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	<title>Bombay high court &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>Bombay high court &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>बॉम्बे HC ने महिला से कहा- &#8216;ऐसे शब्द नहीं बर्दाश्त करेंगे&#8217;, सुना दी ये सजा</title>
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		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 10:32:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट (HC) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान आदान-प्रदान किए गए ईमेल और पत्रों को न्यायालय की आपराधिक अवमानना के समान करार दिया। कोर्ट ने कहा कि इस संचार का लहजा और विषयवस्तु ‘जानबूझकर और बेशर्मी से अपमानजनक’ थी, जिसका उद्देश्य 21 जनवरी को हाईकोर्ट के पिछले आदेश की ... <a title="बॉम्बे HC ने महिला से कहा- &#8216;ऐसे शब्द नहीं बर्दाश्त करेंगे&#8217;, सुना दी ये सजा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bombay-hc-told-woman-we-will-not-tolerate-such-words/" aria-label="Read more about बॉम्बे HC ने महिला से कहा- &#8216;ऐसे शब्द नहीं बर्दाश्त करेंगे&#8217;, सुना दी ये सजा">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1600" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-23T155340.979-1.png" alt="" class="wp-image-490417" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-23T155340.979-1.png 1600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-23T155340.979-1-300x169.png 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-23T155340.979-1-768x432.png 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-23T155340.979-1-1536x864.png 1536w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/04/image-2025-04-23T155340.979-1-150x84.png 150w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट (HC) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान आदान-प्रदान किए गए ईमेल और पत्रों को न्यायालय की आपराधिक अवमानना के समान करार दिया। कोर्ट ने कहा कि इस संचार का लहजा और विषयवस्तु ‘जानबूझकर और बेशर्मी से अपमानजनक’ थी, जिसका उद्देश्य 21 जनवरी को हाईकोर्ट के पिछले आदेश की अवहेलना करना था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बॉम्बे HC ने आगे टिप्पणी की कि न्यायालय को ‘कुत्ता माफिया’ कहने जैसी अभद्र टिप्पणियाँ शिक्षित व्यक्तियों से अपेक्षित नहीं थीं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयानों से एक गंभीर संज्ञान लिया जाएगा और आदेशों का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ किसी भी प्रकार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आवश्यकतानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। न्यायालय ने संबंधित पक्षों को इस मामले में पेश होकर स्पष्टीकरण देने के लिए भी समन भेजा गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बॉम्बे हाईकोर्ट के इस निर्णय से साफ है कि न्यायालय अपने आदेशों और प्रतिष्ठा की रक्षा करने के लिए संकल्पित है और किसी भी प्रकार की अवमानना को बर्दाश्त नहीं करेगा।</p>
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		<title>बॉम्बे हाईकोर्ट से होटल एसोसिएशन को झटका: अब म्यूजिक बजाने के लिए लेना होगा एनओसी</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-rejects-hotel-associations-appeal-noc-compulsory-for-music/</link>
		
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		<pubDate>Sat, 21 Dec 2024 10:09:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[एक ऐतिहासिक फैसले में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने होटल एसोसिएशन की अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें पुष्टि की गई है कि कार्यक्रमों में संगीत बजाने के लिए नोवेक्स एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अनिवार्य है! यह फैसला होटल एसोसिएशन के लिए एक महत्वपूर्ण झटका है, क्योंकि यह नोवेक्स के पक्ष में न्यायमूर्ति आर.आई. चागला द्वारा ... <a title="बॉम्बे हाईकोर्ट से होटल एसोसिएशन को झटका: अब म्यूजिक बजाने के लिए लेना होगा एनओसी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-rejects-hotel-associations-appeal-noc-compulsory-for-music/" aria-label="Read more about बॉम्बे हाईकोर्ट से होटल एसोसिएशन को झटका: अब म्यूजिक बजाने के लिए लेना होगा एनओसी">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1280" height="720" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-21-at-3.34.49-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-476595" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-21-at-3.34.49-PM.jpeg 1280w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-21-at-3.34.49-PM-300x169.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-21-at-3.34.49-PM-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-21-at-3.34.49-PM-150x84.jpeg 150w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">एक ऐतिहासिक फैसले में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने होटल एसोसिएशन की अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें पुष्टि की गई है कि कार्यक्रमों में संगीत बजाने के लिए नोवेक्स एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अनिवार्य है! यह फैसला होटल एसोसिएशन के लिए एक महत्वपूर्ण झटका है, क्योंकि यह नोवेक्स के पक्ष में न्यायमूर्ति आर.आई. चागला द्वारा पारित मूल फैसले को बरकरार रखता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य बातें</p>



<p class="wp-block-paragraph">नोवेक्स के लाइसेंसिंग अधिकार:नोवेक्स को सभी श्रेणियों के कार्यक्रमों के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि संगीत अधिकार धारकों को उचित मुआवजा मिले।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नोवेक्स का राहत मांगने का अधिकार:नोवेक्स उन स्थानों के खिलाफ मामला दर्ज कर सकता है और राहत मांग सकता है जो बार-बार उनके अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, जिससे संगीत रचनाकारों और मालिकों के हितों की रक्षा होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह निर्णय बॉम्बे उच्च न्यायालय के पहले के निर्णय के अनुरूप है, जिसने NOVEX जैसे संगीत अधिकार धारकों को कॉपीराइट स्वामी के रूप में मान्यता दी थी। इसका मतलब है कि NOVEX कॉपीराइट सोसायटी के रूप में पंजीकृत हुए बिना भी संगीत लाइसेंस जारी कर सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस निर्णय के आलोक में, इवेंट आयोजकों और आयोजन स्थलों को कॉपीराइट संगीत को कानूनी रूप से चलाने के लिए NOVEX NOC प्राप्त करना होगा। अनुपालन न करने पर महत्वपूर्ण कानूनी परिणाम हो सकते हैं!<br>NOVEX NOC प्राप्त करने या संगीत लाइसेंसिंग अधिकारों के बारे में अधिक जानने के लिए, Novex Communications की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>कंगना रनौत की &#8216;इमरजेंसी&#8217; को बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रमाणित करने से किया इनकार</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-refuses-to-certify-kangana-ranauts-emergency/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Sep 2024 08:55:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कंगना रनौत की फिल्म &#8216;इमरजेंसी&#8217; को बड़ा झटका देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्म के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाणन देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीपी कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने कहा कि वे कोई निर्देश जारी नहीं कर सकते, क्योंकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ... <a title="कंगना रनौत की &#8216;इमरजेंसी&#8217; को बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रमाणित करने से किया इनकार" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-refuses-to-certify-kangana-ranauts-emergency/" aria-label="Read more about कंगना रनौत की &#8216;इमरजेंसी&#8217; को बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रमाणित करने से किया इनकार">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-04-at-2.24.52-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-465676" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-04-at-2.24.52-PM.jpeg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-04-at-2.24.52-PM-300x169.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-04-at-2.24.52-PM-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-04-at-2.24.52-PM-150x84.jpeg 150w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">कंगना रनौत की फिल्म &#8216;इमरजेंसी&#8217; को बड़ा झटका देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्म के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाणन देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीपी कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने कहा कि वे कोई निर्देश जारी नहीं कर सकते, क्योंकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले ही सेंसर बोर्ड को आदेश दिया है </p>



<p class="wp-block-paragraph">कि वह फिल्म को प्रमाणित करने से पहले आपत्तियों पर विचार करे। पीठ ने कहा, &#8220;मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सीबीएफसी को निर्देश दिया है। अगर हम आज कोई राहत देते हैं तो यह सीधे तौर पर उस आदेश का उल्लंघन होगा। अगर हम आज कोई आदेश पारित करते हैं तो हम सीबीएफसी से उच्च न्यायालय के एक और आदेश का उल्लंघन करने के लिए कहेंगे। हम ऐसा नहीं कर सकते। न्यायिक मर्यादा हमसे यही मांग करती है।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सेंसर बोर्ड से कहा कि वह फिल्म के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों पर विचार करे और फिर 18 सितंबर तक इसे प्रमाणित करे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसमें कहा गया है, &#8220;हम जानते हैं कि पीछे कुछ और चल रहा है। हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। सीबीएफसी आपत्तियों पर विचार करेगा और 18 सितंबर तक निर्णय लेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, याचिका में अटैच कर रखी थी आपत्तिजनक तस्वीरें</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-reprimanded-the-lawyer-had-attached-objectionable-pictures-in-the-petition-news-in-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Oct 2022 12:16:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ रेप के केस को खत्म करने की मांग पर सुनवाई के दौरान एक वकील को फटकार लगाई है। साथ ही वकील पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। ये पैसे दो हफ्ते के भीतर कीर्तिकर लॉ लाइब्रेरी जमा करने होंगे। दरअसल, वकील ने याचिका के साथ आपत्तिजनक ... <a title="बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, याचिका में अटैच कर रखी थी आपत्तिजनक तस्वीरें" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-reprimanded-the-lawyer-had-attached-objectionable-pictures-in-the-petition-news-in-hindi/" aria-label="Read more about बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, याचिका में अटैच कर रखी थी आपत्तिजनक तस्वीरें">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/10/iiiiiip.jpg" alt="" class="wp-image-279501" width="837" height="469" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ रेप के केस को खत्म करने की मांग पर सुनवाई के दौरान एक वकील को फटकार लगाई है। साथ ही वकील पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। ये पैसे दो हफ्ते के भीतर कीर्तिकर लॉ लाइब्रेरी जमा करने होंगे। दरअसल, वकील ने याचिका के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें अटैच की थीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस रेवती मोहिते डेरे की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने वकील को याचिका में अटैच की गई आपत्तिजनक तस्वीरों को हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि सभी वकीलों को ऐसी तस्वीरों को अटैच करते समय संयम बरतना चाहिए। इससे पीड़ित की पहचान उजागर हो सकती है। कोर्ट ने वकील से कहा कि वे याचिका की कॉपीज से भी इन तस्वीरों को तुरंत हटा दे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अदालत की अनुमति से तस्वीरें पेश हों</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस आदेश के बाद एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया (AAWI) ने भी एक नोटिस जारी किया है। इसमें वकीलों को महिलाओं के खिलाफ अपराध की याचिकाओं के साथ आपत्तिजनक/अश्लील फोटो/वीडियो अटैच करने से परहेज करने को कहा है। हालांकि, वे याचिका की सुनवाई के समय अदालत की अनुमति से हाईकोर्ट के समक्ष ऐसी चीजें पेश करने की अनुमति मांग सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">क्या है पूरा मामला</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस मोहिते-डेरे और जस्टिस श्रीराम एम मोदक की पीठ 7 अक्टूबर को एक महिला की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि सुनवाई के दौरान, हमें याचिकाकर्ता के वकील की ओर से उक्त याचिका में अटैच आपत्तिजनक तस्वीरें मिलीं। इससे कई जगह सर्कुलेट किया गया है, जिससे पीड़ित की पहचान का खुलासा हुआ है और उसकी गरिमा को भी ठेस पहुंची है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को उक्त तस्वीरों को तुरंत हटाने का आदेश दिया। इन तस्वीरों को जहां भी भेजा गया है, वहां से भी वापस लिया जाए। कोर्ट ने अधिवक्ताओं, सदस्यों, फाइलिंग क्लर्कों को सलाह दी है कि वे इस तरह की तस्वीरों को याचिका में अटैच न करें। इस मामले में अब 21 अक्टूबर को सुनवाई होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- भीड़भाड़ वाली ट्रेन से गिरने पर रेल यात्री को इलाज का खर्चा दे रेलवे</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-said-railways-should-pay-the-cost-of-treatment-to-a-railway-passenger-after-falling-from-a-crowded-train-news-in-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Apr 2022 10:44:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Bombay high court]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[railway passengers falling from overcrowded train]]></category>
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					<description><![CDATA[आप भी रेल से यात्रा करते हैं तो आपके लिए ये काम की खबर हो सकती है। दरअसल रोजाना लाखों लोग रेल से यात्रा करते हैं। लेकिन कई बार ये देखने को मिलता है कि ट्रेनों में क्षमता से अधिक भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में भीड़ बढ़ने से कई बार लोग ट्रेन से गिरकर ... <a title="बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- भीड़भाड़ वाली ट्रेन से गिरने पर रेल यात्री को इलाज का खर्चा दे रेलवे" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-said-railways-should-pay-the-cost-of-treatment-to-a-railway-passenger-after-falling-from-a-crowded-train-news-in-hindi/" aria-label="Read more about बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- भीड़भाड़ वाली ट्रेन से गिरने पर रेल यात्री को इलाज का खर्चा दे रेलवे">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/04/images-5-3.jpg" alt="" class="wp-image-198771" width="692" height="388" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">आप भी रेल से यात्रा करते हैं तो आपके लिए ये काम की खबर हो सकती है। दरअसल रोजाना लाखों लोग रेल से यात्रा करते हैं। लेकिन कई बार ये देखने को मिलता है कि ट्रेनों में क्षमता से अधिक भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में भीड़ बढ़ने से कई बार लोग ट्रेन से गिरकर बुरी तरह घायल हो जाते हैं या फिर उनकी मौत हो जाती है। लेकिन अब इस तरह हादसों को लेकर कोर्ट ने एक्शन लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेल यात्रियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि लोकल ट्रेन मुंबई की लाइफ लाइन है अगर कोई यात्री भीड़वाली ट्रेन में चढ़ने वक्त गिर जाता है और घायल हो जाता है तो यह अप्रिय घटना के दायरे में आएगी और रेलवे को इसका भुगतान करना होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सुनवाई के दौरान अदालत ने दिया आदेश </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">दरअसल अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया है। इसके तहत कोर्ट ने वेस्टर्न रेलवे को एक 75 वर्षीय व्यक्ति को 3 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। बुजुर्ग भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में यात्रा करने के दौरान गिर गए थे और उनके पैर में चोट आ गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जानिए रेलवे का तर्क?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे ने कोर्ट में अपना तर्क दिया कि, यात्री भीड़ वाली ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। रेलवे ने बताया कि बुजुर्ग व्यक्ति चलती ट्रेन में चढ़ने के प्रयास कर रहा था. इस वजह से वह हादसे का शिकार हो गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यही नहीं पश्चिम रेलवे ने हाईकोर्ट को ये भी तर्क दिया कि, यह मामला अधिनियम की धारा 124(ए) के प्रावधानों के तहत नहीं आता है। यात्री रेलवे की ओर से बनाए गए नियमों का भी उल्लंघन कर रहा था। यही वजह है कि रेलवे की ओर से इस यात्री को मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रेलवे के तर्क पर कोर्ट ने मुआवजे का दिया आदेश </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">उच्च न्यायालय ने रेलवे की ओर से दिए गए सभी तर्कों को नकार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से अधिनियम की धारा 124(ए) के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। यही नहीं अदालत ने ये भी कहा कि, इस धारा के तहत किसी भी पीड़ित को मुआवजा देने की बात बताई गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बॉम्बे हाईखोर्ट ने कहा कि ट्रेनों में भीड़ होने के वजह से यात्री गाड़ी में चढ़ने के दौरान धक्का-मुक्की करते हैं। ऐसे में कोई यात्री ट्रेन से गिरकर घायल हो जाता है तो उसे मुआवजा मिलना ही चाहिए और इसके लिए रेलवे उत्तरदायी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>21 साल पहले हुआ था रिहा, HC ने रेप केस में दी अब सजा&#8230;</title>
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		<pubDate>Sun, 23 Dec 2018 12:30:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कहा गया है जिसने भी कोई भी कभी भी जुर्म की वारदात को अंजाम दिया है. उसे सजा भी मिलेगी. चाहे देर में मिले मगर मिलेगी ऐसा ही कुछ इस मामले में हुआ. कोर्ट के घर देर है अंधेर नहीं. ये साबित किया है बॉम्बे हाई कोर्ट ने. 21 साल पहले 14 साल की एक लड़की ... <a title="21 साल पहले हुआ था रिहा, HC ने रेप केस में दी अब सजा&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bombay-high-court-finds-a-rape-accused-guilty-after-21-years-of-the-incident-news/" aria-label="Read more about 21 साल पहले हुआ था रिहा, HC ने रेप केस में दी अब सजा&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कहा गया है जिसने भी कोई भी कभी भी जुर्म की वारदात को अंजाम दिया है. उसे सजा भी मिलेगी. चाहे देर में मिले मगर मिलेगी ऐसा ही कुछ इस मामले में हुआ. कोर्ट के घर देर है अंधेर नहीं. ये साबित किया है बॉम्बे हाई कोर्ट ने. 21 साल पहले 14 साल की एक लड़की का रेप करने के आरोप में नासिक के रहने वाले मछिन्द्र सोनावन को सजा सुनाई गई है. 1996 के हुए इस रेप में सोनावन को 1997 में ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था. उस वक़्त सोनावन की उम्र 19 साल थी. अब वो 40 साल का हो चुका है.</p>
<p>जस्टिस इंद्रजीत महंती और विश्वास जाधव की खंडपीठ ने वर्ष 1997 में ट्रायल कोर्ट द्वारा मछिंद्र सोनवाने (जो घटना के वक्त 19 वर्ष का था और अब उम्र 41 वर्ष है) को रिहा करने के फैसले पलटते हुए उसे रेप के मामले दोषी पाया और सात वर्ष कैद की सजा सुनाई। दो दशकों की देरी होने पर आरोपी के ऊपर दया बरतने संबंधी याचिका को बेंच ने खारिज कर दिया और सोनवाने को निर्देश दिया कि वह पीड़िता को 1 लाख रुपये बतौर मुआवजा दे। सोनवाने को सरेंडर करने के लिए एक महीने का वक्त दिया गया है।</p>
<p><strong>&#8216;सेशन कोर्ट ने अपनाया लापरवाहीपूर्ण रवैया&#8217;</strong><br />
हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में सेशन कोर्ट ने गलती करते हुए लापरवाही भरा रवैया अपनाया है। सत्र न्यायालय द्वारा एक एक्सरे रिपोर्ट को आधार मानकर आरोपी को बरी कर दिया गया था, जिसमें पीड़िता की उम्र 14 वर्ष दिखाई गई है। दो से तीन साल के अंतराल की गलती को ध्यान में रखकर पीड़िता की उम्र को 16 वर्ष निर्धारित किया गया, जो कि उस वक्त सहमति की आयु थी।</p>
<p><strong>&#8216;महाराष्ट्र सरकार की योजना के अंतर्गत पीड़िता को दिलाएं मदद&#8217;<br />
</strong>हाई कोर्ट ने लीगल सर्विसेज अथॉरिटी से कहा है कि वह पीड़िता का पता लगाएं और उसे महाराष्ट्र सरकार द्वारा रेप पीड़िताओं के लिए योजना के अंतर्गत मदद भी मुहैया कराएं। बता दें कि 1 दिसंबर 1996 को पीड़िता अपने घर में अकेली थी। सिर में दर्द होने पर वह दवा लेने के लिए आरोपी की शॉप पर पहुंची। सोनवाने ने इसी दौरान किशोरी को अपने कमरे में खींच लिया और उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद वह पीड़िता को उसके घर के बाहर फेंक आया। पीड़ित किशोरी परिजनों को घर के बाहर खून से लथपथ हालत में मिली। आनन-फानन में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर इस बात की पुष्टि हुई कि बलपूर्वक उसके साथ रेप किया गया है।</p>
<p><strong>&#8216;गिरफ्तारी के बाद 1997 में आरोपी को कर दिया गया था रिहा&#8217;</strong><br />
पुलिस ने आरोपी को रेप मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद 1997 में उसे सेशन कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया। ट्रायल कोर्ट ने एक्सरे ऑसिफिकेशन को आधार मानकर यह निर्धारित कर लिया कि पीड़िता की उम्र 14 वर्ष थी। इतना ही नहीं, सेशन कोर्ट ने उम्र में दो-तीन साल की त्रुटि मानते हुए पीड़िता की उम्र 16 निर्धारित कर आरोपी के पक्ष में फैसला सुना दिया। 2013 से पहले सहमति से सेक्स की उम्र 16 वर्ष थी, जिसे बढ़ाकर 18 कर दिया गया है।</p>
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