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	<title>game of ayodhya &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>अयोध्या केस: &#8216;सुप्रीम फैसले&#8217; से पहले जानें 40 दिनों में अब तक क्या-क्या हुआ ?</title>
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		<pubDate>Sat, 09 Nov 2019 04:20:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद का फैसला आज (शनिवार) सुबह 10.30 बजे आने वाला है। फैसला आने के पहले 40 दिनों तक सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई हुई। जहां मुस्लिम पक्ष और हिंदू पक्ष के लोगों ने अपनी दमदार दलीले पेश की। इन दलीलों के आधार पर सुप्रीम ... <a title="अयोध्या केस: &#8216;सुप्रीम फैसले&#8217; से पहले जानें 40 दिनों में अब तक क्या-क्या हुआ ?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/ayodhya-case-know-what-happened-so-far-in-40-days-before-supreme-verdict-news/" aria-label="Read more about अयोध्या केस: &#8216;सुप्रीम फैसले&#8217; से पहले जानें 40 दिनों में अब तक क्या-क्या हुआ ?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone  wp-image-39767" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/650x_2019110415312818.jpg" alt="" width="1088" height="638" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/650x_2019110415312818.jpg 650w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/650x_2019110415312818-300x176.jpg 300w" sizes="(max-width: 1088px) 100vw, 1088px" /></p>
<p>अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद का फैसला आज (शनिवार) सुबह 10.30 बजे आने वाला है। फैसला आने के पहले 40 दिनों तक सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई हुई। जहां मुस्लिम पक्ष और हिंदू पक्ष के लोगों ने अपनी दमदार दलीले पेश की। इन दलीलों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 16 नवम्बर पर फैसला सुनाने का निर्णय लिया, लेकिन यह फैसला आज ही सुनाया जाएगा। बता दें सुप्रीम कोर्ट के इ​तिहास में अयोध्या विवाद से जुड़ी यह अब तक की दूसरी सबसे लंबी चलने वाली लड़ाई है। चूंकि यह मुद्दा धार्मिक और राजनैतिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इस वजह से यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। न्यायालय इसमें किसी भी तरह की कमी पेशी नहीं रखता चाहता था, इसलिए 40 दिनों तक संवैधानिक बेंच बैठी। इस दौरान 11 सवाल सामने आए। आइए जानते हैं उन 40 दिनों के भीतर क्या सुनवाई हुई, जिसके आधार पर आज सुप्रीम का फैसला आने वाला है।</p>
<p><strong>विवादित स्थल से जुड़े सवाल</strong></p>
<ol>
<li><strong>मालिकाना हक किसका-</strong> विवादित स्थल की जमीन करीब 2.77 एकड़ है। सुप्रीम कोर्ट का सबसे बड़ा सवाल यह था कि इस विवादित जमीन पर मालिकाना हक किसका है?</li>
<li><strong>पजेशन किसका रहा</strong>&#8211; विवादित स्थल पर दोनों पक्षकार का दावा है कि पजेशन उनका रहा है। इस सवाल का जवाब भी आज सुप्रीम कोर्ट से मिलेगा।</li>
<li><strong>भगवान राम का जन्मस्थल-</strong> भगवान राम का जन्मस्थान कहां है वह कौन सी जगह है जहां भगवान राम पैदा हुए? इस बात पर दोनों पक्षकार आमने सामने हैं।</li>
<li><strong>जन्मस्थान ही न्यायिक व्यक्ति</strong>&#8211;  यह एक अहम मुद्दा सामने आया है। जन्मस्थान को ही कानूनी व्यक्ति का दर्जा दिया जाए या नहीं ये भी सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने है।</li>
<li><strong>एएसआई की रिपोर्ट-</strong> आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट को दोनों पक्षकार अपने फेवर में बता रहे हैं और एक दूसरे की दलील को नकार रहे हैं। यह अहम सवाल है कि रिपोर्ट किसके फेवर में है। इस बात का खुलासा भी आज होगा।</li>
<li><strong>विदेशी यात्रियों के यात्रा वृत्तांत और गजेटियर्स</strong>&#8211; इस मामले में विदेशी यात्रियों के वृत्तांत और गजेटियर्स में विवादित स्थल के बारे में कई संदर्भ हैं उस पर स्थिति स्पष्ट होगी।</li>
<li><strong>खुदाई के अवशेष के आधार-</strong> ये अहम सवाल है कि आखिर जो खुदाई में स्ट्रक्चर मिले थे वह मंदिर के अवशेष थे या नहीं।</li>
<li><strong>मंदिर तोड़कर मस्जिद बनी या नहीं-</strong>  ये भी सवाल उठा है कि मस्जिद जब बनाई गई तो क्या वह मंदिर तोड़कर बनाई गई या मंदिर के स्ट्रक्चर पर बनाई गई या फिर खाली जमीन पर।</li>
<li><strong>विवादित स्थल पर पूजा होती रही या नमाज या फिर दोनों-</strong>  इस सवाल पर भी दोनों के अपने-अपने दावे हैं और इन दावों के लिए गवाहों के बयान आदि हैं। पर सवाल अहम है।</li>
<li><strong>विवादित स्थल पर मूर्ति थी या नहीं</strong>&#8211; यह भी अहम सवाल है कि आखिर मूर्ति बीच वाले गुंबद के नीचे थी या नहीं।</li>
<li><strong>मस्जिद तोड़ने के बाद उसके प्रकृति पर क्या असर-</strong> यह भी अहम सवाल है कि क्या मस्जिद में अगर नमाज न पढ़ी जाए तो वह मस्जिद नहीं होती? <u></u></li>
</ol>
<p><strong>इन सवालों के आधार पर ऐसी रही 40 दिन की सुनवाई। </strong></p>
<ol>
<li>सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने कहा विवादित ढांचा 2.77 एकड़ पर सैकड़ों साल से निर्मोही अखाड़ा का पजेशन रहा है।</li>
<li>सुनवाई के दूसरे दिन राम लला विराजमान की दलील है कि राम में आस्था रखने वालों का विश्वास ही इस बात का साक्ष्य है कि अयोध्या के विवादित स्थल पर राम पैदा हुए थे।</li>
<li>सुनवाई के तीसरे दिन राम लला विराजमान की दलील है कि हाई कोर्ट में किसी भी पक्षकार ने विवादित स्थल को बांटने के लिए नहीं कहा था, लेकिन हाई कोर्ट ने विवादित स्थल को तीन भागों में बांट दिया। जन्म स्थान का खासा महत्व है। <strong>जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी</strong>।</li>
<li>सुनवाई के चौ​थे दिन राम लला विराजमान के वकील के. परासरन ने कहा कि हिंदू धार्मिक मान्यताओं में देवता का कोई विशेष आकार जरूरी नहीं है। देवता कण-कण में बसते हैं।</li>
<li>सुनवाई के पांचवे दिन राम लला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि जन्मस्थान ही देवता हैं और जन्मस्थान को साझा नहीं किया जा सकता, क्योंकि देवता का बंटवारा नहीं हो सकता।</li>
<li>सुनवाई का छठवां दिन हिंदू पक्षकार की दलील है कि राम जन्मस्थान पर बने मंदिर को तोड़ा गया और अगर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाया जाता है तो शरियत कानून ऐसे मस्जिद को मान्यता नहीं देता।</li>
<li>सुनवाई का सातवां दिन राम लला विराजमान के वकील ने दावा किया कि जिस जगह मस्जिद बनाई गई थी उसके नीचे मंदिर का बहुत बड़ा ढांचा था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में साफ है।</li>
<li>सुनवाई के आठवां दिन हिंदू पक्षकार की दलील थी कि 12 सदी के जो शिलापट्ट और शिलालेख मिले है उसके साक्ष्य बताते हैं कि वहां विशाल विष्णु मंदिर था। मस्जिद बनाए जाने के बाद भी हिंदू वहां पूजा करते थे।</li>
<li>सुनवाई के नौवे दिन हिंदू पक्षकार का कहना था कि अगर जन्मस्थान ही देवता है तो प्रॉपर्टी उसी में निहित हैं यानी प्रॉपर्टी देवता की ही हुई और ऐसे में कोई भी उस जमीन (जन्मस्थान) पर दावा नहीं कर सकता। देवता को उनकी खुद की संपत्ति से विमुख नहीं किया जा सकता।</li>
<li>सुनवाई के दसवें दिन पुजारी गोपाल दास विरासद की ओर से पेश सीनियर एडोवकेट रंजीत कुमार ने दलील दी कि वह मूल पक्षकार हैं और उन्हें जन्मस्थान पर पूजा करने का अधिकार है।</li>
<li>सुनवाई के 11वें दिन के दौरान निर्मोही अखाड़ा की ओर से दलील दी गई कि हमारा दावा टाइटल पर नहीं है बल्कि हमारा दावा ये है कि हम जन्मस्थान पर स्थित मंदिर के शेबियत (मैनेजेजर यानी देखरेख करने वाले) हैं और पोजेशन पर हमारा दावा है।</li>
<li>सुनवाई के 12वें दिन निर्मोही अखाड़ा द्वारा दलील दी गई कि हम देव स्थान का मैनेजमेंट करते हैं और पूजा का अधिकार चाहते हैं।</li>
<li>सुनवाई के 13वें दिन निर्मोही अखाड़ा की दलील दी कि विवादित ढांचे में 1934 के बाद किसी मुस्लिम नहीं प्रवेश किया। वहां मंदिर था।</li>
<li>सुनवाई के 14वें दिन हिंदू पक्षकार के वकील ने कहा कि बाबरनामा में कहीं भी जिक्र नहीं है कि मीर बाकी ने मस्जिद बनावाई थी, दरअसल औरंंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई।</li>
<li>सुनवाई के 15वें दिन हिंदू पक्षकार के वकील ने दलील दी कि इस्लाम के मुताबिक दूसरे के पूजा स्थल को गिराकर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती। इस्लामिक कानून के तहत यह मस्जिद नहीं हो सकती।</li>
<li>सुनवाई के 16 वें दिन शिया वक्फ बोर्ड की ओर से कहा गया कि हम उस एक तिहाई हिस्सा को हिंदुओं को देना चाहते हैं।</li>
<li>सुनवाई के 17 वें दिन मुस्लिम पक्षकार की ओर से राजीव धवन ने कहा कि जहां तक टाइटल शूट का सवाल है तो ऐसे मामले में ऐतिहासिक दलील का कोई मतलब नहीं रह जाता है और संपत्ति के मालिक द्वारा संपत्ति का इस्तेमाल न करने से उसका मालिकाना हक खत्म हीं हो जाता।</li>
<li>सुनवाई के 18वें दिन सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा बाबरी मस्जिद में सुनियोजित तरीके से अटैक किया गया और छल से मूर्ति रखी गई थी।</li>
<li>सुनवाई के 19वें दिन मुस्लिम पक्षकार ने निर्मोही अखाड़ा के मैनेजमेंट के अधिकार का विरोध नहीं किया लेकिन बताया कि उनका मालिकाना हक कभी नहीं था।</li>
<li>सुनवाई के 20वें दिन सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलील थी कि राम चबूतरे पर पूजा और पूजा के अधिकार को हमने कभी मना नहीं किया।</li>
<li>सुनवाई के 21वें दिन राजीव धवन ने दलील दी कि 22 दिसंबर 1949 को जो गलती हुई उसे जारी नहीं रखा जा सकता।</li>
<li>सुनवाई के 22वें दिन राजीव धवन ने कहा उन्हें धमकी दी जा रही है। अब उन्हें फेसबुक पर धमकी दी गई है। उनके क्लर्क को भी धमकाया गया है।</li>
<li>सुनवाई के 23वें दिन मुस्लिम पक्षकार की दलील थी कि मस्जिद के अंदर अल्लाह लिखे जाने के साक्ष्य हैं। वहां लगातार 1934 के बाद भी नमाज पढ़ा जाता रहा और इसके कई गवाह हैं।</li>
<li>सुनवाई के 24वें दिन मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने कहा है कि जन्मस्थान कानूनी व्यक्ति नहीं है।</li>
<li>सुनवाई के 25वें दिन राजीव धवन ने कहा इस बात से कोई इनकार नहीं है कि भगवान राम का अयोध्या में जन्म हुआ था। लेकिन क्या सिर्फ आस्था के आधार पर किसी स्थान विशेष को कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है।</li>
<li>सुनवाई के 26 वें दिन मुस्लिम पक्षकार ने कहा कि राम चरित मानस से लेकर रामायण कहीं भी इसका जिक्र नहीं है कि असल में कौन सी जगह राम का जन्म हुआ था।</li>
<li>सुनवाई के 27 वें दिन मुस्लिम पक्षकार ने कहा 1885 में तमाम कार्रवाई राम चबूतरा के लिए हुई थी।</li>
<li>सुनवाई के 28 वें दिन मुस्लिम पक्षकार के वकील ने कहा कि 1985 में न्याय बनाया गया और देश भर में कार सेवकों द्वारा आंदोलन चलाया गया और विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन को संगठित कर गति दी और फिर देश भर में माहौल बनाया गया और 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराया गया ताकि हकीकत को मिटाया जा सके और मंदिर बनाया जा सके।</li>
<li>सुनवाई के 29 वें दिन राजीव धवन ने दलील दी कि हम भगवान राम का सम्मान करते हैं। जन्मस्थान का सम्मान करते हैं इस देश में अगर राम और अल्लाह का सम्मान नहीं होगा तो देश खत्म हो जाएगा।</li>
<li>सुनवाई के 30 वें दिन मुस्लिम पक्षकार ने कहा कि राम चबूतरा जन्मस्थान है ऐसा कहने में कोई ऐतराज नहीं है क्योंकि पहले ही तीन-तीन कोर्ट इस बात को कह चुके है। लेकिन हमारा दावा पूरे इलाको को लेकर है।</li>
<li>सुनवाई के 31वें दिन सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने कहा कि हमने ये बिल्कुल स्वीकार नहीं किया कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है।</li>
<li>सुनवाई के 32वें दिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि दोनों पक्षकार अपनी दलील की समयसीमा तय करें ताकि सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी की जा सके।</li>
<li>सुनवाई के 33वें दिन मुस्लिम पक्षकार ने कहा एएसआई रिपोर्ट एक कमजोर साक्ष्य है। ये रिपोर्ट पूरी तरह से परिकल्पना पर आधारित है। साथ ही अनुमान आधारित निष्कर्ष है।</li>
<li>सुनवाई के 34वें दिन मुस्लिम पक्षकार के वकील शेखर नाफडे ने दलील दी कि 1885 के मुकदमे और अभी के मुकदमें एक जैसे ही हैं दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि 1885 में विवादित स्थल के एक जगह पर दावा किया गया था अब पूरे हिस्से में दावा किया गया है।</li>
<li>सुनवाई के 35वें दिन हिंदू पक्षकार की दलील है कि राम जन्मस्थान न्यायिक व्यक्तित्व है।</li>
<li>सुनवाई के 36वें दिन राम लला विराजमान के वकील ने कहा कि मस्जिद के नीचे जो स्ट्रक्चर था उसमें कमल, परनाला और वृताकार श्राइन के साक्ष्य मिले हैं इससे निष्कर्ष निकलता है कि वह मंदिर था।</li>
<li>सुनवाई के 37वें दिन मुस्लिम पक्षकार ने कहा कोई इस बात से इनकार नहीं कर रहा है कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। लेकिन विवाद जन्मस्थान को लेकर है। उनका जन्म बीच वाले गुंबद के नीचे नहीं हुआ था।</li>
<li>सुनवाई के 38वें दिन मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अदालत सारे सवाल हमसे ही क्यों कर रही है, हिंदू पक्षकारों से क्यों नहीं?</li>
<li>सुनवाई के 39वें दिन हिंदू पक्षकार के वकील के परासरन ने मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश की गई दलील का जवाब देते हुए कहा कि अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान पर बाबर ने मस्जिद बनवाई और ये एक ऐतिहासिक भूल किया गया है जिसे सुधारने की जरूरत है।</li>
<li>सुनवाई के 40वें दिन मुस्लिम पक्षकार ने कहा वहां दोबारा कंस्ट्रक्शन का अधिकार हमारा है। प्रेयर करने का अधिकार हमारा है क्योंकि टाइटल हमारा है। यहां तक कि चबूतरे का पार्ट भी मस्जिद का ही है। मस्जिद सिर्फ गुंबद नहीं।</li>
</ol>
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