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	<title>holika dahan &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>Holika Dahan 2025: होली पर भद्रा का साया, जानें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और कथा</title>
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		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 00:37:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हिंदू पंचाग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को (Holi) का पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है कि होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दो दिन तक चलने वाले इस त्योहार के पहले दिन होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहते हैं। मान्यता है कि होलिका दहन से ... <a title="Holika Dahan 2025: होली पर भद्रा का साया, जानें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और कथा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/holika-dahan-2025-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c/" aria-label="Read more about Holika Dahan 2025: होली पर भद्रा का साया, जानें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और कथा">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1600" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/Untitled-design-2025-03-07T110311937ITG-1741429863541.avif" alt="" class="wp-image-486016" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/Untitled-design-2025-03-07T110311937ITG-1741429863541.avif 1600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/Untitled-design-2025-03-07T110311937ITG-1741429863541-300x169.avif 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/Untitled-design-2025-03-07T110311937ITG-1741429863541-768x432.avif 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/Untitled-design-2025-03-07T110311937ITG-1741429863541-1536x864.avif 1536w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/03/Untitled-design-2025-03-07T110311937ITG-1741429863541-150x84.avif 150w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">हिंदू पंचाग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को (Holi) का पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है कि होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दो दिन तक चलने वाले इस त्योहार के पहले दिन होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहते हैं। मान्यता है कि होलिका दहन से परेशानियां दूर होती है और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है। वहीं इसके अगले दिन शुक्रवार को रंगोत्सव की धूम रहती है। इस दिन लोग एक दूसरे पर गुलाल फेंकते हैं और घर-घर जाकर रंग लगाने के साथ ही होली की बधाई देते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस वर्ष होलिका दहन 13 मार्च 2025, गुरुवार को किया जाएगा। लेकिन पंडित और ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा और भद्राकाल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं पूर्णिमा तिथि कब शुरू होगी और कब समाप्त, भ्रदा काल कब से रहेगा और होलिका दहन की क्या है पूजा विधि&#8230;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तिथि कब से कब तक</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">फाल्गुन पूर्णिमा आरंभ: 13 मार्च 2025, बुधवार की सुबह 10 बजकर 35 बजे से</p>



<p class="wp-block-paragraph">फाल्गुन पूर्णिमा समापन: 14 मार्च 2025, गुरुवार की दोपहर 12 बजकर 24 बजे तक</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भ्रदा काल का समय</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ज्योतिषियों के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा आरंभ होने के साथ ही भद्रा का साया भी प्रभावशील हो जाएगा, जो रात लगभग 11 बजकर 26 बजे तक रहेगी। वहीं होलिका दहन के लिए रात लगभग 12 बजकर 23 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होलिका दहन विधि</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; इस दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और साफ वस्त्र पहनें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; पूजा घर की सफाई करें और फिर भगवान सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत का संकल्प लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; जिस जगह पर होलिका दहन करना हो, उस जगह को साफ करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; इसी जगह पर होलिका दहन की सारी सामग्री इकट्ठा कर लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; इसके बाद होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाकर भगवान नरसिंह की पूजा करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; होलिका दहन के शुभ मुहूर्त में होलिका की पूजा करें और उसमें अग्नि दें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; इसके बाद परिवार के साथ होलिका की तीन बार परिक्रमा कर लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; नरसिंह भगवान से प्रार्थना करते हुए होलिका की आग में गेहूं, चने की बालियां, जौ आदि डालें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; इसके बाद होलिका की आग में गुलाल और जल चढ़ाएं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; होलिका की आग शांत होने के बाद उसकी राख को घर में रखें।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डिसक्लेमरः</strong> इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। dainikbhaskar यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।</p>
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		<title>मिर्जापुर : होलिका पर होगा एनपीएस काला कानून का दहन- राष्ट्रीय अध्यक्ष</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Mar 2023 10:43:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मिर्जापुर। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर देश के 75 लाख एनपीएस कार्मिक होलिका दहन पर एनपीएस काला कानून की प्रतियों का दहन करते हुए पुरानी पेंशन बहाली की आवाज बुलन्द करेगे राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि पुरानी पेंशन बहाली की आवाज को हर पटल पर उठाने ... <a title="मिर्जापुर : होलिका पर होगा एनपीएस काला कानून का दहन- राष्ट्रीय अध्यक्ष" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mirzapur-this-time-also-nps-black-law-will-be-burnt-on-holika-dahan-national-president-news-in-hindi/" aria-label="Read more about मिर्जापुर : होलिका पर होगा एनपीएस काला कानून का दहन- राष्ट्रीय अध्यक्ष">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0030.jpg" alt="" class="wp-image-331031" width="839" height="1085"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मिर्जापुर। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर देश के 75 लाख एनपीएस कार्मिक होलिका दहन पर एनपीएस काला कानून की प्रतियों का दहन करते हुए पुरानी पेंशन बहाली की आवाज बुलन्द करेगे राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि पुरानी पेंशन बहाली की आवाज को हर पटल पर उठाने का प्रयास कार्मिकों के द्धारा किया जा रहा है विगत कई वर्षों से हर तीज त्यौहार पर पुरानी पेंशन बहाली की आवाज को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस वर्ष भी होली दहन पर सभी शिक्षक कर्मचारी अधिकारी डाक्टर नर्स स्वास्थ्य कर्मी सफाई कर्मी बैंक कर्मी पुलिस कर्मी रेलवे कर्मी अपने बुढ़ापे का सहारा पुरानी पेंशन बहाली के लिए होली दहन पर पुरानी पेंशन की अच्छाइयों को बताते हुए एनपीएस का विरोध करेगे बी पी सिंह रावत ने कहा है कि एनपीएस कार्मिक हर रोज पुरानी पेंशन बहाली की आवाज बुलन्द करते हुए संघर्ष कर रहे है। 12 मार्च को उत्तर प्रदेश के हजारों एनपीएस कार्मिक प्रयागराज में एक बड़ी रेल का आयोजन करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के एनपीएस कार्मिक अब आर या पार के लिए तैयार है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के द्धारा 1 मई को संसद मार्च की भी तैयारी की जा रही इसके लिए देश के सभी एनपीएस कार्मिक एकजुट हो रहे है इसके लिए प्रचार प्रसार तेज किया जा रहा है बी पी सिंह रावत ने कहा है कि ये होलिका दहन एनपीएस कार्मिकों के लिए एनपीएस काला कानून दहन अंतिम होगा क्योंकि अब 2024 की तैयारी की जा रही है केंद्र सरकार को 2024 से पहले पुरानी पेंशन बहाली का निर्णय लेना होगा देश के 75 लाख एनपीएस कार्मिक अपने परिवार सहित पुरानी पेंशन बहाली के लिए देश की सड़को पर मोर्चा खोल चुके है। बी पी सिंह रावत ने कहा है देश के हर राज्य में बड़े आंदोलन कार्यक्रम आयोजित किए जायेगे देश के सभी कार्मिक संगठन देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के बैनर के साथ एकजुट हो रहे है केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बी पी सिंह रावत ने कहा है कि जिस तरह राजस्थान छत्तीसगढ़ झारखंड पंजाब हिमाचल सरकार ने पुरानी पेंशन बहाली का निर्णय लिया है उसी तरह उत्तर प्रदेश सरकार सहित अन्य राज्य सरकारों भी कार्मिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन बहाली का निर्णय लेना चाहिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को विशेष रूप से बड़ा निर्णय लेना होगा नही तो सभी एनपीएस कार्मिक आक्रोशित है जिसका खामियाजा केंद्र सरकार को भुगतना होगा।</p>
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		<title>Holika Dahan 2022 : इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, जानें क्या है पूजा विधि</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/holika-dahan-2022-worship-in-this-auspicious-time-know-what-is-the-method-of-worship-news-in-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Mar 2022 12:36:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[holi2022]]></category>
		<category><![CDATA[holika dahan]]></category>
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					<description><![CDATA[होलिका दहन 2022 पूजा विधि, मुहूर्त, कथा और महत्व : पंचांग अनुसार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। ये तिथि इस बार 17 मार्च को पड़ रही है। इसलिए इसी दिन देशभर में होलिका दहन का त्योहार मनाया जाएगा। होलिका दहन के अगले दिन 18 ... <a title="Holika Dahan 2022 : इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, जानें क्या है पूजा विधि" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/holika-dahan-2022-worship-in-this-auspicious-time-know-what-is-the-method-of-worship-news-in-hindi/" aria-label="Read more about Holika Dahan 2022 : इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, जानें क्या है पूजा विधि">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="719" height="476" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/03/WhatsApp-Image-2022-03-16-at-4.17.15-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-179809" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होलिका दहन 2022 पूजा विधि, मुहूर्त, कथा और महत्व :</strong> पंचांग अनुसार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। ये तिथि इस बार 17 मार्च को पड़ रही है। इसलिए इसी दिन देशभर में होलिका दहन का त्योहार मनाया जाएगा। होलिका दहन के अगले दिन 18 मार्च को रंगवाली होली खेली जाएगी। ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो इस बार होलिका दहन के लिए अधिक समय नहीं मिलेगा क्योंकि इस दिन भद्रा का साया रहेगा। जानिए ऐसे में किस मुहूर्त में करेंगे होलिका दहन और क्या है इसकी पूजा विधि।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होलिका दहन 2022 मुहूर्त: </strong>17 मार्च को रात 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 31 मिनट तक का समय होलिका दहन के लिए शुभ बताया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार होलिका दहन के लिए सिर्फ 1 घंटा 10 मिनट का समय ही मिलने वाला है। इसके पीछे का कारण भद्रा काल बताया जाता रहा है। जो इस दिन यानी 17 मार्च को दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से लग जाएगा जिसकी समाप्ति रात 12 बजकर 28 मिनट पर होगी। भद्रा योग अशुभ योग की श्रेणी में देखा जाता है। लेकिन 17 मार्च को रात 09 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 31 मिनट तक भद्रा की पुँछा अवधि रहेगी। जो होलिका पूजन के लिए शुभ मानी जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसे बनता है भद्रा योग? </strong>जब चंद्रमा अपनी गोचर अवधि में कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है तब भद्रा विष्टीकरण के योग का निर्माण होता है। मान्यता है इस अवधि में भद्रा पृथ्वी लोक में रहती है। ऐसे में इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं। ज्योतिष अनुसार भद्रा स्वर्ग-पृथ्वी-पाताल तीनो लोक में सुख व दुख देने का काम करती है। जब चंद्रमा मेष, वृषभ, मिथुन और वृश्चिक राशि में गोचर करता है तब भद्रा स्वर्ग में रहती है। जब चंद्रमा कुंभ, मीन, कर्क और सिंह राशि में होता है तब भद्रा का निवास पृथ्वी पर होता है और इसके अलावा जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु और मकर राशि में होता है तब भद्रा पाताल में उपस्थित होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होलिका दहन पूजन विधि:</strong><br>-इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।<br>-इसके बाद जहां होलिका दहन करना है उस जगह को साफ करें और यहां पर सूखी लकड़ी, गोबर के उपले, सूखे काटे ये सभी सामग्री एकत्रित कर लें।<br>-इसके बाद होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बना लें।<br>-होलिका दहन वाले दिन भगवान नरसिंह की पूजा भी अवश्य करें।<br>-शाम होने पर दोबारा से पूजा करें और पूजा के बाद होलिका दहन की तैयारी शुरू कर दें।<br>-होलिका में अग्नि जलाने के बाद अपने पूरे परिवार के साथ होलिका की तीन परिक्रमा करें।<br>-परिक्रमा के दौरान मन ही मन भगवान नरसिंह का नाम जपे और 5 अनाज अग्नि को अर्पित करें।<br>-इस बात का भी ध्यान रखें कि परिक्रमा करते समय आपको अर्ग्य देनी है और कच्चे सूत को होलिका में लपेटना है।<br>-फिर उपले, चने की बालों, जौ, गेहूं सभी चीजें होलिका में डालें।<br>-आखिर में होलिका में गुलाल रंग डालें और जल चढ़ाएं।<br>-जब होलिका की अग्नि शांत हो जाए तो इसकी राख अपने घर में साफ-सुथरी पवित्र जगह पर रख दें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्यों मनाते हैं होलिका दहन?</strong> यह वो दिन था जब राक्षस राजा हिरण्यकश्यप की बहन होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई थी। क्योंकि होलिका को ये वरदान प्राप्त था कि वो आग में जल नहीं सकती। इस कारण वो प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद तो अग्नि से बच गए बल्कि उनकी जगह पर खुद होलिका जलकर राख हो गई।<a rel="noreferrer noopener" href="https://www.mgid.com/ghits/11886056/i/57523855/0/pp/1/1?h=ko_DLxiy7PtXBpN3eSsPpqmMzNLPLR8ZG4cYq-qUJSr9NhoUtKN2FP7q_JVpr3x4&amp;rid=56d0c874-a514-11ec-8ce0-2cea7f942996&amp;ts=patrika.com&amp;tt=Referral&amp;att=4&amp;cpm=1&amp;gbpp=1&amp;abd=1&amp;iv=11&amp;ct=1&amp;gdpr=0&amp;st=330&amp;muid=m123WSyG80W0" target="_blank"></a></p>
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		<title>होली विशेष : सालों बाद बना मातंग योग, जानिए इस बार का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
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		<pubDate>Wed, 20 Mar 2019 03:43:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग होता है जिसे आनंद या उल्लास कहते हैं, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों से भी होली का त्यौहार मनाते हैं. मान्यता है कि इस दिन स्वयं को ही भगवान मान बैठे हरिण्यकशिपु ने भगवान की भक्ति में लीन अपने ही पुत्र प्रह्लाद को अपनी ... <a title="होली विशेष : सालों बाद बना मातंग योग, जानिए इस बार का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/holi-special-matang-yoga-made-after-years-know-this-auspicious-time-and-worship-method-of-this-time-news/" aria-label="Read more about होली विशेष : सालों बाद बना मातंग योग, जानिए इस बार का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग होता है जिसे आनंद या उल्लास कहते हैं, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों से भी होली का त्यौहार मनाते हैं. मान्यता है कि इस दिन स्वयं को ही भगवान मान बैठे हरिण्यकशिपु ने भगवान की भक्ति में लीन अपने ही पुत्र प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका के द्वारा जीवित जला देना चाहा था, लेकिन भगवान ने भक्त पर अपनी कृपा की और प्रह्लाद के लिए बनाई चिता में स्वयं होलिका जल मरी. इसलिए इस दिन होलिका दहन की परंपरा भी है.</p>
<p>बताते चले  काफी समय बाद दोनों ही दिन मातंग योग बन रहा है। भद्रा के अधिक समय रहने के कारण इस बार होलिका दहन बुधवार की रात्रि नौ बजे के बाद हो सकेगा। सात साल बाद बृहस्पति के उच्च प्रभाव में दुल्हैंडी यानी रंगोत्सव होगा।  ज्योतिषाचार्य  के अनुसार, होलिका दहन का मुहूर्त किसी भी त्योहार के मुहूर्त से अधिक महत्वपूर्ण है।</p>
<p>किसी अन्य पर्व की पूजा अगर उपयुक्त समय पर न की जाए तो केवल पूजा के लाभ से वंचित होना पड़ेगा। वैदिक काल में इस पर्व को नवान्नेष्टि कहा गया। इसमें अधपके अन्न का हवन कर प्रसाद बांटने का विधान है।</p>
<p>घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति आदि के लिए महिलाएं इस दिन होली की पूजा करती हैं. होलिका दहन के लिए लगभग एक महीने पहले से तैयारियां शुरु कर दी जाती हैं. कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है फिर होली वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका का दहन किया जाता है.</p>
<p><strong>शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>20 मार्च 2019 को होलिका दहन है इस दिन सुबह 9 बजकर 44 मिनिट दिन से भद्रकाल लग रहा है जो रात्रि 8 बजकर 36 मिनिट तक रहेगा इस भद्राकाल में होलिका दहन शुभकारी नही होता है. इसके बाद ही होलिका दहन करना मंगलकारी रहेगा. होली की तैयारी हर घर में शुरू हो गई है. घरों के साथ-साथ बाजार भी सजने लगे हैं. होली के दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं और पुराने गिले-शिकवों को दूर करते हैं.</p>
<p>होलिका की पवित्र अग्नि में लोग जौ की बाल और शरीर पर लगाए गए सरसों के उबटन को डालते हैं. ऐसी मान्यता है कि ये करने से घर में खुशी आती है. होलिका दहन भद्रा में कभी नहीं होता. होली के अगले दिन दुल्हंडी का पर्व मातंग योग में मनाया जाएगा. दोनों दिन क्रमश: पूर्वा फागुनी और उत्तरा फागुनी नक्षत्र पड़ रहे हैं. स्थिर योग में आने के कारण होली का शुभ पर्व माना गया है.</p>
<p><strong>होलिका पूजन विधि</strong></p>
<p>होली में अग्नि प्रज्योलित करने से पूर्व होलीका का पूजन करने का विधान है. जातक को होलिका का पूजा करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए. पूजन करने के लिए माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच प्रकार के अनाज में गेंहू की बालियां और साथ में एक लोटा जल रखना चाहिए और उसके बाद होलिका के चारों ओर परिक्रमा करनी चाहिए. अगले दिन होली की भस्म लाकर चांदी की डिबिया में रखना चाहिए.</p>
<p>होलिका की पवित्र आग में लोग जौ की बाल, सरसों की उबटन, गुझिया, फल, मीठा, गुलाल से होली का पूजन करते हैं। राग और रंग होली के दो प्रमुख अंग हैं।<br />
सातों रंगों के अलावा, सात सुरों की झंकार इसका उल्लास बढ़ाती है। गीत, फाग, होरी, धमार, रसिया, कबीर, जोगिरा, ध्रुपद, छोटे’बड़े ख्यालवाली ठुमरी होली की पहचान है।</p>
<p><strong> Holika dahan shubh muhurat</strong></p>
<p>रात्रि: 8:58 बजे से  12:13 बजे तक।</p>
<p>भद्रा पूंछ:<br />
शाम 5:24 से 6:25 बजे तक।<br />
भद्रा मुख:<br />
शाम 6:25से रात 8:07बजे तक।</p>
<p><strong>इसलिए भद्रा में नहीं जलती होली</strong><br />
ज्योतिषाचार्य  के अनुसार भद्रा में होलिका दहन नहीं होता है। भद्रा को विघ्नकारक माना जाता है। इस दौरान होलिका दहन से हानि एवं अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसीलिए भद्रा काल छोड़कर होलिका दहन किया जाता है। विशेष परिस्थितियों में भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन किया जाता है। मगर इस वर्ष अच्छी बात यह है कि भद्रा रात के दूसरे पहर में ही समाप्त हो जाएगी।</p>
<p><strong>पश्चिम भारत में मात्र 10 मिनट</strong><br />
इस बार होलिका दहन में समय बदला है। सामान्यत: यह शाम 4 बजे के बाद होता है लेकिन इस बार भद्र मुख के कारण होलिका दहन का कार्यक्रम थोड़ी देर से शुरू होगा। मुंबई और पश्चिम भारत में होलिका दहन के लिए काफी कम समय मिलेगा। मात्र 10 मिनट। यह 8.57 से शुरू होकर 9.09 तक चलेगा।</p>
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