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	<title>health ministry &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>सावधान : राजधानी समेत कई जिलों में जीका का कहर, डेंगू और चिकनगुनिया भी हावी</title>
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		<pubDate>Thu, 29 Nov 2018 09:34:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल,. &#124; राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में जीका वायरस के मरीजों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। भोपाल में जहां दो वहीं सीहोर में एक मरीज जीका वायरस से ग्रसित पाया गया है। ऐसे में सतर्क हुए प्रशासन ने जीका वायरस पर नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर ... <a title="सावधान : राजधानी समेत कई जिलों में जीका का कहर, डेंगू और चिकनगुनिया भी हावी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/zicha-virus-dengue-and-chikungunya-too-in-many-districts-including-the-capital-news/" aria-label="Read more about सावधान : राजधानी समेत कई जिलों में जीका का कहर, डेंगू और चिकनगुनिया भी हावी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/stories/102018/zika_1539796824_618x347.jpeg" alt="à¤¸à¤¾à¤à¤à¥à¤¤à¤¿à¤ à¤¤à¤¸à¥à¤µà¥à¤° (à¤«à¤¾à¤à¤² à¤«à¥à¤à¥: à¤ªà¥à¤à¥à¤à¤)" width="730" height="410" /></p>
<p><span class="gmail-storydetails">भोपाल,. | राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में जीका वायरस के मरीजों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। भोपाल में जहां दो वहीं सीहोर में एक मरीज जीका वायरस से ग्रसित पाया गया है। ऐसे में सतर्क हुए प्रशासन ने जीका वायरस पर नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।<br />
गौरतलब है कि भोपाल में पहले भी 100 से ज्यादा संदिग्ध मरीज मिल चुके हैं| विदिशा में भी मामले सामने आए हैं। तीनों जिलों में जीका वायरस पॉजिटिव मरीजों की संख्या अब 130 हो गई है। इसके साथ ही डेंगू और चिकनगुनिया के नए मरीज भी सामने आ रहे हैं।<br />
</span></p>
<h3><span class="gmail-storydetails">ऐसे होगी निगरानी<br />
</span></h3>
<p><span class="gmail-storydetails">जीका, डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज लगातार मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात बरतते हुए ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित किया है जिनमें लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अब इन क्षेत्रों में ज्योग्राफीकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) के माध्यम से नजर रखे जाने की तैयारी की जा रही है। इससे वहां बीमारी फैलने के कारणों और गतिविधियों का पता लगाया जा सकेगा। ताकि जल्द से जल्द रोकथाम के उपाय शुरू किए जा सकें।<br />
</span></p>
<h3><span class="gmail-storydetails">ब्लड बैंकों को सतर्क रहने के निर्देश<br />
</span></h3>
<p><span class="gmail-storydetails">जीका के कहर को रोकने के लिए राज्य सरकारों ने सभी ब्लड बैंकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। डोनर से ब्लड लेने से पहले यह देखा जाए कि उसकी ट्रैवल हिस्ट्री क्या है। एडवाइजरी में कहा गया है कि ब्लड बैंकों को जीका वायरस के फैलाव के मद्देनजर डोनर के चयन में सावधानी बरती जाए। यदि डोनर जीका वायरस से प्रभावित क्षेत्र से आया है तो चार सप्ताह तक उसका ब्लड न लिया जाए।<br />
</span></p>
<h3><span class="gmail-storydetails">स्वास्थ्य विभाग का सर्वे जारी<br />
</span></h3>
<p><span class="gmail-storydetails">राजधानी समेत विदिशा और सीहोर में सामने आए जीका वायरस पॉजीटिव मरीजों की संख्या देख परेशान हुए स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम के प्रयास शुरू कर दिए थे। इसके तहत लार्वा सर्वे तथा मच्छरों को नष्ट करने के लिए शहर में 165 टीमें लगा दी थीं। ये टीमें प्रतिदिन पांच से छह घरों में सर्वे कर रही हैं। टीमों को हर रोज मच्छरों का लार्वा भी मिल रहा है। हर रोज लार्वा की जांच कर उसे नष्ट किया जा रहा है। स्थिति यह है कि कई घरों में दोबारा सर्वे करने पर भी मच्छरों का लार्वा मिला है।<br />
</span></p>
<h3><span class="gmail-storydetails">डेंगू का खतरा 400 मीटर तक<br />
</span></h3>
<p><span class="gmail-storydetails">स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू का खतरा 400 मीटर के क्षेत्र तक है। दरअसल जिन घरों में डेंगू का लार्वा मिल रहा है, उन घरों के आसपास समेत 400 मीटर के क्षेत्र में इसका खतरा रहता है। इसका कारण है डेंगू का मच्छर 400 मीटर से उड़ सकता है। इस साल में अब तक 757 मामले डेंगू के आए, वहीं पिछले दो महीनों में इनकी संख्या में इजाफा ही दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब तक डेंगू का खतरा कम नहीं हुआ है। </span></p>
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		<title>सिरदर्द, जुकाम और बुखार समेत 328 दवाओं पर सरकार ने जारी किया फरमान&#8230;</title>
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		<pubDate>Wed, 12 Sep 2018 18:55:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली:  केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने 328 दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. एक माह पहले उसके टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने ऐसी सिफारिश की थी. यही नहीं मंत्रालय 6 और दवाओं के उत्‍पादन, बिक्री और वितरण पर रोक लगाएगा. इस प्रतिबंध से 1.18 लाख करोड़ रुपए के फार्मा उद्योग से 1500 करोड़ रुपए का कारोबार बंद हो ... <a title="सिरदर्द, जुकाम और बुखार समेत 328 दवाओं पर सरकार ने जारी किया फरमान&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/328-combination-medicines-ban-by-health-ministry-news/" aria-label="Read more about सिरदर्द, जुकाम और बुखार समेत 328 दवाओं पर सरकार ने जारी किया फरमान&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: </strong> केंद्रीय स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य मंत्रालय ने 328 दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. एक माह पहले उसके टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने ऐसी सिफारिश की थी. यही नहीं मंत्रालय 6 और दवाओं के उत्&#x200d;पादन, बिक्री और वितरण पर रोक लगाएगा. इस प्रतिबंध से 1.18 लाख करोड़ रुपए के फार्मा उद्योग से 1500 करोड़ रुपए का कारोबार बंद हो जाएगा. जिन दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें सिरदर्द समेत कई रोगों की दवाएं शामिल हैं.</p>
<div class="articleContentD">
<p>इस बैन से 1.18 लाख करोड़ रुपए के फार्मा उद्योग से 1500 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित होने की बात कही जा रही है।जिन दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें सिरदर्द समेत तमाम मर्जों की दवाएं शामिल हैं। ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड के नोटिफिकेशन के मुताबिक 328 कॉम्बिनेशन मेडिसिन बंद की गई हैं, ये फिक्&#x200d;स्&#x200d;ड डोज कॉम्बिनेशन में आती हैं, बोर्ड का कहना है कि ये दवाएं रोगियों के लिए खतरनाक हैं।</p>
<h3>सरकार के इस फैसले से कई नामचीन कंपनियों को लगेगा झटका</h3>
<p>सरकार के इस फैसले से कई नामचीन कंपनियों को झटका लगने की उम्मीद जताई जा रही है। दावा किया जा रहा था कि जुकाम, खांसी की कई प्रचलित दवायें भी बंद हो जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं है। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने सिर दर्द में ली जाने वाली सेरिडॉन को तो बंद कर दिया है लेकिन डीकोल्&#x200d;ड टोटल, फेंसेडाइल को बंद नहीं किया है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 328 फिक्स्ड डोज मिश्रण (FDC) वाली दवाओं का फिर से परीक्षण कराने को कहा था। इन दवाओं पर प्रतिबंध लगाने के बाद मेडिकल स्टोर पर इनकी बिक्री गैरकानूनी होगी।</p>
<p>कहा जा रहा है कि दवा बनाने वाली कंपनियों ने 328 फिक्स डोज़ कॉम्बिनेशन वाली दवाओं के प्रभाव और दुष्प्रभाव का अध्ययन किए बिना ही इन दवाइयों को बाजार में उतार दिया था जिसके चलते ये कदम उठाना पड़ा।</p>
</div>
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		<title>क्या आत्महत्या की कोशिश करना अपराध नहीं? ये खबर आपको कर देगी परेशान&#8230;</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Aug 2018 06:23:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली .अब आत्महत्या का प्रयास करने वाले पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। आत्महत्या करने वाले को अब अपराधी नहीं, बल्कि मानसिक रोगी माना जाएगा। मेंटल हैल्थकेयर एक्ट-2017 में ऐसे प्रावधान किए गए हैं। यह एक्ट गुरुवार से लागू हो गया। इसके तहत अब मानसिक बीमारों का भी मेडिकल इंश्योरेंस हो सकेगा। दूसरी ओर, भारतीय दंड संहिता ... <a title="क्या आत्महत्या की कोशिश करना अपराध नहीं? ये खबर आपको कर देगी परेशान&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/provisions-apply-in-the-mental-healthcare-act-2017-news/" aria-label="Read more about क्या आत्महत्या की कोशिश करना अपराध नहीं? ये खबर आपको कर देगी परेशान&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><b>नयी दिल्ली .</b>अब आत्महत्या का प्रयास करने वाले पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। आत्महत्या करने वाले को अब अपराधी नहीं, बल्कि मानसिक रोगी माना जाएगा। मेंटल हैल्थकेयर एक्ट-2017 में ऐसे प्रावधान किए गए हैं। यह एक्ट गुरुवार से लागू हो गया। इसके तहत अब मानसिक बीमारों का भी मेडिकल इंश्योरेंस हो सकेगा। दूसरी ओर, भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के तहत आत्महत्या का प्रयास अपराध माना जाता है। इस धारा में पिछले 155 साल से कोई भी संशोधन नहीं किया गया है।</p>
<p>मेंटल हैल्थकेयर एक्ट-2017 की प्रदेश में पालना अनिवार्य कर दी गई है। अभी तक कोई भी कंपनी मानसिक रोगियों का मेडिकल इंश्योरेंस नहीं करती थी। एक्ट के लागू होने से अब कोई भी कंपनी इनका इंश्योरेंस करने से इनकार नहीं कर सकेगी। इसके लिए बुधवार को राज्य मेंटल हेल्थकेयर अथॉरिटी का गठन भी कर दिया गया। एनएचएम की अतिरिक्त निदेशक डाॅ. आरुषि मलिक ने बताया कि काफी रिसर्च और जानकारियों के बाद यह तय किया गया है कि आत्महत्या मानसिक बीमारी के रूप में मानी जाएगी। ऐसे व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता। इसलिए नियम में परिवर्तन किया गया है।</p>
<p><b>एक्ट में उल्लेख : आत्महत्या की कोशिश करने वाले का इलाज कराना सरकार का कर्तव्य:</b>मेंटल हैल्थकेयर एक्ट-2017 की धारा 115 के तहत आत्महत्या की कोशिश व्यक्ति भारी तनाव में करता है। ऐसे में उसे अपराधी मानकर दंडित नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के लिए सरकार का कर्तव्य है कि उसे मानसिक रोगी मानकर उसके इलाज से लेकर उसके पुनर्वास करे, ताकि ऐसा फिर से होने की आशंका कम हो सके।</p>
<p><b>93% तक खुदकुशी मानसिक कारणों से</b></p>
<p>-3,765 लोगों ने आत्महत्या की प्रदेश में 2017 में। 2,641 पुरुष, 1,124 महिलाएं।<br />
&#8211; 366 लोगों ने खुदकुशी की 2017 में जयपुर में।</p>
<p>&#8211; मध्यप्रदेश में अगस्त 2017 को सबसे पहले लागू किया गया था मेंटल हेल्थकेयर एक्ट।<br />
&#8211; विशेषज्ञों के अनुसार 93% तक आत्महत्याएं मानसिक कारणों से होती हैं।</p>
<p><b>जिला स्तर पर भी कमेटियों का गठन होगा:</b>एनएचएम की अतिरिक्त निदेशक डाॅ. आरुषि मलिक ने बताया कि जिला स्तर पर भी अथॉरिटी बनाई जाएगी, ताकि वहां मरीजों के रजिस्ट्रेशन किए जा सकें। अभी तक मानसिक मरीजों और परिजनों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब मरीजों को भर्ती करने और इलाज की जिम्मेदारी तय होगी। मरीज को भर्ती करने से पहले उसकी या परिजनों की लिखित अनुमति लेनी होगी। यहां तक कि यदि कोई संस्थान बिना रजिस्ट्रेशन मरीजों को भर्ती करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज होगी। पिछले काफी समय से मरीजों और परिजनों की शिकायतें आ रही थीं और उन्हीं को आधार मानते हुए अधिनियम-1985 में बदलाव किया गया है।</p>
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