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	<title>Scientists &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>अचानक गुलाबी हो गया ये तालाब, वैज्ञानिकों को भी नहीं पता कारण, रहस्यमयी घटना के पीछे छुपा है बड़ा राज ?</title>
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		<pubDate>Sat, 11 Nov 2023 13:31:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दैनिक भास्कर ब्यूरो , A pond turned bright pink: अमेरिका के हवाई राज्य के दूसरे सबसे बड़े द्वीप माउई (Maui) में एक अजीब घटना घटित हुई है. यहां स्थित एक तालाब अचानक चमकीला गुलाबी हो गया, जिससे देखकर लोग चौंक गए. वैज्ञानिकों को भी इसके पीछे का कारण नहीं पता है. वे अभी यह जानने ... <a title="अचानक गुलाबी हो गया ये तालाब, वैज्ञानिकों को भी नहीं पता कारण, रहस्यमयी घटना के पीछे छुपा है बड़ा राज ?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/this-pond-suddenly-turned-pink-even-scientists-do-not-know-the-reason-is-there-a-big-secret-hidden-behind-this-mysterious-incident-news-in-hindi/" aria-label="Read more about अचानक गुलाबी हो गया ये तालाब, वैज्ञानिकों को भी नहीं पता कारण, रहस्यमयी घटना के पीछे छुपा है बड़ा राज ?">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/11/f1ef2a86-c815-444c-b529-a46d7c276eb7.jpg" alt="" class="wp-image-421392" width="842" height="631" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दैनिक भास्कर ब्यूरो ,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>A pond turned bright pink</strong>: अमेरिका के हवाई राज्य के दूसरे सबसे बड़े द्वीप माउई (Maui) में एक अजीब घटना घटित हुई है. यहां स्थित एक तालाब अचानक चमकीला गुलाबी हो गया, जिससे देखकर लोग चौंक गए. वैज्ञानिकों को भी इसके पीछे का कारण नहीं पता है. वे अभी यह जानने में जुटे हुए हैं कि इस रहस्यमयी घटना के पीछे कोई बड़ा ‘राज’ तो नहीं छुपा है. फेडरल वाइल्डलाइफ ऑफिसर्स ने इस तालाब से लोगों ने दूरी बनाए रखने की चेतावनी दी है. इस तालाब का नाम केलिया (Keālia) है, जिसके आस-पास बड़ी संख्या में वन्यजीव भी पाए जाते हैं.</p>



<p class="wp-block-paragraph">द मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस (US Fish &amp; Wildlife Service) ने कहा कि वे 30 अक्टूबर से तालाब में हो रहे असामान्य परिवर्तन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. इसके पीछे के कारणों को जानने के लिए हवाई राज्य के जलीय संसाधन विभाग (Aquatic Resources Department) और स्वास्थ्य विभाग (Health Department) मिलकर काम कर रहे हैं.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लोगों को दी गई तालाब से दूर रहने की सलाह</strong> <strong>&#8211;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">हवाई यूनिवर्सिटी (यूएच) द्वारा किए गए पानी के नमूनों की शुरुआती जांच से पता चलता है कि पानी का गुलाबी रंग हानिकारक लाल ज्वार पैदा करने वाले ‘जहरीले शैवाल’ (toxic algae) की तरह नहीं है. यूएसएफडब्ल्यूएस (USFWS) लोगों को पानी की आगे की जांच पूरा होने तक तालाब से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है और कहा है कि, ‘लोग तालाब से सुरक्षित दूरी बनाए रखें. उसके पानी में न जाएं. पानी से कोई मछली न खाएं और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पालतू जानवर इसका पानी न पिएं.’</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तालाब के गुलाबी होने के पीछे ये बैक्टीरिया ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अभी के लिए, यूएसएफडब्ल्यूएस कीलिया पॉन्ड के पानी के पेप्टो बिस्मोल जैसे रंग के लिए हेलोबैक्टीरिया (halobacteria) को जिम्मेदार ठहरा रहा है, क्योंकि ये जीव खारे पानी में पनपते हैं. साथ ही वाइल्डलाइफ अधिकारियों ने यह भी बताया कि तालाब में मौजूदा सैलिनिटी लेवल 70 भाग प्रति हजार से अधिक है, जो समुद्री जल में पाए जाने वाले लवणता से दोगुना है, जो बैक्टीरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहा है. हालांकि, वैज्ञानिक इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रहे हैं.</p>



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		<title>चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिले प्रधानमंत्री मोदी, कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है</title>
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		<pubDate>Sat, 26 Aug 2023 10:55:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का ... <a title="चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिले प्रधानमंत्री मोदी, कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/prime-minister-modi-met-the-scientists-of-chandrayaan-3-said-the-more-i-appreciate-you-the-less-it-is-news-in-hindi/" aria-label="Read more about चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों से मिले प्रधानमंत्री मोदी, कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-390364" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM.jpeg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.23.44-PM-390x220.jpeg 390w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ISRO के कमांड सेंटर में चंद्रयान-3 टीम के वैज्ञानिकों से मिले। यहां उन्होंने 3 घोषणाएं कीं। पहली- 23 अगस्त को हर साल भारत नेशनल स्पेस डे मनाएगा। दूसरा- चांद पर लैंडर जिस जगह उतरा, वह जगह शिव-शक्ति पॉइंट कहलाएगी। तीसरी- चांद पर जिस जगह चंद्रयान-2 के पद चिन्ह हैं, उस पॉइंट का नाम &#8216;तिरंगा&#8217; होगा। मोदी ने 45 मिनट के भाषण में कहा, &#8216;मैं साउथ अफ्रीका में था, फिर ग्रीस के कार्यक्रम में चला गया, लेकिन मेरा मन पूरी तरह आपके साथ ही लगा हुआ था। मेरा मन कर रहा था आपको नमन करूं। लेकिन मैं भारत में… (रुंधे गले से) भारत में आते ही… जल्द से जल्द आपके दर्शन करना चाहता था।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी बोले, &#8216;मैं आपको सैल्यूट करना चाहता था। सैल्यूट आपके परिश्रम को… सैल्यूट आपके धैर्य को.. सैल्यूट आपकी लगन को… सैल्यूट आपकी जीवटता को… सैल्यूट आपके जज्बे को….</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाद में शनिवार दोपहर पीएम मोदी बेंगलुरु से दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने पालम एयरपोर्ट पर एक जनसभा को संबोधित किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/WhatsApp-Image-2023-08-26-at-4.24.28-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-390371" width="847" height="635" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">PM सुबह 7.30 बजे कमांड सेंटर पहुंचे, इसरो चीफ की पीठ थपथपाई</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर बेंगलुरु के ISRO के कमांड सेंटर पहुंचे। यहां वे चंद्रयान-3 की टीम के वैज्ञानिकों से मिले। इसरो कमांड सेंटर पर इसरो चीफ एस सोमनाथ ने PM मोदी को गुलदस्ता देकर स्वागत किया। PM ने सोमनाथ को गले लगाया और पीठ थपथपाई। उन्हें चंद्रयान 3 मिशन के सफल होने पर बधाई दी। इस दौरान उन्होंने टीम के सभी वैज्ञानिकों के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी की स्पीच 8 बड़ी बातें, वैज्ञानिकों से कहा- आपकी जितनी सराहना करूं, उतनी कम है</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान की सफल लैंडिंग पर: आप देश को जिस ऊंचाई पर लेकर गए, ये कोई साधारण सफलता नहीं। अनंत अंतरिक्ष में भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य का शंखनाद है। इंडिया इज ऑन द मून, वी हैव अवर नेशनल प्राइड प्लेस्ड ऑन मून। हम वहां पहुंचे जहां कोई नहीं पहुंचा था। हमने वो किया जो पहले कभी किसी ने नहीं किया था। ये आज का भारत है निर्भीक भारत, जुझारू भारत। ये वो भारत है जो नया सोचता है नए तरीके से सोचता है। जो डॉर्क जोन में जाकर भी दुनिया में रोशनी की किरण फैला देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिकों की सराहना में: मेरी आंखों के सामने 23 अगस्त का वो दिन, वो एक-एक सेकेंड बार-बार घूम रहा, जब टचडाउन कन्फर्म हुआ। जिस तरह देश में लोग उछल पड़े वो दृश्य कौन भूल सकता है। वो पल अमर हो गया। वो पल इस सदी के प्रेरणादायक पलों में एक है। हर भारतीय को लग रहा था कि विजय उसकी अपनी है। ये सब मुमकिन बनाया है आप सब ने। देश के मेरे वैज्ञानिकों ने ये मुमकिन बनाया है। मैं आप सबका जितना गुणगान करूं वो कम है। मैं आपकी जितनी सराहना करूं वो कम है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर: साथियों मैंने वो फोटो देखी, जिसमें हमारे मून लैंडर ने अंगद की तरह चंद्रमा पर मजबूती से अपना पैर जमाया। एक तरफ विक्रम का विश्वास है, तो दूसरी तरफ प्रज्ञान का पराक्रम है। हमारा प्रज्ञान चंद्रमा पर अपने पदचिह्न छोड़ रहा है। मानव सभ्यता में पहली बार धरती के लाखों साल के इतिहास में उस स्थान की तस्वीर मानव अपनी आंखों से देख रहा है। ये तस्वीर दुनिया को दिखाने का काम भारत ने किया है। भारत की साइंटिफिक स्पिरिट पर: आज पूरी दुनिया भारत की साइंटिफिक स्पिरिट का, हमारी टेक्नोलॉजी का, हमारे साइंटिफिक टेंपरामेंट का लोहा मान चुकी है। हमारा मिशन जिस क्षेत्र को एक्सप्लोर करेगा, उससे सभी देशों के लिए मून मिशन के नए रास्ते खुलेंगे। यह चांद के रहस्यों को खोलेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नारी शक्ति पर: हमारे यहां कहा गया है कि निर्माण से प्रलय तक पूरी सृष्टि का आधार नारी शक्ति ही है। आप सब ने देखा है चंद्रयान-3 में देश में हमारी महिला वैज्ञानिकों ने कितनी बड़ी भूमिका निभाई। चंद्रमा का शिव शक्ति पाइंट सदियों तक भारत की इस वैज्ञानिक क्षमता का साक्षी बनेगा। ये शिव शक्ति पाइंट आने वाली पीढ़ियों को प्ररेणा देगा। हमें विज्ञान का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए ही करना है। ये हमारा सुप्रीम कमिटमेंट है।<br>थर्ड रो से पहली रो तक का सफर: आज भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश है जिसने चंद्रमा की सतह को छुआ है। एक समय था जब भारत के पास जरूरी तकनीक नहीं थी। हमारी गिनती थर्ड रो में खड़े देशों में होती थी। वहां से निकलकर भारत आज दुनिया की पांचवी सबसे बड़ इकोनॉमी बना। आज ट्रेड से लेकर टेक्नोलॉजी तक भारत की गिनती पहली रो में खड़े देशों में होती है। थर्ड रो से फर्स्ट रो में आने में इसरो की अहम भूमिका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की स्पेस इंडस्ट्री पर: अगले कुछ साल में भारत की स्पेस इंडस्ट्री एक बिलियन डॉलर से 16 बिलियन डॉलर बन जाएगी। हम लगातार रिफॉर्म कर रहे हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा पिछले चार सालों में स्पेस सेंटर के स्टार्टअप की संख्या 4 से बढ़कर 150 हो गई। अनंत आकाश में अनंत संभावनाए हैं। एक सितंबर से my gov चंद्रयान को लेकर कॉम्पिटिशन लॉन्च करने जा रही है। युवाओं को दिए दो टास्क: पहला टास्क- पुरानी खगोलीय गणनाओं को साइंटिफिक तौर पर साबित करें। भारत के पास विज्ञान के ज्ञान का खजाना है। वह गुलामी में छिप गया था उसे अब खंगालना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरा टास्क- हमारी युवा पीढ़ी को आज की आधुनिक टेक्नोलॉजी के नए आयाम देने हैं। आसमान से लेकर समंदर तक करने के लिए बहुत कुछ है। डीप अर्थ से लेकर डीप सी तक रिसर्च करें। नई पीढ़ी के कंप्यूटर बनाइए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोले- मैंने सोच लिया था, भारत जाकर पहले वैज्ञानिकों को नमन करूंगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी अपनी दो देशों की यात्रा पूरी करने के बाद ग्रीस से सीधे बेंगलुरु पहुंचे थे। सुबह 6 बजे एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उन्होंने लोगों को 10 मिनट तक संबोधित किया। उन्होंने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान का नारा लगाया। इसमें उन्होंने जय अनुसंधान का नारा भी जोड़ा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा, &#8216;सूर्योदय की बेला हो और बेंगलुरु का नजारा हो… देश के वैज्ञानिक देश को जब इतनी बड़ी सौगात देते हैं, इतनी बड़ी सिद्धि प्राप्त करते हैं, जो दृश्य मुझे बेंगलुरु में दिखाई दे रहा है, वो मुझे ग्रीस और साउथ अफ्रीका में भी देखने को मिला। आप सुबह-सुबह इतना जल्दी आए, मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। मैं दूर विदेश में था। तो मैंने सोच लिया था कि पहले भारत जाऊंगा तो पहले बेंगलुरु जाऊंगा। सबसे पहले उन वैज्ञानिकों से मिलूंगा और उन्हें नमन करूंगा।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी का रोड शो, लोग सुबह से इंतजार कर रहे थे</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों से भी मिले। करीब 5 मिनट लोगों का अभिवादन करते रहे। यहां से उनका काफिला इसरो के कमांड सेंटर के लिए निकला। एयरपोर्ट से सेंटर की दूरी 30 किमी है। इस दौरान उन्होंने रोड शो भी किया। सड़क के दोनों तरफ हजारों की संख्या में लोग खड़े रहे। इस दौरान मोदी कार के दरवाजे के पास खड़े होकर लोगों का अभिवादन करते नजर आए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिक सुबह 4 बजे ही इसरो के कमांड सेंटर पहुंचे</p>



<p class="wp-block-paragraph">बेंगलुरु के ISRO टेलिमीट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क मिशन कंट्रोल कॉम्प्लेक्स (इस्ट्रैक) के बाहर वैज्ञानिक ​​​​​​सुबह 4:30 बजे से PM मोदी के इंतजार में खड़े रहे। यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पाकिस्तान ने दो दिन बाद भारत को बधाई दी</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग के दो दिन बाद पाकिस्तान ने भारत को बधाई दी है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है। इसके लिए ISRO के वैज्ञानिक तारीफ के हकदार हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">PM ने साउथ अफ्रीका से इसरो चीफ को फोन किया था</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग के समय पीएम मोदी साउथ अफ्रीका में थे। वे जोहान्सबर्ग से इस इवेंट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम जुड़े रहे। उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों और देशवासियों को वहीं से संबोधित किया था। उन्होंने इसरो चीफ एस सोमनाथ से फोन पर बात की थी और कहा था कि जितना जल्दी होगा वे इसरो वैज्ञानिकों से मिलेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जब आप अपनी आंखों के सामने इतिहास बनते देखते हैं तो गर्व होता है- मोदी</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर कहा कि यह नए भारत के जयघोष का क्षण है। जब आप अपनी आंखों के सामने इतिहास बनते देखते हैं तो गर्व होता है। भारत की यह उड़ान चंद्रयान से भी आगे जाएगी। जल्द ही इसरो आदित्य एल-1 मिशन भी लॉन्च करेगा, जिससे सूर्य का विस्तृत अध्ययन किया जा सकेगा। इसके बाद शुक्र और सौरमंडल के सामर्थ्य को परखने के लिए दूसरे अभियान भी शुरू किए जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री ने कहा कि अब चांद से जुड़े मिथक भी बदल जाएंगे। इसके साथ ही नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी। पहले कहा जाता था कि चंदा मामा दूर के लेकिन अब लोग कहेंगे चंदा मामा बस एक टूर के।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रयान-2 के दौरान भी बेंगलुरु पहुंचे थे मोदी</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी चंद्रयान-2 मिशन के विक्रम लैंडर की लैंडिंग को देखने के लिए 6 सितंबर, 2019 की रात को भी बेंगलुरु गए थे। हालांकि 7 सितंबर के शुरुआती घंटों में चंद्रमा की सतह से सिर्फ 2.1 किमी ऊपर, इसरो का यान से संपर्क टूट गया था, मिशन पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका था।</p>
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		<title>मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां</title>
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		<pubDate>Mon, 22 Jul 2019 11:12:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्रमा पर भारत के दूसरे प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण मिशन चंद्रयान-2 को साेमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपराह्न 1443 बजे प्रक्षेपण किया गया। देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से 3850 किलोग्राम भार वाले चंद्रयान-2 को ... <a title="मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-will-get-special-scientific-identity-some-other-special-information-from-the-missions-success-news/" aria-label="Read more about मिशन की कामयाबी से चंद्रयान-2 को मिलेगी विशेष वैज्ञानिक पहचान, कुछ अन्य विशेष जानकारियां">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://hindusthansamachar.in/uploads/videos/5cc11aedeab37cea5fa0fe870fb1904041df9057060fec7e899a9401138f1ff0_1.jpg" width="869" height="559" /></h1>
<p>चंद्रमा पर भारत के दूसरे प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण मिशन चंद्रयान-2 को साेमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया।<br />
चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपराह्न 1443 बजे प्रक्षेपण किया गया। देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3 एम1 रॉकेट की मदद से 3850 किलोग्राम भार वाले चंद्रयान-2 को 20 घंटों की उलटी गिनती के बाद प्रक्षेपित किया गया।  बता दे अपने सफर के लिए निकला चंद्रयान-2 न केवल स्वदेशी तकनीक से निर्मित है बल्कि इसकी कई अन्य खूबियां भी हैं। इस मिशन की कामयाबी वैज्ञानिक खोज की दुनिया में चंद्रयान-2 को निःसंदेह विशिष्टता प्रदान करेगी।</p>
<p>पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी तक़रीबन 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) का सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा चंद्रयान-2 का सफ़र पृथ्वी से चंद्रमा की इसी दूरी को तय करने के लिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर शुरू हो गया। अपनी लॉन्चिंग के तक़रीबन 54 दिनों की यात्रा के बाद चंद्रयान-2 12 या 13 सितंबर को चांद के दक्षिणी सतह पर उतरेगा।</p>
<p><strong>चंद्रयान-2 की खूबियां</strong></p>
<p>चंद्र ान-2 मिशन अबतक के मिशनों से भिन्न है। करीब दस वर्ष के वैज्ञानिक अनुसंधान और अभियान्त्रिकी विकास के कामयाब दौर के बाद भारत के दूसरे चंद्र अभियान से चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के अबतक के अछूते भाग के बारे में जानकारी मिलेगी। इस मिशन से व्यापक भौगौलिक, मौसम सम्बन्धी अध्ययन और चंद्रयान-1 द्वारा खोजे गए खनिजों का विश्लेषण करके चंद्रमा के अस्तित्व में आने और उसके क्रमिक विकास की और ज़्यादा जानकारी मिल पायेगी। चंद्रयान-2 के चंद्रमा पर रहने के दौरान इसरो के वैज्ञानिक चांद की सतह पर अनेक और परीक्षण भी करेंगे। इनमें चांद पर पानी होने की पुष्टि और वहां विशिष्ट किस्म की रासायनिक संरचना वाली नई किस्म के चट्टानों का विश्लेषण शामिल हैं।</p>
<p><strong>सौरमंडल</strong></p>
<p>सूर्य एवं उसके चारों ओर भ्रमण करने वाले 8 ग्रह हैं।<br />
सूर्य से दूरी के क्रम में पृथ्वी तीसरा और आकार की दृष्टि से पांचवां ग्रह है।<br />
आठ ग्रहों में बुध और शुक्र को छोड़कर सभी ग्रहों के उपग्रह हैं।<br />
चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह और सौरमंडल का पांचवां सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह है।<br />
उपग्रह अपने ग्रह की परिक्रमा करने के साथ-साथ सूर्य की भी परिक्रमा करते हैं।<br />
चंद्रमा से संबंधित तथ्य</p>
<p><strong>पृथ्वी से दूरी- 384,365 किलोमीटर</strong><br />
पृथ्वी से अधिकतम दूरी- 406000 किलोमीटर<br />
पृथ्वी से न्यूनतम दूरी- 364000 किलोमीटर<br />
पृथ्वी के चारों ओर घूमने की अवधि 27 घंटे 7 दिन 43 मिनट (परिभ्रमण काल)<br />
चंद्रमा की घुर्णन अवधि 27 घंटे 7 दिन 43 मिनट ( अपने अक्ष पर)<br />
चंद्रमा पर वायुमंडल अनुपस्थित<br />
चंद्रमा का व्यास &#8211; 3476 किलोमीटर<br />
चंद्रमा की सतह का अदृश्य भाग 41 फीसदी<br />
चंद्रमा का सबसे ऊंचा पर्वत- 35000 फीट, लीबनिट्ज पर्वत ( चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर)<br />
1959 में चंद्रमा के लिए पहला मानव रहित मिशन सोवियत लूनर 1 प्रोग्राम था।<br />
1969 में पहला मानवयुक्त अपोलो 11 लैंडिंग हुआ था।<br />
20 जुलाई, सन 1969 में चंद्रमा पर कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग पहले व्यक्ति थे। उनके साथ अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन भी थे।<br />
अभीतक 12 लोगों ने चंद्रमा पर कदम रखा है लेकिन इसमें कोई महिला नहीं है। वह सभी अमेरिकी पुरुष हैं। आखिरी बार जीन कर्नन थे जो 1972 में चंद्रमा से लौटे। कोई भी दो बार चंद्रमा पर नहीं गया है।<br />
चंद्रयान-1 भारत ने 22 अक्टूबर 2008 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-11 से रवाना किया गया था।<br />
चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर बर्फ होने की जानकारी दी। इसकी पुष्टि नासा ने भी की।<br />
इसी क्रम में चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी धुव्र पर उतरने वाला पहला पहला स्पेसक्राफ्ट होगा।<br />
दक्षिणी ध्रुव ज्वालामुखियों और उबड़-खाबड़ जमीन से युक्त है। यहां के अधिकांश हिस्सें में छाया रहती है। इसलिए यहां पर चंद्रयान-2 को बहुत कुछ नया मिल सकता है।<br />
चंद्रमा हर साल हमारे ग्रह से लगभग 3.8 सेमी दूर जा रहा है। चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी लगभग 80 गुना है, लेकिन दोनों की उम्र एक ही है।</p>
<p><strong>कुछ अन्य विशेष जानकारियां</strong></p>
<p>दुर्भाग्यवश मानव अपने पीछे चंद्रमा की सतह पर अनुमानित 181,437 किलोग्राम मानव निर्मित कचरा छोड़ चुका है। इनमें से कचरे का अधिकांश हिस्सा रोवर्स और अंतरिक्ष यान का परिणाम हैं।<br />
चंद्रमा के दोनों किनारों पर सूर्य के प्रकाश की समान मात्रा दिखाई देती है, अंतर यह है कि हम केवल पृथ्वी से चंद्रमा का एक पक्ष देखते हैं, क्योंकि यह अपनी धुरी पर घूमता है। इसलिए मनुष्य केवल चंद्रमा की सतह का केवल 59 प्रतिशत हिस्सा ही देखने में सक्षम है।<br />
चांद पर कम गुरुत्वाकर्षण ( पृथ्वी से 1/6 ) और चिपकने वाली धूल शोध और मानव बस्तियों की एक बड़ी समस्या है। यानी व्यक्ति का चंद्रमा पर वजन कम हो जाएगा। यहां पृथ्वी के वजन का लगभग छठा (16.5 फीसदी) वजन ही रहेगा।<br />
चंद्रमा पर बड़े-बड़े पर्वत भी है। यहां के लगभग सभी पहाड़ अतीत में क्षुद्रग्रहों के प्रभावों का परिणाम हैं। पृथ्वी पर ज्वार-भाटे का उदय और पतन चंद्रमा के कारण होता है।<br />
चंद्रमा का कोई वायुमंडल नहीं है। इसलिए चंद्रमा पर कोई आवाज़ नहीं सुनी जा सकती है और आकाश हमेशा काला दिखाई देता है। यहां भूकंप भी आता है।<br />
पृथ्वी की तरह चंद्रमा का अपना स्वयं का समय क्षेत्र है। हर साल चंद्रमा पर 12 चंद्र दिन होते हैं, जिनका नाम 12 अंतरिक्ष यात्रियों के नाम पर रखा गया है जो इसकी सतह कदम रख चुके हैं। प्रत्येक चंद्र दिन को 30 चंद्र चक्रों में विभाजित किया जाता है। एक चक्र लगभग 23 घंटे और पृथ्वी पर 37 मिनट के समान है।<br />
सभी ब्रह्मांडीय पिंडों में चंद्रमा हमारे सबसे अधिक नजदीक है। इसलिए इसपर विश्व के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की निगाहें हैं। क्योंकि यहां आसानी से तकनीक एवं अंतरिक्ष मिशनों का उपयोग हो सकता है।<br />
चांद पर अपार संसाधन भी मौजूद हैं, जो भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के स्रोत बन सकते हैं। यहां पर उच्च स्तर के टाइटेनियम, यूरेनियम और नेप्ट्यूनियम जैसे धातु एवं खनिज मिले हैं।<br />
चंद्रयान-2 जो कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा, वहां पर अनमोल खजाना है जो आगामी पांच सौ वर्ष के लिए पृथ्वी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है। साथ ही खरबों डॉलर की कमाई भी। इसी पर चंद्रयान -2 की भी नजर है।<br />
चांद पर भारी मात्रा में मौजूद हीलियम-3 जिसका भंडार दस लाख मीट्रिक टन तक भी संभव है। एक टन हीलियम-3 की कीमत करीब 5 अरब डॉलर है। यानी चंद्रमा से 2,50,000 टन हीलियम-3 पृथ्वी पर लाया जा सकता है। इसके अलावा सिलिका, एल्यूमिना, चूना, लोहा, मैग्नीशिया, सोडियम ऑक्साइड आदि मौजूद है।</p>
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		<title>VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान</title>
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		<pubDate>Mon, 15 Jul 2019 03:22:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को फिलहाल टाल देने का फैसला किया है।  इसरो ने सोमवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। इसरो ने ट्वीट किया, “ टी-56 मिनट पर प्रक्षेपण यान प्रणाली में एक तकनीकी खराबी पाई गई। अत्याधिक सावधानी बरतते हुए चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण ... <a title="VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/chandrayaan-2-launches-for-technical-reasons-news/" aria-label="Read more about VIDEO : तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टला, जल्द होगा की नई तारीख का ऐलान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://hindi.oneindia.com/img/2019/07/xchandrayan-1563139191.jpg.pagespeed.ic._rq38Lzu0k.jpg" alt="ISRO calls off Chandrayaan 2 launch, technical snag observed in launch vehicle system" width="950" height="535" /></p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को फिलहाल टाल देने का फैसला किया है।  इसरो ने सोमवार को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। इसरो ने ट्वीट किया, “ टी-56 मिनट पर प्रक्षेपण यान प्रणाली में एक तकनीकी खराबी पाई गई। अत्याधिक सावधानी बरतते हुए चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को आज के लिए टाल दिया गया है। प्रक्षेपण की नयी तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी।” इससे पहले भारत के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के 20 घंटों की उलटी गिनती रविवार सुबह छह बजकर 51 मिनट पर शुरू हो गयी थी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">A technical snag was observed in launch vehicle system at 1 hour before the launch. As a measure of abundant precaution, <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> launch has been called off for today. Revised launch date will be announced later.</p>
<p>&mdash; ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1150520298761936896?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 14, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आज तड़के दो बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाना था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से चंद मिनटों पहले प्रक्षेपण को टाल देने का फैसला किया गया।  इस मिशन के लिए जीएसएलवी-एमके3 एम1 प्रक्षेपणयान का इस्तेमाल किया जायेगा। इसरो ने बताया कि मिशन के लिए रिहर्सल शुक्रवार को पूरा हो गया था।</p>
<p>इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। उल्लेखनीय है चंद्रमा पर भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 ने वहां पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी।<br />
इस मिशन में चंद्रयान-2 के साथ कुल 13 स्वदेशी पे-लोड यान वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। इनमें तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a>: Countdown for <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan2?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#Chandrayaan2</a> launch, at Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota stops. ISRO tweets &#39;Technical snag observed in launch vehicle system at T-56 min. As a measure of precaution,Chandrayaan 2 launch called off for today.Revised launch date to be announced later&#39; <a href="https://t.co/unhkVWRcm1">pic.twitter.com/unhkVWRcm1</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1150513643311837184?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">July 14, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की सटीक दूरी का पता लगाना है। यह मिशन इस मायने में खास है कि चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा और सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक दुनिया का कोई मिशन नहीं उतरा है। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊँचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इसे विक्रम नाम दिया गया है। यह दो मिनट प्रति सेकेंड की गति से चंद्रमा की जमीन पर उतरेगा। प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा।</p>
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