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	<title>Chandrayaan-3 &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 के बाद अब गगनयान है तैयार</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Feb 2024 08:48:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दो बड़े मिशन चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 की सफलता पूर्वक लॉन्च के बाद अब इसरो गगणयन को सफल बनाने में जुटा हुआ है गगनयान देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है जिसके तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की सैर कराई जाएगी। मिशन के लिए 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा पर मानव को ... <a title="चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 के बाद अब गगनयान है तैयार" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/after-chandrayaan-3-and-aditya-l1-now-gaganyaan-is-ready/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 के बाद अब गगनयान है तैयार">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1600" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-28-at-12.44.25-PM1.jpeg" alt="" class="wp-image-449976" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-28-at-12.44.25-PM1.jpeg 1600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-28-at-12.44.25-PM1-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-28-at-12.44.25-PM1-1536x864.jpeg 1536w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-28-at-12.44.25-PM1-390x220.jpeg 390w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-28-at-12.44.25-PM1-150x84.jpeg 150w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">दो बड़े मिशन चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 की सफलता पूर्वक लॉन्च के बाद अब इसरो गगणयन को सफल बनाने में जुटा हुआ है गगनयान देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है जिसके तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की सैर कराई जाएगी। मिशन के लिए 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा पर मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार (27 फरवरी) को केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने गगनयान मिशन के लिए चारों एस्ट्रोनॉट्स प्रशांत नायर, अंगद प्रताप, अजित कृष्णन और शुभांशु शुक्ला को एस्ट्रोनॉट विंग्स पहनाए. पीएम नरेंद्र मोदी ने इन्हें एस्ट्रोनॉट विंग्स देकर इन्हे दुनिया के सामने पेश किया.बता दे की गगनयान मिशन के सफल होने के बाद, भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने खुद चालक दल अंतरिक्ष यान लॉन्च किया है।  </p>



<p class="wp-block-paragraph">फ़िलहाल इस लिस्ट में केवल अमेरिका, रूस और चीन का नाम ही शामिल हैं। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने एक बयान में कहा था कि गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्री 2025 में उड़ान भरने का इंतजार कर रहे हैं। सोमनाथ ने कहा था, &#8216;चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग के बाद इसरो गगनयान मिशन को संभव बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। और अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाना इस मिशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसे संभव बनाने के लिए हमें बहुत सारी तकनीक विकसित करने की जरूरत है और हम इसे संभव बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। फ़िलहाल चारों एस्ट्रोनॉट्स कि बेंगलुरु के एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी में ट्रेनिंग चल रही है।</p>
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		<title>चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह</title>
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		<pubDate>Thu, 16 Nov 2023 13:14:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बेंगलुरु। चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हो गया है। यह पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया है। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को ... <a title="चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/part-of-chandrayaan-3s-rocket-out-of-control-isro-gives-big-reason-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-240.png" alt="" class="wp-image-422442" width="844" height="439" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बेंगलुरु। चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हो गया है। यह पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया है। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को तय कक्षा में स्थापित किया था। ISRO ने बताया- यही हिस्सा बुधवार 15 नवंबर की दोपहर 2:42 बजे पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हुआ और पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को तय कक्षा में स्थापित किया था। ISRO ने बताया- यही हिस्सा बुधवार 15 नवंबर की दोपहर 2:42 बजे पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ। यह हिस्सा प्रशांत महासागर में गिर गया। इसके अनियंत्रित होने की वजह अभी साफ नहीं हुई है। इसका फाइनल ग्राउंड ट्रैक भारत के ऊपर से होकर नहीं गुजरा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पैसिवेशन की प्रक्रिया से गुजरी थी अनियंत्रित हुए रॉकेट की बॉडी</p>



<p class="wp-block-paragraph">ISRO के बयान के मुताबिक चंद्रयान-3 को लॉन्च किए जाने के 124 दिन बाद NORAD id 57321 नाम की यह रॉकेट बॉडी पृथ्वी में री-एंटर हुई। चंद्रयान-3 के ऑर्बिट में स्थापित होने के बाद अपर स्टेज को निष्क्रिय (पैसिवेशन) करने की प्रक्रिया से भी गुजारा गया था। पैसिवेशन में रॉकेट में मौजूद प्रोपेलैंट और एनर्जी सोर्स को हटाया गया, ताकि अंतरिक्ष में विस्फोट के खतरे को कम किया जा सके। यह प्रक्रिया भी इंटर-एजेंसी स्पेस डेब्रिस कोऑर्डिनेशन एजेंसी (IADC) और यूनाइटेड नेशंस की गाइडलाइंस के तहत आती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग से लैंडिंग तक 10 मोमेंट्स: साउथ पोल पर यान पहुंचते ही साइंटिस्ट बोले- इंडिया ऑन द मून</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 ने लॉन्च होने के 41वें दिन 23 अगस्त को चंद्रमा पर लैंडिंग की। इसी के साथ भारत चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बन गया। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 की साउथ पोल पर लैंडिंग के बाद कहा- PM सर नमस्कार। हमने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है। इंडिया इज ऑन द मून। चंदा मामा दूर के नहीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिलकर भावुक हुए:कहा- चांद पर लैंडर जहां उतरा, वह &#8216;शिवशक्ति पॉइंट&#8217; कहलाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अगस्त को ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का नाम &#8216;तिरंगा&#8217; होगा।</p>
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		<title>इसरो ने कहा- चंद्रयान-3 को अब कल जगाने की होगी कोशिश</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/isro-said-now-efforts-will-be-made-to-wake-up-chandrayaan-3-tomorrow-news-in-hindi/</link>
		
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		<pubDate>Fri, 22 Sep 2023 12:27:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर से इसरो अब कल यानी 23 सितंबर को संपर्क की कोशिश करेगा। पहले ये कोशिश 22 सितंबर की शाम को की जानी थी, लेकिन कुछ कारणों से इसे आज के लिए टाल दिया गया। स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के डायरेक्टर नीलेश देसाई ने यह जानकारी दी है। 14 दिनों की रात ... <a title="इसरो ने कहा- चंद्रयान-3 को अब कल जगाने की होगी कोशिश" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/isro-said-now-efforts-will-be-made-to-wake-up-chandrayaan-3-tomorrow-news-in-hindi/" aria-label="Read more about इसरो ने कहा- चंद्रयान-3 को अब कल जगाने की होगी कोशिश">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1200" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/image-210.png" alt="" class="wp-image-399865" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/image-210.png 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/image-210-768x576.png 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर से इसरो अब कल यानी 23 सितंबर को संपर्क की कोशिश करेगा। पहले ये कोशिश 22 सितंबर की शाम को की जानी थी, लेकिन कुछ कारणों से इसे आज के लिए टाल दिया गया। स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के डायरेक्टर नीलेश देसाई ने यह जानकारी दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">14 दिनों की रात के बाद चांद के साउथ पोल पर एक बार फिर सूरज की रोशनी पहुंचने लगी है। ऐसे में इसरो को स्लीप मोड पर डाले गए विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के जागने की उम्मीद है। इसरो ने 4 सितंबर को लैंडर को स्लीप मोड में डाला था। इससे पहले 2 सितंबर को रोवर को स्लीप मोड में डाला गया था। इसरो ने लैंडर-रोवर के रिसीवर ऑन रखे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रोवर ऐसी दिशा में कि सूर्य का प्रकाश सौर पैनल पर पड़े</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो ने लैंडर और रोवर को स्लीप मोड में डालने से पहले बैटरी को फुल चार्ज रखा था। रोवर को ऐसी दिशा में रखा गया था कि सूर्योदय होने पर सूर्य का प्रकाश सीधे सौर पैनलों पर पड़े। उम्मीद की जा रही है कि 22 सितंबर को ये फिर से काम करना शुरू करेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">14 जुलाई 2023 को लॉन्च हुआ था चंद्रयान-3 मिशन</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर लॉन्च किया गया था। आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से LVM3 रॉकेट के जरिए इसे स्पेस में भेजा था। 23 अगस्त को इसने चांद के साउथ पोल पर लैंडिंग की थी। भारत ऐसा करने वाला पहला देश है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साउथ पोल पर सल्फर खोजा, विक्रम की दोबारा लैंडिंग</p>



<p class="wp-block-paragraph">सतह और गहराई के तापमान में बड़ा अंतर: 28 अगस्त को लैंडर में लगे चास्टे पेलोड से पता चला था कि चंद्रमा की सतह और अलग-अलग गहराई पर तापमान में काफी अंतर है। सतह पर तापमान करीब 50 डिग्री सेल्सियस तो 80mm की गहराई में माइनस 10°C था। चांद की सतह पर सल्फर खोजा: इसरो ने 29 अगस्त को बताया था कि रोवर पर लगे लिब्स पेलोड ने साउथ पोल पर सल्फर का पता लगाया है। इसके अलावा एल्युमीनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन का भी पता चला था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक और पेलोड से सल्फर की पुष्टि: इसरो ने 31 अगस्त को बताया था कि रोवर पर लगे एक अन्य उपकरण अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (APXS) ने यहां सल्फर की पुष्टि की है। APXS ने इसके साथ ही कुछ अन्य माइनर एलिमेंट्स का भी पता लगाया था।रोवर और पेलोड का वाइब्रेशन रिकॉर्ड: इसरो ने 31 अगस्त को बताया था कि लैंडर पर लगे लूनर सिस्मिक एक्टिविटी पेलोड (ILSA) ने रोवर और अन्य पेलोड के मूवमेंट से हुए वाइब्रेशन को रिकॉर्ड किया। 26 अगस्त को चांद पर हुई एक अन्य घटना भी रिकॉर्ड की गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा कम घना: 31 अगस्त को इसरो ने बताया था लैंडर पर लगे लैंगम्यूर प्रोब (RAMBHA-LP) पेलोड ने साउथ पोल रीजन में लूनर प्लाज्मा वातावरण का पहला माप लिया था। इसमें पता चला कि चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा कम घना है। विक्रम की दोबारा लैंडिंग कराई: इसरो ने 3 सितंबर को विक्रम लैंडर की चांद की सतह पर दोबारा लैंडिंग कराई थी। ISRO ने बताया कि लैंडर को 40 सेमी ऊपर उठाया गया और 30 से 40 सेमी की दूरी पर सुरक्षित लैंड करा दिया। इसे हॉप एक्सपेरिमेंट यानी जंप टेस्ट कहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग 4 फेज में हुई थी</p>



<p class="wp-block-paragraph">ISRO ने 23 अगस्त को 30 किमी की ऊंचाई से शाम 5 बजकर 44 मिनट पर ऑटोमैटिक लैंडिंग प्रोसेस शुरू की और अगले 20 मिनट में सफर पूरा कर लिया था। चंद्रयान-3 ने 40 दिन में 21 बार पृथ्वी और 120 बार चंद्रमा की परिक्रमा की। चंद्रयान ने चांद तक 3.84 लाख किमी दूरी तय करने के लिए 55 लाख किमी की यात्रा की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रफ ब्रेकिंग फेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">लैंडर लैंडिंग साइट से 750 Km दूर था। ऊंचाई 30 Km और रफ्तार 6,000 Km/hr।<br>ये फेज साढ़े 11 मिनट तक चला। इस दौरान विक्रम लैंडर के सेंसर्स कैलिब्रेट किए गए।<br>लैंडर को हॉरिजॉन्टल पोजिशन में 30 Km की ऊंचाई से 7.4 Km दूरी तक लाया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐटीट्यूड होल्डिंग फेज:</p>



<p class="wp-block-paragraph">विक्रम ने चांद की सतह की फोटो खींची और पहले से मौजूद फोटोज के साथ कंपेयर किया।<br>चंद्रयान-2 के टाइम में ये फेज 38 सेकेंड का था इस बार इसे 10 सेकेंड का कर दिया गया था।<br>10 सेकेंड में विक्रम लैंडर की चंद्रमा से ऊंचाई 7.4 Km से घटकर 6.8 Km पर आ गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फाइन ब्रेकिंग फेज:</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये फेज 175 सेकेंड तक चला जिसमें लैंडर की स्पीड 0 हो गई।<br>विक्रम लैंडर की पोजिशन पूरी तरह से वर्टिकल कर दी गई।<br>सतह से विक्रम लैंडर की ऊंचाई करीब 1 किलोमीटर रह गई</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों का ही क्यों?</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों का ही था। ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर धरती के 14 दिन के बराबर एक दिन होता है। इतनी ही बड़ी रात होती है। यानी चंद्रमा पर 14 दिन तक रात और 14 दिन तक सूर्य की रोशनी रहती है। रात में चांद के साउथ पोल पर तापमान माइनस 200 डिग्री तक गिर जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रोवर-लैंडर सूर्य की रोशनी में तो पावर जनरेट कर सकते हैं, लेकिन रात होने पर पावर जनरेशन रुक जाता है। पावर जनरेशन रुकने से इलेक्ट्रॉनिक्स भयंकर ठंड झेल नहीं पाते और खराब हो सकते हैं। अमेरिका और रूस जैसे देश पावर के लिए न्यूक्लियर फ्यूल का भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उनके मिशन ज्यादा समय तक चलते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चांद पर भारत का यह तीसरा मिशन था, पहले मिशन में पानी खोजा था</p>



<p class="wp-block-paragraph">2008 में चंद्रयान-1 को लॉन्च किया गया था। इसमें एक प्रोब की क्रैश लैंडिंग कराई गई थी जिसमें चांद पर पानी के बारे में पता चला। फिर 2019 में चंद्रयान-2 चांद के करीब पहुंचा, लेकिन लैंड नहीं कर पाया। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 चांद पर लैंड कर गया। चांद पर सकुशल पहुंचने का संदेश भी चंद्रयान-3 ने भेजा। कहा- &#8216;मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रमा पर इंसान बस सकता है या नहीं: पृथ्वी जैसा ग्रह खोजने का रास्ता भी निकालेगा; 14 दिन क्या-क्या करेगा चंद्रयान-3</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है। चंद्रयान 3 मिशन का सबसे बड़ा उद्देश्य चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक को परखना और दर्शाना था। भारत इस मकसद में कामयाब हो चुका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">टर्मिनल डिसेंट</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस फेज में लैंडर को करीब 150 मीटर की ऊंचाई तक लाया गया। सब कुछ ठीक होने पर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंड कराया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों का ही क्यों?</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों का ही था। ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर धरती के 14 दिन के बराबर एक दिन होता है। इतनी ही बड़ी रात होती है। यानी चंद्रमा पर 14 दिन तक रात और 14 दिन तक सूर्य की रोशनी रहती है। रात में चांद के साउथ पोल पर तापमान माइनस 200 डिग्री तक गिर जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रोवर-लैंडर सूर्य की रोशनी में तो पावर जनरेट कर सकते हैं, लेकिन रात होने पर पावर जनरेशन रुक जाता है। पावर जनरेशन रुकने से इलेक्ट्रॉनिक्स भयंकर ठंड झेल नहीं पाते और खराब हो सकते हैं। अमेरिका और रूस जैसे देश पावर के लिए न्यूक्लियर फ्यूल का भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उनके मिशन ज्यादा समय तक चलते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चांद पर भारत का यह तीसरा मिशन था, पहले मिशन में पानी खोजा था</p>



<p class="wp-block-paragraph">2008 में चंद्रयान-1 को लॉन्च किया गया था। इसमें एक प्रोब की क्रैश लैंडिंग कराई गई थी जिसमें चांद पर पानी के बारे में पता चला। फिर 2019 में चंद्रयान-2 चांद के करीब पहुंचा, लेकिन लैंड नहीं कर पाया। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 चांद पर लैंड कर गया। चांद पर सकुशल पहुंचने का संदेश भी चंद्रयान-3 ने भेजा। कहा- &#8216;मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रमा पर इंसान बस सकता है या नहीं: पृथ्वी जैसा ग्रह खोजने का रास्ता भी निकालेगा; 14 दिन क्या-क्या करेगा चंद्रयान-3</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है। चंद्रयान 3 मिशन का सबसे बड़ा उद्देश्य चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक को परखना और दर्शाना था। भारत इस मकसद में कामयाब हो चुका है।</p>
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		<title>चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज विक्रम लैंडर की क्लिक की  तस्वीर, ISRO ने दी जानकारी</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Aug 2023 13:08:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज सुबह विक्रम लैंडर की एक तस्वीर क्लिक की। रोवर पर 2 नेविगेशन कैमरे लगे हैं जिनसे ये फोटो क्लिक की गई है। इसमें विक्रम लैंडर पर लगा पेलोड &#8216;चास्टे&#8217; सतह पर ड्रिलिंग करता दिख रहा है। ये पेलोड सतह और गहराई में तापमान मापता है। चंद्रयान-3 का लैंडर 23 ... <a title="चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज विक्रम लैंडर की क्लिक की  तस्वीर, ISRO ने दी जानकारी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/pragyan-rover-of-chandrayaan-3-clicked-the-picture-of-vikram-lander-today-isro-gave-information-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज विक्रम लैंडर की क्लिक की  तस्वीर, ISRO ने दी जानकारी">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/chaste_1693384587.jpg" alt="" class="wp-image-391824" width="843" height="633" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज सुबह विक्रम लैंडर की एक तस्वीर क्लिक की। रोवर पर 2 नेविगेशन कैमरे लगे हैं जिनसे ये फोटो क्लिक की गई है। इसमें विक्रम लैंडर पर लगा पेलोड &#8216;चास्टे&#8217; सतह पर ड्रिलिंग करता दिख रहा है। ये पेलोड सतह और गहराई में तापमान मापता है। चंद्रयान-3 का लैंडर 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा पर उतरा था। इसके बाद रोवर बाहर आया था। इसरो ने लैंडिंग के करीब 14 घंटे बाद लैंडर के रोवर से बाहर आने की पुष्टि की थी। रोवर के कैमरों को इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स सिस्टम प्रयोगशाला ने विकसित किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चांद के साउथ पोल पर सल्फर की मौजूदगी</p>



<p class="wp-block-paragraph">चांद पर पहुंचने के छठे दिन (29 अगस्त) चंद्रयान ने दूसरा ऑब्जर्वेशन भेजा था। इसके मुताबिक चांद के साउथ पोल पर सल्फर की मौजूदगी है। चंद्रमा की सरफेस पर एल्युमीनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम, टाइटेनियम की मौजूदगी का भी पता चला है। इसके अलावा चांद की मिट्टी में मैगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन भी मौजूद हैं, जबकि हाइड्रोजन की खोज जारी है। यानी अब तक कुल 9 एलिमेंट चांद की मिट्टी में मिले हैं। प्रज्ञान रोवर पर लगे LIBS यानी लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप पेलोड ने ये ऑब्जर्वेशन भेजे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस ऑक्सीजन से सीधे सांस नहीं ले सकते</p>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि चांद की मिट्टी पर मिली ऑक्सीजन उस फॉर्म में नहीं है कि सीधे सांस ली जा सके। ये ऑक्साइड फॉर्म में है। इससे पहले नासा ने भी चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन का पता लगाया था। इसलिए इसरो को पहले से ही यहां ऑक्सीजन मिलने की संभावना थी। ऑक्साइड एक केमिकल कंपाउंड की कैटेगरी है। इसकी संरचना में एलिमेंट के साथ एक या ज्यादा ऑक्सीजन एटम होते हैं। जैसे कि Li2O, CO2, H2O, आदि। H2O यानी पानी होता है। इसीलिए इसरो ऑक्सीजन मिलने के बाद अब H यानी हाइड्रोजन की खोज कर रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस प्रयोग में होता है लेजर का इस्तेमाल</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस प्रयोग में सैंपल सरफेस यानी चांद की मिट्टी या पत्थर पर हाई-फोकस्ड लेजर का इस्तेमाल किया जाता है। सरफेस के गरम होने से प्लाज्मा बनता है। इसी से बने स्पेक्ट्रम की स्टडी कर एलिमेंट का पता लगाया जाता है। अलग-अलग एलिमेंट के अलग-अलग स्पेक्ट्रम होते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रमा की सतह और अलग-अलग गहराई पर तापमान में काफी अंतर</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले 27 अगस्त को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर में लगे चास्टे पेलोड ने चंद्रमा के तापमान से जुड़ा पहला ऑब्जर्वेशन भेजा था। ChaSTE यानी चंद्र सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट के मुताबिक, चंद्रमा की सतह और अलग-अलग गहराई पर तापमान में काफी अंतर है। चंद्रमा के साउथ पोल की सतह पर तापमान करीब 50 डिग्री सेल्सियस है। वहीं, 80mm की गहराई में माइनस 10°C टेम्परेचर रिकॉर्ड किया गया। चास्टे में 10 टेम्परेचर सेंसर लगे हैं, जो 10cm यानी 100mm की गहराई तक पहुंच सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ChaSTE पेलोड को स्पेस फिजिक्स लैबोरेटरी, VSSC ने अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के साथ मिलकर बनाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साउथ पोल का तापमान पता चलने का फायदा क्या?</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने बताया था कि उन्होंने चंद्रमा के साउथ पोल को इसलिए चुना, क्योंकि यहां भविष्य में इंसानों को बसाने की क्षमता हो सकती है। साउथ पोल पर सूर्य का प्रकाश कम समय के लिए रहता है। अब जब चंद्रयान-3 वहां के तापमान समेत अन्य चीजों की स्पष्ट जानकारी भेज रहा है, तो वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश करेंगे कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की मिट्टी वास्तव में कितनी क्षमता रखती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1 सेमी प्रति सेकेंड की गति से चलता है रोवर</p>



<p class="wp-block-paragraph">छह पहियों वाले प्रज्ञान रोवर का वजन 26 किलो है। लैंडिंग के करीब 14 घंटे बाद गुरुवार सुबह ISRO ने रोवर के बाहर आने की पुष्टि की थी। लैंडर 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा पर उतरा था। ये 1 सेमी प्रति सेकेंड की गति से चलता है और अपने आस-पास की चीजों को स्कैन करने के लिए नेविगेशन कैमरों का इस्तेमाल करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के साथ कुल 7 पेलोड भेजे गए हैं</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन के तीन हिस्से हैं। प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर और रोवर। इन पर कुल 7 पेलोड लगे हैं। एक पेलोड, जिसका नाम शेप है, वह चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल पर लगा है। ये चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाकर धरती से आने वाले रेडिएशन की जांच कर रहा है। वहीं, लैंडर पर तीन पेलोड लगे हैं। रंभा, चास्टे और इल्सा। प्रज्ञान पर दो पेलोड हैं। एक इंस्ट्रूमेंट अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का भी है, जिसका नाम है लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर अरे। ये चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगा हुआ है। ये चंद्रमा से पृथ्वी की दूरी मापने के काम आता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग 4 फेज में हुई</p>



<p class="wp-block-paragraph">ISRO ने 23 अगस्त को 30 किमी की ऊंचाई से शाम 5 बजकर 44 मिनट पर ऑटोमैटिक लैंडिंग प्रोसेस शुरू की और अगले 20 मिनट में सफर पूरा कर लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 ने 40 दिन में 21 बार पृथ्वी और 120 बार चंद्रमा की परिक्रमा की। चंद्रयान ने चांद तक 3.84 लाख किमी दूरी तय करने के लिए 55 लाख किमी की यात्रा की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रफ ब्रेकिंग फेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">लैंडर लैंडिंग साइट से 750 Km दूर था। ऊंचाई 30 Km और रफ्तार 6,000 Km/hr।<br>ये फेज साढ़े 11 मिनट तक चला। इस दौरान विक्रम लैंडर के सेंसर्स कैलिब्रेट किए गए।<br>लैंडर को हॉरिजॉन्टल पोजिशन में 30 Km की ऊंचाई से 7.4 Km दूरी तक लाया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐटीट्यूड होल्डिंग फेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">विक्रम ने चांद की सतह की फोटो खींची और पहले से मौजूद फोटोज के साथ कंपेयर किया।<br>चंद्रयान-2 के टाइम में ये फेज 38 सेकेंड का था इस बार इसे 10 सेकेंड का कर दिया गया था।<br>10 सेकेंड में विक्रम लैंडर की चंद्रमा से ऊंचाई 7.4 Km से घटकर 6.8 Km पर आ गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फाइन ब्रेकिंग फेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये फेज 175 सेकेंड तक चला जिसमें लैंडर की स्पीड 0 हो गई।<br>विक्रम लैंडर की पोजिशन पूरी तरह से वर्टिकल कर दी गई।<br>सतह से विक्रम लैंडर की ऊंचाई करीब 1 किलोमीटर रह गई</p>



<p class="wp-block-paragraph">टर्मिनल डिसेंट</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस फेज में लैंडर को करीब 150 मीटर की ऊंचाई तक लाया गया।<br>सब कुछ ठीक होने पर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंड कराया गया।<br>चांद पर भारत का यह तीसरा मिशन, पहले मिशन में पानी खोजा था<br>2008 में चंद्रयान-1 को लॉन्च किया गया था। इसमें एक प्रोब की क्रैश लैंडिंग कराई गई थी जिसमें चांद पर पानी के बारे में पता चला। फिर 2019 में चंद्रयान-2 चांद के करीब पहुंचा, लेकिन लैंड नहीं कर पाया। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 चांद पर लैंड कर गया। चांद पर सकुशल पहुंचने का संदेश भी चंद्रयान-3 ने भेजा। कहा- &#8216;मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">14 दिन का है चंद्रयान-3 मिशन</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों का है। दरअसल, चंद्रमा पर 14 दिन तक रात और 14 दिन तक उजाला रहता है। जब यहां रात होती है तो तापमान -100 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है। चंद्रयान के लैंडर और रोवर अपने सोलर पैनल्स से पावर जनरेशन कर रहे हैं। इसलिए वो 14 दिन तो पावर जनरेट कर लेंगे, लेकिन रात होने पर पावर जनरेशन प्रोसेस रुक जाएगी। पावर जनरेशन नहीं होगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स भयंकर ठंड को झेल नहीं पाएंगे और खराब हो जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन के 3 में से 2 मकसद पूरे:इसरो ने अब तक विक्रम-प्रज्ञान से लिए गए 10 फोटो और 4 वीडियो शेयर किए</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के 3 उद्देश्य थे, जिनमें से 2 सफलतापूर्वक पूरे हो गए हैं- 1. चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग। 2. चांद की सतह पर रोवर को चलाने में कामयाब रहे। 3. चांद की सतह पर वैज्ञानिक परीक्षण फिलहाल चल रहा है। सभी पेलोड सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं।</p>
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		<title>चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न मनाना स्टूडेंट्स को पड़ा भारी, कश्मीरी छात्रों ने धारदार हथियार से किया हमला</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Aug 2023 13:31:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सोशल मीडिया पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉलेज कैंपस में छात्रों की भीड़ अल्लाह हू अकबर का नारा लगा रही है, इस दौरान अफरातफरी का माहौल है। दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो राजस्थान की मेवाड़ यूनिवर्सिटी का है। ... <a title="चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न मनाना स्टूडेंट्स को पड़ा भारी, कश्मीरी छात्रों ने धारदार हथियार से किया हमला" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/celebrating-the-success-of-chandrayaan-3-students-had-a-hard-time-kashmiri-students-attacked-with-sharp-weapons-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न मनाना स्टूडेंट्स को पड़ा भारी, कश्मीरी छात्रों ने धारदार हथियार से किया हमला">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-29-at-7.00.51-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-391519" width="837" height="478" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">सोशल मीडिया पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉलेज कैंपस में छात्रों की भीड़ अल्लाह हू अकबर का नारा लगा रही है, इस दौरान अफरातफरी का माहौल है। दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो राजस्थान की मेवाड़ यूनिवर्सिटी का है। जहां चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग का जश्न मना रहे छात्रों पर कश्मीरी छात्रों ने हमला कर दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पूजा कपिल मिश्रा नाम की वेरिफाइड यूजर ने वीडियो शेयर कर लिखा- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे एक छात्र पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग का जश्न मनाने पर कश्मीरी छात्रों ने हमला कर दिया। धारदार हथियार से वार के बाद आयुष नाम के छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है, उसे बेहतर इलाज के लिए उदयपुर रेफर किया गया है। यूनिवर्सिटी में धार्मिक नारे आसानी से सुने जा सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जी न्यूज राजस्थान ने भी अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर इसी दावे के साथ पोस्ट शेयर किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-29-at-6.55.14-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-391517" width="838" height="956" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">सच बेधड़क नाम के न्यूज पोर्टल ने भी इस खबर को शेयर किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">25 अगस्त की रात का ये मामला चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी का है। जहां मेस में खाना खाने के दौरान लोकल और कश्मीरी स्टूडेंट्स आपस में भिड़ गए थे। झगड़े में दोनों पक्षों के 36 स्टूडेंट्स को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। एग्रीकल्चर बीएससी थर्ड ईयर के स्टूडेंट कृष्ण पाल शर्मा और इलेक्ट्रिकल डिप्लोमा कर रहे फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट आयुष शर्मा को ज्यादा चोट आई थी। दोनों को चित्तौड़गढ़ के जिला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आयुष की स्थिति गंभीर होने पर उसे उदयपुर रेफर किया गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">घायल कृष्णपाल शर्मा ने बताया कि 25 अगस्त की रात मेस में राहुल नाम का एक स्टूडेंट खाना खा रहा था। इस दौरान कुछ कश्मीरी लड़कों ने उसे धक्का मारा। इससे राहुल के हाथ से प्लेट छूट गई और कश्मीरी लड़कों के कपड़ों में दाग लग गया। चार-पांच कश्मीरी लड़कों ने राहुल के साथ मारपीट कर दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उनके पास धारदार हथियार भी थे। उसको बचाने एक और लड़का गया था। उसका नाम नहीं पता है। उसकी भी पिटाई की गई। जब दोनों ने अपने दोस्तों को बुलाया तो कश्मीरी लड़कों ने अंदर से कॉलेज का गेट बंद करके विवादित नारे लगाए। इस मामले से जुड़ी पूरी खबर 3 दिन पहले भास्कर ने अपनी वेबसाइट पर पब्लिश की थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पड़ताल के अगले चरण में हमने गंगरार SHO रूप सिंह से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा गलत है, झगड़ा मेस में खाने को लेकर हुआ था। इस दौरान भास्कर संवाददाता ने घायल छात्र कृष्णपाल से भी बात की, उसने भी वायरल दावे को गलत बताया। साफ है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा गलत और भ्रामक है।</p>
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		<title>चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिले प्रधानमंत्री मोदी, कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Aug 2023 10:55:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का ... <a title="चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिले प्रधानमंत्री मोदी, कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/prime-minister-modi-met-the-scientists-of-chandrayaan-3-said-the-more-i-appreciate-you-the-less-it-is-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिले प्रधानमंत्री मोदी, कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-390364" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM.jpeg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM-390x220.jpeg 390w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का नाम &#8216;तिरंगा&#8217; होगा। मोदी ने 45 मिनट के भाषण में कहा, &#8216;मैं साउथ अफ्रीका में था, फिर ग्रीस के कार्यक्रम में चला गया, लेकिन मेरा मन पूरी तरह आपके साथ ही लगा हुआ था। मेरा मन कर रहा था आपको नमन करूं। लेकिन मैं भारत में… (रुंधे गले से) भारत में आते ही… जल्द से जल्द आपके दर्शन करना चाहता था।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी बोले, &#8216;मैं आपको सैल्यूट करना चाहता था। सैल्यूट आपके परिश्रम को… सैल्यूट आपके धैर्य को.. सैल्यूट आपकी लगन को… सैल्यूट आपकी जीवटता को… सैल्यूट आपके जज्बे को….</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाद में शनिवार दोपहर पीएम मोदी बेंगलुरु से दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने पालम एयरपोर्ट पर एक जनसभा को संबोधित किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.24.28-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-390371" width="847" height="635" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">PM सुबह 7.30 बजे कमांड सेंटर पहुंचे, इसरो चीफ की पीठ थपथपाई</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर बेंगलुरु के ISRO के कमांड सेंटर पहुंचे। यहां वे चंद्रयान-3 की टीम के वैज्ञानिकों से मिले। इसरो कमांड सेंटर पर इसरो चीफ एस सोमनाथ ने PM मोदी को गुलदस्ता देकर स्वागत किया। PM ने सोमनाथ को गले लगाया और पीठ थपथपाई। उन्हें चंद्रयान 3 मिशन के सफल होने पर बधाई दी। इस दौरान उन्होंने टीम के सभी वैज्ञानिकों के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी की स्पीच 8 बड़ी बातें, वैज्ञानिकों से कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान की सफल लैंडिंग पर: आप देश को जिस ऊंचाई पर लेकर गए, ये कोई साधारण सफलता नहीं। अनंत अंतरिक्ष में भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य का शंखनाद है। इंडिया इज ऑन द मून, वी हैव अवर नेशनल प्राइड प्लेस्ड ऑन मून। हम वहां पहुंचे जहां कोई नहीं पहुंचा था। हमने वो किया जो पहले कभी किसी ने नहीं किया था। ये आज का भारत है निर्भीक भारत, जुझारू भारत। ये वो भारत है जो नया सोचता है नए तरीके से सोचता है। जो डॉर्क जोन में जाकर भी दुनिया में रोशनी की किरण फैला देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिकों की सराहना में: मेरी आंखों के सामने 23 अगस्त का वो दिन, वो एक-एक सेकेंड बार-बार घूम रहा, जब टचडाउन कन्फर्म हुआ। जिस तरह देश में लोग उछल पड़े वो दृश्य कौन भूल सकता है। वो पल अमर हो गया। वो पल इस सदी के प्रेरणादायक पलों में एक है। हर भारतीय को लग रहा था कि विजय उसकी अपनी है। ये सब मुमकिन बनाया है आप सब ने। देश के मेरे वैज्ञानिकों ने ये मुमकिन बनाया है। मैं आप सबका जितना गुणगान करूं वो कम है। मैं आपकी जितनी सराहना करूं वो कम है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर: साथियों मैंने वो फोटो देखी, जिसमें हमारे मून लैंडर ने अंगद की तरह चंद्रमा पर मजबूती से अपना पैर जमाया। एक तरफ विक्रम का विश्वास है, तो दूसरी तरफ प्रज्ञान का पराक्रम है। हमारा प्रज्ञान चंद्रमा पर अपने पदचिह्न छोड़ रहा है। मानव सभ्यता में पहली बार धरती के लाखों साल के इतिहास में उस स्थान की तस्वीर मानव अपनी आंखों से देख रहा है। ये तस्वीर दुनिया को दिखाने का काम भारत ने किया है। भारत की साइंटिफिक स्पिरिट पर: आज पूरी दुनिया भारत की साइंटिफिक स्पिरिट का, हमारी टेक्नोलॉजी का, हमारे साइंटिफिक टेंपरामेंट का लोहा मान चुकी है। हमारा मिशन जिस क्षेत्र को एक्सप्लोर करेगा, उससे सभी देशों के लिए मून मिशन के नए रास्ते खुलेंगे। यह चांद के रहस्यों को खोलेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नारी शक्ति पर: हमारे यहां कहा गया है कि निर्माण से प्रलय तक पूरी सृष्टि का आधार नारी शक्ति ही है। आप सब ने देखा है चंद्रयान-3 में देश में हमारी महिला वैज्ञानिकों ने कितनी बड़ी भूमिका निभाई। चंद्रमा का शिव शक्ति पाइंट सदियों तक भारत की इस वैज्ञानिक क्षमता का साक्षी बनेगा। ये शिव शक्ति पाइंट आने वाली पीढ़ियों को प्ररेणा देगा। हमें विज्ञान का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए ही करना है। ये हमारा सुप्रीम कमिटमेंट है।<br>थर्ड रो से पहली रो तक का सफर: आज भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश है जिसने चंद्रमा की सतह को छुआ है। एक समय था जब भारत के पास जरूरी तकनीक नहीं थी। हमारी गिनती थर्ड रो में खड़े देशों में होती थी। वहां से निकलकर भारत आज दुनिया की पांचवी सबसे बड़ इकोनॉमी बना। आज ट्रेड से लेकर टेक्नोलॉजी तक भारत की गिनती पहली रो में खड़े देशों में होती है। थर्ड रो से फर्स्ट रो में आने में इसरो की अहम भूमिका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की स्पेस इंडस्ट्री पर: अगले कुछ साल में भारत की स्पेस इंडस्ट्री एक बिलियन डॉलर से 16 बिलियन डॉलर बन जाएगी। हम लगातार रिफॉर्म कर रहे हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा पिछले चार सालों में स्पेस सेंटर के स्टार्टअप की संख्या 4 से बढ़कर 150 हो गई। अनंत आकाश में अनंत संभावनाए हैं। एक सितंबर से my gov चंद्रयान को लेकर कॉम्पिटिशन लॉन्च करने जा रही है। युवाओं को दिए दो टास्क: पहला टास्क- पुरानी खगोलीय गणनाओं को साइंटिफिक तौर पर साबित करें। भारत के पास विज्ञान के ज्ञान का खजाना है। वह गुलामी में छिप गया था उसे अब खंगालना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरा टास्क- हमारी युवा पीढ़ी को आज की आधुनिक टेक्नोलॉजी के नए आयाम देने हैं। आसमान से लेकर समंदर तक करने के लिए बहुत कुछ है। डीप अर्थ से लेकर डीप सी तक रिसर्च करें। नई पीढ़ी के कंप्यूटर बनाइए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोले- मैंने सोच लिया था, भारत जाकर पहले वैज्ञानिकों को नमन करूंगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी अपनी दो देशों की यात्रा पूरी करने के बाद ग्रीस से सीधे बेंगलुरु पहुंचे थे। सुबह 6 बजे एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उन्होंने लोगों को 10 मिनट तक संबोधित किया। उन्होंने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान का नारा लगाया। इसमें उन्होंने जय अनुसंधान का नारा भी जोड़ा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा, &#8216;सूर्योदय की बेला हो और बेंगलुरु का नजारा हो… देश के वैज्ञानिक देश को जब इतनी बड़ी सौगात देते हैं, इतनी बड़ी सिद्धि प्राप्त करते हैं, जो दृश्य मुझे बेंगलुरु में दिखाई दे रहा है, वो मुझे ग्रीस और साउथ अफ्रीका में भी देखने को मिला। आप सुबह-सुबह इतना जल्दी आए, मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। मैं दूर विदेश में था। तो मैंने सोच लिया था कि पहले भारत जाऊंगा तो पहले बेंगलुरु जाऊंगा। सबसे पहले उन वैज्ञानिकों से मिलूंगा और उन्हें नमन करूंगा।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी का रोड शो, लोग सुबह से इंतजार कर रहे थे</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों से भी मिले। करीब 5 मिनट लोगों का अभिवादन करते रहे। यहां से उनका काफिला इसरो के कमांड सेंटर के लिए निकला। एयरपोर्ट से सेंटर की दूरी 30 किमी है। इस दौरान उन्होंने रोड शो भी किया। सड़क के दोनों तरफ हजारों की संख्या में लोग खड़े रहे। इस दौरान मोदी कार के दरवाजे के पास खड़े होकर लोगों का अभिवादन करते नजर आए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिक सुबह 4 बजे ही इसरो के कमांड सेंटर पहुंचे</p>



<p class="wp-block-paragraph">बेंगलुरु के ISRO टेलिमीट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क मिशन कंट्रोल कॉम्प्लेक्स (इस्ट्रैक) के बाहर वैज्ञानिक ​​​​​​सुबह 4:30 बजे से PM मोदी के इंतजार में खड़े रहे। यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पाकिस्तान ने दो दिन बाद भारत को बधाई दी</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग के दो दिन बाद पाकिस्तान ने भारत को बधाई दी है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है। इसके लिए ISRO के वैज्ञानिक तारीफ के हकदार हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">PM ने साउथ अफ्रीका से इसरो चीफ को फोन किया था</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग के समय पीएम मोदी साउथ अफ्रीका में थे। वे जोहान्सबर्ग से इस इवेंट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम जुड़े रहे। उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों और देशवासियों को वहीं से संबोधित किया था। उन्होंने इसरो चीफ एस सोमनाथ से फोन पर बात की थी और कहा था कि जितना जल्दी होगा वे इसरो वैज्ञानिकों से मिलेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जब आप अपनी आंखों के सामने इतिहास बनते देखते हैं तो गर्व होता है- मोदी</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर कहा कि यह नए भारत के जयघोष का क्षण है। जब आप अपनी आंखों के सामने इतिहास बनते देखते हैं तो गर्व होता है। भारत की यह उड़ान चंद्रयान से भी आगे जाएगी। जल्द ही इसरो आदित्य एल-1 मिशन भी लॉन्च करेगा, जिससे सूर्य का विस्तृत अध्ययन किया जा सकेगा। इसके बाद शुक्र और सौरमंडल के सामर्थ्य को परखने के लिए दूसरे अभियान भी शुरू किए जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री ने कहा कि अब चांद से जुड़े मिथक भी बदल जाएंगे। इसके साथ ही नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी। पहले कहा जाता था कि चंदा मामा दूर के लेकिन अब लोग कहेंगे चंदा मामा बस एक टूर के।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-2 के दौरान भी बेंगलुरु पहुंचे थे मोदी</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी चंद्रयान-2 मिशन के विक्रम लैंडर की लैंडिंग को देखने के लिए 6 सितंबर, 2019 की रात को भी बेंगलुरु गए थे। हालांकि 7 सितंबर के शुरुआती घंटों में चंद्रमा की सतह से सिर्फ 2.1 किमी ऊपर, इसरो का यान से संपर्क टूट गया था, मिशन पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका था।</p>
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		<title>बहराइच : चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से युवाओं मे दिखा जोश</title>
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		<pubDate>Thu, 24 Aug 2023 11:54:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1080" height="789" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/चित्र-संख्या-003-1-1.jpg" alt="" class="wp-image-389858" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/चित्र-संख्या-003-1-1.jpg 1080w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/चित्र-संख्या-003-1-1-768x561.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बहराइच। यह भारत के लिए एक बड़ी छलांग थी क्योंकि चंद्रयान -3 लैंडर मॉड्यूल चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा, जिससे यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने वाला पहला देश बन गया। इसी खुशी के मौके तहसील मोतीपुर अंतर्गत ग्रामसभा चफ़रिया मे तिरंगा यात्रा निकालकर इसरो के सभी वैज्ञानिक व पूरे भारतवर्ष को इस ऐतिहासिक पल की बधाई दी। तिरंगा यात्रा के दौरान युवाओ मे भारत के लिए नया जोश दिखा, युवाओं ने भारत माता की जय, वन्दे मातरम् आदि के नारे भी लगाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दक्षणी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंच, हिन्दुस्तान ने रचा इतिहास</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं कार्यक्रम मे बंन्टी सिंह चौहान (सह संयोजक आईटी विभाग भाजपा मंडल चफरिया), रामचन्दर मौर्या, रविन्द्र कुमार चौहान, राहुल बाथम, संदीप पोरवाल, रामनरेश चौहान, रमाकांत चौहान, पिंकू, अंगद, अजय, लालता चौहान, बेचन चौहान, मोहन चौहान, अनुराग चौहान, लवलेश अवस्थी, अजय विश्वकर्मा, कृष्णा विश्वकर्मा, सर्वेश जायसवाल, अखिलेश जायसवाल व काफ़ी संख्या मे ग्रामीण उपस्थित रहे।</p>
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