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	<title>every wish will be fulfilled by chanting these mantras. &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>every wish will be fulfilled by chanting these mantras. &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>नवदुर्गा के छठे स्वरूप माँ कत्यायनी का इन मंत्रो से करे जाप, पूरी होगी हर मनोकामना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Oct 2019 20:16:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[every wish will be fulfilled by chanting these mantras.]]></category>
		<category><![CDATA[The fifth form of Navadurga is 'Skandmata']]></category>
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					<description><![CDATA[शारदीय नवरात्र के छठें दिन मां दुर्गा के षष्ठम स्वरूप माता कात्यायनी की पूजा होती है। पांचवें दिन गुरुवार को मां स्कंदमाता की आराधना की गयी। महर्षि कात्यायन द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा गया। महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप ... <a title="नवदुर्गा के छठे स्वरूप माँ कत्यायनी का इन मंत्रो से करे जाप, पूरी होगी हर मनोकामना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chanting-mother-katyayani-in-the-sixth-form-of-navadurga-with-these-mantras-every-wish-will-be-fulfilled-news/" aria-label="Read more about नवदुर्गा के छठे स्वरूप माँ कत्यायनी का इन मंत्रो से करे जाप, पूरी होगी हर मनोकामना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-170223" src="http://janman.tv/wp-content/uploads/2019/10/30a960d6c641c1a07be262b8297470155fe5fcbddb0c44f62197fc03d1731e11_1-300x171.gif" alt="" width="1126" height="642" /></p>
<p>शारदीय नवरात्र के छठें दिन मां दुर्गा के षष्ठम स्वरूप माता कात्यायनी की पूजा होती है। पांचवें दिन गुरुवार को मां स्कंदमाता की आराधना की गयी।</p>
<p>महर्षि कात्यायन द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा गया। महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप में कात्यायनी पैदा हुई थीं। महर्षि ने इनका पालन-पोषण किया था।</p>
<p>देवी कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं। इनकी पूजा अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है। मां कात्यायनी दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली हैं। देवी कात्यायनी जी के पूजन से भक्त के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है। इस दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित रहता है। योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होने पर उसे सहजभाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त होते हैं। साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता है।</p>
<p>मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है। यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं।  इनकी चार भुजायें भक्तों को वरदान देती हैं। इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, तो दूसरा हाथ वरदमुद्रा में है। अन्य हाथों में  तलवार तथा कमल का फूल है।</p>
<p>देवी कात्यायनी के मंत्र &#8211;</p>
<p>या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।<br />
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।</p>
<p><strong>मां कत्यायनी को भोग</strong><br />
मां को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है।</p>
<p><strong>ऐसे करें देवी कात्यायनी की पूजा​ विधि</strong><br />
नवरात्र के छठे दिन देवी के पूजन में शहद का बहुत अधिक महत्व है। इस दिन प्रसाद में शहद का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके प्रभाव से आपको सुंदर रूप प्राप्त होगा। इस दिन सबसे पहले मां कत्यायनी की तस्वीर को लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। इसके बाद मां की पूजा उसी तरह करें जैसे कि नवरात्र के पांच दिन आपने की। इसके बाद हाथों में लाल फूल लेकर मां की उपासना इस मंत्र के साथ करें।</p>
<p><strong>चंद्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना।</strong><br />
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनि।|</p>
<p>इसके बाद मां को हाथ जोड़कर फूल अर्पित करें तथा मां का षोचशोपचार से पूजन करें और नैवेद्य चढ़ाए और 108 बार इस मंत्र का जाप करें।<br />
<strong>ऊं ऐं हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।</strong></p>
<p>देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि रहती है। सभी बीमारियों से निजात मिलता है। इसके बाद में आरती करें और फिर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।</p>
<p><strong>मां कत्यायनी की आरती</strong></p>
<p>जय जय अम्बे जय कात्यानी<br />
जय जगमाता जग की महारानी<br />
बैजनाथ स्थान तुम्हारा<br />
वहा वरदाती नाम पुकारा<br />
कई नाम है कई धाम है<br />
यह स्थान भी तो सुखधाम है<br />
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी<br />
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी<br />
हर जगह उत्सव होते रहते<br />
हर मंदिर में भगत है कहते<br />
कत्यानी रक्षक काया की<br />
ग्रंथि काटे मोह माया की<br />
झूठे मोह से छुडाने वाली<br />
अपना नाम जपाने वाली<br />
ब्रेह्स्पतिवार को पूजा करिए<br />
ध्यान कात्यानी का धरिये<br />
हर संकट को दूर करेगी<br />
भंडारे भरपूर करेगी<br />
जो भी माँ को &#8216;चमन&#8217; पुकारे<br />
कात्यानी सब कष्ट निवारे</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>नवदुर्गा का पांचवा स्वरूप &#8216;स्कंदमाता&#8217;, इन मंत्रो के जाप से पूरी होगी हर मनोकामना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Oct 2019 19:52:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[every wish will be fulfilled by chanting these mantras.]]></category>
		<category><![CDATA[The fifth form of Navadurga is 'Skandmata']]></category>
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					<description><![CDATA[शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप माता स्कंदमाता की पूजा होती है। चैथे दिन बुधवार को मां कूष्माण्डा की आराधना की गयी। नवदुर्गा के पांचवें रूप स्कंदमाता की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती हैं। मां अपने भक्तों की ... <a title="नवदुर्गा का पांचवा स्वरूप &#8216;स्कंदमाता&#8217;, इन मंत्रो के जाप से पूरी होगी हर मनोकामना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/the-fifth-form-of-navadurga-is-skandmata-every-wish-will-be-fulfilled-by-chanting-these-mantras-news/" aria-label="Read more about नवदुर्गा का पांचवा स्वरूप &#8216;स्कंदमाता&#8217;, इन मंत्रो के जाप से पूरी होगी हर मनोकामना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://images.lifealth.com/uploads/2017/09/skandmata-1.jpg" alt="Related image" /></p>
<p>शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप माता स्कंदमाता की पूजा होती है। चैथे दिन बुधवार को मां कूष्माण्डा की आराधना की गयी। नवदुर्गा के पांचवें रूप स्कंदमाता की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती हैं। मां अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।</p>
<p>भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। सिंह भी इनका वाहन है।</p>
<p>नवरात्र-पूजन के पांचवें दिन का शास्त्रों में पुष्कल महत्व बताया गया है। इस चक्र में अवस्थित मन वाले साधक की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है। नवदुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की अलसी औषधी के रूप में भी पूजा होती है। स्कंदमाता को पार्वती एवं उमा के नाम से भी जाना जाता है। अलसी एक औषधि से जिससे वात, पित्त, कफ जैसी मौसमी रोग का इलाज होता है। इस औषधि को नवरात्र में माता स्कंदमाता को चढ़ाने से मौसमी बीमारियां नहीं होती। साथ ही स्कंदमाता की आराधना के फल स्वरूप मन को शांति मिलती है।</p>
<p>देवी स्कंदमाता का मंत्र-</p>
<p>या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।<br />
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।</p>
<p><strong>कैसे करें स्कंदमाता की पूजा</strong><br />
&#8211; नवरात्रि के पांचवें दिन सबसे पहले स्&#x200d;नान करें और स्&#x200d;वच्&#x200d;छ वस्&#x200d;त्र धारण करें.<br />
&#8211; अब घर के मंदिर या पूजा स्&#x200d;थान में चौकी पर स्&#x200d;कंदमाता की तस्&#x200d;वीर या प्रतिमा स्&#x200d;थापित करें.<br />
&#8211; गंगाजल से शुद्धिकरण करें.<br />
&#8211; अब एक कलश में पानी लेकर उसमें कुछ सिक्&#x200d;के डालें और उसे चौकी पर रखें.<br />
&#8211; अब पूजा का संकल्&#x200d;प लें.<br />
&#8211; इसके बाद स्&#x200d;कंदमाता को रोली-कुमकुम लगाएं और नैवेद्य अर्पित करें.<br />
&#8211; अब धूप-दीपक से मां की आरती उतारें.<br />
&#8211; आरती के बाद घर के सभी लोगों को प्रसाद बांटें और आप भी ग्रहण करें.<br />
&#8211; स्&#x200d;कंद माता को सफेद रंग पसंद है. आप श्&#x200d;वेत कपड़े पहनकर मां को केले का भोग लगाएं. मान्&#x200d;यता है क&#x200d;ि ऐसा करने से मां निरोगी रहने का आशीर्वाद देती हैं.</p>
<p><strong>ध्यान</strong><br />
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।<br />
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।<br />
धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।<br />
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥<br />
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।<br />
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥<br />
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।<br />
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥</p>
<p><strong>स्तोत्र पाठ</strong><br />
नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।<br />
समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥<br />
शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।<br />
ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रीन्तिभास्कराम्॥<br />
महेन्द्रकश्यपार्चिता सनंतकुमाररसस्तुताम्।<br />
सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलादभुताम्॥<br />
अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।<br />
मुमुक्षुभिर्विचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥<br />
नानालंकार भूषितां मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।<br />
सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥<br />
सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्रकौरिघातिनीम्।<br />
शुभां पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखिनीम्॥<br />
तमोन्धकारयामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।<br />
सहस्त्र्सूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥<br />
सुशुध्द काल कन्दला सुभडवृन्दमजुल्लाम्।<br />
प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरं सतीम्॥<br />
स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।<br />
अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥<br />
पुनःपुनर्जगद्वितां नमाम्यहं सुरार्चिताम्।<br />
जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्॥</p>
<p><strong>कवच</strong><br />
ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा।<br />
हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥<br />
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।<br />
सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥<br />
वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता।<br />
उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥<br />
इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी।<br />
सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥</p>
<div class="comment_story"> <strong>स्&#x200d;कंदमाता की आरती</strong><br />
जय तेरी हो अस्कंध माता<br />
पांचवा नाम तुम्हारा आता<br />
सब के मन की जानन हारी<br />
जग जननी सब की महतारी<br />
तेरी ज्योत जलाता रहू मै<br />
हरदम तुम्हे ध्याता रहू मै<br />
कई नामो से तुझे पुकारा<br />
मुझे एक है तेरा सहारा<br />
कही पहाड़ो पर है डेरा<br />
कई शेहरो मै तेरा बसेरा<br />
हर मंदिर मै तेरे नजारे<br />
गुण गाये तेरे भगत प्यारे<br />
भगति अपनी मुझे दिला दो<br />
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो<br />
इन्दर आदी देवता मिल सारे<br />
करे पुकार तुम्हारे द्वारे<br />
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये<br />
तुम ही खंडा हाथ उठाये<br />
दासो को सदा बचाने आई<br />
&#8216;भक्त&#8217; की आस पुजाने आई</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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