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	<title>#होली महोत्सव 2020 #होली महोत्सव #होली2020 #होली2020 #HappyHoli &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>सोरों में जन्मी थी ‘होलिका’ हरदोई में हुआ था ‘अग्निदाह’, जानिए पौराणिक कथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2020 06:12:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[एटा । कम ही लोग जानते हैं कि होलिका हिरण्यकशिपु के साथ हिरण्याक्ष की भी बहिन थी। वही हिरण्याक्ष, जिसका वध भगवान विष्णु ने वराहस्वरूप धारण कर उ.प्र. के कासगंज जिले के सोरों सूकरक्षेत्र में किया था। पौराणिक संकेतों व अनुश्रुतियों के अनुसार होलिका का जन्म हिरण्याक्ष के सोरों पर राज्य करने के समय सोरों ... <a title="सोरों में जन्मी थी ‘होलिका’ हरदोई में हुआ था ‘अग्निदाह’, जानिए पौराणिक कथा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/born-in-tire-holika-was-born-in-hardoi-agnidah-know-the-legend-news/" aria-label="Read more about सोरों में जन्मी थी ‘होलिका’ हरदोई में हुआ था ‘अग्निदाह’, जानिए पौराणिक कथा">Read more</a>]]></description>
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<div><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-57830" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/519323-holika-dahan.jpg" alt="" width="970" height="545" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/519323-holika-dahan.jpg 970w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/519323-holika-dahan-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/519323-holika-dahan-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/519323-holika-dahan-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 970px) 100vw, 970px" /></div>
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<p>एटा । कम ही लोग जानते हैं कि होलिका हिरण्यकशिपु के साथ हिरण्याक्ष की भी बहिन थी। वही हिरण्याक्ष, जिसका वध भगवान विष्णु ने वराहस्वरूप धारण कर उ.प्र. के कासगंज जिले के सोरों सूकरक्षेत्र में किया था।</p>
<p>पौराणिक संकेतों व अनुश्रुतियों के अनुसार होलिका का जन्म हिरण्याक्ष के सोरों पर राज्य करने के समय सोरों में ही हुआ था। वराह अवतरण के समय इनसे सोरों व आसपास का भूभाग भगवान वराह के नेतृत्व में देवताओं द्वारा छीन लिए जाने के बाद हिरण्याक्ष का भाई हिरण्यकशिपु प्रदेश के हरदोई (तात्कालिक नाम हरिद्रोही) नगर को अपनी राजधानी बना वहां से अपना राज्य करने लगा।</p>
<p>‘कन्नौज का इतिहास’ के लेखक इतिहासकार आनन्द स्वरूप मिश्र के अनुसार हरदोई के प्रहलाद चौरा घाट व उसके पुत्र विरोचन के नाम पर बसा गांव विरेचमऊ तथा हरदोई गजेटियर के उल्लेख कि इसे राजा हरनाकुश ने बसाया- से इसकी पुष्टि होती है। हालांकि कुछ अन्य अनुश्रुतियों में नरसिंह अवतार व हिरण्यकशिपु का वधस्थल झांसी के समीप का ही एक खेड़ा भी माना जाता है। वहीं कुछ लोग इस कथा को स्यालकोट के समीप का होना भी मानते हैं। किन्तु हिरण्याक्ष के सोरों पर शासन के विषय में सभी एकमत हैं।</p>
<p>आनन्द स्वरूप मिश्र के विपरीत कासगंज निवासी इतिहासकार अमित तिवारी के होलिका का जन्म ही नहीं होलिका का अग्निदाह भी सोरों नगर में हुआ मानते हैं। इनके अनुसार विष्णुपुराण व् पद्मपुराण के अनुसार आज से लाखों वर्ष पूर्व सतयुग काल में मैया होलिका का जन्म सोरों जी में ही हुआ था। पौराणिक व अनुश्रुति कथाओं के अनुसार महर्षि कश्यप व उनकी दूसरी पत्नी दिति की तीन संतान हुईं। इनमें दो पुत्र- हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष व एक पुत्री होलिका का सन्दर्भ मिलता है। होलिका को व्रह्मा जी से अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था तथा होलिका प्रतिदिन अग्निस्नान करती थी।</p>
<p>कुछ समय बाद जब भगवान वराह ने होलिका के भाई हिरण्याक्ष का वध कर दिया तो होलिका का दूसरा भाई और सोरों जी का राजा हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु का सबसे बड़ा शत्रु बन गया। हिरण्यकशिपु ने अपने राज्य में भगवान विष्णु की आराधना ही प्रतिबंधित कर दी।</p>
<p>वर्षों पश्चात् हिरण्यकशिपु का अपना पुत्र प्रहलाद ही भगवान विष्णु का अखंड भक्त हो गया। यह जानकार हिरण्यकशिपु बेहद क्रोधित हो उठा और उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ जाय। हिरण्यकशिपु के आदेशानुसार होलिका विवश हो अपने भतीजे प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गयी। भक्त प्रहलाद की विष्णु भक्ति के समक्ष होलिका को व्रह्मा जी द्वारा दिया गया वरदान काम न आया। होलिका जल गयी और प्रह्लाद सुरक्षित बच गया।</p>
<p>विवाह के दिन ही हुआ था होलिका का अग्निदाह</p>
<p>अमित तिवारी के अनुसार अगर हम पौराणिक कथाओं पर जरा ठीक से गौर करें तो यह अर्थ निकलकर आएगा कि अग्नि की उपासक होलिका खलनायिका नहीं थी। बल्कि उसके भाई हिरण्यकश्य ने उसे विवश किया था कि वो विष्णु भक्त प्रह्लाद को लेकर प्रचंड अग्नि समूह में बैठ जाये अन्यथा उसी दिवस अर्थात फाल्गुन की पूर्णिमा को होने वाले उसके प्रेम विवाह को वह नहीं होने देगा।</p>
<p>राजस्थान के लोकदेव इलोजी से होना था प्रेमविवाह</p>
<p>अमित पौराणिक कथा किवदंतियों का संदर्भ देते हुए बताते हैं कि फाल्गुन की पूर्णिमा को सोरों जी में होलिका की बारात आना प्रस्तावित था। इस दिन होलिका का प्रेमविवाह राजस्थान के लोकदेवता कामदेव के स्वरुप राजा इलोजी नासितक से होना था। होलिका के भाई हिरण्यकशिपु को इस विवाह पर आपत्ति थी। इधर वह अपने विष्णुभक्त पुत्र प्रह्लाद से अत्यधिक खिन्न था।</p>
<p>बारात आने से ठीक पहले हिरण्यकशिपु ने होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को लेकर अग्निकुण्ड में बैठ जाये अन्यथा वह उसका विवाह संम्पन्न नहीं होने देगा। होलिका अपने भतीजे प्रहलाद से अत्यधिक स्नेह व राजस्थान के लोकदेवता इलोजी से अत्यधिक प्रेम करती थी। होलिका दोनों में से किसी को खोना नहीं चाहती थी। इसलिए होलिका ने स्वयं के ही जीवन को समाप्त करने का निर्णय लिया और अग्निकुण्ड में बैठकर प्रहलाद को अपना अग्निरोधी कवच प्रदान कर दिया। इस कारण अग्नि की उपासक होलिका तो जल गयी, प्रहलाद सुरक्षित बच गया।</p>
<p>होलिका की स्मृति में आजन्म कुंआरे रहे इलोजी</p>
<p>उसी दौरान होलिका के प्रेमी इलोजी ने अपनी बारात के साथ सोरों जी में प्रवेश किया। इलोजी ने देखा कि उनकी प्रेयसी होलिका विवाह के अग्निकुण्ड में जलकर भस्म हो चुकी है। अग्निकुण्ड में अपनी प्रेयसी होलिका की राख देखकर प्रेमी इलोजी चीत्कार उठे। इलोजी ने अपने शरीर के वस्त्रों को फाड़ डाला और अग्नि में जल चुकी होलिका की अवशेष भस्म को दोनों हाथों से अपने शरीर पर पोतने लगे।</p>
<p>होलिका और इलोजी की प्रेमकहानी का यह एक दुखद अंत था। वातावरण में स्तब्धता शून्यता छा चुकी थी। होलिका के वियोग में मानसिक रूप से विचलित होते जा रहे निढाल इलोजी को लेकर उनकी बारात बापस राजस्थान लौट गयी। कहा जाता है कि होलिका के वियोग में इलोजी आजीवन अविवाहित रहे तथा होलिका के शरीर की अवशेष भस्म को आजीवन वह अपने शरीर पर लपेटे रहे।</p>
<p>किवदंती इलोजी की मृत्यु न मानते हुए उन्हें आज भी जीवित मानती हैं। प्रतिवर्ष फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के समय राजस्थान के कुछ भूभाग में इलोजी की बारात निकलती है तथा बांझ स्त्रियां संतान प्राप्ति के लिए देवता इलोजी की पूजा करतीं हैं।</p>
</div>
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		<title>यहाँ हिरण्यकश्यप की हत्या के उपद्रव के रुप में मनाई जाती है कीचड़ की होली</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/here-holi-of-mud-is-celebrated-as-a-nuisance-for-killing-hiranyakashyap-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2020 05:42:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[#होली महोत्सव 2020 #होली महोत्सव #होली2020 #होली2020 #HappyHoli]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; झांसी । रंगों के त्योहार होली से तो सभी परिचित हैं। इसे अलग-अलग तरीके से मनाने की परम्परा देश के कोने-कोने समेत विश्व के कई स्थानों पर है। इस परम्परा के शुरु होने से लेकर यह तथ्य कम लोग ही जानते हैं कि बुन्देलखण्ड समेत अधिकांश स्थानों पर होली जलने के बाद प्रथमा को ... <a title="यहाँ हिरण्यकश्यप की हत्या के उपद्रव के रुप में मनाई जाती है कीचड़ की होली" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/here-holi-of-mud-is-celebrated-as-a-nuisance-for-killing-hiranyakashyap-news/" aria-label="Read more about यहाँ हिरण्यकश्यप की हत्या के उपद्रव के रुप में मनाई जाती है कीचड़ की होली">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-57818" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/2016_3largeimg128_Mar_2016_025213307gallery.jpg" alt="" width="983" height="748" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/2016_3largeimg128_Mar_2016_025213307gallery.jpg 660w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/2016_3largeimg128_Mar_2016_025213307gallery-300x228.jpg 300w" sizes="(max-width: 983px) 100vw, 983px" /></p>
<p>झांसी । रंगों के त्योहार होली से तो सभी परिचित हैं। इसे अलग-अलग तरीके से मनाने की परम्परा देश के कोने-कोने समेत विश्व के कई स्थानों पर है। इस परम्परा के शुरु होने से लेकर यह तथ्य कम लोग ही जानते हैं कि बुन्देलखण्ड समेत अधिकांश स्थानों पर होली जलने के बाद प्रथमा को कीचड़ की होली क्यों मनाते हैं। इसके पीछे विभिन्न पुराणों में तथ्यात्मक वर्णन दिया गया है। ऐसा बताया गया है कि यह राक्षसों के उपद्रव की कहानी है। जिसे बाद में कीचड़ की होली का नाम दिया गया। साथ ही एरच में मिली होलिका और प्रह्लाद समेत नरसिंह की मूर्तियां इस बात को प्रमाणित करती हैं कि कहीं अन्यत्र नहीं बल्कि एरच में ही भक्त प्रह्लाद का जन्म हुआ था।</p>
<p>सनातन धर्म को सभी धर्मों का मूल माना जाता है। साथ ही भारतीय संस्कृति सभी को जोड़ना सिखाती है। यही कारण है कि भारत में हर दिन कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है। मान्यताओं के देश में रंगों के त्यौहार होली को भी पूरे देश में मनाया जाता है। इस त्यौहार का उद्गम बुन्देलखण्ड की हृदयस्थली में स्थित एरच को माना जाता है। श्रीमद भागवत पुराण में सतयुग में भक्त प्रह्लाद का प्रसंग आता है। वर्णन है कि हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु दो राक्षस भाई थे। इनकी राजधानी एरिकेच्छ बताई गई है। जो अब परिवर्तित होकर एरच हो गया। एरच जिला मुख्यालय से करीब 80 किमी की दूरी पर बामौर विकासखण्ड में स्थित है।</p>
<p>कथा में बताया जाता है कि जब पृथ्वी का हरण कर उसे पाताल लोग में हिरण्याक्ष ले जा रहा था। तब भगवान विष्णु ने वाराह अवतार में आकर हिरण्याक्ष का वध किया था। साथ ही पृथ्वी की रक्षा कर उसे वापस रख दिया था। तब से हिरण्याक्ष का भाई हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझने लगा था। और फिर हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद हुआ। उसका पालन पोषण मुनि आश्रम में होने के कारण वह बालक विष्णु भक्त हो गया। यह बात उसके पिता को नागवार गुजरी और उसने अपने पुत्र को तरह-तरह की यातनाएं देकर विष्णु की भक्ति से अलग करना चाहा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।</p>
<p>राक्षसराज हिरण्यकश्यप को इस पर क्रोध आ गया और उसने अपने पुत्र को मारने के तमाम तरीके अपनाए। उसकी एक बहन थी होलिका। उसे वरदान था कि वह जलती आग में बैठ जाएगी तो भी उसे आग की लपटें छू भी नहीं सकती थी। प्रह्लाद को उसके हवाले कर दिया गया। लेकिन प्रभु इच्छा के चलते प्रह्लाद के स्थान पर होलिका ही जल गई। अन्त में जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए तलवार उठाई तो नरसिंह रुप में भगवान विष्णु प्रकट हो गए और उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया। अपने राजा का वध होते देख हजारों राक्षसों उत्पात मचाना शुरु कर दिया। और नरसिंह भगवान को घेर लिया। नरसिंह जी ने उस सबका भी वध कर दिया। तब से इस उपद्रव को कीचड़ की होली माना जाने लगा।</p>
<p><strong>कथा व्यास गौरांगी देवी ने बताया राक्षसों की होली</strong></p>
<p>इस संबंध में कथा व्यास गौरांगी देवी बताती हैं कि कुछ दिन पूर्व तक इस होली को अच्छे लोगों की होली नहीं कहा जाता था। बल्कि उत्पात मचाने वाले ही इस होली को खेलते थे। इसके बाद जब भक्त प्रह्लाद का राज्याभिषेक कर दिया गया तो उत्पात थम गया। और फिर खुशी में रंगों और फूलों की होली मनाई गई। इसीलिए दौज पर रंगों की होली होती है।</p>
<p><strong>इतिहासविद राज्यमंत्री हरगोविन्द कुशवाहा मानते हैं उपद्रव की होली</strong></p>
<p>वहीं बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष,राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त इतिहासविद हरगोविन्द कुशवाहा भी बताते हैं कि बुन्देलखण्ड ही वह धरा है जिसने विश्व का मार्गदर्शन किया। वह भी इसे उपद्रवी राक्षसों के उत्पात की होली बताते हैं। बाद में जब दोनों पक्षों में समझौता हो गया तो सभी खुशी में रंग और पुष्पों की वर्षा कर होलिका के दहन को उत्सव की तरह मनाते हैं। उन्होंने बताया कि यह महज कोरी कल्पना नहीं है। अंग्रेजों ने झांसी के गजेटियर में भी इसका जिक्र किया है।</p>
<p>उन्होंने गजेटियर के पृष्ठ 339 पर एरच और ढिकौली का जिक्र है। उन्होंने बताया कि खुदाई के दौरान एरच में 250 फुट जमीन के नीचे मिली पत्थर की होलिका और उसकी गोद में प्रह्लाद की मूर्ति इस बात का प्रमाण है कि यह वही एरिकेच्छ है, जो कभी हिरण्यकश्यप की राजधानी हुआ करता था। वहां पर आज भी कई सिक्के लोगों को खेतों में मिलते रहते हैं जो उस शासन की पुष्टि करते हैं।</p>
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		<title>इस होली अपनी राशि के अनुसार खेलें रंग, फायदे जानकर हो जायेंगे हैरान&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/play-this-holi-according-to-your-zodiac-you-will-be-surprised-knowing-the-benefits-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2020 19:36:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[राशिफल]]></category>
		<category><![CDATA[#होली महोत्सव 2020 #होली महोत्सव #होली2020 #होली2020 #HappyHoli]]></category>
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					<description><![CDATA[जल्द ही खुशियों और रंगो से भरा त्यौहार दस्तक देने वाला है &#124; इस बार होली का त्यौहार 9 तारीख को मनाया जा रहा है &#124; 9 तारीख को होलिका दहन किया जायेगा और उसके अगले दिन यानि 10 तारीख को रंगो से होली खेली जाएगी &#124; कई लोगो ने तो होली की तैयारियां भी ... <a title="इस होली अपनी राशि के अनुसार खेलें रंग, फायदे जानकर हो जायेंगे हैरान&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/play-this-holi-according-to-your-zodiac-you-will-be-surprised-knowing-the-benefits-news/" aria-label="Read more about इस होली अपनी राशि के अनुसार खेलें रंग, फायदे जानकर हो जायेंगे हैरान&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-57765" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/होली-पर-अपनी-राशि-के-अनुसार-लगाए-ये-रंग-खुलेगी-किस्मत-मिलेगी-खुशियाँ.jpg" alt="" width="964" height="506" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/होली-पर-अपनी-राशि-के-अनुसार-लगाए-ये-रंग-खुलेगी-किस्मत-मिलेगी-खुशियाँ.jpg 600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/03/होली-पर-अपनी-राशि-के-अनुसार-लगाए-ये-रंग-खुलेगी-किस्मत-मिलेगी-खुशियाँ-300x158.jpg 300w" sizes="(max-width: 964px) 100vw, 964px" /></p>
<p>जल्द ही खुशियों और रंगो से भरा त्यौहार दस्तक देने वाला है | इस बार होली का त्यौहार 9 तारीख को मनाया जा रहा है | 9 तारीख को होलिका दहन किया जायेगा और उसके अगले दिन यानि 10 तारीख को रंगो से होली खेली जाएगी | कई लोगो ने तो होली की तैयारियां भी शुरू कर दी है | होली का त्यौहार आपसी बैर खत्म करने और भाईचारे का सन्देश देने वाला त्यौहार |</p>
<p>वैसे होली रंगो का त्यौहार है, और ये रंग खुशी, प्रसन्नता, ऊर्जा और शक्ति के प्रतीक माने जाते है | ऐसे में अगर आप अपनी राशि के अनुसार रंगो का चुनाव करे तो हमें कई तरह के लाभ प्राप्त हो सकते है | तो आइये जानते है राशि के अनुसार कौनसा रंग आपके लिए शुभ साबित होगा |</p>
<p>मेष</p>
<p>इस राशि के जातको के लिए लाल और पीला रंग बेहद शुभ है, होली में इनका प्रयोग आपको बेहद ही शुभ फल प्रदान करेगा |</p>
<p>वृषभ</p>
<p>इस राशि के जातक यदि जमुनी और नारंगी रंगो का इस्तेमाल करते है, तो इनके जीवन में खुशियों की नयी बहार आ जाएगी |</p>
<p>मिथुन</p>
<p>मिथुन राशि वालो के लिए बैंगनी और हरा रंग बेहद ही शुभ है | इस रंग से किस्मत का साथ आपको मिलेगा और किस्मत के बंद दरवाजे खुलेंगे |</p>
<p>कर्क</p>
<p>इस राशि के जातक नीले और हरे रंग से होली खेले | आपको लाभ मिलेगा और कई बिगड़े काम भी बन जाएंगे |</p>
<p>सिंह</p>
<p>सिंह राशि के जातको के लिए पीला और गोल्डन रंग बेहद ही शुभ है | इनके प्रयोग से आपको कई तरह के लाभ मिलेंगे |</p>
<p>कन्या</p>
<p>इस राशि के जातको के लिए नारंगी और पीला रंग सबसे बेहतर है | इन रंगो का प्रयोग आपके करीबियों के साथ रिश्तो को मजबूत करेगा |</p>
<p>तुला</p>
<p>इस राशि के जातको के गुलाबी और लाल रंग बेहद शुभ है | इनके उपयोग से आपका भाग्य चमक उठेगा |</p>
<p>वृश्चिक</p>
<p>इस राशि के जातको के लिए लाल, पीला और हरा बेहद ही शुभ है | ये रंग इनके जीवन में नयी खुशियां लाएंगे |</p>
<p>धनु</p>
<p>इस राशि के जातक होली के रंगो में पीला और लाल उपयोग करे | ये इनके लिए तरक्की के दरवाजे खोल देगा |</p>
<p>मकर</p>
<p>इस राशि के जातको का गुलाबी और लाल रंगो का प्रयोग करना शुभ फल प्रदान करेगा, अच्छा धनलाभ होने की भी आशंका है |</p>
<p>कुम्भ</p>
<p>कुम्भ राशि के जातको के लिए भी लाल और गुलाबी बेहद ही शुभ है | आपको जल्द ही कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा |</p>
<p>मीन</p>
<p>इस राशि के जातको के लिए हरा और नारंगी रंग बेहद ही शुभ है, ये आपके भाग्य को जगाने का काम करेगा |</p>
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