हरिद्वार मेला प्राधिकरण के गठन की होने लगी अब जरूरत महसूस

दैनिक भास्कर समाचार सेवा

हरिद्वार। हरिद्वार में अब जिस तरह से मेलों और स्नान पर्वों पर आए दिन भीड़ बढ़ने लगी है उसके बाद एक बार फिर से यहां स्थायी मेला प्राधिकरण के गठन की जरूरत महसूस की जाने लगी है। निशंक सरकार ने मेला प्राधिकरण का गठन किया था। लेकिन उसके बाद किसी सरकार ने इसकी सुध नहीं ली।

निशंक सरकार के बाद किसी ने नहीं ली इस ओर सुध, बढ़ती भीड़ नियंत्रण को है जरूरी

हरिद्वार मेलों और पर्वों की नगरी है। वर्षभर में इन आयोजनों में लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। इसके अतिरिक्त भी औसतन दस हजार श्रद्धालु, यात्री भी प्रतिदिन कर्मकांड व अन्य जरुरतों से हरिद्वार आते हैं। वर्ष में दो बार लगने वाले कांवड़ मेलों में आनेवाले कांवड़ियों की संख्या भी इसमें जोड़ लें तो प्रतिवर्ष हरिद्वार आने वाले यात्रियों, पर्यटकों की संख्या करोड़ों में पहुंचती है।

इस बार तो चल रहे कांवड़ मेले में ही करीब चार करोड़ कांवड़ियों के आने का अनुमान है। जिसका आंकड़ा फिलहाल सवा दो करोड़ के करीब पहुंच चुका है। जबकि अभी मेले के दो दिन शेष हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद तो छोटे स्नान पर्वों पर भी हरिद्वार में बीस-तीस लाख श्रद्धालु, पर्यटक आमतौर पर जुट रहे हैं। पिछले दिनों अप्रैल से जून के तीन महीनों में ही करीब तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटकों का हरिद्वार आगमन हुआ। बुद्ध पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या, गंगा दशहरा पर भीड़ के नये रिकार्ड बने।

हरिद्वार में लगातार भीड़ रहने के कारण अब मेलों, स्नान पर्वों की व्यवस्थाओं के लिए स्थायी मेला प्राधिकरण की जरूरत महसूस की जाने लगी है। जिससे बार-बार व्यवस्थाओं को जुटाने की जरूरत न रहे। एक वक्त हरिद्वार विकास प्राधिकरण को भंग कर इसके स्थान पर मेला प्राधिकरण के गठन की मांग भी उठी। 2009 में राज्य की तत्कालीन निशंक सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए हरिद्वार के सीनियर भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी को उपाध्यक्ष बनाते हुए मेला प्राधिकरण की घोषणा कर दी थी। 2014 तक सीसीआर में मेला प्राधिकरण का कार्यालय भी खुला रहा। लेकिन इस दौरान न इसका ढांचा बना न नियमावली। बाद की किसी सरकार ने इसमें रूचि नहीं ली और हरिद्वार के लिए स्थाई मेला प्राधिकरण हवाहवाई हो गया।

मेलों के लिए ही बना सीसीआर

मेलों की स्थाई व्यवस्था के लिए ही अर्धकुंभ 2004 में एनडी तिवारी सरकार ने रोड़ी बेलवाला में पौने चार करोड़ की लागत से बहुमंजिले केंद्रीय नियंत्रण कक्ष का निर्माण कराया था। उद्देश्य यह था कि सभी अधिकारी यहां बैठें और सभी मेलों की स्थाई व्यवस्था और संचालन यहां से हो। लेकिन करोड़ों के सीसीआर का उपयोग प्रायः कुंभ, अर्धकुंभ में ही होता है। कुंभ का स्थाई कार्यालय भी यहां है। इसके अतिरिक्त नगर के विभिन्न क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी का नियंत्रण केंद्र और नगर पुलिस अधीक्षक का कार्यालय व सिटी कंट्रोल रूम यहां बना है।

निश्चित ही अब जिस अनुपात से हरिद्वार में भीड़ बढ़ने लगी है उसके लिए यहां मेलों और पर्वों के लिए स्थाई व्यवस्था की आवश्यकता है। पिछले दिनों कांवड़ को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसपर विचार भी हुआ है। हरिद्वार के लिए स्थाई मेला प्राधिकरण का गठन हो इसके लिए में मुख्यमंत्री जी से चर्चा करुंगा।

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