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	<title>Promises &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>फ्रीबीज मामले पर SC में आज सुनवाई, याचिकाकर्ता की मांग- मुफ्त योजनाओं के वादों पर रोक लगे</title>
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		<pubDate>Wed, 08 Nov 2023 06:19:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में फ्रीबीज मुद्दों (चुनाव से पहले की जाने वाली घोषणाओं) पर दायर याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी। इससे पहले कोर्ट ने 6 अक्टूबर को केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत ने इनसे 4 हफ्ते में जवाब मांगा ... <a title="फ्रीबीज मामले पर SC में आज सुनवाई, याचिकाकर्ता की मांग- मुफ्त योजनाओं के वादों पर रोक लगे" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/on-freebies-case-today-in-sc-petitioners-demand-promises-of-free-schemes-should-be-banned-news-in-hindi/" aria-label="Read more about फ्रीबीज मामले पर SC में आज सुनवाई, याचिकाकर्ता की मांग- मुफ्त योजनाओं के वादों पर रोक लगे">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-116.png" alt="" class="wp-image-420139" width="843" height="632" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में फ्रीबीज मुद्दों (चुनाव से पहले की जाने वाली घोषणाओं) पर दायर याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी। इससे पहले कोर्ट ने 6 अक्टूबर को केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत ने इनसे 4 हफ्ते में जवाब मांगा था। कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया है। फ्रीबीज मुद्दे पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच सुनवाई कर रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">याचिकाकर्ता की मांग- मुफ्त उपहार के वादों पर रोक लगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने नई जनहित याचिका को पहले से चल रही अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। सभी मामलों की सुनवाई एकसाथ हो रही। नई याचिका अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। कोर्ट में उनकी तरफ से वरिंदर कुमार शर्मा पेश हुए। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले सरकार का लोगों को पैसे बांटना प्रताड़ित करने जैसा है। यह हर बार होता है और भार टैक्स चुकाने वाली जनता पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका में भट्टूलाल जैन की याचिका को भी शामिल करने को कहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनवरी 2022 में BJP नेता अश्विनी उपाध्याय फ्रीबीज के खिलाफ एक जनहित याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अपनी याचिका में उपाध्याय ने चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों के वोटर्स से फ्रीबीज या मुफ्त उपहार के वादों पर रोक लगाने की अपील की। इसमें मांग की गई है कि चुनाव आयोग को ऐसी पार्टियां की मान्यता रद्द करनी चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">फ्रीबीज मामले की सुनवाई पूर्व चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुआई में तीन सदस्यीय बेंच ने अगस्त 2022 में शुरू की थी। इस बेंच में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली भी थे। बाद में चीफ जस्टिस यूयू ललित ने सुनवाई की और अब CJI डीवाई चंद्रचूड़ मामले की सुनवाई कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">3 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्रीबीज मुद्दे पर फैसले के लिए एक समिति गठित की जानी चाहिए। इसमें केंद्र, राज्य सरकारें, नीति आयोग, फाइनेंस कमीशन, चुनाव आयोग, RBI, CAG और राजनीतिक पार्टियां शामिल हों। 11 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#8216;गरीबों का पेट भरने की जरूरत है, लेकिन लोगों की भलाई के कामों को संतुलित रखने की जरूरत है, क्योंकि फ्रीबीज की वजह से इकोनॉमी पैसे गंवा रही है। हम इस बात से सहमत हैं कि फ्रीबीज और वेलफेयर के बीच अंतर है।’</p>



<p class="wp-block-paragraph">17 अगस्त 2022: कोर्ट ने कहा, &#8216;कुछ लोगों का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को वोटर्स से वादे करने से नहीं रोका जा सकता…अब ये तय करना होगा कि फ्रीबीज क्या है। क्या सबके लिए हेल्थकेयर, पीने के पानी की सुविधा…मनरेगा जैसी योजनाएं, जो जीवन को बेहतर बनाती हैं, क्या उन्हें फ्रीबीज माना जा सकता है?&#8217; कोर्ट ने इस मामले के सभी पक्षों से अपनी राय देने को कहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">23 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि आप सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाते? राजनीतिक दलों को ही इस पर सबकुछ तय करना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">26 अगस्त 2022: पूर्व सीजेआई एनवी रमना ने मामले को नई बेंच में रैफर कर दिया। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि कमेटी बनाई जा सकती है, लेकिन क्या कमेटी इसकी परिभाषा सही से तय कर पाएगी। रमना ने ये भी कहा था कि इस केस में विस्तृत सुनवाई की जरूरत है और इसे गंभीरता से लेना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1 नवंबर 2022: याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी कि, इस मामले को तीन जजों की बेंच के पास नहीं भेजा जाना चाहिए। हालांकि तत्कालीन CJI यूयू ललित ने उनकी मांग को ठुकरा दिया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">6 अक्टूबर 2023: CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने केंद्र, इलेक्शन कमीशन और राज्य को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि हाईकोर्ट में याचिका क्यों नहीं लगाई?</p>



<p class="wp-block-paragraph">चुनाव आयोग ने कहा था- फ्री स्कीम्स की परिभाषा आप ही तय करें</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान 11 अगस्त को चुनाव आयोग ने कहा था कि फ्रीबीज पर पार्टियां क्या पॉलिसी अपनाती हैं, उसे रेगुलेट करना चुनाव आयोग के अधिकार में नहीं है। चुनावों से पहले फ्रीबीज का वादा करना या चुनाव के बाद उसे देना राजनीतिक पार्टियों का नीतिगत फैसला होता है। इस बारे में नियम बनाए बिना कोई कार्रवाई करना चुनाव आयोग की शक्तियों का दुरुपयोग करना होगा। कोर्ट ही तय करे कि फ्री स्कीम्स क्या हैं और क्या नहीं। इसके बाद हम इसे लागू करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">MP-राजस्थान टैक्स कमाई का 35% हिस्सा फ्रीबीज पर खर्च करते हैं</p>



<p class="wp-block-paragraph">RBI की 31 मार्च 2023 तक की रिपोर्ट में सामने आया है कि मप्र, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य टैक्स की कुल कमाई का 35% तक हिस्सा फ्री की योजनाओं पर खर्च कर देते हैं। पंजाब 35.4% के साथ सूची में टॉप पर है। मप्र में यह हिस्सेदारी 28.8%, राजस्थान में 8.6% है। आंध्र अपनी आय का 30.3%, झारखंड 26.7% और बंगाल 23.8% तक फ्रीबीज के नाम कर देता है। केरल 0.1% हिस्सा फ्रीबीज को देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">किस तरह पड़ता है बजट घाटा बढ़ने का असर</p>



<p class="wp-block-paragraph">जब बजट घाटा बढ़ता है, तो राज्य ज्यादा कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में आय का बड़ा हिस्सा ब्याज अदायगी में जाता है। पंजाब, तमिलनाडु और बंगाल अपनी कमाई का 20% से ज्यादा इसमें देते हैं। मप्र 10% और हरियाणा 20% देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान, पंजाब, बंगाल में 35% ​हिस्सा लुभावनी योजनाओं में दे रहे</p>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब पर अपनी GDP का 48%, राजस्थान पर 40% और मप्र पर 29% तक कर्ज है, जबकि यह 20% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। मप्र, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, कर्नाटक, राजस्थान और छत्तीसगढ़ ने 7 साल में करीब 1.39 लाख करोड़ की फ्रीबीज दीं या घोषणाएं कीं। पंजाब का घाटा 46% बढ़ेगा। बिजली सब्सिडी 1 साल में 50% बढ़कर 20,200 करोड़ हुई। कर्नाटक चालू वित्त वर्ष में का घाटा 8.2% बढ़ा। यह और बढ़ेगा क्योंकि 5 गारंटी पूरी करने में सालाना 52,000 करोड़ खर्च होंगे।</p>
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		<title>सीतापुर : झूठे आश्वासन और वादों पर टिका है बिजली विभाग</title>
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		<pubDate>Sat, 02 Sep 2023 12:06:03 +0000</pubDate>
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<p class="wp-block-paragraph">सीतापुर। बार-बार झूठे आश्वाशन देने के बाद भी विद्युत विभाग उपकेंद्र की क्षमता वृद्धि नही कर सका। विकास खण्ड मछरेहटा के दर्जनों गांवों में विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को धरना प्रदर्शन से सम्बंधित ज्ञापन सौपा है। बताते चले कि मछरेहटा की ग्राम पंचायतें कस्बा, राठौरपुर, बहोरनपुर, बीहट बीरम, सकरारा, पैदापुर, सदिला, आदिलपुर, बरसंधिया समेत दर्जनों गांवों में विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण किसानों व उपभोक्ताओं को संकट का सामना करना पड़ रहा है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">इस समस्या से सम्बंधित एक वर्ष पूर्व क्षेत्र के दर्जनों ग्रामो के ग्रामीण किसान उपभोक्ता जब विद्युत उपकेंद्र का घेराव किये थे तब एसडीएम मिश्रिख, सीओ मिश्रिख, अधीक्षण अभियंता व एसडीओ ने जनता को आस्वस्थ किया था कि मात्र दो दिन में 10 एमबी का ट्रांसफार्मर रख दिया जाएगा परन्तु एक वर्ष होने को मछरेहटा क्षेत्र में न तो ट्रांसफार्मर बदला गया और न ही विद्युत आपूर्ति दे पा रहे है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस विषय से क्षुब्ध ग्रामीणों व किसानों ने समाधान दिवस में एसडीएम मिश्रिख को ज्ञापन सौपा। 21 जून से विद्युत उपकेंद्र मछरेहटा पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया था। उक्त प्रदर्शन में अधीक्षण अभियंता सीतापुर ने लिखित रूप में ग्रामीणों व किसानों को आश्वस्त कराया था कि आप लोग धरना समाप्त करें महज एक माह में ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा लेकिन डेढ़ साल होने के बावजूद भी विद्युत व्यवस्था सुदृड़ नही हो पाई है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">इस वास्ते क्षुब्ध ग्रामीणों व किसानों ने 10 एमवीए ट्रांसफार्मर लगवाने हेतु जिलाधिकारी, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता, एसडीएम को ज्ञापन सौप कर मांग की है कि सात दिनों के अंदर ट्रांसफार्मर लगवाया जाए अन्यथा 8 सितंबर से ग्रामीण व किसान शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन करेंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।</p>
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		<title>कुशीनगर: वादों से मुकरा कप्तानगंज चीनी मिल, अब डीएम के पाले में गेंद</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/kushinagar-kaptanganj-sugar-mill-reneges-on-promises-now-ball-in-dms-court-news-in-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Dec 2022 06:46:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[दैनिक भास्कर ब्यूरो पडरौना,कुशीनगर। जिले के कप्तानगंज चीनी मिल का रवैया गन्ना किसानों के बाद अब जिला प्रशासन पर भी भारी पड़ गया। डीएम रमेश रंजन व डीसीओ दिलीप सैनी के बीच मिल मालिक के बीच बीस दिनों पूर्व हुई बैठक में मिल मालिक ने जिला प्रशासन को वचन दिया था कि 15 दिसंबर तक ... <a title="कुशीनगर: वादों से मुकरा कप्तानगंज चीनी मिल, अब डीएम के पाले में गेंद" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/kushinagar-kaptanganj-sugar-mill-reneges-on-promises-now-ball-in-dms-court-news-in-hindi/" aria-label="Read more about कुशीनगर: वादों से मुकरा कप्तानगंज चीनी मिल, अब डीएम के पाले में गेंद">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1080" height="1146" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/12/dmm-1.gif" alt="" class="wp-image-301903" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/12/dmm-1.gif 1080w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/12/dmm-1-768x815.gif 768w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">दैनिक भास्कर ब्यूरो</p>



<p class="wp-block-paragraph">पडरौना,कुशीनगर। जिले के कप्तानगंज चीनी मिल का रवैया गन्ना किसानों के बाद अब जिला प्रशासन पर भी भारी पड़ गया। डीएम रमेश रंजन व डीसीओ दिलीप सैनी के बीच मिल मालिक के बीच बीस दिनों पूर्व हुई बैठक में मिल मालिक ने जिला प्रशासन को वचन दिया था कि 15 दिसंबर तक हर हाल में किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर देंगे। इस भरोसे को ब्रह्मवाक्य मानकर जिला प्रसाशन ने बकाया भुगतान के लिए 15 दिसंबर तक कि मियाद दे दी थी। अब जबकि यह मियाद खत्म हो चुकी है और चीनी अपने वायदे से मुकर चुका है, लिहाजा अब गेंद डीएम के पाले में आ गयी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गन्ना किसानों का कप्तानगंज चीनी मिल पर 42 करोड़ रुपये भुगतान का मामला</p>



<p class="wp-block-paragraph">उल्लेखनीय है बदले हालात में अब जो एक्शन लेना है, वह डीएम रमेश रंजन को ही लेना है। क्योंकि कप्तानगंज चीनी मिल को जो करना था, वह कर चुका है। बता दें कि पेराई सत्र 2021-22 में कप्तानगंज चीनी मिल ने लगभग तीन दर्जन गांवों के किसानों से गन्ना खरीदा था। जिससे चीनी उत्पादन, शीरा और खोइया की बिक्री से जितना धन अर्जित करना था। वह अर्जित कर लिया था। </p>



<p class="wp-block-paragraph">डीसीओ कितना बकाया गन्ना मूल्य खातों में गया, करा रहे आंकलन</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन किसानों से खरीदे गए गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया। हालांकि कुशीनगर सांसद विजय कुमार दुबे, तत्कालीन डीएम एस राजलिंगम ने किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए कई दौर की वार्ता भी की थी। यहां तक कि प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री व किसान आंदोलनों से राजनीति में अपना मुकाम हासिल करने वाले राधेश्याम सिंह ने भी जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार को आगाह किया था कि कप्तानगंज चीनी किसानों का बकाया गन्ना मूल्य हड़प कर भाग जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डीएम, डीसीओ व मिल मालिक के बीच द्विपक्षीय वार्ता निरर्थक</p>



<p class="wp-block-paragraph">लिहाजा समय रहते बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करा लिया जाए। लेकिन सरकारी तंत्र को भरोसा था कि चीनी मिल किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर देगी। लेकिन सबकी उम्मीदों का धता बताते हुए कप्तानगंज चीनी प्रबंधन मिल रातोंरात मिल बंदकर पलायित हो गया। इसके बाद तत्कालीन डीएम एस राजलिंगम वाराणसी डीएम के पद पर शासन द्वारा भेज दिए गए। जब रमेश रंजन ने डीएम का पदभार ग्रहण किया तो इनके संज्ञान में यह प्रकरण आया। किसानों की समस्या को गम्भीर मानते हुए डीएम शर8 रंजम ने कप्तानगंज मिल मालिक को बुलवाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिला गन्ना अधिकारी दिलीप सैनी की मौजूदगी में इस शर्त पर करार हुआ कि 165 दिसंबर तक हर हाल में बकाया 42 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। इस संबंध में जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार सैनी ने बताया कि यह सही है कि कप्तानगंज चीनी मिल ने 15 दिसंबर तक किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान देने का वायदा किया था। अब हम यह परीक्षण करा रहे हैं कि किसानों के खाते में बकाया गन्ना मूल्य गया है या नहीं। अगर किसानों के खातों में रुपये नहीं गए होंगे तो विधिक कार्रवाई की जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए हर संभव एक्शन लिए जाएंगे: डीएम</p>



<p class="wp-block-paragraph">पडरौना। किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के मसले पर डीएम रमेश रंजन ने कहा कि किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान दिलाने के जो भी संभव होगा एक्शन लिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि कप्तानगंज चीनी मिल ने खुद ही आग्रह कर 15 दिसंबर तक का समय मांगा था। अब स्थिति का अध्ययन कर कठोर कदम उठाए जाएंगे।</p>
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