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		<title>अखिलेश यादव की दोहरी राजनीति, UP में कांग्रेस तो दिल्ली में AAP, सपा में गठबंधन का दबाव</title>
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		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 04:00:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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<p>Seema Pal</p>



<p>Delhi Election 2025 : समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को छोड़कर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) का साथ क्यों चुना, यह सवाल दिल्ली के साथ-साथ यूपी की राजनीति में भी उठ रहा है। इंडिया गठबंधन से जुड़ने के बाद अखिलेश यादव ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से राजनीतिक संबंध स्थापित कर लिए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ा था और आगामी विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस के साथ ही चुनाव लड़ने का एलान किया है। लेकिन वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव अरविंद केजरीवाल को जिताने के लिए पसीना बहा रहे हैं। जिसके बाद राजनीतिक गलियारे में सपा और कांग्रेस के बीच मनमुटाव होने को लेकर चर्चाएं तेज होती जा रही हैं।</p>



<p>अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और दिल्ली में आम आदमी पार्टी को चुना, इसके पीछे कई राजनीतिक कारण हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कांग्रेस से मतभेद और गठबंधन की मुश्किलें</strong></h3>



<p>अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच लंबे समय से गठबंधन की चर्चा हो रही थी। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और SP का गठबंधन एक फ्लॉप हो चुका था, और उसके बाद से दोनों दलों के बीच संबंधों में तल्खी रही है। हालांकि, दोनों दलों ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की कोशिशें शुरू की थीं, लेकिन सीटों का बंटवारा और चुनावी रणनीतियों पर समझौता नहीं हो पाया। अखिलेश यादव ने महसूस किया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन में बहुत सी कठिनाइयाँ हैं, जिनसे बेहतर है कि वह एक नया राजनीतिक गठबंधन बनाएं।</p>



<p>कांग्रेस का आंतरिक असंतोष, नेतृत्व की कमजोरी और चुनावी रणनीति के संदर्भ में असमंजस ने अखिलेश को यह सोचने पर मजबूर किया कि कांग्रेस से गठबंधन करना उनके लिए राजनीतिक दृष्टि से सही नहीं रहेगा। कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन और अन्य राज्यों में असफल गठबंधनों ने भी अखिलेश को यह महसूस कराया कि इस पार्टी के साथ चुनावी सफलता की संभावना कम है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आम आदमी पार्टी का बढ़ता प्रभाव और दिल्ली में सफलता</strong></h3>



<p>अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है। AAP ने दिल्ली के चुनावों में तीन बार शानदार जीत हासिल की है, और इसके कार्यक्रम, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम ने आम जनता में एक मजबूत छवि बनाई है। अखिलेश यादव ने महसूस किया कि अगर वह AAP के साथ गठबंधन करते हैं, तो उसे दिल्ली में एक स्वच्छ, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का समर्थन मिलेगा, जो जनता के बीच सकारात्मक छवि बना सकता है।</p>



<p>केजरीवाल ने अपनी पार्टी के द्वारा दिल्ली में किए गए कामों को लेकर एक सशक्त और लोकप्रिय नेतृत्व पेश किया है, और उनकी नीति से समाजवादी पार्टी की कई प्राथमिकताएं मेल खाती थीं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता थी, और AAP की नीतियों ने इस दिशा में सकारात्मक दिशा दी थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव</strong></h3>



<p>अखिलेश यादव का यह कदम केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। उत्तर प्रदेश में भी AAP और SP के बीच गठबंधन से राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता था। दिल्ली के अलावा, उत्तर प्रदेश में भी AAP ने कुछ समय से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, और वहां से एक समृद्ध गठबंधन SP के लिए आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में फायदेमंद हो सकता था। उत्तर प्रदेश में एक मजबूत विपक्ष की आवश्यकता है, और अखिलेश यादव ने इस सहयोग से यह संदेश देने की कोशिश की कि वे प्रदेश की राजनीति में एक नये गठबंधन का नेतृत्व कर सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आर्थिक और सामाजिक नीतियों में समानता</strong></h3>



<p>Akhilesh Yadav और Kejriwal की नीतियां समाजवादी दृष्टिकोण से मेल खाती थीं, विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर। SP की प्राथमिकता हमेशा गरीबों और वंचित वर्गों की बेहतरी रही है, और AAP भी दिल्ली में इसी तरह के मुद्दों पर काम कर रही है। दिल्ली में केजरीवाल सरकार की योजनाओं ने आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे मुफ्त बिजली, पानी, और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार। यह वही मुद्दे थे, जिनके लिए अखिलेश यादव भी अपनी पार्टी की राजनीति में संघर्ष कर रहे थे, और AAP के साथ गठबंधन उन्हें इन मुद्दों पर और अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करता था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>केजरीवाल का “आप” की राष्ट्रीय स्थिति में विस्तार</strong></h3>



<p>AAP ने 2020 में दिल्ली में एक बार फिर शानदार जीत हासिल की थी, और अब उनकी पार्टी का ध्यान राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने पर था। केजरीवाल ने दिल्ली में अपनी पार्टी का राजनीतिक आधार मज़बूत किया था और अब वे इसे अन्य राज्यों में भी फैलाना चाहते थे। SP के साथ गठबंधन करने से AAP को उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में अपनी राजनीतिक पैठ बढ़ाने का मौका मिल सकता था। इसके अलावा, AAP के नेताओं ने हमेशा यह दावा किया है कि उनकी पार्टी एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण पेश करती है, जो पारंपरिक पार्टियों से अलग है, और अखिलेश यादव ने इस संदेश को सहमति दी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>विरोधी दलों से तालमेल और 2024 के लोकसभा चुनाव</strong></h3>



<p>अखिलेश यादव का यह कदम 2024 के लोकसभा चुनावों की दिशा में एक रणनीति भी हो सकती है। समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही मुख्य विरोधी हैं। ऐसे में, AAP के साथ गठबंधन से उत्तर प्रदेश में एक नया राजनीतिक समीकरण बन सकता था, जिससे भाजपा को चुनौती दी जा सकती थी।</p>



<p>अखिलेश यादव का कांग्रेस को छोड़कर अरविंद केजरीवाल की AAP का साथ चुनना एक रणनीतिक निर्णय था, जो उनके राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। इसमें एक ओर जहां उन्होंने कांग्रेस की कमजोरी को ध्यान में रखा, वहीं दूसरी ओर AAP के साथ गठबंधन से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त विपक्ष की भूमिका में आने का अवसर मिला।</p>
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