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		<title>चिता जल जाएगी और हवा काली हो जाएगी, गंगा रोयेगी, आंसू मैदानों पर गिरेंगे : अघोरी बाबा की भविष्यवाणी ने</title>
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		<pubDate>Sat, 25 Jan 2025 00:35:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रयागराज । महाकुंभ में 95 साल के एक अघोरी बाबा ने सभी का ध्यान खींच रखा है। बाबा का नाम कालपुरुष है। उनका भस्म से सना चेहरा देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। उनके हाथों में एक इंसानी खोपड़ी रहती है, जिससे वह पानी पीते हैं। बताया जाता है कि हिमालय में ध्यान लगाने ... <a title="चिता जल जाएगी और हवा काली हो जाएगी, गंगा रोयेगी, आंसू मैदानों पर गिरेंगे : अघोरी बाबा की भविष्यवाणी ने" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b9/" aria-label="Read more about चिता जल जाएगी और हवा काली हो जाएगी, गंगा रोयेगी, आंसू मैदानों पर गिरेंगे : अघोरी बाबा की भविष्यवाणी ने">Read more</a>]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">प्रयागराज । महाकुंभ में 95 साल के एक अघोरी बाबा ने सभी का ध्यान खींच रखा है। बाबा का नाम कालपुरुष है। उनका भस्म से सना चेहरा देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। उनके हाथों में एक इंसानी खोपड़ी रहती है, जिससे वह पानी पीते हैं। बताया जाता है कि हिमालय में ध्यान लगाने से उनकी आवाज ऊंची हो गई है। इस अघोरी बाबा ने ऐसी भविष्यवाणी की जिससे सभी चौंक गए। वे अपनी ऊंची आवाज में कहते हैं, ‘चिता जल जाएगी और हवा काली हो जाएगी। नदी को वह सब याद है, जो आदमी भूल गया है। जब गंगा रोयेगी तो उसके आंसू मैदानों पर गिरेंगे। यह शुरू हो गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाबा कालपुरुष बैठे हुए सामने संगम मैदान की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि मैं पिछले सात महाकुंभों में आया हूं। हर बार मैं इस क्षेत्र में चला हूं, लेकिन इस बार संकेत अलग मिल रहे हैं। दाह संस्कार स्थल पर कौवे एक अलग ही गाना गा रहे हैं। मुर्दे ज्यादा बेचैन हैं। अघोरी बाबा कहते हैं- धरती अपनी सांसें बदल रही है। इसके साथ ही वे राख से पवित्र प्रतीक बनाते हैं और कहते हैं, ‘जब नदी अपना रास्ता बदलेगी, तो शहरों को एहसास होगा कि वे उधार की जमीन पर बसे हैं। अगले चार साल वह आकार देंगे जिसे मनुष्य स्थायी या शाश्वत मानता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाबा कालपुरुष की कई भविष्यवाणियां पानी पर केंद्रित हैं। पानी की कमी और आपदाओं पर आधारित हैं, जो कई बार सटीक साबित हुई हैं। वह कहते हैं, ‘पहाड़ अपना बर्फ छोड़ देंगे। पहले धीरे-धीरे, फिर एक साथ पवित्र नदियां नए रास्ते खोजेंगी। कई मंदिर धरती पर लौट आएंगे। बाबा कालपुरुष ने सबसे अहम भविष्यवाणी महाकुंभ पर की है। वह कहते हैं, ‘यह संगम बदल जाएगा। नदी बह रही है। समय के साथ संगम को नया स्थान मिलेगा। जहां आज रण है, भविष्य की पीढ़ी वहां कुंभ का आयोजन करेगी। हालांकि बाबा कालपुरुष की भविष्यवाणियों में किसी विनाश का जिक्र नहीं किया गया है। वह फर्राटेदार अंग्रेजी में भविष्यवाणी करते हैं। आने वाला परिवर्तन पृथ्वी पर नहीं होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">युवा पीढ़ी वह याद रखेगी जो मध्य पीढ़ी भूल गई है। अब जन्म लेने वाले बच्चों को वह याद होगा जो हम भूल चुके हैं। वे हवा को समझेंगे। उन्हें पता चल जाएगा कि पृथ्वी कब घूमने वाली है। युवा पीढ़ी फिर से आसमान को पढ़ना सीखेगी। अमावस्या की रात को की गई उनकी भविष्यवाणियां आने वाले समय की एक जटिल तस्वीर पेश करती हैं। हालांकि उनकी ये भविष्यवाणियां कितनी सच होती हैं या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।</p>
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		<title>‘एप्पल’ बनाने वाले स्टीव जॉब्स के 50 साल पुराने लेटर में कुंभ पर क्या लिखा है?</title>
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		<pubDate>Thu, 23 Jan 2025 09:50:34 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/steve-jobs-kumbh-mela-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-480906" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/steve-jobs-kumbh-mela-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/steve-jobs-kumbh-mela-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/steve-jobs-kumbh-mela-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/steve-jobs-kumbh-mela-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के बीच एप्पल के दिवंगत सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स के करीब 50 वर्ष पहले हाथ से लिखे एक पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तब 19 वर्ष के स्टीव जॉब्स ने फरवरी 1974 में यह पत्र अपने बचपन के दोस्त टिम ब्राउन को लिखा था। इस पत्र में जॉब्स की आध्यात्मिकता की झलक देखने को मिलती है। जिसमें उन्होंने कुंभ मेले में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है। यह पत्र एक नीलामी में $500,312 (4.32 करोड़ रुपए) में बेचा गया है। जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल भी महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए प्रयागराज पहुंची थीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पत्र में क्या लिखा है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जॉब ने अपने 19वें जन्मदिन से एक दिन पहले यह पत्र पोस्टमार्क किया था। इस समय के आसपास, जॉब्स नोलन बुशनेल के नेतृत्व वाली सनीवेल-आधारित वीडियो गेम कंपनी अटारी में काम कर रहे थे और अपनी भारत की अपनी यात्रा के लिए पैसे इकट्ठा कर&nbsp;<a href="https://www.bonhams.com/auction/26897/lot/44/jobs-steve-1955-2011-steve-jobs-reveals-his-spiritual-side-autograph-letter-signed-steve-jobs-1p-4to-santa-cruz-mountains-february-23-1974-to-tim-brown-with-autograph-envelope/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">रहे थे</a>। जॉब्स ने इसमें लिखा है, “कई सुबहें आईं और चली गईं, लोग आए और चले गए, मैंने कई बार प्यार किया और रोया।” उन्होंने लिखा, “मैं अब लॉस गैटोस और सांता क्रूज़ के बीच पहाड़ों में एक खेत में रह रहा हूं। मैं कुंभ मेले के लिए भारत जाना चाहता हूँ, जो अप्रैल में शुरू होता है। मैं मार्च में किसी समय जाऊंगा, अभी तक निश्चित नहीं हूं।” इस पत्र में जॉब्स ने आध्यात्मिकता पर चर्चा करते हुए लिखा है, “मैं यह कहकर (पत्र को) समाप्त करूंगा कि मुझे यह भी नहीं पता कि कहां से शुरू करूं।”</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="http://voiceofindia.online/wp-content/uploads/2025/01/image-1577x2048-1-789x1024.jpeg" alt="" class="wp-image-53484"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जॉब्स द्वारा लिखा गया पत्र (सोर्स: bonhams.com)</strong></p>



<h3 class="wp-block-heading">जब कुंभ पहुंचे जॉब्स</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्टीव जॉब्स ने 1974 की शुरुआत में भारत आने के लिए पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। वॉल्टर आइजैक्सन ने जॉब्स की बायोग्राफी में लिखा है, “जॉब्स ने इसे लेकर कहा था कि मेरे लिए यह एक गंभीर किस्म की खोज थी। जॉब्स ने अपने दोस्तों से कहा था कि वह अपने गुरु की तलाश में भारत जा रहे हैं।” वॉल्टर लिखते हैं कि भारत आने पर जॉब्स बीमार हो गए और जब उनकी सेहत में सुधार हुआ तो वे हरिद्वार पहुंचे और उस समय वहां कुंभ मेला चल रहा है। जॉब्स ने बताया कि कुंभ में हर तरफ साधु-संत व श्रद्धालु थे और टेंट में अलग-अलग महात्मा रह रहे थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘हिंदू बनना चाहती हैं जॉब्स की पत्नी’</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जॉब्स की पत्नी लॉरेन भी कुछ दिनों&nbsp;महाकुंभ&nbsp;में शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी से सनातनी परंपरा के तहत गुरू दीक्षा ली है। उन्हें महाकाली के बीज मंत्र की दीक्षा दी गई है। कैलाशानंद गिरी ने बताया है कि लॉरेन को करीब एक वर्ष पहले ही ‘कमला’ नाम और गौत्र दिया जा&nbsp;<a href="https://www.abplive.com/news/india/mahakumbh-2025-niranjani-akhara-head-swami-kailashanand-giri-on-wife-of-steve-jobs-sanatan-dharma-2865251" target="_blank" rel="noreferrer noopener">चुका था</a>। उन्होंने बताया कि लॉरेन अब सनातन धर्म से जुड़ना चाहती हैं और अपने गुरू से जुड़कर अपनी परंपराएं जानना चाहती हैं।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>मौनी अमावस्या पर बदलेगी कुंभ की व्यवस्था, जान लें जरूरी नियम</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/he-arrangement-of-kumbh-will-change-on-mauni-amavasya-know-the-important-rules/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jan 2025 03:40:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महाकुंभ : मौनी अमावस्या स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराने की मेला प्रशासन रणनीति तैयार कर ली है। यह जानकारी मंगलवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महाकुम्भ राजेश द्विवेदी ने दी। महाकुम्भ मेले में वाहनों के आवागमन को लेकर कड़ा निर्देश दिए गए है। आगामी महत्वपूर्ण शाही स्नान पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं स्नानार्थियों को ... <a title="मौनी अमावस्या पर बदलेगी कुंभ की व्यवस्था, जान लें जरूरी नियम" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/he-arrangement-of-kumbh-will-change-on-mauni-amavasya-know-the-important-rules/" aria-label="Read more about मौनी अमावस्या पर बदलेगी कुंभ की व्यवस्था, जान लें जरूरी नियम">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="674" height="378" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-21-at-9.06.16-AM.jpeg" alt="" class="wp-image-480636" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-21-at-9.06.16-AM.jpeg 674w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-21-at-9.06.16-AM-300x168.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-21-at-9.06.16-AM-150x84.jpeg 150w" sizes="(max-width: 674px) 100vw, 674px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ : मौनी अमावस्या स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराने की मेला प्रशासन रणनीति तैयार कर ली है। यह जानकारी मंगलवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महाकुम्भ राजेश द्विवेदी ने दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुम्भ मेले में वाहनों के आवागमन को लेकर कड़ा निर्देश दिए गए है। आगामी महत्वपूर्ण शाही स्नान पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं स्नानार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, जिसके दृष्टिगत सभी अस्थायी बस स्टेशन पर पार्किंग स्थलों की महत्वपूर्ण भूमिका है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">श्रद्धालुओं को स्नान घाट तक पहुंचने एवं वापसी मार्गों की दी जाय जानकारी</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुम्भ मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के मार्गो की व्यवस्था को सही ढंग संचालित करने के लिए सभी रेलवे स्टेशन एवं सभी बस स्टेशनो से श्रद्धालु एवं स्नानार्थी सुगमता से मेला क्षेत्र में आये, इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें यह जानकारी दी जाए कि स्टेशन से निकलने के बाद सबसे नजदीकी मार्ग से स्नान करने और कुम्भ मेले में प्रवेश करना तथा स्नान बाद किस मार्ग से वापस रेलवे एवं बस स्टेशन पर जाना है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुम्भ मेले में बिजली व्यवस्था, व पानी की व्यवस्था</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुम्भ क्षेत्र में कही भी आग न लगने पाए, अगर इस प्रकार की घटना होती भी है तो अग्निशमन विभाग के साथ-साथ अन्य सभी सम्बंधित टीमें तत्काल पहुँचे और भीड़ प्रबंधन और बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दी जाय।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मेले में फैलने न पाए कोई अफवाह</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुम्भ मेला में किसी भी प्रकार की अफवाह न फैले इस पर तत्काल प्रतिक्रिया दी जाय और माइक से समय-समय पर सूचना प्रसारित की जाय। हमारी प्राथमिकता है श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराना।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महाकुंभ : प्रयागराज कुंभ के वो दर्दनाक हादसे&#8230; दो परिवारों को गम से भर दिया</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/mahakumbh-painful-accidents-prayagraj-kumbh-two-families/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jan 2025 06:11:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महाकुंभ : प्रयागराज महाकुम्भ की शुरूआत में अब चंद दिन ही शेष हैं। 144 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस महाकुम्भ का साक्षी बनने के लिए लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शासन-प्रशासन दिन-रात आयोजन की तैयारियां में जुटा है। साथ ही प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा ... <a title="महाकुंभ : प्रयागराज कुंभ के वो दर्दनाक हादसे&#8230; दो परिवारों को गम से भर दिया" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mahakumbh-painful-accidents-prayagraj-kumbh-two-families/" aria-label="Read more about महाकुंभ : प्रयागराज कुंभ के वो दर्दनाक हादसे&#8230; दो परिवारों को गम से भर दिया">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1050" height="500" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-11.37.50-AM-1.jpeg" alt="" class="wp-image-479361" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-11.37.50-AM-1.jpeg 1050w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-11.37.50-AM-1-300x143.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-11.37.50-AM-1-768x366.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-11.37.50-AM-1-150x71.jpeg 150w" sizes="auto, (max-width: 1050px) 100vw, 1050px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ : प्रयागराज महाकुम्भ की शुरूआत में अब चंद दिन ही शेष हैं। 144 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस महाकुम्भ का साक्षी बनने के लिए लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शासन-प्रशासन दिन-रात आयोजन की तैयारियां में जुटा है। साथ ही प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी तमाम पुख्ता प्रबन्ध किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके। इस बीच प्रयागराज कुम्भ की ऐसी घटनाएं है, जो शायद कभी दिलोदिमाग से मिटती नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दो हादसे जो हर बार बढ़ा देते हैं पीड़ाप्रयागराज के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां पर हर साल आयोजित होने वाले माघ मेले और छह व बारह साल पर लगने वाले कुम्भ मेला में लाखों-करोड़ों की भीड़ एक स्थान पर जुटने के बावजूद कोई दुखद घटना नहीं घटती, इसके पीछे भगवान और गंगा मैया की कृपा है। मगर यह भी सच है कि प्रयागराज के दो कुम्भ की तमाम सुखद यादों के बीच भगदड़ की दो घटनाएं ऐसी रहीं जिन्होंने बहुत से परिवारों को जीवन भर का गम दे दिया था। घटना 1954 और 2013 में हुए कुंभ मेलों की है, जो बहुत ही दर्दनाक थी। इन दोनों घटनाओं में सैकड़ों लोगों ने जान गंवाई थी। इस हादसे ने शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1954 का कुम्भ मेला छोड़ गया दुखद यादेंस्वतन्त्र भारत में 1954 में कुम्भ मेला हुआ था। 3 फरवरी की तारीख थी, मौनी अमावस्या का दिन था। इस दिन त्रिवेणी बांध पर भगदड़ मच गई, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि इस घटना के समय वहां पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे और एक हाथी के नियंत्रण से बाहर होने के कारण भगदड़ का माहौल बना। जिसमें करीब 800 लोगों की जान चली गई थी और करीब 2000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे के बाद पं. नेहरू ने न्यायमूर्ति कमलाकांत वर्मा की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। इस घटना को प्रशासन ने छिपाने का पूरा प्रयास किया था किंतु एक प्रेस फोटोग्राफर ने शासन के इस मंसूबे को पूरा नहीं होने दिया। उस समय एक बड़े अखबार में छायाकार रहे एनएन मुखर्जी के पास ही थी जो दुर्घटनास्थल पर मौजूद थे और अपनी जान की परवाह न कर छायांकन किया था हालांकि उनके इस काम से तत्कालीन प्रदेश सरकार काफी नाराज थी। दुर्घटना व बाद में शवों को जलाए जाने की सचित्र खबर छपने से सरकार की काफी किरकिरी हो रही थी जिससे मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत छायाकार एनएन मुखर्जी से काफी नाराज थे। हादसे के बाद पंडित नेहरू ने नेताओं और अतिविशिष्ट लोगों से स्नान पर्वों पर कुम्भ न जाने की अपील की थी। उस घटना के बाद से कुम्भ में कभी भगदड़ नहीं मची थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2013 में स्टेशन पर भगदड़ में 36 लोगों की मौतऐसी ही एक दुखद दुर्घटना 2013 भी हुई थी। कुंभ मेला के दौरान 10 फरवरी दिन रविवार को मौनी अमावस्या का स्नान था। स्नान-दान करने के बाद श्रद्धालु अपने घर जाने के लिए रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर पहुंच रहे थे। प्रयागराज जंक्शन (इलाहाबाद) पर बड़ी संख्या में यात्री पहुंच चुके थे। सभी प्लेटफार्म ठसाठस भरे हुए थे। ओवरब्रिजों पर भी भारी भीड़ थी। शाम के सात बज रहे थे तभी प्लेटफार्म छह की ओर जाने वाली फुट ओवरब्रिज की सीढिय़ों पर अचानक भगदड़ मची। धक्का-मुक्की में कई लोग ओवरब्रिज से नीचे जा गिरे जबकि कई लोगों को भीड़ ने कुचल दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस हादसे की वजह एक अनाउंसमेंट बनी थी। दरअसल, यात्री संगम से वापस घर लौट रहे थे। सभी प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर थे। जिस प्लेटफॉर्म में ट्रेन आनी थी वहां सभी इंतजार कर रहे थे। लेकिन अचानक अनाउंसमेंट हुई कि ट्रेन दूससे प्लेटफॉर्म पर खड़ी है और खुलने वाली है। फिर क्या था, लोग दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर दौड़े। फुट ओवरब्रिज से होते हुए लोग जा रहे थे। इतने में ब्रिज पर लोड इतना ज्यादा बढ़ गया कि पुल नीचे गिर गया और 36 लोग इस हादसे में मारे गए। जबकि 50 गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दुर्घटना में मरने वालों में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि के यात्री थे। रेलवे ने उस हादसे से सबक लेकर भीड़ प्रबंधन पर काफी ध्यान दिया है।</p>
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		<title>महाशिवरात्रि : दोपहर तक कुम्भ में 50 लाख श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी, देखें PHOTOS</title>
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		<pubDate>Mon, 04 Mar 2019 07:49:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुम्भनगर। दिव्य और भव्य कुम्भ के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर सोमवार को पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के संगम में अब तक करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगायी। आधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि महाशिवरात्रि स्नान पर्व का मुहूर्त रात्रि एक बजकर 26 मिनट पर ... <a title="महाशिवरात्रि : दोपहर तक कुम्भ में 50 लाख श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी, देखें PHOTOS" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mahashivaratri-50-lakh-pilgrims-dip-in-faith-in-kumbh-till-noon/" aria-label="Read more about महाशिवरात्रि : दोपहर तक कुम्भ में 50 लाख श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी, देखें PHOTOS">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुम्भनगर।</strong> दिव्य और भव्य कुम्भ के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर सोमवार को पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के संगम में अब तक करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगायी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p27.jpg" alt="kumbh mela 2019 sangam last holy dip on mahashivratri monday" /><br />
आधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि महाशिवरात्रि स्नान पर्व का मुहूर्त रात्रि एक बजकर 26 मिनट पर लग गया था। संगम तट पर हल्की बूंदा-बांदी और सर्द हवाओं की परवाह किये बगैर श्रद्धालुओं ने “ हर-हर गंगे और हर-हर महादेव” का स्मरण करते मध्य रात्रि के बाद से ही आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p8_0.jpg" alt="à¤®à¤¨à¤à¤¾à¤®à¥à¤¶à¥à¤µà¤° à¤®à¤à¤¦à¤¿à¤° à¤®à¥à¤ à¤à¤®à¤¡à¤¼à¥ à¤à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¥¤" /></p>
<p>ठंड पर आस्था भारी पड़ती नजर आयी। कल रात भारी वर्षा होने के कारण दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को रात गुजारने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा । किसी ने पुल के नीचे शरण ली तो किसी ने कोने का सहारा लिया ।</p>
<p><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/samgam-sang.jpg" /><br />
यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रुप में मान्यता प्राप्त, भारत की आध्यात्मिक सांस्कृतिक, सामाजिक एवं वैचारिक विविधताओं को एकता के सूत्र में पिरोने वाला यह कुम्भ भारतीय संस्कृति का द्योतक है। सम्पूर्ण भारत की संस्कृति की झलक कुम्भ में देखने को मिली है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p10.jpg" alt="à¤¶à¤à¤à¤¨à¤¾à¤¦ à¤à¤° à¤®à¤¹à¤¾à¤¶à¤¿à¤µà¤°à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿ à¤à¤¾ à¤à¤¤à¥à¤¸à¤µ à¤®à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ à¤¶à¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¥¤" /></p>
<p>कुम्भ काे लघु भारत कहा जाए तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। यहां अनेकता में एकता परलक्षित होती है। यहां चारों दिशाएं एकाकार होकर संगम में आस्था की डुबकी लगती हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/04_03_2019-samgam-sa_19012101.jpg" alt="à¤®à¤¹à¤¾à¤¶à¤¿à¤µà¤°à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿ 2019: à¤ªà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤à¤°à¤¾à¤ à¤à¥à¤à¤­ à¤®à¥à¤ à¤²à¤¾à¤à¥à¤ à¤¨à¥ à¤²à¤à¤¾à¤ à¤à¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¥ à¤¡à¥à¤¬à¤à¥" /><br />
महाशिरात्रि स्नान कुम्भ का 49 वां दिन है। रविवार शाम से ही श्रद्धालुओं का सैलाब मेला क्षेत्र में उमड़ने लगा। अरैल क्षेत्र में बने टेंट सिटी के शिविर, शहर के सभी होटल, श्रद्धालुओं से भरे थे।  विदाई की बेला में भी कुम्भ की आभा बरकरार है। संगम का विहंगम दृश्य अभी भी पहले जैसा ही बना हुआ है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p11.jpg" alt="à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¥ à¤¬à¤¾à¤¦ à¤¤à¤¿à¤²à¤ à¤²à¤à¤µà¤¾à¤¤à¤¾ à¤¶à¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¥¤" /></p>
<p>संगम जाने वाले काली मार्ग, लाल मार्ग और त्रिवेणी मार्ग पर पैदल श्रद्धालुओं को भी चलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p22.jpg" alt="kumbh mela 2019 sangam last holy dip on mahashivratri monday" /></p>
<p>दूर दराज से सिर पर गठरी और कंधे पर कमरी रखे, एक दूसरे का कपड़ा पकड़े ग्रामीण परिवेश के वृद्ध पुरुष, महिलायें, युवा सभी उम्र के श्रद्धालुओं का हुजूम संगम में डुबकी लगाने के लिए बढ़ता जा रहा है।</p>
<p><img decoding="async" src="http://im.rediff.com/news/2015/aug/29nashik-kumbh1.jpg" alt="Related image" /><br />
भारतीय जन-जीवन, आध्यात्मिक चिंतन और विभिन्न भारतीय संस्कृति की सरिता का संगम कुम्भ में दिखाई दिया।इससे पहले मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी स्नान पर्व पर नागा संन्यासियों समेत, आचार्य महामण्डलेश्वर, मण्डलेश्वर, अखाडों के पदाधिकारी, संत-महात्मा के साथ तरह-तरह के विदेशी भक्तों ने भी त्रिवेणी में आस्था के गोते लगाकर सभी को आकर्षित किया था। लेकिन महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर गांव देहात से आए लोगों का ही बोल बाला है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p12.jpg" alt="à¤¹à¤µà¤¨ à¤ªà¥à¤à¤¨ à¤à¤°à¤¤à¤¾ à¤¸à¤à¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥à¥¤" /></p>
<p>श्रद्धालुओं में गंगा स्नान के अलावा और कोई तमन्ना नहीं दिखाई दी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p20.jpg" alt="kumbh mela 2019 sangam last holy dip on mahashivratri monday" /></p>
<p>आठ से 10 किलोमीटर पैदल चलकर संगम पहुचने वाले श्रद्धालुओं को जहां जगह मिली स्नान के बाद न/न खाने की चिंता न और किसी सुविधा की आशा बस रेती पर थकावट दूर करने गमछा बिछाकर लेट गए।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p25.jpg" alt="à¤¸à¤à¤à¤® à¤®à¥à¤ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¤°à¤¤à¥ à¤¶à¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¥¤" /><br />
पारंपरिक देसी भीड़ में आधुनिकता और परंपरा दोनों का संगम दिखाई दिया। युवा जहां जींस में टैबलेट लेकर गंगा स्नान करने को आए तो बुजुर्ग एक धोती सहेजे और लाठी टेंकते ही संगम के किनारे पहुंचे। इस भीड़ में भारतीय संस्कार भी रचे बसे दिखाई दिए।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p23.jpg" alt="à¤¸à¤à¤à¤® à¤®à¥à¤ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¤°à¤¤à¥ à¤¶à¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¥¤" /><br />
त्रिवेणी के विस्तीर्ण रेती पर एक बार फिर श्रद्धालुओं के आस्था के समंदर को संगम अपनी बाहों में भरने को आतुर दिखा। कुम्भ मेले के अखिरी स्नान का पुण्य हासिल करने के लिए संगम नोज से लेकर अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p16.jpg" alt="kumbh mela 2019 sangam last holy dip on mahashivratri monday" /></p>
<p>तट पर स्नान के बाद पूजा और आराधना में श्रद्धालु लीन हैं। कोई संगम में दूध चढ़ा रहा है तो कोई स्नान कर तट पर दीपदान कर रहा है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p9_0.jpg" alt="à¤¸à¤à¤à¤® à¤®à¥à¤ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¤°à¤¤à¥ à¤¶à¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¥¤" /><br />
संगम तट पर कुछ जगह श्रद्धालु मनौती कर दोने में पुष्पों के बीच दीपक रखकर श्रद्धालु गंगा में प्रवाहित कर दोनों हाथ जोड़कर परिवार की सुख और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। तीर्थ पुराेहित इस भीड़ में यजमानों को सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल कामना के लिए संकल्प कराते नजर आये।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/03/04/0521_p23.jpg" alt="à¤¸à¤à¤à¤® à¤®à¥à¤ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¤°à¤¤à¥ à¤¶à¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¥¤" /></p>
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		<title>बसंत पंचमी: तीसरे शाही स्नान में दोपहर तक दो करोड़ लोगों ने लगाई डुबकी, देंखे PHOTOS</title>
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		<pubDate>Sun, 10 Feb 2019 08:29:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुम्भ नगर.  भाषा, संस्कृति, आध्यात्म के साथ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम कुंभ मेले में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर तीसरा और अंतिम शाही स्नान आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों के चाकचौबंद इंतजामों के बीच तड़के पारम्परिक तरीके में शुरू हो गया।  तड़के से ... <a title="बसंत पंचमी: तीसरे शाही स्नान में दोपहर तक दो करोड़ लोगों ने लगाई डुबकी, देंखे PHOTOS" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/basant-panchami-twenty-two-million-people-dip-in-the-third-shahi-bath-by-afternoon-see-photos-photos/" aria-label="Read more about बसंत पंचमी: तीसरे शाही स्नान में दोपहर तक दो करोड़ लोगों ने लगाई डुबकी, देंखे PHOTOS">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुम्भ नगर. </strong> भाषा, संस्कृति, आध्यात्म के साथ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम कुंभ मेले में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर तीसरा और अंतिम शाही स्नान आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों के चाकचौबंद इंतजामों के बीच तड़के पारम्परिक तरीके में शुरू हो गया।  तड़के से ही संगम की विस्तीर्ण रेती पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778641.jpeg" alt="Naga Sadhu" /></p>
<p>‘हर हर गंगे और गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाये’ के कर्ण प्रिय स्वर लहरियां मन को आस्था से सराबोर कर रही थीं। श्रद्धालु कई-कई किलाेमीटर की पैदल यात्रा कर तीर्थराज त्रिवेणी गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती के तट पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने शनिवार की रात से आस्था की डुबकी लगानी शरू कर दी। दोपहर तक लगभग दो करोड़ लोगो ने स्नान किया।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/_1549768326.jpg" alt="à¤à¥à¤¨à¤¾ à¤à¤à¤¾à¥à¤¾ à¤à¥ à¤¨à¤¾à¤à¤¾ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¥ à¤ªà¤¹à¥à¤à¤à¥" /><br />
ज्योतिषियों के अनुसार बसंत पंचमी स्नान का मुहूर्त शनिवार सुबह 8.55 बजे से रविवार सुबह 10 बजे तक है। ग्रह-नक्षत्रों की खास स्थिति बनने से नहान और दान करने वाले श्रद्धालुओं को बसंत पंचमी का स्नान मनोवांछित फल प्रदान करने वाला होगा। रेवती नक्षत्र, साध्य योग का विशेष संयोग बसंत पंचमी की पुण्य बेला में संगम में स्नान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778286.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
शनिवार की सुबह से श्रद्धालुओं का स्नान करने का क्रम बना रहा जिसकी कड़ी देर शाम जाकर टूटी। उसके बाद मध्य रात्रि से पुन: श्रद्धालुओं का रेला त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने लगा। शनिवार को दिन में सर्द तेज हवा मानो श्रद्धालुओं की आस्था की परीक्षा ले रहा हो।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778511.jpeg" alt="Naga Sadhu" /></p>
<p>रात जैसे-जैसे गहराती गई सर्द हवा अपना दामन फैलाती गयी। संगम की विस्तीर्ण रेती पर खुले अम्बर के नीचे चादर ओढ़े कंप कंपी लगाते श्रद्धालु भोर की प्रतीक्षा कर रहे थे। श्रद्धालुओं के आस्था के सामने सर्द हवा के झोंके को उस समय हार माननी पड़ी जब उन्होंने घाट पर त्रिवेणी में उतरने से पहले मां गंगा का आचमन किया और “ हर हर गंगे, ऊं नम: शिवाय” जपते हुए आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549766366.jpg" alt="shahi snan" /></p>
<p>करीब 3200 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैले मेला क्षेत्र में जिधर नजर घुमाओ, वहां श्रद्धालु ही नजर आ रहा है। इस दौरान चप्पे चप्पे पर तैनात सुरक्षाकर्मी मुस्तैदी के साथ भीड़ को नियंत्रित करने में जुटे दिखायी दे रहे हैं। पुलिस के जवानो की मदद के लिये आरपीएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, और आईटीबी समेत अर्ध सैनिक बलों की टुकड़ियां मुस्तैदी के साथ अपने काम को अंजाम देने में जुटी हुयी है। इसके अलावा 500 रेकरूट 10 इंसपेक्टर समेत सुरक्षा बल (बीएसएफ) की दो और कंपनियां मेला क्षेत्र में तैनात की गयी हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549765418.jpg" alt="shahi snan" /><br />
कुम्भ के तीसरे शाही स्नान पर्व की शुरूआत परम्परा के मुताबिक श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा ने की। इसके साथ श्री पंचायती अटल अखाड़ा ने भी संगम में डुबकी लगायी। दोनों अखाड़े सेक्टर 16 स्थित शिविर से तड़के 5.15 बजे शाही जुलूस के साथ निकले। भोर 5 :35 बजे पहला शाही स्नान महानिर्वाणी अखाड़ा ने किया। उसके साथ अटल अखाड़ा भी था।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549765080.jpg" alt="shahi snan" /><br />
बाद में सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा और तपोनिधि श्री पंचायती आनन्द अखाड़ा ने शाही स्नान किया। आठ बजे श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा और श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा ने एक साथ शाही स्नान किया। इसके बाद बैरागी अखाड़ों के शाही स्नान का क्रम शुरु होगा। इसमें सबसे पहले अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा 10.40 बजे शाही स्नान करेगा। उसके बाद अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा 11.20 बजे और अखिल भारतीय पंच निर्मोही अनी अखाड़ा 12.20 बजे शाही स्नान करेगा।<br />
<img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549777965.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
उदासीन अखाड़े सबसे अंत में स्नान करने आयेंगे। इसमें सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन 1.15 बजे, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन 2.20 बजे और श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला 3.40 बजे शाही स्नान करेगा जबकि प्रशासन से हुई बातचीत के बाद अखाड़ों ने शाही स्नान के जुलूस में बड़े वाहन न ले जाने पर सहमति भी दे दी है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778080.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
इस बीच संगम में आठ किलोमीटर के दायरे में स्नान के लिए बनाए गए 40 विभिन्न घाटों पर भोर आठ बजे तक 43 लाख श्रद्धालुओ ने आस्था की डुबकी लगा चुके थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिये सुरक्षा बलों के साथ स्वयं सेवक भी लगाये गये है। बाहर के जिलों से आने वाले वाहनो का प्रवेश शहर में प्रतिबंधित कर दिया गया है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2019/02/10/16_9/16_9_1/shahi_snan_1549766559.jpg" alt="shahi snan" /><br />
सरकारी बसों और अन्य निजी वाहनो के लिये शहर के बाहरी छोरों पर अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गयी है जबकि वहां से सिविल लाइंस तक के लिये कुंभ शटल में मुफ्त यात्रा का इंतजाम किया गया है। सिविल लाइंस से संगम तक जाने के लिये केवल पैदल लोगों को इजाजत दी जा रही है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778560.jpeg" alt="Naga Sadhu" /></p>
<p>सुरक्षा की दृष्टि से मेला परिसर में करीब 400 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं जबकि 96 फायर वाच टावर में तैनात जवान भीड़ को नियंत्रित करने के साथ साथ अवांछनीय तत्वों पर पैनी नजर बनाये हुये हैं। मेला क्षेत्र को 10 जोन में बांट कर सुरक्षा बलों की 37 कंपनियां तैनात की गयी है। अप्रिय स्थिति से निपटने के लिये इसके अलावा 10 कंपनी एनडीआरएफ की तैनाती की गयी है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778006.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
बड़ी संख्या में लोगों को रात खुले आसमान के नीचे सोकर गुजारनी पड़ रही है। बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों से आस्थावानों के आने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। ग्रामीण इलाके से आने वाले लोगों की संख्या अधिक है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/basant-panchami_1549778046.jpeg" alt="basant panchami" /><br />
कुंभ के आकर्षण ने हजारों की संख्या में अमेरिका, आस्ट्रेलिया, रूस, फ्रांस और कनाडा समेत अन्य देशों के सैलानियों को भी डेरा डालने पर मजबूर कर दिया है। भारी भीड़ को देखते हुए बाहर से आने वाले वाहनों को शहरी सीमा के बाहर फाफामऊ, नैनी, झूंसी और सुलेमसराय आदि इलाकों में बनी पार्किंग में ही रोक दिया जा रहा है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/02/10/750x506/naga-sadhu_1549778206.jpeg" alt="Naga Sadhu" /><br />
कुंभ मेला के बसंत पंचमी स्नान पर्व के अवसर पर तीसरे और अंतिम शाही स्नान के बाद धीरे-धीरे मेला की चमक फीकी पड़ने लगेगी। इसके बाद 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा और मेला का अंतिम स्नान चार मार्च महाशिवरात्रि पर होगा। सुरक्षा व्यवस्था अखिरी स्नान तक बनी रहेगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">प्रयागराज कुंभ में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर तृतीय शाही स्नान के पुण्य अवसर पर पधारे समस्त संत महात्माओं, धर्माचार्यों एवं श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं।</p>
<p>&mdash; Yogi Adityanath (@myogiadityanath) <a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/1094431715743825920?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">February 10, 2019</a></p></blockquote>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कुम्भ: गंगा में स्नान के बाद बोली कनाडाई महिला, पवित्र हुआ मेरा मन, अब बनूँगी ‘तपस्विनी’</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/kumbh-canadian-woman-after-bathing-in-the-ganges-became-my-mind-now-will-become-tapaswini/</link>
		
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		<pubDate>Tue, 05 Feb 2019 10:21:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुंभनगर।  दुनिया के विशाल धार्मिक आयोजनों में शुमार सनातन धर्मावलम्बियों के ‘कुंभ मेला’ के प्रभाव से पश्चिमी सभ्यता भी अछूती नहीं है। तीर्थराज प्रयाग में कुम्भ के अवसर पर सुदूर क्षेत्रों से विरक्त, गृहस्थ और विदेशी पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर ... <a title="कुम्भ: गंगा में स्नान के बाद बोली कनाडाई महिला, पवित्र हुआ मेरा मन, अब बनूँगी ‘तपस्विनी’" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/kumbh-canadian-woman-after-bathing-in-the-ganges-became-my-mind-now-will-become-tapaswini/" aria-label="Read more about कुम्भ: गंगा में स्नान के बाद बोली कनाडाई महिला, पवित्र हुआ मेरा मन, अब बनूँगी ‘तपस्विनी’">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुंभनगर।</strong>  दुनिया के विशाल धार्मिक आयोजनों में शुमार सनातन धर्मावलम्बियों के ‘कुंभ मेला’ के प्रभाव से पश्चिमी सभ्यता भी अछूती नहीं है। तीर्थराज प्रयाग में कुम्भ के अवसर पर सुदूर क्षेत्रों से विरक्त, गृहस्थ और विदेशी पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर खुद को धन्य मान रहे हैं.  वहीं विदेशी श्रद्धालु भी इस महापर्व में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर पावन नदियों के संगम तीरे आस्था, भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संसार बसा है जहां दुनिया की अनेक भाषा और संस्कृतियों का भी संगम हो रहा है। वास्तव में कुंभ ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ को चरितार्थ कर रहा है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://hindi.oneindia.com/img/2019/01/kumbh2-1548228325.jpg" alt="Image result for à¤à¥à¤à¤­ à¤®à¥à¤²à¥ à¤®à¥à¤ à¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¶à¥" /><br />
तुलसीदास ने ‘रामचरित मानस’ में लिखा है ‘माघ मकरगत रितु जब होई तीरथपतिहिं आव सब कोई।” इसी भावना के अनुरूप करोड़ों श्रद्धालु अमृत स्नान की कामना से तीर्थराज प्रयाग आते हैं। यह पर्व वैश्विक पटल पर शांति, सामंजस्य और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। कुंभ मेले में हालैंड, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, अायरलैंड, कनाडा, जापान समेत तमाम देशों के संत और श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति की खोज में डेरा जमाये हुये हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2019/01/18/750x506/kumbh_1547794829.jpeg" alt="Image result for à¤à¥à¤à¤­ à¤®à¥à¤²à¥ à¤®à¥à¤ à¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¶à¥" /><br />
भारतीयता के रंग में सरोबार कनाडा की वेरोनी क्यून ने कहा “ मैं भारतीय नाम ‘तपस्विनी’ कहलाना पसंद करूंगी। भारतीय आध्यात्म के बारे में मैने बहुत पढ़ा है और उसी से प्रेरित होकर मेरी अब यहां बसने की तमन्ना है। दुनिया के कई देशों में घूमी हूं लेकिन भारत के बारे में जो पढ़ा, उससे ज्यादा यहां आकर मिला। इंडिया इज ग्रेट एन्ड पावरफुल आध्यात्म गुरू आफ वर्ल्ड, नो डाउट। ”</p>
<p><img decoding="async" src="https://s3.scoopwhoop.com/anj/sw/42170e0a-0782-433f-aa6c-eaeb8a189827.jpg" alt="Related image" /><br />
यूक्रेन की मारिया ने कहा ,‘मेरे लिए भारत आना एक सपने के सच होने जैसा है। मैं स्वयं को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाना चाहती हूं।” त्रिवेणी में करोड़ों लोगों के साथ आस्था की डुबकी लगाना एक सपना है। ” सरकार और प्रशासन की सराहना हुए उसने कहा ‘वैरी नाइस अरेंजमेंट’।</p>
<p><img decoding="async" src="https://ichef.bbci.co.uk/news/ws/660/amz/worldservice/live/assets/images/2016/04/24/160424093242_ujjain_kumbh_hindus_of_africa_and_western_origins10_976x549_preetimann.jpg" alt="Image result for à¤à¥à¤à¤­ à¤®à¥à¤²à¥ à¤®à¥à¤ à¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¶à¥" /><br />
यह गंगा की महिमा है जो सात समुन्दर पार से भी प्रवासी भारतीय को ही नहीं अपितु पश्चिमी सभ्यता को बांधे हुए हैं। कुंभ नगरी के सेक्टर-14 में स्थित शक्तिधाम शिविर इन दिनों विदेशी भक्तों से गुलजार है। सनातन धर्म और कुंभ को जानने की जिज्ञासा उन्हें संगम तट तक खींच लाई है। पिछले दिनो इसी शिविर में 82 विदेशियों ने पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाज से साईं मां से दीक्षा ली।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/730x548/web2images/www.bhaskar.com/2019/01/03/cover___kumbh_1546500017.jpg" alt="Related image" /><br />
इन विदेशी श्रद्धालुओं में एक अमेरिकी, एक आयरलैंड, एक कनाडा और 79 जापानी स्त्री और पुरुष शामिल हैं। कनाडा की वेरोनी क्यू जीन और आयरलैंड के डेविड ओ ग्रेडी ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत के पालन का संकल्प भी लिया है।<br />
कुंभ के महत्व के दृष्टिगत संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा इसे “मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत” की विश्व धरोहर के रूप में मान्यता देकर इसको सम्मान दिया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>कुंभ: शाही स्नान के साथ कुंभ का आगाज, इतिहास में पहली बार हो रही हैं ये 10 चीजें,</title>
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		<pubDate>Tue, 15 Jan 2019 06:13:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुंभनगर(प्रयागराज) । तीर्थराज प्रयाग में मकर संक्रांति के अवसर पर अखाड़ों के प्रथम शाही स्नान के साथ मंगलवार को कुंभ का आगाज हो गया । सुबह के छह बजते ही अखाड़ों के सन्यासी पुरी शान शौकत के साथ पवित्र संगम में पुण्य की डुबकी लगाने लगे। शाही स्नान का यह सिलसिला शाम करीब पांच बजे ... <a title="कुंभ: शाही स्नान के साथ कुंभ का आगाज, इतिहास में पहली बार हो रही हैं ये 10 चीजें," class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/kumbha-kumbha-beginning-with-imperial-bath-news/" aria-label="Read more about कुंभ: शाही स्नान के साथ कुंभ का आगाज, इतिहास में पहली बार हो रही हैं ये 10 चीजें,">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुंभनगर(प्रयागराज) । तीर्थराज प्रयाग में मकर संक्रांति के अवसर पर अखाड़ों के प्रथम शाही स्नान के साथ मंगलवार को कुंभ का आगाज हो गया । सुबह के छह बजते ही अखाड़ों के सन्यासी पुरी शान शौकत के साथ पवित्र संगम में पुण्य की डुबकी लगाने लगे। शाही स्नान का यह सिलसिला शाम करीब पांच बजे तक जारी रहेगा।</p>
<p>अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और कुंभ मेला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से तय समय के अनुसार सबसे पहले महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के सन्यासियों ने शाही स्नान किया। दोनों अखाड़ा के साधु संत अपनी छावनी से सज धजकर शाही सवारी के साथ प्रातः 5:15 बजे प्रस्थान किये। अखाड़ों के महामण्डलेश्वर अलग-अलग रथों पर सवार हैं। महानिर्वाणी व अटल अखाड़े के बाद निरंजनी अखाड़े के सन्यासी शाही स्नान के लिए संगम तट पर पहुँचेगें। इसके बाद आवाहन, अग्नि और किन्नर अखाड़े के साथ जूना अखाड़े के सन्यासी शाही स्नान करेंगे। इस तरह कुल 13 अखाड़ों के शाही स्नान का यह सिलसिला शाम करीब पांच बजे तक जारी रहेगा। अखाड़ों का जत्था जैसे ही संगम तट पर पहुँच रहा है मेला प्रशासन के अधिकारी परम्परागत फूल व माला से सन्यासियों व महामण्डलेश्वरों का स्वागत कर रहे हैं। कुंभ के प्रथम शाही स्नान के अवसर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गये हैं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i9.dainikbhaskar.com/thumbnails/680x588/web2images/www.bhaskar.com/2019/01/13/kumbh________cover_154738.jpg" alt="Image result for à¤à¥à¤à¤­: à¤¶à¤¾à¤¹à¥ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¥ à¤¸à¤¾à¤¥ à¤à¥à¤à¤­ à¤à¤¾ à¤à¤à¤¾à¤, à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸ à¤®à¥à¤ à¤ªà¤¹à¤²à¥ à¤¬à¤¾à¤° à¤¹à¥ à¤°à¤¹à¥ à¤¹à¥à¤ à¤¯à¥ 10 à¤à¥à¤à¥à¤," /></p>
<h3>कुम्भ क्षेत्र: श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे बितायी रात, फिर लगायी डुबकी</h3>
<p>कुम्भ नगरी (प्रयागराज)। कुम्भ क्षेत्र में मकर संक्रांति के स्नान पर देश-प्रदेश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे रात्रि बितायी। बीती रात दो बजकर तीस मिनट के बाद संक्रांति की तिथि शुरु होते ही श्रद्धालुओं ने विभिन्न घाटों पर डुबकी लगायी। मकर संक्रांति के स्नान को पावन माना जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा स्नान कर पुण्य की प्राप्ति की जाती है। मंगलवार को मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विभिन्न घाटों पर भोर से ही डुबकी लगानी शुरु कर दी। इसके पहले रात्रि पहर कुम्भ क्षेत्र में आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे टाट या कम्बल बिछाकर अपनी नींद पूरी की। ठंडी हवाओं के चलने के बाद भी श्रद्धालुओं की श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखी और जैसे ही उनकी नींद टूटी, वे घाट की ओर बढ़ चले। श्रद्धालुओं ने पुरे आनन्द भाव से स्नान किया। खुले आसमान में सोये प्रतापगढ़ जिले से कुम्भ क्षेत्र में पधारे श्रद्धालुओं रवि और आकाश ने बताया कि वे मोटरसाइकिल से प्रयागराज पहुंचें और वाहन को खड़ा कर खुले में बिछाकर सो गए।</p>
<p><img decoding="async" src="https://i10.dainikbhaskar.com/thumbnails/891x770/web2images/www.bhaskar.com/2019/01/13/0521_01_1-1_1547384754.jpg" alt="Image result for à¤à¥à¤à¤­: à¤¶à¤¾à¤¹à¥ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¥ à¤¸à¤¾à¤¥ à¤à¥à¤à¤­ à¤à¤¾ à¤à¤à¤¾à¤, à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸ à¤®à¥à¤ à¤ªà¤¹à¤²à¥ à¤¬à¤¾à¤° à¤¹à¥ à¤°à¤¹à¥ à¤¹à¥à¤ à¤¯à¥ 10 à¤à¥à¤à¥à¤," /></p>
<p>इसके बाद भोर में उठकर स्नान के लिए जा रहें है। स्नान करने के बाद वे वापस हो जाएंगे। बिहार के भभुआ जिले से स्नान के लिए आए प्रभुराम ने बताया कि वह भभुआ से वाराणसी आए और वहां से रेलगाड़ी से प्रयागराज पहुंचें। फिर रेलवे स्टेशन से पैदल कुम्भ क्षेत्र में पहुंचें। सेक्टर चार में वह खुले मैदान में कम्बल बिछाकर और ओढ़कर सो गए। मकर संक्रांति की तिथि लगते ही उन्होंने स्नान किया। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से आए सूरजभान सिंह और उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि मकर संक्रांति पर प्रतिवर्ष उनका परिवार संगम नहाने आता है। इस बार कुम्भ लगा है तो वे रेलगाड़ी से एक बजे रात्रि में प्रयागराज के कुम्भ क्षेत्र में पहुंच गए। फिर दो घंटे रुककर स्नान करने के लिए जा रहें है। उन्होंने बताया कि रात्रि पहर ठंडक है। इसके लिए वे अपने साथ कम्बल लेकर चले थे। जिसे ओढ़कर दो घंटे तक इंतजार किया। स्नान करने के बाद वे साधु संतों के दर्शन के बाद वापस हो जाएंगे। प्रयागराज जिले के नैनी के निवासी शिवानन्द मिश्रा ने बताया कि मकर संक्रांति पर उनके परिवार के सदस्य बारी-बारी से संगम स्नान करते हैं। अभी भोर में वह आए हैं। इसके बाद सुबह तक उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे आएंगे। उनके परिवार के सदस्य हमेशा से ही संगम में स्नान करते रहें है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images.hindi.news18.com/ibnkhabar/uploads/2019/01/laxmi.jpg" alt="Image result for à¤à¥à¤à¤­: à¤¶à¤¾à¤¹à¥ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤à¥ à¤¸à¤¾à¤¥ à¤à¥à¤à¤­ à¤à¤¾ à¤à¤à¤¾à¤, à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸ à¤®à¥à¤ à¤ªà¤¹à¤²à¥ à¤¬à¤¾à¤° à¤¹à¥ à¤°à¤¹à¥ à¤¹à¥à¤ à¤¯à¥ 10 à¤à¥à¤à¥à¤," /></p>
<h2>ये 10 चीजें,</h2>
<p><strong>आजादी के बाद पहली बार ऐसा योग</strong></p>
<p>ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कुंभ में कुछ ऐसा योग बना है जो आजादी के बाद से अब तक इससे पहले कभी नहीं बना। उनका कहना है कि 71 सालों के बाद कुंभ में इस बार महोदय योग जैसा दुर्लभ संयोग बना है। इस दिन श्रवण नक्षत्र, व्यतिपात योग, सर्वार्थसिद्धि योग और शुरुआती दिन सोमवार होने से इस दिन महोदय योग बन रहा है। इस लिए इस दिन के शाही स्नान को काफी खास माना जा रहा है।</p>
<p><strong>यूनेस्को ने सांस्कृतिक धरोहरों में किया शामिल</strong></p>
<p>इस आयोजन के आस्था, विश्वास और विश्व भर में फैली इसकी लोकप्रियता को देखते हुए वैश्विक संगठन यूनेस्को ने इसे विश्व की सांसकृतिक धरोहरों में शामिल कर लिया है। यही कारण है कि केंद्र और राज्य सरकार ने इस आयोजन की भव्यता को दुनियाभर में दिखाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।</p>
<p><strong>हवाई मार्ग से जोड़ा प्रयागराज</strong></p>
<p>इतिहास गवाह है कि कुंभ मेले के विहंगम आयोजन का हिस्सा बनने के लिए देश-दुनियाभर से लोग आते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यातायात सुविधा का भी बेहद सुचारु इस्तेमाल किया है। बताया जा रहा है कि प्रयागराज को देश के 14 शहरों से सीधे हवाई मार्ग से जोड़ा है। वहीं कुंभ मेले में मार्गों पर महापुरुषों के नाम पर गेटों का निर्माण किया गया है।</p>
<p><strong>सभी रास्तों पर होगी सुरक्षा</strong></p>
<p>सुविधा और सुरक्षा का ऐसा इस्तेमाल किया गया है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। इस बार कुंभ में में करीब 5000 अस्थायी शौचालय बनाए गए हैं जो पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक है। करीब 5 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए लगभग सभी मार्गों पर कड़े सुरक्षा के इंतजामात किए गए हैं।</p>
<p><strong>सभी गांव को मिला न्योता</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में आयोजित कुंभ मेला को खासमखास बनाने के लिए योगी सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसके लिए राज्य सरकार ने देश के लगभग हर गांव को न्योता भेजा है इसके अलावा सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को खासतौर पर व्यक्तिगत न्योता भेजा है।</p>
<p><strong>अबतक का सबसे बड़ा पार्किंग स्थल</strong></p>
<p>एक अन्य मामले में कुंभ 2019 ने एक रिकॉर्ड कायम किया है। इस बार अब तक का सबसे बड़ा पार्किंग स्थल का निर्माण किया गया है। करीब 6 लाख वाहनों की पार्किंग के लिए लगभग 1193 हेक्टेयर जमीन पर 120 पार्किंग स्थल बनाए गए हैं।</p>
<p><strong>संत करने जा रहे हैं ये नई परंपरा शरू</strong></p>
<p>इस कुंभ की खास बात ये है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब यहां जुटे साधु- संतों नेदेहदान की घोषणा कर इस नई परंपरा की शुरुआत की है। उन्होंने कहा है कि वे चिकित्सा विज्ञान के लिए अपना देहदान करेंगे जिससे मानवता का कल्याण हो सके।</p>
<p><strong>किन्नर अखाड़े की निकाली गई पेशवाई</strong></p>
<p>बता दें कि इससे पहले 13 अखाड़ों को ही पेशवाई का अधिकार था जिसमें किन्नर नहीं शामिल थे, लेकिन ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि इस बार किन्नर अखाड़ों की भी पेशवाई निकाली गई है। किन्नर अखाड़े को जूना अखाड़े में निकाला गया है जिसकी महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी हैं।</p>
<p><strong>कुंभ गान किया जाएगा तैयार</strong></p>
<p>कुंभ की भव्य गाथा को दुनियाभर में पहुंचाने के लिए इस बार पहली बार एक कुंभ गान तैयार किया जाएगा। इस गाने के माध्यम से भारतीय संसृक्ति, कुंभ का इतिहास, इसकी महत्ता को बताने की कोशिश की जाएगी।</p>
<p><strong>अत्याधुनिक कुंभ संग्रहालय बनेगा</strong></p>
<p>कुंभ आयोजन को दुनियाभर तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने एक अत्याधुनिक संग्रहालय बनाने की कवायद शुरू की है। इसके माध्यम से डिजिटल स्क्रीन पर कुंभ की ऐतिहासिक विशेषता और इसका धार्मिक महत्व को तस्वीरों और वीडियोज के माध्यम से दिखाया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>मकसद है ड्यूटी न जाना, मांसाहारी होना तो सिर्फ बहाना</title>
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		<pubDate>Wed, 03 Oct 2018 16:19:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विजय प्रकाश मौर्य लखनऊ। 2019 में प्रयागराज में लगने वाले कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद जिला प्रशासन ने फैसला किया था कि मेले में उन्हीं पुलिसवालों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो मांसाहारी न हों, शराब व धूम्रपान का सेवन नहीं करते हों और मृदुभाषी भी ... <a title="मकसद है ड्यूटी न जाना, मांसाहारी होना तो सिर्फ बहाना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/motive-is-not-to-go-to-duty-to-be-non-vegetarian-only-pretend-news/" aria-label="Read more about मकसद है ड्यूटी न जाना, मांसाहारी होना तो सिर्फ बहाना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विजय प्रकाश मौर्य</strong></p>
<p>लखनऊ। 2019 में प्रयागराज में लगने वाले कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद जिला प्रशासन ने फैसला किया था कि मेले में उन्हीं पुलिसवालों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो मांसाहारी न हों, शराब व धूम्रपान का सेवन नहीं करते हों और मृदुभाषी भी हों। इतना ही नहीं विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले में ड्यूटी करने वाले इन पुलिसवालों का इंटरव्यू एसएसपी लेने को कहा गया है और उन्हें अच्छे चरित्र का प्रमाण पत्र भी देने का निर्देश है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://static.langimg.com/thumb/msid-65988267,width-400,resizemode-4/-.jpg" alt="Image result for à¤à¥à¤®à¥à¤­ à¤®à¥à¤ à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸ à¤¤à¥à¤¨à¤¾à¤¤" width="824" height="616" /></p>
<p><strong>जानकार सूत्रों का कहना है </strong></p>
<p>इस फरमान के बाद अनेक पुलिसकर्मियों ने कुंभ ड्यूटी से बचने के लिए एक नया तरीका ढूंढ लिया है। अधिकांश सिपाही मांसाहार का सेवन करने लगे हैं और मदिरापान भी करने लगे हैं ताकि उन्हें कुंभ मेला ड्यूटी में न भेजा सके। इसके लिए वे खुद को मांसाहारी होने का लिखित प्रमाण भी दे रहे हैं। पुलिसकॢमयों में आए इस बदलाव से बड़े अफ़सर हैरान हैं। आपको बता दें कि डीआईजी कुंभ केपी सिंह ने कुछ दिन पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि शाहजहांपुर, पीलीभीत, बरेली और बदायूं के साथ अन्य जिलों के एसएसपी को निर्देश दिया गया है कि वे उन पुलिसकर्मियों के बारे में रिपोर्ट भेजें जो शाकाहारी हों तथा जिनका आचार व्यवहार सही हो।</p>
<p><img decoding="async" src="http://sth.india.com/hindi/sites/default/files/kumbh.jpg" alt="Image result for à¤à¥à¤®à¥à¤­ à¤®à¥à¤ à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤¸ à¤¤à¥à¤¨à¤¾à¤¤" /></p>
<p><strong>ड्यूटी के संबंध में डीजीपी के ये हैं निर्देश</strong></p>
<p>डीजीपी के निर्देश के मुताबिक, 35 वर्ष की उम्र से अधिक के सिपाही, 40 वर्ष से अधिक के दीवान और 45 वर्ष की से अधिक के सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर की नहीं लगेगी ड्यूटी। मूलरूप से इलाहाबाद जिले के रहने वाले पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ पुलिसकर्मियों की ही ड्यूटी लगाई जाएगी। कुंभ मेला, इलाहाबाद जिला और जीआरपी में ड्यूटी लगेगी। मदिरापान करने वाले और मांसाहार करने वाले पुलिस वालों की भी ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। निष्ठावान, उत्तम चाल, चरित्र और मृदुभाषी पुलिसकर्मी ही ड्यूटी में भेजे जाएंगे।</p>
<p><strong>तीन चरणों में पुलिसकर्मियों की लगेगी ड्यूटी</strong></p>
<p>मेले के लिए दूसरे जिलों से तीन चरणों में पुलिस वाले इलाहाबाद भेजे जाएंगे। पहले चरण में की ड्यूटी 25 सितंबर से शुरू हो जाएगी। दूसरे चरण की ड्यूटी 15 अक्टूबर से तथा तीसरे चरण की ड्यूटी 15 नवंबर से शुरू होगी।</p>
<p>पहला चरण : कुंभ मेला के लिए पांच उप निरीक्षक, चार दीवान, चार दीवान, 53 सिपाही, चार महिला सिपाही की ड्यूटी लगाई जाएगी।इलाहाबाद जिले के लिए एक इंस्पेक्टर, दो उप निरीक्षक, दो दीवान, 15 सिपाही और नौ महिला सिपाही तैनात किये जायेंगे।इलाहाबाद जीआरपी के लिए एक उप निरीक्षक, दो दीवान, 25 सिपाही और दो महिला सिपाही तैनात किये जायेंगे।</p>
<p><strong>दूसरे चरण :</strong> कुंभ मेला के लिए एक इंस्पेक्टर, 13 उप निरीक्षक, 11 दीवान, 136 सिपाही, एक महिला उप निरीक्षक, एक महिला दीवान और नौ महिला सिपाही की ड्यूटी लगेगी। इलाहाबाद जिले के लिए पांच उप निरीक्षक, पांच दीवान, 40 सिपाही, नौ महिला सिपाही तैनात होंगे। इलाहाबाद जीआरपी के लिए तीन उप निरीक्षक, पांच दीवान, 59 सिपाही, दो महिला सिपाही तैनात किये जायेंगे।</p>
<p><strong>तृतीय चरण:</strong> कुंभ मेला के लिए एक इंस्पेक्टर, 16 उप निरीक्षक, 13 दीवान, 170 सिपाही, एक महिला उप निरीक्षक, एक महिला दीवान और 10 महिला सिपाही की ड्यूटी लगेगी। इलाहाबाद जिले के लिए आठ उप निरीक्षक, आठ दीवान, 55 सिपाही, एक महिला सिपाही तैनात होंगे। इलाहाबाद जीआरपी के लिए तीन उप निरीक्षक, आठ दीवान, 70 सिपाही, एक महिला दीवान और दो महिला सिपाही तैनात किये जायेंगे।</p>
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