हिंसा पर ‘बुद्धिजीवी’ वर्ग नाराज

सीएए पर हिंसा करने वालों के खिलाफ राष्ट्रपति के समक्ष उठाई कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली। न्यायपालिका, रक्षा एवं सार्वजनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों की 154 प्रबुद्ध हस्तियों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इन हस्तियों ने कोविंद को शुक्रवार को एक पत्र लिखकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा की अपील करते हुए सीएए के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में कोविंद से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने यहां बताया कि कुछ राजनीतिक तत्वों के दबाव में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में 11 पूर्व न्यायाधीश, प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी एवं पूर्व राजनयिक समेत 72 हस्तियां, रक्षा क्षेत्र से जुड़े 56 पूर्व अधिकारी, शिक्षा एवं चिकित्सा जगत की कई हस्तियां शामिल हैं।
सीएए विरोधी राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की याचिका खारिज: लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने नागरिकता संशोधन कानून लागू करने का विरोध करने वाले राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मुनीश्वरनाथ भंडारी और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता अशोक पांडे की याचिका को खारिज करते हुए दिया। याचिका में कहा गया कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री खुलेआम सीएए का विरोध कर रहे हैं और राज्यों में इसे न लागू करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने की कार्रवाई करे।
याची का तर्क था कि संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने के लिए हर राज्य बाध्य है और इसे लागू करने से इंकार नहीं कर सकते। याची का यह भी कहना था कि चूंकि केंद्र सरकार इसके बावजूद भी ऐसे राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने की कार्रवाई नहीं कर रही है, लिहाजा अदालत द्वारा केंद्र सरकार को इसके लिए निर्देश दिया जाए।

टूट जाएगा हिंदुओं के सब्र का बांध: विहिप

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नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में किए जा रहे कथित प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए शुक्रवार को चेतावनी दी कि इस कानून के विरोध के बहाने हिंदुओं पर हमले नहीं रुके तो समाज का सब्र टूट सकता है। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव मिलिंद परांडे ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में किए जा रहे कथित प्रदर्शनों की आड़ में हिंसक वारदातें देश भर की जा रहा है, वह अब असहनीय बनता जा रहा है। झारखंड के लोहरदगा जैसे क्षेत्रों में हिंदुओं पर सरेआम प्राणघातक हमले हो रहे हैं। राजधानी दिल्ली भी हिंसा से अछूती नहीं रही। इन कथित प्रदर्शनों के चलते दिल्ली में लोगों द्वारा के महत्वपूर्ण मार्गों एवं पार्कों पर अनधिकृत न सिर्फ कब्जे हो रहे हैं, बल्कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में गैर मुसलमानों का जीना भी दूभर हो चुका है।

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