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	<title>हाई कोर्ट &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>हाई कोर्ट &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>रूह अफजा की दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार पर बाबा रामदेव ने कहा-अभी आदेश के 24 घंटे नहीं हुए, वीडियो हट जाएगा</title>
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		<pubDate>Fri, 02 May 2025 07:04:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। रूह अफजा पर बाबा रामदेव के विवादित बयान पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हमदर्द ने कहा कि बाबा रामदेव ने अपना वीडियो हटाया नहीं है बल्कि उसे प्राइवेट कर दिया है। इसका मतलब है कि उसे बाबा के सब्सक्राइबर्स देख सकते हैं। तब बाबा रामदेव की तरफ से कहा गया ... <a title="रूह अफजा की दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार पर बाबा रामदेव ने कहा-अभी आदेश के 24 घंटे नहीं हुए, वीडियो हट जाएगा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/on-rooh-afzas-plea-to-delhi-high-court-baba-ramdev-said-it-has-not-been-even-24-hours-since-the-order-was-issued-the-video-will-be-removed/" aria-label="Read more about रूह अफजा की दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार पर बाबा रामदेव ने कहा-अभी आदेश के 24 घंटे नहीं हुए, वीडियो हट जाएगा">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1199" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-02T123152.370.jpg" alt="" class="wp-image-491235" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-02T123152.370.jpg 1199w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-02T123152.370-300x225.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-02T123152.370-768x576.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-02T123152.370-150x113.jpg 150w" sizes="(max-width: 1199px) 100vw, 1199px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नई दिल्ली।</strong> रूह अफजा पर बाबा रामदेव के विवादित बयान पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हमदर्द ने कहा कि बाबा रामदेव ने अपना वीडियो हटाया नहीं है बल्कि उसे प्राइवेट कर दिया है। इसका मतलब है कि उसे बाबा के सब्सक्राइबर्स देख सकते हैं। तब बाबा रामदेव की तरफ से कहा गया कि अभी हाई कोर्ट के आदेश के 24 घंटे नहीं बीते हैं। सभी वीडियो हटा लिए जाएंगे। इसके बाद जस्टिस अमित बंसल की बेंच ने अगली सुनवाई 9 मई को करने का आदेश दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमदर्द ने कहा कि बाबा रामदेव का रूह अफजा के बारे में बयान आस्था चैनल पर अभी भी प्रसारित हो रहा है। इस पर बाबा रामदेव की ओर से कहा गया कि हाई कोर्ट के आदेश के 24 घंटे पूरे होते-होते यह वीडियो सभी जगह से हटा दिया जाएगा। वो हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन संबंधी अंडरटेकिंग दाखिल कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 1 मई को हाई कोर्ट की फटकार के बाद बाबा रामदेव ने रूह अफजा पर अपने विवादित वीडियो हटाने का भरोसा दिया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोर्ट को बताया गया कि आपकी चेतावनी के बावजूद बाबा रामदेव ने 29 अप्रैल को रूह अफजा को लेकर नया वीडियो जारी किया है। इस पर कोर्ट ने बाबा रामदेव के खिलाफ अवमानना केस चलाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव किसी के नियंत्रण में नहीं हैं। अपनी ही दुनिया में रहते हैं।उनके खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया जाएगा। उन्हें यहां बुला रहे हैं। उसके बाद जब दोपहर को दोबारा सुनवाई शुरु हुई तो बाबा रामदेव की ओर से पेश वकील राजीव नय्यर ने कहा कि विवादित वीडियो 24 घंटे के अंदर हटा लिया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले 22 अप्रैल को कोर्ट ने कहा था कि बाबा रामदेव के बयान ने अंतरात्मा को झकझोर दिया है और ये अक्षम्य है। उल्लेखनीय है कि हमदर्द नेशनल फाउंडेशन इंडिया ने पतंजलि के खिलाफ याचिका दायर की है। हमदर्द का पक्ष वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में रखा। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ने हमदर्द के खिलाफ बिना किसी रोक-टोक के धर्म को चोट पहुंचाने वाले बयान दिए। बयान धार्मिक विभाजन पैदा करता है और ये हेट स्पीच के तहत आता है। ये बयान मानहानि के तहत भी आते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ने इसके पहले हिमालयन कंपनी पर भी इसलिए आरोप लगा चुके हैं कि उसका मालिक मुस्लिम है। रोहतगी ने कहा था कि बाबा रामदेव को एलोपैथिक के संबंध में भ्रामक बयान और विज्ञापन देने के सुप्रीम कोर्ट फटकार लगा चुका है। बाबा रामदेव से कड़ाई से निपटने की जरूरत है। सनद रहे कि बाबा रामदेव ने कहा था कि हमदर्द की रूह अफजा से होने वाली कमाई से मदरसा और मस्जिद बनाए जाएंगे।</p>
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		<title>हाई कोर्ट बोला- &#8216;प्राइवेट पार्ट को छूना और नाडा़ तोड़ना दुष्कर्म नहीं है&#8230;&#8217;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/high-court-said-touching-private-part-and-breaking-cord-is-not-rape/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 08:57:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[हाई कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नाबालिग के साथ हुई यौन उत्पीड़न की घटना को दुष्कर्म के प्रयास के बजाय गंभीर यौन उत्पीड़न माना है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दुष्कर्म का आरोप सही नहीं है और आरोपितों के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन ... <a title="हाई कोर्ट बोला- &#8216;प्राइवेट पार्ट को छूना और नाडा़ तोड़ना दुष्कर्म नहीं है&#8230;&#8217;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/high-court-said-touching-private-part-and-breaking-cord-is-not-rape/" aria-label="Read more about हाई कोर्ट बोला- &#8216;प्राइवेट पार्ट को छूना और नाडा़ तोड़ना दुष्कर्म नहीं है&#8230;&#8217;">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="790" height="444" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-20-at-1.41.12-PM-2.jpeg" alt="" class="wp-image-486886" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-20-at-1.41.12-PM-2.jpeg 790w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-20-at-1.41.12-PM-2-300x169.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-20-at-1.41.12-PM-2-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-20-at-1.41.12-PM-2-150x84.jpeg 150w" sizes="(max-width: 790px) 100vw, 790px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नाबालिग के साथ हुई यौन उत्पीड़न की घटना को दुष्कर्म के प्रयास के बजाय गंभीर यौन उत्पीड़न माना है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दुष्कर्म का आरोप सही नहीं है और आरोपितों के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की एकल पीठ ने कासगंज के स्पेशल जज (पोक्सो कोर्ट) के समन आदेश को संशोधित करते हुए नए सिरे से समन जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि दुष्कर्म के आरोप में जारी समन विधिसम्मत नहीं है। इस मामले में याची आकाश, पवन और अशोक पर आरोप है कि उन्होंने 11 वर्षीय पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह मामला पटियाली थाने में दर्ज है, जिसमें आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (दुष्कर्म) और पोक्सो अधिनियम की धारा 18 (बालकों के प्रति यौन उत्पीड़न से बचाव) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए आरोपितों के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 और धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता के वक्ष को छुआ, उसका नाड़ा तोड़ा और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की, लेकिन राहगीरों के हस्तक्षेप के कारण आरोपित मौके से भाग गए। कोर्ट ने इस घटना को गंभीर यौन उत्पीड़न के रूप में देखा, लेकिन दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं माना। कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही का आदेश दिया और समन को फिर से जारी करने का निर्देश दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं, मथुरा जिला अदालत में विचाराधीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े सात अन्य सिविल वादों की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में करने की अर्जी दाखिल की गई है। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से यह अर्जी दायर की गई थी। न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की पीठ ने इस अर्जी की सुनवाई करते हुए याची को इन वादों की प्रति तीन सप्ताह में दाखिल करने का निर्देश दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मंदिर पक्ष की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि 12 दिसंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित स्थगन आदेश इस मामले पर लागू नहीं होता, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने केवल अंतरिम आदेशों और सर्वेक्षण से जुड़े निर्देशों पर रोक लगाई है, लेकिन किसी व्यक्ति या पक्ष के संवैधानिक या विधिक अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले से जुड़े कुल 18 सिविल वादों की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले ही कर रहा है। यह मामला न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ में सुनवाई के लिए रखा गया है।</p>
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		<title>रामजन्मभूमि पर बोले CM योगी -24 घंटे के अंदर होगा इस विवाद का समाधान&#8230;</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Jan 2019 07:04:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[CM योगी]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्या मामला]]></category>
		<category><![CDATA[योगी]]></category>
		<category><![CDATA[साधू संत]]></category>
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					<description><![CDATA[रामजन्मभूमि: योगी के बयान पर अयोध्या में आलोचना और समर्थन का दौर शुरु अयोध्या । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राम जन्मभूमि विवाद के बयान के बाद एक बार फिर अयोध्या में बली मचा दिया है। उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विगत दिनों एक समाचार चैनल पर रामजन्मभूमि विवाद को लेकर बयान ... <a title="रामजन्मभूमि पर बोले CM योगी -24 घंटे के अंदर होगा इस विवाद का समाधान&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/big-statement-of-the-cm-yogi-on-ramjanmabhoomi-will-be-said-within-24-hours-solution-to-this-dispute-news/" aria-label="Read more about रामजन्मभूमि पर बोले CM योगी -24 घंटे के अंदर होगा इस विवाद का समाधान&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>रामजन्मभूमि: योगी के बयान पर अयोध्या में आलोचना और समर्थन का दौर शुरु</h2>
<div>अयोध्या । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राम जन्मभूमि विवाद के बयान के बाद एक बार फिर अयोध्या में बली मचा दिया है।</div>
<div>उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विगत दिनों एक समाचार चैनल पर रामजन्मभूमि विवाद को लेकर बयान दिया था। कहा था कि सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करे, अगर न्यायालय अपना फैसला नहीं सुना रही है तो हमें सौंप दें और हम 24 घंटे के अंदर इस विवाद का समाधान कर देंगे। इस बयान के बाद अयोध्या के संत, धर्माचार्य, पक्षकारों द्वारा आलोचना और समर्थन का दौर शुरू हो गया है।</div>
<div>मीडिया  से रविवार को रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास ने योगी जी के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि रामजन्मभूमि आन्दोलन जब आरम्भ हुआ। तब से योगी जी के गुरु महंत अवेद्यनाथ जी रामजन्मभूमि संघर्ष समिति के अध्यक्ष बनाये गए। बराबर रामलला और राष्ट्र के लिये संघर्ष करते रहे।</div>
<div>कहा कि हम जानते है हिन्दुओं के अंदर जितनी पीड़ा जन्मभूमि के लिये है, उससे भी अधिक पीड़ा योगी जी को है। योगी हमेशा से चाहते हैं कि रामजन्मभूमि पर जल्द से जल्द भव्य राममंदिर का निर्माण हो। इस मुद्दे पर सभी संत और पूरा राष्ट्र योगी जी के साथ खड़ा है।</div>
<div></div>
<div>कहाकि सुप्रीम कोर्ट लगातार हिन्दुओं का जो अपमान कर रही है, इससे जल्द से जल्द हिन्दू समाज आंदोलित होगा। और पूरे राष्ट्र में क्रांति मच जाएगी। इसलिये सुप्रीम कोर्ट जल्द इसका निर्णय ले।</div>
<div>रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने सीएम योगी इस बयान को राजनीतिक करार देते हुए कहा कि ये सब 2019 के चुनाव की दृष्टि से कह रहे हैं। विवादित परिसर को किसी को नहीं दिया जा सकता। विवाद होने कारण रिसीवर नियुक्त है। पूरा परिसर अधिग्रहण किया गया है इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बिना किसी को नहीं सौंपा जा सकता हैं।</div>
<div></div>
<div>उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने वादा किया था। जब सत्ता में आएंगे तो राममंदिर बनवायेंगे। अब कह रहे हैं कोर्ट मसला इनको दे दे। मोदी जी ने क्यों नहीं कहा कोर्ट अयोध्या मसले को हमको दे दे। ये अब क्यों कह रहे हैं सिर्फ रामभक्तों को प्रलोभन दे रहे,ताकि चुनाव में इनको कोई नुकसान न हो।</div>
<div>बाबरी पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि हम लोग भी चाहते हैं कि कोर्ट जल्द फैसला करे। किसी को सौंपने की जरूरत नहीं है। चुनाव का समय नजदीक है। राजनीति बिल्कुल चरम सीमा पर है। बाबरी मस्जिद और रामजन्मभूमि का मसला सुप्रीम कोर्ट में है। फैसला कोर्ट को करना है, सरकारें तो आती जाती रहती हैं। बहुत से सरकारें आयी और गईं। लेकिन कोर्ट सबूतों की आधार पर फैसला करता है।</div>
<div>
<h2 class="artheadinn">अयोध्या मामले में केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी</h2>
<h3 class="artheadinn">अविवादित जमीन से यथास्थिति का आदेश वापस लेने की मांग</h3>
<p class="artheadinn"> अयोध्या मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अविवादित जमीन से यथास्थिति का आदेश वापस लेने की मांग की है। केंद्र सरकार ने 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था और सिर्फ 2.77 एकड़ जमीन पर विवाद है। बाकी जमीन को रिलीज करने के लिए याचिका दायर की गई है। केंद्र सरकार ने 1993 में इस जमीन का अधिग्रहण किया था। आपको बता दें कि अयोध्या मामले की सुनवाई आज होनी थी लेकिन सुनवाई करने वाली बेंच के सदस्य जस्टिस एसए बोब्डे आज उपलब्ध नहीं हैं जिसकी वजह से आज सुनवाई टल गई है। 25 जनवरी को अयोध्या मामले की सुनवाई करनेवाली 5 जजों की नई बेंच का गठन कर दिया गया था जिसके सदस्य जस्टिस एस ए बोब्डे भी हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस एसए बोब्डे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं। पिछले 10 जनवरी को जस्टिस यूयू ललित ने वकील राजीव धवन की ओर से एतराज जताए जाने के बाद खुद ही बेंच से हटने की बात कही थी।</p>
<p class="artheadinn">धवन ने कहा था कि 1995 में जस्टिस ललित बतौर वकील यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के लिए पेश हुए थे। जस्टिस यूयू ललित के सुनवाई से हटने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई टाल दी थी। 27 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले से अयोध्या मसले पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस्माइल फारुकी का मस्जिद संबंधी जजमेंट अधिग्रहण से जुड़ा हुआ था। इसलिए इस मसले को बड़ी बेंच को नहीं भेजा जाएगा। जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला सुनाया था जो उनके और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का फैसला था। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर ने अपने फैसले में कहा कि इस इस्माईल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा जाए।</p>
</div>
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