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	<title>Bhim Jayanti 2020 &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>जन्‍मदिवस पर विशेष : बाबा साहेब अंबेडकर की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो आप अभी तक नहीं जानते</title>
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		<pubDate>Mon, 13 Apr 2020 20:41:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के शिल्पकार के नाम से जाने जाते हैं। बाबा साहब का जन्म एक महार जाति में हुआ था लेकिन वे दलितों के नेता रूप में कार्यकर देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई। डॉ. भीमराव अंबेडकर महिला, मजदूर और दलितों पर हो रहे सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़कर उन्हें न्याय दिलाने ... <a title="जन्‍मदिवस पर विशेष : बाबा साहेब अंबेडकर की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो आप अभी तक नहीं जानते" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/special-on-birthday-some-things-related-to-the-life-of-babasaheb-ambedkar-that-you-do-not-know-yet-news/" aria-label="Read more about जन्‍मदिवस पर विशेष : बाबा साहेब अंबेडकर की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो आप अभी तक नहीं जानते">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63414" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/B.R.-Ambedkar-with-wife-Dr.-Savita-Ambedkar.jpg" alt="" width="1600" height="900" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/B.R.-Ambedkar-with-wife-Dr.-Savita-Ambedkar.jpg 1600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/B.R.-Ambedkar-with-wife-Dr.-Savita-Ambedkar-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/B.R.-Ambedkar-with-wife-Dr.-Savita-Ambedkar-1024x576.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/B.R.-Ambedkar-with-wife-Dr.-Savita-Ambedkar-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/B.R.-Ambedkar-with-wife-Dr.-Savita-Ambedkar-1536x864.jpg 1536w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/B.R.-Ambedkar-with-wife-Dr.-Savita-Ambedkar-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></div>
<div></div>
<div>भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के शिल्पकार के नाम से जाने जाते हैं। बाबा साहब का जन्म एक महार जाति में हुआ था लेकिन वे दलितों के नेता रूप में कार्यकर देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई। डॉ. भीमराव अंबेडकर महिला, मजदूर और दलितों पर हो रहे सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़कर उन्हें न्याय दिलाने के लिए सदा स्मरण किए जाएंगे। उन्होंने अपना पूरा जीवन बहुजनो को उनका अधिकार दिलाने में व्यतीत किया।</div>
<div></div>
<div>
<h3>डॉ भीमराव अंबेडकर के बारे में एेसी बातें जो आप भी नहीं जानते होंगे</h3>
</div>
<div>1. डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश के मऊ गांव में हुआ था।</div>
<div>2. बाबा साहब एक महार परिवार में जन्म लिया था, वे अपने माता-पिता के 14वें संतान थे</div>
<div>3. उनके पिता मऊ में भारतीय सेना के छावनी में कार्यरत थे</div>
<div>4. डॉ. अंबेडकर मेट्रिक पास कर बड़ौदा महराज की आर्थिक सहायता से एलिफिन्सटन्स कॉलेज से स्नातक पाया किया</div>
<div>5. 1915 में डॉ. अंबेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमएस पास किया</div>
<div>6. 1917 में अमेरिकी अर्थशास्त्री सेलिगमैन के मार्गदर्शन में कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधी पा्रप्त किया</div>
<div>7. 1917 में पीएचडी की अपाधी प्राप्त कर वे पहले एेसे भारतीय बने जिन्होंने विदेश जाकर अर्थशास्त्र में डॉक्टरेड की प्राप्त किया था</div>
<div>8. बाबा साहब 1926 में बंबई विधान सभा के सदस्य नामित किए गए</div>
<div>9. भारतीय संविधान के निर्माण में डॉ. अंबेडकर का प्रमुख योगदान रहा</div>
<div>10. 6 दिसंबर 1956 को गंभीर बीमारी के चलते उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया</div>
<div>11. 1990 में डॉ अबेडकर को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया</div>
<div>12. डॉ अबेडकर ही एक एेसे भारतीया है जिसकी पोटेट लेदन के संग्रहालय में कार्ल मार्कस के साथ लगी हुई है</div>
<div>13. डॉ अंबेडकर एक एेसे भारतीय है जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा बुलाए गए गोल मेज सम्मेलन में 3 बार भाग लिया था</div>
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		<title>एक महान योद्धा, नायक, विद्वान और समाजसेवी थे डॉ. भीमराव आंबेडकर, जानिए बाबा साहेब से जुड़ी ये 7 बातें</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/dr-bhimrao-ambedkar-was-a-great-warrior-hero-scholar-and-social-worker-know-these-7-things-related-to-baba-saheb-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2020 20:26:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
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		<category><![CDATA[अंबेडकर जयंती 2020]]></category>
		<category><![CDATA[डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर जयंती]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली:  Dr BR Ambedkar Jayanti 2020: भारतीय संविधान के रचयिता डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर (Dr Bhimrao Ambedkar) की जयंती हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है.  भारत समेत दुनिया भर में उनके जन्‍मोत्‍सव को अंबेडकर जयंती (Ambedkar Kayanti) के रूप में मनाया जाता है. बाबा साहेब के नाम से मशहूर भारत रत्‍न अंबेडकर जीवन ... <a title="एक महान योद्धा, नायक, विद्वान और समाजसेवी थे डॉ. भीमराव आंबेडकर, जानिए बाबा साहेब से जुड़ी ये 7 बातें" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/dr-bhimrao-ambedkar-was-a-great-warrior-hero-scholar-and-social-worker-know-these-7-things-related-to-baba-saheb-news/" aria-label="Read more about एक महान योद्धा, नायक, विद्वान और समाजसेवी थे डॉ. भीमराव आंबेडकर, जानिए बाबा साहेब से जुड़ी ये 7 बातें">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-63410" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/Ambedkar-696x392-1.png" alt="" width="865" height="487" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/Ambedkar-696x392-1.png 696w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/Ambedkar-696x392-1-300x169.png 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2020/04/Ambedkar-696x392-1-390x220.png 390w" sizes="(max-width: 865px) 100vw, 865px" /></p>
<p><b class="place_cont">नई दिल्ली:  </b>Dr BR Ambedkar Jayanti 2020: भारतीय संविधान के रचयिता डॉक्&#x200d;टर भीमराव अंबेडकर (Dr Bhimrao Ambedkar) की जयंती हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है.  भारत समेत दुनिया भर में उनके जन्&#x200d;मोत्&#x200d;सव को अंबेडकर जयंती (Ambedkar Kayanti) के रूप में मनाया जाता है. बाबा साहेब के नाम से मशहूर भारत रत्&#x200d;न अंबेडकर जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करते रहे. यही वजह है कि भीम जयंती (Bhim Jayanti) को भारत में &#8216;समानता दिवस&#8217; (Samanta Diws) और &#8216;ज्ञान दिवस&#8217; (Gyan Diwas) के रूप में मनाया जाता है.</p>
<p><strong> जानिए उनसे जुड़ी ये 7 बातें</strong></p>
<p><strong>1.</strong> डॉक्&#x200d;टर भीमराव अंबेडकर का जन्&#x200d;म 14 अप्रैल 1891 को मध्&#x200d;य प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था. हालांकि उनका परिवार मराठी था और मूल रूप से महाराष्&#x200d;ट्र के रत्&#x200d;नागिरी जिले के आंबडवे गांव से था. उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मां भीमाबाई थीं. अंबेडकर महार जाति के थे. इस जाति के लोगों को समाज में अछूत माना जाता था और उनके साथ भेदभाव किया जाता था. अंबेडकर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि थे लेकिन जातीय छुआछूत की वजह से उन्&#x200d;हें प्रारंभ&#x200d;िक श&#x200d;िक्षा लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. स्&#x200d;कूल में उनका उपनाम उनके गांव के नाम के आधार पर आंबडवेकर ल&#x200d;िखवाया गया था. स्&#x200d;कूल के एक टीचर को भीमराव से बड़ा लगाव था और उन्&#x200d;होंने उनके उपनाम आंबडवेकर को सरल करते हुए उसे अंबेडकर कर दिया.</p>
<p><strong>2.</strong> भीमराव अंबेडकर मुंबई की एल्&#x200d;फिंस्&#x200d;टन रोड पर स्थित गवर्नमेंट स्&#x200d;कूल के पहले अछूत छात्र बने. 1913 में अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए भीमराव का चयन किया गया, जहां से उन्&#x200d;होंने राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया. 1916 में उन्&#x200d;हें एक शोध के लिए पीएचडी से सम्&#x200d;मानित किया गया. अंबेडकर लंदन से अर्थशास्&#x200d;त्र में डॉक्&#x200d;टरेट करना चाहते थे लेकिन स्&#x200d;कॉलरश&#x200d;िप खत्&#x200d;म हो जाने की वजह से उन्&#x200d;हें बीच में ही पढ़ाई छोड़कर वापस भारत आना पड़ा. इसके बाद वे कभी ट्यूटर बने तो कभी कंसल्&#x200d;टिंग का काम शुरू किया लेकिन सामाजिक भेदभाव की वजह से उन्&#x200d;हें सफलता नहीं मिली. फिर वे मुंबई के सिडनेम कॉलेज में प्रोफेसर नियुक्&#x200d;त हो गए. 1923 में उन्&#x200d;होंने &#8216;The Problem of the Rupee&#8217; नाम से अपना शोध पूरा किया और लंदन यूनिवर्सिटी ने उन्&#x200d;हें डॉक्&#x200d;टर्स ऑफ साइंस की उपाध&#x200d;ि दी. 1927 में कोलंबंनिया यूनिवर्सिटी ने भी उन्&#x200d;हें पीएचडी दी.</p>
<p><strong>3.</strong> डॉक्&#x200d;टर भीमराव अंबेडकर समाज में दलित वर्ग को समानता दिलाने के जीवन भर संघर्ष करते रहे. उन्&#x200d;होंने दलित समुदाय के लिए एक ऐसी अलग राजनैतिक पहचान की वकालत की जिसमें कांग्रेस और ब्रिटिश दोनों का ही कोई दखल ना हो. 1932 में ब्रिटिश सरकार ने अंबेडकर की पृथक निर्वाचिका के प्रस्&#x200d;ताव को मंजूरी दे दी, लेकिन इसके विरोध में महात्&#x200d;मा गांधी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया. इसके बाद अंबेडकर ने अपनी मांग वापस ले ली.  बदले में दलित समुदाय को सीटों में आरक्षण और मंदिरों में प्रवेश करने का अध&#x200d;िकार देने के साथ ही छुआ-छूत खत्&#x200d;म करने की बात मान ली गई.</p>
<p><strong>4.</strong> अंबेडकर ने 1936 में स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की. इस पार्टी ने 1937 में केंद्रीय विधानसभा चुनावों मे 15 सीटें जीती. महात्&#x200d;मा गांधी दलित समुदाय को हरिजन कहकर बुलाते थे, लेकिन अंबेडकर ने इस बात की खूब आलोचना की. 1941 और 1945 के बीच उन्&#x200d;होंने कई विवादित किताबें लिखीं जिनमें &#8216;थॉट्स ऑन पाकिस्&#x200d;तान&#8217; और &#8216;वॉट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू द अनटचेबल्&#x200d;स&#8217; भी शामिल हैं.</p>
<p><strong>5.</strong> डॉक्&#x200d;टर भीमराव अंबेडकर प्रकांड विद्वान थे. तभी तो अपने विवादास्&#x200d;पद विचारों और कांग्रेस व महात्&#x200d;मा गांधी की आलोचना के बावजूद उन्&#x200d;हें स्&#x200d;वतंत्र भारत का पहला कानून मंत्री बनाया गया. इतना ही नहीं 29 अगस्&#x200d;त 1947 को अंबेडकर को भारत के संविधान मसौदा समिति का अध्&#x200d;यक्ष न&#x200d;ियुक्&#x200d;त क&#x200d;िया गया. बाबासाहेब अंबेडकर ने 1952 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वो हार गए. मार्च 1952 में उन्हें राज्य सभा के लिए नियुक्त किया गया और फिर अपनी मृत्यु तक वो इस सदन के सदस्य रहे.</p>
<p><strong>6.</strong> डॉक्&#x200d;टर भीमराव अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया. इस समारोह में उन्&#x200d;होंने श्रीलंका के महान बौद्ध भिक्षु महत्थवीर चंद्रमणी से पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न और पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म को अपना लिया. अंबेडकर ने 1956 में अपनी आख&#x200d;िरी किताब बौद्ध धर्म पर लिखी जिसका नाम था &#8216;द बुद्ध एंड हिज़ धम्&#x200d;म&#8217;. यह किताब उनकी मृत्&#x200d;यु के बाद 1957 में प्रकाश&#x200d;ित हुई.</p>
<p><strong>7. </strong>डॉक्&#x200d;टर अंबेडकर को डायबिटीज थी. अपनी आख&#x200d;िरी किताब &#8216;द बुद्ध एंड हिज़ धम्&#x200d;म&#8217; को पूरा करने के तीन दिन बाद 6 दिसंबर 1956 को दिल्&#x200d;ली में उनका निधन हो गया. उनका अंतिम संस्&#x200d;कार मुंबई में बौद्ध रीति-रिवाज के साथ हुआ. उनके अंतिम संस्&#x200d;कार के समय उन्&#x200d;हें साक्षी मानकर करीब 10 लाख समर्थकों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी.</p>
<p>&nbsp;</p>
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