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	<title>Bhog &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>मिर्जापुर : 76 मन बेसन के लडडुओं का संघ प्रमुख ने हनुमान जी को लगाया भोग</title>
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		<pubDate>Sat, 22 Jul 2023 10:18:44 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1280" height="561" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230721-WA0096.jpg" alt="" class="wp-image-382223" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230721-WA0096.jpg 1280w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230721-WA0096-768x337.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मिर्जापुर। अपने दो दिवसीय प्रवास पर मिर्जापुर पहुचे आरएसएस के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का आगमन ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के विंध्याचल आश्रम में गुरुवार को हुआ। शाम को वह बाबाजी का दर्शन करने और आशीर्वाद लेने उनके कक्ष में पधारे। बाबा जी ने उनको अखंड भारत के निर्माण और सनातन धर्म के विश्वव्यापी होने के लिए आशीर्वाद दिया। इससे पूर्व उन्होने शक्तेशगढ़ पहुचकर स्वामी अडगडानंद का आशीर्वाद लिया और धुनी पर प्रणाम कर मसतक पर भभूत लगाया। सवामी अडगडानंद ने उन्हे मानव धर्मशास्त्र यथार्थ गीता और जीवनादर्श एवं आत्मानुभूति भेट किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा एवं अनुष्ठान कर राष्ट्र कल्याण की कामना की</p>



<p class="wp-block-paragraph">शुक्रवार को सुबह महावीर हनुमान जी की ७६ मन बेसन के लडडुओं का भोग लगाकर संघ प्रमुख द्वारा पूजा अनुष्ठान किया गया। इस दौरान यह संकल्प लिया गया कि कैलाश मानसरोवर और भारत की 40 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि, जो इस समय चीन में हड़पी हुई है और कब्जे मे कर रखा है। वह भारत में जल्दी ही वापस आ जाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह महाप्रसाद प्रधानमंत्री, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मे की जाएगी वितरित</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाबा जी ने भी संकेत किया और स्पष्ट बताया भी कि चीन और पाक का पतन शीघ्र होगा और कैलाश मानसरोवर और भारत की समस्त देवभूमि भारत में शीघ्र वापस आएगी। प्रात काल 7 बजे हनुमानजी के सम्मुख 76 मन लड्डुओं से बाबाजी की ओर से मोहन भागवत जी के द्वारा प्रसाद अर्पण किया गया और कैलाश मानसरोवर की वापिसी का संकल्प लिया गया। देवरहा बाबा आश्रम के प्रबंधक अतुल कुमार सक्सेना ने बताया कि बाबाजी का यह महा प्रसाद प्रधानमंत्री, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार में वितरित किये जाने के लिए भेजा जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चीन द्वारा हड़पी गयी कैलाश मानसरोवर और भारत की 40 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि की भारत में जल्दी ही वापसी की कामना</p>



<p class="wp-block-paragraph">शुक्रवार को सुबह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अनुष्ठान पूजन के बाद देवरहा हंस बाबा आश्रम में कल्प वृक्ष का पौधरोपण किया। तत्पश्चात मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पूजन किया। इस दौरान डीएम दिव्या मित्तल ने स्मृति चिह्न स्वरूप मा विन्ध्यवासिनी का चित्र संघ प्रमुख को भेट किया। मा विन्ध्यवासिनी के दर्शन पूजन के दौरान उन्होने विन्ध्य काडिडोर के संबंध मे भी जानकारी ली और कार्यो को देखा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तत्पश्चात संघ प्रमुख त्रिकोण परिक्रमा के लिए निकल गए। त्रिकोण पूजन के दौरान मोहन भागवत ने अष्टभुजा कालीखोह मंदिर पहुचकर भी दर्शन पूजन किया। संघ प्रमुख के साथ काशी प्रान्त प्रचारक रमेश जी, विभाग प्रचारक प्रतोष जी, जिला प्रचारक धीरज जी, सोहन जी, मिलन जी, नगर विधायक पंडित रत्नाकर मिश्र, विभाग संघचालक तिलकधारी जी, नगर प्रचारक राजेंद्र जी आदि मौजूद रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Ganesh Chaturthi 2019: जानिए विघ्नहर्ता की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Aug 2019 04:12:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="" src="https://d35y6w71vgvcg1.cloudfront.net/media/2019/08/ganesh-chaturthi-2019-know-the-auspicious-time-to-worship-vighnaharta_730X365.jpg" alt="à¤à¤£à¥à¤¶ à¤à¤¤à¥à¤°à¥à¤¥à¥ 2019: à¤à¤¾à¤¨à¥à¤ à¤µà¤¿à¤à¥à¤¨à¤¹à¤°à¥à¤¤à¤¾ à¤à¥ à¤ªà¥à¤à¤¾ à¤à¤¾ à¤®à¥à¤¹à¥à¤°à¥à¤¤, à¤à¤¨ à¤¬à¤¾à¤¤à¥à¤ à¤à¤¾ à¤°à¤à¥à¤ à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¨" width="1045" height="783" /></p>
<p>हमारा भारत त्यौहारों का देश भी कहा जाता है, यहाँ  एक के बाद एक लगातार त्यौहार धूम-धाम से मनाए जाते हैं। जानकारी के लोए बताते चले  त्यौहारों की शुरुआत प्रथम पूज्य कहे जाने वाले भगवान श्री गणेश के आगमन यानी कि गणेशोत्सव से होने जा रही है। इस साल यानि 2019 में गणेश चतुर्थी 2 सितंबर को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था इसी कारण से यह चतुर्थी मुख्य गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहलाती है।</p>
<p>बताते चले हमारे भारत देश में इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान 10 दिन तक भगवान गणेश हर घर में विराजमान होते हैं। पूरे विधि-विधान के साथ गणेश जी की स्थापना की जाती है और 10 दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। विशेष मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना की जाती है। आइए जानते हैं गणेश जी की स्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि</p>
<p><strong>गणेश जी की स्थापना का विशेष मुहूर्त</strong><br />
गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त :<br />
2 सितंबर सुबह 11 बजकर 04 मिनट से दोपहर 01 बजे से 37 मिनट तक।<br />
अवधि :<br />
2 घंटे 32 मिनट</p>
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<div class="gallery-item"><img decoding="async" class="img-responsive lazy-loaded" title="गणेश चतुर्थी 2019: जानें विघ्नहर्ता की पूजा का मुहूर्त, इन बातों का रखें ध्यान" src="https://d35y6w71vgvcg1.cloudfront.net/media/2019/08/flowers-fo_730X365.jpg" alt="गणेश चतुर्थी 2019: जानें विघ्नहर्ता की पूजा का मुहूर्त, इन बातों का रखें ध्यान" width="100%" data-src="https://d35y6w71vgvcg1.cloudfront.net/media/2019/08/flowers-fo_730X365.jpg" /></p>
<div></div>
<div class="caption-block"><strong><span class="caption pull-left">विघ्नहर्ता हैं गणपति बप्पा </span></strong></div>
<div class="content">
<p>गणपति महाराज विघ्नों को दूर करने वाले एवं मंगल करने वाले मंगलमूर्ति देव कहे जाते हैं। किसी भी देव की पूजा या कोई मंगल कार्य बिना गणेश जी की पूजा के नहीं होता है। गणेश जी को प्रथम पूज्य का वरदान स्वयं भगवान महादेव के साथ सभी देवता गणों ने दिया था। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति को घर में विराजमान करने का विधान है।</p>
</div>
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<div></div>
<div class="caption-block"><strong><span class="caption pull-left">किस प्रकार करें आह्वान ?</span></strong></div>
<div class="content">
<p>सबसे पहले हम जितने भी दिन के लिए गणेश जी की सेवा करें उतने दिन का संकल्प लें और अपने दाएं हाथ में अक्षत (चावल), गंगाजल, पुष्प और कुछ द्रव्य लेकर संकल्प करें कि हम गणेश जी को अपने घर में तीन, पांच, सात या दस दिन के लिए विराजमान करेंगे। &#8216;ऊं गणेशाय नम:&#8217; मंत्र का जाप करें।</p>
<p>संकल्प लेने के बाद घर-द्वार की साफ-सफाई कर सजने-संवारने के बाद गणेश जी की मूर्ति ले आएं। जिस स्थान पर गणेश जी को विराजमान करना हो उस स्थान को पवित्र और साफ कर लें।</p>
<p>अब आह्वान करें कि हे गणपति, हम आपको अपने घर में इतने दिन के लिए लेकर आए हैं। अपने समस्त परिवार के सभी सदस्यों के नाम, अपना अमुक गोत्र दोहराकर कहें कि हम अपने घर में सुख शांति एवं समृद्धि के लिए आपको प्रतिष्ठापित कर रहे हैं।</p>
<p>निश्चित दिन पर आप गणेश जी को अपने घर में विराजमान करें। कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। हल्दी की चार बिंदी लगाएं। एक मुट्ठी अक्षत (चावल) रखें। इस पर छोटा बाजोट, चौकी या पटरा रखें। लाल, केसरिया या पीले वस्त्र को उस पर बिछाएं। रंगोली, फूल, आम, जामुन के पत्तों एवं अन्य सामग्री से स्थान को सजाएं।</p>
<p>एक तांबे का कलश पानी भरकर उसमें एक सिक्का एक सुपारी और लाल पुष्प डाल दें फिर आम के पांच, सात, या नौ पत्ते और नारियल से कलश को सजाएं।</p>
<p>जब गजानन को लेने जाएं तो स्वच्छ और नवीन वस्त्र धारण करें। यथासंभव हो तो चांदी, तांबे या पीतल की थाली में स्वास्तिक बनाकर, फूल-मालाओं से सजाकर उसमें गणपति को विराजमान कर अपने घर लाएं।</p>
<p>प्रतिमा बड़ी हो तो आप अपने हाथों में या सर पर रखकर भी ला सकते हैं। जब घर में विराजमान करें तो उनका मंगलगान या कीर्तन करें। गणपति को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। लाल पुष्प चढ़ाएं। प्रतिदिन की पूजा में प्रसाद के लिये पंच मेवा अवश्य रखें।</p>
<p>गणेश जी के आगे एक छोटी कटोरी में पांच छोटी इलायची और पांच कमलगट्टे रख दें। गणेश जी जब तक स्थापित हैं इनको गणपति के आगे ही रहने दें। बाद में इसे एक लाल कपड़े में रखकर पूजा स्थल पर रहने दें और छोटी इलायची को गणपति का प्रसाद मानते हुए ग्रहण कर लें।</p>
<p>यह समस्त कार्यों की सिद्धि का उपाय है। इस प्रकार सभी कष्ट समाप्त होते हैं। चंद्रमा, राहू, केतू की छाया भी अशुभता नहीं फैलाएगी।</p>
</div>
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<div></div>
<div class="caption-block"><strong><span class="caption pull-left">प्रतिदिन की पूजन विधि</span></strong></div>
<div class="content">
<p>आचमन करें &#8211;<br />
ॐ केशवाय नम:।<br />
ॐ नारायणाय नम:।<br />
ॐ माधवाय नम:।<br />
इन मंत्रों के साथ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें। ॐ ऋषिकेशाय नम: कहकर हाथ धो लें।</p>
<p>इसके बाद अपने शरीर पर जल छिड़ककर शुद्धि करें। इस दौरान इस मंत्र का जाप करें&#8230;</p>
<p>ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।<br />
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।</p>
</div>
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<div></div>
<div class="caption-block"><strong><span class="caption pull-left">गणपति के षोडशोपचार पूजन की सामग्री</span></strong></div>
<div class="content">
<p>1. आह्वान 2. आसन 3. पाद्य 4. अर्घ्य 5. आचमन 6. स्नान 7. वस्त्र 8. जनेऊ 9. पुष्प, पुष्प मालाएं 10. गंध 11. पुष्प 12. धूप 13. दीप 14. नैवेद्य 15. ताम्बूल 16. अंत में प्रदक्षिणा (परिक्रमा) व पुष्पांजलि अवश्य करें।</p>
</div>
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<div></div>
<div class="caption-block"><strong><span class="caption pull-left">इन बातों का रखें ध्यान</span></strong></div>
<div class="content">
<p>जल से भरा हुआ कलश गणेश जी के बाईं तरफ रखें।<br />
चावल या गेहूं के ऊपर गणेश जी को स्थापित करें।<br />
कलश पर कलावा या मौली बांधें एवं आम के पत्तों के साथ एक नारियल को कलश के मुख पर रखें।<br />
गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखें।<br />
गणेश जी का जन्म मध्याह्न (दिन के समय) में हुआ था, इसलिए मध्याह्न (दिन के समय) में ही प्रतिष्ठापित करें।<br />
10 दिन या जितने भी दिन का संकल्प लिया हो तब तक नियमित समय पर आरती करें।<br />
प्रतिदिन की पूजा का समय निश्चित रखें। जाप माला की संख्या भी निश्चित रखें।<br />
गणेश जी के सम्मुख बैठकर उनसे मन ही मन संवाद करें एवं उनके मंत्रों का जाप करें।<br />
गणेश जी के साथ ही पूरे शिव परिवार की आराधना अवश्य करें।<br />
यदि आपका सामर्थ्य न हो तो घर में गोल सुपारी गणेश और पीली मिट्टी से गणेशाकृति बनाकर उनको भी स्थापित कर सकते हैं। इसमें कोई दोष नहीं लगता है।सुपारी गणेश और पीली मिट्टी के गणेश जी बनाकर स्थापित करने से वास्तु दोष भी समाप्त होते हैं। लेकिन ये ध्यान रहे कि उनकी पूजा नियमित हो। मिट्टी के गणेश जी का स्नान नहीं हो सकता, इसलिए गंगाजल के छींटे लगा सकते हैं।</p>
</div>
</div>
</div>
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