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	<title>Income Tax &#8211; Budget 2025 &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>Income Tax &#8211; Budget 2025 &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>Income Tax &#8211; Budget 2025 : भिन्न वर्गों के लिए आयकर स्लैब में असमानता</title>
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		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 12:39:16 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[- Budget 2025]]></category>
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		<category><![CDATA[Income Tax]]></category>
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					<description><![CDATA[Income Tax &#8211; Budget 2025 : आयकर स्लैब की संरचना में असमानता कई वर्गों के लिए असहज है। खासकर, उच्च आय वर्ग पर अधिक कर बोझ है, जबकि निम्न और मध्य वर्ग में यह दरें बहुत कम हैं। इससे कर व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो सकता है, और इसे इस बजट में सुधारने की आवश्यकता ... <a title="Income Tax &#8211; Budget 2025 : भिन्न वर्गों के लिए आयकर स्लैब में असमानता" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/income-tax-budget-2025-inequality-in-income-tax-slabs/" aria-label="Read more about Income Tax &#8211; Budget 2025 : भिन्न वर्गों के लिए आयकर स्लैब में असमानता">Read more</a>]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">Income Tax &#8211; Budget 2025 : आयकर स्लैब की संरचना में असमानता कई वर्गों के लिए असहज है। खासकर, उच्च आय वर्ग पर अधिक कर बोझ है, जबकि निम्न और मध्य वर्ग में यह दरें बहुत कम हैं। इससे कर व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो सकता है, और इसे इस बजट में सुधारने की आवश्यकता है, ताकि कर दरों में संतुलन बना रहे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">2. <strong>मूल्य संवर्धित कर (GST) की जटिलताएँ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">GST प्रणाली की जटिलता और कई तरह की दरों के कारण छोटे व्यवसायों के लिए compliance कठिन हो रहा है। यह कर प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और परेशानी का कारण बनती है। GST में सुधार और सरलता की आवश्यकता है ताकि व्यापारी और उपभोक्ता दोनों को समान रूप से लाभ हो सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">3. <strong>संपत्ति कर और संपत्ति मूल्यांकन में असमानता</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">संपत्ति कर और संपत्ति मूल्यांकन की प्रक्रिया में कई विसंगतियाँ हैं। संपत्ति के सही मूल्यांकन और कर निर्धारण में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे करदाताओं को नुकसान होता है। इसके लिए एक सटीक और न्यायपूर्ण मूल्यांकन प्रणाली की आवश्यकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">4. <strong>डिविडेंड टैक्स</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत में डिविडेंड टैक्स की दरों पर एक विसंगति है। घरेलू कंपनियों द्वारा प्राप्त डिविडेंड पर टैक्स में भारी अंतर है, जो शेयरधारकों के बीच असमानता का कारण बनता है। इस विसंगति को दूर करने के लिए एक समान और न्यायपूर्ण कर नीति की आवश्यकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">5. <strong>कैपिटल गेन टैक्स</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कर की दर को लेकर विवाद है। वित्तीय बाजारों में अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए इसे यथासंभव आकर्षक बनाना आवश्यक है, ताकि अधिक निवेश हो सके और आर्थिक विकास को गति मिल सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">6. <strong>कर छूट और सब्सिडी में विसंगतियाँ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">विभिन्न श्रेणियों के लिए दी जाने वाली कर छूट और सब्सिडी में असमानता है, जो कुछ वर्गों को ज्यादा फायदा पहुँचाती है और कुछ वर्गों को कम। इससे कर व्यवस्था में न केवल असंतुलन होता है, बल्कि यह समग्र विकास के लिए बाधक भी बनता है। बजट में इन छूटों और सब्सिडी की पुनर्रचना की आवश्यकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">7. <strong>ऑनलाइन और ई-कॉमर्स पर टैक्स नीति</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">ऑनलाइन व्यापार और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में कर नीति में स्पष्टता की कमी है। नए डिजिटल व्यापार मॉडल को देखते हुए, इन क्षेत्रों में कर नीति को अद्यतन करना आवश्यक है ताकि यह समकालिक और पारदर्शी बने।</p>



<h3 class="wp-block-heading">8. <strong>विरासत और उपहार कर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">विरासत और उपहार कर प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि यह कई बार गरीबों को अधिक प्रभावित करता है और संपत्ति के हस्तांतरण को जटिल बनाता है। इस पर एक पुनरावलोकन आवश्यक है, ताकि यह समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से प्रभावी हो सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">9. <strong>लघु और मझोले उद्योगों के लिए कर राहत</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">लघु और मझोले उद्योगों (SMEs) के लिए कर नीति को अधिक सुलभ और लाभकारी बनाने की आवश्यकता है, ताकि इन उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। विशेषकर इन उद्योगों को अतिरिक्त कर बोझ से बचाने के लिए बजट में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन विसंगतियों को दूर करने से न केवल कर व्यवस्था को सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि यह आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बजट 2025 में प्रमुख कर विसंगतियों को दूर करने की आवश्यकता कई कारणों से है, क्योंकि कर प्रणाली का सटीक और निष्पक्ष होना आर्थिक विकास और आम आदमी के लिए महत्वपूर्ण है। निम्नलिखित कुछ प्रमुख विसंगतियाँ हैं, जिन्हें इस बजट में दूर करने की आवश्यकता है:</p>



<h3 class="wp-block-heading">1. <strong>आयकर स्लैब में विसंगति</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आयकर स्लैब की संरचना में असमानता कई वर्गों के लिए असहज है। खासकर, उच्च आय वर्ग पर अधिक कर बोझ है, जबकि निम्न और मध्य वर्ग में यह दरें बहुत कम हैं। इससे कर व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो सकता है, और इसे इस बजट में सुधारने की आवश्यकता है, ताकि कर दरों में संतुलन बना रहे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">2. <strong>मूल्य संवर्धित कर (GST) की जटिलताएँ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">GST प्रणाली की जटिलता और कई तरह की दरों के कारण छोटे व्यवसायों के लिए compliance कठिन हो रहा है। यह कर प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और परेशानी का कारण बनती है। GST में सुधार और सरलता की आवश्यकता है ताकि व्यापारी और उपभोक्ता दोनों को समान रूप से लाभ हो सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">3. <strong>संपत्ति कर और संपत्ति मूल्यांकन में असमानता</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">संपत्ति कर और संपत्ति मूल्यांकन की प्रक्रिया में कई विसंगतियाँ हैं। संपत्ति के सही मूल्यांकन और कर निर्धारण में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे करदाताओं को नुकसान होता है। इसके लिए एक सटीक और न्यायपूर्ण मूल्यांकन प्रणाली की आवश्यकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">4. <strong>डिविडेंड टैक्स</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत में डिविडेंड टैक्स की दरों पर एक विसंगति है। घरेलू कंपनियों द्वारा प्राप्त डिविडेंड पर टैक्स में भारी अंतर है, जो शेयरधारकों के बीच असमानता का कारण बनता है। इस विसंगति को दूर करने के लिए एक समान और न्यायपूर्ण कर नीति की आवश्यकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">5. <strong>कैपिटल गेन टैक्स</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कर की दर को लेकर विवाद है। वित्तीय बाजारों में अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए इसे यथासंभव आकर्षक बनाना आवश्यक है, ताकि अधिक निवेश हो सके और आर्थिक विकास को गति मिल सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">6. <strong>कर छूट और सब्सिडी में विसंगतियाँ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">विभिन्न श्रेणियों के लिए दी जाने वाली कर छूट और सब्सिडी में असमानता है, जो कुछ वर्गों को ज्यादा फायदा पहुँचाती है और कुछ वर्गों को कम। इससे कर व्यवस्था में न केवल असंतुलन होता है, बल्कि यह समग्र विकास के लिए बाधक भी बनता है। बजट में इन छूटों और सब्सिडी की पुनर्रचना की आवश्यकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">7. <strong>ऑनलाइन और ई-कॉमर्स पर टैक्स नीति</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">ऑनलाइन व्यापार और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में कर नीति में स्पष्टता की कमी है। नए डिजिटल व्यापार मॉडल को देखते हुए, इन क्षेत्रों में कर नीति को अद्यतन करना आवश्यक है ताकि यह समकालिक और पारदर्शी बने।</p>



<h3 class="wp-block-heading">8. <strong>विरासत और उपहार कर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">विरासत और उपहार कर प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि यह कई बार गरीबों को अधिक प्रभावित करता है और संपत्ति के हस्तांतरण को जटिल बनाता है। इस पर एक पुनरावलोकन आवश्यक है, ताकि यह समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से प्रभावी हो सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">9. <strong>लघु और मझोले उद्योगों के लिए कर राहत</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">लघु और मझोले उद्योगों (SMEs) के लिए कर नीति को अधिक सुलभ और लाभकारी बनाने की आवश्यकता है, ताकि इन उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। विशेषकर इन उद्योगों को अतिरिक्त कर बोझ से बचाने के लिए बजट में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन विसंगतियों को दूर करने से न केवल कर व्यवस्था को सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि यह आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।</p>
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