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	<title>Reality Of Hell oddnews news hindi news &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>अगर आप भी कर रहे ये सारे काम, तो जाना पड़ सकता है सीधे नर्क में, मजबूत दिल वाले ही पढ़े&#8230;.</title>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://www.jagranimages.com/images/garuda-purana-main-image_2014_11_4_14425.jpg" alt="Related image" width="869" height="642" /></p>
<p>जिसका इस धरती पर जन्म हुआ है. उसे एक दिन दुनिया को अलविदा भी कहना है. चाहे वो इन्सान हो या जानवर. कई दुःख भोगने के बाद कई यातनाये झेलने के बाद हम सभी को इन्सान रूप की प्राप्ति होती है. इसे कैसे संभाल कर रखे . ऐसा कोई काम अपने जीवन में न करे जिससे  दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी हमे स्वर्ग की जगह नर्क झेलना पड़े  बताते चले.  शास्त्रों में ये बात कही गयी है. और भविष्य पुराण में माना गया है कि हर इंसान को उसके शरीर, मन व बातों से किए गए पापों को भोगना पड़ता है। उसमें भी कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें बड़ा पाप माना गया है। आइए जानते हैं पांच ऐसे ही महापापों के बारे में जिन्हें करने वालों को नर्क में सबसे ज्यादा यातनाएं झेलनी पड़ती है।</p>
<p>दुनिया में पाप और पुण्य का दौर चलता रहता है. लोग पाप को कम करने के लिए पुण्य का काम भी किया करते हैं. पुराने जमाने में ईसाई धर्म में 7 पापों को घोर पाप की सूची में रखा था ताकि मनुष्य ये पाप करे तो हमेशा के लिए दोषी ठहराया जा सके. इन सात महापापों को अंग्रेजी में सेवेन डेडली सिंस (Seven deadly sins) या कैपिटल वाइसेज (Capital vices) या कारडिनल सिंस (Cardinal sins) भी कहा जाता है.</p>
<p><strong>कौन जाता है नर्क</strong></p>
<p>ज्ञानी से ज्ञानी, आस्तिक से आस्तिक, नास्तिक से नास्तिक और बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति को भी नरक का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ज्ञान, विचार आदि से तय नहीं होता है कि आप अच्छे हैं या बुरे।</p>
<p>आपकी अच्छाई आपके नैतिक बल में छिपी होती है। आपकी अच्छाई यम और नियम का पालन करने में निहित है। अच्छे लोगों में ही होश का स्तर बढ़ता है और वे देवताओं की नजर में श्रेष्ठ बन जाते हैं। लाखों लोगों के सामने अच्छे होने से भी अच्छा है स्वयं के सामने अच्छा बनना।</p>
<p>धर्म, देवता और पितरों का अपमान करने वाले, पापी, मूर्छित और अधोगामी गति के व्यक्ति नरकों में जाते हैं। पापी आत्मा जीते जी तो नरक झेलती ही है, मरने के बाद भी उसके पाप अनुसार उसे अलग-अलग नरक में कुछ काल तक रहना पड़ता है।</p>
<p>निरंतर क्रोध में रहना, कलह करना, सदा दूसरों को धोखा देने का सोचते रहना, शराब पीना, मांस भक्षण करना, दूसरों की स्वतंत्रता का हनन करना और पाप करने के बारे में सोचते रहने से व्यक्ति का चित्त खराब होकर नीचे के लोक में गति करने लगता है और मरने के बाद वह स्वत: ही नरक में गिर जाता है। वहां उसका सामना यम से होता है।</p>
<h3>आइए जानते हैं इन्हें…</h3>
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<p>लस्ट (Lust)</p>
<p>लस्ट यानी लालसा, कामुकता, कामवासना. ये मनुष्य को दंडनीय अपराध की ओर ले जाते हैं और इनसे समाज में कई प्रकार की बुराईयां फैलती हैं. इस पाप में गैर महिलाओं से संबंध स्थापित करना शामिल है.</p>
<p>ग्लूटनी (Gluttony)</p>
<p>ग्लूटनी को भी सात महापापों में रखा गया है. दुनिया भर में तेजी से फैलने वाले मोटापे की हर जमाने में निंदा हुई है और इसका मजाक उड़ाया गया है. ठूंस कर खाने को महापाप में इसलिए रखा गया है कि एक तो इसमें अधिक खाने की लालसा है और दूसरा यह जरूरतमंदों के खाने में हस्तक्षेप करने के समान है.</p>
<p>ग्रीड (Greed)</p>
<p>लालच, लोभ भी लस्ट और ग्लूटनी की तरह है और इसमें अत्यधिक प्रलोभन होता है. चर्च ने इसे सात महापाप की सूची में अलग से इसलिए रखा है क्योंकि इसमें धन-दौलत का लालच शामिल है.</p>
<p>स्लौथ (Sloth)</p>
<p>स्लौथ का मतलब आलस्य, सुस्ती और काहिली से है. पहले स्लौथ का अर्थ होता था उदास रहना, खुशी न मनाना. इसे महापाप में इसलिए रखा गया था कि इसका मतलब था खुदा की दी हुई चीज से परहेज करना. इस अर्थ का पर्याय आज melancholy, apathy, depression, और joylessness होगा. बाद में इसे इसलिए पाप में शामिल रखा गया क्योंकि इसकी वजह से आदमी अपनी योग्यता और क्षमता का प्रयोग नहीं करता है.</p>
<p>रैथ (Wrath)</p>
<p>रैथ का मतलब गुस्से, क्रोध और आक्रोश से है. इसे नफरत और गुस्से का मिला जुला रूप कहा जा सकता है. जिसमें आकर कोई कुछ भी कर जाता है. ये सात महापाप में अकेला ऐसा पाप है जिसमें आपका अपना स्वार्थ शामिल नहीं होता.</p>
<p>एनवी (Envy)</p>
<p>ईर्ष्या करना भी पाप माना गया है. यह ग्रीड से इस अर्थ में अलग है कि ग्रीड में धन-दौलत ही शामिल है जबकि यह उसका व्यापक रूप है. यह महापाप इसलिए है कि क्योंकि लोग कोई गुण किसी में देखकर उसे अपने में चाहते हैं और दूसरे की अच्छी चीज को सहन नहीं कर पाते हैं.</p>
<p>प्राइड (Pride)</p>
<p>घमंड, अहंकार, अभिमान को सातों महापाप में सबसे बुरा पाप समझा जाता है. किसी भी धर्म में इसकी कठोर निंदा और भर्त्सना की गई है. इसे सारे पाप की जड़ समझा जाता है क्योंकि सारे पाप इसी के पेट से निकलते हैं. इसमें खुद को सबसे महान समझना और खुद से अत्यधिक प्रेम शामिल है.</p>
<p><strong>बुरी नजर</strong></p>
<p>किसी पराई स्त्री पर बुरी नजर रखना या उसके साथ संभोग करना सबसे बड़ा पाप माना गया है। इसके साथ ही गुरुशैय्या पर दुष्कर्म करना बहुत बड़ा पाप होता है। ऐसे इंसान को नर्क में उसके बुरे कर्मों की भयंकर सजा मिलती है।</p>
<p><strong>अनीति का पैसा</strong></p>
<p>किसी को ठग कर, गलत काम कर या किसी के हिस्से की चीज चुराकर पैसे इकट्ठे करने वाले को नर्क में सजा मिलती है और पैसे को दान ना करने वाले भी उतने की पापी माने जाते हैं।</p>
<p><strong>जानवरों पर अत्याचार</strong></p>
<p>जानवरों पर अत्याचार करने वाले, उनकी हत्या करने वाले और नौकरों से बुरा व्यवहार करने वालों को नर्क में सजा भोगनी पड़ती है।</p>
<p>गुरु मनुष्य को अच्छे-बुरे का ज्ञान देता है। गुरु को पिता के समान और गुरुपत्नी को माता के समान मानना चाहिए। गुरुपत्नी के साथ संबंध रखने वाले या गुरुपत्नी को बुरी नजर से देखने वाले मनुष्य को ब्रह्म हत्या से भी बड़ा पाप लगता है।</p>
<p>गुरुपत्नी के साथ समागम करने वाले मनुष्य के पापों का प्रायश्चित किसी भी तरह संभव नहीं होता है। ऐसे मनुष्य को जयंती नामक नरक में उनके पापों की सजा मिलती है।</p>
<p>अगर कोई मनुष्य जान कर या भूल से किसी की हत्या कर देता है, तो यह कर्म महापाप माना जाता है। ऐसा कर्म करने वाले मनुष्य को जीवन भर दुखों का सामना करना पड़ता है। सिर्फ हत्या करने वाला ही नहीं बल्कि ऐसे काम में साथ देने वाले मनुष्य को भी कुंभीपाक नाम के नरक की यातना सहनी पड़ती है। इसलिए मनुष्य को भूलकर भी हत्या जैसे बुरे कर्म में भाग नहीं लेना चाहिए।</p>
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