria-label="Read more about सुप्रीम कोर्ट ने कहा- &#8216;हम पर पहले ही आरोप लगे हैं, राष्ट्रपति को कैसे दें आदेश&#8217;">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-21T144103.436.jpg" alt="" class="wp-image-490189" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-21T144103.436.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-21T144103.436-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-21T144103.436-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-21T144103.436-150x84.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अगले मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि न्यायालय की कार्यप्रणाली में कार्यपालिका का हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की गई थी। प्रमुख अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस संबंध में अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को आदेश दे कि वह बंगाल में सुरक्षाबलों की तैनाती करे और साथ ही हिंसा की जांच के लिए एक पैनल गठित करे। इसके अलावा, मुर्शिदाबाद क्षेत्र से हिन्दुओं के पलायन पर भी रिपोर्ट पेश करने की बात कही गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले पर सुनवाई के दौरान, उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और न्यायपालिका के कामकाज में कार्यपालिका के हस्तक्षेप के आरोपों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई बीजेपी नेताओं ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जिससे सियासी संवाद और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका अपनी स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली के संरक्षण के प्रति सजग है, और वह राजनीतिक दबाव को नजरअंदाज करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>&#8216;वक्फ कानून&#8217; पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें, इन 3 जरूरी मुद्दों पर हुई बहस</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/supreme-courts-decision-on-waqf-law-these-3-important-iss/</link>
		
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		<pubDate>Thu, 17 Apr 2025 05:05:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को वक्फ कानून पर महत्वपूर्ण सुनवाई की, जो लगभग 70 मिनट तक चली। इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून से संबंधित मुद्दों पर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे, जिससे सरकार की स्थिति और भी कठिन होती दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून के ... <a title="&#8216;वक्फ कानून&#8217; पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें, इन 3 जरूरी मुद्दों पर हुई बहस" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-courts-decision-on-waqf-law-these-3-important-iss/" aria-label="Read more about &#8216;वक्फ कानून&#8217; पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें, इन 3 जरूरी मुद्दों पर हुई बहस">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="225" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-17T102954.526.jpg" alt="" class="wp-image-489764" style="width:639px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-17T102954.526.jpg 400w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-17T102954.526-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-17T102954.526-150x84.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को वक्फ कानून पर महत्वपूर्ण सुनवाई की, जो लगभग 70 मिनट तक चली। इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून से संबंधित मुद्दों पर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे, जिससे सरकार की स्थिति और भी कठिन होती दिख रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर विचार किया गया। याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं, जबकि केंद्र सरकार ने इस कानून का बचाव किया। इस बातचीत के दौरान अदालत ने वक्फ कानून के तहत तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें वक्फ संपत्तियों का डिनोटिफेकेशन, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना और वक्फ प्रॉपर्टी विवाद में कलेक्टर को दिए अधिकार शामिल थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुनवाई के दौरान, यह स्पष्ट हो गया कि सुप्रीम कोर्ट वक्फ कानून पर अंतरिम आदेश जारी करने के लिए तैयार है। हालांकि, कोर्ट ने आदेश जारी करने से पहले सभी पक्षों की दलीलें सुनने का निर्णय लिया, ताकि सभी पहलुओं पर विचार किया जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्र सरकार ने अंतरिम आदेश जारी करने से पहले अपनी दलीलों को प्रस्तुत करने की अपील की, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अंतिम निर्णय के लिए अदालत को अभी कई मुद्दों पर विचार करना है, जिससे यह साफ नहीं है कि अंततः क्या दिशा में आदेश दिया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बुधवार को हुई सुनवाई के बाद आज भी इस मामले पर चर्चा और सुनवाई जारी रहेगी, जिससे वक्फ कानून की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। इस पूरे मामले में सभी की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर रहेंगी, जो इस संवेदनशील मुद्दे पर निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकारों को आदेश: जिस अस्पताल से चोरी हो नवजात, तुरंत निलंबित हो उस अस्पताल का लाइसेंस</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/supreme-courts-order-to-state-governments-the-license-of-the-hospital-from-which-newborns-were-stolen-should-be-suspended-immediately/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 08:32:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग को लेकर एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। वाराणसी और आसपास के अस्पतालों में नवजात बच्चों की चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 2024 में दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे हाई कोर्ट की लापरवाही बताया और कहा कि ... <a title="सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकारों को आदेश: जिस अस्पताल से चोरी हो नवजात, तुरंत निलंबित हो उस अस्पताल का लाइसेंस" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-courts-order-to-state-governments-the-license-of-the-hospital-from-which-newborns-were-stolen-should-be-suspended-immediately/" aria-label="Read more about सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकारों को आदेश: जिस अस्पताल से चोरी हो नवजात, तुरंत निलंबित हो उस अस्पताल का लाइसेंस">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-15T135109.913.jpg" alt="" class="wp-image-489633" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-15T135109.913.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-15T135109.913-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-15T135109.913-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-15T135109.913-150x84.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग को लेकर एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। वाराणसी और आसपास के अस्पतालों में नवजात बच्चों की चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 2024 में दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे हाई कोर्ट की लापरवाही बताया और कहा कि यह देशव्यापी संगठित गिरोह है, जिससे समाज को खतरा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस जे. बी. पारडीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इन मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी समाज में गलत संदेश देती है। कोर्ट ने यह भी बताया कि इस गिरोह से चुराए गए बच्चे झारखंड, पश्चिम बंगाल और राजस्थान तक से बरामद किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने में नाकाम रही।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हॉस्पिटल की जवाबदेही तय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि किसी अस्पताल से कोई नवजात बच्चा चोरी होता है, तो सरकार को सबसे पहले उस अस्पताल का लाइसेंस रद्द करना चाहिए। इससे ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">राज्यों को निर्देश</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कोर्ट ने भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ डेवेलपमेंट की रिपोर्ट को फैसले में शामिल करते हुए सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वे इस रिपोर्ट का अध्ययन कर जरूरी कदम उठाएं। इसके अलावा सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वे चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा करें और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दें कि इन मामलों का निपटारा छह महीने के भीतर किया जाए।</p>



<h4 class="wp-block-heading">माता-पिता को&nbsp;<strong>&nbsp;</strong>सलाह</h4>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे अस्पतालों में अपने नवजात बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहें। कोर्ट ने कहा, “जब किसी का नवजात बच्चा मरता है, तो माता-पिता समझते हैं कि वह ईश्वर के पास चला गया। लेकिन अगर बच्चा चोरी हो जाए, तो उसका दर्द कई गुना ज्यादा होता है क्योंकि बच्चा अब एक अज्ञात गिरोह के पास होता है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">बच्चा खरीदने वालों पर भी कार्रवाई</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों की भी जमानत रद्द कर दी है, जिन्होंने चुराए गए बच्चों को खरीदा था। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “अगर कोई निःसंतान है, तो इसका यह मतलब नहीं कि वह किसी और का बच्चा खरीद ले, वो भी यह जानते हुए कि वह चोरी किया गया है।”</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या है “वक्फ” शब्द का मतलब, कौन से बदलावों पर हो रहा है विचार? जानिए</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/what-is-the-meaning-of-the-word-waqf-which-changes-are-being-considered-know/</link>
		
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		<pubDate>Wed, 02 Apr 2025 06:59:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंकुर त्यागी आज लोक सभा में नया वक्फ बिल पेश किया जायेगा, इस वक्फ विधेयक में पिछले अधिनियम के तुलना में कई बदलाव किये जायेंगे और अगर यह वक्फ संसोधन विधेयक आज लोकसभा में पास हो जायेगा तो यह कानून बन जायेगा। आपको बताते चलें कि इस वक्फ बिल के कानून बन जाने के बाद ... <a title="क्या है “वक्फ” शब्द का मतलब, कौन से बदलावों पर हो रहा है विचार? जानिए" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/what-is-the-meaning-of-the-word-waqf-which-changes-are-being-considered-know/" aria-label="Read more about क्या है “वक्फ” शब्द का मतलब, कौन से बदलावों पर हो रहा है विचार? जानिए">Read more</a>]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>अंकुर त्यागी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज लोक सभा में नया वक्फ बिल पेश किया जायेगा, इस वक्फ विधेयक में पिछले अधिनियम के तुलना में कई बदलाव किये जायेंगे और अगर यह वक्फ संसोधन विधेयक आज लोकसभा में पास हो जायेगा तो यह कानून बन जायेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आपको बताते चलें कि इस वक्फ बिल के कानून बन जाने के बाद राज्य सरकारों का वक्फ की संपत्ति पर उपजे विवाद और अटकलों को निस्तारित करने के लिए पहले से ज़्यादा अधिकार मिल जायेंगे। वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम व्यक्तियों को भी शामिल करना भी इस वक्फ बिल में अनिवार्यता की श्रेणी में रखा गया है, आपको बताते चलें की नए वक्फ संसोधन विधेयक में यह भी कहा गया है की इसका प्रभाव पुरानी मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थानों से नहीं होगा। आईये आपको बताते हैं की दरअसल यह वक्फ है क्या और अभी इसमें क्या बदलाव होंगे …</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है वक्फ शब्द का मतलब</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">आपको बता दें कि वर्तमान की राजनीती और मुद्दे में वक्फ शब्द का ट्रेंड जोरों पर है लेकिन क्या आपको वक्फ का मतलब पता है ? अगर नहीं, तो हम बताते हैं इसका मतलब … दरअसल वक्फ एक अरबी भाषा का शब्द है और जिसका मतलब होता है रोकना या स्थिर करना और अगर आसान भाषा में समझे तो ‘ यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी जमीन या प्रॉपर्टी धार्मिक कारणों के चलते दान कर देता था तो उसको वक्फ कर देना कहा जाता था। इस दान की हुई जमीन की देख रेख करने के लिए एक बोर्ड का गठन किया गया जो वक्फ बोर्ड के नाम से जाना जाता है जो सभी राज्यों में कार्य करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>वक्फ में कौन से बदलावों को लेकर विचार हो रहा है</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">आपको बताते चलें कि यह बिल मौजूदा वक्फ कानून में लगभग 40 बदलावों का प्रस्ताव रखता है। इसके तहत वक्फ बोर्डों को सभी संपत्ति दावों के लिए अनिवार्य सत्यापन से गुजरना होगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसका उद्देश्य वक्फ बोर्डों की संरचना और कामकाज को बदलने के लिए धारा 9 और 14 में संशोधन करना है, जिसमें महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व को शामिल किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा, विवादों को निपटाने के लिए वक्फ बोर्डों द्वारा दावा की गई संपत्तियों का नया सत्यापन किया जाएगा और दुरुपयोग को रोकने के लिए, जिला मजिस्ट्रेट वक्फ संपत्तियों की निगरानी में शामिल हो सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>वक्फ बोर्ड को मिली हैं ये शक्तियां</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">आपको बताते चलें कि अगर आपकी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दी गई तो आप उसके खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते। आपको वक्फ बोर्ड से ही गुहार लगानी होगी। वक्फ बोर्ड का फैसला आपके खिलाफ आया, तब भी आप कोर्ट नहीं जा सकते। तब आप वक्फ ट्राइब्यूनल में जा सकते हैं। इस ट्राइब्यूनल में प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। उसमें गैर-मुस्लिम भी हो सकते हैं। वक्फ एक्ट का सेक्शन 85 कहता है कि ट्राइब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कांग्रेस के नरसिम्हा राव सरकार में बढ़ी थी वक्फ बोर्ड की शक्तियां</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">1954 में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ। लेकिन 1995 के संशोधन से वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दी गयी। पीवी नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार ने वक्फ एक्ट 1954 में संशोधन किया और नए-नए प्रावधान जोड़कर वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दीं। वक्फ एक्ट 1995 का सेक्शन 3(आर) के मुताबिक, अगर कोई संपत्ति, किसी भी उद्देश्य के लिए मुस्लिम कानून के मुताबिक पाक , मजहबी या परोपरकारी मान लिया जाए तो वह वक्फ की संपत्ति हो जाएगी। वक्फ एक्ट 1995 का आर्टिकल 40 कहता है कि यह जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और वक्फ बोर्ड तय करेगा। बाद में वर्ष 2013 में संशोधन पेश किए गए, जिससे वक्फ को इससे संबंधित मामलों में असीमित और पूरे अधिकार मिले।</p>
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		<title>UP पुलिस को SC का निर्देश&#8230;अब्बास अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत 10 दिन में पूरी हो जांच</title>
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		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 09:57:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Abbas Ansari]]></category>
		<category><![CDATA[Allahabad High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Gangster Act]]></category>
		<category><![CDATA[mau mla abbas ansari]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[up police]]></category>
		<category><![CDATA[अब्बास अंसारी]]></category>
		<category><![CDATA[यूपी पुलिस]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली:&#160; सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को ‘गैंगस्टर&#8217; अधिनियम के तहत विधायक अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) के खिलाफ एक मामले में 10 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन.कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि मामले की जांच पूरी होने के बाद वह अब्बास अंसारी की ... <a title="UP पुलिस को SC का निर्देश&#8230;अब्बास अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत 10 दिन में पूरी हो जांच" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/up-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-sc-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac/" aria-label="Read more about UP पुलिस को SC का निर्देश&#8230;अब्बास अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत 10 दिन में पूरी हो जांच">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="750" height="450" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/abbas.jpg" alt="" class="wp-image-482835" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/abbas.jpg 750w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/abbas-300x180.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/abbas-150x90.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 750px) 100vw, 750px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दिल्ली:&nbsp; </strong>सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को ‘गैंगस्टर&#8217; अधिनियम के तहत विधायक अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) के खिलाफ एक मामले में 10 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन.कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि मामले की जांच पूरी होने के बाद वह अब्बास अंसारी की जमानत याचिका पर विचार करेगी. बता दें कि अब्बास ने मुठभेड़ के डर से 31 जनवरी को ‘गैंगस्टर&#8217; अधिनियम के तहत एक मामले में अधीनस्थ अदालत की कार्यवाही में डिजिटली पेश होने की अपील की थी.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अब्बास अंसारी मामले में SC का पुलिस पर आरोप</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले साल 18 दिसंबर को गैंगस्टर&#8217; अधिनियम के तहत एक मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन पर और कुछ अन्य लोगों पर वित्तीय और अन्य लाभ के लिए गिरोह बनाने का आरोप लगाया गया था. चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को अब्बास अंसारी, नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धारा दो, तीन के तहत FIR दर्ज की गई थी.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अब्बास अंसारी पर क्या है आरोप?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">अब्बास अंसारी समेत अन्य&nbsp;पर जबरन वसूली और मारपीट का आरोप लगाया गया था. जमानत याचिका खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि मामले में जांच जारी है. इस मामले में उन्हें छह सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था. बता दें कि अब्बास अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक हैं और मुख्तार अंसारी के बेटे हैं.&nbsp;</p>
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