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		<title>अविश्वास प्रस्ताव पर मोदी बोले- ये I.N.D.I.A नहीं घमंडिया गठबंधन है</title>
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		<pubDate>Thu, 10 Aug 2023 13:09:43 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/aded1b10-3776-11ee-bde6-7ffba94c56ae.jpg" alt="" class="wp-image-386841" width="840" height="473" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/aded1b10-3776-11ee-bde6-7ffba94c56ae.jpg 640w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/08/aded1b10-3776-11ee-bde6-7ffba94c56ae-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 840px) 100vw, 840px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली। संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के तीसरे दिन (गुरुवार, 10 अगस्त) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब दे रहे हैं। पीएम ने कहा कि ये I.N.D.I.A. गठबंधन घमंडिया गठबंधन है। यहां सभी को प्रधानमंत्री बनना है। 2018 में जब अविश्वास प्रस्ताव आया था, तब हम ज्यादा सीटें जीते थे। अब 2024 में रिकॉर्ड जीत होगी। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद वोटिंग होगी। विपक्ष मणिपुर मुद्दे पर 26 जुलाई को केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया था। अगले दिन यानी 27 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी के भाषण</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह सरकार का नहीं, विपक्ष का फ्लोर टेस्ट</p>



<p class="wp-block-paragraph">मैं भगवान का आशीर्वाद मानता हूं कि उन्होंने विपक्ष को सुझाया और वे इसका प्रस्ताव लेकर आए। 2018 में भी वे अविश्वास प्रस्ताव लाए थे। तब मैंने कहा था कि यह हमारी सरकार के लिए फ्लोर टेस्ट नहीं है। उन्हीं का फ्लोर टेस्ट है। हुआ भी वही। जब मतदान हुआ, तो विपक्ष के पास जितने वोट थे, उतने भी जमा नहीं कर पाए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विपक्ष का अविश्वास हमारे लिए शुभ होता है</p>



<p class="wp-block-paragraph">इतना ही नहीं, जब हम सब जनता के पास गए तो जनता ने भी पूरी ताकत के साथ इनके लिए नो कॉन्फिडेंस घोषित कर दिया। चुनाव में एनडीए को कहीं ज्यादा सीटें मिलीं। एक तरह से विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव हमारे लिए शुभ होता है। एनडीए और बीजेपी 2024 के चुनाव में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़कर जनता के आशीर्वाद से वापस आएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आपके लिए राजनीति प्राथमिकता</p>



<p class="wp-block-paragraph">विपक्ष के प्रस्ताव पर 3 दिनों से यहां काफी चर्चा हुई है। अच्छा होता कि सत्र की शुरुआत के बाद से ही विपक्ष गंभीरता के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेता। बीते दिनों इसी सदन ने और दोनों सदनों ने जनविश्वास बिल, मेडिकल बिल, डेंटल कमीशन बिल जैसे कई महत्वपूर्ण बिल यहां पारित किए। लेकिन आपके लिए राजनीति प्राथमिकता है। देश की जनता ने जिस काम के लिए उन्हें यहां भेजा, उस जनता से भी विश्वासघात किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आप लोग तैयारी करके नहीं आए</p>



<p class="wp-block-paragraph">आप जुटे तो अविश्वास प्रस्ताव पर जुटे। कट्टर भ्रष्ट साथी की सलाह पर मजबूर होकर जुटे। इस अविश्वास प्रस्ताव पर भी आपने कैसी चर्चा की। सोशल मीडिया पर आपके दरबारी भी बहुत दुखी हैं। मजा इस डिबेट का…फील्डिंग विपक्ष ने ऑर्गनाइज की, लेकिन चौके-छक्के यहीं से लगे। विपक्ष नो-कॉन्फिडेंस पर नो बॉल कर रहा है और इधर से सेंचुरी हो रही है। आप तैयारी करके क्यों नहीं आते जी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश के लिए यह समय बेहद अहम</p>



<p class="wp-block-paragraph">हम सब ऐसे टाइम पीरियड में हैं, चाहे हम हों या आप… ये टाइम पीरियड बेहद अहम है। कालखंड जो गढ़ेगा, उसका प्रभाव इस देश पर आने वाले 1000 साल तक रहने वाला है। इस कालखंड में हम सबका दायित्व है, एक ही फोकस होना चाहिए कि देश का विकास, सपने पूरे करने का संकल्प, सिद्ध करने के लिए जी-जान से जुटना।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अविश्वास प्रस्ताव की आड़ में जनता का आत्मविश्वास तोड़ा</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने युवाओं को घोटालों से रहित सरकार दी है। दुनिया में भारत की बिगड़ी हुई साख को संभाला है। अभी भी कुछ लोग कोशिश में हैं कि साख को दाग लग गए। विश्व का विश्वास भारत में बढ़ता चला जा रहा है। इस दौरान हमारे विपक्ष ने क्या किया। इन्होंने अविश्वास प्रस्ताव की आड़ में जनता के आत्मविश्वास को तोड़ने की विफल कोशिश की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की उपलब्धियों पर विपक्ष को अविश्वास</p>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले 5 साल में 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। IMF लिखता है कि भारत ने अति गरीबी को करीब-करीब खत्म कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है जल जीवन के जरिए 4 लाख लोगों की जान बच रही है। यूनीसेफ ने कहा कि स्वच्छ भारत के कारण हर साल गरीबों के 50 हजार रुपए बच रहे हैं। इन उपलब्धियों पर कांग्रेस समेत विपक्ष के कुछ दलों को अविश्वास है। जो सच्चाई दुनिया दूर से देख रही है, वो यहां रहकर नहीं देख पा रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश के मंगल पर आपने काले कपड़े पहने, इसका धन्यवाद</p>



<p class="wp-block-paragraph">अविश्वास और घमंड इनकी रगों में रच-बस गया है। वे जनता के विश्वास को कभी देख नहीं पाते। ये जो शुतुरमुर्ग एप्रोच है, इसके लिए देश क्या कर सकता है। जब शुभ, मंगल होता है, बच्चा साफ-सुथरा होता है तो काला टीका लगा देते हैं। आज जो देश का मंगल हो रहा है, वाहवाही हो रही है, आपका धन्यवाद करता हूं कि काले टीके के रूप में, काले कपड़े में सदन में आकर आपने इस मंगल को निश्चित करने का काम किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिन चीजों की बुराई की, उनका भला हुआ</p>



<p class="wp-block-paragraph">विपक्ष के लोगों को एक सीक्रेट वरदान मिला है। ये लोग जिसका बुरा चाहेंगे, उसका भला ही होगा। मैं 3 उदाहरण से सिद्ध कर सकता हूं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहला- इन लोगों ने कहा था कि बैंकिंग सेक्टर डूब जाएगा। पब्लिक सेक्टर बैंक का नेट प्रॉफिट दोगुने से ज्यादा हो गया। फोन बैंकिंग घोटाले की बात की। देश को एनपीए के गंभीर संकट में डुबो दिया था। आज जो एनपीए का अंबार लगाकर गए थे, हम उसके पार निकल चुके हैं। निर्मलाजी ने बताया कि कितना प्रॉफिट हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरा- डिफेंस के हेलिकॉप्टर बनाने वाली सरकारी कंपनी एचएएल के लिए कितनी भली-बुरी बातें कही थीं। एचएएल तबाह हो गया है, खत्म हो गया है, भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री खत्म हो गई है। लेकिन आज एचएएल सफलता की नई बुलंदियां छू रहा है। हाईएस्ट एवर रेवेन्यू रजिस्टर किया है। वहां के कामगारों को उकसाने की कोशिशों के बावजूद एचएएल देश की आन-बान-शान बनकर उभरा। तीसरा- एलआईसी के लिए कहा कि डूब रही है। दरबारियों ने इतने कागज पकड़ा दिए और नेता सारे बोल लेते थे। एलआईसी मजबूत हो रही है। शेयर मार्केट के लिए भी गुरुमंत्र है, जिस सरकारी कंपनियों को ये लोग गाली दें, उस पर पैसा लगा दीजिए अच्छा ही होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तीसरी बार सरकार बनेगी तो हम दुनिया की तीसरी इकोनॉमी बनेंगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये वो लोग हैं, जिन्हें देश के सामर्थ्य पर विश्वास नहीं है। हमारी सरकार के अगले टर्म में यानी तीसरे टर्म में भारत दुनिया की तीसरी टॉप अर्थव्यवस्था होगा। ये जिम्मेदार विपक्ष ऐसे में पूछता कि मोदीजी, निर्मलाजी, ये कैसे करोगे। ये भी मुझे सिखाना पड़ रहा है। यहां वो कुछ सुझाव दे सकते थे या कहते हम चुनाव में जनता के बीच जाकर बताएंगे कि ये तीसरे की बात करते हैं और हम एक पर लेकर आएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरे की बात को कैच कर लेते हैं, अपनी वैक्सीन पर भरोसा नहीं</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस को हुर्रियत, अलगाववादियों पर भरोसा था। भारत ने आतंकवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक किया, एयर स्ट्राइक किया। इन्हें भारतीय सेना नहीं, दुश्मन के दांव पर भरोसा था। आज दुनिया में कोई भी भारत के लिए कोई भी अपशब्द बोलता है तो तुरंत विश्वास हो जाता है, तुरंत कैच कर लेते हैं। ऐसी मैग्नेटिक पावर है। झूठी बात आएगी पकड़ लेंगे और प्रचार करते हैं। क्या मजा आता है। कोई भी ऐसी बात, मिट्टी के ढेले जैसी बातों को तवज्जो देना इनकी फितरत रही है। कोरोना की महामारी आई, भारत के वैज्ञानिकों ने मेड इन इंडिया वैक्सीन बनाई, उस पर भरोसा नहीं था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कई हिस्सों में कांग्रेस को जीतने में सालों लगे यानी कांग्रेस नो-कॉन्फिडेंस</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश के कई हिस्सों में कांग्रेस को जीत दर्ज करने में अनेक दशक लग गए हैं। तमिलनाडु में कांग्रेस की आखिरी बार 1962 में जीत हुई थी, 61 साल से वहां के लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस नो-कॉन्फिडेंस। बंगाल में उन्हें आखिरी बार जीत 1972 में मिली, वहां के लोग 51 साल से कह रहे हैं कि कांग्रेस नो-कॉन्फिडेंस, उत्तर प्रदेश-गुजरात-बिहार 1985 में कांग्रेस जीती, 38 साल से वहां के लोगों ने कांग्रेस को कहा- कांग्रेस नो-कॉन्फिडेंस। त्रिपुरा में आखिरी बार 1988 में जीत मिली, 35 साल से वहां के लोग यही कह रहे हैंं। ओडिशा में 1995 में आखिरी बार जीत मिली, 28 सालसे वहां के लोग एक ही जवाब दे रहे हैं। कांग्रेस नो-कॉन्फिडेंस।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का दूसरा दिन: साढ़े 7 घंटे चर्चा, शाह-राहुल-स्मृति ने अपनी बात रखी</p>



<p class="wp-block-paragraph">राहुल गांधी ने अपने 35 मिनट के भाषण में कहा था- हमारे प्रधानमंत्री आज तक मणिपुर नहीं गए। उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है। मैं रिलीफ कैंप गया। महिलाओं-बच्चों से बात की। पीएम आज तक नहीं गए क्योंकि उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है। सेना एक दिन में वहां शांति ला सकती है। आप ऐसा नहीं कर रहे हो, क्योंकि आप हिंदुस्तान में मणिपुर को मारना चाहते हो। आप भारत माता के रखवाले नहीं, आप भारत माता के हत्यारे हो।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी बोलीं- राहुल भारत माता की हत्या की बात करते हैं। कांग्रेस ताली बजाती है। ये इस बात का संकेत है कि मन में गद्दारी किसके है। स्मृति ने राहुल गांधी पर महिला सांसदों के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। भाजपा ने इसकी शिकायत स्पीकर से की है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- मणिपुर में जो हुआ शर्मनाक है। उस पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक है। नरसिम्हा राव पीएम थे, तब भी मणिपुर में 700 लोग मारे गए, लेकिन पीएम वहां नहीं गए। मैं मणिपुर में 3 दिन, 3 रात रहा। गृह राज्यमंत्री 23 दिन रहे। अब भी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री सहयोग कर रहे थे, इसलिए नहीं हटाया। धारा 356 के तहत CM तब बदला जाता है, जब वह सहयोग न करे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के पहले दिन किसने क्या कहा</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाना हमारी मजबूरी थी। हम प्रधानमंत्री का मौन व्रत तोड़ने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं। प्रधानमंत्री को यह स्वीकार करना होगा कि उनकी डबल इंजन सरकार, मणिपुर में विफल हो गई। लेकिन पीएम जनता के बीच अपनी भूल स्वीकार करना नहीं चाहते। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत 8 अगस्त को हुई। कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी को भाषण देना था, लेकिन उनकी जगह गौरव गोगोई ने भाषण पढ़ा। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा- सुबह सेक्रेटरी जनरल के यहां चिट्ठी आई थी कि राहुल गांधी जी बोलेंगे। हम तो उनके भाषण का इंतजार कर रहे हैं। अब गौरव गोगोई बोल रहे हैं। 5 मिनट में आखिर क्या हो गया। भारतीय नारी को क्&#x200d;या-क्&#x200d;या करना चाहिए, उसकी पूरी की पूरी पिक्&#x200d;चर सोनियाजी में दिखती है। उनको दो काम करने हैं- बेटे को सेट करना है और दामाद को भेंट करना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अविश्वास प्रस्ताव सदन में ज्यादातर फेल होता है, लेकिन फिर भी ये विपक्ष का हथियार क्यों?</p>



<p class="wp-block-paragraph">1963 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता जेबी कृपलानी ने लोकसभा में पहला अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि, वोटिंग में PM जवाहरलाल नेहरू की सरकार बहुमत हासिल करने में कामयाब रही थी। आचार्य कृपलानी ने इस अविश्वास प्रस्ताव को पेश करते हुए कहा था, &#8216;मेरे लिए यह बेहद दुख की बात है कि मुझे ऐसी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव लाना पड़ रहा है, जिस सरकार में मेरे 30 साल पुराने कई दोस्त शामिल हैं। इसके बावजूद अपने कर्तव्य और अंतरात्मा की आवाज पर सरकार की जवाबदेही के लिए मैं ये प्रस्ताव ला रहा हूं।&#8217; </p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके जवाब में PM जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, &#8216;इस तरह के प्रस्ताव के जरिए सरकारों का समय-समय पर परीक्षण किया जाना अच्छा है। खासकर तब भी जब सरकार गिरने की कोई संभावना न हो।&#8217; अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सभी दलों के सांसद राज्य या देश से जुड़े सवाल पूछते हैं। सरकार को इसका जवाब देना पड़ता है। 2018 में TDP के सांसदों ने आंध्र प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2019 के बाद PM ने लोकसभा में कुल 7 बार डिबेट में हिस्सा लिया</p>



<p class="wp-block-paragraph">संसद के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2019 के बाद PM मोदी ने लोकसभा के कार्यकाल के दौरान कुल 7 बार डिबेट में हिस्सा लिया है। इनमें से पांच मौकों पर उन्होंने राष्ट्रपति के भाषण के बाद जवाब दिया। जबकि एक बार उन्होंने श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाए जाने को लेकर और दूसरी बार लोकसभा स्पीकर के तौर पर ओम बिड़ला के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अपनी बात रखी थी। ‘अविश्वास प्रस्ताव’… पिछले कुछ दिनों में आपने इस शब्द को कई बार सुना होगा। इस वक्त देश की राजनीति इसी के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। लोकसभा में आज अविश्वास प्रस्ताव पर तीसरे दिन की चर्चा होनी है।अविश्वास प्रस्ताव की पूरी ABCD बेहद आसान भाषा और रोचक बातों के जरिए जानने के लिए</p>
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