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		<title>महाकुंभ में नहाने लायक नहीं है संगम का पानी, सामने आई ये वजह, CPCB ने NGT को दी रिपोर्ट</title>
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		<pubDate>Tue, 18 Feb 2025 10:35:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली।&#160;केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की एक रिपोर्ट सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सैंपी गई है। उस रिपोर्ट में सूचित किया गया है कि, प्रयागराज में महाकुंभ के समय कई सारे स्थानों पर अपशिष्ट जल का स्तर स्नान के लिए अच्छा नहीं है। सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, अपशिष्ट जल संदूषण के ... <a title="महाकुंभ में नहाने लायक नहीं है संगम का पानी, सामने आई ये वजह, CPCB ने NGT को दी रिपोर्ट" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/" aria-label="Read more about महाकुंभ में नहाने लायक नहीं है संगम का पानी, सामने आई ये वजह, CPCB ने NGT को दी रिपोर्ट">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="720" height="405" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-1.jpg" alt="" class="wp-image-482583" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-1.jpg 720w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-1-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-1-150x84.jpg 150w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नई दिल्ली।&nbsp;</strong>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की एक रिपोर्ट सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सैंपी गई है। उस रिपोर्ट में सूचित किया गया है कि, प्रयागराज में महाकुंभ के समय कई सारे स्थानों पर अपशिष्ट जल का स्तर स्नान के लिए अच्छा नहीं है। सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, अपशिष्ट जल संदूषण के सूचक &#8216;फेकल कोलीफॉर्म&#8217; की सीमा ज्यादा बताई गई है। इसकी स्वीकार्य सीमा 2500 यूनिट प्रति 100 एमएल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पर एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में अपशिष्ट जल के बहाव को रोकने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। पीठ का कहना है कि, सीपीसीबी ने 3 फरवरी को एक रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कुछ गैर-अनुपालन या उल्लंघनो ंकी तरफ इशारा किया गया था।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रिपोर्ट में क्या कहा गया है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्ट में कहा गया है कि, नदी के पानी की गुणवत्ता अलग अवसरों पर सभी निगरानी स्थानों पर भी अपशिष्ट जल &#8216;फेकल कोलीफॉर्म&#8217; के संबंधित स्नान करने के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। प्रयागराज में महाकुंभ के समय बड़ी संख्या में लोग नदी में नहाने करते हैं, जिससे अपशिष्ट जल की सांद्रता में बढ़ोतरी होती है। पीठ ने आगे कहा है कि, उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने समग्र कार्रवाई रिपोर्ट को दाखिल करने के लिए एनजीटी के पूर्व निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। एनजीटी ने आगे कहा कि, यूपीपीसीबी ने सिर्फ कुछ जल परीक्षण रिपोर्ट के साथ एक पत्र दाखिल किया था।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एनजीटी की तरफ से कितने दिन का मिला समय?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">पीठ ने कहा है कि, यूपीपीसीबी के केंद्रीय प्रयोगशाला के प्रभारी की तरफ से भेजे गए 28 जनवरी के पत्र के साथ ही संलग्न दस्तावेजों की समीक्षा करने पर भी ये पता चलता है। अलग-अलग स्थानों पर अपशिष्ट जल का उच्च स्तर भी पाया गया है।</p>
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		<title>एक नजर इधर भी : NGT ने कोका और पेप्सिको पर 25 करोड़ रुपए का लगाया जुर्माना</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Mar 2022 12:17:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कोका कोला और पेप्सिको पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। दोनों कंपनियों पर यूपी में बॉटलिंग प्लांट के लिए भूजल का अवैध रूप से दोहन करने का आरोप है। इसी के चलते NGT ने पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में जुर्माना लगाया है। NGT ने फैसला सुनाया कि ... <a title="एक नजर इधर भी : NGT ने कोका और पेप्सिको पर 25 करोड़ रुपए का लगाया जुर्माना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/have-a-look-here-too-ngt-fines-coca-and-pepsico-rs-25-crore-news-in-hindi/" aria-label="Read more about एक नजर इधर भी : NGT ने कोका और पेप्सिको पर 25 करोड़ रुपए का लगाया जुर्माना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="749" height="506" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/03/ngt_1539417002.jpeg" alt="" class="wp-image-175857" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ।</strong> नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कोका कोला और पेप्सिको पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। दोनों कंपनियों पर यूपी में बॉटलिंग प्लांट के लिए भूजल का अवैध रूप से दोहन करने का आरोप है। इसी के चलते NGT ने पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में जुर्माना लगाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">NGT ने फैसला सुनाया कि कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट CGWA (केंद्रीय भूजल प्राधिकरण) के पर्यावरण कानून का उल्लंघन कर रहे थे। यूपी के तीन प्लांट भूजल निकालने के लिए जरूरी NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के बिना काम कर रहे थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/03/coco.jpg.jpeg" alt="" class="wp-image-175859" width="695" height="394" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">फैसले में कहा गया, ‘हमारा विचार है कि PP (परियोजना प्रस्तावक) कम से कम CGWA द्वारा जारी NOC की समाप्ति के बाद भूजल की अवैध निकासी के लिए जिम्मेदार हैं। वे बिना किसी अधिकार के भूजल दोहन करते रहे। इसके अलावा, वे NOC की सबसे महत्वपूर्ण शर्त, यानी पानी के पुनर्भरण का पालन करने में विफल रहे। इसके कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्यावरणीय मुआवजे का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी हैं।’</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>NGT ने की CGWA की कड़ी आलोचना</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">कोरम में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल (अध्यक्ष), सुधीर अग्रवाल और बृजेश सेठी (न्यायिक सदस्य) और प्रोफेसर ए. सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) शामिल थे। NGT ने सरकारी नियामक CGWA की भी कड़ी आलोचना की। इसमें उसने कहा, ‘CGWA ने अपने तरीके से आगे बढ़ते हुए पूरी तरह से अवैध रूप से भूजल के बड़े पैमाने पर दोहन की अनुमति दी है। वह इसकी जवाबदेही से बच नहीं सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>NGT ने UPGWD को जवाबदेह ठहराया</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा NGT ने UPGWD (उत्तर प्रदेश भूजल विभाग) को भी जवाबदेह ठहराया। NGT ने कहा कि निकाय ने ऐसा करने के अधिकार क्षेत्र के बिना भूजल निकालने के लिए कंपनियों को अधिकार प्रदान करने का प्रयास किया था। एनजीटी ने कहा, ‘उन्होंने भी योगदान दिया है। भूजल के अवैध दोहन के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं। जिसके लिए इसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।’</p>



<p class="wp-block-paragraph">NGT ने ग्रेटर नोएडा स्थित मून बेवरेजेज लिमिटेड पर 1.85 करोड़, मून बेवरेज लिमिटेड की साहिबाबाद इकाई पर 13.24 करोड़ और वरुण बेवरेजेज लिमिटेड की ग्रेटर नोएडा इकाई पर 9.71 करोड़ का जुर्माना लगाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रोहित कुमार टुटेजा ने दलील दी। प्रतिवादियों का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता एके प्रसाद, प्रदीप मिश्रा, दलीप ध्यानी, बालेंदु शेखर, राज कुमार, पूजा कालरा, संजय उपाध्याय, आर. जवाहरलाल ने किया।</p>
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		<title>मुंबई: आरे में 800 से ज्यादा पेड़ कटने पर मचा बवाल, धारा 144 लागू </title>
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		<pubDate>Sat, 05 Oct 2019 06:12:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुंबई । आरे कॉलोनी में शुक्रवार देर रात से पेड़ काटने का काम जारी है। जिसके बाद इसके विरोध में कई प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंच कर मेट्रो रेल साइट पर नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने आरे की तरफ जाने वाली सभी सड़कों को बंद कर दिया है। इलाके में शांतिव्यवस्था बनाने रखने के लिए धारा ... <a title="मुंबई: आरे में 800 से ज्यादा पेड़ कटने पर मचा बवाल, धारा 144 लागू " class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mumbai-more-than-800-trees-in-aare-created-a-ruckus-section-144-applied-news/" aria-label="Read more about मुंबई: आरे में 800 से ज्यादा पेड़ कटने पर मचा बवाल, धारा 144 लागू ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone  wp-image-35960" src="http://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/10/mumbai.jpg" alt="" width="1054" height="586" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/10/mumbai.jpg 570w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2019/10/mumbai-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 1054px) 100vw, 1054px" /></p>
<p>मुंबई । आरे कॉलोनी में शुक्रवार देर रात से पेड़ काटने का काम जारी है। जिसके बाद इसके विरोध में कई प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंच कर मेट्रो रेल साइट पर नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने आरे की तरफ जाने वाली सभी सड़कों को बंद कर दिया है। इलाके में शांतिव्यवस्था बनाने रखने के लिए धारा 144 लागू कर दी है।</p>
<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की आरे कॉलोनी को जंगल घोषित करने वाली सभी याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया था, जिसके बाद देर रात से ही पेड़ काटने का काम भी शुरू हो गया। मिली जानकारी के अनुसार अबतक 800 से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं। तो वहीं पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया है। इलाके में धारा 144 लगा दी है।</p>
<p>इस बवाल के बीच शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्होंने ट्वीट कर आरे जाने की बात कही थी. दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, &#8220;मुझे पुलिस ने जबरन निकाला। मैंने कोई कानून नहीं तोड़ा।&#8221;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">I have been forcibly evicted by the cops and I wasn’t even breaking the law! The cops in the car wont even tell me where I am being taken &#8230; this is insane <a href="https://twitter.com/MumbaiPolice?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">@MumbaiPolice</a></p>
<p>&mdash; Priyanka Chaturvedi<img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f1ee-1f1f3.png" alt="🇮🇳" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> (@priyankac19) <a href="https://twitter.com/priyankac19/status/1180352038993088512?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">October 5, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>इस बीच शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने ट्वीट किया, उन्होंने कहा कि अगर इस तरह से जंगल काटे जा रहे हैं तो प्लास्टिक प्रदूषण पर बोलने का कोई फायदा नहीं है।</p>
<p>इसके अलावा स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने भी ट्वीट कर राज्य सरकार व केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि &#8220;ऐसे समय में जब जलवायु संकट साफ नजर आ रहा है। महाराष्ट्र सरकार पेड़ गिराने पर जोर दे रही है। यह बहुत ही चिंताजनक बात है।&#8221;</p>
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		<title>बड़ा खुलासा : 3 साल में माँ गंगा का जल हुआ और खराब, अब क्या जवाब देगी सरकार ?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/report-reveal-water-ganga-worse-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Mar 2019 09:26:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[बताते चले भले ही केंद्र सरकार करोड़ों रुपये की स्कीम चला रही हो, लेकिन गंगा सफाई के प्रयास सफल होते नजर नहीं आ रहे हैं। बता दे हमारे भारत देश में स्वच्छ जल के सबसे बड़े और प्रमुख स्रोत गंगा की जितनी दुर्गति और उपेक्षा हुई है, वह कुशासन की सबसे बड़ी मिसाल है. यह महज ... <a title="बड़ा खुलासा : 3 साल में माँ गंगा का जल हुआ और खराब, अब क्या जवाब देगी सरकार ?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/report-reveal-water-ganga-worse-news/" aria-label="Read more about बड़ा खुलासा : 3 साल में माँ गंगा का जल हुआ और खराब, अब क्या जवाब देगी सरकार ?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://images.jansatta.com/2016/01/ganga-620x400.jpg?w=680&amp;h=439" /></p>
<p>बताते चले भले ही केंद्र सरकार करोड़ों रुपये की स्कीम चला रही हो, लेकिन गंगा सफाई के प्रयास सफल होते नजर नहीं आ रहे हैं। बता दे हमारे भारत देश में स्वच्छ जल के सबसे बड़े और प्रमुख स्रोत गंगा की जितनी दुर्गति और उपेक्षा हुई है, वह कुशासन की सबसे बड़ी मिसाल है. यह महज संयोग नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असंभव को संभव बनाने की अपनी योग्यता दिखाने के लिए इस महान नदी को चुना है. गंगा की सफाई और अविरलता को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) गंभीर है।</p>
<p>उसने केंद्र से स्पष्ट कहा है कि बगैर उसकी अनुमति के उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार को कौड़ी भी मुहैया न कराएं। इतना ही नहीं, एनजीटी ने केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय पर भी काफी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि गंगा की सफाई पर उसके पास सुंदर-सुंदर नारों के सिवाय कुछ भी नहीं है। एनजीटी ने यहां तक कहा है कि गंगा पर सरकार का काम उसके नारों से उलट रहा है।</p>
<p>यह एक अध्यन में पता चला है कि गंगा की सफाई सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। गंगा की सफाई के लिए सरकार की 20,000 करोड़ रुपये की &#8216;नमामि गंगे&#8217; स्कीम अपने लक्ष्य को पाने में विफल होती दिख रही है, साफ तो दूर बल्कि गंगा का जल और मेला हो गया है।</p>
<p>शहर के संकट मोचन फाउंडेशन के जुटाए सैंपल के विश्लेषण से तो यही लगता है, कि गंगा के पानी में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) में भारी बढ़ोतरी हुई है, पानी की गुणवत्ता को नापने के लिए ये दोनों प्रमुख पैमाने हैं। सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट को मई 2015 में शुरू किया था। तब प्रधानमंत्री ने गंगा को निर्मल बनाने के लिए 2019 की समय सीमा तय की थी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बीते साल इस समयसीमा को बढ़ाकर मार्च 2020 किया था।</p>
<p>शहर का एनजीओ SMF गंगा एक्शन प्लान के लॉन्च होने से इसके पानी की गुणवत्ता पर नजर रख रहा है। गंगा एक्शन प्लान 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने लॉन्&#x200d;च किया था, एसएमएफ की अपनी लेबोरेटरी है, यहां संगठन नियमित आधार पर गंगा जल के सैंपल का परीक्षण करता है।</p>
<p><strong>एसएमएफ ने तुलसी घाट से जो सैंपल जुटाया है</strong></p>
<p>उसमें गंगा की सेहत काफी बिगड़ी दिखती है, यहां जल प्रदूषण काफी ज्यादा है। एसएमएफ के प्रेसिडेंट और आईआईटी बीएचयू में प्रोफेसर वीएन मिश्रा ने कहा, साल 2016-फरवरी 2019 के बीच बीओडी लेवल 46.8-54mg/l से बढ़कर 66-78mg/l हो गया है. डिजॉल्व्&#x200d;ड ऑक्सीजन (DO) 6mg/l या इससे ज्यादा होना चाहिए. इस अवधि में इसका स्तर 2.4mg/l से घटकर 1.4mg/l रह गया है.&#8221; कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया की आबादी भी पानी में बढ़ गई है।</p>
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