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		<title>चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह</title>
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		<pubDate>Thu, 16 Nov 2023 13:14:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बेंगलुरु। चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हो गया है। यह पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया है। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को ... <a title="चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/part-of-chandrayaan-3s-rocket-out-of-control-isro-gives-big-reason-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 के रॉकेट का हिस्सा नियंत्रण से बाहर, ISRO ने बताई बड़ी वजह">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/image-240.png" alt="" class="wp-image-422442" width="844" height="439" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बेंगलुरु। चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हो गया है। यह पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया है। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को तय कक्षा में स्थापित किया था। ISRO ने बताया- यही हिस्सा बुधवार 15 नवंबर की दोपहर 2:42 बजे पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हुआ और पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया। इसकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को दी। अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल का क्रायोजेनिक अपर स्टेज था, जिसने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को तय कक्षा में स्थापित किया था। ISRO ने बताया- यही हिस्सा बुधवार 15 नवंबर की दोपहर 2:42 बजे पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ। यह हिस्सा प्रशांत महासागर में गिर गया। इसके अनियंत्रित होने की वजह अभी साफ नहीं हुई है। इसका फाइनल ग्राउंड ट्रैक भारत के ऊपर से होकर नहीं गुजरा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पैसिवेशन की प्रक्रिया से गुजरी थी अनियंत्रित हुए रॉकेट की बॉडी</p>



<p class="wp-block-paragraph">ISRO के बयान के मुताबिक चंद्रयान-3 को लॉन्च किए जाने के 124 दिन बाद NORAD id 57321 नाम की यह रॉकेट बॉडी पृथ्वी में री-एंटर हुई। चंद्रयान-3 के ऑर्बिट में स्थापित होने के बाद अपर स्टेज को निष्क्रिय (पैसिवेशन) करने की प्रक्रिया से भी गुजारा गया था। पैसिवेशन में रॉकेट में मौजूद प्रोपेलैंट और एनर्जी सोर्स को हटाया गया, ताकि अंतरिक्ष में विस्फोट के खतरे को कम किया जा सके। यह प्रक्रिया भी इंटर-एजेंसी स्पेस डेब्रिस कोऑर्डिनेशन एजेंसी (IADC) और यूनाइटेड नेशंस की गाइडलाइंस के तहत आती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग से लैंडिंग तक 10 मोमेंट्स: साउथ पोल पर यान पहुंचते ही साइंटिस्ट बोले- इंडिया ऑन द मून</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 ने लॉन्च होने के 41वें दिन 23 अगस्त को चंद्रमा पर लैंडिंग की। इसी के साथ भारत चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बन गया। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 की साउथ पोल पर लैंडिंग के बाद कहा- PM सर नमस्कार। हमने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है। इंडिया इज ऑन द मून। चंदा मामा दूर के नहीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिलकर भावुक हुए:कहा- चांद पर लैंडर जहां उतरा, वह &#8216;शिवशक्ति पॉइंट&#8217; कहलाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अगस्त को ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का नाम &#8216;तिरंगा&#8217; होगा।</p>
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		<title>मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-will-get-special-scientific-identity-some-other-special-information-from-the-missions-success-news/</link>
		
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		<pubDate>Mon, 22 Jul 2019 11:12:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्रमा पर भारत के दूसरे प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण मिशन चंद्रयान-2 को साेमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपराह्न 1443 बजे प्रक्षेपण किया गया। देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से 3850 किलोग्राम भार वाले चंद्रयान-2 को ... <a title="मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-will-get-special-scientific-identity-some-other-special-information-from-the-missions-success-news/" aria-label="Read more about मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><img decoding="async" class="" src="https://hindusthansamachar.in/uploads/videos/5cc11aedeab37cea5fa0fe870fb1904041df9057060fec7e899a9401138f1ff0_1.jpg" width="869" height="559" /></h1>
<p>चंद्रमा पर भारत के दूसरे प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण मिशन चंद्रयान-2 को साेमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया।<br />
चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपराह्न 1443 बजे प्रक्षेपण किया गया। देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से 3850 किलोग्राम भार वाले चंद्रयान-2 को 20 घंटों की उलटी गिनती के बाद प्रक्षेपित किया गया।  बता दे अपने सफर के लिए निकला चंद्रयान-2 न केवल स्वदेशी तकनीक से निर्मित है बल्कि इसकी कई अन्य खूबियां भी हैं। इस मिशन की कामयाबी वैज्ञानिक खोज की दुनिया में चंद्रयान-2 को निःसंदेह विशिष्टता प्रदान करेगी।</p>
<p>पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी तक़रीबन 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) का सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा चंद्रयान-2 का सफ़र पृथ्वी से चंद्रमा की इसी दूरी को तय करने के लिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर शुरू हो गया। अपनी लॉन्चिंग के तक़रीबन 54 दिनों की यात्रा के बाद चंद्रयान-2 12 या 13 सितंबर को चांद के दक्षिणी सतह पर उतरेगा।</p>
<p><strong>चंद्रयान-2 की खूबियां</strong></p>
<p>चंद्र ान-2 मिशन अबतक के मिशनों से भिन्न है। करीब दस वर्ष के वैज्ञानिक अनुसंधान और अभियान्त्रिकी विकास के कामयाब दौर के बाद भारत के दूसरे चंद्र अभियान से चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के अबतक के अछूते भाग के बारे में जानकारी मिलेगी। इस मिशन से व्यापक भौगौलिक, मौसम सम्बन्धी अध्ययन और चंद्रयान-1 द्वारा खोजे गए खनिजों का विश्लेषण करके चंद्रमा के अस्तित्व में आने और उसके क्रमिक विकास की और ज़्यादा जानकारी मिल पायेगी। चंद्रयान-2 के चंद्रमा पर रहने के दौरान इसरो के वैज्ञानिक चांद की सतह पर अनेक और परीक्षण भी करेंगे। इनमें चांद पर पानी होने की पुष्टि और वहां विशिष्ट किस्म की रासायनिक संरचना वाली नई किस्म के चट्टानों का विश्लेषण शामिल हैं।</p>
<p><strong>सौरमंडल</strong></p>
<p>सूर्य एवं उसके चारों ओर भ्रमण करने वाले 8 ग्रह हैं।<br />
सूर्य से दूरी के क्रम में पृथ्वी तीसरा और आकार की दृष्टि से पांचवां ग्रह है।<br />
आठ ग्रहों में बुध और शुक्र को छोड़कर सभी ग्रहों के उपग्रह हैं।<br />
चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह और सौरमंडल का पांचवां सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह है।<br />
उपग्रह अपने ग्रह की परिक्रमा करने के साथ-साथ सूर्य की भी परिक्रमा करते हैं।<br />
चंद्रमा से संबंधित तथ्य</p>
<p><strong>पृथ्वी से दूरी- 384,365 किलोमीटर</strong><br />
पृथ्वी से अधिकतम दूरी- 406000 किलोमीटर<br />
पृथ्वी से न्यूनतम दूरी- 364000 किलोमीटर<br />
पृथ्वी के चारों ओर घूमने की अवधि 27 घंटे 7 दिन 43 मिनट (परिभ्रमण काल)<br />
चंद्रमा की घुर्णन अवधि 27 घंटे 7 दिन 43 मिनट ( अपने अक्ष पर)<br />
चंद्रमा पर वायुमंडल अनुपस्थित<br />
चंद्रमा का व्यास &#8211; 3476 किलोमीटर<br />
चंद्रमा की सतह का अदृश्य भाग 41 फीसदी<br />
चंद्रमा का सबसे ऊंचा पर्वत- 35000 फीट, लीबनिट्ज पर्वत ( चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर)<br />
1959 में चंद्रमा के लिए पहला मानव रहित मिशन सोवियत लूनर 1 प्रोग्राम था।<br />
1969 में पहला मानवयुक्त अपोलो 11 लैंडिंग हुआ था।<br />
20 जुलाई, सन 1969 में चंद्रमा पर कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग पहले व्यक्ति थे। उनके साथ अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन भी थे।<br />
अभीतक 12 लोगों ने चंद्रमा पर कदम रखा है लेकिन इसमें कोई महिला नहीं है। वह सभी अमेरिकी पुरुष हैं। आखिरी बार जीन कर्नन थे जो 1972 में चंद्रमा से लौटे। कोई भी दो बार चंद्रमा पर नहीं गया है।<br />
चंद्रयान-1 भारत ने 22 अक्टूबर 2008 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-11 से रवाना किया गया था।<br />
चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर बर्फ होने की जानकारी दी। इसकी पुष्टि नासा ने भी की।<br />
इसी क्रम में चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी धुव्र पर उतरने वाला पहला पहला स्पेसक्राफ्ट होगा।<br />
दक्षिणी ध्रुव ज्वालामुखियों और उबड़-खाबड़ जमीन से युक्त है। यहां के अधिकांश हिस्सें में छाया रहती है। इसलिए यहां पर चंद्रयान-2 को बहुत कुछ नया मिल सकता है।<br />
चंद्रमा हर साल हमारे ग्रह से लगभग 3.8 सेमी दूर जा रहा है। चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी लगभग 80 गुना है, लेकिन दोनों की उम्र एक ही है।</p>
<p><strong>कुछ अन्य विशेष जानकारियां</strong></p>
<p>दुर्भाग्यवश मानव अपने पीछे चंद्रमा की सतह पर अनुमानित 181,437 किलोग्राम मानव निर्मित कचरा छोड़ चुका है। इनमें से कचरे का अधिकांश हिस्सा रोवर्स और अंतरिक्ष यान का परिणाम हैं।<br />
चंद्रमा के दोनों किनारों पर सूर्य के प्रकाश की समान मात्रा दिखाई देती है, अंतर यह है कि हम केवल पृथ्वी से चंद्रमा का एक पक्ष देखते हैं, क्योंकि यह अपनी धुरी पर घूमता है। इसलिए मनुष्य केवल चंद्रमा की सतह का केवल 59 प्रतिशत हिस्सा ही देखने में सक्षम है।<br />
चांद पर कम गुरुत्वाकर्षण ( पृथ्वी से 1/6 ) और चिपकने वाली धूल शोध और मानव बस्तियों की एक बड़ी समस्या है। यानी व्यक्ति का चंद्रमा पर वजन कम हो जाएगा। यहां पृथ्वी के वजन का लगभग छठा (16.5 फीसदी) वजन ही रहेगा।<br />
चंद्रमा पर बड़े-बड़े पर्वत भी है। यहां के लगभग सभी पहाड़ अतीत में क्षुद्रग्रहों के प्रभावों का परिणाम हैं। पृथ्वी पर ज्वार-भाटे का उदय और पतन चंद्रमा के कारण होता है।<br />
चंद्रमा का कोई वायुमंडल नहीं है। इसलिए चंद्रमा पर कोई आवाज़ नहीं सुनी जा सकती है और आकाश हमेशा काला दिखाई देता है। यहां भूकंप भी आता है।<br />
पृथ्वी की तरह चंद्रमा का अपना स्वयं का समय क्षेत्र है। हर साल चंद्रमा पर 12 चंद्र दिन होते हैं, जिनका नाम 12 अंतरिक्ष यात्रियों के नाम पर रखा गया है जो इसकी सतह कदम रख चुके हैं। प्रत्येक चंद्र दिन को 30 चंद्र चक्रों में विभाजित किया जाता है। एक चक्र लगभग 23 घंटे और पृथ्वी पर 37 मिनट के समान है।<br />
सभी ब्रह्मांडीय पिंडों में चंद्रमा हमारे सबसे अधिक नजदीक है। इसलिए इसपर विश्व के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की निगाहें हैं। क्योंकि यहां आसानी से तकनीक एवं अंतरिक्ष मिशनों का उपयोग हो सकता है।<br />
चांद पर अपार संसाधन भी मौजूद हैं, जो भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के स्रोत बन सकते हैं। यहां पर उच्च स्तर के टाइटेनियम, यूरेनियम और नेप्ट्यूनियम जैसे धातु एवं खनिज मिले हैं।<br />
चंद्रयान-2 जो कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा, वहां पर अनमोल खजाना है जो आगामी पांच सौ वर्ष के लिए पृथ्वी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है। साथ ही खरबों डॉलर की कमाई भी। इसी पर चंद्रयान -2 की भी नजर है।<br />
चांद पर भारी मात्रा में मौजूद हीलियम-3 जिसका भंडार दस लाख मीट्रिक टन तक भी संभव है। एक टन हीलियम-3 की कीमत करीब 5 अरब डॉलर है। यानी चंद्रमा से 2,50,000 टन हीलियम-3 पृथ्वी पर लाया जा सकता है। इसके अलावा सिलिका, एल्यूमिना, चूना, लोहा, मैग्नीशिया, सोडियम ऑक्साइड आदि मौजूद है।</p>
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		<title>ISRO ने फिर रच दिया इतिहास, श्रीहरिकोटा से लॉन्‍च हुआ इसरो का चंद्रयान-2</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/isro-launches-history-launched-from-sriharikota-isros-chandrayaan-2-news/</link>
		
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		<pubDate>Mon, 22 Jul 2019 09:41:09 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="" src="https://smedia2.intoday.in/aajtak/techblog/333_072219025147.jpg" width="946" height="605" /></p>
<p>श्रीहरिकोटा, 22 जुलाई (वार्ता) चंद्रमा पर भारत के दूसरे प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण मिशन चंद्रयान-2 को साेमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपराह्न 1443 बजे प्रक्षेपण किया गया। देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से 3850 किलोग्राम भार वाले चंद्रयान-2 को 20 घंटों की उलटी गिनती के बाद प्रक्षेपित किया गया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">WATCH: L-110 ignites and the S200 rockets separate from the main rocket. <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/ISRO?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#ISRO</a> <a href="https://t.co/q8D85SPfG2">pic.twitter.com/q8D85SPfG2</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1153235050898558977?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 22, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी तक़रीबन 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) का सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा चंद्रयान-2 का सफ़र पृथ्वी से चंद्रमा की इसी दूरी को तय करने के लिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर शुरू हो गया। अपनी लॉन्चिंग के तक़रीबन 54 दिनों की यात्रा के बाद चंद्रयान-2 12 या 13 सितंबर को चांद के दक्षिणी सतह पर उतरेगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a>: GSLVMkIII-M1 lifts-off from Sriharikota carrying <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/ISRO?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#ISRO</a> <a href="https://t.co/X4ne8W0I3R">pic.twitter.com/X4ne8W0I3R</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1153232735588233216?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 22, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार भारत ही पहुंचेगा</strong></p>
<p>वैसे तो इस मिशन की कामयाबी के साथ ही भारत दुनिया के उन देशों की अहम सूची में शामिल हो जाएगा जिसमें रूस, अमेरिका और चीन शामिल हैं। भारत इस सूची में चौथे नंबर पर शामिल होगा, जो अपना यान चंद्रमा पर उतारेगा लेकिन इस सूची में पहले से शामिल तीन देशों के बरअक्स भारत का मिशन अलग और नितांत मौलिक भी है। चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने जा रहा है जो दुनिया के लिए अबतक अनदेखा है। भारत से पहले किसी भी देश ने ऐसा नहीं किया है। इस मिशन की लागत एक हजार करोड़ रुपये है। लागत के हिसाब से भी यह अन्य देशों की तुलना में कम है।</p>
<p><strong>स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल</strong></p>
<p>ख़ास बात यह है कि चंद्रयान-2 स्वदेशी तक़नीक से बना है। 13 पेलोड वाले चंद्रयान-2 में आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर विक्रम और दो पेलोड रोवर प्रज्ञान में हैं। विक्रम और प्रज्ञान जैसे नामों पर ग़ौर करें तो यह भी कम दिलचस्प नहीं है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ.विक्रम साराभाई के नाम पर इसे विक्रम का नाम दिया गया है जबकि प्रज्ञान का मतलब मेधा से है।</p>
<p><strong>बाहुबली की ताक़त</strong></p>
<p>इस मिशन की सफलता का एक बड़ा भार `बाहुबली’ पर है। चंद्रयान-2 को जीएसएलवी मैक-3 द्वारा प्रक्षेपित किया गया है, जिसे आमतौर पर `बाहुबली’ का नाम दिया गया है। इस नाम के पीछे वज़ह यह है कि यह चार टन क्षमता तक के उपग्रह को ले जाने की ताकत रखता है।</p>
<p><strong>खोज से क्या होगा हासिल</strong></p>
<p>चंद्रयान-2 की कामयाबी से चंद्रमा की सतह पर पानी की मात्रा का अध्ययन किया जा सकेगा। इसके साथ ही चंद्रमा के मौसम और वहां मौजूद खनिज तत्वों का अध्ययन भी किया जा सकेगा। इस खोज में यह भी संभव है कि चंद्रयान-2 ऐसी बेशकीमती खोज तक पहुंच जाए, जिससे लंबे कालखंड तक ऊर्जा की जरूरतें पूरी हो सकती हैं। ऊर्जा का यह स्रोत दूसरे तमाम स्रोतों के मुकाबले प्रदूषण से मुक्त होने की भी संभावना है लेकिन फिलहाल यह भविष्य के गर्भ में है। इस मिशन के लिए 54 दिनों का हर क्षण एक परीक्षा है, जब चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर उतरेगा। नतीजे तक पहुंचने के लिए वक्त और उसकी चुनौतियां जरूर हैं लेकिन इस दिशा में भारतीय वैज्ञानिक अपना कदम बढ़ा चुके हैं।</p>
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		<title>VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान</title>
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		<pubDate>Mon, 15 Jul 2019 03:22:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को फिलहाल टाल देने का फैसला किया है।  इसरो ने सोमवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। इसरो ने ट्वीट किया, “ टी-56 मिनट पर प्रक्षेपण यान प्रणाली में एक तकनीकी खराबी पाई गई। अत्याधिक सावधानी बरतते हुए चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण ... <a title="VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-launches-for-technical-reasons-news/" aria-label="Read more about VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://hindi.oneindia.com/img/2019/07/xchandrayan-1563139191.jpg.pagespeed.ic._rq38Lzu0k.jpg" alt="ISRO calls off Chandrayaan 2 launch, technical snag observed in launch vehicle system" width="950" height="535" /></p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को फिलहाल टाल देने का फैसला किया है।  इसरो ने सोमवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। इसरो ने ट्वीट किया, “ टी-56 मिनट पर प्रक्षेपण यान प्रणाली में एक तकनीकी खराबी पाई गई। अत्याधिक सावधानी बरतते हुए चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को आज के लिए टाल दिया गया है। प्रक्षेपण की नयी तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी।” इससे पहले भारत के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के 20 घंटों की उलटी गिनती रविवार सुबह छह बजकर 51 मिनट पर शुरू हो गयी थी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">A technical snag was observed in launch vehicle system at 1 hour before the launch. As a measure of abundant precaution, <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> launch has been called off for today. Revised launch date will be announced later.</p>
<p>&mdash; ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1150520298761936896?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 14, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आज तड़के दो बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाना था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से चंद मिनटों पहले प्रक्षेपण को टाल देने का फैसला किया गया।  इस मिशन के लिए जीएसएलवी-एमके3 एम1 प्रक्षेपणयान का इस्तेमाल किया जायेगा। इसरो ने बताया कि मिशन के लिए रिहर्सल शुक्रवार को पूरा हो गया था।</p>
<p>इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। उल्लेखनीय है चंद्रमा पर भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 ने वहां पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी।<br />
इस मिशन में चंद्रयान-2 के साथ कुल 13 स्वदेशी पे-लोड यान वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। इनमें तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a>: Countdown for <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> launch, at Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota stops. ISRO tweets &#39;Technical snag observed in launch vehicle system at T-56 min. As a measure of precaution,Chandrayaan 2 launch called off for today.Revised launch date to be announced later&#39; <a href="https://t.co/unhkVWRcm1">pic.twitter.com/unhkVWRcm1</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1150513643311837184?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 14, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की सटीक दूरी का पता लगाना है। यह मिशन इस मायने में खास है कि चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा और सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक दुनिया का कोई मिशन नहीं उतरा है। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊँचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इसे विक्रम नाम दिया गया है। यह दो मिनट प्रति सेकेंड की गति से चंद्रमा की जमीन पर उतरेगा। प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा।</p>
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		<title>पुलवामा अटैक:  सेना का प्लान तैयार, इन तरीको से बदला लेगा भारत&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/pulwama-attack-army-plan-prepared-india-will-take-revenge-with-these-methods-news/</link>
		
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		<pubDate>Sat, 16 Feb 2019 08:23:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पुलवामा में आतंकी हमले से पूरे देश लोगों में गुस्से की लहर है। लोगों ने पाकिस्तान का पुतला फूंककर अपना गुस्सा जाहिर किया और केंद्र सरकार से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की मांग की। लवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के लोगों ने श्रद्धांजलि दी। ... <a title="पुलवामा अटैक:  सेना का प्लान तैयार, इन तरीको से बदला लेगा भारत&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/pulwama-attack-army-plan-prepared-india-will-take-revenge-with-these-methods-news/" aria-label="Read more about पुलवामा अटैक:  सेना का प्लान तैयार, इन तरीको से बदला लेगा भारत&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://img.timesnownews.com/story/1550288602-fighter_plane_crash.jpg?d=600x450" alt="air strikes" width="719" height="539" /></p>
<p>पुलवामा में आतंकी हमले से पूरे देश लोगों में गुस्से की लहर है। लोगों ने पाकिस्तान का पुतला फूंककर अपना गुस्सा जाहिर किया और केंद्र सरकार से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की मांग की। लवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के लोगों ने श्रद्धांजलि दी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गुरूवार को आतंकी हमले में घायल हुए 30 जवानों में से चार गम्भीर रूप से घायल जवानों ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया है। अस्पताल में शहीद हुए जवानों के साथ ही अब इस हमले में शहादत पाने वाले जवानों की संख्या 48 हो गई है। गुरूवार को हुए इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हो गए थे जबकि इस दौरान 30 जवान घायल हुए थे।</p>
<p>बबते चले पुलवामा आतंकी हमले के बाद सशस्त्र बलों ने नियंत्रण रेखा पर अस्थिरता के साथ सैन्य दबाव बढ़ा दिया है। पाकिस्तान की सेना ने भी अपनी सतर्कता को बढ़ा दिया है। आतंकवादियों पर कार्रवाई करने के लिए प्रमुख भावना यह है कि सरकार को इस्लामाबाद को उसके व्यवहार में बदलाव के लिए मजबूर करने के लिए सीमित सीमा पार कर हमलों के विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।</p>
<p><strong>मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार</strong></p>
<p>वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने कहा कि युद्ध में जाने के लिए सैन्य विकल्प, जमीनी हमलों और नियंत्रण रेखा के साथ कुछ ऊंचाइयों पर कब्जे तक सीमित हो सकते हैं, लेकिन पीओके में &#8216;नॉन स्टेट टारगेट्स&#8217; के खिलाफ सटीक हवाई हमले हो सकते हैं। इस बात पर सहमति बन सकती है कि पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सावधानीपूर्वक कैलिब्रेटेड एयरबोर्न स्ट्राइक सबसे व्यवहार्य और प्रभावी विकल्पों में से है।</p>
<p><strong>ये है सेना का प्लान  </strong></p>
<p>स्मार्ट&#8217; ग्लाइड बम और मिसाइलों से लैस सुखोई-30एमकेआई, मिराज-2000 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र को बिना क्रॉस किए आतंकी कैंप और एलओसी के पास लॉन्च पैड्स के लिए किया जा सकता है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, &#8216;ऐसे हवाई हमलों के लिए तैयारी का समय न्यूनतम है।&#8217;</p>
<p>फिर, 90 किलोमीटर तक हमला करने वाले मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम और 290KM ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना की चौकियों, आतंकी कैंपों और लॉन्च पैड्स को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। लेकिन इस तरह के किसी भी आक्रामक विकल्प का प्रयोग करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसके बाद प्रतिशोध का जोखिम बढ़ सकता है।</p>
<p>इस तरह के विकल्प का मकसद पीओके में आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना होगा, न कि पाकिस्तान के नागरिकों को। 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के समय उत्तरी कमान के प्रमुख रहे, लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा (रिटायर) ने कहा, &#8216;पुलवामा एक बड़ी त्रासदी है। इस में पाकिस्तान का हाथ है। हम कब तक ऐसे हमले बर्दाश्त करते रहेंगे? हमें गंभीरता से कुछ कठोर विकल्पों को देखना शुरू करना होगा।&#8217;</p>
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