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		<title>लखीमपुर : पराली जलाने वालों को सेटेलाइट ने दबोचा, प्रशासन ने की कार्यवाही</title>
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		<pubDate>Fri, 13 Oct 2023 08:13:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गोला/लखीमपुर खीरी। प्रशासन की लाख हिदायतों के बाद भी किसान खेतों में पराली जलाकर वायु प्रदूषण बढ़ाने से बाज नहीं आए। रात के अंधेरे में या दिन में चोरी-छिपे पराली जलाकर किसानों ने यह मान लिया कि उनकी यह करतूत किसी के सामने नहीं आएगी। लेकिन सेटेलाइट के जरिए उनकी चोरी पकड़ी गई। बुधवार को ... <a title="लखीमपुर : पराली जलाने वालों को सेटेलाइट ने दबोचा, प्रशासन ने की कार्यवाही" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/lakhimpur-satellite-caught-those-burning-stubble-administration-took-action-news-in-hindi/" aria-label="Read more about लखीमपुर : पराली जलाने वालों को सेटेलाइट ने दबोचा, प्रशासन ने की कार्यवाही">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1280" height="716" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/1-1-1.jpg" alt="" class="wp-image-410046" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/1-1-1.jpg 1280w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/10/1-1-1-768x430.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">गोला/लखीमपुर खीरी। प्रशासन की लाख हिदायतों के बाद भी किसान खेतों में पराली जलाकर वायु प्रदूषण बढ़ाने से बाज नहीं आए। रात के अंधेरे में या दिन में चोरी-छिपे पराली जलाकर किसानों ने यह मान लिया कि उनकी यह करतूत किसी के सामने नहीं आएगी। लेकिन सेटेलाइट के जरिए उनकी चोरी पकड़ी गई। बुधवार को सेटेलाइट के जरिए जिले में खेत में पराली जलाने के तहसील गोला एवं मितौली में एक-एक मामले सामने आए। जिनमें तहसील प्रशासन ने जुर्माने सहित अन्य कार्रवाहिया की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोला एसडीएम रत्नाकर मिश्रा ने बताया कि जिला स्तर से सेटेलाइट के माध्यम से प्राप्त सूचना के आधार पर बढैयाखेडा मजरा सिकन्द्राबाद परगना हैदराबाद तहसील गोला की गाटा संख्या 1727/0.267 हे0 रवीन्द्र कुमार पुत्र स्वामीदयाल के नाम दर्ज है, जिसमें लगी धान की फसल को कम्बाइन मशीन गाडी सं. यूपी 71 एआर 9428 द्वारा बिना एसएमएस प्रयोग किये कटाई की। जिसे उक्त किसान द्वारा 11 अक्टूबर को पराली जला दी गयी। खातेदार से जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि कम्बाइन मशीन वर्तमान में थाना फरधान क्षेत्रान्तर्गत ग्राम बेलवा गयी हुयी है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">नायब तहसीलदार, आरआई, एडीओ (कृषि) व लेखपाल ने मौके पर जाकर कम्बाइन मशीन ग्राम रौसा से बेलवा के बीच में मिली। कम्बाईन मशीन को ले जाकर के निकटस्थ थाना फरधान के प्रभारी को विधिक कार्यवाही के लिए सुपुर्दगी में दे दी। शासनादेशानुसार जुर्माना धनराशि वसूल कर सम्बंधित लेखा शीर्षक में जमा कराई गई। घटना की सूचना समय से न दिये जाने के कारण क्षेत्रीय लेखपाल को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। तहसीलदार विनोद कुमार गुप्ता ने उक्त घटना के सम्बंध में खातेदार रवीन्द्र कुमार पुत्र स्वामीदयाल के विरूद्ध अंतर्गत धारा 107/116 दं०प्र०सं० की कार्यवाही की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मितौली। सेटेलाईट के जरिए प्राप्त सूचना के आधार पर ग्राम मुरईताजपुर, परगना कस्ता में नायब तहसीलदार मितौली ने मय क्षेत्रीय लेखपाल व बीट सिपाही, स्थलीय निरीक्षण किया। ग्राम मुरईताजपुर परगना कस्ता तहसील मितौली की भूमि गाटा संख्या 100/0.571 हे0, जो विनोद कुमार पुत्र मथुरा के नाम बतौर सहखातेदार संकमणीय भूमिधर दर्ज है, पर खातेदार विनोद कुमार पुत्र मथुरा द्वारा अपने हिस्से की भूमि रकबा 0.099हे0 पर बोई गन्ने की फसल की पराली जलाये जाने की घटना सत्य मिली।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">एसडीएम विनीत उपाध्याय ने बताया कि विनोद कुमार पुत्र मथुरा ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण व उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की। शासनादेशनुसार कृषि अपशिष्ट/पराली जलाने के दोषी व्यक्ति के विरूद्ध 2,500 रू का जुर्माना वसूल कर रजिस्टर नं० 4 में जमा कराया गया। थानाध्यक्ष मितौली ने खातेदार विनोद कुमार पुत्र मथुरा के विरूद्ध अन्तर्गत धारा 107/ 116 दं०प्र०सं० की कार्यवाही की है। घटना की सूचना समय से न दिये जाने के कारण क्षेत्रीय लेखपाल को प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदत्त की गई।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-will-get-special-scientific-identity-some-other-special-information-from-the-missions-success-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jul 2019 11:12:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[चंद्रमा पर भारत के दूसरे प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण मिशन चंद्रयान-2 को साेमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपराह्न 1443 बजे प्रक्षेपण किया गया। देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से 3850 किलोग्राम भार वाले चंद्रयान-2 को ... <a title="मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-will-get-special-scientific-identity-some-other-special-information-from-the-missions-success-news/" aria-label="Read more about मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><img decoding="async" class="" src="https://hindusthansamachar.in/uploads/videos/5cc11aedeab37cea5fa0fe870fb1904041df9057060fec7e899a9401138f1ff0_1.jpg" width="869" height="559" /></h1>
<p>चंद्रमा पर भारत के दूसरे प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण मिशन चंद्रयान-2 को साेमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया।<br />
चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपराह्न 1443 बजे प्रक्षेपण किया गया। देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से 3850 किलोग्राम भार वाले चंद्रयान-2 को 20 घंटों की उलटी गिनती के बाद प्रक्षेपित किया गया।  बता दे अपने सफर के लिए निकला चंद्रयान-2 न केवल स्वदेशी तकनीक से निर्मित है बल्कि इसकी कई अन्य खूबियां भी हैं। इस मिशन की कामयाबी वैज्ञानिक खोज की दुनिया में चंद्रयान-2 को निःसंदेह विशिष्टता प्रदान करेगी।</p>
<p>पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी तक़रीबन 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) का सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा चंद्रयान-2 का सफ़र पृथ्वी से चंद्रमा की इसी दूरी को तय करने के लिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर शुरू हो गया। अपनी लॉन्चिंग के तक़रीबन 54 दिनों की यात्रा के बाद चंद्रयान-2 12 या 13 सितंबर को चांद के दक्षिणी सतह पर उतरेगा।</p>
<p><strong>चंद्रयान-2 की खूबियां</strong></p>
<p>चंद्र ान-2 मिशन अबतक के मिशनों से भिन्न है। करीब दस वर्ष के वैज्ञानिक अनुसंधान और अभियान्त्रिकी विकास के कामयाब दौर के बाद भारत के दूसरे चंद्र अभियान से चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के अबतक के अछूते भाग के बारे में जानकारी मिलेगी। इस मिशन से व्यापक भौगौलिक, मौसम सम्बन्धी अध्ययन और चंद्रयान-1 द्वारा खोजे गए खनिजों का विश्लेषण करके चंद्रमा के अस्तित्व में आने और उसके क्रमिक विकास की और ज़्यादा जानकारी मिल पायेगी। चंद्रयान-2 के चंद्रमा पर रहने के दौरान इसरो के वैज्ञानिक चांद की सतह पर अनेक और परीक्षण भी करेंगे। इनमें चांद पर पानी होने की पुष्टि और वहां विशिष्ट किस्म की रासायनिक संरचना वाली नई किस्म के चट्टानों का विश्लेषण शामिल हैं।</p>
<p><strong>सौरमंडल</strong></p>
<p>सूर्य एवं उसके चारों ओर भ्रमण करने वाले 8 ग्रह हैं।<br />
सूर्य से दूरी के क्रम में पृथ्वी तीसरा और आकार की दृष्टि से पांचवां ग्रह है।<br />
आठ ग्रहों में बुध और शुक्र को छोड़कर सभी ग्रहों के उपग्रह हैं।<br />
चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह और सौरमंडल का पांचवां सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह है।<br />
उपग्रह अपने ग्रह की परिक्रमा करने के साथ-साथ सूर्य की भी परिक्रमा करते हैं।<br />
चंद्रमा से संबंधित तथ्य</p>
<p><strong>पृथ्वी से दूरी- 384,365 किलोमीटर</strong><br />
पृथ्वी से अधिकतम दूरी- 406000 किलोमीटर<br />
पृथ्वी से न्यूनतम दूरी- 364000 किलोमीटर<br />
पृथ्वी के चारों ओर घूमने की अवधि 27 घंटे 7 दिन 43 मिनट (परिभ्रमण काल)<br />
चंद्रमा की घुर्णन अवधि 27 घंटे 7 दिन 43 मिनट ( अपने अक्ष पर)<br />
चंद्रमा पर वायुमंडल अनुपस्थित<br />
चंद्रमा का व्यास &#8211; 3476 किलोमीटर<br />
चंद्रमा की सतह का अदृश्य भाग 41 फीसदी<br />
चंद्रमा का सबसे ऊंचा पर्वत- 35000 फीट, लीबनिट्ज पर्वत ( चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर)<br />
1959 में चंद्रमा के लिए पहला मानव रहित मिशन सोवियत लूनर 1 प्रोग्राम था।<br />
1969 में पहला मानवयुक्त अपोलो 11 लैंडिंग हुआ था।<br />
20 जुलाई, सन 1969 में चंद्रमा पर कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग पहले व्यक्ति थे। उनके साथ अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन भी थे।<br />
अभीतक 12 लोगों ने चंद्रमा पर कदम रखा है लेकिन इसमें कोई महिला नहीं है। वह सभी अमेरिकी पुरुष हैं। आखिरी बार जीन कर्नन थे जो 1972 में चंद्रमा से लौटे। कोई भी दो बार चंद्रमा पर नहीं गया है।<br />
चंद्रयान-1 भारत ने 22 अक्टूबर 2008 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-11 से रवाना किया गया था।<br />
चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर बर्फ होने की जानकारी दी। इसकी पुष्टि नासा ने भी की।<br />
इसी क्रम में चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी धुव्र पर उतरने वाला पहला पहला स्पेसक्राफ्ट होगा।<br />
दक्षिणी ध्रुव ज्वालामुखियों और उबड़-खाबड़ जमीन से युक्त है। यहां के अधिकांश हिस्सें में छाया रहती है। इसलिए यहां पर चंद्रयान-2 को बहुत कुछ नया मिल सकता है।<br />
चंद्रमा हर साल हमारे ग्रह से लगभग 3.8 सेमी दूर जा रहा है। चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी लगभग 80 गुना है, लेकिन दोनों की उम्र एक ही है।</p>
<p><strong>कुछ अन्य विशेष जानकारियां</strong></p>
<p>दुर्भाग्यवश मानव अपने पीछे चंद्रमा की सतह पर अनुमानित 181,437 किलोग्राम मानव निर्मित कचरा छोड़ चुका है। इनमें से कचरे का अधिकांश हिस्सा रोवर्स और अंतरिक्ष यान का परिणाम हैं।<br />
चंद्रमा के दोनों किनारों पर सूर्य के प्रकाश की समान मात्रा दिखाई देती है, अंतर यह है कि हम केवल पृथ्वी से चंद्रमा का एक पक्ष देखते हैं, क्योंकि यह अपनी धुरी पर घूमता है। इसलिए मनुष्य केवल चंद्रमा की सतह का केवल 59 प्रतिशत हिस्सा ही देखने में सक्षम है।<br />
चांद पर कम गुरुत्वाकर्षण ( पृथ्वी से 1/6 ) और चिपकने वाली धूल शोध और मानव बस्तियों की एक बड़ी समस्या है। यानी व्यक्ति का चंद्रमा पर वजन कम हो जाएगा। यहां पृथ्वी के वजन का लगभग छठा (16.5 फीसदी) वजन ही रहेगा।<br />
चंद्रमा पर बड़े-बड़े पर्वत भी है। यहां के लगभग सभी पहाड़ अतीत में क्षुद्रग्रहों के प्रभावों का परिणाम हैं। पृथ्वी पर ज्वार-भाटे का उदय और पतन चंद्रमा के कारण होता है।<br />
चंद्रमा का कोई वायुमंडल नहीं है। इसलिए चंद्रमा पर कोई आवाज़ नहीं सुनी जा सकती है और आकाश हमेशा काला दिखाई देता है। यहां भूकंप भी आता है।<br />
पृथ्वी की तरह चंद्रमा का अपना स्वयं का समय क्षेत्र है। हर साल चंद्रमा पर 12 चंद्र दिन होते हैं, जिनका नाम 12 अंतरिक्ष यात्रियों के नाम पर रखा गया है जो इसकी सतह कदम रख चुके हैं। प्रत्येक चंद्र दिन को 30 चंद्र चक्रों में विभाजित किया जाता है। एक चक्र लगभग 23 घंटे और पृथ्वी पर 37 मिनट के समान है।<br />
सभी ब्रह्मांडीय पिंडों में चंद्रमा हमारे सबसे अधिक नजदीक है। इसलिए इसपर विश्व के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की निगाहें हैं। क्योंकि यहां आसानी से तकनीक एवं अंतरिक्ष मिशनों का उपयोग हो सकता है।<br />
चांद पर अपार संसाधन भी मौजूद हैं, जो भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के स्रोत बन सकते हैं। यहां पर उच्च स्तर के टाइटेनियम, यूरेनियम और नेप्ट्यूनियम जैसे धातु एवं खनिज मिले हैं।<br />
चंद्रयान-2 जो कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा, वहां पर अनमोल खजाना है जो आगामी पांच सौ वर्ष के लिए पृथ्वी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है। साथ ही खरबों डॉलर की कमाई भी। इसी पर चंद्रयान -2 की भी नजर है।<br />
चांद पर भारी मात्रा में मौजूद हीलियम-3 जिसका भंडार दस लाख मीट्रिक टन तक भी संभव है। एक टन हीलियम-3 की कीमत करीब 5 अरब डॉलर है। यानी चंद्रमा से 2,50,000 टन हीलियम-3 पृथ्वी पर लाया जा सकता है। इसके अलावा सिलिका, एल्यूमिना, चूना, लोहा, मैग्नीशिया, सोडियम ऑक्साइड आदि मौजूद है।</p>
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		<title>VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-launches-for-technical-reasons-news/</link>
		
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		<pubDate>Mon, 15 Jul 2019 03:22:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को फिलहाल टाल देने का फैसला किया है।  इसरो ने सोमवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। इसरो ने ट्वीट किया, “ टी-56 मिनट पर प्रक्षेपण यान प्रणाली में एक तकनीकी खराबी पाई गई। अत्याधिक सावधानी बरतते हुए चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण ... <a title="VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-launches-for-technical-reasons-news/" aria-label="Read more about VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="" src="https://hindi.oneindia.com/img/2019/07/xchandrayan-1563139191.jpg.pagespeed.ic._rq38Lzu0k.jpg" alt="ISRO calls off Chandrayaan 2 launch, technical snag observed in launch vehicle system" width="950" height="535" /></p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को फिलहाल टाल देने का फैसला किया है।  इसरो ने सोमवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। इसरो ने ट्वीट किया, “ टी-56 मिनट पर प्रक्षेपण यान प्रणाली में एक तकनीकी खराबी पाई गई। अत्याधिक सावधानी बरतते हुए चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को आज के लिए टाल दिया गया है। प्रक्षेपण की नयी तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी।” इससे पहले भारत के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के 20 घंटों की उलटी गिनती रविवार सुबह छह बजकर 51 मिनट पर शुरू हो गयी थी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">A technical snag was observed in launch vehicle system at 1 hour before the launch. As a measure of abundant precaution, <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> launch has been called off for today. Revised launch date will be announced later.</p>
<p>&mdash; ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1150520298761936896?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 14, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आज तड़के दो बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाना था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से चंद मिनटों पहले प्रक्षेपण को टाल देने का फैसला किया गया।  इस मिशन के लिए जीएसएलवी-एमके3 एम1 प्रक्षेपणयान का इस्तेमाल किया जायेगा। इसरो ने बताया कि मिशन के लिए रिहर्सल शुक्रवार को पूरा हो गया था।</p>
<p>इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। उल्लेखनीय है चंद्रमा पर भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 ने वहां पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी।<br />
इस मिशन में चंद्रयान-2 के साथ कुल 13 स्वदेशी पे-लोड यान वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। इनमें तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a>: Countdown for <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> launch, at Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota stops. ISRO tweets &#39;Technical snag observed in launch vehicle system at T-56 min. As a measure of precaution,Chandrayaan 2 launch called off for today.Revised launch date to be announced later&#39; <a href="https://t.co/unhkVWRcm1">pic.twitter.com/unhkVWRcm1</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1150513643311837184?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 14, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की सटीक दूरी का पता लगाना है। यह मिशन इस मायने में खास है कि चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा और सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक दुनिया का कोई मिशन नहीं उतरा है। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊँचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इसे विक्रम नाम दिया गया है। यह दो मिनट प्रति सेकेंड की गति से चंद्रमा की जमीन पर उतरेगा। प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा।</p>
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		<title>LIVE VIDEO :  सूरज को करीब जानने के लिए नासा ने खर्च कर डाले 100 अरब, भेजा अपना &#8216;पार्कर सोलर प्रोब&#8217; यान </title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/nasa-launches-parker-solar-probe-its-mission-to-send-a-satellite-closer-to-the-sun-news/</link>
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		<pubDate>Sun, 12 Aug 2018 10:32:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[Cape Canaveral]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूरज पर अपने पहले अंतरिक्षयान को रवाना कर दिया है। पहले इस यान की लॉन्चिंग शनिवार को होनी थी लेकिन तकनीकी खामी के कारण इसे रविवार के लिए टालना पड़ा था।  &#8216;पार्कर सोलर प्रोब&#8217; नाम का यह अंतरिक्ष विमान कार के आकार का है जो सूरज की सतह ... <a title="LIVE VIDEO :  सूरज को करीब जानने के लिए नासा ने खर्च कर डाले 100 अरब, भेजा अपना &#8216;पार्कर सोलर प्रोब&#8217; यान " class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/nasa-launches-parker-solar-probe-its-mission-to-send-a-satellite-closer-to-the-sun-news/" aria-label="Read more about LIVE VIDEO :  सूरज को करीब जानने के लिए नासा ने खर्च कर डाले 100 अरब, भेजा अपना &#8216;पार्कर सोलर प्रोब&#8217; यान ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="rtejustify"><strong>नई दिल्ली</strong>: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूरज पर अपने पहले अंतरिक्षयान को रवाना कर दिया है। पहले इस यान की लॉन्चिंग शनिवार को होनी थी लेकिन तकनीकी खामी के कारण इसे रविवार के लिए टालना पड़ा था।  &#8216;पार्कर सोलर प्रोब&#8217; नाम का यह अंतरिक्ष विमान कार के आकार का है जो सूरज की सतह के सबसे करीब लगभग 40 लाख मील की दूरी से गुजरेगा।</p>
<p class="rtejustify">इसका उद्देश्य इस बात के बारे में पता लगाना है कि किस प्रकार से ऊर्जा और गर्मी सूरज को घेरे रहती है। इसके अलावा इतिहास में पहली बार सूर्य के करीब आकर मानव रहित जांच का मुख्य उद्देश्य परिमंडल, सूर्य के आसपास के असामान्य वातावरण के रहस्यों का खुलासा करना है। इतिहास में सूर्य के इतने करीब से कोई भी अंतरिक्ष यान नहीं गुजरा है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/ParkerSolarProbe?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#ParkerSolarProbe</a> lifted off from Space Launch Complex 37 at Cape Canaveral Air Force Station in Florida at 3:31 a.m. EDT aboard a <a href="https://twitter.com/ulalaunch?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">@ulalaunch</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/DeltaIVHeavy?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#DeltaIVHeavy</a>! <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1f680.png" alt="🚀" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> Follow along with the mission here and at <a href="https://t.co/KOu1HaS2K3">https://t.co/KOu1HaS2K3</a> as we explore the Sun like never before. <a href="https://t.co/BSAtpb6QVr">pic.twitter.com/BSAtpb6QVr</a></p>
<p>&mdash; NASA Sun &amp; Space (@NASASun) <a href="https://twitter.com/NASASun/status/1028563616147165184?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">August 12, 2018</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p class="rtejustify">यह पहला ऐसा मानव निर्मित यान है जो सूरज के बारे में इतने करीब से अध्ययन करेगा। इसमें 4 हैवी रॉकेट भी हैं। सूरज तक पहुंचने में इसे कुछ महीने का समय लग सकता है। इस प्रोजक्ट पर नासा ने 100 अरब से ज्यादा रुपये खर्च किए हैं।</p>
<p class="rtejustify">इस यान का नाम सौर वैज्ञानिक यूजेन पार्कर के नाम पर रखा गया है। &#8216;प्रोब&#8217; ही वह वैज्ञानिक थे जिन्होंने 1958 में पहली बार अनुमान लगाया था कि सौर हवाएं होती हैं। प्रोब ने पता लगाया था कि आवेशित कणों और चुंबकीय क्षेत्रों की धारा होती हैं, जो सूर्य से लगातार निकलती रहती हैं। जब ये धाराएं तेजी से निकलती हैं, तो इसके कारण धरती पर उपग्रह लिंक प्रभावित होता है।</p>
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