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	<title>bill &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>पीलीभीत : बिजली उपभोक्ता अब किस्तों में भी जमा कर सकेंगे बिल- जेई</title>
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		<pubDate>Thu, 30 Nov 2023 09:40:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दैनिक भास्कर ब्यूरो , बिलसंडा, पीलीभीत। बिजली के बिलों पर आई छूट का फायदा उठाकर लोग खूब बिल जमा कर रहे हैं। हैंडिल पर पूरे दिन बिजली उपभोक्ता अपने बिलों को ठीक करवाकर बकाया जमा कर रहें है। विद्युत विभाग का पुराना बकाया तो जमा ही हो रहा है ,साथ ही बिजली उपभोक्ताओं को भी ... <a title="पीलीभीत : बिजली उपभोक्ता अब किस्तों में भी जमा कर सकेंगे बिल- जेई" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/pilibhit-electricity-consumers-will-now-be-able-to-pay-bills-in-installments-also-je-news-in-hindi/" aria-label="Read more about पीलीभीत : बिजली उपभोक्ता अब किस्तों में भी जमा कर सकेंगे बिल- जेई">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/09_11_2023-bijali_ka_bill_23576667.webp" alt="" class="wp-image-426936" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/09_11_2023-bijali_ka_bill_23576667.webp 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/09_11_2023-bijali_ka_bill_23576667-768x432.webp 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/09_11_2023-bijali_ka_bill_23576667-390x220.webp 390w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दैनिक भास्कर ब्यूरो ,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बिलसंडा, पीलीभीत।</strong> बिजली के बिलों पर आई छूट का फायदा उठाकर लोग खूब बिल जमा कर रहे हैं। हैंडिल पर पूरे दिन बिजली उपभोक्ता अपने बिलों को ठीक करवाकर बकाया जमा कर रहें है। विद्युत विभाग का पुराना बकाया तो जमा ही हो रहा है ,साथ ही बिजली उपभोक्ताओं को भी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना का खूब फायदा उठा रहे है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बुधवार को बिजली उपखण्ड कार्यालय बिलसंडा में सुबह से ही बिजली उपभोक्ताओं की लाईन लगना शुरू हो गया और शाम तक उपभोक्ताओं ने खूब अपने अपने बिजली बिल जमा किए। जेई हरिशंकर ने बताया है कि इस समय बिजली बकाया बिलों के सरचार्ज पर 100:की छूट है, सभी उपभोक्ता इस छूट का लाभ उठाकर अपना बकाया बिल जमा कर सकते है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं अब किस्तों में भी बिल जमा कर सकेंगे और उन्हें भी सरचार्ज में पूरी छूट मिलेगी। जेई ने  बिजली उपभोक्ताओं से अपील की कि सभी लोग पुराने बकाया बिजली बिलों को इस समय जमा कर योजना का लाभ उठाएं।</p>



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		<title>Women Reservation Bill : लोकसभा में पेश हुआ महिला आरक्षण बिल, विपक्षी सांसदों ने किया हंगामा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Sep 2023 09:48:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[गणेश चतुर्थी के दिन 19 सितंबर को नए संसद भवन में सरकार ने दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर महिला आरक्षण बिल पेश किया। कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि हम ऐतिहासिक बिल लाने जा रहे हैं। अभी लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं, इस बिल के पास होने के बाद 181 महिला सांसद ... <a title="Women Reservation Bill : लोकसभा में पेश हुआ महिला आरक्षण बिल, विपक्षी सांसदों ने किया हंगामा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/women-reservation-bill-women-reservation-bill-introduced-in-lok-sabha-181-women-will-get-a-chance-to-become-mps-news-in-hindi/" aria-label="Read more about Women Reservation Bill : लोकसभा में पेश हुआ महिला आरक्षण बिल, विपक्षी सांसदों ने किया हंगामा">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/image-111.png" alt="" class="wp-image-398329" width="840" height="551" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">गणेश चतुर्थी के दिन 19 सितंबर को नए संसद भवन में सरकार ने दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर महिला आरक्षण बिल पेश किया। कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि हम ऐतिहासिक बिल लाने जा रहे हैं। अभी लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं, इस बिल के पास होने के बाद 181 महिला सांसद हो जाएंगी। यह आरक्षण सीधे चुने हुए जाने वाले जन प्रतिनिधियों के लिए लागू होगा। यानी यह राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों पर लागू नहीं होगा। लोकसभा की कार्यवाही 20 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दोपहर 1.15 बजे सदन के लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कार्यवाही शुरू की। पीएम मोदी ने कहा कि हम आज महिला आरक्षण बिल लाने जा रहे हैं। इसका नाम नारी शक्ति वंदन अधिनियम होगा। मोदी अपनी 25 मिनट की स्पीच में 10 मिनट महिलाओं के मुद्दे पर बोले। महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने श्रेय लेने की कोशिश की। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान पर हंगामा हुआ। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान बिल लाया गया था। यह बिल अभी मौजूद है। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम नया बिल लाए हैं। आप जानकारी दुरुस्त कर लीजिए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/image-112.png" alt="" class="wp-image-398330" width="839" height="472" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/image-112.png 400w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/image-112-390x220.png 390w" sizes="(max-width: 839px) 100vw, 839px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी को लेकर हंगामा किया। इनका कहना था कि उन्हें बिल की कॉपी नहीं मिली है। सरकार का कहना था कि बिल को अपलोड कर दिया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी ने कहा- भवन बदला है, भाव भी बदलना चाहिए; पीएम की स्पीच की 5 बड़ी बातें</p>



<p class="wp-block-paragraph">कौन कहां बैठेगा, व्यवहार तय करेगा: मोदी ने कहा, अभी चुनाव तो दूर हैं और जितना समय हमारे पास बचा है। मैं मानता हूं कि यहां जो जैसा व्यवहार करेगा, यह निर्धारित करेगा कि कौन यहां बैठेगा, कौन वहां बैठेगा। जो वहां बैठे रहना चाहता है, उसका व्यवहार क्या होगा, इसका फर्क आने वाले समय में देश देखेगा।&#8217; हमारा भाव जैसा होता है, वैसा ही घटित होता है: &#8216;हमारा भाव जैसा होता है, वैसे ही कुछ घटित होता है। यद् भावं तद भवति…! मुझे विश्वास है कि भावना भीतर जो होगी, हम भी वैसे ही भीतर बनते जाएंगे। भवन बदला है, भाव भी बदलना चाहिए, भावनाएं भी बदलनी चाहिए। संसद राष्ट्रसेवा का स्थान है। यह दलहित के लिए नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज की तारीख इतिहास में अमरत्व प्राप्त करेगी: कल ही कैबिनेट में महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दी गई है। आज 19 सितंबर की यह तारीख इसीलिए इतिहास में अमृत्व को प्राप्त करने जा रही है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, नेतृत्व कर रही हैं तो बहुत आवश्यक है कि नीति निर्धारण में हमारी माताएं-बहनें, हमारी नारी शक्ति अधिकतम योगदान दें। योगदान ही नहीं, महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाएं। आज इस ऐतिहासिक मौके पर नए संसद भवन में सदन की पहली कार्यवाही के अवसर पर देश के इस नए बदलाव का आह्वान किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नारी शक्ति वंदन अधिनियम</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश की नारी शक्ति के लिए सभी सांसद मिलकर नए प्रवेश द्वार खोल दें इसका आरंभ हम इस महत्वपूर्ण निर्णय से करने जा रहे हैं। महिलाओं के नेतृत्व में विकास के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए हमारी सरकार एक प्रमुख संविधान संशोधन विधेयक पेश कर रही है। इस उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को विस्तार देना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस माध्यम से हमारा लोकतंत्र और मजबूत होगा। मैं देश की माताओं, बहनों और बेटियों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं सभी माताओं, बहनों, बेटियों को आश्वस्त करता हूं कि हम इस विधेयक को अमल में लाने के लिए संकल्पित हैं।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">बिल पर बहुत चर्चाएं हुई हैं, वाद-विवाद हुए: कई सालों से महिला आरक्षण के संबंध में बहुत चर्चाएं हुई हैं। बहुत वाद-विवाद हुए हैं। महिला आरक्षण को लेकर संसद में पहले भी कुछ प्रयास हुए हैं। 1996 में इससे जुड़ा विधेयक पहली बार पेश हुआ। अटलजी के कार्यकाल में कई बार महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया, लेकिन उसे पार कराने के लिए आंकड़े नहीं जुटा पाए और उस कारण से वह सपना अधूरा रह गया। महिलाओं को अधिकार देने, उन्हें शक्ति देने जैसे पवित्र कामों के लिए शायद ईश्वर ने मुझे चुना है। एक बार फिर हमारी सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">तीन दशक से पेंडिंग है महिला आरक्षण बिल</p>



<p class="wp-block-paragraph">संसद में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव करीब 3 दशक से पेंडिंग है। यह मुद्दा पहली बार 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने उठाया था। 2010 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित करा लिया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तब सपा और राजद ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दे दी थी। इसके बाद बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। तभी से महिला आरक्षण बिल पेंडिंग है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बिल का विरोध करने के पीछे सपा-राजद का तर्क</p>



<p class="wp-block-paragraph">सपा और राजद महिला OBC के लिए अलग कोटे की मांग कर रही थीं। इस बिल को विरोध करने के पीछे सपा-राजद का तर्क था कि इससे संसद में केवल शहरी महिलाओं का ही प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। दोनों पार्टियों की मांग है कि लोकसभा और राज्यसभा में मौजूदा रिजर्वेशन बिल में से एक तिहाई सीट का कोटा पिछड़े वर्गों (OBC) और अनुसूचित जातियों (SC) की महिलाओं के लिए होना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बिल पास हुआ तो लोकसभा में 180 महिलाएं होंगी, अभी सिर्फ 78 हैं</p>



<p class="wp-block-paragraph">मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि महिला आरक्षण बिल मंगलवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा में यह 2010 में ही पास हो चुका है। इसमें महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान है। यह बिल पास हुआ तो अगले लोकसभा चुनाव के बाद सदन में हर तीसरी सदस्य महिला होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्ट के मुताबिक यह आरक्षण लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में लागू होगा। बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए जाएगा। कानून बनने के बाद होने वाले चुनावों में यह बिल लागू हो जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दो तरीकों से लागू हो सकता है आरक्षण</p>



<p class="wp-block-paragraph">आरक्षण बढ़ाने का पहला विकल्प: लोकसभा व विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी। 2010 में पेश किए गए बिल के अनुसार, संसद और राज्यों की विधानसभा की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। संसद और राज्यों में इन सीटों को रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाएगा। SC और ST के लिए आरक्षित सीटों की कुल संख्या में से एक तिहाई उन समूहों की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह व्यवस्था दो चुनाव के लिए होगी। हर आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटें बदली जाएंगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरा विकल्प: संसद में एक तिहाई सीटें बढ़ा दी जाएं, क्योंकि लोकसभा की सीटिंग कैपेसिटी अब 888 हो गई है। संख्या बढ़ाने के लिए ये तरीके हो सकते हैं। जिन संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 18-20 लाख से अधिक है, वहां एक के बजाय दो सदस्य चुनें। इनमें एक सामान्य हो और दूसरी महिला सदस्य को चुना जाए। ऐसी करीब 180 सीटें हैं, जहां 18 लाख से अधिक मतदाता हैं। कम से कम 48 सीटें ऐसी हैं, जहां महिला वोटर पुरुषों से अधिक हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये दोनों कॉम्बिनेशन अपनाकर महिलाओं के लिए अतिरिक्त प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जा सकती है। किसी एक संसदीय क्षेत्र से दो या अधिक उम्मीदवार चुनने की व्यवस्था पहले भी रह चुकी है। 1952 में 89 और 1957 के चुनाव में 90 सीटों पर दो-दो उम्मीदवार चुने गए थे। तब एक सीट सामान्य के लिए और दूसरी आरक्षित सीट हुआ करती थी। आबादी के आधार पर महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया तो सबसे ज्यादा सीटें UP, राजस्थान गुजरात, मप्र और हिमाचल बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में बढ़ेंगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बिना किसी शर्त पर कांग्रेस का बिल को समर्थन</p>



<p class="wp-block-paragraph">राहुल गांधी ने कहा कि अब दलगत राजनीति से ऊपर उठें। हम महिला आरक्षण बिल पर बिना शर्त के समर्थन करेंगे। संसद के स्पेशल सेशन के पहले दिन जब PM मोदी के बाद कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में बोल रहे थे तो वे कांग्रेस की पूर्व सरकारों के कामों को गिनाने लगे, इस दौरान सोनिया ने उन्हें टोका और महिला आरक्षण पर बोलने को कहा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विपक्ष भी महिला आरक्षण बिल के पक्ष में</p>



<p class="wp-block-paragraph">तेलंगाना CM केसीआर की बेटी के. कविता ने 13 सितंबर को दिल्ली में 13 विपक्षी दलों के साथ बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण में वुमन रिजर्वेशन बिल पेश करने की मांग की थी। कविता ने कहा था कि उनकी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) का विश्वास है कि महिलाओं के लिए रिजर्वेशन के साथ-साथ कोटा के भीतर कोटा पर भी काम किया जाना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कविता लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की मांग कर रही हैं। इसी मांग को लेकर कविता ने 10 मार्च को दिल्ली में एक दिन की भूख हड़ताल की थी। जिसमें AAP, अकाली दल, PDP, TMC, JDU, NCP, CPI, RLD, NC और समाजवादी पार्टी समेत कई पार्टियां शामिल हुई थीं, लेकिन कांग्रेस ने हिस्सा नहीं लिया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण की मांग की टाइम लाइन</p>



<p class="wp-block-paragraph">1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिलाओं के लिए राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संविधान सभा की बहसों में भी महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। तब इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि लोकतंत्र में खुद-ब-खुद सभी समूहों को प्रतिनिधित्व मिलेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1947: फ्रीडम फाइटर रेणुका रे ने उम्मीद जताई कि भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों के सत्ता में आने के बाद महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की गारंटी दी जाएगी। हालांकि यह उम्मीद पूरी नहीं हुई और महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सीमित ही रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया, जिसमें महिलाओं की घटती राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डाला गया। हालांकि समिति के कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया, उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया, जिसमें महिलाओं की घटती राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डाला गया। हालांकि समिति के कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया, उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की सिफारिश की गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1988: महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perpective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1996: एचडी देवगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया। इसके तुरंत बाद, उनकी सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा भंग हो गई</p>



<p class="wp-block-paragraph">1998: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में विधेयक को फिर से पेश किया। इसके विरोध में एक राजद सांसद ने विधेयक को फाड़ दिया। विधेयक फिर से लैप्स हो गया, क्योंकि वाजपेयी सरकार के अल्पमत में आने के साथ 12वीं लोकसभा भंग हो गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1999: NDA सरकार ने 13वीं लोकसभा में एक बार फिर विधेयक पेश किया, लेकिन सरकार फिर से इस मुद्दे पर आम सहमति जुटाने में नाकाम रही। NDA सरकार ने 2002 और 2003 में दो बार लोकसभा में विधेयक लाया, लेकिन कांग्रेस और वामपंथी दलों ने समर्थन का आश्वासन दिए जाने के बाद भी इसे पारित नहीं कराया जा सका।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2004: सत्ता में आने के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने साझा न्यूनतम कार्यक्रम (CMP) में अपने वादे के तहत बिल पारित करने की अपनी मंशा की घोषणा की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2008: मनमोहन सिंह सरकार ने विधेयक राज्यसभा में पेश किया और 9 मई, 2008 को इसे कानून और न्याय पर स्थायी समिति को भेजा गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2009: स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और विधेयक को समाजवादी पार्टी, जद (यू) और राजद के विरोध के बीच संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2010: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दी। विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया, लेकिन सपा और राजद के UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकियों के बाद मतदान स्थगित कर दिया गया। 9 मार्च को राज्यसभा से महिला आरक्षण विधेयक को 1 के मुकाबले 186 मतों से पारित कर दिया गया। हालांकि, लोकसभा में 262 सीटें होने के बावजूद मनमोहन सिंह सरकार विधेयक को पारित नहीं करा पाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2014 और 2019: भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्रों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का वादा किया, लेकिन इस मोर्चे पर कोई ठोस प्रगति नहीं की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दुनिया की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी</p>



<p class="wp-block-paragraph">UN women की एक रिपोर्ट में 1 जनवरी 2023 तक का डेटा शेयर किया गया है। इसके मुताबिक- 31 देशों में 34 महिलाएं हेड ऑफ द स्टेट या फिर हेड ऑफ द गवर्नमेंट हैं। अगर जेंडर इक्वैलिटी के लिहाज से देखें तो महिलाओं को पुरुषों की बराबरी करने में अभी 130 साल और लगेंगे।<br>17 देशों में महिलाएं हेड ऑफ द स्टेट और 19 देशों में हेड ऑफ द गवर्नमेंट हैं। 22.8% महिलाएं कैबिनेट मेंबर्स हैं। दुनिया में सिर्फ 13 देश ही ऐसे हैं, जहां की कैबिनेट्स में महिलाओं की तादाद 50% या उससे ज्यादा है। इसमें भी खास बात ये है कि पावर सेंटर्स से ताल्लुक रखने वाली इन महिलाओं के पास वुमन एंड जेंडर इक्वैलिटी, फैमिली एंड चिल्ड्रन अफेयर्स, सोशल अफेयर्स और सोशल सिक्योरिटी जैसे डिपार्टमेंट्स हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">orf फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन के हवाले से सियासत में महिलाओं की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक- 1 जनवरी 2023 तक दुनिया के सभी देशों में वुमन रिप्रेजेंटेशन (एक सदन या दोनों सदन मिलाकर) 26.5% था। हर साल यह 0.4% की रफ्तार से बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट को 187 देशों में स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है और हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में भारत को 143वें स्थान पर रखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लोकसभा में 15.2% और राज्यसभा में 13.8% महिलाएं हैं। यह डेटा जुलाई 2023 तक का है। रिपोर्ट में इस डेटा एनालिसिस के हवाले से कहा गया है कि जेंडर रिप्रेजेंटेशन की यह कछुआ चाल रही तो पार्लियामेंट रिप्रेजेंटेशन की फील्ड में जेंडर इक्वॉलिटी 2063 से पहले नहीं लाई जा सकेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संसद के विशेष सत्र में ये 4 बिल पेश होने हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, शर्तें और पद अवधि) बिल, 2023: यह बिल चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) और अन्य इलेक्शन कमिश्नर (ECs) की नियुक्ति को रेगुलेट करने से जुड़ा है। बिल के मुताबिक आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यों का पैनल करेगा। जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एडवोकेट्स अमेंडमेंट बिल 2023: इस बिल के जरिए 64 साल पुराने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन करना है। बिल में लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879 को निरस्त करने का भी प्रस्ताव है। प्रेस एवं रजिस्ट्रेशन ऑफ पीरियॉडिकल्स बिल 2023: यह बिल किसी भी न्यूजपेपर, मैग्जीन और किताबों के रजिस्ट्रेशन और पब्लिकेशंस से जुड़ा है। बिल के जरिए प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 को निरस्त कर दिया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पोस्ट ऑफिस बिल, 2023: यह बिल 125 साल पुराने भारतीय डाकघर अधिनियम को खत्म कर देगा। इस बिल के जरिए पोस्ट ऑफिस के काम को और आसान बनाने के साथ ही पोस्ट ऑफिस के अधिकारियों को अतिरिक्त पावर देने का काम करेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नई संसद में 6 द्वार, लेकिन सेंट्रल हॉल नहीं:मोर और कमल की थीम; फोटो-वीडियो के जरिए अंदर का पूरा टूर</p>



<p class="wp-block-paragraph">PM मोदी के ये कुछ आखिरी शब्द हैं, जो पुरानी संसद में गूंजे। आज से संसद का सारा काम-काज नई इमारत में होगा। 10 दिसंबर 2020 को PM मोदी ने इस बिल्डिंग का पहला पत्थर रखा था। 28 मई 2023 को PM मोदी ने इसका उद्घाटन किया। अब 19 सितंबर से कार्यवाही शुरू हो रही है।</p>
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		<title>CM योगी का बड़ा ऐलान, गंगा मइया को गंदा किया तो होगी जेल, सरकार ने बनाया नया कानून</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Nov 2018 10:51:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[  नई दिल्ली। गंगा मइया को सभी नदियों में सबसे पवित्र माना गया है. वही इसकी सफाई पर केंद्र सरकार और यूपी सरकार पूर्ण जोर प्रयास में लगी है इ​सके लिए सरकार ने गंगा विधेयक 2018 प्रस्तावित किया है। इसमें गंगा नदी को प्रदूषित करने वालों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। इस विधेयक में गंगा प्रोटेक्शन ... <a title="CM योगी का बड़ा ऐलान, गंगा मइया को गंदा किया तो होगी जेल, सरकार ने बनाया नया कानून" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/cm-yogi-the-ganga-miyaya-dirty-will-be-done-the-government-has-created-a-new-law-news/" aria-label="Read more about CM योगी का बड़ा ऐलान, गंगा मइया को गंदा किया तो होगी जेल, सरकार ने बनाया नया कानून">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 title="गंगा को गंदा किया तो होगी जेल, प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने बनाया नया कानून"> <img decoding="async" src="https://assets-news-bcdn.dailyhunt.in/cmd/resize/400x400_60/fetchdata13/images/60/ae/cb/60aecb6de77d4086dc845ba9dbc3b300.jpg" /></h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> गंगा मइया को सभी नदियों में सबसे पवित्र माना गया है. वही इसकी सफाई पर केंद्र सरकार और यूपी सरकार पूर्ण जोर प्रयास में लगी है इ​सके लिए सरकार ने गंगा विधेयक 2018 प्रस्तावित किया है। इसमें गंगा नदी को प्रदूषित करने वालों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा।</p>
<p>इस विधेयक में गंगा प्रोटेक्शन कॉर्प्स की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है। राष्ट्रीय गंगा काउंसिल की मांग पर इन पुलिसवालों का खर्च गृह मंत्रालय उठाएगा। काउंसिल में पांच विशेषज्ञों की एक टीम है जिनके पास किसी उद्योग, बांधों और अन्य ढांचों के निर्माण को बंद करने या उनका विनियमन करने का अधिकार है जिनसे कि नदी के सतत प्रवाह पर असर पड़ता हो। साथ ही वह उस गतिविधि पर रोक लगा सकते हैं जिससे कि नदी प्रदूषित होती है।</p>
<p>जल संसाधन मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने पुष्टि की कि मसौदे को मंत्रालयों के पास भेज दिया गया है। उन्होंने कहा, सभी मंत्रियों द्वारा देखे जाने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। विधेयक के अनुसार पुलिसवालों के पास अपराधियों को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने, उसे पास के पुलिस थाने में ले जाने का अधिकार होगा।</p>
<p>गंगा अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों और जुर्माना की लंबी सूची है जिसमें घाट को खराब करना या सीढ़ियों को नुकसान पहुंचाना या नदी में कोई अपमानजनक चीज फेंकना शामिल है। दूसरे अपराधों में पत्थर खनन, अनुमति के बिना वाणिज्यिक मछली पकड़ना, पहाड़ी ढलानों या संवेदनवशील क्षेत्रों में वनों की कटाई करना, ट्यूबवेल या उद्योग की जरुरतों की संगठित खपत के लिए भूजल निकालना सहित दूसरे शामिल हैं। यह सभी अपराध दो साल तक कारावास या 50,000 रुपये तक के जुर्माना के साथ दंडनीय हैं।</p>
<p>यह अपराध और जुर्माना राष्ट्रीय नदी गंगा विधेयक 2018 के अंतर्गत आते हैं। विधेयक का कहना है कि केंद्र सरकार का गंगा के प्रबंधन, विनियमन और विकास पर नियंत्रण रहेगा और इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाएगा।</p>
<p>क्योंकि इस नदी का खास महत्व है। भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक और विश्वास के कारणों की वजह से इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाना चाहिए। विधेयक की धारा 54 के अनुसार यदि कोई कंपनी अपराध करती है तो, अपराध के समय कंपनी में उस समय मौजूद रहे हर शख्स को दोषी माना जाएगा।</p>
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		<title>केरल बाढ़: जानिए क्या है इस वायरल मैसेज का सच&#8230;.</title>
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		<pubDate>Wed, 22 Aug 2018 08:05:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भयंकर बारिश और विनाशकारी बाढ़ के बाद अब जिंदगी पटरी पर लाने की जद्दोजेहद में जुटे केरलने आज केंद्र से 2,600 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की। पिछले एक पखवाड़े में राज्य में बाढ़ की वजह से 400 लोगों की ज़िंदगी मौत के पंजे में जा चुकी है और 14 लाख से अधिक लोग विस्थापित ... <a title="केरल बाढ़: जानिए क्या है इस वायरल मैसेज का सच&#8230;." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/kerala-flood-rice-bill-modi-government-ram-vilas-paswan-help-news/" aria-label="Read more about केरल बाढ़: जानिए क्या है इस वायरल मैसेज का सच&#8230;.">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p align="justify">भयंकर बारिश और विनाशकारी बाढ़ के बाद अब जिंदगी पटरी पर लाने की जद्दोजेहद में जुटे <strong>केरल</strong>ने आज केंद्र से 2,600 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की। पिछले एक पखवाड़े में राज्य में बाढ़ की वजह से 400 लोगों की ज़िंदगी मौत के पंजे में जा चुकी है और 14 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इस बीच केरल को कई तरह से लोग-सरकारें-संस्थाएं मदद पहुंचा रही हैं.  इस बीच सोशल मीडिया पर ऐसी बात वायरल हो रही है कि भारत सरकार ने जो केरल को अतिरिक्त अनाज की मदद की है, उसका बिल केरल सरकार को थमा दिया है.</p>
<p align="justify">सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है कि केंद्र सरकार ने केरल की राज्य सरकार को 233 करोड़ का बिल थमाया है. इसके अलावा वायरल मैसेज में बताया भी जा रहा है कि केंद्र की ओर से कहा गया है कि अगर केरल सरकार ये 233 करोड़ रुपए नहीं देती है, तो केरल आपदा के लिए जो 600 करोड़ (100+500) का ऐलान किया गया है, ये राशि उसमें से काटी जाएगी. उदाहरण के लिए ये ट्वीट देंखे&#8230;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">So Modi announces 89,540 metric tonne rice as relief material to flood hit Kerala and then charges Rs 233 crores for it! THIS IS NOT A JOKE <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f621.png" alt="😡" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><a href="https://twitter.com/hashtag/KeralaFloodRelief?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#KeralaFloodRelief</a></p>
<p>&mdash; Bobins Abraham Vayalil (@BobinsAbraham) <a href="https://twitter.com/BobinsAbraham/status/1031846233655193600?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">August 21, 2018</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">The centre wants Kerala to pay Rs 233 crores for the 89,540 metric tonne of rice they have provided.<br />If the money is not paid, they&#39;ll deduct it from the flood relief fund that has been promised to the State.<a href="https://twitter.com/hashtag/StandWithKerala?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#StandWithKerala</a><a href="https://twitter.com/hashtag/KeralaFloods?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#KeralaFloods</a><a href="https://twitter.com/hashtag/WeShallOvercome?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WeShallOvercome</a> <a href="https://t.co/JyqblIUInO">pic.twitter.com/JyqblIUInO</a></p>
<p>&mdash; Adwaith Nisha (@adwaidh921) <a href="https://twitter.com/adwaidh921/status/1031865656700952579?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">August 21, 2018</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><b>सरकार ने बताया कितना दिया गया अनाज&#8230;</b></p>
<p align="justify"><b></b>वायरल मैसेज के बीच मंगलवार को केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का बयान आया, जो इसपर सफाई जाहिर करता है. राम विलास पासवान ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार ने बाढ़ से पीड़ित केरल को अतिरिक्त 89,540 टन अनाज भेजने का फैसला किया है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) योजना के तहत केरल को प्रति माह 1,18,000 टन अनाज मिलता है लेकिन इसमें पूरी आबादी शामिल नहीं होती है.</p>
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