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	<title>most wanted terrorist Sajid Jatt &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>पहलगाम आतंकी हमले में NIA का सनसनीखेज खुलासा: &#8216;लंगड़ा&#8217; साजिद जट्ट निकला मास्टरमाइंड, स्थानीय मददगारों की एक चूक और चली गई 26 मासूमों की जान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 01:36:46 +0000</pubDate>
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<p data-path-to-node="1"> कश्मीर के शांत और खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले की तफ्तीश में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने सुरक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है। NIA की पूछताछ और कड़ियों को जोड़ने पर यह साफ हो गया है कि इस कायराना हमले को अंजाम देने वाले पाकिस्तानी आतंकियों को स्थानीय स्तर पर पनाह और मदद मिली थी। एजेंसी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा है कि अगर समय रहते सुरक्षा बलों या स्थानीय पुलिस को इन आतंकियों की मौजूदगी की सूचना दे दी जाती, तो बैसरन घाटी में मारे गए 26 निर्दोष पर्यटकों की जान आसानी से बचाई जा सकती थी। जांच में लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन टीआरएफ (TRF) का बेहद खूंखार चेहरा सामने आया है।</p>
<h3 data-path-to-node="3">आधी रात को झोपड़ी में कटी रात, रोटी-सब्जी के साथ पतीला-करछी भी ले गए आतंकी</h3>
<p data-path-to-node="4">NIA की चार्जशीट और चश्मदीदों के बयानों से जो टाइमलाइन सामने आई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। हमले की साजिश में शामिल तीनों पाकिस्तानी आतंकी- फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी हमले से ठीक एक दिन पहले यानी 21 अप्रैल को ही पहलगाम इलाके में पैठ बना चुके थे। जांच में सामने आया कि इन हथियारों से लैस आतंकियों ने स्थानीय निवासी बशीर अहमद और परवेज से संपर्क साधा था। बशीर अहमद ने NIA के सामने कबूल किया है कि 21 अप्रैल को जब ये तीनों खतरनाक आतंकी उससे मिले, तो वे बेहद थके और प्यासे लग रहे थे। वे आपस में पंजाबी लहजे वाली उर्दू में बात कर रहे थे, जिससे बशीर तुरंत ताड़ गया कि ये सरहद पार से आए आतंकवादी हैं।</p>
<p data-path-to-node="5">बशीर इन आतंकियों को चकमा देने या पुलिस को बताने के बजाय चुपचाप इशारे से परवेज की झोपड़ी पर ले गया और उसके परिवार को मुंह बंद रखने को कहा। इन आतंकियों ने करीब पांच घंटे तक उस झोपड़ी में आराम किया। इस दौरान परवेज और बशीर ने उन्हें पानी, चाय और खाना परोसा। इंसानियत के नाम पर ली गई इस मदद के बदले आतंकियों ने झोपड़ी में बैठकर अमरनाथ यात्रा का रूट, पहलगाम में सेना की तैनाती, सुरक्षा बलों के कैंप और उनके आने-जाने के समय (मूवमेंट) की एक-एक खुफिया जानकारी बटोरी। रात करीब 10 बजे जब आतंकी वहां से निकले, तो वे अपने साथ आगे के सफर के लिए बनी हुई रोटी-सब्जी, मसाले और यहां तक कि खाना पकाने के लिए पतीला और करछी तक समेट ले गए। इसके एवज में आतंकियों ने बशीर और परवेज को 3 हजार रुपये नकद दिए थे।</p>
<h3 data-path-to-node="6">अगले दिन पार्क के बाहर फिर दिखे, पर गाइड बने मददगारों ने साधी चुप्पी</h3>
<p data-path-to-node="7">जांच में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला मोड़ 22 अप्रैल को आया, जो कि हमले का दिन था। बशीर और परवेज ने बैसरन पार्क के बाहर उन्हीं तीनों आतंकियों को दोबारा घूमते हुए देखा था। उस वक्त ये दोनों स्थानीय लोग कुछ पर्यटकों को गाइड बनकर इलाके की सैर करा रहे थे। आतंकियों को दोबारा देखकर दोनों के कान तो खड़े हुए, लेकिन उन्होंने खौफ में आकर या जानबूझकर पुलिस या किसी सुरक्षा एजेंसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।</p>
<p data-path-to-node="8">इस चुप्पी की कीमत चंद मिनटों बाद ही देश को चुकानी पड़ी। झोपड़ी से निकले उन्हीं आतंकियों ने बैसरन घाटी में घूम रहे निहत्थे पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिससे चीख-पुकार मच गई और 26 मासूम लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। खूनखराबा होने के बाद बशीर और परवेज डर के मारे सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए थे। एनआईए अब इस बात की कड़ाई से तहकीकात कर रही है कि यह मदद सिर्फ जान के डर से दी गई थी या घाटी में आतंकियों का कोई बड़ा स्लीपर सेल नेटवर्क इनके पीछे काम कर रहा था।</p>
<h3 data-path-to-node="9">कौन है &#8216;लंगड़ा&#8217; आतंकी साजिद जट्ट, जिसने पाकिस्तान में बैठकर रची खूनी साजिश?</h3>
<p data-path-to-node="10">पहलगाम हमले की इस पूरी पटकथा को सरहद पार पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर लिखने वाले मुख्य साजिशकर्ता की पहचान लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ के रूप में हुई है, जिसे NIA ने अपनी चार्जशीट में आरोपी नंबर-1 बनाया है। जांच के दौरान साजिद की एक तस्वीर जब कश्मीर में रह रहे उसके सगे बेटे को दिखाई गई, तो उसने तस्दीक की कि यह फोटो उसके पिता की ही है। दरअसल, एक मुठभेड़ के दौरान साजिद जट्ट के पैर में गोली लगी थी, जिसके बाद डॉक्टरों को उसकी एक टांग काटनी पड़ी थी। तब से वह प्रोस्थेटिक लिंब (नकली टांग) के सहारे चलता है, इसीलिए आतंकी गलियारों में उसका कोडनेम &#8216;लंगड़ा&#8217; पड़ा।</p>
<p data-path-to-node="11">साजिद जट्ट साल 2005 में भारत में अवैध घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर आया था। उसने कुलगाम सहित पूरे दक्षिण कश्मीर में रहकर कश्मीरी युवाओं का ब्रेनवॉश किया और लश्कर का एक तगड़ा ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क तैयार किया। इसी बीच उसने कश्मीर की स्थानीय महिला शब्बीरा से निकाह किया, जिससे उसका एक बेटा भी हुआ। बाद में वह अपनी पत्नी को लेकर पाकिस्तान भाग गया। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जब बौखलाए पाकिस्तान ने लश्कर के प्रॉक्सी संगठन &#8216;द रेजिस्टेंस फ्रंट&#8217; (TRF) का गठन किया, तो साजिद जट्ट को इसकी कमान सौंपी गई। वह पाकिस्तान से लगातार ड्रोन के जरिए कश्मीर में हथियार और ड्रग्स की खेप भेज रहा था। एनआईए ने इस मोस्ट वॉन्टेड आतंकी पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।</p>
<h3 data-path-to-node="12">पाकिस्तान के कराची और लाहौर से खरीदे गए थे फोन, TRF की खुली पोल</h3>
<p data-path-to-node="13">NIA की टेक्निकल और डिजिटल फॉरेंसिक जांच ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के झूठ का पूरी तरह पर्दाफाश कर दिया है। सुरक्षा बलों ने &#8216;ऑपरेशन महादेव&#8217; के दौरान जब इन तीनों हमलावर आतंकियों को मार गिराया, तो उनके पास से दो अत्याधुनिक मोबाइल फोन बरामद हुए। जब इन फोन्स का डेटा और आईएमईआई (IMEI) ट्रैक किया गया, तो पता चला कि एक फोन लाहौर के कोट लखपत इलाके की एक औद्योगिक इकाई के पते पर ऑनलाइन खरीदा गया था, जबकि दूसरा मोबाइल कराची के शाहरा-ए-फैसल के पते से रजिस्टर था। इससे साफ हो गया कि पाकिस्तान न सिर्फ आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा था, बल्कि उन्हें रियल-टाइम लोकेशन और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी मुहैया करा रहा था।</p>
<p data-path-to-node="14">यही नहीं, हमले के बाद दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए पाकिस्तान ने एक &#8216;फॉल्स फ्लैग&#8217; नैरेटिव भी बुना था। हमले के तुरंत बाद टीआरएफ ने अपने टेलीग्राम चैनल &#8216;Kashmir Fight&#8217; पर इस कत्लेआम की जिम्मेदारी लेकर जश्न मनाया। लेकिन जैसे ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने इस नरसंहार की वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा की, वैसे ही पाकिस्तान के इशारे पर TRF ने नया पैंतरा बदला और दावा किया कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था और इस हमले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, एनआईए की साइबर सेल ने जब इस टेलीग्राम चैनल का आईपी एड्रेस (IP Address) खंगाला, तो इसकी कमान पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा के बट्टाग्राम और रावलपिंडी से ऑपरेट होती पाई गई। भारत को बदनाम करने की पाकिस्तान की यह डिजिटल चाल भी अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।</p>
<p data-path-to-node="16">
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