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	<title>Human Organ Trafficking India &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>कानपुर किडनी कांड : मेरठ में दबिश से पहले ठिकाने से भाग निकले अफजल और अमित&#8230;.सीडीआर के जरिए सामने आएंगे सिंडिकेट मेंबर</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/kanpur-kidney-racket-afzal-and-amit-flee-hideout-just-before-raid-in-meerut-syndicate-members-to-be-identified-via-cdr-analysis/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 01:36:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-512661" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/04/hq720-67.jpg" alt="" width="686" height="386" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/04/hq720-67.jpg 686w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/04/hq720-67-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 686px) 100vw, 686px" /></p>
<p>&#8211; मास्टरमाइंड डॉ. रोहित के दोनों नंबर स्विच-ऑफ<br />
&#8211; सीडीआर के जरिए सामने आएंगे सिंडिकेट मेंबर<br />
&#8211; रिसीवर पारुल के पति को पुलिस ने भेजा न्योता</p>
<p>कानपुर। खाकी वर्दी के गद्दारों के कारण किडनी के सौदागर कानून की गिरफ्त में आने से बच निकले। लोकेशन की सटीक सूचना पर सर्विलांस टीम मेरठ के ठिकाने पर पहुंच गई थी, लेकिन चंद मिनट पहले गद्दारों की सूचना के कारण डॉ. अफजल और अमित भाग निकले। कुछ घंटों बाद दोनों की लोकेशन गाजियाबाद में मिली तो पुलिस टीम ने पड़ोसी जिले में डेरा डाल दिया है। संभावित ठिकानों में दबिश जारी है। दूसरी ओर, पुलिस की गिरफ्त में आए ओटी टेक्निशियन के जरिए किडनी ट्रांसप्लांट के मास्टरमाइंड डॉ. रोहित के दो मोबाइल नंबरों की जानकारी हासिल हुई थी, लेकिन दोनों मोबाइल स्विच-ऑफ हैं। ऐसे में रोहित के मोबाइल नंबरों की सीडीआर के जरिए किडनी सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों की शिनाख्त की कोशिश होगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>खाकी को विभाग के गद्दार की तलाश</strong><br />
किडनी कांड में आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा के साथ दलाल शिवम अग्रवाल, राम प्रकाश, राजेश व नरेंद्र सिंह को पुलिस पहले ही दिन जेल भेज चुकी है। बीते दिवस किडनी ट्रांसप्लांट में शामिल ओटी टेक्निशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह की गिरफ्तारी के बाद कमिश्नरेट पुलिस को लखनऊ के डॉ. रोहित, मेरठ के डॉ. अफजल, डॉ. अमित उर्फ अनुराग और डॉ. वैभव की तलाश है। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए संभावित इलाकों में दबिश जारी है। सर्विलांस टीम लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली, मेरठ, देहरादून में डेरा जमाए है। इसी दौरान सटीक सूचना मिली कि, मेरठ के अमुक इलाके में डॉ. अफजल और डॉ. अमित मौजूद हैं। सर्विलांस टीम लोकेशन ट्रैस करते हुए मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस एक्शन की सूचना अफजल तक पहुंच गई थी। ऐसे में अफजल और अमित कुछ देर पहले ही ठिकाना छोड़कर निकल गए थे। कुछ घंटे बाद अफजल और अमित की लोकेशन पड़ोसी जिले गाजियाबाद में मिली थी। लोकेशन के आधार पर संभावित जगहों पर दबिश जारी है। इसी दौरान पुलिस को किडनी सिंडिकेट में शामिल गाजियाबाद के एक अन्य डाक्टर के बारे में भी जानकारी हासिल हुई है। चर्चा है कि, पुलिस एक्शन की सूचना को अफजल तक पहुंचाने वाले विभागीय गद्दार की शिनाख्त में आला अफसर जुटे हैं।</p>
<p><strong>रोहित की सीडीआर से बेनकाब होंगे चेहरे</strong><br />
बीते दिवस गिरफ्त में आए ओटी टेक्निशियन कुलदीप सिंह और राजेश कुमार ने पुलिस को तमाम पुख्ता जानकारियां मुहैया कराई हैं। हापुड़ के पिलखुआ निवासी कुलदीप सिंह वर्ष 2012 से गाजियाबाद के शांति गोपाल हास्पिटल में 42 हजार रुपए की तनख्वाह पर ओटी टेक्नीशियन है, जबकि गाजियाबाद का राजेश कुमार नोएडा के सर्वोदय हास्पिटल में ओटी मैनेजर है। उसका वेतन 70 हजार रुपये था। उसने ओटी का दो साल का कोर्स किया है। लगभग डेढ़ साल पहले राजेश और कुलदीप की मुलाकात गाजियाबाद के वैशाली स्थित अस्पताल में आयोजित सेमिनार में 35 वर्षीय डॉ. रोहित से हुई थी। धीरे-धीरे रिश्ते पुख्ता हुए और तीनों किडनी की खरीद-बिक्री और ट्रांसप्लांट के रैकेट में शामिल हो गए। इस रैकेट में डॉ. सैफ, अखिलेश और शैलेंद्र नामक तीन नए चेहरों के शामिल होने की जानकारी मिली है। सिंडिकेट के अन्य किरदारों की शिनाख्त के लिए पुलिस ने डॉ. रोहित के मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकलवाने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर, पुलिस जल्द ही आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत आहूजा की पुलिस कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी में जुटी है।</p>
<p><strong>पुलिस के बुलावे पर नहीं आया पारुल का पति</strong><br />
किडनी डोनर आयुष चौधरी का कहना है कि, उसे किडनी दान करने के एवज में साढ़े नौ लाख रुपए का ऑफर था, जबकि सिर्फ छह लाख रुपए दिए गए। पुलिस को इनपुट मिला है कि, आयुष को देने के लिए पारुल के पति से दलाल शिवम ने 15 लाख रुपए वसूले थे। चर्चा है कि, किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा डॉ. अफजल और डॉ. रोहित के रैकेट ने शिवम के साथ मिलकर पारुल के पति से 60 लाख में किया था। ऐसे में सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने मुजफ्फरनगर निवासी पारुल के पति स्कूल संचालक विकास तोमर को पूछताछ के लिए बुलाया है, लेकिन वह अभी तक नहीं आय़ा है। डीसीपी-पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, पारुल के पति को बुलाने के लिए दोबारा नोटिस भेजी जाएगी।</p>
<p><strong>उस रात होने थे दो किडनी ट्रांसप्लांट !</strong><br />
गिरफ्तार ओटी टेक्निशियन के हासिल जानकारी के आधार पर मालूम हुआ है कि, 29 मार्च की रात केशवपुरम के आहूजा अस्पताल में एक नहीं, बल्कि दो किडनी ट्रांसप्लांट होने थे। दोनों केस में सर्जरी की जिम्मेदारी डॉ. अफजल के जिम्मे थे, जबकि एनेस्थीसिया के लिए डॉ. रोहित मौजूद था। पारुल का ऑपरेशन होने के दौरान सिंडिकेट को पुलिस की सुगबुगाहट लग गई थी, जिसकी वजह से सिंडिकेट एक ही किडनी ट्रांसप्लांट करने के बाद भाग निकला था। पुलिस आयुक्त ने बताया कि रोहित एनेस्थीसिया का डाक्टर होने के चलते किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद सबसे आखिरी में जाता था, जबकि उसकी पूरी टीम पहले ही चली जाती थी। मरीज को होश आने के बाद ही डॉ. रोहित अस्पताल छोड़ता था। ओटी टेक्निशियन के मुताबिक, होली के बाद भी वे सभी शहर आए थे और एक रेलवे क्रासिंग के पास अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट किया था, हालांकि रात होने के चलते अस्पताल का नाम नहीं मालूम है।</p>
<p><strong>व्हाट्सएप ग्रुप से मरीज फंसाता था दलाल शिवम</strong><br />
कानपुर। टेलीग्राम पर किडनी डोनर ग्रुप से पहले शिवम ने ‘मदद 24 इन टू सेवन’ नामक वाट्सएप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में कल्याणपुर, रावतपुर के कई अस्पतालों के संचालकों को जोड़ा था। पहले ग्रुप बनाने का उद्देश्य एंबुलेंस की जरूरत को पूरा करना था, लेकिन बाद में उसके जरिए मरीजों को भर्ती कराने के नाम पर दलाली और बाद में किडनी ट्रांसप्लांट व खरीद-बिक्री के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। इसी ग्रुप के जरिए दलाल शिवम आहूजा अस्पताल के दंपती से मिला था। एलएलआर अस्पताल आने वाले मरीजों को भी वह अच्छे व सस्ते इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराता था, जिसके एवज में अस्पताल से दलाली मिलती थी। उसी ग्रुप में मरीज की डिटेल शेयर करता था, जिस अस्पताल संचालक का संदेश ग्रुप में पहले आता। वह मरीज उसी अस्पताल में पहुंचाता था।</p>
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