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		<title>अंतरिक्ष जाने के लिए शुभांशु शुक्ला को करना होगा इंतजार, इसरो ने कहा- Axiom-4 मिशन की लॉन्चिंग फिर कैंसिल</title>
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		<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 03:20:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य एस्ट्रोनॉट्स के लिए अंतरिक्ष स्टेशन तक की ऐतिहासिक यात्रा को एकबार फिर स्थगित कर दिया गया । आज एक्सिओम-4 ( Axiom-4) मिशन की लॉन्चिंग होनी थी। लॉन्चिंग वाहन में रिसाव के चलते इसे फिर स्थगित कर दिया गया है। इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने यह ... <a title="अंतरिक्ष जाने के लिए शुभांशु शुक्ला को करना होगा इंतजार, इसरो ने कहा- Axiom-4 मिशन की लॉन्चिंग फिर कैंसिल" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/shubhanshu-shukla-isro-launch-axiom-4-mission-cancelled/" aria-label="Read more about अंतरिक्ष जाने के लिए शुभांशु शुक्ला को करना होगा इंतजार, इसरो ने कहा- Axiom-4 मिशन की लॉन्चिंग फिर कैंसिल">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/06/image-2025-06-11T084714.138.jpg" alt="" class="wp-image-494429" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/06/image-2025-06-11T084714.138.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/06/image-2025-06-11T084714.138-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/06/image-2025-06-11T084714.138-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/06/image-2025-06-11T084714.138-150x84.jpg 150w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य एस्ट्रोनॉट्स के लिए अंतरिक्ष स्टेशन तक की ऐतिहासिक यात्रा को एकबार फिर स्थगित कर दिया गया । आज एक्सिओम-4 ( Axiom-4) मिशन की लॉन्चिंग होनी थी। लॉन्चिंग वाहन में रिसाव के चलते इसे फिर स्थगित कर दिया गया है। इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने यह जानकारी एक्स पर दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. नारायणन ने कहा कि आईएसएस पर पहले भारतीय गगनयात्री भेजने के लिए 11 जून को लॉन्च होने वाले एक्सिओम-4 मिशन को स्थगित कर दिया गया है। फाल्कन 9 लॉन्च वाहन के बूस्टर चरण के प्रदर्शन को मान्य करने के लिए लॉन्च वाहन की तैयारी के हिस्से के रूप में, लॉन्च पैड पर सात सेकंड का हॉट टेस्ट किया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">परीक्षण के दौरान प्रणोदन बे में रिसाव का पता चला था। इसरो टीम ने एक्सिओम-4, स्पेसएक्स के विशेषज्ञों के साथ इस विषय पर चर्चा के आधार पर लॉन्च के लिए मंजूरी देने से पहले रिसाव को ठीक करने और आवश्यक सत्यापन परीक्षण करने का निर्णय लिया। इसलिए आईएसएस पर पहली बार भारतीय गगनयात्री भेजने के लिए 11 जून को होने वाले एक्सिओम-4 के प्रक्षेपण को स्थगित कर दिया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उल्लेखनीय है कि एक्सिओम-4 मिशन को पहले भी तीन बार टालना पड़ा है। अंतरिक्षयात्रियों को 29 मई को रवाना होना था, लेकिन इसे आठ जून तक टाला गया। इसके बाद इसे 10 जून तक टाला गया। स्पेसएक्स का फाल्कन-9 रॉकेट मंगलवार शाम फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से रवाना होने वाला था, लेकिन खराब मौसम को एक दिन के लिए टाल दिया गया था।</p>
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		<item>
		<title>ISRO की EOS-09 सैटेलाइट की लॉन्चिंग फेल, इसरो प्रमुख ने कहा- तीसरे चरण में आई तकनीकी खामी</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/isros-eos-09-satellite-launch-failed-isro-chief/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 May 2025 05:20:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपनी 101वीं ऐतिहासिक लॉन्चिंग पर निराशाजनक खबर दी है। इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने बताया कि रविवार को पीएसएलवी-सी61 रॉकेट के माध्यम से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह मिशन सफल नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उड़ान के ... <a title="ISRO की EOS-09 सैटेलाइट की लॉन्चिंग फेल, इसरो प्रमुख ने कहा- तीसरे चरण में आई तकनीकी खामी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/isros-eos-09-satellite-launch-failed-isro-chief/" aria-label="Read more about ISRO की EOS-09 सैटेलाइट की लॉन्चिंग फेल, इसरो प्रमुख ने कहा- तीसरे चरण में आई तकनीकी खामी">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="449" height="252" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-18T093139.319.jpg" alt="" class="wp-image-492665" style="width:640px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-18T093139.319.jpg 449w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-18T093139.319-300x168.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/05/image-2025-05-18T093139.319-150x84.jpg 150w" sizes="(max-width: 449px) 100vw, 449px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपनी 101वीं ऐतिहासिक लॉन्चिंग पर निराशाजनक खबर दी है। इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने बताया कि रविवार को पीएसएलवी-सी61 रॉकेट के माध्यम से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह मिशन सफल नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उड़ान के तीसरे चरण के दौरान एक तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई, जिसके कारण मिशन पूरा नहीं हो सका।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हाईलाइट्स:</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>तकनीकी खराबी के कारण EOS-09 सैटेलाइट की लॉन्चिंग हुई असफल</li>



<li>इसरो को मिली अपने 101वें ऐतिहासिक लॉन्चिंग पर बड़ा झटका,</li>



<li>ISRO ने कहा – तीसरे चरण में आई तकनीकी खामी</li>
</ul>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p class="wp-block-paragraph">श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश में इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा, “आज हमने PSLV-C61 के प्रक्षेपण का प्रयास किया। इसमें 4 चरण होते हैं। पहले 2 चरणों में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन रहा। तीसरे चरण के दौरान हमने अवलोकन देखा… मिशन पूरा नहीं हो सका। हम संपूर्ण प्रदर्शन का अध्ययन कर रहे हैं, हम जल्द से जल्द वापस आएंगे।”</p>
</blockquote>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो प्रमुख ने बताया कि वे इस असफलता के कारणों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही स्थिति का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि संगठन अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग कर इस तरह की घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेगा।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a> श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश | इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा, &quot;आज हमने PSLV-C61 के प्रक्षेपण का प्रयास किया। इसमें 4 चरण होते हैं। पहले 2 चरणों में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन रहा। तीसरे चरण के दौरान हमने अवलोकन देखा&#8230; मिशन पूरा नहीं हो सका। हम संपूर्ण प्रदर्शन का अध्ययन कर… <a href="https://t.co/9Kln16428j">pic.twitter.com/9Kln16428j</a></p>&mdash; ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1923913581524824293?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">May 18, 2025</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p class="wp-block-paragraph">यह घटना इसरो के इतिहास में एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह संगठन की लगातार सफलताओं के बीच एक असफलता है। हालांकि, इसरो के वैज्ञानिक और तकनीकी दल इस घटना से सीख लेकर अपनी प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसरो का अगला मिशन कब और कैसे होगा, इस पर अभी अध्ययन चल रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह भी पढ़े :&nbsp;<a href="https://bhaskardigital.com/suspected-lashkar-terrorist-enters-white-house-appointed-board-member/" target="_blank" rel="noopener"><strong>कामायनी एक्सप्रेस में बम! एक घंटे खंडवा में खड़ी रही ट्रेन, विस्फोटक ढूंढती रही पुलिस</strong></a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/part-of-chandrayaan-3s-rocket-out-of-control-isro-gives-big-reason-news-in-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Nov 2023 13:14:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बेंगलुरु। चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हो गया है। यह पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया है। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को ... <a title="चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/part-of-chandrayaan-3s-rocket-out-of-control-isro-gives-big-reason-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-240.png" alt="" class="wp-image-422442" width="844" height="439" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बेंगलुरु। चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हो गया है। यह पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया है। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को तय कक्षा में स्थापित किया था। ISRO ने बताया- यही हिस्सा बुधवार 15 नवंबर की दोपहर 2:42 बजे पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हुआ और पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को तय कक्षा में स्थापित किया था। ISRO ने बताया- यही हिस्सा बुधवार 15 नवंबर की दोपहर 2:42 बजे पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ। यह हिस्सा प्रशांत महासागर में गिर गया। इसके अनियंत्रित होने की वजह अभी साफ नहीं हुई है। इसका फाइनल ग्राउंड ट्रैक भारत के ऊपर से होकर नहीं गुजरा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पैसिवेशन की प्रक्रिया से गुजरी थी अनियंत्रित हुए रॉकेट की बॉडी</p>



<p class="wp-block-paragraph">ISRO के बयान के मुताबिक चंद्रयान-3 को लॉन्च किए जाने के 124 दिन बाद NORAD id 57321 नाम की यह रॉकेट बॉडी पृथ्वी में री-एंटर हुई। चंद्रयान-3 के ऑर्बिट में स्थापित होने के बाद अपर स्टेज को निष्क्रिय (पैसिवेशन) करने की प्रक्रिया से भी गुजारा गया था। पैसिवेशन में रॉकेट में मौजूद प्रोपेलैंट और एनर्जी सोर्स को हटाया गया, ताकि अंतरिक्ष में विस्फोट के खतरे को कम किया जा सके। यह प्रक्रिया भी इंटर-एजेंसी स्पेस डेब्रिस कोऑर्डिनेशन एजेंसी (IADC) और यूनाइटेड नेशंस की गाइडलाइंस के तहत आती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग से लैंडिंग तक 10 मोमेंट्स: साउथ पोल पर यान पहुंचते ही साइंटिस्ट बोले- इंडिया ऑन द मून</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 ने लॉन्च होने के 41वें दिन 23 अगस्त को चंद्रमा पर लैंडिंग की। इसी के साथ भारत चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बन गया। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 की साउथ पोल पर लैंडिंग के बाद कहा- PM सर नमस्कार। हमने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है। इंडिया इज ऑन द मून। चंदा मामा दूर के नहीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिलकर भावुक हुए:कहा- चांद पर लैंडर जहां उतरा, वह &#8216;शिवशक्ति पॉइंट&#8217; कहलाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अगस्त को ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का नाम &#8216;तिरंगा&#8217; होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>प्रधानमंत्री मोदी ने ISRO साइंटिस्ट के संग की मीटिंग, बोले-  मानव अंतरिक्ष उड़ान 2025 में होने की संभावना</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/prime-minister-modi-held-a-meeting-with-isro-scientist-said-human-space-flight-is-likely-to-happen-in-2025-news-in-hindi/</link>
		
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		<pubDate>Tue, 17 Oct 2023 10:37:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार यानी 17 अक्टूबर को ISRO के साइंटिस्ट के साथ मीटिंग की। इसमें 21 अक्टूबर को भारत के पहले ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मिशन &#8216;गगनयान&#8217; के क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग की तैयारियों की जानकारी ली। PMO ने बताया कि भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान 2025 में होने की ... <a title="प्रधानमंत्री मोदी ने ISRO साइंटिस्ट के संग की मीटिंग, बोले-  मानव अंतरिक्ष उड़ान 2025 में होने की संभावना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/prime-minister-modi-held-a-meeting-with-isro-scientist-said-human-space-flight-is-likely-to-happen-in-2025-news-in-hindi/" aria-label="Read more about प्रधानमंत्री मोदी ने ISRO साइंटिस्ट के संग की मीटिंग, बोले-  मानव अंतरिक्ष उड़ान 2025 में होने की संभावना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-431.png" alt="" class="wp-image-411673" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-431.png 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-431-768x432.png 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/image-431-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार यानी 17 अक्टूबर को ISRO के साइंटिस्ट के साथ मीटिंग की। इसमें 21 अक्टूबर को भारत के पहले ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मिशन &#8216;गगनयान&#8217; के क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग की तैयारियों की जानकारी ली। PMO ने बताया कि भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान 2025 में होने की संभावना है। मीटिंग में प्रधानमंत्री ने ISRO के वैज्ञानिकों से कहा कि हमें 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने और 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने की योजना पर काम करना चाहिए। </p>



<p class="wp-block-paragraph">PM ने वीनस ऑर्बिटर मिशन और मार्स लैंडर पर भी काम करने को कहा। ISRO मिशन &#8216;गगनयान&#8217; के क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग 21 अक्टूबर को सुबह 7 से 9 बजे के बीच करेगा। आसान भाषा में कहें तो मिशन के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी होने पर अंदर मौजूद एस्ट्रोनॉट को पृथ्वी पर सुरक्षित लाने वाले सिस्टम की टेस्टिंग होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गगनयान मिशन के टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन-1 (TV-D1) को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा। इस फ्लाइट में तीन हिस्से होंगे- अबॉर्ट मिशन के लिए बनाया सिंगल स्टेज लिक्विड रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम। क्रू मॉड्यूल के अंदर का वातावरण अभी वैसा नहीं होगा जैसा मैन्ड मिशन में होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अबॉर्ट जैसी सिचुएशन बनाई जाएगी</p>



<p class="wp-block-paragraph">टेस्ट व्हीकल क्रू मॉड्यूल को ऊपर ले जाएगा। फिर अबॉर्ट जैसी सिचुएशन बनाई जाएगी। लगभग 17 किमी की ऊंचाई पर जब रॉकेट साउंड की स्पीड से 1.2 गुना होगा तो इससे क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम अलग हो जाएगा। क्रू मॉड्यूल को यहां से लगभग 2 Km दूर ले जाया जाएगा और श्रीहरिकोटा से 10 Km दूर समुद्र में लैंड कराया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मिशन में वैज्ञानिक यह टेस्ट करेंगे कि अबॉर्ट ट्रैजेक्टरी क्या ठीक तरह से काम कर रही है। असल मिशन के दौरान रॉकेट में खराबी आने पर एस्ट्रोनॉट कैसे सुरक्षित रूप से लैंड करेंगे। कुल चार टेस्ट फ्लाइट भेजी जानी हैं। TV-D1 के बाद D2, D3 और D4 को भेजा जाएगा। अगले साल की शुरुआत में गगनयान मिशन का पहला अनमैन्ड मिशन प्लान किया गया है। अनमैन्ड मिशन यानी इसमें किसी भी मानव को स्पेस में नहीं भेजा जाएगा। अनमैन्ड मिशन के सफल होने के बाद मैन्ड मिशन होगा, जिसमें इंसान स्पेस में जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगले साल अनमैन्ड और मैन्ड मिशन लॉन्च करने की योजना</p>



<p class="wp-block-paragraph">गगनयान मिशन के तहत इसरो ने अगले साल की शुरुआत में गगनयान मिशन का पहला अनमैन्ड मिशन प्लान किया है। अनमैन्ड मिशन के सफल होने के बाद मैन्ड मिशन होगा, जिसमें इंसान स्पेस में जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगले साल अनमैन्ड और मैन्ड मिशन लॉन्च करने की योजना</p>



<p class="wp-block-paragraph">गगनयान मिशन के तहत इसरो ने अगले साल की शुरुआत में गगनयान मिशन का पहला अनमैन्ड मिशन प्लान किया है। अनमैन्ड मिशन के सफल होने के बाद मैन्ड मिशन होगा, जिसमें इंसान स्पेस में जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गगनयान के लिए इसरो ने की थी पैराशूट की टेस्टिंग</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले ISRO ने गगनयान मिशन के लिए ड्रैग पैराशूट का सफल परीक्षण 8 से 10 अगस्त के बीच चंडीगढ़ में किया था। ये पैराशूट एस्ट्रोनॉट्स की सेफ लैंडिंग में मदद करेगा। यह क्रू मॉड्यूल की स्पीड को कम करेगा, साथ ही उसे स्थिर भी रखेगा। इसके लिए एस्ट्रोनॉट्स की लैंडिंग जैसी कंडीशन्स टेस्टिंग के दौरान क्रिएट की गई थीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तीन एस्ट्रोनॉट 400 KM ऊपर जाएंगे, 3 दिन बाद लौटेंगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8216;गगनयान&#8217; में 3 दिनों के मिशन के लिए 3 सदस्यों के दल को 400 KM ऊपर पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाएगा। इसके बाद क्रू मॉड्यूल को सुरक्षित रूप से समुद्र में लैंड कराया जाएगा। अगर भारत अपने मिशन में कामयाब रहा तो वो ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इसे पहले अमेरिका, चीन और रूस ऐसा कर चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">12 अप्रैल 1961 को सोवियत रूस के यूरी गागरिन 108 मिनट तक स्पेस में रहे।<br>5 मई 1961 को अमेरिका के एलन शेफर्ड 15 मिनट स्पेस में रहे।<br>15 अक्टूबर 2003 को चीन के यांग लिवेड 21 घंटे स्पेस में रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">PM मोदी ने 2018 में गगनयान मिशन की घोषणा की थी</p>



<p class="wp-block-paragraph">PM मोदी ने साल 2018 में स्वतंत्रता दिवस भाषण में गगनयान मिशन की घोषणा की थी। 2022 तक इस मिशन को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, कोविड महामारी के कारण इसमें देरी हुई। अब 2024 के अंत या 2025 की शुरुआत तक इसके पूरा होने की संभावना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बेंगलुरु में स्थापित ट्रेनिंग फैसिलिटी में एस्ट्रोनॉट की ट्रेनिंग</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो इस मिशन के लिए चार एस्टोनॉट्स को ट्रेनिंग दे रहा है। बेंगलुरु में स्थापित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी में क्लासरूम ट्रेनिंग, फिजिकल फिटनेस ट्रेनिंग, सिम्युलेटर ट्रेनिंग और फ्लाइट सूट ट्रेनिंग दी जा रही है। इसरो भविष्य के मानव मिशनों के लिए टीम का विस्तार करने की योजना भी बना रहा है। गगनयान मिशन के लिए करीब 90.23 अरब रुपए का बजट आवंटित किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गगनयान मिशन में रॉकेट में गड़बड़ी होने पर एस्ट्रोनॉट कैसे निकलेंगे इसका टेस्ट किया जाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) भारत के पहले ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मिशन &#8216;गगनयान&#8217; के क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग करने जा रहा है। इसके लिए फ्लाइट टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन-1 भेजने की तैयारी चल रही है। क्रू एस्केप सिस्टम का मतलब है कि मिशन के दौरान कोई परेशानी आती है तो रॉकेट में मौजूद एस्ट्रोनॉट पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से पहुंच सकेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ISRO पर रोज 100 से ज्यादा साइबर अटैक:सोमनाथ बोले- रॉकेट में यूज होने वाली चिप का सॉफ्टवेयर चुराने की कोशिश</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के सॉफ्टवेयर पर हर दिन 100 से ज्यादा साइबर अटैक होते हैं। ISRO चीफ एस सोमनाथ ने शनिवार को केरल के कोच्चि में दो दिवसीय इंटरनेशनल साइबर कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के फिर जागने की उम्मीद:साउथ पोल पर सूरज की रोशनी पहुंचने लगी</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर के एक बार फिर जागने की उम्मीद है। 14 दिनों की रात के बाद चांद के दक्षिण ध्रुवीय हिस्से पर एक बार फिर सूरज की रोशनी पहुंचने लगी है। इसरो स्लीप मोड पर डाले गए विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर से 22 सितंबर को संपर्क करने की कोशिश करेगा।</p>
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		<title>आदित्य L1 की लॉन्चिंग का शुरू हुआ काउंटडाउन, इसरो चीफ S सोमनाथ ने मिशन सफलता के लिए की प्रार्थना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 Sep 2023 12:07:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इसरो यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेश ने शुक्रवार (1 सितंबर) दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर सोलर मिशन आदित्य L1 की लॉन्चिंग का 23 घंटे 40 मिनट का काउंटडाउन शुरू कर दिया है। आदित्य L1 को कल (2 सितंबर) सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर PSLV XL रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस ... <a title="आदित्य L1 की लॉन्चिंग का शुरू हुआ काउंटडाउन, इसरो चीफ S सोमनाथ ने मिशन सफलता के लिए की प्रार्थना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/countdown-for-launch-of-aditya-l1-begins-isro-chief-s-somnath-prays-for-mission-success-news-in-hindi/" aria-label="Read more about आदित्य L1 की लॉन्चिंग का शुरू हुआ काउंटडाउन, इसरो चीफ S सोमनाथ ने मिशन सफलता के लिए की प्रार्थना">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1280" height="720" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/adtiya-l1-37-1.jpg" alt="" class="wp-image-392311" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/adtiya-l1-37-1.jpg 1280w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/adtiya-l1-37-1-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/adtiya-l1-37-1-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेश ने शुक्रवार (1 सितंबर) दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर सोलर मिशन आदित्य L1 की लॉन्चिंग का 23 घंटे 40 मिनट का काउंटडाउन शुरू कर दिया है। आदित्य L1 को कल (2 सितंबर) सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर PSLV XL रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। मिशन की लॉन्चिंग से पहले इसरो चीफ एस सोमनाथ ने  (1 सितंबर) को आंध्र प्रदेश के चेंगलम्मा परमेश्वरी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले सोमवार 28 अगस्त को इसरो चीफ एस सोमनाथ ने तमिलनाडु के सुल्लुरपेटा में श्री चेंगलम्मा परमेश्वरी मंदिर में पूजा की। उन्होंने बताया कि किसी भी मिशन की लॉन्चिंग से पहले इसरो के साइंटिस्ट इस मंदिर में आते हैं। यह पंरपरा पिछले 15 सालों से चली आ रही है। 30 अगस्त को इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा था कि आदित्य L1 की लॉन्चिंग की सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। रॉकेट और सैटेलाइट तैयार हैं। हमने लॉन्चिंग के लिए रिहर्सल भी कर ली है। मिशन को सटीक दायरे तक पहुंचने में 125 दिन लगेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं, इसरो ने कहा- व्हीकल के इंटरनल चेक पूरे कर लिए गए हैं। ये करीब 4 महीने में पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर लैगरेंज पॉइंट-1 यानी L1 पॉइंट तक पहुंचेगा। आदित्य स्पेसक्राफ्ट, L1 पॉइंट के चारों ओर घूमकर सूर्य पर उठने वाले तूफानों को समझेगा। इसके अलावा मैग्नेटिक फील्ड और सोलर विंड जैसी चीजों की स्टडी करेगा। आदित्य में प्रयोग के लिए 7 पेलोड लगे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदित्य यान L1 पॉइंट पर ही क्यों भेजा जाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदित्य को सूर्य और पृथ्वी के बीच हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। L1 पॉइंट के चारों ओर की ऑर्बिट को हेलो ऑर्बिट कहा जाता है। इसरो का कहना है कि L1 पॉइंट के आस-पास हेलो ऑर्बिट में रखा गया सैटेलाइट सूर्य को बिना किसी ग्रहण के लगातार देख सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे रियल टाइम सोलर एक्टिविटीज और अंतरिक्ष के मौसम पर भी नजर रखी जा सकेगी। उम्मीद की जा रही है कि आदित्य L1 के पेलोड कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर एक्टिविटीज की विशेषताओं, पार्टिकल्स की मूवमेंट और स्पेस वेदर को समझने के लिए जानकारी देंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">L1 क्या है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">लैगरांजे पॉइंट का नाम इतालवी-फ्रेंच मैथमैटीशियन जोसेफी-लुई लैगरांजे के नाम पर रखा गया है। यह सामान्य तौर पर एल-1 के नाम से जाना जाता है। ऐसे पांच पॉइंट धरती और सूर्य के बीच हैं, जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल बैलेंस हो जाता है और सेंट्रिफ्युगल फोर्स बन जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे में इस जगह पर अगर किसी ऑब्जेक्ट को रखा जाता है तो वह आसानी से दोनों के बीच स्थिर रहता है और एनर्जी भी कम लगती है। पहला लैग्रेंज पॉइंट धरती और सूर्य के बीच 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है। आम शब्दों में कहें तो एल-1 ऐसा पॉइंट है जहां पर कोई भी ऑब्जेक्ट सूर्य और धरती से बराबर दूरी पर स्थिर रह सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिलकर भावुक हुए</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार सुबह ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का नाम &#8216;तिरंगा&#8217; होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी ने ISRO चीफ की पीठ थपथपाई, VIDEOS</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को बेंगलुरु में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिलने ISRO के कमांड सेंटर पहुंचे। यहां वे वैज्ञानिकों से मिले। इसरो कमांड सेंटर पर इसरो चीफ एस सोमनाथ ने PM मोदी को गुलदस्ता देकर स्वागत किया। PM ने सोमनाथ को गले लगाया और पीठ थपथपाई।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज विक्रम लैंडर की क्लिक की  तस्वीर, ISRO ने दी जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Aug 2023 13:08:52 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Chandrayaan-3]]></category>
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					<description><![CDATA[चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज सुबह विक्रम लैंडर की एक तस्वीर क्लिक की। रोवर पर 2 नेविगेशन कैमरे लगे हैं जिनसे ये फोटो क्लिक की गई है। इसमें विक्रम लैंडर पर लगा पेलोड &#8216;चास्टे&#8217; सतह पर ड्रिलिंग करता दिख रहा है। ये पेलोड सतह और गहराई में तापमान मापता है। चंद्रयान-3 का लैंडर 23 ... <a title="चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज विक्रम लैंडर की क्लिक की  तस्वीर, ISRO ने दी जानकारी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/pragyan-rover-of-chandrayaan-3-clicked-the-picture-of-vikram-lander-today-isro-gave-information-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज विक्रम लैंडर की क्लिक की  तस्वीर, ISRO ने दी जानकारी">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/chaste_1693384587.jpg" alt="" class="wp-image-391824" width="843" height="633" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने आज सुबह विक्रम लैंडर की एक तस्वीर क्लिक की। रोवर पर 2 नेविगेशन कैमरे लगे हैं जिनसे ये फोटो क्लिक की गई है। इसमें विक्रम लैंडर पर लगा पेलोड &#8216;चास्टे&#8217; सतह पर ड्रिलिंग करता दिख रहा है। ये पेलोड सतह और गहराई में तापमान मापता है। चंद्रयान-3 का लैंडर 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा पर उतरा था। इसके बाद रोवर बाहर आया था। इसरो ने लैंडिंग के करीब 14 घंटे बाद लैंडर के रोवर से बाहर आने की पुष्टि की थी। रोवर के कैमरों को इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स सिस्टम प्रयोगशाला ने विकसित किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चांद के साउथ पोल पर सल्फर की मौजूदगी</p>



<p class="wp-block-paragraph">चांद पर पहुंचने के छठे दिन (29 अगस्त) चंद्रयान ने दूसरा ऑब्जर्वेशन भेजा था। इसके मुताबिक चांद के साउथ पोल पर सल्फर की मौजूदगी है। चंद्रमा की सरफेस पर एल्युमीनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम, टाइटेनियम की मौजूदगी का भी पता चला है। इसके अलावा चांद की मिट्टी में मैगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन भी मौजूद हैं, जबकि हाइड्रोजन की खोज जारी है। यानी अब तक कुल 9 एलिमेंट चांद की मिट्टी में मिले हैं। प्रज्ञान रोवर पर लगे LIBS यानी लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप पेलोड ने ये ऑब्जर्वेशन भेजे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस ऑक्सीजन से सीधे सांस नहीं ले सकते</p>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि चांद की मिट्टी पर मिली ऑक्सीजन उस फॉर्म में नहीं है कि सीधे सांस ली जा सके। ये ऑक्साइड फॉर्म में है। इससे पहले नासा ने भी चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन का पता लगाया था। इसलिए इसरो को पहले से ही यहां ऑक्सीजन मिलने की संभावना थी। ऑक्साइड एक केमिकल कंपाउंड की कैटेगरी है। इसकी संरचना में एलिमेंट के साथ एक या ज्यादा ऑक्सीजन एटम होते हैं। जैसे कि Li2O, CO2, H2O, आदि। H2O यानी पानी होता है। इसीलिए इसरो ऑक्सीजन मिलने के बाद अब H यानी हाइड्रोजन की खोज कर रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस प्रयोग में होता है लेजर का इस्तेमाल</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस प्रयोग में सैंपल सरफेस यानी चांद की मिट्टी या पत्थर पर हाई-फोकस्ड लेजर का इस्तेमाल किया जाता है। सरफेस के गरम होने से प्लाज्मा बनता है। इसी से बने स्पेक्ट्रम की स्टडी कर एलिमेंट का पता लगाया जाता है। अलग-अलग एलिमेंट के अलग-अलग स्पेक्ट्रम होते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रमा की सतह और अलग-अलग गहराई पर तापमान में काफी अंतर</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले 27 अगस्त को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर में लगे चास्टे पेलोड ने चंद्रमा के तापमान से जुड़ा पहला ऑब्जर्वेशन भेजा था। ChaSTE यानी चंद्र सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट के मुताबिक, चंद्रमा की सतह और अलग-अलग गहराई पर तापमान में काफी अंतर है। चंद्रमा के साउथ पोल की सतह पर तापमान करीब 50 डिग्री सेल्सियस है। वहीं, 80mm की गहराई में माइनस 10°C टेम्परेचर रिकॉर्ड किया गया। चास्टे में 10 टेम्परेचर सेंसर लगे हैं, जो 10cm यानी 100mm की गहराई तक पहुंच सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ChaSTE पेलोड को स्पेस फिजिक्स लैबोरेटरी, VSSC ने अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के साथ मिलकर बनाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साउथ पोल का तापमान पता चलने का फायदा क्या?</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने बताया था कि उन्होंने चंद्रमा के साउथ पोल को इसलिए चुना, क्योंकि यहां भविष्य में इंसानों को बसाने की क्षमता हो सकती है। साउथ पोल पर सूर्य का प्रकाश कम समय के लिए रहता है। अब जब चंद्रयान-3 वहां के तापमान समेत अन्य चीजों की स्पष्ट जानकारी भेज रहा है, तो वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश करेंगे कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की मिट्टी वास्तव में कितनी क्षमता रखती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1 सेमी प्रति सेकेंड की गति से चलता है रोवर</p>



<p class="wp-block-paragraph">छह पहियों वाले प्रज्ञान रोवर का वजन 26 किलो है। लैंडिंग के करीब 14 घंटे बाद गुरुवार सुबह ISRO ने रोवर के बाहर आने की पुष्टि की थी। लैंडर 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा पर उतरा था। ये 1 सेमी प्रति सेकेंड की गति से चलता है और अपने आस-पास की चीजों को स्कैन करने के लिए नेविगेशन कैमरों का इस्तेमाल करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के साथ कुल 7 पेलोड भेजे गए हैं</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन के तीन हिस्से हैं। प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर और रोवर। इन पर कुल 7 पेलोड लगे हैं। एक पेलोड, जिसका नाम शेप है, वह चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल पर लगा है। ये चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाकर धरती से आने वाले रेडिएशन की जांच कर रहा है। वहीं, लैंडर पर तीन पेलोड लगे हैं। रंभा, चास्टे और इल्सा। प्रज्ञान पर दो पेलोड हैं। एक इंस्ट्रूमेंट अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का भी है, जिसका नाम है लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर अरे। ये चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगा हुआ है। ये चंद्रमा से पृथ्वी की दूरी मापने के काम आता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग 4 फेज में हुई</p>



<p class="wp-block-paragraph">ISRO ने 23 अगस्त को 30 किमी की ऊंचाई से शाम 5 बजकर 44 मिनट पर ऑटोमैटिक लैंडिंग प्रोसेस शुरू की और अगले 20 मिनट में सफर पूरा कर लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 ने 40 दिन में 21 बार पृथ्वी और 120 बार चंद्रमा की परिक्रमा की। चंद्रयान ने चांद तक 3.84 लाख किमी दूरी तय करने के लिए 55 लाख किमी की यात्रा की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रफ ब्रेकिंग फेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">लैंडर लैंडिंग साइट से 750 Km दूर था। ऊंचाई 30 Km और रफ्तार 6,000 Km/hr।<br>ये फेज साढ़े 11 मिनट तक चला। इस दौरान विक्रम लैंडर के सेंसर्स कैलिब्रेट किए गए।<br>लैंडर को हॉरिजॉन्टल पोजिशन में 30 Km की ऊंचाई से 7.4 Km दूरी तक लाया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐटीट्यूड होल्डिंग फेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">विक्रम ने चांद की सतह की फोटो खींची और पहले से मौजूद फोटोज के साथ कंपेयर किया।<br>चंद्रयान-2 के टाइम में ये फेज 38 सेकेंड का था इस बार इसे 10 सेकेंड का कर दिया गया था।<br>10 सेकेंड में विक्रम लैंडर की चंद्रमा से ऊंचाई 7.4 Km से घटकर 6.8 Km पर आ गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फाइन ब्रेकिंग फेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये फेज 175 सेकेंड तक चला जिसमें लैंडर की स्पीड 0 हो गई।<br>विक्रम लैंडर की पोजिशन पूरी तरह से वर्टिकल कर दी गई।<br>सतह से विक्रम लैंडर की ऊंचाई करीब 1 किलोमीटर रह गई</p>



<p class="wp-block-paragraph">टर्मिनल डिसेंट</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस फेज में लैंडर को करीब 150 मीटर की ऊंचाई तक लाया गया।<br>सब कुछ ठीक होने पर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंड कराया गया।<br>चांद पर भारत का यह तीसरा मिशन, पहले मिशन में पानी खोजा था<br>2008 में चंद्रयान-1 को लॉन्च किया गया था। इसमें एक प्रोब की क्रैश लैंडिंग कराई गई थी जिसमें चांद पर पानी के बारे में पता चला। फिर 2019 में चंद्रयान-2 चांद के करीब पहुंचा, लेकिन लैंड नहीं कर पाया। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 चांद पर लैंड कर गया। चांद पर सकुशल पहुंचने का संदेश भी चंद्रयान-3 ने भेजा। कहा- &#8216;मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">14 दिन का है चंद्रयान-3 मिशन</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों का है। दरअसल, चंद्रमा पर 14 दिन तक रात और 14 दिन तक उजाला रहता है। जब यहां रात होती है तो तापमान -100 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है। चंद्रयान के लैंडर और रोवर अपने सोलर पैनल्स से पावर जनरेशन कर रहे हैं। इसलिए वो 14 दिन तो पावर जनरेट कर लेंगे, लेकिन रात होने पर पावर जनरेशन प्रोसेस रुक जाएगी। पावर जनरेशन नहीं होगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स भयंकर ठंड को झेल नहीं पाएंगे और खराब हो जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 मिशन के 3 में से 2 मकसद पूरे:इसरो ने अब तक विक्रम-प्रज्ञान से लिए गए 10 फोटो और 4 वीडियो शेयर किए</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के 3 उद्देश्य थे, जिनमें से 2 सफलतापूर्वक पूरे हो गए हैं- 1. चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग। 2. चांद की सतह पर रोवर को चलाने में कामयाब रहे। 3. चांद की सतह पर वैज्ञानिक परीक्षण फिलहाल चल रहा है। सभी पेलोड सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं।</p>
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		<title>2 सितंबर को लॉन्च हो सकता है सोलर मिशन, ISRO ने दी जानकारी</title>
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		<pubDate>Sat, 26 Aug 2023 12:47:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर कामयाब लैंडिंग के बाद इसरो अब सूर्य के अध्ययन के लिए एक हफ्ते के भीतर यानी 2 सितंबर को सौर मिशन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी स्पेस एप्लिकेशन सेंटर अहमदाबाद के निदेशक नीलेश एम देसाई ने न्यूज एजेंसी ANI को दी। आदित्य L1 सूर्य का अध्ययन करने ... <a title="2 सितंबर को लॉन्च हो सकता है सोलर मिशन, ISRO ने दी जानकारी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/solar-mission-may-be-launched-on-september-2-isro-gave-information-news-in-hindi/" aria-label="Read more about 2 सितंबर को लॉन्च हो सकता है सोलर मिशन, ISRO ने दी जानकारी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="2560" height="1706" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/f3olc3ybwaa-wre_1693039172-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-390513" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/f3olc3ybwaa-wre_1693039172-scaled.jpeg 2560w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/f3olc3ybwaa-wre_1693039172-768x512.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/f3olc3ybwaa-wre_1693039172-1536x1024.jpeg 1536w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/f3olc3ybwaa-wre_1693039172-2048x1365.jpeg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर कामयाब लैंडिंग के बाद इसरो अब सूर्य के अध्ययन के लिए एक हफ्ते के भीतर यानी 2 सितंबर को सौर मिशन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी स्पेस एप्लिकेशन सेंटर अहमदाबाद के निदेशक नीलेश एम देसाई ने न्यूज एजेंसी ANI को दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदित्य L1 सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली स्पेस बेस्ड इंडियन लेबोरेट्री होगी। इसे सूर्य के चारों ओर बनने वाले कोरोना के रिमोट ऑब्जर्वेशन के लिए डिजाइन किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदित्य यान, L1 यानी सूर्य-पृथ्वी के लैग्रेंजियन पॉइंट पर रहकर सूर्य पर उठने वाले तूफानों को समझेगा। यह पॉइंट पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने में इसे करीब 120 दिन यानी 4 महीने लगेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह लैग्रेंजियन पॉइंट के चारों ओर की कक्षा, फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर के अलावा सबसे बाहरी परत कोरोना की अलग-अलग वेब बैंड्स से 7 पेलोड के जरिए टेस्टिंग करेगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="930" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/isro_pslv-c57_aditya-l1-mission-1_0.jpg" alt="" class="wp-image-390514" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/isro_pslv-c57_aditya-l1-mission-1_0.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/isro_pslv-c57_aditya-l1-mission-1_0-768x595.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">पूरी तरह स्वदेशी है आदित्य L1<br>इसरो के एक अधिकारी के मुताबिक आदित्य L1 देश की संस्थाओं की भागीदारी से बनने वाला पूरी तरह स्वदेशी प्रयास है। बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ ने इसके पेलोड बनाए हैं। जबकि इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स पुणे ने मिशन के लिए सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजर पेलोड विकसित किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूवी पेलोड का इस्तेमाल कोरोना और सोलर क्रोमोस्फीयर पर, जबकि एक्स-रे पेलोड का इस्तेमाल सूर्य की लपटों को देखने के लिए किया जाएगा। पार्टिकल डिटेक्टर और मैग्नेटोमीटर पेलोड, चार्ज्ड पार्टिकल के हेलो ऑर्बिट तक पहुंचने वाली मैग्नेटिक फील्ड के बारे में जानकारी देंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदित्य यान L1 पॉइंट पर ही क्यों भेजा जाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदित्य यान को सूर्य और पृथ्वी के बीच हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। इसरो का कहना है कि L1 पॉइंट के आस-पास हेलो ऑर्बिट में रखा गया सैटेलाइट सूर्य को बिना किसी ग्रहण के लगातार देख सकता है। इससे रियल टाइम सोलर एक्टिविटीज और अंतरिक्ष के मौसम पर भी नजर रखी जा सकेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उम्मीद की जा रही है कि आदित्य L1 के पेलोड कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर एक्टिविटीज की विशेषताओं, पार्टिकल्स की मूवमेंट और स्पेस वैदर को समझने के लिए जानकारी देंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदित्य L1 पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाने वाला इसरो का 5वां मिशन</p>



<figure class="wp-block-table"><table><tbody><tr><td>22 अक्टूबर 2008</td><td>चंद्रयान 1</td></tr><tr><td>5 नवंबर 2013</td><td>मार्स आर्बिटर मिशन</td></tr><tr><td>22 जुलाई 2019</td><td>चंद्रयान 2</td></tr><tr><td>14 जुलाई को 2023</td><td>चंद्रयान 3</td></tr><tr><td>2 सितंबर 2023</td><td>आदित्य L1</td></tr></tbody></table></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिलकर भावुक हुए</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार सुबह ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का नाम &#8216;तिरंगा&#8217; होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी ने ISRO चीफ की पीठ थपथपाई, VIDEOS</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को बेंगलुरु में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिलने ISRO के कमांड सेंटर पहुंचे। यहां वे वैज्ञानिकों से मिले। इसरो कमांड सेंटर पर इसरो चीफ एस सोमनाथ ने PM मोदी को गुलदस्ता देकर स्वागत किया। PM ने सोमनाथ को गले लगाया और पीठ थपथपाई।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>VIDEO: डिफेंस सैटेलाइट रीसैट-2BR1 लॉन्च, भारत को मिली दूसरी खुफिया आंख, चप्‍पे-चप्‍पे पर होगी नजर</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/video-defense-satellite-risat-2-br1-launched-india-receives-second-intelligence-eye-rumored-news/</link>
		
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		<pubDate>Wed, 11 Dec 2019 10:25:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[RISAT-2BR1 और नौ विदेशी उपग्रहों को ले जाने वाले PSLV-C48 क्यूएल रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है। यह लॉन्च बुधवार दोपहर 3.25 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में पहले लॉन्च पैड से किया गया। RISAT-2BR1 ताकतवर इमेजिंग सैटेलाइट है जो अंतरिक्ष में तैनात होने के बाद भारत की राडार इमेजिंग की ताकत ... <a title="VIDEO: डिफेंस सैटेलाइट रीसैट-2BR1 लॉन्च, भारत को मिली दूसरी खुफिया आंख, चप्‍पे-चप्‍पे पर होगी नजर" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/video-defense-satellite-risat-2-br1-launched-india-receives-second-intelligence-eye-rumored-news/" aria-label="Read more about VIDEO: डिफेंस सैटेलाइट रीसैट-2BR1 लॉन्च, भारत को मिली दूसरी खुफिया आंख, चप्‍पे-चप्‍पे पर होगी नजर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone  wp-image-44503" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/1-180.jpg" alt="" width="956" height="637" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/1-180.jpg 660w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/12/1-180-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 956px) 100vw, 956px" /></p>
<p>RISAT-2BR1 और नौ विदेशी उपग्रहों को ले जाने वाले PSLV-C48 क्यूएल रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है। यह लॉन्च बुधवार दोपहर 3.25 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में पहले लॉन्च पैड से किया गया। RISAT-2BR1 ताकतवर इमेजिंग सैटेलाइट है जो अंतरिक्ष में तैनात होने के बाद भारत की राडार इमेजिंग की ताकत में कई गुना इजाफा कर देगा।</p>
<p><iframe loading="lazy" src="https://www.youtube.com/embed/jkPawb9YaRw" width="1280" height="720" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen" data-mce-fragment="1"></iframe></p>
<p>628 किलोग्राम वजनी RISAT-2BR1 सैटेलाइट को पृथ्वी से 576 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। RISAT-2BR1 सैटेलाइट के अलावा अमेरिका के 6, इजरायल, जापान और इटली के भी एक-एक सैटेलाइट को इसी रॉकेट से लॉन्च किया गया है। लॉन्च होने के करीब 21 मिनट बाद सभी 10 उपग्रह अपनी-अपनी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित हो जाएंगे। यह पीएसएलवी की 50वीं फ्लाइट है, जबकि श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से 75वां लॉन्च व्हीकल मिशन।</p>
<p>RISAT-2BR1 ताकतवर इमेजिंग सैटेलाइट है जो 0.35 मीटर रिज़ॉल्यूशन पर तस्वीरों को कैप्चर करने की क्षमता रखता है। RISAT-2BR1 की X-Band SAR की क्षमताएं मौसम की परवाह किए बगैर बादलों में भी तस्वीरों को क्लिक कर सकती हैं। इसे भारत की सीमाओं की निगरानी और अगले पांच वर्षों के लिए किसी भी घुसपैठ या आतंकवादी अभियानों को मॉनिटर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉ. के सिवन ने लॉन्च से पहले मंगलवार को तिरुपति बालाजी मंदिर में पूजा-अर्चना की। मीडिया से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि पीएसएलवी सी 48 इसरो की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है क्योंकि यह पीएसएलवी के लिए 50वां और श्रीहरिकोटा से 75वां लॉन्च है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>इसरो ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया कार्टोसैट-3 सैटेलाइट, अब आतंकियों की खैर नहीं&#8230;.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Nov 2019 05:00:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Space Research Organization]]></category>
		<category><![CDATA[isro]]></category>
		<category><![CDATA[Military satellite cartosat-3]]></category>
		<category><![CDATA[PSLV-C47]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) ने 27 नवंबर की सुबह देश की सुरक्षा के लिहाज से इतिहास रचा है। इसरो ने आज (बुधवार) सुबह 9.28 बजे मिलिट्री सैटेलाइट कार्टोसैट-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। कार्टोसैट-3 सैटेलाइट पीएसएलवी-सी47 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्चपैड-2 से लॉन्च किया गया। अब भारतीय सेनाएं पाकिस्तान की ... <a title="इसरो ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया कार्टोसैट-3 सैटेलाइट, अब आतंकियों की खैर नहीं&#8230;." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/isro-successfully-launched-cartosat-3-satellite-now-the-terrorists-are-not-good-news/" aria-label="Read more about इसरो ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया कार्टोसैट-3 सैटेलाइट, अब आतंकियों की खैर नहीं&#8230;.">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-42358" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/3-22.jpg" alt="" width="1000" height="450" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/3-22.jpg 1000w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/3-22-300x135.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/11/3-22-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) ने 27 नवंबर की सुबह देश की सुरक्षा के लिहाज से इतिहास रचा है। इसरो ने आज (बुधवार) सुबह 9.28 बजे मिलिट्री सैटेलाइट कार्टोसैट-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। कार्टोसैट-3 सैटेलाइट पीएसएलवी-सी47 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्चपैड-2 से लॉन्च किया गया। अब भारतीय सेनाएं पाकिस्तान की नापाक हरकत और उनकी आतंकी गतिविधियों पर बाज जैसी नजर रख पाएंगी। आसमान से दुश्मन के हर एक कदम को बारीकी से देखा जा सकेगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर इस सैटेलाइट की मदद से सर्जिकल या एयर स्ट्राइक भी कर पाएंगी।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Watch Live: Launch of Cartosat-3 and 13 USA’s Nanosatellite by PSLV-C47" width="640" height="360" src="https://www.youtube.com/embed/ytPpAl0NCHQ?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p>यह थर्ड जेनरेशन के एडवांस्ड हाई रेजोल्यूशन वाले सैटेलाइटों में पहला है। इसे पृथ्वी की कक्षा में 97.5 डिग्री झुकाव पर स्थापित किया जाएगा। कार्टोसैट-3 किसी भी मौसम में धरती की तस्वीरें ले सकता है। इससे पहले इसरो ने 22 मई को सर्विलांस सैटेलाइट रीसैट-2बी और एक अप्रैल को इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट को लॉन्च किया। यह दुश्मनों के रडार पर नजर रखनें में सहायक है।</p>
<p>https://twitter.com/ISRO_News/status/1199543412149481474</p>
<p>कार्टोसैट-3 में हाई रिजॉल्यूशन कैमरा लगा हुआ है। ये कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम 9.84 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा। यानी आप की कलाई पर बंधी घड़ी पर दिख रहे सही समय की भी सटीक जानकारी देगा। या यह कहें की पहले जहां सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चलता था कि सड़क पर खड़ी गाड़ी किस रंग की है या किस गली से गुजर रही है? वहीं कार्टोसैट-3 के प्रक्षेपण के बाद भारत के पास यह जानकारी भी पुख्ता होगी किस सड़क पर खड़ी गाड़ी जिस रंग की है उसके नंबर प्लेट पर आखिर क्या लिखा है।</p>
<p>बता दें कि भारत ने इस सीरीज का पहला उपग्रह कार्टोसैट-1 5 मई 2005, दूसरा कार्टोसैट-2 को 10 जनवरी 2007 को, तीसरा कार्टोसैट-2A को 28 अप्रैल 2008 को, चौथा कार्टोसैट-2B को 12 जुलाई 2010, पांचवां सैटेलाइट 22 जून 2016, छठा 15 फरवरी 2017, सातवां सैटेलाइट 23 जून 2017, आठवां सैटेलाइट 12 जनवरी 2018 को लॉन्च किया गया था। अब इस सीरीज का नौवां उपग्रह प्रक्षेपित किया जा रहा है।</p>
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		<title>विक्रम लैंडर पर  पुलिस का ऐसा ट्वीट, लोगो ने बोली ये प्यारी सी बात&#8230;.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Sep 2019 04:24:20 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[नागपुर सिटी पुलिस लैंडर विक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[लैंडर विक्रम]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को साफ़ किया कि चंद्रमा पर उतरने से ठीक पहले लैंडर विक्रम से संपर्क जरूर टूटा है लेकिन उसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है। अभी भी लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिशें की जा रही हैं। इसरो ने बताया कि ऑर्बिटर ने एक तस्वीर भेजी है जिसके ... <a title="विक्रम लैंडर पर  पुलिस का ऐसा ट्वीट, लोगो ने बोली ये प्यारी सी बात&#8230;." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/such-a-police-tweet-on-vikram-lander-people-said-this-cute-thing-news/" aria-label="Read more about विक्रम लैंडर पर  पुलिस का ऐसा ट्वीट, लोगो ने बोली ये प्यारी सी बात&#8230;.">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://i.ytimg.com/vi/wgCJVVNA9iM/hqdefault.jpg" alt="Image result for à¤µà¤¿à¤à¥à¤°à¤® à¤²à¥à¤à¤¡à¤° à¤ªà¤° à¤¨à¤¾à¤à¤ªà¥à¤° à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸ à¤à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥à¤µà¥à¤" /></p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को साफ़ किया कि चंद्रमा पर उतरने से ठीक पहले लैंडर विक्रम से संपर्क जरूर टूटा है लेकिन उसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है। अभी भी लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिशें की जा रही हैं। इसरो ने बताया कि ऑर्बिटर ने एक तस्वीर भेजी है जिसके अनुसार लैंडर विक्रम एक ही टुकड़े के रूप में दिखाई दे रहा है।</p>
<p>चंद्रमा पर लैंडिंग के दौरान 07 की रात में चंद्रमा की सतह से केवल 2.1 किमी ऊपर लैंडर विक्रम रास्ता भटककर अपने निर्धारित जगह से लगभग 500 मीटर की दूरी पर चंद्रमा की सतह से टकरा गया था जिसके बाद से इसरो का संपर्क टूट गया था। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने रविवार को लैंडर विक्रम की थर्मल इमेज इसरो को भेजी थी।</p>
<p>इसरो वैज्ञानिकों के मुताबिक़ लैंडर विक्रम एक तरफ झुका दिखाई दे रहा है, ऐसे में कम्युनिकेशन लिंक वापस जोड़ने के लिए लैंडर का ऐंटीना ऑर्बिटर या ग्राउंड स्टेशन की दिशा में करना बेहद जरूरी है। लैंडर के चंद्रमा की सतह पर गिरने से उसका एंटीना दब गया है। इसलिए इसरो की टीम को संपर्क स्थापित करने में कठिनाई हो रही है। अगर कोशिशें रंग लाई तो विक्रम से संपर्क स्थापित होने पर वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। विक्रम में ऑबोर्ड कम्प्यूटर सिस्टम लगा होने से कमांड मिलने पर वह अपने थस्टर्स के जरिए अपने पैरों पर दोबारा खड़ा हो सकता है। इसके लिए इसरो टीम इसरो टेलिमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क में लगातार काम कर रही है।</p>
<p>वही जब  सोमवार को इसरो ने जानकारी दी कि विक्रम की तस्&#x200d;वीरें मिली हैं तो माहौल कुछ हल्&#x200d;का हुआ। इसी बीच महाराष्&#x200d;ट्र के शहर नागपुर की पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से एक ऐसा ट्वीट किया, जिसे पढ़कर लोग मुस्&#x200d;कुरा उठे।</p>
<p>नागपुर सिटी पुलिस ट्वीट में लिखा, &#8216;प्रिय विक्रम, कृपया प्रतिक्रिया दो, सिग्नल तोड़ने के लिए हम तुम्हारा चालान नहीं काटेंगे।&#8217; लोगों को नागपुर पुलिस का ये ट्वीट बेहद पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग नागपुर पुलिस के सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ कर रहे हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">Dear Vikram, <br />Please respond <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f64f-1f3fb.png" alt="🙏🏻" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" />.<br />We are not going to challan you for breaking the signals!<a href="https://twitter.com/hashtag/VikramLanderFound?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#VikramLanderFound</a><a href="https://twitter.com/hashtag/ISROSpotsVikram?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#ISROSpotsVikram</a> <a href="https://twitter.com/isro?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">@isro</a><a href="https://twitter.com/hashtag/NagpurPolice?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#NagpurPolice</a></p>
<p>&mdash; Nagpur City Police (@NagpurPolice) <a href="https://twitter.com/NagpurPolice/status/1170966490108981248?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">September 9, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>एक यूजर ने पुलिस के ट्वीट पर जवाब दिया-  &#8216;नागपुर पुलिस, हां, करोड़ों भारतीय की भवनाएं विक्रम से जुड़ी हुई हैं. आपका ट्वीट काफी शानदार है!</p>
<p><img decoding="async" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/Photo_gallery/052019/pic9192881821_090919014518.jpg" alt="à¤µà¤¿à¤à¥à¤°à¤® à¤²à¥à¤à¤¡à¤° à¤ªà¤° à¤¨à¤¾à¤à¤ªà¥à¤° à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸ à¤à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥à¤µà¥à¤, à¤²à¥à¤ à¤¬à¥à¤²à¥- à¤à¤¾à¤à¤¦ à¤ªà¤° à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸!" /></p>
<p>इससे पहले रविवार को इसरो चेयरमैन के. सिवन ने कहा था कि वे लैंडर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश जारी रखेंगे. उन्होंने विक्रम का पता चलने के बाद कहा था कि निश्चित तौर पर उसने हार्ड लैंडिंग की होगी.</p>
<p><img decoding="async" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/images/Photo_gallery/052019/pic8188281821_090919015912.jpg" alt="à¤µà¤¿à¤à¥à¤°à¤® à¤²à¥à¤à¤¡à¤° à¤ªà¤° à¤¨à¤¾à¤à¤ªà¥à¤° à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸ à¤à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥à¤µà¥à¤, à¤²à¥à¤ à¤¬à¥à¤²à¥- à¤à¤¾à¤à¤¦ à¤ªà¤° à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸!" /></p>
<p>बता दें कि इसरो ने थर्मल ईमेज के जरिए विक्रम लैंडर का पता लगाया था. 47 दिनों की यात्रा के बाद विक्रम लैंडर का संपर्क इसरो से टूटा था.</p>
<p>&nbsp;</p>
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