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	<title>UU Lalit &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>CJI यूयू ललित से हिजाब विवाद ने लगाई न्याय की गुहार, अब सुनाएंगे अपना फैसला</title>
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		<pubDate>Thu, 13 Oct 2022 06:01:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हिजाब पर बैन सही है या गलत, इस पर फैसला अब CJI यूयू ललित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने जब गुरुवार को फैसला सुनाया तो दो जजों की बेंच की इस मामले पर राय अलग-अलग थी। 10 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के 3 पहलू जस्टिस ... <a title="CJI यूयू ललित से हिजाब विवाद ने लगाई न्याय की गुहार, अब सुनाएंगे अपना फैसला" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/hijab-controversy-appealed-to-cji-uu-lalit-for-justice-now-he-will-give-his-verdict-news-in-hindi/" aria-label="Read more about CJI यूयू ललित से हिजाब विवाद ने लगाई न्याय की गुहार, अब सुनाएंगे अपना फैसला">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/10/oooo-1.jpg" alt="" class="wp-image-280505" width="842" height="474" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/10/oooo-1.jpg 696w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/10/oooo-1-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 842px) 100vw, 842px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">हिजाब पर बैन सही है या गलत, इस पर फैसला अब CJI यूयू ललित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने जब गुरुवार को फैसला सुनाया तो दो जजों की बेंच की इस मामले पर राय अलग-अलग थी। 10 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के 3 पहलू</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस धूलिया का फैसला: मेरे दिमाग में सबसे बड़ा सवाल बच्चियों की शिक्षा का है। मेरी नजर में यह चयन का मामला है। न तो इससे ज्यादा कुछ और न इससे कम। मेरा नजरिया अलग है और मैं इन याचिकाओं को मंजूरी देता हूं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस गुप्ता का फैसला: जस्टिस गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से सहमति जताई और इस फैसले के िखलाफ याचिका दाखिल करनेवाले से 11 सवाल पूछे। इसके बाद उन्होंने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि हमारे विचारों में भिन्नता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नतीजा क्या निकला?</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि यह मामला CJI को भेजा जा रहा है ताकि वे उचित निर्देश दे सकें। याचिकाकर्ता के वकील एजाज मकबूल ने कहा कि अब CJI यह तय करेंगे कि इस मामले पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच गठित की जाए या फिर कोई और बेंच।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दलील थी कि छात्राएं स्टूडेंट्स के साथ भारत के नागरिक भी हैं। ऐसे में ड्रेस कोड का नियम लागू करना उनके संवैधानिक अधिकार का हनन होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट में हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 23 याचिकाएं दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि हाईकोर्ट ने धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को देखे बिना हिजाब बैन पर फैसला सुना दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव धवन, दुष्यंत दवे, संजय हेगड़े और कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा तो सरकार की ओर से सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">HC का फैसला- हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं</p>



<p class="wp-block-paragraph">15 मार्च को कर्नाटक हाईकोर्ट ने उडुपी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राओं की तरफ से क्लास में हिजाब पहनने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम की जरूरी प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसे संविधान के आर्टिकल 25 के तहत संरक्षण देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए कुछ लड़कियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई हो रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उडुपी से शुरू हुआ था विवाद</p>



<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी के शुरुआत में उडुपी के ही एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ था, जहां मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर आने से रोका गया था। स्कूल मैनेजमेंट ने इसे यूनिफॉर्म कोड के खिलाफ बताया था। इसके बाद दूसरे शहरों में भी यह विवाद फैल गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुस्लिम लड़कियां इसका विरोध कर रही हैं, जिसके खिलाफ हिंदू संगठनों से जुड़े युवकों ने भी भगवा शॉल पहनकर जवाबी विरोध शुरू कर दिया था। एक कॉलेज में यह विरोध हिंसक झड़प में बदल गया था, जहां पुलिस को सिचुएशन कंट्रोल करने के लिए टियर गैस छोड़नी पड़ी थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को हिजाब बैन पर फैसला सुरक्षित रख लिया। कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर लगातार 10 दिन से सुनवाई चली। सुनवाई के शुरुआती 6 दिन मुस्लिम पक्ष की दलीलों के बाद कर्नाटक सरकार ने अपना पक्ष रखा। इसमें हिंदू, सिख, ईसाई प्रतीकों को पहनकर आने की तरह ही हिजाब को भी परमिशन दिए जाने की मांग की गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक हिजाब विवाद पर 5वे दिन सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धुलिया की बेंच में सुनवाई हुई। इसमें सीनियर एडवोकेट राजीव धवन और हुजेफा अहमदी ने पक्ष रखा।अहमदी ने कहा कि लड़कियां मदरसा छोड़कर स्कूल में पढ़ने आई थी, लेकिन अगर आप हिजाब बैन कर देंगे तो फिर मजबूर होकर मदरसा चली जाएंगी। इस पर जस्टिस धुलिया ने कहा है कि ये कैसी दलील है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धुलिया की बेंच में सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने कहा था कि कुरान का हर शब्द धार्मिक है, लेकिन उसे मानना अनिवार्य नहीं है। राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवदगी ने गौकशी पर कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक हिजाब विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धुलिया की बेंच में सुनवाई हुई थी। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ड्रेस कोड लागू करने का मतलब है कि आप लड़कियों को कॉलेज जाने से रोक रहे हैं। इस पर जस्टिस गुप्ता ने कहा था कि पब्लिक प्लेस पर ड्रेस कोड लागू होता ही है। पिछले दिनों ही एक महिला वकील सुप्रीम कोर्ट में जींस पहनकर आ गईं, उन्हें तुरंत मना किया गया। उसी तरह गोल्फ कोर्स का भी अपना ड्रेस कोड है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुस्लिम लड़कियां स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहन सकती हैं या नहीं, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 6 दिन जबर्दस्त बहस हुई थी। करीब 19 घंटे की पूरी जिरह को हमने पढ़ा और समझा। इस बहस में तिलक, पगड़ी और क्रॉस का भी जिक्र आया था।</p>
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		<title>यूयू ललित ने CJI के नाम का किया ऐलान, नौ नवंबर को लेंगे जस्टिस चंद्रचूड़ शपथ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Oct 2022 06:11:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ देश के 50वें CJI होंगे। CJI यूयू ललित ने कानून मंत्री किरन रिजिजू को उनके नाम की सिफारिश की है। CJI ललित 8 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ 9 नवंबर को CJI के रूप में शपथ लेंगे। CJI ललित ने मंगलवार सुबह SC के जजों की उपस्थिति में पर्सनली जस्टिस ... <a title="यूयू ललित ने CJI के नाम का किया ऐलान, नौ नवंबर को लेंगे जस्टिस चंद्रचूड़ शपथ" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/uu-lalit-announces-the-name-of-cji-justice-chandrachud-will-take-oath-on-november-9-news-in-hindi/" aria-label="Read more about यूयू ललित ने CJI के नाम का किया ऐलान, नौ नवंबर को लेंगे जस्टिस चंद्रचूड़ शपथ">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/10/iiiii.jpg" alt="" class="wp-image-279260" width="841" height="474" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/10/iiiii.jpg 600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2022/10/iiiii-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 841px) 100vw, 841px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ देश के 50वें CJI होंगे। CJI यूयू ललित ने कानून मंत्री किरन रिजिजू को उनके नाम की सिफारिश की है। CJI ललित 8 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ 9 नवंबर को CJI के रूप में शपथ लेंगे। CJI ललित ने मंगलवार सुबह SC के जजों की उपस्थिति में पर्सनली जस्टिस चंद्रचूड़ को अपने पत्र की एक कॉपी सौंपी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता 16वें CJI थे</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ देश के 16वें CJI थे। उनका कार्यकाल 22 फरवरी, 1978 से 11 जुलाई, 1985 तक यानी करीब 7 साल तक रहा। पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद उसी पद पर बैठेंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ पिता के 2 बड़े फैसलों को SC में पलट भी चुके हैं। वह बेबाक फैसलों के लिए चर्चित हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 9 नवंबर, 2022 से 10 नवंबर, 2024 तक यानी 2 साल का होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कानून मंत्री किरन रिजिजू ने 7 अक्टूबर को CJI ललित को चिट्‌ठी लिखकर उनसे उनके उत्तराधिकारी का नाम बताने की अपील की थी। परंपरा है कि मौजूदा CJI अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश तभी करते हैं, जब उन्हें कानून मंत्रालय से ऐसा करने का आग्रह किया जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस चंद्रचूड़ ने 2017-18 में पिता के दिए दो फैसले एडल्टरी लॉ और शिवकांत शुक्ला वर्सेज एडीएम जबलपुर के फैसले को पलटा था।</p>



<ol class="wp-block-list"><li>साल 1985 में तत्कालीन चीफ जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ की बेंच ने सौमित्र विष्णु मामले में IPC की धारा 497 को बरकरार रखा था। उस वक्त बेंच ने अपने फैसले में लिखा था- सामान्य तौर पर यह स्वीकार किया गया है कि संबंध बनाने के लिए फुसलाने वाला आदमी ही है न कि महिला।</li></ol>



<p class="wp-block-paragraph">2018 में इस फैसले को पलटते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा- एडल्टरी लॉ पितृसत्ता का संहिताबद्ध नियम है। उन्होंने कहा कि यौन स्वायत्तता को महत्व दिया जाना चाहिए।</p>



<ol class="wp-block-list" start="2"><li>साल 1976 में शिवकांत शुक्ला बनाम एडीएम जबलपुर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना था। उस बेंच में पूर्व CJI वाईवी चंद्रचूड़ भी थे।</li></ol>



<p class="wp-block-paragraph">2017 में सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना। इस बेंच में डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे। चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में लिखा- एडीएम जबलपुर मामले में बहुमत के फैसले में गंभीर खामियां थीं। संविधान को स्वीकार करके भारत के लोगों ने अपना जीवन और निजी आजादी सरकार के समक्ष आत्मसमर्पित नहीं कर दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं जस्टिस चंद्रचूड़</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के जज का पदभार संभाला था। सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं। वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट में भी वह बतौर जज काम कर चुके हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ दुनिया के कई बड़े विश्वविद्यालयों में लेक्चर दे चुके हैं। बतौर जज नियुक्त होने से पहले वह देश के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं। सबरीमाला, भीमा कोरेगांव, समलैंगिकता, आधार और अयोध्या केस में जज रह चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नोएडा ट्विन टावर गिराने का फैसला</p>



<p class="wp-block-paragraph">नोएडा में सुपरटेक के दोनों टावर 28 अगस्त को गिराया गया। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने टावरों को तोड़ने का आदेश दिए था। ट्विन टावर के निर्माण में नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों का उल्लंघन किया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हादिया केस</p>



<p class="wp-block-paragraph">केरल में अखिला अशोकन उर्फ हादिया (25) ने शफीन नाम के मुस्लिम लड़के से 2016 में शादी की थी। लड़की के पिता का आरोप था कि यह लव जिहाद का मामला है। उनकी बेटी की जबरदस्ती धर्म बदलवाकर शादी की गई है। इसके बाद हाईकोर्ट ने शादी रद्द कर दी और हादिया को उसके माता-पिता के पास रखने का आदेश दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने हादिया की शादी रद्द करने से संबंधित केरल हाईकोर्ट का आदेश खारिज कर दी</p>



<p class="wp-block-paragraph">निजता को मौलिक अधिकार माना</p>



<p class="wp-block-paragraph">2017 में सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना। इस बेंच में डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे। चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में लिखा- एडीएम जबलपुर मामले में बहुमत के फैसले में गंभीर खामियां थीं। संविधान को स्वीकार करके भारत के लोगों ने अपना जीवन और निजी आजादी सरकार के समक्ष आत्मसमर्पित नहीं कर दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अविवाहिता को भी अबॉर्शन का अधिकार</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रीम कोर्ट ने सभी महिलाओं को गर्भपात का अधिकार दिया, फिर चाहें वो विवाहित हों या अविवाहित। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 22 से 24 हफ्ते तक गर्भपात का हक सभी को है। बेंच की अगुआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस चंद्रचूड़ के 3 बयान, जो चर्चा में रहे</p>



<p class="wp-block-paragraph">हम नहीं चाहते कि सुप्रीम कोर्ट तारीख पे तारीख वाली अदालत बने। मुझे मामलों की फाइल पढ़ने के लिए सुबह साढ़े तीन बजे उठना पड़ता है। जज कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन वकील अपने मामले में बहस करने को तैयार नहीं होते है।<br>असहमति पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी मशीनरी को लगाना डर की भावना पैदा करता है। असहमति को राष्ट्र विरोधी कहना लोकतंत्र पर हमला है।<br>अलग विचार लोकतंत्र के प्रेशर कुकर में सेफ्टी वॉल्व की तरह है। इसे पुलिस की कड़ी ताकत से बांधा नहीं जा सकता है, नहीं तो ब्लास्ट हो जाएगा।<br>जस्टिस चंद्रचूड़ ने SC जजों के लिए CJI के सुझाए नामों पर आपत्ति</p>



<p class="wp-block-paragraph">जस्टिस चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सदस्य हैं। इन्होंने SC जजों के लिए CJI के सुझाए नामों पर आपत्ति जताई है। उनके अलावा जस्टिस नजीर ने भी 1 अक्टूबर को CJI के पत्र में अपनाए गए तरीके पर आपत्ति जताई है। हालांकि, उन्होंने इसमें किसी भी उम्मीदवार के खिलाफ किसी भी विचार का खुलासा नहीं किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">CJI उदय उमेश ललित ने 26 अगस्त, 2022 को चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली थी। CJI के तौर पर उनका कार्यकाल सिर्फ 74 दिन का होगा। ललित 6वें चीफ जस्टिस हैं जिनका कार्यकाल 100 दिन से कम होगा। क्रिमिनल लॉ विशेषज्ञ जस्टिस ललित 13 अगस्त, 2014 को बार से सुप्रीम कोर्ट के जज बने। बार से CJI बनने वाले वे दूसरे जज हैं।</p>
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