महिला फुटबॉल टीम के असिस्टेंट कोच हुए बर्खास्त, यौन शोषण का लगा आरोप

नॉर्वें में अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए भारतीय टीम के असिस्टेंट कोच एलेक्स एम्ब्रोस को बर्खास्तर कर दिया गया है। एम्ब्रोस पर कुछ दिन पहले एक महिला खिलाड़ी ने गलत व्यवहार करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद भारतीय फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने तुरंत भारत वापस देने के निर्देश दिए थे। साथ ही जांच के आदेश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठिन कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (COA) के मुख्य सदस्य डॉ एसवाई कुरैशी ने कोच को बर्खास्त करने के संबंध में सोशल मीडिया पर जानकारी दी है। कुरैशी ने अपने पोस्ट में कहा, अंडर-17 महिला टीम के असिस्टेंट कोच एलेक्स एम्ब्रोस को यौन शोषण के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। नियमों के मुताबिक उन पर आगे की करवाई की जाएगी।

अंडर-17 वर्ल्ड कप भारत में

इस साल 11 से 30 अक्टूबर से भारत में खेले जाने वाले वर्ल्ड कप से पहले भारतीय अंडर-17 महिला टीम स्वीडिश मुख्य कोच थॉमस डेनरबी की देखरेख में यूरोप का दौरा कर रही है।नॉर्डिक ओपन टूर्नामेंट का आयोजन 1 जुलाई से 7 तक होगा, जिसमें भारतीय टीम पहली बार हिस्सा ले रही है।

पिछले महीने साइक्लिस्ट ने भी लगाए थे कोच पर आरोप

पिछले महीने स्लोवेनिया में कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए भारतीय महिला टीम की एक साइक्लिस्ट ने भी चीफ कोच आरके शर्मा पर बदसलूकी का आरोप लगाया था। उसके बाद SAI ने तुरंत एक्शन लेते हुए कोच को कैंप से वापस बुला लिया। इसके अलावा वर्ल्ड कप में मेडल जीतने वाली महिला जिम्नास्ट ने भी एक कोच पर मेडिकल के दौरान बिना इजाजत के वीडियो बनाने के आरोप लगाए थे। इन सभी मामलों की अभी जांच चल रही है।

तीन साल में यौन उत्पीड़न की 17 शिकायतें मिलीं

केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर दिसंबर, 2021 को लोकसभा में बताया था कि साल 2018 से अब कि SAI को यौन शोषण की 17 शिकायतें मिलीं। इनमें सबसे अधिक सात शिकायतें साल 2018 में और छह 2019 में आईं। इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले साल आरटीआई से जानकारी मांगी थी, जिसके मुताबिक, साई के अंतर्गत आने वाले देश के 24 अलग-अलग संस्थानों में पिछले 10 साल में महिलाओं के साथ यौन शोषण के 45 मामले सामने आए।

इनमें से सबसे ज्यादा 29 मामले कोच और खिलाड़ियों के बीच के हैं। इस पर साई के पूर्व डायरेक्टर जनरल ने कहा था कि यौन शोषण के आंकड़ों की संख्या इससे कहीं बहुत अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों में महिला खिलाड़ी शिकायत दर्ज नहीं करा पाती हैं।

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