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	<title>Bhai Dooj &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>बरेली : भाई दूज पर बहन के घर गए भाई से नाराज़ ससुरालजनों ने दामाद को रॉड से पिटा, मुकदमा दर्ज़</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Nov 2023 11:17:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दैनिक भास्कर ब्यूरो , बरेली। आंवला थाना क्षेत्र में ससुराल में रह रहे दामाद पर ससुरालियों ने जानलेवा हमला दिया।  इस हमले में दामाद के सिर और शरीर पर कई गंभीर चोटें आई है। दामाद का आरोप है कि वह भैया दूज मनाने के घर अपने घर चला गया था इसी बात से उसके ससुराल ... <a title="बरेली : भाई दूज पर बहन के घर गए भाई से नाराज़ ससुरालजनों ने दामाद को रॉड से पिटा, मुकदमा दर्ज़" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bareilly-angry-in-laws-with-brother-who-went-to-sisters-house-on-bhai-dooj-beat-son-in-law-with-rods-case-registered-news-in-hindi/" aria-label="Read more about बरेली : भाई दूज पर बहन के घर गए भाई से नाराज़ ससुरालजनों ने दामाद को रॉड से पिटा, मुकदमा दर्ज़">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/IMG-20231117-WA0670.jpg" alt="" class="wp-image-422887" width="840" height="745" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/IMG-20231117-WA0670.jpg 777w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/IMG-20231117-WA0670-768x681.jpg 768w" sizes="(max-width: 840px) 100vw, 840px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दैनिक भास्कर ब्यूरो ,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बरेली।</strong> आंवला थाना क्षेत्र में ससुराल में रह रहे दामाद पर ससुरालियों ने जानलेवा हमला दिया।  इस हमले में दामाद के सिर और शरीर पर कई गंभीर चोटें आई है। दामाद का आरोप है कि वह भैया दूज मनाने के घर अपने घर चला गया था इसी बात से उसके ससुराल वाले आग बबूला हो गए और लाठी डंडे से उन पर जानलेवा हमला कर दिया। </p>



<p class="wp-block-paragraph">सूचना पर पहुंची पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी ससुरालजनों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने पीड़ित को बरेली के जिला अस्पताल के लिए इलाज के लिए भेज दिया है। मोहल्ला कच्चा कटरा निवासी कृष्ण ने दैनिक भास्कर को  बताया कि वह अपनी ससुराल मोहल्ला गौसिया चौक  कुछ समय से रह रहा  है। बुधवार को भैया दूज का पर्व मनाने के लिए अपने  घर गया था इससे ससुराल नाराज हो गए। लौटने पर उन्होंने विवाद खड़ा कर दिया।  सूचना मिलने पर उसकी दोनों बहने भी मौके पर आ गई। </p>



<p class="wp-block-paragraph">इस दौरान ससुरालियों ने उसकी दोनों  बहनों को बुरी तरह  पीटा , जिसमें एक बुरी तरह से चोटिल हो गई। आंवला में देर रात हुई घटना में घायल हुए  भाई बहनों को पुलिस ने इलाज के लिए सीएससी भेज दिया। बाद में सीएचसी के डॉक्टरों ने घायलों की हालत गंभीर देखते हुए बरेली के  जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया है। पीड़ित कृष्णा की तहरीर पर पुलिस ने पत्नी नीतू ,ससुर पप्पू, सास लीलावती और पत्नी के भाई सोनू पर रिपोर्ट दर्ज की है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">आंवला इंस्पेक्टर  ने बताया कि आंवला के कच्चा कटरा की घटना की संबंध में पति और पत्नी दोनों पक्षों की ओर से मारपीट का मामला दर्ज किया गया है। घायलों को जिला अस्पताल के लिए मेडिकल के लिए भेज दिया गया गया है। मामले में अग्रिम कार्रवाई जारी है।</p>



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		<title>लखीमपुर : बाज़ार में नहीं दिखा भाई दूज की मिठास बढ़ाने वाले चीनी के बने खिलौने</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Nov 2023 13:26:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दैनिक भास्कर ब्यूरो , बिजुआ खीरी। शहर व गाँव की बाजारों में दीवाली आते ही दुकानों पर चीनी के खिलौने सज जाते थे। चीनी के हाथी ,घोड़े जैसे कई खिलौने, लेकिन पिछले कई वर्षों से अब ये रौनक कम हो गई है। दीपावली एवं भाई दूज त्यौहार से पहले इस कारोबार को लेकर कारीगरों में ... <a title="लखीमपुर : बाज़ार में नहीं दिखा भाई दूज की मिठास बढ़ाने वाले चीनी के बने खिलौने" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/lakhimpur-toys-made-of-sugar-which-enhance-the-sweetness-of-bhai-dooj-were-not-seen-in-the-market-news-in-hindi/" aria-label="Read more about लखीमपुर : बाज़ार में नहीं दिखा भाई दूज की मिठास बढ़ाने वाले चीनी के बने खिलौने">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/e1c0e8e9-222f-4eec-879b-0c41fc351e1f.jpg" alt="" class="wp-image-422094" width="841" height="352" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दैनिक भास्कर ब्यूरो ,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बिजुआ खीरी।</strong> शहर व गाँव की बाजारों में दीवाली आते ही दुकानों पर चीनी के खिलौने सज जाते थे। चीनी के हाथी ,घोड़े जैसे कई खिलौने, लेकिन पिछले कई वर्षों से अब ये रौनक कम हो गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दीपावली एवं भाई दूज त्यौहार से पहले इस कारोबार को लेकर कारीगरों में उत्साह नजर आता था जो आज दिख नही रहा। महंगाई और के इस दौर में चीनी के खिलौने की बिक्री में खासा फर्क दिख रहा है। कई पीढ़ियों से चीनी के खिलौने के कारोबार से जुड़े मोहम्मद रफीक ने बताया कि चीनी के खिलौने के कारोबार में पहले से बहुत बड़ा फर्क आ गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कभी हम 40 कुंतल चीनी के खिलौने अकेले बनाते थे।आज 10 कुंतल चीनी के खिलौने पूरा परिवार मिलकर बना पाता है। पहले हम एक दिन में 4 कुंतल चीनी का माल तैयार करते थे, लेकिन अब 1 कुंतल चीनी का माल बन पाता है। पहले खिलौने बनाने वाले कारीगर आसानी से मिल जाते थे, आज कारीगर ढूंढ़ने से नही मिल पाते हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">महंगाई के दौर में मजदूरी भी निकालना मुश्किल हो जाता है। चीनी 42 रुपए किलो मिलती है, फिर इसे बनाने में खर्चा आता है, मार्केट में रेट वही 60 रुपए किलो का मिल पाता है। पहले चीनी के खिलौने ज्यादा बिकते थे, आज इसकी बिक्री कम होती है। चीनी के खिलौनों की मिठास से दीपावली पर्व मनाए जाने की परम्परा पौराणिक काल से चली आ रही है। आधुनिक जमाने के तौर-तरीको में आए बदलाव की वजह से बरसों से चली आ रही चीनी के खिलौने की परंपरा में बदलाव होता नजर आ रहा है। चीनी के खिलौने बनाने वाले कारीगरों पर इसका सीधा असर दिख रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">खिलौना बनाने वाले कारीगर सत्रोहन लाल गुप्ता ने बताया लोग पुरानी चीजें भूल गए हैं। डिब्बा की मिठाइयों के कारण चीनी के खिलौने से लोगों ने दूरी बना ली है। बड़े-बुजुर्ग दीपावली, करवाचौथ और अन्नकूट पूजन के लिए आज भी चीनी के खिलौनो खरीदना पसंद करते हैं। खील-बताशों के साथ चीनी के खिलौनों को दीपावली पूजन के प्रसाद में चढ़ाया जाता है और इसे शुद्ध माना जाता है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">पहले इसी प्रसाद को रिश्तेदारों और दोस्तों में बांटा जाता थी जिसकी जगह बाद में मिठाई और गिफ्ट्स ने ले ली।चीनी के खिलौनों का अपना जायका है। 10 किलो चीनी में 9 किलो खिलौने बनते हैं। इनमें हाथी, शेर, मीनार, मछली, बत्तख, मुर्गा, झोपड़ी, ताजमहल जैसी आकृतियां शामिल होती हैं। पहले चाशनी बनती है। फिर इसे लकड़ी के सांचों में डाल दिया जाता है। ठंडा होने पर सांचा खोल देते हैं तो तैयार खिलौना निकल आता है। खाने में यह काफी कुरकुरे होते हैं और चीनी के वजह से भरपूर मीठे भी।</p>



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		<title>दीपावली के बाद कब है भाई दूज, जानने के लिए पढ़े ये खबर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Nov 2023 07:32:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस बार दीपावली के दो दिन बाद भाई दूज रहेगी। वजह, अमावस्या का दो दिन होना। 12 को दिवाली मनेगी और अगले दिन सोमवती अमावस्या रहेगी। फिर गोवर्धन पूजा और 15 को भाई दूज रहेगी। इस तरह दीपावली उत्सव 5 की बजाय 6 दिनों का रहेगा। 10 नवंबर को दीपोत्सव की शुरुआत 4 राजयोग में ... <a title="दीपावली के बाद कब है भाई दूज, जानने के लिए पढ़े ये खबर" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/is-bhai-dooj-after-diwali-read-this-news-to-know-news-in-hindi/" aria-label="Read more about दीपावली के बाद कब है भाई दूज, जानने के लिए पढ़े ये खबर">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-118.png" alt="" class="wp-image-420156" width="843" height="631" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">इस बार दीपावली के दो दिन बाद भाई दूज रहेगी। वजह, अमावस्या का दो दिन होना। 12 को दिवाली मनेगी और अगले दिन सोमवती अमावस्या रहेगी। फिर गोवर्धन पूजा और 15 को भाई दूज रहेगी। इस तरह दीपावली उत्सव 5 की बजाय 6 दिनों का रहेगा। 10 नवंबर को दीपोत्सव की शुरुआत 4 राजयोग में हो रही है। जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलेगा। इस उत्सव में हर दिन अलग-अलग देवताओं का पूजन होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहला पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस को कुबेर पूजन से शुरू होगा और भाई दूज को मृत्यु के देवता यमराज के दीपदान तक चलेगा। ज्योतिषियों का कहना है कि धनतेरस 10 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन तेरस तिथि दोपहर करीब 12.35 पर शुरू होगी और अगली दोपहर 2 बजे तक रहेगी। रूप चतुर्दशी 11 को मनेगी। इस दिन चौदस तिथि दोपहर 2 बजे से शुरू होगी और अगली दोपहर 2.40 तक रहेगी।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-119.png" alt="" class="wp-image-420157" width="838" height="629" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-119.png 800w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-119-768x576.png 768w" sizes="auto, (max-width: 838px) 100vw, 838px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">12 नवंबर, रविवार को दीपावली मनेगी। दोपहर ढाई बजे बाद अमावस्या शुरू होगी जो सोमवार को दोपहर 3 बजे तक रहेगी। आधे दिन से ज्यादा समय तक अमावस होने के कारण 13 को गोवर्धन पूजा नहीं होगी बल्कि 14 को होगी। 15 को भाई दूज मनेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक तिथि दो दिन तक, ऐसा क्यों ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">अंग्रेजी कैंलेंडर की तारीखों और तिथियों में तालमेल नहीं बैठ पाने की वजह से कोई भी त्योहार दो दिन तक रहता है। ये तालमेल क्यों नहीं बन पाता है, इसे समझते हैं। चंद्रमा जब पृथ्वी के चक्कर लगाते हुए 12 डिग्री की दूरी तय करता है तो इसमें लगने वाले समय को तिथि कहते हैं। इस तरह आगे बढ़ते हुए एक चक्कर (360 डिग्री) पूरा करने में कुल 30 तिथियां बनती हैं। इनमें 15 शुक्ल पक्ष की और 15 कृष्ण पक्ष की होती हैं। पृथ्वी, सूर्य के चक्कर लगाती है, पृथ्वी का उपग्रह होने के कारण चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस ग्राफिक्स से समझें कि पृथ्वी के चक्कर लगाते हुए चंद्रमा कैसे 29.5 दिन में 360 डिग्री का सफर तय करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस एक चक्कर यानी लूनर साइकल पूरा करने में चंद्रमा को 29 दिन और 12 घंटे लगते हैं, लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर का एक महीना कभी 30 तो कभी 31 दिन का होता है। इस एक चक्कर यानी लूनर साइकल पूरा करने में चंद्रमा को 29 दिन और 12 घंटे लगते हैं, लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर का एक महीना कभी 30 तो कभी 31 दिन का होता है। इस कारण चांद्र मास और अंग्रेजी महीने में करीब 2 से ढाई दिन का अंतर हो जाता है। इसी वजह से अंग्रेजी तारीखों से तिथियों का तालमेल नहीं बैठ पाता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">धनतेरस, 10 नवंबर, शुक्रवार</p>



<p class="wp-block-paragraph">धन्वंतरि पूजन के साथ दीपदान की शुरुआत</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस दिन आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाएगी। इसी दिन से दीप जलाने की शुरुआत होगी और पांच दिनों तक जलाए जाएंगे। परंपरा के चलते इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और हर तरह की खरीदारी की जाएगी। माना जाता है इस दिन खरीदी चीजें अक्षय सुख और समृद्धि देने वाली होती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दीपावली, 12 नवंबर, रविवार</p>



<p class="wp-block-paragraph">महालक्ष्मी-गणेश और विष्णु पूजन</p>



<p class="wp-block-paragraph">अथर्ववेद में लिखा है कि जल, अन्न और सारे सुख देने वाली पृथ्वी माता को ही दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी के रूप में पूजते हैं। कार्तिक अमावस्या के अंधेरे को उजाले में बदलने के लिए दीपदान किया जाता है। अंधेरे से प्रकाश की तरफ जाने वाले सनातन धर्म में प्रदोष काल में यानी शाम के समय देवी लक्ष्मी के साथ गणपति, सरस्वती, कुबेर और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोमवती अमावस्या, 13 नवंबर, सोमवार</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्नान-दान और पितृ पूजन</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोमवार को सूर्योदय के वक्त अमावस्या तिथि होने से ये शुभ योग बनता है। इसे स्नान-दान का पर्व भी कहते हैं। इस संयोग में तीर्थ स्नान करने और जरूरतमंद लोगों को दान देने से अक्षय पुण्य मिलता है, यानी वो कभी खत्म नहीं होता। कार्तिक महीने की अमावस्या होने से ये पितरों की पूजा का भी पर्व रहेगा। जिसमें श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाने का जिक्र ग्रंथों में किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोवर्धन पूजा, 14 नवंबर, मंगलवार</p>



<p class="wp-block-paragraph">श्रीकृष्ण पूजन और अन्नकूट प्रसाद</p>



<p class="wp-block-paragraph">पुराणों की कथा के मुताबिक श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड तोड़ने और ब्रज के लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। इसके बाद गांव वालों ने श्रीकृष्ण को कई तरह के पकवान बनाकर खिलाए। तब से इस दिन श्रीकृष्ण के साथ गोवर्धन पूजा की जाती है। इसके बाद भगवान को 56 भोग लगाकर प्रसाद बांटते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाईदूज ,15 नवंबर, बुधवार</p>



<p class="wp-block-paragraph">यम और यमुना की तरह भाई-बहन का त्योहार</p>



<p class="wp-block-paragraph">भविष्य पुराण में लिखा है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर पर भोजन करने के लिए बुलाया था। ये ही वजह है कि आज भी कई लोग इस परंपरा के चलते बहन के घर खाना खाने जाते हैं। इसके बाद बहन यमराज से भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना करते हुए तिलक लगाती है।</p>
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