<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
	<atom:link href="https://dainikbhaskarup.com/tag/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%95/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dainikbhaskarup.com</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Sun, 12 Jan 2020 06:01:22 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/dainik-bhaskar-icon.png</url>
	<title>हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
	<link>https://dainikbhaskarup.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम, जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%95-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Jan 2020 06:01:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम]]></category>
		<category><![CDATA[हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dainikbhaskarup.com/?p=48838</guid>

					<description><![CDATA[ हिमालय पर्वत, सदियों से कौतूहल और आस्था का केंद्र रहा है। इस हिमालय पर्वत पर भी भगवान का विश्राम धाम माना जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव यहां विश्राम करने आते हैं और भगवान श्री हरि विष्णु यहां बद्रीनाथ धाम में 6 माह आराम करते हैं। इस मृत्युलोक में चार पवित्र धाम माने ... <a title="हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम, जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%95-2/" aria-label="Read more about हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम, जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="col-sm-16 sec-info">
<p> हिमालय पर्वत, सदियों से कौतूहल और आस्था का केंद्र रहा है। इस हिमालय पर्वत पर भी भगवान का विश्राम धाम माना जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव यहां विश्राम करने आते हैं और भगवान श्री हरि विष्णु यहां बद्रीनाथ धाम में 6 माह आराम करते हैं। इस मृत्युलोक में चार पवित्र धाम माने गए हैं जिसमें केदारनाथ एक है। दूसरी ओर भगवान शिव श्री केदारनाथ में शिवलिंग में ज्योर्तिस्वरूप में प्रतिष्ठापित हैं इसलिए इसे द्वादश ज्योर्तिलिंग में स्थान प्राप्त है। वैसे तो कलियुग में भी श्रद्धालुओं को भगवान केदारनाथ के दर्शन दुर्लभ ही हैं। मगर भगवान के धाम के पट प्रतिवर्ष ग्रीष्म प्रारंभ होने के आसपास खुलते हैं। इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारेश्वर के दर्शनों के लिए उमड़ते हैं। <img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-48839" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/01/Kedarnath-1.jpg" alt="" width="640" height="425" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/01/Kedarnath-1.jpg 640w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/01/Kedarnath-1-300x199.jpg 300w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>कहा जाता है कि भगवान ने ही सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा स्वरूप धारण किया था, स्कन्द पुराण में उल्लेख मिलता है कि एक बेहेलिये को हिरण का मांस खाना अच्छा लगता था। एक बार जब वह शिकार के लिए निकला तो दिनभर भटकने के बाद भी उसे शिकार नहीं मिलां शाम को महर्षि नारद इस क्षेत्र में आए और बहेलिया उन्हें हिरण समझकर बाण चलाने को तैयार हो गया। इसी समय उसने देखा कि एक मेंढक को सर्प निगल रहा है। और मरने के बाद मेंढक शिव के रूप में आ गया। जिसके बाद उसने देखा कि हिरण भी मरने के बाद गणों के साथ शिवलोक को जाने लगा। उसे शिवत्व प्राप्त हो गया, तभी नारद मुनि ने ब्राह्म का वेश धारण किया और बहेलिये के सामने पहुंचे। बहेलिये ने ब्राह्मण से अपनी मुक्ति का उपाय पूछा जिस पर उन्होंने कहा कि यहां केदार क्षेत्र में शिव उपासना करने से वह शिवत्व को प्राप्त होगा। एक दूसरी कथा भी है जिसका उल्लेख शिव महापुराण में मिलता है।</p>
</div>
<div>नर और नारायण दो भाई थे। इन्हों ने भगवान शिव की पत्थर की मूर्ति तैयार कर उसका पूजन किया। वे शिव के ध्यान में रहते। दोनों भाईयों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव दोनों के सामने प्रकट हुए और वरदान मांगा। तब दोनों ने ही भगवान शिव से जनकल्याण के लिए इसी ज्योर्तिलिंग में विराजित होने का वरदान मांगा, महाभारत युद्ध के बाद अपने भाईयों और अन्य लोगों की हत्या से पांडवों को दुख हुआ वे पाप से मुक्ति का उपाया तलाश रहे थे तब डनहें महर्षि वेद व्यास ने विश्वनाथ और केदारनाथ के दर्शन- पूजन से इसका उपाय बताया। तब पांडव श्री विश्वनाथ के दर्शन और पूजन करते हुए श्री केदारनाथ धाम पहुंचे और यहां शिव आराधना की।</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम, जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%95/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jan 2020 09:01:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम]]></category>
		<category><![CDATA[हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://dainikbhaskarup.com/?p=48058</guid>

					<description><![CDATA[ हिमालय पर्वत, सदियों से कौतूहल और आस्था का केंद्र रहा है। इस हिमालय पर्वत पर भी भगवान का विश्राम धाम माना जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव यहां विश्राम करने आते हैं और भगवान श्री हरि विष्णु यहां बद्रीनाथ धाम में 6 माह आराम करते हैं। इस मृत्युलोक में चार पवित्र धाम माने ... <a title="हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम, जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%95/" aria-label="Read more about हिमालय की गोद में बसा शिव का धाम, जहां केदारेश्वर करते हैं विश्राम">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="col-sm-16 sec-info">
<p> हिमालय पर्वत, सदियों से कौतूहल और आस्था का केंद्र रहा है। इस हिमालय पर्वत पर भी भगवान का विश्राम धाम माना जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव यहां विश्राम करने आते हैं और भगवान श्री हरि विष्णु यहां बद्रीनाथ धाम में 6 माह आराम करते हैं। इस मृत्युलोक में चार पवित्र धाम माने गए हैं जिसमें केदारनाथ एक है। दूसरी ओर भगवान शिव श्री केदारनाथ में शिवलिंग में ज्योर्तिस्वरूप में प्रतिष्ठापित हैं इसलिए इसे द्वादश ज्योर्तिलिंग में स्थान प्राप्त है। वैसे तो कलियुग में भी श्रद्धालुओं को भगवान केदारनाथ के दर्शन दुर्लभ ही हैं। मगर भगवान के धाम के पट प्रतिवर्ष ग्रीष्म प्रारंभ होने के आसपास खुलते हैं। इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारेश्वर के दर्शनों के लिए उमड़ते हैं।<a href="http://www.shreeayodhyajisss.com/wp-content/uploads/2020/01/Kedarnath.jpg" target="_blank" rel="noopener"><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-12670" src="http://www.shreeayodhyajisss.com/wp-content/uploads/2020/01/Kedarnath.jpg" alt="" width="640" height="425" /></a></p>
<p>कहा जाता है कि भगवान ने ही सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा स्वरूप धारण किया था, स्कन्द पुराण में उल्लेख मिलता है कि एक बेहेलिये को हिरण का मांस खाना अच्छा लगता था। एक बार जब वह शिकार के लिए निकला तो दिनभर भटकने के बाद भी उसे शिकार नहीं मिलां शाम को महर्षि नारद इस क्षेत्र में आए और बहेलिया उन्हें हिरण समझकर बाण चलाने को तैयार हो गया। इसी समय उसने देखा कि एक मेंढक को सर्प निगल रहा है। और मरने के बाद मेंढक शिव के रूप में आ गया। जिसके बाद उसने देखा कि हिरण भी मरने के बाद गणों के साथ शिवलोक को जाने लगा। उसे शिवत्व प्राप्त हो गया, तभी नारद मुनि ने ब्राह्म का वेश धारण किया और बहेलिये के सामने पहुंचे। बहेलिये ने ब्राह्मण से अपनी मुक्ति का उपाय पूछा जिस पर उन्होंने कहा कि यहां केदार क्षेत्र में शिव उपासना करने से वह शिवत्व को प्राप्त होगा। एक दूसरी कथा भी है जिसका उल्लेख शिव महापुराण में मिलता है।</p>
</div>
<div>नर और नारायण दो भाई थे। इन्हों ने भगवान शिव की पत्थर की मूर्ति तैयार कर उसका पूजन किया। वे शिव के ध्यान में रहते। दोनों भाईयों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव दोनों के सामने प्रकट हुए और वरदान मांगा। तब दोनों ने ही भगवान शिव से जनकल्याण के लिए इसी ज्योर्तिलिंग में विराजित होने का वरदान मांगा, महाभारत युद्ध के बाद अपने भाईयों और अन्य लोगों की हत्या से पांडवों को दुख हुआ वे पाप से मुक्ति का उपाया तलाश रहे थे तब डनहें महर्षि वेद व्यास ने विश्वनाथ और केदारनाथ के दर्शन- पूजन से इसका उपाय बताया। तब पांडव श्री विश्वनाथ के दर्शन और पूजन करते हुए श्री केदारनाथ धाम पहुंचे और यहां शिव आराधना की।</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 
Lazy Loading (feed)

Served from: dainikbhaskarup.com @ 2026-04-11 09:12:25 by W3 Total Cache
-->