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	<title>Zindabad &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>SC में 370 पर सुनवाई, केंद्र बोला- अकबर लोन माफी मांगें क्योंकि पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगाए थे</title>
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		<pubDate>Mon, 04 Sep 2023 13:10:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में 4 सितंबर को आर्टिकल 370 पर 15वें दिन की सुनवाई जारी है। इस दौरान केंद्र सरकार ने मांग की कि नेशनल कॉन्फ्रेंस मोहम्मद अकबर लोन माफी मांगें। उन्होंने 2018 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मोहम्मद अकबर लोन ... <a title="SC में 370 पर सुनवाई, केंद्र बोला- अकबर लोन माफी मांगें क्योंकि पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगाए थे" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/hearing-on-370-in-sc-center-said-akbar-should-apologize-for-loan-because-pakistan-zindabad-slogans-were-raised-news-in-hindi/" aria-label="Read more about SC में 370 पर सुनवाई, केंद्र बोला- अकबर लोन माफी मांगें क्योंकि पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगाए थे">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2023/09/images-17.jpg" alt="" class="wp-image-393442" width="842" height="472" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में 4 सितंबर को आर्टिकल 370 पर 15वें दिन की सुनवाई जारी है। इस दौरान केंद्र सरकार ने मांग की कि नेशनल कॉन्फ्रेंस मोहम्मद अकबर लोन माफी मांगें। उन्होंने 2018 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मोहम्मद अकबर लोन हलफनामा (एफिडेविट) दायर करें। इसमें बताएं कि उनकी भारतीय संविधान में निष्ठा है। वही, कपिल सिब्बल ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से एनसी नेता मोहम्मद अकबर लोन द्वारा 2018 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कही गई बातों से सहमत नहीं हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही है। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पैरवी कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कश्मीरी पंडितों ने लगाई याचिका</p>



<p class="wp-block-paragraph">कश्मीरी पंडितों ने 3 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें याचिकाकर्ता लोन पर सवाल उठाए गए थे। &#8216;रूट्स इन कश्मीर&#8217; संगठन ने दावा किया कि लोन घोषित तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। वो विधानसभा में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगा चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">4 सितंबर को कोर्ट रूम में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के बीच ये बहस हुई</p>



<p class="wp-block-paragraph">सिब्बल- एक राजनीतिक प्रक्रिया का एक राजनीतिक समाधान जरूर होना चाहिए।<br>सीजेआई- आपके मुताबिक, संविधान के तहत कश्मीर का कोई समाधान नहीं है। अंततः यही तर्क है कि समाधान राजनीतिक होना चाहिए<br>सिब्बल- उन्होंने विधानसभा के स्थान पर संविधान सभा का स्थान ले लिया। फिर उन्होंने 356 लगा दिया और संसद ने विधानसभा बनकर अपनी सहमति दे दी।<br>सिब्बल- आर्टिकल 356 की प्रोसेस ये है कि आप असेंबली को सस्पेंड रखें। अगर आपको लगता है कि ये संभव नहीं है तो आर्टिकल 356 लगाने के बाद आप असेंबली भंग करें और चुनाव कराएं।<br>सीजेआई- आपके कहने का मतलब है कि 25 नवंबर को विधानसभा भंग करना गलत था, क्योंकि कोई सलाह नहीं ली गई।<br>सिब्बल- 356 की नौबत ही कहां आई, क्योंकि प्रशासन तो वही चला रहे थे। संवैधानिक विफलता नहीं हो सकती।<br>सीजेआई- मान लीजिए कि विधानसभा का विघटन गलत है तो परिणाम यह होगा कि 6 महीने के अंत में विधानसभा को बहाल करना होगा? मंत्रिपरिषद का गठन करना होगा। तो अपने तर्क को उसके तार्किक निष्कर्ष पर ले जाइए कि विघटन गलत था और राज्यपाल को विधानसभा को बहाल करना पड़ा। किस मामले में, क्या भारत सरकार 356 के तहत शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकती थी।<br>सिब्बल- आप कभी भी विधानसभा को तुरंत भंग नहीं करते, क्योंकि तब आपको चुनाव कराने होते हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपमानित नहीं किया जा सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1 सितंबर- आर्टिकल 370 को स्थायी बनाने का तर्क क्यों है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीनियर एडवोकेट वी गिरि ने कहा कि इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (IoA) 27 अक्टूबर 1947 का है। इसमें युवराज कर्ण सिंह (राजा हरि सिंह के बेटे) के डेक्लेरेशन पर एक नजर डालें। युवराज के पास आर्टिकल 370 समेत पूरा संविधान था। एक बार 370 हट जाए और जम्मू-कश्मीर का एकीकरण पूरा हो जाए तो संप्रभुता का प्रतीक कानून बनाने वाली शक्ति है। कानून बनाने की शक्ति संघ और राज्य के पास है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">युवराज के पास कोई भी अवशिष्ट संप्रभुता नहीं थी। अनुच्छेद 370 को स्थायी बनाने का तर्क क्यों है? क्या कोई अधिकार प्रदान करने के लिए? स्पष्ट रूप से नहीं। तो फिर किसलिए? वह कौन सा अधिकार है, जिसके बारे में याचिकाकर्ता वास्तव में चिंतित हैं? यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि 370(3) के तहत राष्ट्रपति की शक्ति का उपयोग नहीं किया जा सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आदर्श रूप से यह प्रावधान 1957 में विधानसभा के विघटन के बाद हटा दिया गया होता। ये एक अलग विषय है। इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि संघवाद के इस मुद्दे पर 4 सितंबर को बात करेंगे। संविधान सभा की सिफारिश करने की शक्ति का उद्देश्य संविधान सभा के कार्यकाल को खत्म करना था, जिसे राज्य का संविधान बनने के बाद भंग कर दिया गया था। पूरी खबर पढ़ें…</p>



<p class="wp-block-paragraph">31 अगस्त- केंद्र ने कहा- 2018 की तुलना में आतंकवादी घटनाओं में 45.2% की कमी आई</p>



<p class="wp-block-paragraph">जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य बनाने के लिए विकास हो रहा है। सरकार की ओर से SG मेहता ने कोर्ट को बताया कि 2018 से 2023 की तुलना में आतंकवादी घटनाओं में 45.2% की कमी आई है और घुसपैठ में 90% की कमी आई है। पथराव जैसे कानून और व्यवस्था के मुद्दों में 97% की कमी आई है। सुरक्षाकर्मियों के हताहत होने में 65% की कमी आई है। 2018 में पथराव की घटनाएं 1,767 थीं, जो 5 साल में अब शून्य हैं। 2018 में संगठित बंद 52 थे और अब यह शून्य है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">29 अगस्त- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा कब तक वापस देंगे?</p>



<p class="wp-block-paragraph">29 अगस्त की 12वें दिन की सुनवाई में केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि जम्मू-कश्मीर को दो अलग यूनियन टेरिटरी (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटने का कदम अस्थायी है। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश ही रहेगा, लेकिन जम्मू-कश्मीर को जल्द फिर से राज्य बना दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि जम्मू-कश्मीर को यूनियन टेरिटरी बनाने का कदम कितना अस्थायी है और उसे वापस राज्य का दर्जा देने के लिए क्या समय सीमा सोच रखी है, इसकी जानकारी दें। यह भी बताएं कि वहां चुनाव कब कराएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">28 अगस्त- CJI बोले- 35A ने गैर-कश्मीरियों के अधिकार छीने</p>



<p class="wp-block-paragraph">28 अगस्त की सुनवाई में कोर्ट ने आर्टिकल 35A को नागरिकों के अधिकारों का हनन करने वाला आर्टिकल बताया था। CJI ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 35A के तहत जम्मू-कश्मीर के लोगों को विशेषाधिकार मिले थे, लेकिन इसी आर्टिकल के कारण देश के लोगों के तीन बुनियादी अधिकार छीन लिए गए। इस आर्टिकल की वजह से अन्य राज्यों के लोगों के कश्मीर में नौकरी करने, जमीन खरीदने और बसने के अधिकारों का हनन हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">24 अगस्त- SG मेहता ने कहा- जम्मू-कश्मीर इकलौती रियासत थी, जिसका संविधान था और वो भी गलत</p>



<p class="wp-block-paragraph">10वें दिन की सुनवाई हो रही है। इसमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर इकलौती रियासत थी, जिसका संविधान था और वो भी गलत था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के 4 प्रतिनिधि थे, जिनमें लेफ्टिनेंट शेख अब्दुल्ला भी थे। कई रियासतों ने भारत के संविधान को स्वीकार करने में रजामंदी दिखाई, जबकि जम्मू-कश्मीर ने कहा कि हम संविधान बनाने में भागीदारी करेंगे। संविधान बनाते समय &#8216;एकसमान स्थिति&#8217; का लक्ष्य था। संघ के एक हिस्से को बाकी सदस्यों को मिले अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">23 अगस्त- केंद्र ने कहा- नॉर्थ-ईस्ट से नहीं छीनेंगे स्पेशल स्टेटस: याचिकाकर्ता ने जताई थी आशंका, CJI बोले &#8211; जब केंद्र गारंटी दे रहा, तो हमें संदेह कैसा</p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्र ने 9वें दिन की सुनवाई (23 अगस्त) के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसका नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को मिले स्पेशल स्टेटस को खत्म करने का कोई इरादा नहीं है। केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वकील मनीष तिवारी की दलीलों के जवाब में यह बात कही। दरअसल तिवारी ने कहा था, जम्मू-कश्मीर पर लागू संविधान के भाग 21 में निहित प्रावधानों के अलावा नॉर्थ-ईस्ट को नियंत्रित करने वाले अन्य विशेष प्रावधान भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जब केंद्र ने कहा है कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है, तो हमें संदेह कैसा?</p>



<p class="wp-block-paragraph">22 अगस्त- याचिकाकर्ता की दलील &#8211; 1957 में जम्मू-कश्मीर का संविधान बनने तक था आर्टिकल 370</p>



<p class="wp-block-paragraph">आर्टिकल 370 की सुनवाई के 8वें दिन, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दिनेश द्विवेदी ने तर्क दिया- कश्मीर में जो आर्टिकल 370 लागू की गई वह 1957 में जम्मू-कश्मीर का संविधान बनने तक थी। संविधान सभा भंग होते ही यह अपने आप खत्म हो गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पर CJI ने कहा- आर्टिकल 370 की ऐसी कौन सी विशेषताएं हैं जो दर्शाती हैं कि जम्मू-कश्मीर संविधान बनने के बाद इसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसका मतलब है भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर पर लागू होने के मामले में 1957 तक ही स्थिर रहेगा। इसलिए, आपके अनुसार, भारतीय संविधान में कोई भी आगे का विकास जम्मू-कश्मीर पर बिल्कुल भी लागू नहीं हो सकता है। इसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">17 अगस्त: चीफ जस्टिस और एडवोकेट दवे के बीच आर्टिकल 370 के अस्तित्व को लेकर चर्चा</p>



<p class="wp-block-paragraph">आर्टिकल 370 की सुनवाई के सातवें दिन, सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे, शेखर नाफड़े और दिनेश द्विवेदी ने पीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। दवे ने दलील दी कि आर्टिकल 370 को आर्टिकल 370 (3) का इस्तेमाल करके खत्म नहीं किया जा सकता था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पर कोर्ट ने कहा &#8211; आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने में अगर संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है तभी इसे चुनौती दी जा सकती है। हम इस आधार पर बहस नहीं कर सकते कि इसको हटाने के पीछे सरकार की मंशा क्या थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">16 अगस्त: दुष्यंत दवे ने कहा- संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं</p>



<p class="wp-block-paragraph">आर्टिकल 370 की सुनवाई के छठवें दिन जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के वकील राजीव धवन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में परिवर्तित करते समय संविधान के अनुच्छेद 239ए का पालन नहीं किया गया। अनुच्छेद 239ए के मुताबिक कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्थानीय विधानसभाओं या मंत्रिपरिषद या दोनों के निर्माण की शक्ति संसद के पास है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए नहीं किया जा सकता। 2019 में सत्तारूढ़ पार्टी ने अपने घोषणापत्र में कहा था- संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">10 अगस्त : कोर्ट ने कहा &#8211; यह कहना मुश्किल कि 370 उसे विशेष दर्जा प्रदान करता था</p>



<p class="wp-block-paragraph">﻿आर्टिकल 370 की सुनवाई के पांचवें दिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अक्टूबर 1947 में पूर्व रियासत के विलय के साथ जम्मू-कश्मीर की संप्रभुता का भारत को समर्पण पूरा हो गया था, और यह कहना मुश्किल था कि 370 जो उसे विशेष दर्जा प्रदान करता था, स्थायी था। यह नहीं कहा जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर में संप्रभुता के कुछ तत्वों को अनुच्छेद 370 के बाद भी बरकरार रखा गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">9 अगस्त: विलय के समय जम्मू-कश्मीर किसी अन्य राज्य की तरह नहीं था, अलग संविधान था</p>



<p class="wp-block-paragraph">आर्टिकल 370 की सुनवाई के चौथे दिन सीनियर एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा क&#x200d;ि विलय के समय जम्मू-कश्मीर किसी अन्य राज्य की तरह नहीं था। उसका अपना संविधान था। हमारे संविधान में विधानसभा और संविधान सभा दोनों को मान्यता प्राप्त है। मूल ढांचा दोनों के संविधान से निकाला जाएगा। डॉ. अंबेडकर ने संविधान के संघीय होने और राज्यों को विशेष अधिकार की बात कही थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">8 अगस्त : कपिल सिब्बल बोले- 370 में आप बदलाव नहीं कर सकते, हटाना तो भूल ही जाइए</p>



<p class="wp-block-paragraph">8 अगस्त को आर्टिकल 370 की सुनवाई के तीसरे दिन चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आर्टिकल 370 खुद कहता है कि इसे खत्म किया जा सकता है। इस पर सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा था, 370 में आप बदलाव नहीं कर सकते, इसे हटाना तो भूल ही जाइए। फिर CJI ने कहा- आप सही हैं, इसलिए सरकार के पास स्वयं 370 में बदलाव करने की कोई शक्ति नहीं है। सिब्बल बोल- ये व्याख्या (अपने शब्दों में समझाना, इंटरप्रिटेशन) करने वाला क्लॉज है, यह संविधान में संशोधन करने वाला क्लॉज नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">3 अगस्त : सिब्बल बोले &#8211; 370 को छेड़ा नहीं जा सकता, जवाब मिला- आर्टिकल का सेक्शन C ऐसा नहीं कहता</p>



<p class="wp-block-paragraph">आर्टिकल 370 की सुनवाई के दूसरे दिन याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि आर्टिकल 370 को छेड़ा नहीं जा सकता। इसके जवाब में जस्टिस खन्ना ने कहा कि इस आर्टिकल का सेक्शन (c) ऐसा नहीं कहता। इसके बाद सिब्बल ने कहा, मैं आपको दिखा सकता हूं कि आर्टिकल 370 स्थायी है। इस पर CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, अभी तक जम्मू-कश्मीर की सहमति की आवश्यकता है और अन्य राज्यों के लिए विधेयक पेश करने के लिए केवल विचारों की जरूरत है।</p>
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