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		<title>उत्तर प्रदेश : 144 दिन में ही गठबंधन का THE END, अखिलेश ने बोली ये बात..</title>
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		<pubDate>Tue, 04 Jun 2019 06:48:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि सपा के साथ रिश्ते बने रहेंगे, लेकिन राजनीतिक विवशताओं के चलते फिलहाल उप चुनाव में गठबंधन नहीं रहेगा। यानि 144 दिन में ही टूट गया गठबंधन! मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि सपा को अभी बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। आगे यदि सपा ... <a title="उत्तर प्रदेश : 144 दिन में ही गठबंधन का THE END, अखिलेश ने बोली ये बात.." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/uttar-pradesh-the-end-of-the-coalition-alliance-in-144-days-akhilesh-spoke-this-news/" aria-label="Read more about उत्तर प्रदेश : 144 दिन में ही गठबंधन का THE END, अखिलेश ने बोली ये बात..">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://hindusthansamachar.in/uploads/videos/afd23f38fc721889f991dba99fd70d9328585a4a763627196483c0ef1a53ba82_1.jpg" /></p>
<div> बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि सपा के साथ रिश्ते बने रहेंगे, लेकिन राजनीतिक विवशताओं के चलते फिलहाल उप चुनाव में गठबंधन नहीं रहेगा। यानि 144 दिन में ही टूट गया गठबंधन!</div>
<div>मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि सपा को अभी बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। आगे यदि सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों को करने के साथ-साथ अपने लोगों को निश्छल बनाने में सफल हो जाते हैं तो फिर उनके साथ समझौता किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यह गठबंधन से अलग होने का निर्णय हमेशा के लिए नहीं है। आगे की परिस्थितियों को देखकर उस पर विचार किया जाएगा।</div>
<div></div>
<div>ऐसे  में  समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव फिलहाल कुछ भी टिप्पणी करने से बच रहे हैं। हालांकि आजमगढ़ में पत्रकारों के काफी कुरेदने पर अखिलेश यादव ने इतना तो कह ही दिया कि अब हम अपने साधन और अपने संसाधनों से चुनाव लड़ेंगे।</div>
<div>
<p>बताते चके इधर जहां एक तरफ दिल्ली में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती गठबंधन तोड़ने के संकेत दे रही थीं और वहीं आजमगढ़ में अखिलेश जीत के लिए वोटरों को धन्यवाद दे रहे थे। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद पहली बार कैमरे पर आए अखिलेश यादव ने आगे की लड़ाई के लिए नए प्लान पर काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब अपना साधन और अपने संसाधन से हम चुनाव लड़ेंगे।</p>
</div>
<div></div>
<div></div>
<div>मंगलवार को बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि अखिलेश और उनकी पत्नी ने आदर दिया। हमने भी उनको उसी तरह का आदर दिया। ये रिश्ता हमेशा के लिए बना रहेगा, लेकिन हमारी भी राजनीतिक विवशताओं को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।  उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम में यादव समाज अपनी सीटों पर भी सपा के साथ नहीं रह सका। अंदर ही अंदर भितरघात किया है। सपा के मजबूत इलाकों में भी उन्हें ही हरा दिया। डिम्पल और धर्मेंद्र यादव का हार जाना बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता है। जब उन्होंने अपने ही उम्मीदवारों को हरा दिया तो फिर सपा हमारी तरफ कैसे शिफ्ट कर दी, यह सोचने वाली बात है। इस चुनाव में कुछ ईवीएम का भी दोष है।</div>
<div></div>
<div>मायावती ने कहा कि इस चुनाव ने हमें आगे भी बहुत सोचने को मजबूर करता है। जब सपा को वेश वोट ही उसे नहीं मिला और अपनी ही प्रमुख सीटों पर वे हार गये तो वे फिर बसपा को वोट दिलवाने में कैसे कामयाब हो सकते हैं? उन्होंने कहा कि अपने कैडर के साथ हमने काफी गहन समीक्षा की। बीएसपी भीम राव अंबेडकर के आदर्शों पर चलने वाली पार्टी है। उसी मानसिकता से हमने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था, लेकिन बड़ी मेहनत के बाद भी मकशद में कोई खास सफलता नहीं मिली। अखिलेश यादव को सपा कैडर को बसपा कैडर की तरह सीख देने की जरूरत है। यदि वे अपने कैडर काे ठीक कर लेते हैं तो हम फिर से एकसाथ हो सकते हैं। लेकिन वर्तमान में राजनीतिक दृष्टिकोण से सपा को अपने लोगों को एकसाथ करने की जरूरत है।</div>
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		<title>योगी के मंत्री का दावा-यूपी में भारी मतों से जीतेगा गठबंधन, खाते में जाएंगी 55-60 सीटें</title>
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		<pubDate>Sun, 19 May 2019 11:48:29 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[ओमप्रकाश राजभर lok-sabha elections hindi news]]></category>
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					<description><![CDATA[लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच रविवार सुबह सात बजे मतदान प्रारम्भ हो गया। मतदान शाम छह बजे तक जारी रहेगा, लेकिन राबर्ट्सगंज के तीन विधानसभा क्षेत्रों में अपराह्न चार बजे तक ही वोट पड़ेंगे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम ... <a title="योगी के मंत्री का दावा-यूपी में भारी मतों से जीतेगा गठबंधन, खाते में जाएंगी 55-60 सीटें" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/general-polls-2019-bjp-sulking-ally-and-cm-yogi-minister-op-rajbhar-says-opposition-gathbandhan-news/" aria-label="Read more about योगी के मंत्री का दावा-यूपी में भारी मतों से जीतेगा गठबंधन, खाते में जाएंगी 55-60 सीटें">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://www.jagranimages.com/images/19_05_2019-op-raj-vote_19236001.jpg" alt="UP Loksabha Election phase 7 poll : à¤¯à¥à¤à¥ à¤à¤¦à¤¿à¤¤à¥à¤¯à¤¨à¤¾à¤¥ à¤à¥ à¤®à¤à¤¤à¥à¤°à¥ à¤à¤®à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤¶ à¤°à¤¾à¤à¤­à¤° à¤à¤¾ à¤¦à¤¾à¤µà¤¾, à¤ªà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤à¤à¤² à¤®à¥à¤ à¤à¥à¤¤à¥à¤à¤¾ à¤à¤ à¤¬à¤à¤§à¤¨" width="896" height="744" /></div>
<div></div>
<div>लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच रविवार सुबह सात बजे मतदान प्रारम्भ हो गया। मतदान शाम छह बजे तक जारी रहेगा, लेकिन राबर्ट्सगंज के तीन विधानसभा क्षेत्रों में अपराह्न चार बजे तक ही वोट पड़ेंगे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। आखिरी दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गजों के भाग्य आज ईवीएम में कैद हो जाएंगे।</div>
<div></div>
<div>सातवें चरण में प्रदेश की महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चन्दौली, वाराणसी, मिर्जापुर तथा राबर्ट्सगंज सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है। इस चरण में 2.36 करोड़ मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा0 महेंद्रनाथ पांडेय और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह समेत 167 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।</div>
<div></div>
<div>यूपी में अपनी पसंद की सीटें न मिलने पर CM योगी आदित्यनाथ की सरकार से बाहर निकलने वाले समाज पार्टी के अध्यक्ष राजभर ने दावा करते हुए कहा कि प्रदेश से बीजेपी को सिर्फ 15 सीटें मिलेंगी। बुआ-बबुआ गठबंधन को 55 से 60 सीटें हासिल होंगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के खाते में ढाई सीट ही आएगी। इससे पहले भी ओमप्रकाश राजभर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि इस बार दिल्ली की कुर्सी पर एक दलित की बेटी बैठेगी। उन्होंने कहा, &#8216;हम भाजपा को वोट नहीं दिलाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि मैं एक घोसी की सीट मांग रहा था, लेकिन हमें नहीं दी गई। देश के चुनाव में हम उनके साथ नहीं हैं।</div>
<div></div>
<div>सपा-बसपा गठबंधन में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति में विकल्प हमेशा खुले रहते हैं। सुभासपा की बढ़ती ताकत से भाजपा चिंतित रही है। उन्होंने कहा कि मैंने मंत्री पद छोड़ दिया है। मैंने मुख्यमंत्री को इस्तीफा दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस्तीफा स्वीकार करना या नहीं करना राष्ट्रीय अध्यक्ष का विषय है।</div>
<div></div>
<div></div>
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		<title>लोक सभा चुनाव : दूसरे चरण में जानिए दो घंटे में कहां कितनी वोटिंग</title>
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		<pubDate>Thu, 18 Apr 2019 06:27:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली । लोकतंत्र के महापर्व के दूसरे चरण के लिए हो रहे मतदान में गुरुवार सुबह सात से नौ बजे के बीच दो घंटे में कहीं भारी तो कहीं धीमा मतदान दर्ज किया गया । यह है विवरण  असम की 5 सीटों पर 10 फीसदी मतदान जम्मू-कश्मीर की दो सीटों पर एक फीसदी मतदान ... <a title="लोक सभा चुनाव : दूसरे चरण में जानिए दो घंटे में कहां कितनी वोटिंग" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/lok-sabha-elections-in-the-second-phase-know-how-much-voting-in-two-hours-news/" aria-label="Read more about लोक सभा चुनाव : दूसरे चरण में जानिए दो घंटे में कहां कितनी वोटिंग">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span class="storydetails">नई दिल्ली । लोकतंत्र के महापर्व के दूसरे चरण के लिए हो रहे मतदान में गुरुवार सुबह सात से नौ बजे के बीच दो घंटे में कहीं भारी तो कहीं धीमा मतदान दर्ज किया गया ।</span></p>
<p><strong>यह है विवरण </strong></p>
<p>असम की 5 सीटों पर 10 फीसदी मतदान</p>
<p><span class="storydetails">जम्मू-कश्मीर की दो सीटों पर एक फीसदी मतदान<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">कर्नाटक की 14 सीटों पर 1.15 फीसदी मतदान<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">महाराष्ट्र की 10 सीटों पर .85 फीसदी मतदान<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">मणिपुर की एक सीट पर 1.7 फीसदी मतदान<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">ओडिशा की पांच सीटों पर 2.15 फीसदी मतदान<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">तमिलनाडु की 38 सीटों पर .81 फीसदी मतदान<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर चार फीसदी मतदान</span></p>
<p>पश्चिम बंगाल की तीन सीटों पर .55 फीसदी मतदान</p>
<p>छत्तीसगढ़ की तीन सीटों पर 7.75 फीसदी मतदान</p>
<p class="storyheadline">उप्र की आठ सीटों पर पहले दो घंटे में करीब 11 प्रतिशत मतदान</p>
<p><span class="storydetails">लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में पश्चिम उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर मतदान जारी है। प्रथम दो घंटे में 10.76 प्रतिशत मतदान हुआ।<br />
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सुबह नौ बजे तक आठों संसदीय क्षेत्रों में </span></p>
<p><span class="storydetails">मतदान का प्रतिशत इस प्रकार रहा-<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">नगीना &#8211; 12.82 प्रतिशत<br />
अमरोहा &#8211; 10.72 प्रतिशत<br />
बुलंदशहर &#8211; 11.40 प्रतिशत<br />
अलीगढ &#8211; 07.60 प्रतिशत<br />
हाथरस &#8211; 12.30 प्रतिशत<br />
मथुरा &#8211; 8.82 प्रतिशत<br />
आगरा &#8211; 11.36 प्रतिशत<br />
फतेहपुर सीकरी &#8211; 11.05 प्रतिशत</span></p>
<p class="storyheadline"><strong>प्रधानमंत्री ने किया युवा मतदाताओं का आह्वान</strong></p>
<p><span class="storydetails">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार सुबह आम चुनाव के दूसरे चरण का मतदान शुरू होने से पहले देश के युवा मतदाताओं का आह्वान किया।  प्रधानमंत्री ने ट्वीट में नागरिकों से कहा, &#8216; आप मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को मजबूत करेंगे।&#8217; उन्होंने खासतौर पर युवाओं का मतदान के लिए आह्वान किया। </span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पटना दफ्तर में बवाल : पूर्व सांसद को नहीं मिला टिकट, समर्थकों का हाई वोल्टेज ड्रामा</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/bihar-congress-leader-nikhil-kumar-supporters-proest-against-shaktisinh-gohil-news/</link>
		
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		<pubDate>Thu, 04 Apr 2019 15:31:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगामी लोक सभा चुनाव का आगाज़ हो चुका है. इस चुनाव में सियासी घमासान के बीच नेताओं की तरफ से आपत्तिजनक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सभी पार्टियों ने चुनाव के  के मद्देनजर पार्टियों का चुनावी अभियान जारी है. इस बीच बिहार में हाई वोल्तंगे ड्रामा देखने को मिला बताते चले  ताजा मामला है ... <a title="पटना दफ्तर में बवाल : पूर्व सांसद को नहीं मिला टिकट, समर्थकों का हाई वोल्टेज ड्रामा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bihar-congress-leader-nikhil-kumar-supporters-proest-against-shaktisinh-gohil-news/" aria-label="Read more about पटना दफ्तर में बवाल : पूर्व सांसद को नहीं मिला टिकट, समर्थकों का हाई वोल्टेज ड्रामा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><img decoding="async" class="" src="https://img.timesnownews.com/story/1554384189-bihar_congress.png?d=600x450" alt="Congress workers creates ruckus in party office" width="944" height="708" /></h1>
<p>आगामी लोक सभा चुनाव का आगाज़ हो चुका है. इस चुनाव में सियासी घमासान के बीच नेताओं की तरफ से आपत्तिजनक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सभी पार्टियों ने चुनाव के  के मद्देनजर पार्टियों का चुनावी अभियान जारी है. इस बीच बिहार में हाई वोल्तंगे ड्रामा देखने को मिला बताते चले  ताजा मामला है बिहार का जहां कार्यकर्ताओं के असंतोष और नाराजगी को लेकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का विरोध झेलना पड़ा। बिहार कांग्रेस की चुनाव समिति की बैठक चल रही थी।</p>
<p>इसी दौरान पूर्व सांसद निखिल कुमार के समर्थक उग्र हो गए और जमकर नारेबाजी करने लगे। मामला इतना बढ़ गया कि नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। कार्यकर्ता पार्टी के वरिष्ठ नेता निखिल कुमार को टिकट ना मिलने से नाराज थे। हंगामा उस वक्त हुआ तब वहां प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल और अखिलेश सिंह भी मौजूद रहे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a> Congress workers create ruckus at party office in Patna, Bihar over denial of ticket to former party MP Nikhil Kumar from Aurangabad parliamentary constituency. Grand alliance has fielded Upendra Prasad of Hindustani Awam Morcha (Secular) as its candidate from Aurangabad. <a href="https://t.co/ITwiVHt0ja">pic.twitter.com/ITwiVHt0ja</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1113756563817283585?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">April 4, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>कार्यकर्ताओं का विरोध इस कदर बढ़ गया कि वह गोहिल वापस जाओ के नारे लगाने लगे। इसके साथ ही कार्यकर्ता अखिलेश सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी करने लगे। इस दौरान वहां निखिल कुमार भी मौजूद रहे और वह समर्थको से बार-बार शांत रहने की अपील कर रहे थे। लेकिन समर्थक कुमार की बात मानने को तैयार नहीं थे।</p>
<p>गौरतलब है कि बिहार की औरंगाबाद सीट गठबंधन में जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के हिस्से मे चली गई है। इस सीट से कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता निखिल कुमार का टिकट तय माना जा रहा था लेकिन टिकट नहीं मिलने से कुमार के समर्थक नाराज हो गए और हंगामा करने लगे।</p>
<p><strong>महागठबंधन में कांग्रेस की सीटें</strong></p>
<p>1. किशनगंज- मोहम्मद जावेद<br />
2. कटिहार- तारिक अनवर<br />
3. पूर्णिया- उदय सिंह<br />
4. समस्तीपुर- अशोक राम<br />
5. मुंगेर- अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी<br />
6. पटना साहिब- शत्रुघ्न सिन्हा (संभवत:)<br />
7. सासाराम- मीरा कुमार<br />
8. वाल्मिकी नगर- घोषणा नहीं<br />
9. सुपौल- रंजीत रंजन</p>
<p>इससे पहले बिहार कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने सीट बंटवारे पर अपनी नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा था कि जिस तरह से महागठबंधन में सीटों का बंटवारा हुआ है उससे कांग्रेस को नुकसान हुआ है. उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि कांग्रेस ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के बुरे दिनों में साथ दिया लेकिन समय आने पर उन्होंने साथ नहीं दिया. पार्टी की कुर्बानी से नुकसान हुआ है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>महागठबंधन: कांग्रेस ने की सीटो पर बड़ी डिमांड, क्या माया-अखिलेश मानेंगे बात !</title>
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		<pubDate>Thu, 07 Mar 2019 10:46:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में सत्ता का वनवास भोग रही समाजवादी पार्टी (सपा) एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अब गठबंधन की राजनीति के सहारे सत्ता के पायदान पर पहुंचना चाहती है। यही वजह है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के होने वाले विधानसभा चुनाव के गठबंधन के बाद सपा और बसपा ने मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में ... <a title="महागठबंधन: कांग्रेस ने की सीटो पर बड़ी डिमांड, क्या माया-अखिलेश मानेंगे बात !" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/maha-coalition-congress-demanded-a-big-demand-on-sito-whether-maya-akhilesh-would-agree-news/" aria-label="Read more about महागठबंधन: कांग्रेस ने की सीटो पर बड़ी डिमांड, क्या माया-अखिलेश मानेंगे बात !">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="secArticleTitle">उत्तर प्रदेश में सत्ता का वनवास भोग रही समाजवादी पार्टी (सपा) एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अब गठबंधन की राजनीति के सहारे सत्ता के पायदान पर पहुंचना चाहती है। यही वजह है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के होने वाले विधानसभा चुनाव के गठबंधन के बाद सपा और बसपा ने मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में भी लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है</p>
<p>एक दशक पहले मध्यप्रदेश में 8 सीटें जीतकर तीसरे मोर्चे के रूप में स्थान बनाने वाली सपा विगत 10 सालों में अपना वजूद धीरे-धीरे खोती गई। हालांकि इसके लिए प्रदेश स्तर के साथ राष्ट्रीय संगठन भी जिम्मेदार कहा जा सकता है। एक ही व्यक्ति पर मुलायम के संगठनात्मक भरोसे ने पार्टी की नैया ही डुबो दी। अखिलेश के पार्टी की कमान सभालने के बाद गत वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में डूबते को तिनके का सहारा की तर्ज पर सपा को बुंदेलखंड क्षेत्र से एक सीट पर सफलता मिल पाई है। इस सफलता ने आने वाले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के लिए एक उम्मीद जगा दी है। राज्य के बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र में पार्टी को मिले मतों और बसपा को प्राप्त मतों के सहारे अब सपा लोकसभा में फतह की बाट जोह रही है। यही वजह है कि अखिलेश ने आनन-फानन में लोकसभा चुनाव के लिए मप्र में बसपा से 3 सीट पर समझौता कर अन्य पर उसे समर्थन का ऐलान कर दिया।</p>
<p>बताते चले कांग्रेस को अलग-थलग कर गठबंधन का ऐलान करने वाले सपा-बसपा ने नए सिरे से राजनीतिक समीकरण बनाने में जुट गए है. सपा-बसपा ने गठबंधन में पहले आरएलडी को शामिल किया और अब कांग्रेस को हिस्सेदार बनाने की कवायद की जा रही है. माना जा रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को 15 सीटें मिल सकती हैं.</p>
<p>यूपी में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले बीजेपी के विजयरथ को रोकने के लिए सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस को भी साथ लाने में जुटे हैं. इस दिशा में तीनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत जारी है. कांग्रेस ने 20 सीटों की डिमांड रखी हैं, लेकिन गठबंधन ने उन्हें पहले 9 सीटें देने का ऑफर रखा था, जिसे पार्टी ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद कांग्रेस ने 15 प्लस 2 सीटों की डिमांड रखी. दो सीटें रायबरेली और अमेठी हैं. इस तरह कांग्रेस 17 सीटें मांग रही हैं.</p>
<p>हालांकि, सूत्रों के मुताबिक 13 प्लस 2 सीटों पर कांग्रेस के साथ समझौता होने के कगार पर है. इस तरह कांग्रेस के खाते में कुल 15 सीटें आ सकती हैं. कांग्रेस के लिए सपा अपने कोटे से 7 और बसपा अपने कोटे से 6 सीटें देंगी. जबकि, बाकी दो सीटों पर पहले ही सपा-बसपा ने कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का ऐलान कर रखा था.</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद ही आजतक से बातचीत में बताया है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की अब संभावना नहीं लगती है, लेकिन यूपी में हमारी बातचीत जारी है और सही दिशा में है. इसका मतलब साफ है कि सूबे में नए सिरे से गठबंधन बन रहा है.</p>
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<div id="mainPlayerDiv-364482_1" class="zg-mainContainer">एयर स्ट्राइक के बाद उत्तर प्रदेश में तीनों दलों की राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई हैं, जिसके चलते नए सिरे से गठबंधन का फैसला किया गया है. इसी मद्देनजर कांग्रेस की महासचिव और पूर्वांचल की प्रभारी प्रियंका गांधी ने सूबे का दौरा टाल हुआ है.</div>
</div>
</div>
<p>बता दें कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मात देने के लिए सपा-बसपा ने गठबंधन का ऐलान किया था. सूबे की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 38 बसपा और 37 सीटों पर सपा ने चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. जबकि तीन सीटें आरएलडी को देने का ऐलान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के साथ ज्वाइंट प्रेस कॉफ्रेंस करके ऐलान किया है.</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अखिलेश से हुई जयंत चौधरी की मुलाकात, RLD की सीटो पर सस्पेंस बरक़रार&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/akhilesh-meets-jayant-chaudhary-suspends-rld-on-sitas-bakarar-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Jan 2019 09:12:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ । राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के महासचिव और पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने बुधवार को राजधानी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भेंट की। उन्होंने अखिलेश से गठबंधन में अपने दल की सीटों को बढ़ाने का आग्रह किया है। अखिलेश यादव से करीब एक घंटे तक बातचीत करने के बाद जयंत ने बताया ... <a title="अखिलेश से हुई जयंत चौधरी की मुलाकात, RLD की सीटो पर सस्पेंस बरक़रार&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/akhilesh-meets-jayant-chaudhary-suspends-rld-on-sitas-bakarar-news/" aria-label="Read more about अखिलेश से हुई जयंत चौधरी की मुलाकात, RLD की सीटो पर सस्पेंस बरक़रार&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ । राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के महासचिव और पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने बुधवार को राजधानी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भेंट की। उन्होंने अखिलेश से गठबंधन में अपने दल की सीटों को बढ़ाने का आग्रह किया है। अखिलेश यादव से करीब एक घंटे तक बातचीत करने के बाद जयंत ने बताया कि गठबंधन में उनके दल को लेकर लचीला रुख अपनाया गया है। बातचीत बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है। सीटों के बंटवारे को लेकर कोई पेच नहीं है। उन्होंने साफ किया कि भाजपा के तानाशाही रवैया के खिलाफ विपक्ष एकजुट है और भाजपा को हर हाल में हराया जाएगा।</p>
<p>सपा कार्यालय में हुई बातचीत को उन्होंने सकारात्मक बताया और कहा कि अखिलेश का रुख सहयोगात्मक रहा है। गौरतलब है कि बीती 12 जनवरी को अखिलेश यादव और मायावती गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर चुके हैं। इसके तहत उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटों में से 38-38 सीटें दोनों दलों ने आपस में बांटी हैं। वहीं अमेठी और रायबरेली संसदीय सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी गई है, जबकि दो सीटें अन्य साथियों को देने का फैसला मायावती और अखिलेश ने किया है। माना जा रहा है कि यह दो सीटें रालोद के खाते में दी गई हैं, लेकिन रालोद चाहता है कि उसके लिए सीटों की संख्या और बढ़ाई जाएं। इसी सिलसिले में जयंत चौधरी ने आज अखिलेश यादव से मुलाकात की।</p>
<p><strong>यह है सीटों का फॉर्म्युला? </strong><br />
आरएलडी की तरफ से पहले छह सीटों की मांग रखी गई थी लेकिन अब चार सीटों पर बात बन सकती है। आरएलडी से जुड़े भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक पार्टी को गठबंधन में चार सीटें मिलना लगभग तय है। एसपी गठबंधन के तहत बागपत, मुजफ्फरनगर मथुरा और हाथरस की सीट आरएलडी को देने के पक्ष में है। लेकिन इनमें से एक मथुरा सीट पर एसपी के प्रत्याशी को आरएलडी के सिंबल पर लड़ाया जाएगा।</p>
<p>बताया जा रहा है कि यह प्रत्याशी अखिलेश के करीबी और जाट नेता संजय लाठर हैं। गठबंधन और सीटों को लेकर आज ही लखनऊ में ऐलान होने की उम्मीद जताई जा रही है। आरएलडी सूत्रों के मुताबिक बागपत की परंपरागत सीट पर आरएलडी के युवा चेहरे जयंत चौधरी प्रत्याशी होंगे। वहीं पार्टी सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह मुजफ्फरनगर से ताल ठोकेंगे। इसके साथ ही हाथरस से आरएलडी ने प्रत्याशी का नाम भी लगभग तय कर लिया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>मायावती ने अपने 63वें सालगिरह पर कार्यकर्ताओं से मांगा जीत का तोहफा, दागे कांग्रेस पर कई सवाल&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/bsp-chief-mayawati-attacks-on-congress-and-bjp-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Jan 2019 07:21:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[2019 election]]></category>
		<category><![CDATA[Akhilesh Yadav]]></category>
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					<description><![CDATA[योगेश श्रीवास्तव  भाजपा के बजाए माया के निशाने पर रही कांग्रेस लखनऊ। बसपा की राष्टï्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने अपने 63वें सालगिरह के मौके पर अपनी पार्टी के साथ ही सपा कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव में जीत का तोहफा मांगा है। अपने सालगिरह के मौके पर पार्टी मु यालय में बुलायी गयी प्रेसकांफ्रेस में उन्होंने ... <a title="मायावती ने अपने 63वें सालगिरह पर कार्यकर्ताओं से मांगा जीत का तोहफा, दागे कांग्रेस पर कई सवाल&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bsp-chief-mayawati-attacks-on-congress-and-bjp-news/" aria-label="Read more about मायावती ने अपने 63वें सालगिरह पर कार्यकर्ताओं से मांगा जीत का तोहफा, दागे कांग्रेस पर कई सवाल&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>योगेश श्रीवास्तव </strong></p>
<p><strong>भाजपा के बजाए माया के निशाने पर रही कांग्रेस</strong></p>
<p>लखनऊ। बसपा की राष्टï्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने अपने 63वें सालगिरह के मौके पर अपनी पार्टी के साथ ही सपा कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव में जीत का तोहफा मांगा है। अपने सालगिरह के मौके पर पार्टी मु यालय में बुलायी गयी प्रेसकांफ्रेस में उन्होंने कहा कि इस बार का उनका जन्मदिन इसलिए भी खास है कि इस साल देश में लोकसभा के आम चुनाव होने वाले है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सपा-बसपा कार्यकर्ताओं को गिलेशिकवे भुलाकर चुनाव की तैयारियों में जुटना चाहिए। अपनी प्रेसकांफ्रेस के दौरान आज उन्होंने भाजपा के बजाय कांग्रेस पर ज्यादा निशाना साधा। दो माह पहले मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बनी कांग्रेस सरकारों को विफल बताते हुए कहा कि चुनाव के दौरान कांग्रेस ने घोषणापत्र में वादे किए थे उन्हे पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।</p>
<p><strong>कर्जमाफी पर माया का कांग्रेस पर निशाना </strong></p>
<p>बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) चीफ मायावती ने अपने 63वें जन्मदिन पर बीजेपी और कांग्रेस पर ताबड़तोड़ हमला बोला। उन्होंने एसपी-बीएसपी के कार्यकर्ताओं से सारे पुराने गिले-शिकवे भुलाते हुए साथ मिलकर काम करने की अपील की। साथ ही बीएसपी चीफ ने कांग्रेस को किसानों के कर्जमाफी के मुद्दे पर घेरा। कांग्रेस पर सिलसिलेवार हमले करते हुए माया ने कहा कि कांग्रेस ऐंड कंपनी को सबक सिखाने की जरूरत है।</p>
<p>मायावती ने कहा, &#8216;हाल ही में 12 जनवरी को हमारी पार्टी ने समाजवादी पार्टी (एसपी) के साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनावलड़ने का फैसला किया है। इससे बीजेपी की नींद उड़ी हुई है। देश का सबसे बड़ा राज्य होने के लिहाज से यूपी काफी मायने रखता है। उत्तर प्रदेश ही तय करता है कि केंद्र में किसकी सरकार बनेगी और अगला प्रधानमंत्री कौन होगा।&#8217;</p>
<p><strong>पुराने गिले शिकवे भुलाने की अपील</strong><br />
उन्होंने इस मौके पर बीएसपी और एसपी के लोगों से अपील की कि वे इस चुनाव में अपनी पार्टी और देशहित में अपने पुराने गिले शिकवे और स्वार्थ की राजनीति को भुलाकर भुलाकर एक साथ काम करे और यूपी व बाकी राज्यों में हमारे गठबंधन को वोट देकर जिताए, यही मेरे लिए जन्मदिन का तोहफा होगा।</p>
<p>मायावती ने इस मौके पर कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों से बीजेपी ही नहीं कांग्रेस को भी सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा, &#8216;लोकलुभावन और झूठे वादों करके किसी भी पार्टी की दाल ज्यादा गलने वाली नहीं है। तीन राज्यों में बनी कांग्रेस की सरकार की कर्जमाफी की योजना पर भी अब उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी की नई सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की सीमा 31 मार्च 2018 क्यों निर्धारित की जबकि उनकी सरकार 17 दिसंबर 2018 को चुनी गई है।&#8217;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">BSP Chief Mayawati in Lucknow: We have always worked for the poor and the down trodden. The government should give 100% farm loan waiver else farmer suicides will continue. A strong farm loan waiver policy should be made. <a href="https://t.co/nRvA8K81SD">pic.twitter.com/nRvA8K81SD</a></p>
<p>&mdash; ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) <a href="https://twitter.com/ANINewsUP/status/1085051123327819777?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">January 15, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>&#8216;कांग्रेस ने किसानों को धोखा दिया&#8217;</strong><br />
वहीं उन्होंने किसानों के कर्जमाफी पर कहा, &#8216;कांग्रेस सरकार ने किसानों को धोखा दिया है। उन्होंने सरकार बनने के बाद किसानों के सिर्फ दो लाख रुपये के कर्ज ही माफ किए जाने की घोषणा हुई है। किसान बैंक से अधिक साहूकार से कर्ज लेते हैं इसलिए सरकार को बैंक के साथ-साथ इन प्रकार के कर्ज को माफ करने के लिए विचार करना चाहिए नहीं तो किसान का कर्ज कभी माफ नहीं हो पाएगा और किसान हमेशा पिछड़ा और दबा रहेगा। इस देश में 70 फीसदी व्यक्ति किसान है।&#8217;</p>
<p>मायावती ने यह भी कहा कि किसानों की समस्या की निपटारे के लिए स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करना चाहिए। मायावती ने कहा, &#8216;आज देश में पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दलित और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा पीड़ित है। इन सभी लोगों का हित इन पार्टी (कांग्रेस-बीएसपी) की सरकारों में न पहले सुनिश्तित रहा है और न आगे रहने वाला है।&#8217;</p>
<p><strong>&#8216;मुस्लिमों को मिले अलग से आरक्षण&#8217;</strong><br />
उन्होंने कहा, &#8216;हमारी पार्टी धन्नासेठों की गुलामी नहीं करती है। बीएसपी का इतिहास इस मामले में काफी साफ सुथरा है। केंद्र को रक्षा सौदे के मामले में भी विपक्ष को अपने विश्वास में लेना चाहिए। मायावती ने सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के फैसले का स्वागत किया। साथ ही यह भी कहा कि मुस्लिमों के लिए आर्थिक आधार पर अलग से आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा, &#8216;देश में आजादी के समय सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की संख्या 33 फीसदी थी जो कि अब 2-3 फीसदी ही रह गई है।&#8217;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जाते जाते साल 2018 कांग्रेस को दे गया संजीवनी, भाजपा को मिला करारा झटका&#8230;.</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Dec 2018 06:08:50 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[सोनिया गांधी]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए गुजरता साल उसकी उम्मीदों के विपरीत रहा। उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि 2019 की दहलीज पर पहुंचने से पहले उसे भारी नुकसान के दौर से गुजरना होगा। इस साल की शुरुआत में ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे को अमलीजामा पहनाने निकली भाजपा 2018 ... <a title="जाते जाते साल 2018 कांग्रेस को दे गया संजीवनी, भाजपा को मिला करारा झटका&#8230;." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/sanjeevani-has-been-given-to-congress-2018-as-the-party-goes-on-news/" aria-label="Read more about जाते जाते साल 2018 कांग्रेस को दे गया संजीवनी, भाजपा को मिला करारा झटका&#8230;.">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://new-img.patrika.com/upload/2018/09/08/modi-rahul1_3380497_835x547-m.jpg" alt="Image result for à¤­à¤¾à¤à¤ªà¤¾ à¤à¤¾à¤à¤à¥à¤°à¥à¤¸ à¤®à¤¿à¤¶à¤¨ 2019" /></p>
<p>नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए गुजरता साल उसकी उम्मीदों के विपरीत रहा। उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि 2019 की दहलीज पर पहुंचने से पहले उसे भारी नुकसान के दौर से गुजरना होगा। इस साल की शुरुआत में ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे को अमलीजामा पहनाने निकली भाजपा 2018 के आखिर तक आते-आते बेदम होने लगी। उसके विजय रथ के पहिए थम गए। डेढ़ दशक से अजेय बने सत्ता के दुर्गों से भी उसे बेदखल होना पड़ा। साल 2018 की शुरुआत में विपक्षी दलों के नेता भी दबी जुबान में यह स्वीकार करने लगे थे कि 2019 की चुनावी जंग के विजेता भाजपा और नरेन्द्र मोदी ही होंगे।</p>
<p>किंतु साल के आखिर में जिस तरह से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सत्ता से भाजपा को बेदखल होना पड़ा है, उससे अब विरोधी तो दूर, भाजपा के सहयोगी दल भी 2019 के आम चुनाव में उसकी अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जीत को लेकर आशंकित हो गए हैं। सहयोगी दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता को लेकर सवाल खड़े करने से नही चूक रहे। उनकी ये आशंका बेवजह नही है, क्योंकि जनसंघ के जमाने से ही हिन्दी पट्टी के राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान उसका गढ़ रहे हैं और इन राज्यों में पार्टी की हार ने उसे 2019 के लिए नई रणनीति का खाका तैयार करने पर विवश कर दिया है।</p>
<p>हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि भाजपा के ‘चाणक्य’ अमित शाह और लोकप्रियता के शिखर पर सवार नरेन्द्र मोदी का असर फीका पड़ने लगा है। क्योंकि चुनाव दर चुनाव पटखनी खाती कांग्रेस तीन राज्यों में मिली जीत के जश्न की खुमारी से जब तक निकलेगी तब तक मोदी और शाह की जोड़ी 2019 के लिए नई पटकथा तैयार कर चुकी होगी। बहरहाल, साल की शुरुआत में भाजपा ने शानदार आगाज करते हुए त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में फरवरी में संपन्न विधानसभा चुनाव में एक नया मुकाम हासिल किया। दशकों से वाममोर्चा शासित त्रिपुरा में जहां पार्टी ने अपने बलबूते सत्ता हासिल की वहीं मेघालय और नगालैंड में सहयोगी दल के रूप में सत्ता तक पहुंची। मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता के करीब तो पहुंच गई किंतु कांग्रेस व जनता दल सेक्युलर के गठबंधन के कारण वह सरकार बनाने से वंचित रह गई। इसके बाद साल के आखिर में हुए पांच राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना व मिजोरम) में उसे हार का सामना करना पड़ा। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जहां उसे सत्ता से बेदखल होना पड़ा वहीं तेलंगाना में वह सिमटकर एक सीट पर आ गई।</p>
<p>कुल मिलाकर इस साल नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें त्रिपुरा में भाजपा ने परचम लहराया तो तीन राज्यों की सत्ता से बेदखल होना पड़ा। पार्टी को आठ राज्यों में पराजय का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही गुजरते साल में कुल 13 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, जिनमें से नौ सीटों पर (2014) भाजपा का कब्जा था। इन नौ में से सात सीटों पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा और दो सीटें ही वह बचा पाई और एक सीट (नागालैंड) पर उसके द्वारा समर्थित नगालैंड डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (एनडीपीपी) प्रत्याशी की जीत हुई।</p>
<p>शेष सभी स्थानों पर विपक्ष ने भाजपा को पटखनी दे दी। वरिष्ठ पत्रकार अजयभान सिंह के मुताबिक राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम भाजपा के लिए एक दुःस्वप्न से कम नही है। अब जिस तरह से मीडिया में इन चुनावों को 2019 के आम चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, वह एक किस्म का अतिउत्साह है। दरअसल 15 साल से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा निर्बाध सत्ता सुख भोग रही थी और कांग्रेस विपक्ष के रूप में पूरी तरह से लुंजपुंज दिख रही थी। इस दौर में भाजपा के मंत्री, विधायक और बढ़े क्षत्रप का अपने जमीनी कार्यकर्ताओं से लगातार दूर होते गए और उनके साथ ही अफसरों की निरंकुशता लगातार बढ़ती गई।</p>
<p>जाहिर है जमीन से कटे सत्ताधीश और स्वेच्छाचारी नौकरशाही से न केवल आम जनता बल्कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता भी बुरी तरह खार खाए बैठे थे। यह अप्रत्याशित परिणाम उसी गुस्से का प्रतीक है। इसके अलावा पिछले पांच साल में कांग्रेस और वाम दलों ने जिस तरह एक सोची समझी रणनीति के तहत वृहत्तर हिन्दू समाज के बीच जातिगत मसलों को लेकर जो टकराव खड़ा किया, भाजपा उसे भांपने में विफल रही और उसका शिकार हो गई। नतीजा सवर्णों और पिछड़ों के गुस्से के रूप में सामने आया। अजयभान सिंह का कहना है कि आम तौर पर लोकसभा चुनाव का विमर्श करीब साल डेढ़ साल पहले से और चुनाव दर चुनाव तैयार होने लगता है लेकिन किसी भी सूबाई चुनाव का उसका सेमीफाइनल या कसौटी मान लेना उचित नहीं है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images.abplive.in/index.php?url=http://static.abplive.in/wp-content/uploads/sites/2/2018/05/09095155/BJP.jpg&amp;dimension=0:480&amp;action=resize&amp;convertTo=jpeg" alt="Related image" /></p>
<p>राज्यों के चुनाव विशुद्ध स्थानीय मुद्दों और जनसामान्य की रोजमर्रा की जरूरतों को केंद्र में रखकर लड़े जाते हैं जबकि लोकसभा चुनाव उसी जनसामान्य की वृहत्तर महत्वाकांक्षाओं का फलक होता है। ऐसा पिछले 20 वर्षों में अगर हम हिन्दी भाषी क्षेत्रों में लोकसभा और विधानसभा चुनाव की जो परिपाटी बनी है, उसका बारीकी से अध्ययन करें तो साफ दिखेगा कि जो जनता 1998 में दिग्विजय सिंह और अशोक गहलोत को सत्ता का ताज पहनाती है वो कुछ ही महीने बाद अपनी पूरी सामर्थ्य से दिल्ली के तख्त पर अटल बिहारी वाजपेयी को बिठाती है। यानी जनता को बखूबी पता है कि उसे किस पार्टी को सूबे में बिठाना है और किस को देश की बागडोर सौंपनी है।</p>
<p>मोदी का अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) कनेक्शन अभी जिन्दा है और राजकाज की उनकी जुदा, ताकवर और निर्णायक शैली के प्रशंसकों की अभी भी कोई कमी नही आई है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में पराजय की बुनियाद पर मोदी फैक्टर को नाकाम समझकर और कांग्रेस की जीत के दिवा स्वप्न देखना नासमझी होगी। अभी कांग्रेस को लंबा सफर तय करना होगा और लोकसभा चुनाव के लिए एक आक्रामक, टिकाऊ और सर्वग्राह्य विमर्श सामने लाना होगा तभी मोदी जैसी पहाड़ सी चुनौती से पार पाया जा सकता है।</p>
<p>बहरहाल इस चुनावी झटके से तो एक बात तय है कि पार्टी मुद्दों, प्रत्याशियों, कार्यक्रम, रणनीति और सत्ताविरोधी रुझान को समझने में नाकाम रही और मुद्दों, प्रत्याशियों, कार्यक्रमों और रणनीति का मारक मेल तैयार करने में चूक गई। इसे अगर पार्टी सबक के रूप में लेती है और अपनी चुनावी समझ में इन नतीजों के मूल कारणों को शामिल करती है तो निश्चय ही उसे 2019 के बेहद रोचक, तनाव भरे और भीषण चुनावी मुकाबले में मदद मिलेगी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://new-img.patrika.com/upload/2018/05/11/66666666666_2820855_835x547-m.jpg" alt="Image result for à¤­à¤¾à¤à¤ªà¤¾ à¤à¤¾à¤à¤à¥à¤°à¥à¤¸ à¤®à¤¿à¤¶à¤¨ 2019" /></p>
<h3 class="storyheadline">कांग्रेस को बुलंदी पर पहुंचा गया 2018 का चुनावी साल</h3>
<p class="storyImg"> पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से एक के बाद एक किले फतह कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जाते वर्ष 2018 ने जहां करारे झटके दिये वहीं तीन प्रमुख राज्यों में कांग्रेस की वापसी कर उसे संजीवनी दे गया।</p>
<p>इस वर्ष हुए चुनावों पर नजर डाले तो पूर्वार्ध में पूर्वोत्तर राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी पिछले साढ़े चार साल से जीत का सिलसिला बरकरार रखा लेकिन उसके बाद हुए लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में भाजपा हार की ढलान पर फिसलनी शुरू हुई और वर्षांत में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में उससे करारा झटका लगा और तीन प्रमुख राज्य उसके हाथ से निकल गये। पिछले साढ़े चार वर्ष में उसे पहली बार कांग्रेस के साथ सीधी लड़ाई में हार का सामना करना पड़ा। इन राज्यों में कांग्रेस काे जीत की संजीवनी मिली।</p>
<p>इस साल त्रिपुरा में भाजपा ने वामपंथी किले को ढहाकर सरकार बनायी। नागालैंड में नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ गठबंधन सरकार बनायी तथा मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी को समर्थन दिया, लेकिन समय-दर-समय विभिन्न राज्यों में लोकसभा और विधानसभा की चुनावी रण में कांग्रेस के तीरों से वह पस्त होती गई ।</p>
<p>इस वर्ष विभिन्न राज्यों की 18 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए , जिनमें कांग्रेस ने सबसे अधिक आठ सीटों पर जीत हासिल की जबकि भाजपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) , तृणमूल कांग्रेस के खाते में दो-दो सीटें गई तथा राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी (सपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और जनता दल (सेक्युलर) ने एक-एक सीट जीती ।</p>
<p>कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनावों में शानकोट (पंजाब) , पलुस कडेगांव (महाराष्ट्र), आमपाती (मेघालय), आरके नगर (तमिलनाडु), जयनगर कर्नाटक), जामखांडी (कर्नाटक), मांडलगढ़ (राजस्थान) और कोलिविड़ा (झारखंड) सीटों से चुनाव जीता। भाजपा को दो सीट थराली (उत्तराखंड) और जसदन (गुजरात) , झामुमो को दो सीटगोमिया एवं मिल्ली (झारखंड) तथा तृणमूल कांग्रेस को दो सीट महेशतला और नोआपाड़ा (प. बंगाल) मिली , जबकि सपा ने नूरपुर (उत्तर प्रदेश) , माकपा ने चेंगानुर (केरल), राजद ने जोकीहाट (बिहार) और जद(एस) ने रामनगर (कर्नाटक) सीट जीती ।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>मिशन 2019 : जिताऊ उम्मीदवार मायावती की पसन्द, सूची फाइनल</title>
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		<pubDate>Sun, 23 Sep 2018 12:32:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ. उत्तर प्रदेश में भले ही महागठबंधन की बात चल रही है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। मायावती के निर्देश पर पार्टी के जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश लगभग पूरी हो गई है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक लोकसभा सीटों के लिये प्रत्याशियों के नाम फाइनल किये जा सकते ... <a title="मिशन 2019 : जिताऊ उम्मीदवार मायावती की पसन्द, सूची फाइनल" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mayawati-may-announce-bsp-candidate-list-in-mid-october-news/" aria-label="Read more about मिशन 2019 : जिताऊ उम्मीदवार मायावती की पसन्द, सूची फाइनल">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ. उत्तर प्रदेश में भले ही महागठबंधन की बात चल रही है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। मायावती के निर्देश पर पार्टी के जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश लगभग पूरी हो गई है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक लोकसभा सीटों के लिये प्रत्याशियों के नाम फाइनल किये जा सकते हैं। करीब तीन महीने पहले प्रत्याशियों की तलाश का जिम्मा पार्टी के सभी जोनल प्रमुखों को सौंपा गया था, जो काम लगभग पूरा हो चुका है। अब सिर्फ मायावती का ओके आना बाकी है।</p>
<p>पार्टी सूत्रों की मानें तो यूपी की तकरीबन 40-50 सीटों पर एक-एक या दो-दो प्रत्याशी सेलेक्ट कर लिये गये हैं, जिनके नाम अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक अधिकारिक तौर पर घोषित किये जा सकते हैं। जोनल प्रमुखों ने संभावित प्रत्याशियों के नाम उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के फीडबैक के आधार पर चुने हैं। करीब पिछले तीन महीने से बसपा पदाधिकारी जहां बूथ और सेक्टर लेवल पर पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटे थे, वहीं जिताऊ प्रत्याशियों की भी तलाश की जा रही थी।</p>
<p><strong>महागठबंधन हुआ तो&#8230;</strong></p>
<p>पार्टी सूत्रों का कहना है कि सितंबर के शुरुआत में ही अकबरपुर, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया और हमीरपुर जैसी कई सीटों पर प्रत्याशियों का के नाम सिलेक्ट किये जा चुके थे, मायावती की मुहर के बाद अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक इन्हें सार्वजनिक कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि अगर महागठबंधन हुआ तो बसपा की कोशिश इन्हीं सिलेक्टेड कैंडिडेट को चुनावी समर में उतारने की होगी।</p>
<p><strong>मायावती ने अभी नहीं खोले पत्ते</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में भले ही सपा-बसपा, कांग्रेस और रालोद के महागठबंधन की बात की जा रही हो, लेकिन मायावती का रुख क्या होगा, अभी स्पष्ट नहीं है। एक तरफ वह सपा से गठबंधन की बात तो कर रही हैं, लेकिन दूसरी ओर सम्मानजक सीटों की डिमांड कर रही हैं। सम्मानजनक सीटों का उनका पैमाना क्या है, वह अभी पत्ते नहीं खोल रही हैं। इसके अलावा हाल ही में बसपा ने आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को धता बताते हुए अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन कर लिया। मध्य प्रदेश में वह अकेले सभी 232 सीटों पर लड़ने की बात कह रही हैं। मायावती के इस कदम को बीजेपी से मुकाबले को विपक्षी एकता पर बड़ा झटका माना जा रहा है। फिलहाल यूपी में महागठबंधन होगा या नहीं भविष्य के गर्त में है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी एकता का पेंच सीटों के बंटवारे पर फंसा है।</p>
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		<title>यूपी में BJP को हराने के लिये इन पार्टियों ने किया महागठबंधन, सीटें हुईं तय  </title>
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		<pubDate>Tue, 31 Jul 2018 09:37:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल : देश के तीन बड़े राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव चुनावी सरगर्मिया तेज हो गई। बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दल आपस में एक होते दिख रहे हैं। फिलहाल इन तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। इन राज्यों में सीधे तौर पर बीजेपी और कांग्रेस की टक्कर होने वाली ... <a title="यूपी में BJP को हराने के लिये इन पार्टियों ने किया महागठबंधन, सीटें हुईं तय  " class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/coalition-between-congress-and-mayawati-news/" aria-label="Read more about यूपी में BJP को हराने के लिये इन पार्टियों ने किया महागठबंधन, सीटें हुईं तय  ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल : </strong>देश के तीन बड़े राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव चुनावी सरगर्मिया तेज हो गई। बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दल आपस में एक होते दिख रहे हैं। फिलहाल इन तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। इन राज्यों में सीधे तौर पर बीजेपी और कांग्रेस की टक्कर होने वाली है। कांग्रेस चुनाव में जाने से पहले क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन करना चाहती है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस और मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन की खबर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आने वाले दिनों में इसकी घोषणा कर सकते हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://static.punjabkesari.in/multimedia/18_58_570099070448896-congressbsp08.01.16-ll.jpg" alt="PunjabKesari" /></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार दोनों ही पार्टियों में 60:40 फॉर्मूला के तहत समझौता हुआ है। सूत्रों के मुताबिक मायावती चाहती हैं कि अगर कांग्रेस-बीएसपी की सरकार बनती है तो उनकी पार्टी के चार नेताओं को मंत्री बनाया जाए। इसके अलावा एक डिप्टी सीएम का पद भी उनकी पार्टी के नेता को मिले।</p>
<p><img decoding="async" src="https://static.punjabkesari.in/multimedia/18_59_1042590701439024de2af0395a4b2793436593434-ll.jpg" alt="PunjabKesari" /></p>
<p>गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने कुछ दिनों पहले गठबंधन को लेकर दिल्ली में मायावती से मुलाकात की थी। उसके बाद से गठबंधन की खबरें राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बन रही है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://static.punjabkesari.in/multimedia/18_59_311115070kamal-nath%E2%80%99s-appointment-balancing-act-in-faction-ridden-state-mp-cong-leaders-620x320-ll.jpg" alt="PunjabKesari" /></p>
<p>बता दें कि मध्य प्रदेश में बसपा से गठबंधन करके कांग्रेस दलित वोट बैंक को अपने पक्ष में करना चाहती है। वहीं एक दशक से भी ज्यादा समय से शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर बैठे हुए है। कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि शिवराज सरकार के खिलाफ राज्य में एंटी इनकंबेंसी है और मध्य प्रदेश के बड़े नेता बिना किसी मतभेद के अगर एक साथ चुनाव में जनता के बीच जाते हैं तो कांग्रेस को जीत जरूर मिलेगी। हालांकि कांग्रेस की आपसी फूट पर भी निर्धारित होता है कि वे कितनी कम हुई हैं। बहरहाल बीजेपी को शिकस्त देने के लिए कांग्रेस और बसपा एक हो रहे है।</p>
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