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	<title>Citizenship Amendment Bill 2019 &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>Citizenship Amendment Bill 2019 &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>राज्यसभा से पास हुआ नागरिकाता संशोधन बिल, वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में पड़े 125 वोट&#8230;</title>
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		<pubDate>Wed, 11 Dec 2019 16:41:50 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone  wp-image-44519" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/citizenship-amendment-bill-passed-in-rajya-sabha_730X365.jpg" alt="" width="917" height="516" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/citizenship-amendment-bill-passed-in-rajya-sabha_730X365.jpg 649w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/citizenship-amendment-bill-passed-in-rajya-sabha_730X365-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/citizenship-amendment-bill-passed-in-rajya-sabha_730X365-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 917px) 100vw, 917px" /></p>
<p>राज्यसभा से बुधवार को नागरिकता (संशोधन) बिल 2019 पास हो गया। बिल के पक्ष में 117 जबकि विरोध में 92 वोट पड़े। लोकसभा में बिल के पक्ष में वोटिंग करने वाली शिवसेना ने राज्यसभा में वॉकआउट किया और वोटिंग में शामिल नहीं हुई। अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर के बाद ये बिल कानून बन जाएगा। इस कानून के जरिए पड़ोसी तीनों देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता मिल सकेगी।</p>
<p>पीएम मोदी ने बिल के पास होने के बाद खुशी जताते हुए इसे ऐतिहासिक दिन बताया।  पीएम मोदी ने कहा, &#8216;भारत और हमारे देश के लिए करुणा और भाईचारे के लिए एक ऐतिहासिक दिन! खुशी है कि राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल 2019 पास किया गया। सभी सांसदों का आभार जिन्होंने विधेयक के पक्ष में मतदान किया। यह विधेयक कई लोगों की पीड़ा को दूर करेगा जिन्होंने वर्षों तक उत्पीड़न का सामना किया।&#8217;</p>
<p><strong>बिल पर चर्चा के बाद गृहमंत्री का जवाब</strong><br />
अमित शाह ने कहा, ये बिल कभी न लाना पड़ता, ये कभी संसद में न आता, अगर भारत का बंटवारा न हुआ होता। बंटवारे के बाद जो परिस्थितियां आईं, उनके समाधान के लिए मैं ये बिल आज लाया हूं। पिछली सरकारें समाधान लाईं होती तो भी ये बिल न लाना होता। नेहरू-लियाकत समझौते के तहत दोनों पक्षों ने स्वीकृति दी कि अल्पसंख्यक समाज के लोगों को बहुसंख्यकों की तरह समानता दी जाएगी, उनके व्यवसाय, अभिव्यक्ति और पूजा करने की आजादी भी सुनिश्चित की जाएगी, ये वादा अल्पसंख्यकों के साथ किया गया। लेकिन, वहां लोगों को चुनाव लड़ने से भी रोका गया, उनकी संख्या लगातार कम होती रही। जबकि यहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, चीफ जस्टिस जैसे कई उच्च पदों पर अल्पसंख्यक रहे। यहां अल्पसंख्यकों का संरक्षण हुआ।</p>
<p><strong>नागरिकता संशोधन देश में पहली बार नहीं-शाह</strong><br />
अमित शाह ने कहा, मैं पहली बार नागरिकता के अंदर संशोधन लेकर नहीं आया हूं, ये कई बार हुआ है। उन्होंने कहा, जब श्रीलंका के लोगों को नागरिकता दी तो उस समय बांग्लादेशियों को क्यों नहीं दी? जब युगांड़ा से लोगों को नागरिकता दी तो बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोगों को क्यों नहीं दी? जब इंदिरा जी ने 1971 में बांग्लादेश के शरणार्थियों को स्वीकारा, तब श्रीलंका के शरणार्थियों को क्यों नहीं स्वीकारा। शाह ने कहा, समस्याओं को उचित समय पर ही सुलझाया जाता है। इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।</p>
<p><strong>दो साथी संसद को डरा रहे हैं-शाह</strong><br />
अमित शाह ने कहा, &#8216;अनुच्छेद 14 में जो समानता का अधिकार है वो ऐसे कानून बनाने से नहीं रोकता जो रीजनेबल क्लासिफिकेशन के आधार पर है। यहां रीजनेबल क्लासिफिकेशन आज है। हम एक धर्म को ही नहीं ले रहे हैं, हम तीनों देशों के सभी अल्पसंख्यकों को ले रहे हैं और उन्हें ले रहे हैं जो धर्म के आधार पर प्रताड़ित है। शाह ने कहा, दो साथी संसद को डरा रहे हैं कि संसद के दायरे में सुप्रीम कोर्ट आ जाएगी। कोर्ट ओपन है। कोई भी व्यक्ति कोर्ट में जा सकता है। हमें इससे डरना नहीं चाहिए। हमारा काम अपने विवेक से कानून बनाना है, जो हमने किया है और ये कानून कोर्ट में भी सही पाया जाएगा।</p>
<p><strong>शाह ने याद दिलाया मनमोहन सिंह का बयान</strong><br />
शाह ने सदन में कांग्रेस के एक संकल्प पढ़ा- &#8216;कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान के उन सभी गैर मुस्लिमों को पूर्ण सुरक्षा देने के लिए बाध्य है जो उनकी उनके जीवन और सम्मान की रक्षा के लिए सीमा के उस पार से भारत आए हैं, या आने वाले हैं।&#8217; शाह ने कहा, डॉ मनमोहन सिंह ने भी पहले इसी सदन में कहा था कि वहां के अल्पसंख्यकों को बांग्लादेश जैसे देशों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। अलग उनको हालात मजबूर करते हैं तो हमारा नैतिक दायित्व है कि उन अभागे लोगों को नागरिकता दी जाए। शाह ने कांग्रेस सदस्यों से कहा, &#8216;आज आप अपने ही संकल्प को नहीं मान रहे हैं।&#8217;</p>
<p><strong>शाह ने शिवसेना पर साधा निशाना</strong><br />
शाह ने कहा, &#8216;शिवसेना ने कल लोकसभा में इस बिल का समर्थन किया था। महाराष्ट्र की जनता जानना चाहती है कि रात में ही ऐसे क्या हुआ कि उन्होंने आज अपना स्टैंड बदल दिया?&#8217; उन्होंने कहा, &#8216;इतिहास तय करेगा कि 70 साल से लोगों को भगवान के भरोसे छोड़ दिया था। इसको न्याय नरेन्द्र मोदी जी ने दिया, इतिहास इसको स्वर्ण अक्षरों से लिखेगा। लाखों-करोड़ों लोग नर्क की यातना में जी रहे थे। क्योंकि वोट बैंक के लालच के अंदर आंखे अंधी हुई थी, कान बहरे हुए थे, उनकी चीखें नहीं सुनाई पड़ती थी। नरेन्द्र मोदी जी ने केवल और केवल पीड़ितों को न्याय करने के लिए ये बिल लेकर आए हैं&#8217;</p>
<p><strong>ये नागरिकता देने का बिल है- शाह</strong><br />
शाह ने कहा, इस बिल में मुसलमानों के कोई अधिकार नहीं छीने जा रहे हैं। ये नागरिकता देने का बिल है, नागरिकता लेने का बिल नहीं है। मैं सबसे कहना चाहता हूं कि भ्रामक प्रचार में मत आइए। इस बिल का भारत के मुसलमानों की नागरिकता से कोई संबंध नहीं है। शाह ने कहा, मुझे आइडिया ऑफ इंडिया समझाने का प्रयास करते हैं। मेरी तो सात पुश्ते यहां जन्मी हैं, मैं विदेश से नहीं आया हूं। हम तो इसी देश में जन्में हैं, यहीं मरेंगे।</p>
<p><strong>पाकिस्तान की भाषा बोल रही कांग्रेस-शाह</strong><br />
अमित शाह ने कहा, कांग्रेस के नेताओं के बयान और पाकिस्तान के नेताओं के बयान कई बार घुल-मिल जाते हैं। कल ही पाकिस्तान के पीएम ने जो बयान दिया और आज जो इस सदन में बयान दिए गए हैं, वो एक समान हैं। एयर स्ट्राइक के लिए जो पाकिस्तान ने बयान दिए वो और कांग्रेस के नेताओं के बयान एक समान हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के समय जो बयान पाकिस्तान के नेताओं और कांग्रेस के नेताओं ने दिए वो एक समान हैं। मैं जो बिल लेकर आया हूं वो किसी की भावना को आहत करने के लिए नहीं है। किसी भी धर्म समुदाय के लोगों को दुखी करने के लिए नहीं है।</p>
<p><strong>रविशंकर प्रसाद, बीजेपी</strong><br />
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारी सरकार के सारे बिल कानून विभाग द्वारा भली-भांति देखकर ही लाए जाते हैं। मैंने कश्मीर में ऐसे लोगों को देखा जो 1948 से कैंपों में रह रहे हैं उन्हें न वोटिंग का अधिकार मिला न वह अपने घर बना सके। प्रसाद ने कहा कि उन लोगों ने कहा हमने गलती की कि हमने तब के कश्मीरी नेताओं पर विश्वास किया और हम कश्मीर से पंजाब नहीं गए।</p>
<p><strong>कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल</strong><br />
जिनके पास भारत का कोई विचार नहीं है, वे भारत के विचार की रक्षा नहीं कर सकते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि गृहमंत्री अमित शाह ने कौन सी इतिहास की किताबें पढ़ी हैं। टू नेशन थ्योरी हमारी नहीं है। यह सावरकर की बनाई गई थ्योरी थी। मैं गृहमंत्री से अनुरोध करता हूं कि वह कांग्रेस पर लगाए उस आरोप को वापस लें क्योंकि हम एक राष्ट्र में विश्वास करते हैं, और आप उस पर विश्वास नहीं करते हैं।</p>
<p><strong>गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस</strong><br />
गुलाम नबी आजाद ने पूछा कि गृहमंत्री ने इस बिल में कुछ देश और कुछ धर्मों को ही क्यों रखा। उन्होंने पूछा कि अगर सभी इस बिल के पक्ष में हैं तो असम में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं और बसों को क्यों जलाया जा रहा है?</p>
<p><strong>पी चिदंबरम, कांग्रेस</strong><br />
ये विधेयक संसद के मुंह पर तमाचा है और संसद से असंवैधानिक कदम उठाने को कहा जा रहा है। चिदंबरम ने कहा कि सरकार के किसी ज़िम्मेदार व्यक्ति को इन सवालों के जवाब देने चाहिए, फिर चाहे देश के अटॉर्नी जनरल हों या फिर दूसरे अधिकारी। चिदंबरम ने पूछा: सिर्फ़ पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान की बात क्यों? श्रीलंका के हिंदू, भूटान के ईसाई क्यों शामिल नहीं? धर्म को बिल का आधार क्यों बनाया गया? कैसे सिर्फ़ छह धर्म के लोगों को शामिल किया गया? क्या ये समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन नहीं है?</p>
<p><strong>आनंद शर्मा, कांग्रेस</strong><br />
इतनी जल्दबाजी क्यों? इसे संसदीय समिति को भेजा जाना चाहिए था। लोकसभा में विधेयक को इस तरह पारित किया गया था जैसे कि देश किसी प्रकार के संकट में है। हम इसका विरोध करते हैं। विरोध का कारण राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक और संवैधानिक है। विधेयक भारतीय संविधान और लोकतंत्र पर हमला है। इससे भारत की आत्मा आहत होती है।</p>
<p><strong>एमडीएमके नेता वाइको</strong><br />
यदि यह अप्रिय, घृणित, अलोकतांत्रिक, अनुचित, असंवैधानिक विधेयक पारित हो जाता है, तो यह इस उच्च सदन के इतिहास में एक काला अध्याय बन जाएगा।</p>
<p><strong>जगत प्रकाश नड्डा, भाजपा</strong><br />
2003 में, राज्यसभा में डॉ. मनमोहन सिंह ने उस समय के डिप्टी पीएम आडवाणी जी से बांग्लादेश जैसे देशों से आए शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने में अधिक उदार दृष्टिकोण रखने की बात कही थी। नड्डा ने कहा, &#8216;इसलिए, हम केवल वही कह रहे हैं जो उन्होंने (सिंह) कहा था।&#8217;</p>
<p><strong>सुब्रमण्यम स्वामी, बीजेपी</strong><br />
सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एनआरसी और नागरिकता संशोधन बिल को लेकर असमंजस में है और वह सदन को गुमराह करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में इस बिल में शामिल अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। बीजेपी की सरकार एक्ट पास करने के बजाय काम करती है. इस संशोधन ने अनुच्छेद 14 का कोई भी उल्लंघन नहीं होने जा रहा है।</p>
<p><strong>डेरेक ओ ब्रायन, तृणमूल कांग्रेस</strong><br />
नागरिकता विधेयक के खिलाफ लोग आंदोलन कर रहे हैं। हम एक लोकतंत्र से तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं। सीएबी के तत्व नाजी कॉपीबुक से खींचे गए हैं। NRC एक राज्य में विफल रहा, और अब आप कैसे कह रहे हैं कि इसे 27 राज्यों में लागू किया जाएगा। यह बहुमत बनाम नैतिकता की लड़ाई है।</p>
<p><strong>केजी केनये, NPF</strong><br />
मैं इस बिल का समर्थन करता हूं। उत्तर-पूर्व में लोग सांप्रदायिक नहीं हैं &#8230; यह धर्म, अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक समुदायों के बारे में नहीं है। यह अवैध प्रवासियों के बारे में है जो हमारे क्षेत्र में आ गए हैं और हमारी आबादी को धमकी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>संजय सिंह AAP</strong><br />
AAP के संजय सिंह ने नागरिकता पर संशोधन पर कहा, मैं इस विधेयक का विरोध कर रहा हूं क्योंकि यह बाबा साहेब अंबेडकर के बनाए गए संविधान के खिलाफ है। यह संविधान की प्रस्तावना के खिलाफ है। यह महात्मा गांधी और भगत सिंह के सपनों के भारत के खिलाफ है।</p>
<p><strong>डी कुप्रेंद्र रेड्डी, जेडी (एस)</strong><br />
यह विधेयक इस देश में हमारी धर्मनिरपेक्षता नीति को कमजोर करेगा। मैं इस विधेयक का कड़ा विरोध करता हूं। मेरा सुझाव है कि विधेयक को जांच के लिए संसद की एक प्रवर समिति को भेजा जाए।</p>
<p><strong>बालासाहेब थोराट, कांग्रेस</strong><br />
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के नेता बालासाहेब थोराट ने एक बयान में कहा कि हमारा देश संविधान के हिसाब से चलता और संविधान समानता के सिद्धांत पर आधारित है। हम आशा करते हैं कि शिवसेना राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल के लिए वोटिंग के समय अपने दिमाग में ये बात रखेगी।</p>
<p><strong>कमल हासन, मक्कल नीडि माईम</strong><br />
कमल हासन ने अपने बयान कहा, &#8216;यह भारत को एक ऐसा देश बनाने की को कोशिश है जहां एक ही तरह के लोग रहें, जो भेदभाव है। यंग इंडिया जल्द ही इस प्रस्ताव को खारिज कर देगा। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम संविधान में किसी त्रुटि को सुधारें लेकिन अच्छी चीज और त्रुटि रहित व्यवस्था में सुधार लोगों और लोकतंत्र के साथ विश्वासघात है। केंद्र सरकार का लाया गया विधेयक बीमारी से मुक्त व्यक्ति की सर्जरी का प्रयास करने जैसा अपराध है।</p>
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		<title>नागरिकता संशोधन विधेयक: राज्यसभा में बोले शाह- &#8216;मुसलमान इस देश के नागरिक थे, हैं और रहेंगे&#8230;</title>
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		<pubDate>Wed, 11 Dec 2019 07:59:00 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-44462" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/3dee89625776d5dd21d26f09767dc7336aee82f5fff3dcdaa7b5e4dbecc28633_1.jpg" alt="" width="910" height="585" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/3dee89625776d5dd21d26f09767dc7336aee82f5fff3dcdaa7b5e4dbecc28633_1.jpg 650w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/3dee89625776d5dd21d26f09767dc7336aee82f5fff3dcdaa7b5e4dbecc28633_1-300x193.jpg 300w" sizes="(max-width: 910px) 100vw, 910px" /></p>
<p>नई दिल्ली । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश करने के बाद चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे। वह अब भी नागरिक हैं और आगे भी भारत के नागरिक रहेंगे। उन्होंने सदन में कहा कि इस बिल के बारे में गलत सूचना फैलाई गई कि यह विधेयक भारतीय मुसलमानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोग बताएं कि यह विधेयक भारतीय मुसलमानों के खिलाफ कैसे है? वह भारतीय नागरिक हैं और हमेशा रहेंगे। उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा।</p>
<p>लोकसभा में यह विधेयक सोमवार को पास हो गया था। आज राज्य सभा में पेश करने के बाद गृहमंत्री शाह ने कहा कि 1985 में असम समझौता हुआ। राज्य की स्वदेशी संस्कृति की रक्षा के लिए खंड 6 में प्रावधान है। उन्होंने कहा- &#8216;मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि खंड 6 की निगरानी के लिए समिति के माध्यम से एनडीए सरकार असम के अधिकारों की रक्षा करेगी। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन कमेटी का हिस्सा है। यह विधेयक मिजोरम में लागू नहीं होगा।</p>
<p>भारत दुनिया भर के मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता नहीं दे सकता। उत्पीड़न का सामना करने वाले तीन देशों के अल्पसंख्यकों के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है। भारत के किसी भी मुस्लिम को इस विधेयक के कारण चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा मिलेगी।&#8217; गृहमंत्री ने वोट बैंक की राजनीति के आरोप को खारिज करते हए कहा- &#8216;पाकिस्तान और वर्तमान बांग्लादेश दोनों में धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। धार्मिक अल्पसंख्यक या तो मारे गए या वह शरण लेने के लिए भागकर भारत आ गए।</p>
<p>उधर, विपक्ष इस विधेयक का लगातार विरोध करके इसे संविधान विरोधी बता रहा है। इस विधेयक के खिलाफ असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहा है। विपक्ष ने इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव दिया है। सदन में इस विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान निर्माताओं पर सवाल उठाता है, क्या उन्हें इसके बारे में समझ नहीं थी। भारत के संविधान में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ, बंटवारे के बाद जो लोग यहां आए उन्हें सम्मान मिला है। पाकिस्तान से आए दो नेता प्रधानमंत्री भी बने हैं।</p>
<p>टू नेशन थ्योरी कांग्रेस ने नहीं दी थी, वो सावरकर ने हिंदू महासभा की बैठक में दी थी। गृहमंत्री ने बंटवारे का आरोप उन कांग्रेस नेताओं पर लगाया जिन्होंने जेल में वक्त गुजारा, ये राजनीति बंद होनी चाहिए। पहले और अब के विधेयक में काफी अंतर है, सबसे बात करने का जो दावा किया जा रहा है उससे मैं सहमत नहीं हूं। इतिहास इसको कैसे देखेगा, उसे वक्त बताएगा।</p>
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		<title>चाणक्य का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Dec 2019 10:03:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 पेश कर दिया है। लोकसभा में तो सरकार के पास नंबर है लेकिन दिक्कत राज्यसभा में हो सकती है। वहाँ भी विधेयक पास हो जाए, इसके लिए तैयारी करनी होती है। फ्लोर मैनेजमेंट उसी को कहते हैं। आइए कुछ आँकड़ो से समझते हैं इस ... <a title="चाणक्य का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chanakyas-mathematics-and-floor-management-the-citizenship-amendment-bill-will-be-passed-in-the-rajya-sabha-news/" aria-label="Read more about चाणक्य का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-44202" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/1540208227_amit-chankya.jpg" alt="" width="901" height="534" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/1540208227_amit-chankya.jpg 700w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/1540208227_amit-chankya-300x178.jpg 300w" sizes="(max-width: 901px) 100vw, 901px" /></p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 पेश कर दिया है। लोकसभा में तो सरकार के पास नंबर है लेकिन दिक्कत राज्यसभा में हो सकती है। वहाँ भी विधेयक पास हो जाए, इसके लिए तैयारी करनी होती है। फ्लोर मैनेजमेंट उसी को कहते हैं। आइए कुछ आँकड़ो से समझते हैं इस विधेयक के पास होने के गुणा-गणित को।</p>
<p>कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा समर्थित UPA के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास सदन की कुल संख्या 245 में से 100 से कम लग रही है। कॉन्ग्रेस के पास 46 सांसद हैं, लेकिन मोतीलाल वोहरा स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते अनुपस्थित हैं।</p>
<p>उच्च सदन में ममता बनर्जी की तृणमूल में 13 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी के 9 हैं, डीएमके के पास 5, RJD और बसपा दोनों के पास 4-4 सांसद हैं, और अन्य छोटे दलों को मिलाकर यह संख्या 100 तक पहुँचती है।</p>
<p>जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA और उनकी संख्या पर नज़र डालें तो इनके अपने 83 सांसद हैं, जिसमें नव-निर्वाचित सांसद अरुण सिंह और केसी राममूर्ति भी शामिल हैं।</p>
<p>शिरोमणि अकाली के पास 3 सांसद हैं और दूसरी सहयोगी पार्टी AIADMK के पास 11 सदस्यों ने वोट देकर अपना समर्थन दिया। जदयू के नीतीश कुमार ने भी बिल का समर्थन करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा नॉमिनेटिड सांसदों को सम्मिलित करके अन्य 12 सदस्यों, स्वतंत्र  एवं लघु पार्टियों और नॉर्थ ईस्ट के सहयोगी दलों को ही केवल गणना में जोड़ा गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि हाल ही में भाजपा और शिवसेना के बीच राजनैतिक घमासान हुआ, जिसकी वजह से उनका गठबंधन टूट गया। इसके बावजूद उद्धव ठाकरे की पार्टी ने इस विधेयक का समर्थन किया। जबकि निष्पक्ष पार्टियों का अब भी केंद्र सरकार के समर्थन में आना बाकी है।</p>
<p>इसके अलावा, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल ने भी 7 मतों से अपना समर्थन दिया। हालाँकि पार्टी ने इसमें कुछ काट-छाँट की माँग करते हुए संशोधनों को प्रस्ताव रखा।</p>
<p>TRS के 6 सासंदों ने और YS जगन की YSRCP ने 2 वोटों से अपना समर्थन दिया। वहीं, भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी तेलगु देशम पार्टी भी 2 वोटों से अपना समर्थन देगी।</p>
<p>बता दें कि अनिल बलूनी को मिलाकर भाजपा के कम से कम 2 सांसद मेडिकल लीव पर हैं और दो स्वतंत्र दावेदारों का समर्थन भी नदारद है। और इस तरह NDA के पास सांसदो की संख्या 120 यानी आधे से ऊपर 132 तक पहुँचती नज़र आ रही है।</p>
<p>शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही अमित शाह की क़रीबी टीम सहित फ्लोर मैनेजर अपने काम में लगे हुए हैं। इसी तरह की क़वायद, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के प्रस्ताव पर हुई थी।</p>
<p>रेल मंत्री पीयूष गोयल अपने मंत्रिमंडल के सहयोगी धर्मेंद्र प्रधान के रूप में AIADMK को अपने पक्ष में लाने में रहे, उन्होंने बीजेडी को भी लूप में रखा।</p>
<p>पार्टी के महासचिव भूपेंद्र यादव JDU से बात कर रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी TRS, YSR और TDP समेत छोटे दलों से बात कर रहे हैं।</p>
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