विद्रोही चम्बल घाटी में चरितार्थ हो रही चिराग तले अँधेरे की कहावत

चकरनगर से होकर निकले-चम्बल एक्सप्रेस वे:- सन्तोष विद्रोही

भास्कर समाचार सेवा

चकरनगर/इटावा। चम्बल घाटी समग्र विकास आन्दोलन के प्रभारी पत्रकार संतोष विद्रोही ने चम्बल घाटी के प्रमुख भू-भाग चकरगर परिक्षेत्र का स्थानीय सांसद के साथ केन्द्र एव राज्य सरकार द्वारा घोर उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के नाम पर मध्यप्रदेश से बनाये जा रहे 404 किलोमीटर लंबे चंबल एक्सप्रेस-वे के लाभ से चम्बल घाटी के इस प्रमुख हिस्से (चकरनगर) को जानबूझकर वंचित करने का स्थानीय सांसद एवं केन्द्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। चम्बल घाटी परिक्षेत्र चकरनगर के साथ किये जा रहे सौतेले व्यवहार से दुःखी सन्तोष विद्रोही ने कहा कि सांसद ने पहल करके अपने पैत्रिक गाँव नगरिया सरावा को कोटा, कानपुर को सीधे दिल्ली-मुंबई से जोड़ने वाले इस चम्बल एक्सप्रेस वे से जुड़वा लिया लेकिन लेकिन सर्वे के बाद चकरनगर क्षेत्र को इसके लाभ से क्योंकर वंचित किया गया इसका जबाव सांसद को देना ही पडे़गा ? एक बार फिर ठेंगा दिखा दिया गया।उन्होंने उत्तर प्रदेश के इटावा एवं आगरा, मध्य प्रदेश के भिण्ड एवं मुरैना, तथा राजस्थान के भरतपुर एवं धौलपुर के विषम भौगोलिक स्थिति से आच्छादित 38000 वर्गकिलोमीटर के भू-भाग के रुप में पहचाने जाने वाली चम्बल घाटी के प्रमुख भू-भाग विकास खण्ड चकरनगर के साथ केन्द्र सरकार द्वारा किये जा रहे सौतेले व्यवहार पर चम्बल घाटी समग्र विकास आन्दोलन के प्रभारी संतोष विद्रोही ने इस मुद्दे को लेकर आन्दोलन तेज करने की धमकी देते हुए शायराना अंदाज में कहा कि “याचना नहीं अब रण होगा,संग्राम महा भीषण होगा”। उन्होंने पत्रकारों के बीच कहा कि चम्बल घाटी परिक्षेत्र चकरनगर में “चिराग तले अंधेरा” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।चम्बल घाटी समग्र विकास को लेकर विगत तीन दशकों के आन्दोलन के बाद भी केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा इस क्षेत्र की जानबूझकर उपेक्षा की जा रही है।उन्होंने चम्बल घाटी परिक्षेत्र चकरनगर के साथ किये जा रहे सौतेले व्यवहार के कई प्रमाण प्रस्तुत करते हुए कहा कि लग-भग तीन दशकों से तहसील मुख्यालय होने के बावजूद कस्बा चकरनगर को नगर पंचायत नहीं बनाया गया,जबकि इसके लिए जिला-प्रशासन ने शासन को कई बार प्रस्ताव भी भिजवाये।यही नहीं ब्रह्माण्ड के केन्द्र कहे जाने वाले पचनद पर वर्ष वर्ष 2018 में योगी सरकार से इस पर बाँध बनाये जाने को हरी झंडी मिलने के बाद इस परियोजना से बुंदेलखंड, कानपुर देहात, औरैया और जालौन की लगभग 6100 हैक्टेयर कृषि भूमि को तो सिंचित किया जायेगा,लेकिन चकरनगर विकास खण्ड की धरती प्यासी की प्यासी ही रहेगी ।इसके अतिरिक्त कोई भी योजना हो अथवा परियोजना उससे लाभ से इस क्षेत्र को जानबूझकर कर महरूम रखा जा रहा है।उन्होंने चम्बल क्षेत्र की जनता को जाग्रत करने के लिए शीध्र जन-जागरण अभियान चलाने की घोषणा करते हुए चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता यह मान बैठै है कि धर्म एवं जाति में बाँटकर इस क्षेत्र की जनता को आसानी से छला जा सकता है।लेकिन वह यह ना भूलें,यह चम्बल घाटी है,यहाँ के लोग बगावत पर उतारूँ होते है,तो सरकारों की चूल्हें हिल जाती हैं।

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