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		<title>इस पेड़ के इलाज में हर साल खर्च किए जाते हैं लाखों रुपये, 1880 में श्रीलंका से लाकर भारत लाया गया- बौद्ध धर्म में है विशेष महत्व, जानें क्यों है ऐसा</title>
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		<pubDate>Thu, 16 Nov 2023 10:45:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दैनिक भास्कर ब्यूरो , आपने किसी व्यक्ति के इलाज में लाखों रुपये खर्च होते हुए देखा और सुना होगा। इसके अलावा पशु-पक्षियों के इलाज के बारे में भी जानते होंगे। लेकिन, अब हम आपको जो बताने जा रहे हैं उसे जानकर आप जरूर हैरान हो जाएंगे। बिहार के गया जिले में एक पेड़ के इलाज ... <a title="इस पेड़ के इलाज में हर साल खर्च किए जाते हैं लाखों रुपये, 1880 में श्रीलंका से लाकर भारत लाया गया- बौद्ध धर्म में है विशेष महत्व, जानें क्यों है ऐसा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/lakhs-of-rupees-are-spent-every-year-in-the-treatment-of-this-tree-it-was-brought-to-india-from-sri-lanka-in-1880-it-has-special-importance-in-buddhism-know-why-it-is-so-news-in-hindi/" aria-label="Read more about इस पेड़ के इलाज में हर साल खर्च किए जाते हैं लाखों रुपये, 1880 में श्रीलंका से लाकर भारत लाया गया- बौद्ध धर्म में है विशेष महत्व, जानें क्यों है ऐसा">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/851176-tree.webp" alt="" class="wp-image-422337" width="840" height="504" /></figure>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>इस पेड़ का बौद्ध धर्म में विशेष महत्व है</strong></li>



<li><strong>देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की मदद से बोधि वृक्ष की देखभाल की जाती है</strong></li>



<li><strong>मौजूदा समय में महाबोधि मंदिर में लगा यह चौथा बोधि वृक्ष है</strong></li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दैनिक भास्कर ब्यूरो ,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आपने किसी व्यक्ति के इलाज में लाखों रुपये खर्च होते हुए देखा और सुना होगा। इसके अलावा पशु-पक्षियों के इलाज के बारे में भी जानते होंगे। लेकिन, अब हम आपको जो बताने जा रहे हैं उसे जानकर आप जरूर हैरान हो जाएंगे। बिहार के गया जिले में एक पेड़ के इलाज में हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">यही नहीं पेड़ की हेल्थ की जांच करने देहरादून से वैज्ञानिक आते हैं। हालांकि, इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है। दरअसल, इस पेड़ का बौद्ध धर्म में विशेष महत्व है जिसके कारण हर साल इस पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। साथ ही इस पेड़ की देखभाल के लिए एक साल में वैज्ञानिक लगभग तीन से चार बार स्वास्थ जांच करने गया पहुंचते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है महत्व ?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">इस पेड़ का बौद्ध धर्म में विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इसी वृक्ष के नीचे ध्यान करते समय गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। तब से इसे बोधि वृक्ष कहा जाने लगा जो गया के महाबोधि मंदिर में स्थित है। बिहार के गया का महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां आए लोग इस पेड़ से गिरे पत्तियों को अपने साथ ले जाते हैं और इसकी पूजा करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पिछले कुछ दिनों से हो रही है जांच &#8211;</h2>



<p class="wp-block-paragraph">बीते कुछ दिनों से बोधि वृक्ष का हेल्थ चेकअप चल रहा है। इस बार देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से दो साइंटिस्ट संतन बर्तवाल और शैलेश पांडे जांच के लिए आए हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि बोधी वृक्ष पूरी तरह से स्वस्थ है और फिलहाल इसे किसी ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि पेड़ की पत्तियों का साइज भी बढ़ा है। वैज्ञानिकों ने पेड़ के तने की भी जांच की जिसमें, किसी भी तरह की बीमारी नहीं पाई गई। वैज्ञानिकों के अनुसार, फिलहाल पेड़ बिल्कुल स्वस्थ है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ऐसे की जाती है देखभाल &#8211;</h2>



<p class="wp-block-paragraph">देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की मदद से बोधि वृक्ष की देखभाल की जाती है। इंस्टीट्यूट से वैज्ञानिक हर साल में तीन से चार बार गया पहुंचकर पेड़ के स्वास्थ की जांच करते हैं। जांच के मुताबिक, पेड़ के स्वास्थ्य को देखते हुए दवाओं का छिड़काव और टहनियों का कटाव किया जाता है। जरूरत होने पर केमिकल लेप भी लगाया जाता है। यह पेड़ लगभग 1880 के समय ही लगाया गया था जिसके कारण अब यह बहुत विशाल हो गया है। इस विशाल पेड़ की टहनियों को लगभग 12 लोहे के पिलरों से सहारा दिया गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">श्रीलंका से 1880 में लाया गया था भारत &#8211;</h2>



<p class="wp-block-paragraph">मौजूदा समय में महाबोधि मंदिर में लगा यह चौथा बोधि वृक्ष है। 1880 में लार्ड कनिंघम ने इसे श्रीलंका के अनुराधापुरम से लाकर लगाया था। इससे पहले तीन बार बोधि वृक्ष को नष्ट किया जा चुका है। सबसे पहले बोधि वृक्ष को सम्राट अशोक की पत्नी तिस्यरक्षिता ने कटवा दिया था। रानी ने ऐसा सम्राट अशोक के बढ़ते रूझान (कलिंग युद्ध के बाद) से नाराज होकर किया था। बंगाल के शासक शशांक ने लगभग 602-620 ईसवी में बौद्ध धर्म के अस्तित्व को मिटाने की मंशा से दूसरे बोधि वृक्ष को कटवा दिया था। </p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं बोधि वृक्ष की जड़ से निकला तीसरा वृक्ष प्राकृतिक आपदा के चपेट में आने के कारण नष्ट हो गया। उस दौरान लार्ड कनिंघम के नेतृत्व में खुदाई का काम चल रहा था। इसके बाद उन्होंने साल 1880 में श्रीलंका के अनुराधापुरम से बोधी वृक्ष की शाखा मंगवाकर लगवाई थी।</p>



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		<title>बहराइच : इलाज पूर्ण कर स्वस्थ हो चुके क्षय रोगी बनेंगे चैंपियन</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/bahraich-tuberculosis-patients-who-have-recovered-after-completing-treatment-will-become-champions-news-in-hindi/</link>
		
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		<pubDate>Thu, 07 Sep 2023 16:03:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बहराइच&#160;l&#160;राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत इलाज पूर्ण कर स्वस्थ हो चुके क्षय रोगी बतौर चैंपियन कार्य करेंगे। इसके लिए जनपद के समस्त हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर दो टीबी चैंपियन, एक पुरुष और एक महिला का चयन किया जाना है। भारत सरकार द्वारा प्राप्त निर्देशों के क्रम में सभी चैंपियन को प्रतिमाह अधिकतम 8000 ... <a title="बहराइच : इलाज पूर्ण कर स्वस्थ हो चुके क्षय रोगी बनेंगे चैंपियन" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bahraich-tuberculosis-patients-who-have-recovered-after-completing-treatment-will-become-champions-news-in-hindi/" aria-label="Read more about बहराइच : इलाज पूर्ण कर स्वस्थ हो चुके क्षय रोगी बनेंगे चैंपियन">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1080" height="1286" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/चित्र-संख्या-005-3.jpg" alt="" class="wp-image-394483" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/चित्र-संख्या-005-3.jpg 1080w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/चित्र-संख्या-005-3-768x914.jpg 768w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बहराइच&nbsp;l</strong>&nbsp;राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत इलाज पूर्ण कर स्वस्थ हो चुके क्षय रोगी बतौर चैंपियन कार्य करेंगे। इसके लिए जनपद के समस्त हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर दो टीबी चैंपियन, एक पुरुष और एक महिला का चयन किया जाना है। भारत सरकार द्वारा प्राप्त निर्देशों के क्रम में सभी चैंपियन को प्रतिमाह अधिकतम 8000 रुपए की प्रोत्साहन राशि अलग-अलग गतिविधियों के लिए दिये जाने का प्रावधान किया गया है । इसके लिए चैंपियन की शैक्षिक योग्यता कम से कम 10 वीं और आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए । यह जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डा0 एम एल वर्मा ने दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद के समस्त ब्लाकों के सक्रिय कुल 235 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में प्रत्येक पर एक महिला और एक पुरुष का बतौर टीबी चैंपियन चयन किया जाना है। ये सभी चैंपियन टीबी ग्रस्त लोगों को खोजने और प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएं जैसे जांच और सम्पूर्ण इलाज में टीबी रोगियों की सहायता करेंगे। </p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा समुदाय में टीबी के लक्षणों के बारे में लोगों को जागरुक और परिवार के सदस्यों को इस बात के लिए राजी करेंगे कि वे लक्षण वाले व्यक्तियों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जांच और उपचार के लिए अवश्य भेजें । साथ ही सभी चैंपियन परिवार के सदस्यों को इस बात के लिए राजी करेंगे कि वे टीबी मरीजों के सम्पूर्ण इलाज में सहायता करें ताकि बीच में इलाज बंद न हो। उन्होंने बताया कि समुदाय स्तर पर टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए सक्षम लोगों को प्रोत्साहित करने में भी टीबी चैंपियन मदद करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 सतीश कुमार सिंह&nbsp; ने बताया कि टीबी चैंपियन का चयन निर्धारित योग्यता और वरीयता क्रम के अनुसार किया जायेगा ।&nbsp; इसके लिए इच्छुक व्यक्ति अपना आवेदन जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र में 30 सितंबर 2023 तक दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि आवेदन और चयन प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क है । कोई भी व्यक्ति बहकावे में आकर किसी को भी किसी प्रकार&nbsp;की&nbsp;धनराशि&nbsp;न&nbsp;दे।</p>
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		<title>बहराइच : रंग लाई डीएम बाबू की मुहिम, अब गरीबी नहीं बनेगी इलाज में बाधा</title>
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		<pubDate>Tue, 28 Mar 2023 12:25:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बहराइच l गरीबी इलाज में बाधा न बने इसके लिए देश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना चलायी जा रही है। प्रधानमंत्री के इस सपने को साकार करने व लोगों को जल्द से जल्द गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने के लिए जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र ने मुहिम छेड़ रखी है। इसके लिए उन्होंने साप्ताहिक लक्ष्य ... <a title="बहराइच : रंग लाई डीएम बाबू की मुहिम, अब गरीबी नहीं बनेगी इलाज में बाधा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bahraich-dm-babus-campaign-brought-color-now-poverty-will-not-become-a-hindrance-in-treatment-news-in-hindi/" aria-label="Read more about बहराइच : रंग लाई डीएम बाबू की मुहिम, अब गरीबी नहीं बनेगी इलाज में बाधा">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1080" height="1182" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/03/चित्र-संख्या-002-2.jpg" alt="" class="wp-image-338627" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/03/चित्र-संख्या-002-2.jpg 1080w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/03/चित्र-संख्या-002-2-768x841.jpg 768w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बहराइच l गरीबी इलाज में बाधा न बने इसके लिए देश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना चलायी जा रही है। प्रधानमंत्री के इस सपने को साकार करने व लोगों को जल्द से जल्द गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने के लिए जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र ने मुहिम छेड़ रखी है। इसके लिए उन्होंने साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर योजना से जुड़े अधिकारियों को आयुष्मान कार्ड बनाने के सख्त निर्देश दिये हैं। जिसकी वह नियमित समीक्षा कर रहे हैं । इसका परिणाम यह हुआ कि जनपद में प्रतिदिन 5000 से अधिक लोगों का आयुष्मान कार्ड बनने लगा है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए 26 मार्च से साप्ताहिक अभियान चलाया जा रहा है । अभियान के पहले दिन 5683 लोगों का व दूसरे दिन 5327 से अधिक लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया जा चुका है । इसके लिए जिला विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित कर एडीओ पंचायत का भी सहयोग लिया जा रहा है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रतिदिन 5 हजार से अधिक लोगों को मुहैया होने लगे आयुष्मान कार्ड</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिला विकास अधिकारी एमके पाण्डेय ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत शामिल परिवार के सभी सदस्यों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का इलाज मुहैया कराने का प्रावधान है। इसके लिए लाभार्थी के पास आयुष्मान कार्ड होना जरूरी है। कार्ड बनाने के लिए आरोग्य मित्र व ग्राम पंचायत के पंचायत सहायक को ज़िम्मेदारी दी गयी है । इनसे संपर्क कर कोई भी व्यक्ति अपना नाम आयुष्मान भारत योजना की सूची में देख सकता है या सूची में नाम दर्ज होने पर आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्ड धारकों को मिलेगा 5 लाख तक इलाज</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिला स्वास्थ्य , शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 370000 परिवारों को शामिल किया गया है । जिसके सापेक्ष 215000 परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाया जा चुका है । शेष परिवारों के लिए अभियान चलाकर कार्ड बनाए जा रहे हैं ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ दिनेश चंद्र जिलाधिकारी बहराइच</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुष्मान कार्ड से पांच लाख रुपए तक का इलाज बहुत आसानी से निःशुल्क हो जाता है। कार्ड बनाने के लिए जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्ड की सबसे अच्छी बात यह कि एक बार बनने के बाद इसे रिनीवल नहीं करवाना पड़ता है। साथ ही कार्ड धारक पूरे देश में किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में गंभीर बीमारियों का इलाज करवा सकता है।<br></p>
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