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		<title>&#8216;हमारे सब्र को कमजोरी न समझे केंद्र&#8217; &#8211;  राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी पर भड़के उमर अब्दुल्ला, 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हल्ला बोलेगी NC!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 10:51:46 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://encrypted-tbn0.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcQJqRZ5wURzgl43hnw-HN8mqBCadibfKane56IEBkushQ&amp;s=10" alt="Omar Abdullah said- It is foolish to demand restoration of 370 from BJP" width="851" height="640" /></p>
<p><strong>श्रीनगर :</strong> जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य का दर्जा भाजपा के शासन का बंधक नहीं बन सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि केंद्र सरकार उनके सब्र को कमजोरी न समझे। उन्होंने सवाल किया कि परिसीमन और विधानसभा चुनाव पूरे होने के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा क्यों पूरा नहीं किया गया?</p>
<p>मुख्यमंत्री उमर शनिवार को हजरतबल में बेगम अकबर जहां अब्दुल्ला (मादर-ए-मेहरबान) की 26वीं पुण्यतिथि पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पार्टी जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने को लेकर 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि अब राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को शांतिपूर्ण तरीके से तेज करने का समय आ गया है। अपनी दादी बेगम अकबर जहां अब्दुल्ला को श्रद्धांजलि देते हुए उमर ने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक इतिहास के सबसे मुश्किल दौर में भी अडिग रहीं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने टकराव के बजाय बातचीत से मुद्दों को सुलझाने की कोशिश में लगभग दो साल बिता दिए हैं। उन्होंने कहा, &#8220;मैंने बार-बार कहा कि हम टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत से अपने अधिकार हासिल करना चाहते हैं। मैंने जानबूझकर केंद्र को अपने वादे पूरे करने का समय दिया। लेकिन आज हम विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर हैं क्योंकि साफ तौर पर कुछ बदल गया है।&#8221;</p>
<p>एक गंभीर आरोप लगाते हुए उमर ने कहा कि पैसे और राजनीतिक पदों का लालच देकर नेशनल कॉन्फ्रेंस में दलबदल कराने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया, &#8220;वे एक बार फिर नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि जम्मू के हमारे एक एमएलए को उनके साथ शामिल होने पर 20-30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया था। उन्हें लगता है कि लोगों की अंतरात्मा इतनी सस्ती है।&#8221;</p>
<p>अनुच्छेद 370 पर उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही का जिक्र करते हुए उमर ने कहा कि केंद्र ने खुद तीन चरणों का रोडमैप तैयार किया था, जिसमें परिसीमन, चुनाव और राज्य का दर्जा बहाल करना शामिल था। उन्होंने पूछा कि परिसीमन पूरा हो चुका है। चुनाव हो चुके हैं और जनता ने हमें जनादेश दिया है। अब हमारी क्या गलती है? राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा अभी भी क्यों लटका हुआ है?</p>
<p>मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया राजनीतिक कारणों से प्रेरित थी और इसका मकसद भाजपा को फायदा पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि हमें पता था कि परिसीमन में हेरफेर की जाएगी। इसका मकसद एक राजनीतिक पार्टी को फायदा पहुंचाना था। इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर की जनता ने अपना फैसला सुनाया और न सिर्फ भाजपा को बल्कि उसकी सभी टीमों को भी नकार दिया।</p>
<p>चुनी हुई सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उमर ने कहा कि अगर अहम फैसले राजभवन से ही लिए जाते रहे तो चुनाव कराने का कोई खास मकसद नहीं रह जाता। अगर सब कुछ राजभवन से ही चलाना है, अगर कर्मचारियों को वहीं से बर्खास्त करना है और सारे बड़े फैसले वहीं लेने हैं तो चुनाव क्यों कराए गए? हमें सरकार में क्यों लाया गया जबकि हमारे हाथ पीछे बंधे हुए थे? उन्होंने कहा कि आज हमें जानबूझकर या अनजाने में यह बताया जा रहा है कि बिना विरोध के कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। हम अपनी स्थिति की तुलना लद्दाख से करते हैं और सवाल पूछने पर मजबूर हो जाते हैं।</p>
<p>लद्दाख से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जहां केंद्र इस केंद्र शासित प्रदेश के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर चर्चा करने को तैयार है, वहीं जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा बहाल होने का इंतजार कर रहा है। हमें बताया जाता है कि एक देश में एक ही व्यवस्था होनी चाहिए फिर भी लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा उपाय दिए जा रहे हैं जबकि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा तक नहीं दिया जा रहा है। उमर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के सामने लगातार यह मुद्दा उठाया है। प्रधानमंत्री, अमित शाह या किसी भी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के साथ ऐसी एक भी बैठक नहीं हुई, जिसमें उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा न उठाया हो। हर बार हमें यही कहा जाता है कि सही समय आने पर ऐसा होगा। मैं उनसे पूछता हूं कि आखिर वह सही समय कब आएगा?</p>
<p>मुख्यमंत्री उमर ने भाजपा से साफ तौर पर कहा कि यदि उनकी मंशा यह है कि जब तक जम्मू-कश्मीर में उनकी(भाजपा) सरकार नहीं बन जाती, तब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाएगा, तो इसे सार्वजनिक रूप से यह कहने की हिम्मत दिखाएं। उमर ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को जेल जाते देखा, 1984 में नेशनल कॉन्फ्रेंस को बंटते देखा फिर भी कभी सब्र का रास्ता नहीं छोड़ा। उन्होंने हमें सबसे बड़ी सीख यह दी कि सब्र कमजोरी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना बंद कर देंगे। अगर कोई हमारे सब्र को कमजोरी समझता है तो वह गलतफहमी में है। हमारा सब्र ही हमारी ताकत है और ईश्वर ने चाहा तो यही हमारी जीत का कारण बनेगा।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि हमारी मांग सीधी-सी है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाए। हमारा सब्र अभी भी बना हुआ है, लेकिन इसे कभी भी हार या समर्पण नहीं समझा जाना चाहिए।</p>
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		<title>केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: लिथियम-आयन सेल और डिस्प्ले असेंबली के सामान पर बीसीडी माफ, घट सकती है इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमत</title>
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		<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 08:23:21 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="" src="https://hs.sangraha.net//NBImages/3000/2026/07/09/2e56ec012e2954fa5c4cafe026e1c442_1715863241.jpg" width="787" height="506" /></p>
<p><strong>नई दिल्ली : </strong>केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल्स (स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड) और स्मार्ट टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान से बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) हटा दी है। यह छूट 31 मार्च, 2029 तक लागू रहेगी, जो गुरुवार से प्रभावी हो गई है।</p>
<p>वित्त मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले इन तीन प्रमुख कलपुर्जों के विनिर्माण में उपयोग होने वाले सामान पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) छूट लागू करने के लिए तीन अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं। अधिसूचना के मुताबिक सरकार ने देश में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता कम करने के लिए डिस्प्ले असेंबली, लिथियम-आयन सेल और इंडक्टर कॉयल मॉड्यूल के निर्माण में उपयोग होने वाले सामान पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) माफ कर दिया है।</p>
<p>मंत्रालय के मुताबिक सरकार ने यह कदम स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल्स और स्मार्ट टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। यह छूट उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है। बीसीडी में शुल्क में ये छूट आयात पर निर्भरता कम करेगी और स्थानीय विनिर्माण के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स परिवेश को मजबूत करेगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>MGNREGA पर बड़ा बदलाव: मोदी सरकार नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में, जानिए क्या है प्लान</title>
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		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 07:38:21 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="400" height="225" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/12/mgnrega-name-changed.avif" alt="" class="wp-image-507598" style="aspect-ratio:1.7778317938745747;width:635px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/12/mgnrega-name-changed.avif 400w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/12/mgnrega-name-changed-300x169.avif 300w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) को खत्म कर नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में है। सरकार ने इससे जुड़ी बिल की कॉपी लोकसभा सांसदों के बीच सर्कुलेट की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से ये खबर दी। इस बिल को संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। बिल का नाम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025’ रखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले 12 दिसंबर को खबर आई थी कि केंद्रीय कैबिनेट ने मनरेगा का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना रखा है। हालांकि, सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन सामने नहीं आया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रियंका बोली थीं- नाम बदलने का तर्क समझ नहीं आता</p>



<p class="wp-block-paragraph">जब मनरेगा के नाम बदलने की जानकारी सामने आई थी, तब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा था कि उन्हें MGNREGA योजना का नाम बदलने के फैसले के पीछे का तर्क समझ नहीं आता। इससे फिजूल खर्च होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा- मुझे समझ नहीं आता कि इसके पीछे क्या मानसिकता है। सबसे पहले, यह महात्मा गांधी का नाम है और जब इसे बदला जाता है, तो सरकार के संसाधन फिर से इस पर खर्च होते हैं। ऑफिस से लेकर स्टेशनरी तक, सब कुछ का नाम बदलना पड़ता है, इसलिए यह एक बड़ी, महंगी प्रक्रिया है। तो ऐसा करने का क्या फायदा है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस ने कहा था- मोदी सरकार ने हमारी 32 योजनाओं के नाम बदले</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने मनरेगा का नाम बदले जाने पर एक वीडियो शेयर किया था। जिसमें उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने MGNREGA का नाम बदल कर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार स्कीम रखा है। इसी मनरेगा को मोदी कांग्रेस की विफलताओं का पुलिंदा बताते थे लेकिन असलियत यह है कि यही मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी साबित हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस की स्कीमों का नाम बदल कर उनको अपना बना लेने की मोदी जी की यह लत बड़ी पुरानी है यही तो किया है उन्होंने 11 साल, UPA की स्कीमों का नाम बदल अपना ठप्पा लगा कर पब्लिसिटी करना।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रिया ने X पर उन योजनाओं के नाम शेयर किए, जिन्हें कांग्रेस ने शुरू किया था। साथ ही दावा किया है कि इनके नाम बदले गए हैं।</p>
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		<title>केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अब पराली जलाने पर देना होगा 30,000 रुपये तक जुर्माना</title>
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		<pubDate>Thu, 07 Nov 2024 08:43:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिल्ली और आसपास के राज्यों में हवा की गुणवत्ता खराब होने के बाद भी खेत में पराली जलाने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर लगने वाले जुर्माने की रकम को दोगुना कर ... <a title="केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अब पराली जलाने पर देना होगा 30,000 रुपये तक जुर्माना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/big-decision-of-central-government-now-fine-up-to-rs-30000-will-have-to-be-paid-for-burning-stubble/" aria-label="Read more about केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अब पराली जलाने पर देना होगा 30,000 रुपये तक जुर्माना">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="826" height="465" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-07-at-1.57.14-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-471273" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-07-at-1.57.14-PM.jpeg 826w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-07-at-1.57.14-PM-300x169.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-07-at-1.57.14-PM-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-07-at-1.57.14-PM-150x84.jpeg 150w" sizes="auto, (max-width: 826px) 100vw, 826px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली और आसपास के राज्यों में हवा की गुणवत्ता खराब होने के बाद भी खेत में पराली जलाने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर लगने वाले जुर्माने की रकम को दोगुना कर दिया है,</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिससे किसानों को 30,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। 2 से 5 एकड़ भूमि वाले किसानों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर पराली जलाने पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQM) अधिनियम 2021 के तहत लिया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहले जुर्माने की राशि इससे कम थी, अब सीधे दोगुनी हो गई है। दो दिन पहले पराली जाने की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मध्य प्रदेश सबसे है। मध्य प्रदेश में धान की फसल के बाद खेत में पराली जलाने के 10,000 से अधिक मामले सामने आए, जो पंजाब से ज्यादा है। सोमवार तक मध्य प्रदेश में एक ही दिन में पराली जलाने की 506 घटनाएं दर्ज की गईं थी। यह उस दिन देश में सबसे अधिक था। पंजाब में 4 नवंबर तक पराली जलाने के मामले घटकर 262 हो गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन, मुस्लिम लीग पर लगाया बैन</title>
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		<pubDate>Wed, 27 Dec 2023 11:15:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाह बोले: किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने मुस्लिम लीग जम्मू कश्मीर (मसर्रत आलम गुट) को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। मोदी सरकार ने यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधि रोकथान कानून (यूएपीए) के तहत की है। इस संगठन के सदस्यों पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप ... <a title="केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन, मुस्लिम लीग पर लगाया बैन" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/big-action-by-central-government-ban-on-muslim-league/" aria-label="Read more about केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन, मुस्लिम लीग पर लगाया बैन">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/12/shah.jpg" alt="" class="wp-image-435091" width="839" height="551" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/12/shah.jpg 640w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/12/shah-150x98.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 839px) 100vw, 839px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शाह बोले: किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने मुस्लिम लीग जम्मू कश्मीर (मसर्रत आलम गुट) को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। मोदी सरकार ने यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधि रोकथान कानून (यूएपीए) के तहत की है। इस संगठन के सदस्यों पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी देते हुए कहा है की ये आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा, मुस्लिम लीग जम्मू कश्मीर (मसरत आलम गुट) को यूएपीए के तहत एक गैरकानूनी संघठन घोषित किया गया है। यह संगठन और इसके सदस्य जम्मू-कश्मीर में राष्ट्र-विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों में शामिल हैं। ये आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करते हैं और लोगों को भड़काते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब किसी को बख्शा नहीं जाएगा<br></strong>केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का संदेश स्पष्ट है कि हमारे राष्ट्र की एकता, संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उसे कानून के पूर्ण प्रकोप का सामना करना पड़ेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मसर्रत आलम जेल में है बंद<br></strong>कट्टरपंथी सैयद अली शाह के निधन के बाद कट्टरपंथी हुर्रियत का अंतरिम चेयरमैन बनाये गए मसर्रत आलम साल 2015 से ही जेल में हैं। पहले कुछ समय तक वह कोट भलवाल जेल में रहा और पिछले चार वर्षो से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। मसर्रत आलम साल 2008 और 2010 में कश्मीर में हुए हिंसक प्रदर्शनों का वह मुख्य सूत्रधार रहा है।</p>
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		<title>केंद्र सरकार ने कहा- जनता को राजनीतिक दलों के धन का स्रोत जानने का अधिकार नहीं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Oct 2023 11:40:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड योजना के तहत मिलने वाले धन के स्रोत के बारे में नागरिकों को जानने का अधिकार नहीं है। सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत लोगों को सूचना ... <a title="केंद्र सरकार ने कहा- जनता को राजनीतिक दलों के धन का स्रोत जानने का अधिकार नहीं" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/central-government-said-public-has-no-right-to-know-the-source-of-money-of-political-parties-news-in-hindi/" aria-label="Read more about केंद्र सरकार ने कहा- जनता को राजनीतिक दलों के धन का स्रोत जानने का अधिकार नहीं">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-713.png" alt="" class="wp-image-416433" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-713.png 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-713-768x432.png 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-713-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड योजना के तहत मिलने वाले धन के स्रोत के बारे में नागरिकों को जानने का अधिकार नहीं है। सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत लोगों को सूचना पाने का अधिकार नहीं है। शीर्ष न्यायालय में दाखिल की गई एक दलील में वेंकटरमणी ने कहा कि तार्किक प्रतिबंध की स्थिति नहीं होने पर किसी भी चीज और प्रत्येक चीज के बारे में जानने का अधिकार नहीं हो सकता। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम किसी कानून या अधिकार का उल्लंघन नहीं करती है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ ने 31 अक्टूबर यानी आज से मामले की सुनवाई शुरू की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इलेक्टोरल बॉन्ड के तहत राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को सार्वजनिक बनाने की मांग करने वाली याचिका पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने रविवार को अपने विचार रखे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि संविधान ने नागरिकों को इन फंड्स का सोर्स जानने का मौलिक अधिकार नहीं दिया है। उन्होंने कोर्ट को चेतावनी दी कि इलेक्टोरल बॉन्ड को रेगुलेट करने के लिए पॉलिसी डोमेन में न आए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रविवार को उन्होंने कहा कि नागरिकों को ये अधिकार तो है कि वे उम्मीदवारों की क्रिमिनल हिस्ट्री जानें, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि उन्हें पार्टियों की इनकम और पैसों के सोर्स जानने का अधिकार है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दरअसल, 31 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ इलेक्टोरल बॉन्ड मामले की सुनवाई करेगी। इसमें जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्कीम से किसी के मौजूदा अधिकारों का उल्लंघन नहीं</p>



<p class="wp-block-paragraph">वेंकटरमनी ने कहा कि ये स्कीम किसी भी व्यक्ति के मौजूदा अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती है। साथ ही यह स्कीम डोनर्स को पहचान उजागर न करने की सुविधा भी देती है। ये क्लीन मनी के डोनेशन को बढ़ावा देता है। इससे डोनर अपने टैक्स देने के दायित्व जानेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि ये स्कीम किसी भी प्रकार के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती है। अटॉर्नी ने कहा कि कोर्ट राज्य की कार्रवाई की समीक्षा केवल तब ही करता है जब मौजूदा अधिकारों का टकराव हो।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मामले में कांग्रेस-बीजेपी की ओर से बयानबाजी</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने बीजेपी पर निशाने साधा। उन्होंने &#8216;X&#8217; पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बीजेपी चोरी-छिपे, गलत तरीके से और साजिश के तहत बड़े-बड़े कॉर्पोरेट से कमाए हुए पैसों की फंडिंग करेगी। देखते हैं कौन जीतता है, बड़े कॉर्पोरेट या छोटे नागरिक जो पार्टियों को डोनेशन देने में गर्व महसूस करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं, चिदंबरम के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस ज्यादा पारदर्शी और लोकतांत्रिक पॉलिटिकल फंडिंग सिस्टम को लागू करने की कोशिशों का विरोध करती है। सच्चा लोकतंत्र तब है, जब छोटे व्यापारी और बड़े कॉर्पोरेट किसी भी पार्टी को डोनेशन दे सकें और अगर कोई अलग पार्टी सत्ता में आती है तो उन्हें अपने से बदला लिए जाने का डर न हो।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मामले की अहमियत समझते हुए संविधान बेंच के पास भेजा</p>



<p class="wp-block-paragraph">CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस केस में 16 अक्टूबर को सुनवाई की थी। तब उन्होंने कहा था कि इस याचिका की अहमियत समझते हुए इस मामले को कम से कम पांच जजों की बेंच के सामने रखा जाना चाहिए। मामले की सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की गई। साथ ही 5 जजों की संविधान बेंच का गठन किया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">याचिकाकर्ताओं के वकील की मांग</p>



<p class="wp-block-paragraph">याचिका दाखिल करने वाली संस्था ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) की तरफ से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस प्रकार की चुनावी फंडिंग भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगी। कुछ कंपनियां उन पार्टियों में अज्ञात तरीकों से फंडिंग करेंगी, जिन पार्टियों की सरकार से उन्हें फायदा होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहले भी एडवोकेट भूषण ने SC को बताया था कि 2024 के आम चुनावों के लिए चुनावी बॉन्ड योजना शुरू होने से पहले इस मामले पर फैसला किया जाना जरूरी है, जिसके बाद कोर्ट ने इस पर अंतिम सुनवाई करने का फैसला किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले पर चार जनहित याचिकाएं लंबित हैं। इनमें से एक याचिकाकर्ता ने मार्च में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि चुनावी बॉन्ड से पार्टियों को अब तक 12 हजार करोड़ की फंडिंग हुई है और इसका दो-तिहाई हिस्सा एक खास पार्टी को मिला है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">क्या है पूरा मामला</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस योजना को 2017 में ही चुनौती दी गई थी, लेकिन सुनवाई 2019 में शुरू हुई। 12 अप्रैल, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पॉलिटिकल पार्टियों को निर्देश दिया कि वे 30 मई, 2019 तक में एक लिफाफे में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारी चुनाव आयोग को दें। हालांकि, कोर्ट ने इस योजना पर रोक नहीं लगाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाद में दिसंबर, 2019 में याचिकाकर्ता एसोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने इस योजना पर रोक लगाने के लिए एक आवेदन दिया। इसमें मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया कि किस तरह चुनावी बॉन्ड योजना पर चुनाव आयोग और रिजर्व बैंक की चिंताओं को केंद्र सरकार ने दरकिनार किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पर सुनवाई के दौरान पूर्व CJI एसए बोबडे ने कहा कि मामले की सुनवाई जनवरी 2020 में होगी। चुनाव आयोग की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए सुनवाई को फिर से स्थगित कर दिया गया। इसके बाद से अभी तक इस मामले को कोई सुनवाई नहीं हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चुनावी बॉन्ड क्या है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">2017 के बजट में उस वक्त के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी या इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को पेश किया था। 29 जनवरी 2018 को केंद्र सरकार ने इसे नोटिफाई किया। ये एक तरह का प्रोमिसरी नोट होता है। जिसे बैंक नोट भी कहते हैं। इसे कोई भी भारतीय नागरिक या कंपनी खरीद सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर आप इसे खरीदना चाहते हैं तो आपको ये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चुनी हुई ब्रांच में मिल जाएगा। इसे खरीदने वाला इस बॉन्ड को अपनी पसंद की पार्टी को डोनेट कर सकता है। बस वो पार्टी इसके लिए एलिजिबल होनी चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिस पार्टी को डोनेट कर रहे हैं वो एलिजिबल है, ये कैसे पता चलेगा?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बॉन्ड खरीदने वाला 1 हजार से लेकर 1 करोड़ रुपए तक का बॉन्ड खरीद सकता है। खरीदने वाले को बैंक को अपनी पूरी KYC डीटेल में देनी होती है। खरीदने वाला जिस पार्टी को ये बॉन्ड डोनेट करना चाहता है, उसे पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम 1% वोट मिला होना चाहिए। डोनर के बॉन्ड डोनेट करने के 15 दिन के अंदर इसे उस पार्टी को चुनाव आयोग से वैरिफाइड बैंक अकाउंट से कैश करवाना होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पर विवाद क्यों</p>



<p class="wp-block-paragraph">2017 में अरुण जेटली ने इसे पेश करते वक्त दावा किया कि इससे राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाली फंडिंग और चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। ब्लैक मनी पर अंकुश लगेगा। दूसरी ओर इसका विरोध करने वालों का कहना है कि इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान जाहिर नहीं की जाती है, इससे ये चुनावों में काले धन के इस्तेमाल का जरिया बन सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ लोगों का आरोप है कि इस स्कीम को बड़े कॉर्पोरेट घरानों को ध्यान में रखकर लाया गया है। इससे ये घराने बिना पहचान उजागर हुए जितना मर्जी उतना चंदा राजनीतिक पार्टियों को दे सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोई भी भारतीय इसे खरीद सकता है।<br>बैंक को KYC डीटेल देकर 1 हजार से 1 करोड़ रुपए तक के बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं।<br>बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान गुप्त रहती है।<br>इसे खरीदने वाले व्यक्ति को टैक्स में रिबेट भी मिलती है।<br>ये बॉन्ड जारी करने के बाद 15 दिन तक वैलिड रहते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजनीतिक दलों की चुनावी फंडिंग का मामला:सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी याचिका संविधान पीठ को भेजी, 31 अक्टूबर को सुनवाई</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों की चुनावी फंडिंग से जुड़ी इलेक्टोरेल बॉन्ड स्कीम को चुनौती देने वाली याचिकाएं संविधान पीठ को भेज दी हैं। इस पर अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सोमवार 16 अक्टूबर को इस पर सुनवाई की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फ्रीबीज मामला…SC बोला- हाईकोर्ट में याचिका क्यों नहीं लगाई:निर्देश दिया- पार्टियों को दिए मेमो में मुख्यमंत्री ऑफिस की जगह राज्य सरकार लिखें</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को फ्रीबीज मुद्दे (चुनाव से पहले की जाने वाली घोषणाओं) पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि हाईकोर्ट में याचिका क्यों नहीं लगाई?</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुफ्त रेवड़ी मामले पर सख्त हुआ SC, चुनावी घोषणाओं पर राजस्थान, मध्य प्रदेश संग केंद्र सकार को जारी नोटिस</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/sc-becomes-strict-on-free-rewari-issue-notice-issued-to-central-government-along-with-rajasthan-madhya-pradesh-on-election-announcements-news-in-hindi/</link>
		
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		<pubDate>Fri, 06 Oct 2023 10:16:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुफ्त की रेवड़ी बांटने जैसी घोषणाओं और योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत ने इनसे 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते ... <a title="मुफ्त रेवड़ी मामले पर सख्त हुआ SC, चुनावी घोषणाओं पर राजस्थान, मध्य प्रदेश संग केंद्र सकार को जारी नोटिस" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/sc-becomes-strict-on-free-rewari-issue-notice-issued-to-central-government-along-with-rajasthan-madhya-pradesh-on-election-announcements-news-in-hindi/" aria-label="Read more about मुफ्त रेवड़ी मामले पर सख्त हुआ SC, चुनावी घोषणाओं पर राजस्थान, मध्य प्रदेश संग केंद्र सकार को जारी नोटिस">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="820" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-131.png" alt="" class="wp-image-406614" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-131.png 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-131-768x525.png 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-131-220x150.png 220w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुफ्त की रेवड़ी बांटने जैसी घोषणाओं और योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत ने इनसे 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने नई जनहित याचिका को पहले से चल रही अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। सभी मामलों की सुनवाई अब एकसाथ होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनवरी 2022 में BJP नेता अश्विनी उपाध्याय फ्रीबीज के खिलाफ एक जनहित याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अपनी याचिका में उपाध्याय ने चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों के वोटर्स से फ्रीबीज या मुफ्त उपहार के वादों पर रोक लगाने की अपील की। इसमें मांग की गई है कि चुनाव आयोग को ऐसी पार्टियां की मान्यता रद्द करनी चाहिए। केंद्र सरकार ने अश्विनी से सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से फ्रीबीज की परिभाषा तय करने की अपील की। केंद्र ने कहा कि अगर फ्रीबीज का बंटना जारी रहा तो ये देश को &#8216;भविष्य की आर्थिक आपदा&#8217; की ओर ले जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">फ्रीबीज मामले की सुनवाई पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना की अगुआई वाली जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्यीय बेंच ने अगस्त 2022 में सुनवाई शुरू की थी। 3 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्रीबीज मुद्दे पर फैसले के लिए एक समिति गठित की जानी चाहिए। इसमें केंद्र, राज्य सरकारें, नीति आयोग, फाइनेंस कमीशन, चुनाव आयोग, RBI, CAG और राजनीतिक पार्टियां शामिल हों।</p>



<p class="wp-block-paragraph">11 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#8216;गरीबों का पेट भरने की जरूरत है, लेकिन लोगों की भलाई के कामों को संतुलित रखने की जरूरत है, क्योंकि फ्रीबीज की वजह से इकोनॉमी पैसे गंवा रही है। हम इस बात से सहमत हैं कि फ्रीबीज और वेलफेयर के बीच अंतर है।’ 17 अगस्त 2022: कोर्ट ने कहा, &#8216;कुछ लोगों का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को वोटर्स से वादे करने से नहीं रोका जा सकता…अब ये तय करना होगा कि फ्रीबीज क्या है। क्या सबके लिए हेल्थकेयर, पीने के पानी की सुविधा…मनरेगा जैसी योजनाएं, जो जीवन को बेहतर बनाती हैं, क्या उन्हें फ्रीबीज माना जा सकता है?&#8217; कोर्ट ने इस मामले के सभी पक्षों से अपनी राय देने को कहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">23 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि आप सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाते? राजनीतिक दलों को ही इस पर सबकुछ तय करना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">26 अगस्त 2022: पूर्व सीजेआई एनवी रमना ने मामले को नई बेंच में रैफर कर दिया। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि कमेटी बनाई जा सकती है, लेकिन क्या कमेटी इसकी परिभाषा सही से तय कर पाएगी। रमना ने ये भी कहा था कि इस केस में विस्तृत सुनवाई की जरूरत है और इसे गंभीरता से लेना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चुनाव आयोग ने कहा था- फ्री स्कीम्स की परिभाषा आप ही तय करें</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान 11 अगस्त को चुनाव आयोग ने कहा था कि फ्रीबीज पर पार्टियां क्या पॉलिसी अपनाती हैं, उसे रेगुलेट करना चुनाव आयोग के अधिकार में नहीं है। चुनावों से पहले फ्रीबीज का वादा करना या चुनाव के बाद उसे देना राजनीतिक पार्टियों का नीतिगत फैसला होता है। इस बारे में नियम बनाए बिना कोई कार्रवाई करना चुनाव आयोग की शक्तियों का दुरुपयोग करना होगा। कोर्ट ही तय करें कि फ्री स्कीम्स क्या है और क्या नहीं। इसके बाद हम इसे लागू करेंगे।</p>
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		<title>बरेली : भाजपा की टिफिन बैठक में गिनाई केंद्र सरकार की नौ साल की उपलब्धियां</title>
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		<pubDate>Fri, 16 Jun 2023 08:21:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बरेली। भारतीय जनता पार्टी कैंट विधानसभा टिफिन बैठक का आयोजन चंद्रकांता सभागार सिविल लाइंस में किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद संतोष गंगवार ने कहा कि केंद्र सरकार के नौ वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। मोदी सरकार ने देश की पहचान ... <a title="बरेली : भाजपा की टिफिन बैठक में गिनाई केंद्र सरकार की नौ साल की उपलब्धियां" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bareilly-bjps-tiffin-meeting-counted-the-achievements-of-the-central-government-in-nine-years-news-in-hindi/" aria-label="Read more about बरेली : भाजपा की टिफिन बैठक में गिनाई केंद्र सरकार की नौ साल की उपलब्धियां">Read more</a>]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">बरेली। भारतीय जनता पार्टी कैंट विधानसभा टिफिन बैठक का आयोजन चंद्रकांता सभागार सिविल लाइंस में किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद संतोष गंगवार ने कहा कि केंद्र सरकार के नौ वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। मोदी सरकार ने देश की पहचान विश्व में अलग बनाई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">टिफिन बैठक से बढ़ेगा आपसी भाईचारा : संजीव</p>



<p class="wp-block-paragraph">कैंट विधायक संजीव अग्रवाल ने कहा कि टिफिन बैठक का मकसद आपसी भाईचारा मजबूत करना है। सब के प्रयास से ही केंद्र में भाजपा की सरकार है। सरकार की नौ वर्ष की उपलब्धियां आप सबके सामने हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने विश्व में अलग पहचान बनकर देश का मान बढ़ाया है। महानगर अध्यक्ष डॉक्टर के एम अरोड़ा ने कहा कि आज संगठन एक मजबूत स्तंभ के रूप में खड़ा है। लोकसभा का चुनाव नजदीक है। आपको चुनाव में पूर्ण रूप से सहयोग करना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कैंट विधानसभा की टिफिन बैठक में पहुंचे भाजपा के दिग्गज नेता</p>



<p class="wp-block-paragraph">मीडिया प्रभारी बंटी ठाकुर ने बताया कि टिफिन बैठक में साथ बैठक कर भोजन करें। बैठक में पूर्व महापौर कुंवर सुभाष पटेल, डॉ सीपीएस चौहान, डॉ प्रमेंद्र महेश्वरी, राज बहादुर सक्सेना, प्रदीप अग्रवाल, डॉ तृप्ति गुप्ता, प्रभु दयाल लोधी, प्रत्तेश पांडे, अधीर सक्सेना,अरुण कश्यप,मीडिया प्रभारी बंटी ठाकुर, अमरीश कठेरिया, अजय प्रताप सिंह, सोनू कालरा, जेपीएस पाल, सूर्यकांत मौर्य, विष्णु शर्मा, विनोद रस्तोगी, के एल गे‌रा , वेद प्रकाश वर्मा, चंद्रमौली मिश्रा, सोम नारायण शर्मा, कन्हैया राजपूत, विजय कमांडो एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता, मंडल अध्यक्ष व पार्षद गण मौजूद थे।</p>
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		<title>पीलीभीत : सपा जिला अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग की</title>
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		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 12:53:25 +0000</pubDate>
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<p class="wp-block-paragraph">दैनिक भास्कर ब्यूरो</p>



<p class="wp-block-paragraph">पीलीभीत। जिले में हो रही बारिश और फसल बर्बादी के बाद समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष दिलाए जाने की मांग की है। खेतों में तैयार गेहूं की फसल और सरसों के साथ दलहनी फसलें खराब हो जाने के बाद किसानों पर आर्थिक संकट का बोझ बढ़ गया है। बैंक से लोन लेकर तैयार की गई फसलों पर बिन मौसम बरसात बादलों ने पानी फेर दिया है। सपा के निवर्तमान जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने राज्य और केंद्र सरकार से किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि बेमौसम की बारिश के बाद किसान आर्थिक तंगी, मानसिक और शारीरिक रूप से दुर्बल महसूस कर रहा है। जिले भर में एक तरफा सर्वे कराने के बाद सरकार को किसानों के लिए मुआवजा राशि देकर उनका दर्द बांटना चाहिए। जगदेव सिंह ने खुद को किसान का बेटा कहते हुए बारिश से हुए नुकसान का दर्द समझने की बात कही है।</p>
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		<title>कानपुर: कोहरे को लेकर केन्द्र सरकार की जारी गाइड लाइन जारी</title>
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		<pubDate>Wed, 21 Dec 2022 08:21:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कानपुर। शीत ऋतु आते ही कोहरे ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। कोहरे में वाहनो दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में बढ़ोत्तरी देखी जाती है जिसके चलते सड़क यात्रा करने में कोहरा एक बड़ी समस्या साबित होता है। कोहरे में दृश्यता कुछ ही मीटर रह जाती है और अक्सर सड़क दुर्घटनायें हो जाती है। इन ... <a title="कानपुर: कोहरे को लेकर केन्द्र सरकार की जारी गाइड लाइन जारी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/kanpur-guidelines-issued-by-the-central-government-regarding-fog-news-in-hindi/" aria-label="Read more about कानपुर: कोहरे को लेकर केन्द्र सरकार की जारी गाइड लाइन जारी">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/12/961260-fog.webp" alt="" class="wp-image-303623" width="838" height="479"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">कानपुर। शीत ऋतु आते ही कोहरे ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। कोहरे में वाहनो दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में बढ़ोत्तरी देखी जाती है जिसके चलते सड़क यात्रा करने में कोहरा एक बड़ी समस्या साबित होता है। कोहरे में दृश्यता कुछ ही मीटर रह जाती है और अक्सर सड़क दुर्घटनायें हो जाती है। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रदेश के सभी आरटीओ के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग की गई और सडक दुर्घटना को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केन्द्र सरकार द्वारा जारी गजट के दौरान वीडियो कांफ्रेसिंग की गई जिसके बारे में जानकारी देते हुए एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय सुनीलदत्त ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत कोहरे में चलने वाले वाहनो को लेकर कहा है कि यदि जरूरी न हो तो कोहरे में यात्रा न करें। कोहरे में चलने की विवशता होने पर अपने वाहन को अत्यन्त धीमी गति से चलायें और सतर्क रहें। वाहन की खिड़की के शीशे थोड़ा खुला रखें तापमान को एसी और हीटर के बीच सैटिंग पर रखे जिससे उसकी हवा विंडस्क्रीन की ओर कर दें, इससे विंडस्क्रीन पर भाप नहीं जमेगी। फ्रन्ट डिमिस्टर और रियर डिफॉगर का प्रयोग करें, अपने वाहन के फॉग लैम्प और हेडलैम्प को ऑन कर दें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हेडलाइट को लो बीम पर रखें। अपने वाहन की हैजर्ड लाईट्स को ऑन कर दें और पार्किंग लाईट्स भी जला लें, वाहन चलाते समय स्टीरियो या एफ.एम. को बन्द कर दें और धीमी गति से एक दूसरे के पीछे चलें तथा अपने वाहन के आगे एवं पीछे चल रहे वाहनों से एक निश्चित दूरी बनाये रखें। </p>



<p class="wp-block-paragraph">किसी भी वाहन को जल्दबाजी में ओवरटेक न करें और सड़क के बीच में खड़े खराब वाहनों व सड़क किनारे पार्क किये गये वाहनों से सावधान रहें। कार्मशियल वाहनो में रिफलेक्टर टेप लगा होना जरूरी है क्योंकि इससे पीछे आने वाले वाहन को पता चल जाता है कि आगे एक भारी वाहन चल रहा है। इन सभी सावधनियों को आम नागरिक से लेकर बडे वाहन चालको को बरती है जिससे वह दुर्घटनाओं का शिकार न हो सके और सुरक्षित रहे।</p>
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